MP में UCC की आहट! इंटरकास्ट मैरिज पर आदिवासी अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता, विवाह रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य

भोपाल 
 मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट अगले 10 दिनों में तैयार हो जाएगा. देश की सबसे बड़ी आदिवासी आबादी वाले राज्य मध्यप्रदेश में यूसीसी के दायरे में आदिवासी समाज को कुछ मामलों में लाने की तैयार की जा रही है. आदिवासी समाज में अंतरजातीय विवाह करने पर उन्हें मिलने वाले आदिवासी अधिकारों को खत्म किया जा सकता है. इसे लेकर आए सुझावों पर गठित की गई उच्च स्तरीय कमेटी विचार कर ही है. उधर आदिवासियों के लिए भी विवाह का रजिस्ट्रेशन का विकल्प खुला रखा जा सकता है। 

आदिवासियों की संपत्ति बंटवारे पर भी विचार
समान नागरिक संहिता के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने भोपाल में अलग-अलग वर्गों से सुझाव लिए हैं. समिति सभी जिलों से सुझाव प्राप्त कर चुकी है. उच्च स्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, ” उम्मीद है कि अगले दस दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तय कर लिया जाएगा. यूसीसी के दायरे में अंतरजातीय विवाह करने वाले आदिवासी युवक-युवतियों को भी लाया जा सकता है. ऐसे मामलों में उनके संपत्ति बंटवारे को भी यूसीसी के दायरे में लाए जाने पर विचार किया जा रहा है. यूसीसी में बहु विवाह पर रोक लगाने, विवाह के रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ आदिवासियों के लिए विवाह रजिस्ट्रेशन का विकल्प रखा जाएगा। 

आदिवासियों का मिल सकती है ये राहत
यूसीसी के दायरे में आदिवासियों को भी लाए जाने पर सुझाव आए हैं. समिति सदस्य और उत्तरखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने कहा, ” एक विचार बिलकुल साफ है कि संविधान में अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं. उनकी परंपराओं, संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए संविधान में अलग से व्यवस्था की गई है, इस व्यवस्था को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन क्या उसके अंतर्गत रहते हुए यूसीसी के प्रावधानों का लाभ उनको दिया जाय या न दिया जाए इसको लेकर चर्चा हुई है. यदि कोई स्वैच्छिक रूप से वैवाहिक पंजीयन कराना चाहे तो करें और यदि कोई न चाहे कि उनकी संपत्ति का अधिकार यूसीसी के नियमों के तहत मिलना चाहिए, इस प्रावधान को शामिल किया जाए या न किया जाए इसको लेकर विचार चल रहा है।
 
गैर आदिवासी समुदाय में विवाह करने पर छिनेंगे अधिकार
अनुसूचित समुदाय का कोई व्यक्ति गैर अनुसूचित समुदाय में विवाह करता है, तो उसे फैमिली लाॅ में जो अधिकार मिलते हैं वह यूसीसी से तय होंगे या उनकी पारंपरिक नियमों से तय होंगे इसको लेकर कुछ विचार आए हैं. यदि आदिवासी समाज की महिला गैर अनुसूचित जनजाति में विवाह करती है तो ऐसे में आदिवासी को मिलने वाले अधिकार को समाप्त माना जाए, क्योंकि विवाह के बाद महिला आदिवासी कल्चर को फाॅलो नहीं करेगी. इसी तरह यदि कोई आदिवासी पुरुष गैर आदिवासी महिला से विवाह करता है तो क्या उस पर भी यह नियम लागू किया जाए? इस पर समिति विचार करेगी। 

मानूसन सत्र में आ सकता है विधेयक
शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि यूसीसी के फाइनल ड्राफ्ट के साथ दो रिपोर्ट तैयार होंगी, इसमें एक में व्यक्तियों, विशेषज्ञों और समूहों से लिए गए सुझावों को रखा जाएगा, जबकि दूसरे में इन सुझावों का निचोड़ होंगे, जिसे ड्राफ्ट में शामिल किया जाएगा। माना जा रहा है कि सरकार यूसीसी के इस विधेयक को आगामी मानसून सत्र में पेश कर सकती है. मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव इसे लेकर पहले ही इशारा कर चुके हैं। 

लिव इन रिलेशनशिप
गुजरात और उत्तराखंड दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में रजिस्ट्रेषन अनिवार्य किया गया है.गुजरात में प्रावधान किया गया है कि 21 साल से कम आयु की स्थिति में अभिभावक को सूचित किया जाएगा. 30 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बिना रजिस्ट्रेशन एक माह से अधिक समय तक लिव इन में रहने पर 3 माह की कैद या 10 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है. दोनों राज्यों में लिव इन रिलेशनशिप में जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा और दोनों को बच्चे को अपना नाम देना होगा। 

संपत्ति का अधिकार
गुजरात में संपत्ति के अधिकार में प्रावधान किया गया है कि वसीयत न करने की स्थिति में पति-पत्नी और बच्चों को संपत्ति समान रूप से बांटी जाएगी. उत्तराखंड में संपत्ति पर पति या पत्नी (जो भी जीवित हो) के अलावा पुत्र के साथ पुत्री का भी समान अधिकार दिया गया है. मृतक की संपत्ति में भी दोनों के समान अधिकार दिए गए हैं. पहले उत्तराखंड में प्रावधान था कि मृतक की पत्नी को ही संपत्ति दी जाएगी। 

MP के मंदिरों में अब QR कोड से होगा दान, बड़े मंदिरों में लागू होगी डिजिटल व्यवस्था

दमोह 
 अयोध्या राम मंदिर के दान में गड़बड़ी के मामले के बाद मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था लागू होगी. प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने इसे लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि मध्य प्रदेश के मंदिरों में क्यूआर कोड लागू किया जाएगा और डिजिटल टीमों का गठन किया जाएगा, जो पूरी दान व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेगी। 

सरकार पहले कर चुकी डिजिटल व्यवस्था की पहल
मध्य प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने सोमवार को दमोह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, ” राम मंदिर का मामला तो बाद में सामने आया है. काफी समय पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए थे कि प्रदेश की बड़े मंदिरों में कैसे डिजिटल टीमों का गठन किया जाए और डिजिटल तरीके से दान लिया जाए. उन्होंने संस्कृति विभाग को इस संबंध में पूरा अध्ययन करने के भी निर्देश दिए थे। 

मंदिरों में डिजिटल कमेटी, क्यू आर कोड से दान
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने दावा किया कि यह सारा वाक्या राम मंदिर का मामला आने के काफी पहले का है. उन्होंने कहा, ” हम इसका पूरा अध्ययन कर रहे हैं और यह तैयारी कर रहे हैं कि मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों में डिजिटल कमेटियों का गठन किया जाए, जो सारी चीजों की और व्यवस्थाओं की निगरानी करेगी. इसके अलावा जो दान आता है उसके लिए डिजिटल और क्यू आर कोड जैसे आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया जाए, जिससे किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी न हो सके.” संस्कृति मंत्री श्री लोधी ने कहा, ”मैंने संस्कृति विभाग की एक बैठक ली थी और उसमें अधिकारियों को या निर्देश दिए हैं। 

देश के बड़े मंदिरों पर हो रही स्टडी, एमपी में लागू होगी व्यवस्था
उन्होंने कहा, ” कुछ समय पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्देश दिए थे
कि देश के सभी बड़े मंदिरों का आर्थिक मैनेजमेंट और सभी तरह के मैनेजमेंट के लिए नई रिसर्च की जाए और वह रिपोर्ट सरकार के सामने प्रस्तुत की जाए. इस रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जाए. ये निर्देश राम मंदिर मामले से पहले के हैं.” उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई बड़े मंदिरों में लंबे समय से ऐसी व्यवस्था को लेकर कई जगह काम चालू है. शीघ्र ही मध्य प्रदेश में एक कमेटी का गठन होगा, जो इस विषय को लेकर जरूरी विचार विमर्श करेगी। 

लखनऊ अग्निकांड के बाद इंदौर में बड़ा एक्शन, कई कोचिंग सेंटर सील; जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर

 इंदौर

लखनऊ की कोचिंग में हुए भीषण अग्निकांड हादसे के बाद इंदौर का जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। सोमवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में लगी भीषण आग की दर्दनाक घटना में अब तक 15 लोगों की असमय मौत हो चुकी है। इस बड़े और हृदयविदारक हादसे से सबक लेते हुए इंदौर के प्रशासनिक अमले ने मंगलवार सुबह से ही पूरे शहर के कोचिंग संस्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सुबह होते ही प्रशासनिक अधिकारियों की कई गाड़ियां सड़कों पर उतरीं और अलग-अलग इलाकों में संचालित हो रहे छोटे-बड़े कोचिंग सेंटरों की बारीकी से पड़ताल शुरू की गई।

शहर की बड़ी कोचिंग्स पर एक साथ कार्रवाई
इस विशेष जांच अभियान के दौरान शहर के कई नामी और बड़े कोचिंग संस्थानों पर एक साथ प्रशासनिक छापे पड़े हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इन संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद चौंकाने वाली और गंभीर लापरवाही खुलकर सामने आने लगी। बच्चों की सुरक्षा को पूरी तरह ताक पर रखकर चलाए जा रहे इन संस्थानों पर प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। नियमों का उल्लंघन करने और छात्रों की जान जोखिम में डालने के कारण शहर के कई कोचिंग संस्थानों को मौके पर ही सील कर दिया गया है। अचानक हुई इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे कोचिंग हब में हड़कंप का माहौल देखा जा रहा है।

फायर सिक्योरिटी और सुरक्षा मानकों की खुली पोल
प्रशासनिक टीमों द्वारा की गई इस औचक जांच में कोचिंग संस्थानों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पूरी तरह से पोल खुल गई है। शहर की कई इमारतों में फायर सिक्योरिटी सिस्टम यानी आग बुझाने वाले बुनियादी उपकरणों की भारी कमी पाई गई है। कई जगहों पर तो सुरक्षा के अन्य जरूरी पैमाने भी पूरी तरह से नदारद मिले, जिनमें आपातकालीन निकास की व्यवस्था न होना और क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना शामिल है। नियमों की इसी घोर अनदेखी को देखते हुए प्रशासन की टीम ने तत्काल कदम उठाते हुए शहर की सबसे प्रमुख और बड़ी कैटेलाइजर कोचिंग को पूरी तरह से सील कर दिया है। 

कलेक्टर के सख्त आदेश पर शहरभर में सघन जांच जारी
इस पूरी बड़ी कार्रवाई को लेकर इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा के विशेष और कड़े आदेश पर प्रशासन, पुलिस और नगर निगम की कई संयुक्त टीमें गठित की गई हैं। ये विशेष टीमें इस समय इंदौर शहर के कोने-कोने में फैले हर एक कोचिंग संस्थान की गहराई से जांच कर रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का साफ कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और जीवन से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। 

बीना-झांसी रेलखंड पर यार्ड रीमॉडलिंग का असर, 25 हजार यात्री प्रभावित; 15 से ज्यादा ट्रेनों के रूट बदलेंगे

भोपाल
 जुलाई में रेल यात्रा की योजना बना रहे यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। रेलवे द्वारा ललितपुर स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग और सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण का कार्य किया जा रहा है।

इसके चलते 1 जुलाई से 1 अगस्त तक बीना-झांसी रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। भोपाल होकर गुजरने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जाएगा, जबकि कुछ ट्रेनों के समय में भी बदलाव संभव है।

चरणबद्ध तरीके से होगा तकनीकी कार्य
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ललितपुर यार्ड में नई रेल लाइनें जोड़ने, प्वाइंट बदलने और सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने का काम किया जाएगा। इसके लिए 1 से 19 जुलाई तक प्री-नॉन इंटरलॉकिंग, 20 जुलाई से नॉन-इंटरलॉकिंग तथा 1 अगस्त तक पोस्ट-नॉन इंटरलॉकिंग कार्य निर्धारित किया गया है। इस दौरान रेल परिचालन पर सीधा असर पड़ेगा।

इन ट्रेनों के रूट रहेंगे परिवर्तित
    यशवंतपुर-हजरत निजामुद्दीन संपर्क क्रांति एक्सप्रेस (12650) 13 से 19 जुलाई तक
    तिरुपति-जम्मूतवी एक्सप्रेस 14 जुलाई को
    जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 14 से 20 जुलाई तक
    हैदराबाद-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस 13 से 20 जुलाई तक
    विशाखापट्टनम-नई दिल्ली एक्सप्रेस 13 से 18 जुलाई तक

ये सभी ट्रेनें रुठियाई, सोगरिया, बयाना और मथुरा मार्ग से चलाई जाएंगी।

कई प्रमुख ट्रेनें भी रहेंगी प्रभावित
    22456 कालका-शिरडी साईनगर एक्सप्रेस
    12172 हरिद्वार-एलटीटी एक्सप्रेस
    12804/12808 हजरत निजामुद्दीन-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस
    12644 निजामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम एक्सप्रेस
    12782 निजामुद्दीन-मैसूर एक्सप्रेस
    18238 अमृतसर-बिलासपुर एक्सप्रेस
    20808 अमृतसर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस
    12716 अमृतसर-नांदेड़ एक्सप्रेस
    12780 निजामुद्दीन-वास्को-डि-गामा एक्सप्रेस

यात्रा से पहले स्थिति जांचने की सलाह
रेलवे ने कहा कि यह कार्य भविष्य में ट्रेनों की गति, समयपालन और सुरक्षित संचालन को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। यात्रियों से अपील की गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की नवीनतम स्थिति और समय-सारिणी की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

राजगढ़ के लाल मोहन नागर को आज मिलेगा पद्मश्री, जल-पर्यावरण क्रांति के लिए राष्ट्रपति भवन में होगा सम्मान

राजगढ़
मध्य प्रदेश के लिए कल का दिन बेहद गौरवशाली होने जा रहा है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष और सामाजिक-पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर को मंगलवार 23 जून 2026 को नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्मश्री’ से नवाजा जाएगा। आदिवासी अंचल में शिक्षा, ग्राम विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक समय तक किए गए उनके अद्वितीय कार्यों के लिए देश के सर्वोच्च मंच से उनकी इस साधना को सम्मानित किया जा रहा है।

जब सब कुछ छोड़ आदिवासियों के बीच पहुंचे मोहन नागर
बता दें कि 23 फरवरी 1968 को राजगढ़ जिले के रायपुरिया गांव में जन्मे मोहन नागर ने उज्जैन के विक्रम विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। छात्र जीवन से ही समाज सेवा की लौ जल रही थी, इसलिए साल 1991 में वे अपना सब कुछ छोड़कर आदिवासी कल्याण के संकल्प के साथ बैतूल जिले के सुदूर इलाकों में आ गए।

बैतूल के आदिवासी क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि पर्याप्त बारिश के बावजूद जल संचयन के अभाव में सर्दियों की शुरुआत में ही कुएं-बावड़ी सूख जाते हैं। इस पानी की किल्लत की वजह से स्थानीय आदिवासियों को भारी पलायन करना पड़ता था, जिसे रोकने के लिए मोहन नागर ने जल-संरक्षण को अपना जीवन बना लिया।

श्रमदान से खड़ी कीं 75 हजार जल संरचनाएं
मोहन नागर ने बहते पानी को रोकने के लिए एक बेहद सस्ता और पारंपरिक लोक-फॉर्मूला अपनाया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर सीमेंट की खाली बोरियों में रेत और मिट्टी भरकर नदी-नालों पर ‘बोरी बंधान’ की शुरुआत की।

सतपुड़ा की पहाड़ियों पर भगीरथ प्रयास
‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के दौरान उन्होंने अभूतपूर्व जनभागीदारी (श्रमदान) का उदाहरण पेश करते हुए सतपुड़ा पारिस्थितिकी क्षेत्र की 75 पहाड़ियों पर रिकॉर्ड 75,000 जल संरचनाओं का निर्माण कराया और हजारों पौधों का रोपण किया, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल कई फीट ऊपर आ गया।

MP सरकार फिर ले रही 2800 करोड़ का कर्ज, राज्य पर कुल देनदारी 5.02 लाख करोड़ के पार

भोपाल 
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए वित्त विभाग ने मंगलवार को राज्य विकास ऋण के जरिए दो चरणों में बॉन्ड जारी करने की अधिसूचना जारी की है। यह राशि 1600 करोड़ और 1200 करोड़ रुपए के रूप में जुटाई जाएगी।

इस नए कर्ज के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 13,800 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा। इसी तरह, राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 2 हजार करोड़ रुपए हो जाएगा।

सरकार जारी करेगी दो तरह के बॉन्ड
वित्त विभाग की मानें तो राज्य सरकार 7.64 फीसदी ब्याज दर वाले प्रदेश एसजीएस- 2034 के री-इश्यू के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि 8 साल होगी। इसके ब्याज का भुगतान हर साल 29 अप्रैल और 29 अक्टूबर को करना होगा। वहीं, 7.83 % ब्याज दर वाले प्रदेश एसजीएस- 2048 के जरिए 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 साल निर्दारित की गई है। दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ई-कुबेर प्रणाली के जरिए कराई जाएगी।

दो तरह के बॉन्ड जारी करेगी सरकार
वित्त विभाग के अनुसार सरकार 7.64 % ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2034 के री-इश्यू के जरिए 1600 करोड़ रुपए जुटाएगी। इस ऋण की अवधि 8 साल होगी। इसके ब्याज का भुगतान हर साल 29 अप्रैल और 29 अक्टूबर को किया जाएगा।

इसके अलावा 7.83 % ब्याज दर वाले मध्यप्रदेश एसजीएस-2048 के जरिए 1200 करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे। इस ऋण की अवधि 22 साल होगी।

दोनों बॉन्ड की नीलामी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से कराई जाएगी।

विकास कार्यों पर खर्च होगी राशि
राज्य सरकार का कहना है कि बॉन्ड से जुटाई जाने वाली राशि का उपयोग प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार से आवश्यक अनुमति भी मिल चुकी है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह राशि सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में खर्च की जा सकती है।

मार्च 2026 तक 4.88 लाख करोड़ था कर्ज
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज था। सरकार का दावा है कि ऋण की राशि का उपयोग सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में किया गया है।

अब 2800 करोड़ रुपए के नए ऋण के साथ राज्य का कुल कर्ज बढ़कर करीब 5.02 लाख करोड़ रुपए पहुंच जाएगा।

इन विकासकार्यों पर खर्च होगी रकम
प्रदेश सरकार के अनुसार, बॉन्ड के जरिए कर्ज ली जाने वाली रकम का इस्तेमाल प्रदेश में विकास कार्यों और अधोसंरचना परियोजनाओं पर होगा। इसके लिए केंद्र सरकार से जरूरी अनुमति भी मिल चुकी है। बताया जा रहा है कि, इस राशि का इस्तेमाल सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाओं, बिजली व्यवस्था, जल संसाधन विकास, संचार सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं में खर्च की जा सकती है।

मार्च 2026 तक 4.88 लाख करोड़ कर्जदार था एमपी और अब
वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक एमपी पर कुल 4.88 लाख करोड़ रुपए से अधिक कर्ज था। सरकार का दावा है कि, ऋण की राशि का इस्तेमाल सिंचाई, ऊर्जा, सहकारी संस्थाओं और अन्य पूंजीगत विकास कार्यों में हुआ है। नए 2800 करोड़ के इस ऋण बाद राज्य का कर्ज का कुल आंकड़ा बढ़कर 5.02 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा।

सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी और आवासों में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी और आवासों में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को करें प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विकास कार्यों का जिला स्तर पर होगा प्रेजेंटेशन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
15 अगस्त के कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री जिला स्तर पर देंगे जानकारी
जिले के विकास कार्यों पर केंद्रित लगाई जाएंगी प्रदर्शनियां
जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में होगा सम्मेलन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) पर जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रमों में जिलों के प्रभारी मंत्री, जिलों में हुए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की उपलब्धियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करेंगे। समारोह स्थल पर विकास कार्यों और योजनाओं को जनसामन्य के सामने रखने के लिए प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, यह प्रेजेंटेशन एक तरह से विकास कार्यों के सोशल ऑडिट जैसा होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिला विकास समितियों का राजधानी भोपाल में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिला विकास समितियां विकास गतिविधियों के लिए शासकीय नियोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। निजी निवेश को भी प्रोत्साहित करने के लिए जिला विकास समितियां प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने और किफायती आवासों के निर्माण में ईको फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य के विभागवार, संभागवार और जिलावार समस्त सांख्यिकी आंकड़े एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मंत्रालय में योजना, आर्थिक एवं साख्यिकी विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, मनीष रस्तोगी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 विश्राम घाट पर ही मृत्यु पंजीयन की हो व्यवस्था

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र में सभी विभागों की गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। योजना अंतर्गत कराए गए कार्यों के संधारण की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि योजना में श्रेष्ठ कार्य तथा नवाचार करने वालों को प्रोत्साहित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश जन्म और मृत्यु पंजीकरण की व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मृत्यु पंजीयन के लिए विश्राम घाट पर ही पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने की व्यवस्था के लिए कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। इससे विशेष रूप से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्र के लोगों को मृत्यु प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी।

जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों पर हों आधारित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के विकास सूचकांक स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर अलग-अलग निर्धारित किया जाए। औद्योगिक पृष्ठ भूमि, कृषि आधारित व्यवस्था, वन क्षेत्र संपन्न जिलों के लिए विकास के सूचकांक अलग-अलग हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं का मकान बनाने वालों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और उपयुक्त भवन निर्माण सामग्री के संबंध में जागरूक करने के लिए भी जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों की रही सक्रिय सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक एक लाख 37 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवाकुंर समितियों ने कुएँ, बावड़ी, तालाब, नदी घाट सफाई, जल संगोष्ठी और बावड़ी उत्सव जैसे आयोजनों में सक्रिय सहभागिता की। बैठक में बताया गया कि विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु परिवारों के चिन्हाकंन और पंजीकरण के लिए जारी अभियान में अब तक पच्चीस हजार से अधिक परिवारों की जानकारी पोर्टल पर प्रविष्ट की जा चुकी है। प्रदेश में मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी जारी है।

 

प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी : मंत्री परमार

प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी : मंत्री परमार

हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पुस्तक निर्माण पर दिया गया जोर
शिक्षाविदों का किया सम्मान, अकादमी की 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को सराहा

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ मूल्य पर उपलब्ध हैं। मंत्री परमार ने इन पुस्तकों की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास करने तथा अकादमी की वेबसाइट पर पुस्तकों की ऑनलाइन प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा। परमार ने विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया, जिससे प्राप्त सुझावों के आधार पर पुस्तकों में आवश्यक सुधार एवं संशोधन किए जा सकें। उन्होंने कहा कि परिवर्तनशीलता और निरंतर सुधार ही संस्थागत प्रगति का आधार हैं। मंत्री परमार भोपाल स्थित मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में सहभागिता कर संबोधित कर रहे थे।

मंत्री परमार ने मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी की 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अकादमी परिवार को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने देश में उच्च शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के निर्माण में अकादमी के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। मंत्री परमार ने कहा कि पुस्तक लेखन एक कठिन और उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य है तथा लेखन का मूल भाव भारतीय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश करते हुए अकादमी का कार्य एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है।

मंत्री परमार ने कहा कि सतत कार्य करना अकादमी का स्वभाव बन चुका है। उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण में प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए समग्र अध्ययन-अध्यापन को मूल्यांकन प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का महत्व कभी समाप्त नहीं होगा तथा प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी। मंत्री परमार ने पुस्तक लेखन से जुड़े सभी लेखकों एवं शिक्षाविदों का आभार भी व्यक्त किया।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि हिंदी ग्रंथ अकादमी के योगदान से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देशभर में अग्रणी पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि की निरंतरता बनाए रखने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। राजन ने अकादमी की पुस्तकों की पहुंच राज्य की सीमाओं से बाहर अन्य राज्यों तक बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पुस्तक लेखन प्रक्रिया से जुड़े सभी शिक्षाविदों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नई पीढ़ी के निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने विद्यार्थियों को सत्रानुरूप समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराने में अकादमी की भूमिका की सराहना करते हुए विभागीय अपेक्षाओं के अनुरूप निरंतर प्रगति करने पर जोर दिया। अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने अकादमी की 55 वर्षों की यात्रा का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए उसकी उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डाला। कड़ेल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत पुस्तक निर्माण के लिए 375 से अधिक नए लेखकों को अवसर उपलब्ध कराया गया है और अकादमी द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश करते हुए विभिन्न विषयों की 1 हजार 336 शीर्षक की 1 करोड़ 10 लाख 99 हजार 512 प्रतियों का प्रकाशन किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि 26 विषयों में भारतीय ज्ञान परम्परा संदर्भ पुस्तके तैयार की जा रही है।

स्थापना दिवस समारोह में अकादमी द्वारा प्रकाशित “प्रगति पथ” ब्रोशर तथा द्विमासिक पत्रिका “रचना” के नवीन अंक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर एवं संदर्भ ग्रंथों की पांडुलिपियों के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षाविदों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया।

ये शिक्षाविद् हुए सम्मानित

स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं संदर्भ ग्रंथों की पांडुलिपियों के निर्माण में अकादमी को उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय सहयोग प्रदान करने वाले शिक्षाविदों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कान्हेरे, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति डॉ. खेमसिंह डहेरिया, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व आचार्य डॉ. राकेश ढण्ड तथा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी को शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इन शिक्षाविदों के योगदान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित उच्च शिक्षा सामग्री के विकास में महत्वपूर्ण बताया गया।

कार्यक्रम का संचालन अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान ने किया तथा अकादमी के सहायक संचालक (प्रभारी) राम विश्वास कुशवाहा ने आभार व्यक्त किया। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, शिक्षाविद, साहित्यकार, लेखक एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला 25 जून को

राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा भोपाल में किया जाएगा कार्यशाला का आयोजन

योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से की जाएगी चर्चा, दिया जाएगा प्रशिक्षण

भोपाल 

प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा राज्य स्तरीय कार्याशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला 25 जून को पलाश रेसीडेन्सी भोपाल में होगी। इसमें राज्य शिक्षा केंद्र के संबंधित अधिकारी, कर्मचारी और सभी जिलों के नोडल अधिकारी तथा उनके सहायक शामिल होंगे।

कार्यशाला में योजना के प्रभावी संचालन, छात्रवृत्ति चयन प्रक्रिया, मॉनिटरिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल NSP पर नवीन/ नवीनीकरण पंजीयन से संबंधित संपूर्ण प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार के सीनियर कन्सलटेंट राघवेन्द्र खरे उपस्थित सहभागियों को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

आर्थिक रूप से कमजोर प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित है राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत भारत सरकार स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नई दिल्ली द्वारा चयन परीक्षा में पात्र छात्रों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रतिवर्ष 12000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। भारत सरकार द्वारा छात्रवृत्ति की राशि सीधे हितग्राही छात्र के खाते में भेजी जाती है।

राष्ट्रीय मीन्स कम मेरिट छात्रवृत्ति योजना राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त एवं नगरीय निकायों के विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 8वीं के आर्थिक रूप से कमजोर एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाती है। योजना का लाभ पाने के लिए छात्र को विगत वर्ष कक्षा 7वीं में न्यूनतम ‘सी’ ग्रेड से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही, अभिभावक की सकल वार्षिक आय 3.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। राज्य के लिए निर्धारित कोटा में मेरिट सूची के अनुसार प्रतिवर्ष मध्यप्रदेश के 6 हजार 446 विद्यार्थियों का चयन इस छात्रवृत्ति के लिए किया जाता है।

 

स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: अब 1912 पर घर बैठे होगा बिल और मीटर संबंधी समस्याओं का समाधान

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को विशेष सुविधा

अब बिल, मीटर और इंस्टॉलेशन से जुड़ी दिक्कतों का 1912 पर घर बैठे होगा समाधान

भोपाल

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्यक्षेत्र के जिलों में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की सुविधा और उनकी समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी द्वारा कार्यक्षेत्र में लगाए जा रहे आधुनिक स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर विशेष शिकायत दर्ज करने की सुविधा शुरू की गई है। अब उपभोक्ता स्मार्ट मीटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए सीधे इस नंबर पर संपर्क कर निराकरण करा सकते हैं।

इन शिकायतों का होगा निराकरण

कंपनी द्वारा शुरू की गई इस सुविधा के अंतर्गत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करके स्मार्ट मीटर का अनुचित तरीके से इंस्टॉलेशन होना, स्मार्ट मीटर का जल जाना, डिस्प्ले बंद होना या मीटर का क्षतिग्रस्त होना, मासिक बिजली बिल का जनरेट न होना, गलत बिल जनरेशन की समस्या, बिल में एक्सपोर्ट यूनिट्स का गलत दर्ज होना, मीटर की तेज रिकॉर्डिंग के कारण बिजली का अधिक बिल आने संबंधी शिकायत, ‘उपाय’ (Upay) ऐप में स्मार्ट मीटर का डाटा गलत दिखना या प्रदर्शित न होना, बिजली बिल में मीटर का गलत सीरियल नंबर अंकित होना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय प्रारंभिक (शुरुआती) रीडिंग में विसंगति होना, सोलर/नेट मीटर में परिवर्तित न होना, बिल भुगतान करने के बाद भी बिजली का रीकनेक्शन न किया जाना, नए स्मार्ट मीटर की स्थापना के समय पुराने मीटर की आखिरी रीडिंग गलत दर्ज होना तथा चेक मीटर लगाने का अनुरोध करना या अनुरोध के बावजूद चेक मीटर इंस्टॉल न होने संबंधी शिकायतों का निराकरण करा सकेंगे।

स्मार्ट मीटर पूरी तरह सुरक्षित और सटीक

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक ऋषि गर्ग ने बताया है कि स्मार्ट मीटर लगने से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं, सटीक बिलिंग और ऊर्जा दक्षता में सुधार हो रहा है। स्मार्ट मीटर लगाने का काम समय सीमा में पूर्ण करने के लिए कंपनी की टीमें लगातार कार्य में जुटी हुई हैं। यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली, बिलिंग या इंस्टॉलेशन को लेकर कोई भी शंका या समस्या है, तो वे बिना किसी झिझक के टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज होते ही संबंधित तकनीकी टीम द्वारा प्राथमिकता के आधार पर समस्या का जल्द से जल्द निराकरण किया जाएगा

 

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