सिलिकॉन वैली में धड़कता है भारतीय संगीत का दिल

– सुनील कुमार गुप्ता

बैंगलुरु। भारत की आईटी राजधानी और सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले बैंगलुरु में एक ऐसी जगह है, जहां कदम रखते ही आधुनिक तकनीक और सदियों पुरानी सांगीतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह स्थान है इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम (IME)—देश का पहला इंटरैक्टिव संगीत संग्रहालय, जो भारतीय संगीत की जड़ों, उसके विकास, विविधताओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यहां पहुंचकर केवल संगीत सुनाई नहीं देता, बल्कि उसे महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि यह संग्रहालय हर संगीत प्रेमी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन जाता है।

10 वर्षों की मेहनत से साकार हुआ अनूठा सपना

करीब 50 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल, तीन मंजिलों और नौ कला दीर्घाओं (गैलरी) में फैला यह संग्रहालय वर्षों की शोध, तकनीकी नवाचार और संगीत विशेषज्ञों की अथक मेहनत का परिणाम है। लगभग एक दशक तक संगीत मर्मज्ञों, इतिहासकारों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर इसे तैयार किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से परिचित हो सकें।

जेपी नगर के सातवें ब्लॉक स्थित ब्रिगेड मिलेनियम एवेन्यू में स्थापित इस संग्रहालय का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के उद्भव, विकास और उसके सांस्कृतिक महत्व के प्रति सम्मान जगाना है।

जहां संगीत को देखा भी जा सकता है और महसूस भी

आईएमई की नौ गैलरियां भारतीय संगीत की विविध विधाओं—लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, बॉलीवुड, पॉप, इंडी और समकालीन संगीत—को अत्यंत रोचक और आधुनिक तरीके से प्रस्तुत करती हैं। ऑडियो-विजुअल तकनीक और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से आगंतुक न केवल विभिन्न शैलियों को सुन सकते हैं, बल्कि स्वयं संगीत रचने और वाद्ययंत्रों के साथ प्रयोग करने का अवसर भी प्राप्त करते हैं।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लिए यह संग्रहालय सीखने और आनंद लेने का अनूठा माध्यम है। यहां संगीत के नौ रस, विभिन्न घरानों, रागों, गायन के समय और महान संगीतकारों के योगदान को सहज भाषा में समझाया गया है।

स्टार गैलरी में सजे भारतीय संगीत के अमूल्य खजाने

संग्रहालय की सबसे आकर्षक जगहों में से एक है स्टार गैलरी, जहां भारतीय संगीत के महान उस्तादों और कलाकारों से जुड़ी दुर्लभ धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। यहां उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की शहनाई, जिसे उनके परिवार ने संग्रहालय को भेंट किया, विशेष आकर्षण का केंद्र है।

इसके अलावा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का तंबूरा, पंडित भीमसेन जोशी और पंडित जसराज की पोशाकें तथा पंडित रविशंकर सहित भारतीय संगीत के लगभग सौ महान कलाकारों की जानकारी, रिकॉर्डिंग और योगदान को डिजिटल माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

ग्रामोफोन से मोबाइल तक संगीत की यात्रा

‘रीचिंग आउट’ गैलरी संगीत रिकॉर्डिंग तकनीक के विकास की रोमांचक कहानी सुनाती है। यहां ग्रामोफोन, रेडियो, सीडी, बाइस्कोप, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तक के सफर को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। यह अनुभाग बताता है कि तकनीक ने किस प्रकार संगीत को घर-घर तक पहुंचाया।

गीतों में छिपा इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की गूंज

स्टोरीज़ थ्रू सॉन्ग्स’ गैलरी में हिंदी फिल्म संगीत के विभिन्न दौरों की झलक देखने को मिलती है। वहीं ‘सॉन्ग्स ऑफ स्ट्रगल’ अनुभाग यह दर्शाता है कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बदलाव का भी प्रभावशाली साधन रहा है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को प्रेरित करने वाले गीतों, विरोध और जनजागरण की धुनों को यहां सहेजा गया है। विशेष रूप से ‘वंदे मातरम्’ के 35 से अधिक संस्करण, महात्मा गांधी द्वारा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी को लिखा गया पत्र, तथा देशभक्ति गीतों का समृद्ध संकलन इस गैलरी को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।

लोक परंपराओं से लेकर रामकथा तक संगीत का विस्तार

संग्रहालय यह भी दर्शाता है कि भारतीय समाज में जन्म, विवाह, त्योहार, श्रम, उत्सव और यहां तक कि शोक के अवसरों पर भी गीतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रामकथा सुनाती लकड़ी की कांवड़ किताब, कठपुतली कला, लोक भित्ति चित्र और लोक परंपराओं से जुड़े प्रदर्शन इस बात का प्रमाण हैं कि संगीत भारतीय जीवन का अभिन्न अंग रहा है।

एक विशेष कोना महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित है, जहां उनके विचारों और संगीत से जुड़े योगदान को रेखांकित किया गया है।

100 से अधिक वाद्ययंत्रों का जीवंत संसार

इंस्ट्रूमेंट गैलरी में देशभर के 100 से अधिक पारंपरिक और आधुनिक वाद्ययंत्र प्रदर्शित किए गए हैं। यहां मयूर वीणा, नाग के आकार का वाद्य, पैरों से बजाया जाने वाला हारमोनियम, ब्रास बैंड के उपकरण, वायलिन और अनेक दुर्लभ यंत्रों की बनावट, इतिहास और वादन शैली को विस्तार से समझाया गया है।

‘लिविंग ट्रेडिशन’ गैलरी में श्रुति, राग, ताल, ध्रुपद, ख्याल और घराने जैसी भारतीय शास्त्रीय संगीत की मूल अवधारणाओं को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

इंडी पॉप, रॉक और आधुनिक संगीत की भी झलक

यह संग्रहालय केवल परंपरा तक सीमित नहीं है। इंडी पॉप, रॉक और हाइब्रिड संगीत के विकास, उनके प्रमुख कलाकारों और सांस्कृतिक प्रभावों को भी यहां स्थान दिया गया है। दलेर मेहंदी की पोशाक, इंटरैक्टिव टच स्क्रीन और मिनी थिएटर जैसी आधुनिक प्रस्तुतियां युवाओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

साउंड गार्डन: जहां पत्थर और धातु भी गाने लगते हैं

आईएमई का साउंड गार्डन अपने आप में अनूठा अनुभव है। यहां आगंतुक ध्वनि, कंपन और प्राकृतिक वस्तुओं के माध्यम से संगीत के विज्ञान को समझ सकते हैं। यह जानकर आश्चर्य होता है कि पत्थरों, धातुओं और अन्य सामान्य वस्तुओं से भी मधुर संगीत उत्पन्न किया जा सकता है।

हर भारतीय को एक बार अवश्य जाना चाहिए

आज जब सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर लगातार बहसें हो रही हैं, ऐसे समय में इंडियन म्यूजिक एक्सपीरियंस म्यूजियम भारतीय संगीत के संरक्षण और दस्तावेजीकरण का एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह केवल संग्रहालय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा से जुड़ने का अवसर है।

यदि आप कभी बैंगलुरु जाएं, तो इस संग्रहालय के लिए पर्याप्त समय निकालें। यहां जल्दीबाजी में नहीं, बल्कि शांत मन और खुले हृदय से जाइए। तब आप महसूस करेंगे कि भारतीय संगीत केवल सुरों का मेल नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की जीवंत धड़कन है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का बड़ा फैसला, डिग्री और मार्कशीट पर अब लिखा जाएगा ‘भारत’

 जबलपुर

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का रविवार को होने वाला दीक्षा समारोह इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति के साथ-साथ एक ऐतिहासिक परिवर्तन के कारण भी विशेष बन गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार अपनी उपाधियों, अंकसूची, स्वर्ण पदक और प्रमाण-पत्रों पर ‘इंडिया’ के स्थान पर आधिकारिक रूप से ‘भारत’ शब्द अंकित किया है। भारतीय पहचान और सांस्कृतिक अस्मिता को केंद्र में रखकर किए गए इस परिवर्तन से दीक्षा समारोह को नई पहचान मिलेगी।
आधिकारिक दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द की शुरुआत

कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय ने जनवरी, 2025 से अपने पत्राचार और आधिकारिक दस्तावेजों में ‘भारत’ शब्द का उपयोग शुरू कर दिया था। बता दें, 21 जून को आयोजित 36वें दीक्षा समारोह की राज्यपाल व कुलाधिपति मंगुभाई पटेल अध्यक्षता करेंगे। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता और परंपरा

प्रो. वर्मा ने बताया कि भारतीय पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की इस पहल को व्यापक सराहना भी मिली। उन्हें प्रयागराज महाकुंभ में सम्मानित भी किया गया था। उपाधियों और प्रमाण पत्रों पर ‘भारत’ अंकित करना विश्वविद्यालय की भारतीयता के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण कदम है। प्रो. वर्मा के अनुसार इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने सबसे पहले अपने आधिकारिक दस्तावेज में ‘भारत’ शब्द का प्रयोग शुरू किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।

 

“एक साँप… जो सिर्फ अपनी जान बचाना चाहता था”

“एक साँप… जो सिर्फ अपनी जान बचाना चाहता था”

ज़रा इस दृश्य की कल्पना कीजिए…

एक साँप धीरे-धीरे रास्ता बदलकर जंगल या किसी सुरक्षित जगह की ओर जा रहा था।

उसने किसी का पीछा नहीं किया, किसी पर हमला नहीं किया और न ही किसी को डराने की कोशिश की।

उसकी बस एक ही कोशिश थी—किसी तरह इंसानों से दूर निकल जाए और अपनी जान बचा ले।

लेकिन तभी एक व्यक्ति उसके सामने आ गया।

उसने  बार-बार क्यों उसे जाने देने के बजाय बार-बार लात मारकर, डंडे से डराकर और उसे उसी दिशा में धकेलना शुरू कर दिया जहाँ से वह बचकर निकलना चाहता था।

अब ज़रा खुद से कुछ सवाल पूछिए।

अगर कोई जीव आपसे दूर जाना चाहता है, तो क्या उसे रोकना सही है?

क्या किसी बेजुबान जानवर को सिर्फ मनोरंजन के लिए डराना या परेशान करना इंसानियत कहलाता है?

क्या यही एक सभ्य समाज की पहचान है कि जो कमजोर हो, जो बोल न सके, उसे सताया जाए?

हम अपने बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?

क्या हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि किसी लाचार जीव को तंग करना बहादुरी है?

या फिर यह कि हर जीव के जीवन का सम्मान करना ही असली संस्कार है?

अक्सर लोग कहते हैं कि जंगल के जानवर खतरनाक होते हैं।

लेकिन सच्चाई यह है कि ज़्यादातर जंगली जानवर इंसानों से बचकर निकलना चाहते हैं।

वे तब आक्रामक हो सकते हैं जब उन्हें लगे कि उनकी जान खतरे में है या उन्हें निकलने का रास्ता नहीं दिया जा रहा।

अब सोचिए…

अगर उस साँप ने डर और दर्द में किसी को काट लिया होता, तो अगले ही पल लोग क्या कहते?

“साँप बहुत खतरनाक था…”

लेकिन शायद ही कोई यह पूछता कि उसे बार-बार उकसाया किसने?

यही तो सबसे बड़ा सवाल है।

कई बार हादसे जानवर नहीं, बल्कि इंसानों की लापरवाही और क्रूरता पैदा करती है।

एक सभ्य समाज की पहचान उसकी ताकत से नहीं होती, बल्कि उसकी संवेदनशीलता से होती है।

सभ्य समाज वह है जहाँ इंसान सिर्फ इंसानों का ही नहीं, बल्कि हर जीव के जीवन का सम्मान करे।

अगर रास्ते में कोई साँप, पक्षी, कुत्ता या कोई भी जंगली जीव दिखाई दे, तो सबसे समझदारी का काम यही है कि उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उसे निकल जाने दें। यदि ज़रूरत हो, तो स्थानीय वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।

याद रखिए…

इंसान होने का मतलब सिर्फ बोलना या सोच पाना नहीं है।

इंसान होने का मतलब है—दया, संवेदना और ज़िम्मेदारी।

क्योंकि किसी बेजुबान को दर्द देना कभी बहादुरी नहीं हो सकती।

और आप बताइए—क्या सभ्य समाज में किसी बेबस जीव को इस तरह बार-बार परेशान करना सही है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर लिखिए।

दमोह के डायल-112 हीरोज 1 वर्ष 5 माह के मासूम को सकुशल दस्तयाब कर माँ के सुपुर्द किया

भोपाल

दमोह जिले के थाना हटा क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्परता, संवेदनशीलता एवं तकनीकी समन्वय से एक 1 वर्ष 5 माह मासूम बच्चे को सकुशल दस्तयाब कर उसकी माँ के सुपुर्द किया गया। समय पर की गई इस कार्रवाई से संभावित अनहोनी को टालते हुए बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी।

19 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना हटा क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने 1 वर्ष 5 माह के बच्चे को घर से साथ ले गया है। सूचना में बताया गया कि वह शराब के नशे में है तथा फोन पर परिजनों को लगातार धमकी दे रहा है और भ्रामक जानकारी एवं गलत लोकेशन बता रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल थाना हटा क्षेत्र में तैनात डायल-112 डायल 112 वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

सूचना प्राप्त होते ही डायल-112 वाहन को मौके पर रवाना किया गया तथा घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों एवं पीसीआर को भी दी गई।

मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री संजय आठिया एवं पायलट श्री हरेंद्र अहिरवार ने जानकारी एकत्रित कर बच्चे एवं उसके पिता की तलाश प्रारंभ की। चूँकि संबंधित व्यक्ति लगातार गलत लोकेशन बता रहा था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम स्टाफ प्रधान आरक्षक श्री नागेन्द्र तिवारी एवं आरक्षक श्री जुनैद मिर्जा द्वारा साइबर सेल के प्रधान आरक्षक श्री सौरभ टंडन के सहयोग से तकनीकी माध्यमों से लोकेशन ट्रेस की गई।

साइबर सेल से प्राप्त लोकेशन के आधार पर डायल-112 टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति एवं मासूम बच्चे को सकुशल दस्तयाब कर लिया। इसके उपरांत बच्चे को सुरक्षित उसकी माँ के सुपुर्द किया गया।

डायल-112 जवानों, कंट्रोल रूम स्टाफ एवं साइबर सेल के उत्कृष्ट समन्वय एवं त्वरित कार्रवाई से एक मासूम बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा संवेदनशील मामलों में तकनीक एवं मानवीय दृष्टिकोण के समन्वय से आमजन की सुरक्षा हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

इंदौर पुलिस ने 48 घंटे में चोरी का किया खुलासा

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेशभर में संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण तथा अपराधियों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी  कार्रवाई के तहत इंदौर पुलिस को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। पुलिस थाना लसूड़िया की टीम ने कार शोरूम में हुई लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपये की सनसनीखेज चोरी का मात्र 48 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी गई संपूर्ण संपत्ति बरामद किया है।

17 जून को इंदौर स्थित पटेल मोटर्स मारुति कार शोरूम के ऑपरेशन मैनेजर सुरेन्द्र चौधरी द्वारा थाना लसूड़िया में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि शोरूम के केबिन में रखे एप्पल आईफोन, सोने के आभूषण तथा चांदी के सिक्के अज्ञात व्यक्ति द्वारा चोरी कर लिए गए हैं। शिकायत पर थाना लसूड़िया में प्रकरण दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।

घटना की गंभीरता को देखते हुए इंदौर पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध तथ्यों का गहन विश्लेषण किया। जांच के दौरान संदेह के आधार पर शोरूम में कार्यरत कर्मचारी लक्की बोरासी (19 वर्ष) निवासी बड़ी ग्वालटोली, इंदौर को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह शोरूम में साफ-सफाई का कार्य करता था तथा उसे शोरूम की गतिविधियों एवं सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी विश्वास का लाभ उठाकर उसने पहले एप्पल आईफोन चोरी किया तथा बाद में अवसर पाकर शोरूम मालिक के केबिन स्थित लॉकर से मंदिर का सोने का छत्र एवं हीरे जड़ा मुकुट सहित अन्य कीमती सामग्री चोरी कर ली।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लगभग 1 किलो 426 ग्राम वजनी सोने का छत्र, हीरे जड़ा मुकुट, 12 चांदी के सिक्के, एक एप्पल आईफोन तथा एक मोटरसाइकिल सहित  लगभग 2 करोड़ 50 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की  है।

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने अपने महंगे शौक एवं ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस द्वारा आरोपी का रिमांड प्राप्त कर उससे अन्य अपराधों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की गई यह त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई अपराध नियंत्रण, वैज्ञानिक विवेचना तथा नागरिकों की संपत्ति की सुरक्षा के प्रति पुलिस की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है। प्रदेश में संपत्ति संबंधी अपराधों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

दहेज की मांग ने तोड़ा रिश्ता, वरमाला के बाद बारात लेकर लौट गया दूल्हा

 खुरई 

खुरई में बेगमगंज से आई बारात दहेज की मांग पूरी नहीं होने के कारण वापस लौट गई। वरमाला के बाद तीन बहनों में सबसे बड़ी निशा रात भर फेरों का इंतजार करती रही, लेकिन वर पक्ष मारपीट कर भाग गया था। अब निशा बंसल इंसाफ चाहती है, उसे उस लड़के से शादी नहीं करनी है।
वरमाला के बाद डीजे की धुन के बीच शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला सागर जिले की खुरई तहसील का है। जहां लंबी तैयारियों के बाद शहरी थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक कॉलेज रोड स्थित भगवान दास चंदेल वार्ड में एक परिवार में शादी की शहनाई सुनाई दे रही थी। वरमाला की रस्म पूरी होने के बाद शादी की अन्य तैयारियां चल रही थीं। डीजे पर लोग नाच रहे थे और विवाह की मुख्य रस्म शुरू होने वाली थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति निर्मित हो गई, विवाद में दूल्हा तक पगड़ी उतारकर झगड़े में शामिल हो गया।

आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हुआ था। वर पक्ष ने वधू पक्ष के साथ मारपीट भी की। इसके बाद वर पक्ष बिना शादी पूरी किए ही बारात लेकर वापस लौट गया।

रात भर फोन लगाते रहे परिजन, सुबह थाने पहुंचा मामला

हातों में मेहंदी लगाए दुल्हन पूरी रात इंतजार करती रही कि उसके फेरे होंगे, शादी होगी और विदाई के बाद वह ससुराल जाएगी। सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और दहेज के लोभियों ने धन को प्राथमिकता दी और बारात लेकर लौट गए।

दुल्हन के स्वजनों ने पूरी रात फोन के जरिए दूल्हे और उसके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया। परिजनों का आरोप है कि दहेज के कारण ही बारात लौटकर चली गई। इस मामले में लड़की पक्ष ने शनिवार को खुरई शहरी थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग की है।
बिन मां-बाप की बेटी अब मांग रही है इंसाफ

रायसेन जिले के बेगमगंज ग्राम गोपालपुरा से दूल्हा बना सुरेंद्र बंसल दहेज के चक्कर में विवाद करने लगा और मारपीट करना शुरू कर दी। दुल्हन निशा बंसल का कहना है कि उसके माता-पिता नहीं हैं। वह तीन बहनों में सबसे बड़ी है। दादी और चाचा हम तीनों बहनों का पालन-पोषण कर रहे हैं।

शादी पक्की होने के बाद अभी तक मेरी लड़के से बात नहीं हुई है। लड़के पक्ष वालों ने दहेज की मांग को लेकर जमकर विवाद किया। यहां तक कि मारपीट भी की। अब वह उस लड़के से शादी नहीं करना चाहती है, अब केवल इंसाफ चाहिए।
दो लाख रुपये नकद और बाइक की अड़ी

लड़की के चाचा नारायण बंसल ने कहा कि लड़के पक्ष के लोग दो लाख रुपये नकद और एक बाइक की मांग कर रहे थे। हम लोगों ने कहा कि लड़की के माता-पिता नहीं हैं, फिर भी हम लोगों ने उचित दहेज दिया है। इसके बाद भी वे मानने 

दूल्हे, पिता और भाई पर दर्ज हो रहा है दहेज एक्ट का मामला

खुरई शहरी थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि लड़की पक्ष की रिपोर्ट पर दूल्हा, दूल्हे के पिता और दूल्हे के भाई पर दहेज एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।

 

बड़ा तालाब से टीटी नगर स्टेडियम तक गूंजा योग का संदेश

भोपाल

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व सुबह पर राजधानी भोपाल में आयोजित योग कार्यक्रमों में उत्साह और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योग कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एवं सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने सहभागिता कर योगाभ्यास किया।

इस अवसर पर दोनों नेताओं ने योग को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन का आधार बताते हुए नागरिकों, विशेषकर युवाओं से नियमित योग अपनाने का आह्वान किया।

मंत्री सारंग बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब में आयोजित योग अभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। प्राकृतिक वातावरण में आयोजित इस योगाभ्यास में भोपाल के हजारों युवा, खिलाड़ी, खेल प्रेमी एवं नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए और सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारतीय योग परंपरा को अपना रही है। इस योग दिवस पर 21 जून को विश्व के 192 देश सामूहिक योग करेंगे, उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और सशक्त जीवन का माध्यम है।

युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी फिटनेस, स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक है तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के एक दिन पूर्व आयोजित इन कार्यक्रमों ने पूरे शहर को योगमय वातावरण से सराबोर कर दिया।

 

शिवपुरी कलेक्टर के नाम पर ठगी की कोशिश, फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर लोगों को लगाया चूना

 शिवपुरी

साइबर ठगों ने मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी का प्रयास किया। कलेक्टर की पहचान का उपयोग कर लोगों से संपर्क किया और उन्हें सस्ते दामों पर फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा देकर रकम की मांग की गई। मामला संज्ञान में आने पर शिकायत दर्ज कराई गई है।

क्या है पूरा मामला

शिवपुरी जिले के लालगढ़ गांव निवासी प्रमोद रावत को “अर्पित वर्मा IAS” नाम की एक फेसबुक आईडी से मैसेंजर पर संदेश भेजा गया। संदेश में बताया गया कि कलेक्टर का एक मित्र संतोष कुमार सीआरपीएफ कैंप में अधिकारी है। उसका तबादला हो गया है और वह महज तीन महीने पुराना अपना घरेलू सामान बेहद कम कीमत पर बेच रहा है। इसके लिए वह जल्द ही उनसे संपर्क करेगा।

कुछ समय बाद प्रमोद रावत को व्हाट्सएप पर संदेश मिला। उसमें बेड, लैपटॉप, रेफ्रिजरेटर, सोफा सहित अन्य घरेलू सामानों की तस्वीरें भेजी गईं। फर्नीचर और इस सारे सामान की कीमत मात्र 90 हजार रुपये बताई गई। इसे खरीदने के लिए अग्रिम राशि के भुगतान की मांग की गई।

अन्य लोगों को भी इसी तरह के संदेश भेजे गए हैं

जिला जनसंपर्क अधिकारी प्रियंका शर्मा ने बताया कि मामले की शिकायत साइबर सेल शाखा में दर्ज करा दी गई है। पुलिस विधिक कार्रवाई के लिए फर्जी आईडी संचालित करने वालों की पहचान कर रही है।

NEET Re-Exam से पहले महू में सुरक्षा में बड़ी चूक, परीक्षा केंद्र से कैमरे चोरी

महू

 नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद रविवार को फिर से नीट की पुनर्परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के पूर्व महू के शासकीय भेरूलाल पाटीदार स्नातकोत्तर महाविद्यालय स्थित बनाए गए परीक्षा केंद्र से दो सीसीटीवी कैमरे चोरी होने की घटना हुई है। इस मामले में प्रकरण दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कैमरे बरामद कर लिए हैं। घटना ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि प्रशासन ने परीक्षा के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाने का दावा किया है।
कैमरे चोरी की घटना हुई कैद

जानकारी के अनुसार डिग्री कॉलेज में दो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें वाणिज्य संकाय भवन में बनाए केंद्र में 240 और प्रशासनिक भवन में बनाए गए केंद्र में 480 इस तरह कुल 720 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। सुरक्षा के लिए दोनों केंद्रों पर 18-18 कैमरे लगाए गए हैं।

 

प्रकृति हमारी मां है, इसे रासायनिक उर्वरकों से बचाएं, प्राकृतिक खेती अपनाएं : प्रधानमंत्री मोदी

भोपाल 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि प्रकृति हमारी माता है और हम सब इसकी संतान। अपनी धरती माता को हमें रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों से बचाना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का पहला लक्ष्य मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ाना है। यह खेती मिट्टी में केंचुए और सूक्ष्म जीव पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाती है। इससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध कृषि की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अधिक से अधिक प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं। इससे हमारी धरती माता की सेहत भी बनी रहेगी और इससे उपजे अनाज के पोषण से हम सब भी स्वस्थ रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल से पीएम किसान सम्मान निधि के अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से देश के 9.40 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त के रूप में कुल 18 हज़ार 880 करोड़ रुपए पात्र किसानों के खातों में अंतरित किए। कार्यक्रम से प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थियों से अपील करते हुए कहा कि हमें धरती माता को बचाना है। हमें अपने बच्चों को बंजर जमीन नहीं देनी है। भारत सरकार खेत बचाओ अभियान चला रही है। हमें प्राकृतिक खेती अपनाकर रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम से कम करना है। देशभर के किसान खेत बचाओ अभियान से जुड़ें, दूसरों को भी प्रेरित करें और खेतों की मिट्टी की जांच करवाएं। हम सभी मिलकर धरती मां की रक्षा करें। हम केमिकल से धरती मां को नहीं मार सकते हैं। हमें उसे बचाना ही होगा। केंद्र सरकार ने विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया है, इसमें देशवासियों का सहयोग बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों से कहा कि जिस तरह प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उसी तरह योग करने से हमारा तन-मन स्वस्थ रहता है। प्रधानमंत्री ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि सभी देशवासी योग करें, क्योंकि योग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत फरवरी 2019 में हुई थी। इसके तहत हर साल छह हजार रूपये, दो-दो हजार की तीन समान किश्तों में किसान भाईयों को दिए जाते हैं। अब तक प्रदेश के किसान भाईयों को 22 किश्तों में 33 हजार 800 करोड़ रूपये मिल चुके हैं। शनिवार को 23वीं किश्त का अंतरण किया गया। पश्चिम बंगाल में हुए इस कार्यक्रम का देशभर में सीधा प्रसारण किया गया।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में साकार होते देख रहे है रामराज्य की संकल्पना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बरखेड़ीकला स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में ‘प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी’ में पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी के संपूर्ण संबोधन का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम रामराज्य की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गांव, गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और नारी सहित सभी वर्गों के कल्याण से विश्व में भारत की अलग ही पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश को दो-दो नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और उनके सूखे खेतों में फसलें लहलहाएंगी। आज देश के हर गांव-कस्बे तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही देश के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देने की योजना प्रारंभ की है। यह हमारे अन्नदाता के अथक परिश्रम का सम्मान है। मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। हम किसानों के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, जनप्रतिनिधि रविन्द्र यति, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक  बर्णवाल, आयुक्तमती अनुभावास्तव, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों में कीटनाशक और रासायनिक खाद का उपयोग नुकसानदेह है। इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। सरकार ने किसानों को पुन: प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए पहल की है, इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आज हमारा मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्यों में अव्वल स्थान पर है। प्राकृतिक खेती की उपज को उचित दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। हमारी प्राकृतिक खेती से दुनिया लाभान्वित हों, इसी भाव से कार्य करते हुए प्रदेश में तेजी से गोशालाओं का विस्तार किया जा रहा है। हमारी गौमाता प्राकृतिक खेती में सबसे अधिक मददगार प्राणी है। किसान गोबर और गौमूत्र से खाद बनाकर खेतों में डालें, इसी उद्देश्य से गौपालक किसानों को हमारी सरकार हर महीने 1100 रुपए प्रति गाय की दर से आर्थिक सहायता दे रही है। गौ-आधारित कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उपज का सही दाम मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। पहले सोयाबीन पर भावांतर योजना के माध्यम लाभ दिया, उसके बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देकर किसानों से गेहूं उपार्जित किया। राज्य सरकार ने किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदकर उन्हें प्रति क्विंटल 2625 रुपए भुगतान किया है। हमारी सरकार प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। इससे धरती माता की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और विदेशी रासायनिक खाद पर निर्भरता भी घटेगी। प्रदेश के नागरिकों को प्राकृतिक तरीके से उगाए देसी ज्वार, बाजरा और गेहूं-चना का स्वाद मिलेगा। किसानों को दूध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। इसका दोहरा लाभ आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खाद निर्माण में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है। प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक तकनीक ही नहीं, धरती माता, किसान और उपभोक्ता- तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा का अभियान है। जलवायु परिवर्तन के दौर में यह एक महत्वपूर्ण समाधान है। उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों के लिए जल बचाना हम सबका कर्तव्य है, हम सबको जल संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।

प्रदेश में प्राकृतिक खेती

मध्यप्रदेश देश का अग्रणी कृषि राज्य है। गेहूं, सोयाबीन और दलहन उत्पादन में प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। मध्यप्रदेश प्राकृतिक खेती में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 3 लाख एकड़ में जैविक/प्राकृतिक खेती की जा रही है। प्रदेश के 56 कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि महाविद्यालयों द्वारा प्राकृतिक खेती के लिए तकनीकी मदद और प्रशिक्षण किसानों को दिए जा रहे हैं। सरकार प्रदेश में एक हजार से अधिक बॉयो रिसर्च सेंटर बना रही है। ये सेंटर प्राकृतिक खेती में किसानों की मदद करेंगे। प्राकृतिक खेती के उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। देश और विदेश में इनके लिए विशेष बाजार विकसित हो रहे हैं। ब्रांडिंग और प्रमाणन से किसानों को अधिक मूल्य मिलता है। यह आय वृद्धि का बड़ा अवसर है। किसानों की मदद के लिए 3 हजार से ज्यादा कृषि सखी, 200 से अधिक कृषि वैज्ञानिकों को भी प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि किसानों की आय बढ़े, लागत घटे और भूमि भी स्वस्थ बने। हर गांव प्राकृतिक खेती का केंद्र बने। समृद्ध मध्यप्रदेश के निर्माण के लिए सरकार इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।

 

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