दतिया उपचुनाव: BJP टिकट पर बवाल, आशुतोष तिवारी के नाम से नाराज़ समर्थकों ने NH-44 पर 15 किमी लंबा जाम लगाया

दतिया

दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं।

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटते ही शुरू हुआ विरोध
भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जताई। विरोध के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा संगठन के कई पदाधिकारियों और दतिया नगर के पार्षदों ने भी इस्तीफे की घोषणा कर दी।

समर्थकों ने किया प्रदर्शन, NH-44 पर लगाया जाम
पार्टी के फैसले के विरोध में नाराज समर्थक सड़क पर उतर आए। उन्होंने नेशनल हाईवे-44 पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टिकट वितरण में लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ताओं की भावनाओं की अनदेखी की गई है।

उपचुनाव की वजह
उपचुनाव की वजह कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अयोग्यता है. बैंक फ्रॉड मामले में कोर्ट ने उन्हें सजा दी, जिसके बाद सीट खाली हुई. 30 जुलाई को वोटिंग होनी है. कांग्रेस अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाई है। 

नरोत्तम मिश्रा
नरोत्तम मिश्रा दतिया में मजबूत नेता माने जाते हैं. 2023 के चुनाव में वे कांग्रेस के भारती से हारे थे, लेकिन अब वापसी की तैयारी में थे. उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था. टिकट कटने से उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लग गई है। 

आशुतोष तिवारी
आशुतोष तिवारी RSS से जुड़े हैं और पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं. टिकट मिलने के बाद उन्होंने मिश्रा का आशीर्वाद मांगा, लेकिन जमीनी स्तर पर समर्थक मानने को तैयार नहीं. यह फैसला पार्टी की आंतरिक रणनीति का हिस्सा लगता है। 

प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहे. ग्वालियर-झांसी हाईवे पर भी असर पड़ा. महिला कार्यकर्ताओं ने भी विरोध में हिस्सा लिया. पुलिस ने जाम खोलने की कोशिश की. स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। 

मिश्रा के समर्थक पार्टी से वफादार रहे हैं, लेकिन टिकट विवाद ने दरार पैदा कर दी. पार्टी हाईकमान अब स्थिति संभालने में जुटा है. अगर बगावत जारी रही तो BJP को नुकसान हो सकता है. आगे क्या होता है, यह देखना होगा. कुल मिलाकर यह स्थानीय नेतृत्व और हाईकमान के बीच टकराव का उदाहरण है। 

बीजेपी नेता का पुलिस पर आरोप
भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने आजतक से बात करते हुए कहा, ‘ हम लोग शांतिपूर्ण तरीके से भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से ये मांग कर रहे थे कि दतिया का जो टिकट हुआ है उसे वापस लिया जाए और नरोत्तम मिश्रा जी को टिकट दिया जाए. हम संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रख रहे थे. हम लोगों ने पूरी रात रामधुन गाकर भारतीय जनता पार्टी से मांग करते हुए कहा कि टिकट नरोत्तम जी को दिया जाए लेकिन पुलिस प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और दतिया कलेक्टर की बर्बरता देखिए कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को दफ्तर में कैद कर दिया. जब तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी को टिकट नहीं मिलेगा तब तक हम लोग चक्का जाम करेंगे। 

क्यों नाराज हैं नरोत्तम मिश्रा के समर्थक?
दरअसल, बीजेपी ने शुक्रवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए सीनियर नेता नरोत्तम मिश्रा का पत्ता काटते हुए आशुतोष तिवारी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया. पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों को पूरा भरोसा था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और उन्होंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था। 

जैसे ही आशुतोष तिवारी के नाम का ऐलान हुआ, नरोत्तम मिश्रा के समर्थक सड़कों पर उतर आए. कुछ समर्थक शर्ट उतारकर सड़क पर लेट गए और ‘नरोत्तम दादा’ को टिकट न मिलने पर बीजेपी छोड़ने तक की धमकी देने लगे. हालांकि, टिकट मिलने के बाद आशुतोष तिवारी ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा उनके अभिभावक हैं और उन्होंने उनके लिए चुनाव प्रचार करने की बात कही है। 

क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव? 
साल 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेता राजेन्द्र भारती ने तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों से हरा दिया था. लेकिन इसी साल (2026) अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में 3 साल की सजा सुना दी. सजा मिलने के कारण राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द हो गई, जिसके चलते दतिया सीट खाली हो गई और यहां उपचुनाव हो रहा है. यहां 30 जुलाई को वोट डाले जाएंगे औऱ 3 अगस्त को नतीजे घोषित होंगे.

 

उपचुनाव से पहले बीजेपी के लिए बढ़ी चुनौती
दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले भाजपा के भीतर बढ़ता असंतोष पार्टी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को समय रहते नहीं मनाया गया, तो इसका असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।

अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर नजर
दतिया में बढ़ते विरोध के बाद अब सभी की नजर भाजपा नेतृत्व पर टिकी है। पार्टी किस तरह नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरती है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। वहीं, विपक्ष भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

EPFO की ‘VISHWAS-2026’ योजना लागू: देर से PF जमा करने वाले प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत

विवेक झा, भोपाल। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देशभर के लाखों नियोक्ताओं और प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत देते हुए “VISHWAS-2026” योजना लागू कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित यह विशेष योजना उन प्रतिष्ठानों के लिए लाई गई है जिन पर भविष्य निधि (PF) अंशदान समय पर जमा नहीं करने के कारण धारा 14B के अंतर्गत हर्जाना (Damages) लगाया गया है या ऐसे मामले विभिन्न न्यायिक मंचों पर लंबित हैं।

योजना का उद्देश्य वर्षों से लंबित विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान (Amicable Settlement) करना, मुकदमेबाजी कम करना, उद्योगों को राहत देना तथा EPFO और नियोक्ताओं के बीच विवादों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करना है। योजना 29 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है और अधिसूचना की तिथि से छह माह तक लागू रहेगी।

क्या है VISHWAS-2026 योजना?

EPFO द्वारा शुरू की गई VISHWAS-2026 एक विशेष निपटान योजना है, जिसके तहत भविष्य निधि अंशदान में विलंब के कारण लगाए जाने वाले हर्जाने (Damages) की पुनर्गणना रियायती दरों पर की जाएगी। इससे पात्र प्रतिष्ठानों को पहले की तुलना में कम आर्थिक भार उठाना पड़ेगा।

हालांकि, इस योजना का लाभ लेने के लिए संबंधित प्रतिष्ठान को विलंब अवधि का पूरा ब्याज (Interest) पहले जमा करना अनिवार्य होगा। ब्याज जमा किए बिना योजना का लाभ नहीं मिलेगा। साथ ही प्रतिष्ठान को यह भी लिखित घोषणा देनी होगी कि विवाद समाप्त होने के बाद वह उसी मामले में आगे कोई अपील या न्यायिक कार्यवाही नहीं करेगा।

किन मामलों में मिलेगा योजना का लाभ?

EPFO ने योजना के दायरे में चार प्रमुख श्रेणियों के मामलों को शामिल किया है—

  • वे मामले जो वर्तमान में किसी न्यायालय, ट्रिब्यूनल अथवा अन्य न्यायिक मंच पर लंबित हैं।
  • ऐसे प्रकरण जिनमें धारा 14B के तहत आदेश पारित हो चुका है, लेकिन पूरी राशि अभी वसूल नहीं हुई है।
  • ऐसे मामले जिनमें नोटिस जारी हो चुका है लेकिन अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ।
  • ऐसे प्रकरण जिनमें अभी नोटिस जारी होना शेष है।

इससे बड़ी संख्या में ऐसे उद्योगों और प्रतिष्ठानों को राहत मिलने की संभावना है जो लंबे समय से विवादों में उलझे हुए हैं।

कम दर पर लगेगा हर्जाना

VISHWAS-2026 के तहत 14 जून 2024 से पहले की डिफॉल्ट अवधि के लिए हर्जाने की विशेष रियायती दरें निर्धारित की गई हैं।

  • 2 माह तक की देरी: 0.25 प्रतिशत प्रतिमाह
  • 2 से 4 माह से कम की देरी: 0.50 प्रतिशत प्रतिमाह
  • 4 माह से अधिक की देरी: 1 प्रतिशत प्रतिमाह

यह दरें सामान्य प्रावधानों की तुलना में काफी राहत प्रदान करती हैं और योजना का सबसे बड़ा आकर्षण मानी जा रही हैं।

पहले ब्याज जमा करना होगा अनिवार्य

ईपीएफओ के अपर केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त (मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़) श्री गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि योजना का लाभ तभी मिलेगा जब संबंधित प्रतिष्ठान विलंब अवधि का संपूर्ण ब्याज पहले जमा करेगा। इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन करते समय यह घोषणा भी देनी होगी कि विवाद समाप्त होने के बाद उसी विषय पर आगे कोई अपील दायर नहीं की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबित विवादों का स्थायी समाधान संभव होगा और न्यायालयों पर भी बोझ कम पड़ेगा।

ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया

EPFO ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया है। आवेदन केवल Employer Portal के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे।

आवेदन के लिए नियोक्ता को—

  • डिजिटल सिग्नेचर (DSC) अथवा ई-साइन से आवेदन प्रमाणित करना होगा।
  • डिफॉल्ट अवधि, आदेश संख्या, आदेश तिथि और जमा की गई राशि का विवरण देना होगा।
  • ब्याज जमा करने का प्रमाण अपलोड करना होगा।
  • आवश्यक घोषणा एवं सहमति देनी होगी।

आवेदन जमा होने के बाद उसकी जांच क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की जाएगी तथा स्वीकृति मिलने पर ऑनलाइन चालान जारी होगा। भुगतान के बाद डिजिटल प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।

कौन नहीं उठा सकेगा योजना का लाभ?

EPFO ने कुछ मामलों को योजना से बाहर रखा है। इनमें प्रमुख रूप से—

  • ऐसे प्रतिष्ठान जिनसे हर्जाने की पूरी राशि पहले ही वसूल की जा चुकी है।
  • धोखाधड़ी, गबन अथवा रिकॉर्ड में जानबूझकर फर्जीवाड़े से जुड़े मामले।
  • ऐसे प्रकरण जिनमें ब्याज की राशि पूरी तरह जमा नहीं की गई है।

ऐसे मामलों में VISHWAS-2026 लागू नहीं होगी।

आंशिक भुगतान वालों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था

श्री गौतम के बताया कि यदि किसी प्रतिष्ठान ने पहले ही हर्जाने की कुछ राशि जमा कर दी है, तो उसकी भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है।

यदि पहले जमा की गई राशि नई गणना से अधिक है तो अतिरिक्त राशि वापस नहीं मिलेगी और न ही किसी अन्य प्रकरण में समायोजित होगी। वहीं यदि पहले जमा की गई राशि नई गणना से कम है तो केवल अंतर की राशि जमा करनी होगी।

क्षेत्रीय कार्यालयों में बनेगा विशेष ‘विष्वास हेल्प डेस्क’

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए EPFO ने प्रत्येक क्षेत्रीय एवं जिला कार्यालय में ‘Vishwas Cell’ और समर्पित Help Desk स्थापित करने के निर्देश दिए हैं।

साथ ही प्रत्येक कार्यालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो पात्र प्रतिष्ठानों से संपर्क करेगा, उद्योग संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करेगा तथा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करेगा।

उद्योगों और नियोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

श्रम एवं उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार VISHWAS-2026 योजना से हजारों उद्योगों और प्रतिष्ठानों को राहत मिलेगी। लंबे समय से चल रहे विवाद समाप्त होंगे, मुकदमेबाजी घटेगी और उद्योगों का समय तथा धन दोनों की बचत होगी।

इसके साथ ही EPFO को भी वर्षों से लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, राजस्व संग्रहण में तेजी तथा प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

नियोक्ताओं को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जिन प्रतिष्ठानों पर धारा 14B के अंतर्गत कार्रवाई लंबित है या नोटिस प्राप्त हो चुका है, वे अपने रिकॉर्ड की समीक्षा कर जल्द से जल्द योजना की पात्रता जांचें। ब्याज का भुगतान कर निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने से वे इस विशेष राहत योजना का लाभ उठा सकते हैं।


बॉक्स : VISHWAS-2026 एक नजर में

योजना लागू: 29 जून 2026 से
अवधि: 6 माह
उद्देश्य: धारा 14B के अंतर्गत हर्जाना विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान
लाभार्थी: पात्र नियोक्ता एवं प्रतिष्ठान
आवेदन प्रक्रिया: पूरी तरह ऑनलाइन
मुख्य शर्त: संबंधित अवधि का पूरा ब्याज पहले जमा करना अनिवार्य
सुविधा: कम दर पर हर्जाने की पुनर्गणना, डिजिटल स्वीकृति और प्रमाणपत्र

किन्हें मिलेगा सबसे अधिक लाभ?

  • उद्योग एवं विनिर्माण इकाइयाँ
  • एमएसएमई प्रतिष्ठान
  • व्यापारिक प्रतिष्ठान
  • निजी संस्थान एवं कंपनियाँ
  • स्कूल, कॉलेज एवं शैक्षणिक संस्थान
  • अस्पताल एवं सेवा क्षेत्र के प्रतिष्ठान
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, श्रम सलाहकार एवं अनुपालन विशेषज्ञ, जो अपने ग्राहकों के लंबित मामलों का समाधान कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि VISHWAS-2026 केवल एक राहत योजना नहीं, बल्कि EPFO और नियोक्ताओं के बीच विश्वास बढ़ाने, अनुपालन को प्रोत्साहित करने और वर्षों से लंबित विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।

VISHWAS-2026: EPFO की नई राहत योजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब (FAQs)

नियोक्ताओं, उद्योगों, सीए, एचआर प्रोफेशनल्स और श्रम सलाहकारों के लिए उपयोगी मार्गदर्शिका

EPFO द्वारा शुरू की गई “VISHWAS-2026” योजना को लेकर नियोक्ताओं, उद्योगों और कर एवं श्रम सलाहकारों के बीच कई सवाल हैं। यहां इस योजना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल हिंदी में विस्तृत उत्तर दिए जा रहे हैं।


Q1. VISHWAS-2026 क्या है?

उत्तर:
VISHWAS-2026 कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा शुरू की गई एक वन-टाइम (One Time) विशेष राहत योजना है। इसका उद्देश्य उन प्रतिष्ठानों को राहत देना है जिन पर EPF अधिनियम की धारा 14B अथवा सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security), 2020 की धारा 128 के तहत विलंब से PF जमा करने के कारण हर्जाना (Damages) लगाया गया है।

इस योजना के अंतर्गत पात्र प्रतिष्ठान कम दरों पर हर्जाना जमा कर अपने पुराने विवादों का समयबद्ध समाधान कर सकते हैं।


Q2. VISHWAS-2026 कितने समय तक लागू रहेगी?

उत्तर:
यह योजना अधिसूचना जारी होने की तिथि से 6 महीने तक लागू रहेगी।

यदि आवश्यकता हुई तो केंद्र सरकार इसे अधिकतम 6 महीने अतिरिक्त बढ़ा सकती है।


Q3. किन मामलों को योजना में शामिल किया गया है?

उत्तर:
VISHWAS-2026 निम्न प्रकार के मामलों पर लागू होगी—

1. न्यायालय या ट्रिब्यूनल में लंबित मामले

जहां धारा 14B के तहत आदेश जारी हो चुका है और मामला किसी कोर्ट, CGIT या अन्य न्यायिक मंच पर लंबित है।

2. आदेश जारी हो चुका लेकिन वसूली बाकी है

जहां हर्जाना निर्धारित हो चुका है लेकिन पूरी राशि अभी वसूल नहीं हुई है।

3. नोटिस जारी हो चुका है लेकिन अंतिम आदेश नहीं आया

ऐसे मामलों में भी योजना का लाभ मिलेगा।

4. जहां अभी नोटिस भी जारी नहीं हुआ

यदि कार्रवाई प्रारंभ नहीं हुई है, तब भी पात्र होने पर योजना लागू हो सकती है।


Q4. किन मामलों में VISHWAS-2026 का लाभ नहीं मिलेगा?

उत्तर:
निम्न मामलों को योजना से बाहर रखा गया है—

  • जहां हर्जाने (Damages) की पूरी राशि पहले ही वसूल की जा चुकी है।
  • धोखाधड़ी (Fraud), गबन (Misappropriation) या जानबूझकर रिकॉर्ड में हेराफेरी से जुड़े मामले।
  • जहां संबंधित ब्याज (Interest) की पूरी राशि जमा नहीं की गई है।

नियोक्ताओं (Employers) के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

Q5. VISHWAS-2026 के तहत हर्जाने की नई दरें क्या हैं?

विलंब अवधि नई हर्जाना दर
2 माह से कम 0.25% प्रति माह
2 माह से 4 माह से कम 0.50% प्रति माह
4 माह या अधिक 1.00% प्रति माह

इन दरों पर हर्जाने की पुनर्गणना की जाएगी।


Q6. आवेदन कैसे करें?

उत्तर:
आवेदन केवल EPFO Employer Portal पर ऑनलाइन किया जाएगा।

Employer Portal में लॉगिन करने के बाद “VISHWAS-2026” विकल्प चुनकर आवेदन करना होगा।


Q7. आवेदन के साथ कौन-कौन से दस्तावेज लगाने होंगे?

आवेदन की श्रेणी के अनुसार निम्न दस्तावेज आवश्यक होंगे—

  • धारा 14B का आदेश या नोटिस
  • यदि मामला कोर्ट में लंबित है तो उसका विवरण
  • पहले जमा की गई राशि (Challan) का विवरण
  • निर्धारित प्रारूप में Undertaking

Q8. नई गणना (Recalculation) की जानकारी कैसे मिलेगी?

उत्तर:
आवेदन की जांच के बाद EPFO पुनर्गणना की गई हर्जाना राशि Employer Portal पर उपलब्ध कराएगा।


Q9. पुनर्गणना की गई राशि कितने दिन में जमा करनी होगी?

उत्तर:
Employer को सूचना मिलने के 15 दिनों के भीतर राशि जमा करनी होगी।

यदि किसी कारणवश 15 दिन में भुगतान संभव नहीं हो तो अतिरिक्त 15 दिनों का समय लेने के लिए आवेदन किया जा सकता है।


Q10. यदि समय पर भुगतान नहीं किया तो क्या होगा?

उत्तर:
यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो—

  • आवेदन स्वतः निरस्त (Forfeited) माना जाएगा।
  • उस मामले में VISHWAS-2026 का लाभ नहीं मिलेगा।
  • मूल कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

Q11. Vishwas-2026 Certificate क्या है?

उत्तर:
पूरी राशि जमा होने के बाद EPFO एक डिजिटल हस्ताक्षरित Vishwas-2026 Certificate जारी करेगा।

यह प्रमाणपत्र इस बात का अंतिम प्रमाण होगा कि मामला योजना के तहत निपटा दिया गया है।

यदि मामला कोर्ट या CGIT में लंबित है तो इस प्रमाणपत्र के आधार पर अपील वापस ली जा सकेगी।


Q12. क्या Principal Contribution या Interest माफ होगा?

उत्तर:
नहीं।

इस योजना में—

  • PF Contribution माफ नहीं होगा।
  • Interest भी माफ नहीं होगा।

केवल Damages (हर्जाना) में राहत दी जाएगी।


फील्ड ऑफिस से जुड़े प्रश्न

Q13. आवेदन किस कार्यालय में प्रोसेस होंगे?

उत्तर:
संबंधित Regional Office अथवा District Office की PD Cell / Compliance Section द्वारा Vishwas Module के माध्यम से आवेदन प्रोसेस किए जाएंगे।


Q14. हर्जाने की पुनर्गणना कैसे होगी?

उत्तर:
Recalculation केवल EPFO के System Based Calculation Tool से की जाएगी।

जहां आवश्यक होगा वहां सिस्टम में उपलब्ध डेटा के आधार पर सत्यापन कर अंतिम गणना सिस्टम द्वारा ही की जाएगी।


Q15. क्या Manual Calculation होगी?

उत्तर:
सामान्यतः नहीं।

लेकिन यदि मूल आदेश और अंतिम देय राशि में अंतर हो तो उचित कारण दर्ज करते हुए सीमित Manual Intervention किया जा सकता है।

अंतिम गणना फिर भी सिस्टम द्वारा ही की जाएगी।


Q16. Appeal के लिए पहले जमा की गई राशि का क्या होगा?

यदि Appeal दाखिल करने के लिए EPFO में Pre-deposit किया गया है तो—

यदि जमा राशि कम है

Employer को केवल अंतर (Difference) की राशि जमा करनी होगी।

यदि जमा राशि अधिक है

अतिरिक्त राशि को भविष्य के अन्य 14B आदेशों या आगामी नोटिसों में समायोजित किया जा सकता है।


Q17. यदि Pre-deposit किसी अन्य Authority के पास जमा है तो?

उत्तर:
नहीं।

केवल EPFO के पास जमा Pre-deposit को ही मान्य माना जाएगा।


Q18. Certificate मिलने के बाद क्या होगा?

  • लंबित Appeal स्वतः समाप्त (Abated) मानी जाएगी।
  • Certificate के आधार पर Court या CGIT से मामला वापस लिया जा सकेगा।

Q19. यदि Employer नई राशि स्वीकार नहीं करता तो?

यदि Employer—

  • नई गणना स्वीकार नहीं करता
  • या समय पर भुगतान नहीं करता

तो VISHWAS-2026 का लाभ समाप्त हो जाएगा और पुरानी कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।


Q20. योजना की मॉनिटरिंग कैसे होगी?

EPFO द्वारा ऑनलाइन MIS Dashboard तैयार किया जाएगा जिसमें—

  • कुल आवेदन
  • स्वीकृत आवेदन
  • अस्वीकृत आवेदन
  • वसूली गई राशि
  • क्षेत्रवार प्रदर्शन
  • जोनवार प्रदर्शन

की निगरानी की जाएगी।


Q21. क्या योजना की अवधि अनिश्चित (Open Ended) है?

उत्तर:
नहीं।

यह सीमित अवधि की योजना है।

सामान्य परिस्थितियों में इसकी अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी। इसलिए पात्र प्रतिष्ठानों को समय रहते आवेदन करना चाहिए।


Q22. क्या कर्मचारियों के हित सुरक्षित रहेंगे?

उत्तर:
हाँ। पूरी तरह सुरक्षित।

EPFO ने स्पष्ट किया है कि VISHWAS-2026 केवल हर्जाने (Damages) में राहत देती है।

  • कर्मचारियों का PF सुरक्षित रहेगा।
  • Interest सुरक्षित रहेगा।
  • Social Security Benefits पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार पूरी तरह संरक्षित रहेंगे।

VISHWAS-2026: एक नजर में

विषय जानकारी
योजना का नाम VISHWAS-2026
लागू करने वाली संस्था EPFO
उद्देश्य Damages विवादों का सौहार्दपूर्ण निपटारा
लाभ कम दर पर Damages का भुगतान
अवधि 6 माह
आवेदन केवल ऑनलाइन
Principal एवं Interest माफ नहीं होंगे
राहत केवल Damages में
Certificate Digital Vishwas-2026 Certificate जारी होगा
कर्मचारी हित पूरी तरह सुरक्षित

विशेष सलाह

यदि आपके प्रतिष्ठान पर EPF से संबंधित धारा 14B का कोई नोटिस, आदेश या लंबित मामला है, तो अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट, श्रम सलाहकार या विधिक विशेषज्ञ से तत्काल संपर्क कर योजना की पात्रता की जांच कराएं। सीमित अवधि की यह योजना पुराने विवादों को कम लागत में समाप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए मध्यप्रदेश बन रहा प्रमुख निवेश का केन्द्र

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए मध्यप्रदेश बन रहा प्रमुख निवेश का केन्द्र

एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में जीसीसी क्षेत्र के विशेषज्ञ करेंगे मंथन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए देश के उभरते हुए निवेश गंतव्यों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। कुशल मानव संसाधन, प्रतिस्पर्धी संचालन लागत, उत्कृष्ट अधोसंरचना और उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण प्रदेश वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। इसी उद्देश्य से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के माध्यम से 13 जुलाई को भोपाल में आयोजित होने वाले एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 में जीसीसी राउंडटेबल का आयोजन किया जाएगा।

“ भारत का अगला जीसीसी विकास गंतव्य : मध्यप्रदेश में प्रतिभा, लागत एवं नवाचार का लाभ” विषय पर आयोजित राउंडटेबल में देश-विदेश की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियाँ, जीसीसी संचालक, उद्योग विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और शिक्षाविद शामिल होगें। इसमें भारत में जीसीसी क्षेत्र के विस्तार, निवेश की संभावनाओं, प्रतिभा विकास और नवाचार आधारित विकास पर विचार-विमर्श होगा।

मध्यप्रदेश की जीसीसी नीति-2025 वैश्विक कंपनियों को राज्य में जीसीसी स्थापित करने और विस्तार देने के लिए व्यापक प्रोत्साहन उपलब्ध कराती है। नीति के अंतर्गत परियोजना लागत का 40 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान, रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन, किराया सहायता, अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) प्रोत्साहन, कौशल विकास सहयोग, गुणवत्ता प्रमाणीकरण सहायता, भूमि रियायत और स्टाम्प शुल्क एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

प्रदेश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, बड़ी संख्या में उपलब्ध इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन स्नातक, बेहतर कनेक्टिविटी और अपेक्षाकृत कम संचालन लागत मध्यप्रदेश को जीसीसी निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं। राउंडटेबल में टीसीएस, कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, टेलीपरफॉर्मेंस, आर1 आरसीएम ग्लोबल, थोलॉन्स और लाइटकास्ट इंडिया सहित अनेक अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उच्च शिक्षा और तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

जीसीसी राउंडटेबल से मध्यप्रदेश में वैश्विक क्षमता केंद्रों के निवेश को नई गति मिलेगी। इससेउद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इंजीनियरिंग, वित्त , अनुसंधान, एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होगें।

 

ज्ञान भारतम् मिशन की बड़ी खोज, बुरहानपुर में मिली 220 साल पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि

भोपाल
 बुरहानपुर निवासी आदित्य हरिकृष्ण शर्मा के पास से 220 वर्ष पुरानी टीका मिली है। विक्रम संवत 1862 (1805–1806 ईस्वी ) की हस्तलिखित यह टीका कागज पर अंकित है। यह संस्कृत व्याकरण और सुलेखन की दृष्टि से अद्वितीय है।

एकरूपी लेखनबद्धता एवं शब्दों की व्यवस्थित लिखावट से प्रतीत होता है कि यह किसी प्रशिक्षित विद्वान लेखक द्वारा लिखी गई थी।

राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों संग्रह
मध्य प्रदेश के पुरातत्व आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि पांडुलिपियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रारंभ किए गए ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत सर्वेक्षण और संग्रहण कार्य के अंतर्गत यह टीका मिली है।

उन्होंने बताया कि इस पांडुलिपि के भाषा विन्यास एवं लिपि शैली से इस पर राजस्थान, ब्रज एवं मालवा बोलियों का संयुक्त प्रभाव दिखाई देता है।

पूर्वजों से प्राप्त हुआ ग्रंथ
संग्रहकर्ता परिवार के लोगों ने बताया कि यह ग्रंथ उन्हें उनकी परदादी स्वर्गीय देवकी बाई से प्राप्त हुआ था। यह परिवार आज भी इस हस्तलिखित पवित्र धार्मिक ग्रंथ को नित्य पूजन एवं भोग लगाते हैं।

 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के हित में बढ़ाया सामाजिक सुरक्षा का दायरा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने संविदा कर्मचारियों के हित में बढ़ाया सामाजिक सुरक्षा का दायरा

दिवंगत संविदा कर्मचारी के आश्रित को मृत्यु उपरांत ग्रेच्यूटी का किया गया भुगतान

भोपाल 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश ने संविदा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण पहल करते हुए उनके और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत किया है। अब पात्र संविदा कर्मचारियों तथा सेवा अवधि के दौरान निधन होने की स्थिति में उनके आश्रितों को उपादान (ग्रेच्युटी) राशि का लाभ दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों के परिजन को कठिन समय में आर्थिक संबल मिलेगा। इसी क्रम में 8 जुलाई को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत पहली बार एक दिवंगत संविदा कर्मचारी के आश्रित को मृत्यु उपरांत उपादान राशि का भुगतान किया गया। संविदा कर्मचारियों के कल्याण और उनके परिवारों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रयास है।

अपर मिशन संचालक एनएचएम श्रीमती दिशा प्रणय नागवंशी ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र के पालन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा 26 अगस्त 2025 से उपादान भुगतान की प्रक्रिया लागू की गई है। उपादान भुगतान अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार 1 सितम्बर 2025 के बाद सेवा पूर्ण करने वाले पात्र संविदा अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह लाभ दिया जाएगा। सेवा अवधि के दौरान किसी कर्मचारी के निधन की स्थिति में उनके आश्रित भी इसके पात्र होंगे।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा संविदा कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को अनुग्रह राशि, अनुकम्पा नियुक्ति और उपादान जैसे महत्वपूर्ण वैधानिक लाभ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कर्मचारियों के हितों के संरक्षण तथा उनके परिवारों को सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

 

नशा, नाश की जड़ है, जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों को कर देता है बर्बाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नशा, नाश की जड़ है, जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों को कर देता है बर्बाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वर्ष 2029 तक देश को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध
प्रदेश में 15 से 30 जुलाई तक चलेगा “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से की नशा मुक्त मध्यप्रदेश अभियान को सफल बनाने की अपील

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस विकास यात्रा में युवा शक्ति रचनात्मक भूमिका निभा रही है। सभी नागरिक भी विकासात्मक गतिविधियों से स्वयं को जोड़कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। नशे की प्रवृत्ति समाज की विकास यात्रा पर कुठाराघात करती है। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नशा मुक्त मध्यप्रदेश बनाने के लिए कार्य कर रही है। नशे से लड़ाई में पूरा देश एकजुट है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने हर तरह के नशे पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक अभियान की शुरुआत की है। नशा, नाश की जड़ है, जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों को भी बर्बाद कर देता है। नशे से सभी प्रकार की रचनात्मकता और आगे बढ़ने की संभावनाओं पर कुठाराघात होता है, वर्तमान और भविष्य दोनों खराब होते हैं। नशा परिवारों को बर्बाद कर देता है। राज्य सरकार ने अपनी समस्त क्षमताओं के साथ प्रदेशवासियों के सहयोग से नशे के खिलाफ अभियान आरंभ किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संदेश में प्रदेशवासियों से ‘नशा मुक्त मध्यप्रदेश’ अभियान में हरसंभव सहयोग प्रदान करने और अभियान को समर्थन देने का आव्हान किया है।

राज्य सरकार प्रदेशवासियों के सहयोग से नशे के विरूद्ध अभियान में होगी सफल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘नशामुक्त भारत’ के संकल्प तथा केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह के वर्ष 2029 तक भारत को पूर्णत: नशामुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूर्णत: प्रतिबद्ध है। इस दिशा में जनभागीदारी के साथ निरंतर कार्य जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने नक्सलवाद जैसी बड़ी लड़ाई में भी विजय प्राप्त की है। राज्य सरकार प्रदेशवासियों के सहयोग से नशे के विरूद्ध अभियान में भी सफल होगी।

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जाएगा अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बाबा महाकाल हमारे साथ हैं, हम नशामुक्त मध्यप्रदेश के निर्माण में सफल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी प्रदेशवासियों और युवाओं से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 से 30 जुलाई तक चलाए जाने वाले “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान से जुड़ने का आहवान किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज 11 जुलाई को इंदौर में मध्यप्रदेश युवा कॉन्क्लेव-2026 का करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज 11 जुलाई को इंदौर में मध्यप्रदेश युवा कॉन्क्लेव-2026 का करेंगे शुभारंभ

प्रदेश के 5 हजार युवा होंगे शामिल, क्रांति और ज्ञान के संगम का साक्षी बनेगा इंदौर
युवाओं के संकल्पों से तैयार होगा मध्यप्रदेश युवा संकल्प-2026
 राज्य स्तरीय युवा पुरस्कारों की होगी घोषणा

 इंदौर 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मध्यप्रदेश युवा कॉन्क्लेव-2026 का शुभारंभ करेंगे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 5 हजार युवाओं की सहभागिता वाले इस महाआयोजन का उद्देश्य युवा शक्ति को प्रदेश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, उनके विचारों को नीति निर्माण में शामिल करना तथा विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। कॉन्क्लेव में शिक्षा, खेल, उद्यमिता, कृषि, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, संस्कृति , पर्यावरण तथा सामाजिक विकास सहित 10 प्रमुख क्षेत्रों के युवा सहभागिता करेंगे।

कॉन्क्लेव की विशेषता क्रांति और ज्ञान के संगम का प्रतीक दो प्रेरक रैलियां होंगी। अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद की जन्मस्थली चन्द्रशेखर आज़ाद नगर (भाबरा) से प्रारंभ हुई आज़ाद युवा बाइक रैली तथा आदि शंकराचार्य की दीक्षा भूमि ओंकारेश्वर से प्रारंभ हुई शंकर संकल्प साइकिल यात्रा ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर पहुंचकर एक साथ अपने गंतव्य पर पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव दोनों रैलियों के प्रतिभागियों का स्वागत एवं सम्मान करेंगे।

कॉन्क्लेव में युवाओं को विभिन्न विषयगत समूहों में विभाजित कर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं में युवा स्वयं अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े सुझावों, नवाचारों और भावी कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श कर क्रियान्वयन योग्य संकल्प तैयार करेंगे।

कार्यशालाओं में शिक्षा एवं कौशल विकास, खेल एवं स्वास्थ्य, एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप, कृषि-उद्यानिकी एवं पर्यावरण तथा जन अभियान, संस्कृति एवं पर्यटन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। प्रत्येक समूह द्वारा तैयार किए गए संकल्पों की प्रस्तुति मुख्य मंच से की जाएगी।

कॉन्क्लेव में प्राप्त सभी सुझावों एवं संकल्पों का समेकन कर ‘मध्यप्रदेश युवा संकल्प-2026’ दस्तावेज तैयार किया जाएगा। उपस्थित युवा सामूहिक रूप से प्रदेश के विकास, नवाचार , सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण का संकल्प लेंगे। यह संकल्प दस्तावेज मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपा जाएगा तथा आगे आवश्यक कार्यवाही के लिए संबंधित विभागों को प्रेषित किया जाएगा।

कॉन्क्लेव में इंदौर की पारंपरिक खान-पान संस्कृति पर आधारित फूड स्ट्रीट का संचालन स्थानीय युवा उद्यमियों एवं स्व-सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा। वहीं स्थानीय युवा बैंड एवं लोक-फ्यूजन कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस आयोजन का आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के युवाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चार नई राज्य स्तरीय युवा पुरस्कार श्रेणियों की घोषणा भी करेंगे। इनमें मुख्यमंत्री युवा शिखर सम्मान, मुख्यमंत्री युवा नवाचार पुरस्कार, मुख्यमंत्री युवा समाज सेवा पुरस्कार तथा मुख्यमंत्री युवा कला-क्रीड़ा गौरव पुरस्कार शामिल हैं। इन पुरस्कारों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले युवाओं को सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया जाएगा।

मध्यप्रदेश युवा कॉन्क्लेव-2026 युवा शक्ति, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना का ऐसा साझा मंच बनेगा, जहां युवाओं के विचार प्रदेश के विकास के संकल्प में परिवर्तित होंगे और विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण में उनकी सहभागिता को नई दिशा मिलेगी।

 

भोपाल में डाबर का ‘पुदीना – द वंडर हर्ब’ अभियान लॉन्च

भोपाल, 8 जुलाई। आयुर्वेदिक स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में देश की अग्रणी विज्ञान-आधारित आयुर्वेदिक कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड ने भोपाल में ‘पुदीना – द वंडर हर्ब’ अभियान की शुरुआत की। अभियान का उद्देश्य लोगों को पुदीना के औषधीय गुणों, पाचन संबंधी लाभों और गर्मी के मौसम में इसके प्राकृतिक उपयोग के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में आयुर्वेद विशेषज्ञों और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुदीना को प्राकृतिक स्वास्थ्य संरक्षण का प्रभावी माध्यम बताते हुए इसके नियमित और सुरक्षित उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी।

गर्मी में पाचन संबंधी समस्याओं का प्राकृतिक समाधान

कार्यक्रम में पीटीकेएलएस शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, भोपाल की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शुचि दुबे ने कहा कि पुदीना एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर एक महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी है, जो विशेष रूप से गर्मी के मौसम में शरीर के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होती है।

उन्होंने बताया कि बढ़ते तापमान और लगातार पड़ रही गर्मी की लहरों के कारण अपच, गैस, एसिडिटी, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में पुदीना शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।

3,000 वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक विरासत का हिस्सा है पुदीना

डॉ. शुचि दुबे ने कहा कि आयुर्वेद में पुदीना का उल्लेख हजारों वर्षों से मिलता है और इसे ‘वंडर हर्ब’ यानी चमत्कारी जड़ी-बूटी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि पुदीना में पाया जाने वाला मेन्थॉल पाचन संबंधी एंजाइमों को सक्रिय करता है, जिससे भोजन का पाचन बेहतर होता है और पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

उन्होंने कहा कि यह अपच, पेट की ऐंठन, अम्लता, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं में प्राकृतिक रूप से राहत पहुंचाने में सहायक माना जाता है। आयुर्वेदिक पद्धति में पुदीना को पाचन शक्ति बढ़ाने वाली प्रमुख जड़ी-बूटियों में शामिल किया गया है।

प्राकृतिक उपचार की ओर बढ़ रही लोगों की रुचि

डाबर इंडिया लिमिटेड के हेड – सीएसआर एवं कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन, ब्यास आनंद ने कहा कि बदलती जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या के कारण लोगों को ऐसे प्राकृतिक स्वास्थ्य समाधानों की आवश्यकता है, जो प्रभावी होने के साथ सुरक्षित भी हों।

उन्होंने कहा कि डाबर लंबे समय से आयुर्वेद आधारित उत्पादों के माध्यम से लोगों को दैनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्राकृतिक समाधान उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रहा है। गर्मियों में पेट संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं और ऐसे में पुदीना आधारित आयुर्वेदिक उत्पाद गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत देने में सहायक हो सकते हैं।

रासायनिक एंटासिड के विकल्प के रूप में आयुर्वेद

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि वर्तमान में बाजार में उपलब्ध कई एंटासिड दवाओं में एल्यूमीनियम और मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड जैसे रासायनिक तत्व होते हैं, जिनका लंबे समय तक उपयोग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि आयुर्वेदिक विकल्पों का उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप अधिक सुरक्षित और प्राकृतिक माना जाता है। उन्होंने लोगों को स्वयं उपचार करने के बजाय आवश्यकता होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेने की भी सलाह दी।

100 वर्षों से लोगों का भरोसा बना हुआ है ‘पुदीन हरा’

डाबर ने कार्यक्रम में अपने लोकप्रिय आयुर्वेदिक ब्रांड ‘पुदीन हरा’ की जानकारी भी दी। कंपनी के अनुसार यह लगभग 100 वर्ष पुराना भरोसेमंद ब्रांड है, जिसमें पुदीना सत्व प्रमुख घटक के रूप में शामिल है और यह गैस, अपच, पेट दर्द तथा अम्लता जैसी सामान्य पाचन संबंधी समस्याओं में राहत देने के लिए जाना जाता है।

कंपनी ने बताया कि पुदीन हरा टैबलेट, लिक्विड, पाउडर और पुदीन हरा फिज़ सहित विभिन्न स्वरूपों में उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ता अपनी आवश्यकता के अनुसार इसका उपयोग कर सकते हैं।

स्वास्थ्य जागरूकता अभियान का उद्देश्य

डाबर के इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनाने, प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के महत्व को समझाने और विशेष रूप से गर्मी के मौसम में पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीने और प्राकृतिक उपायों को अपनाने पर भी जोर दिया।


पुदीना के प्रमुख लाभ

  • पाचन तंत्र को सक्रिय रखने में सहायक।
  • गैस, अपच और एसिडिटी में राहत देने में उपयोगी।
  • पेट की ऐंठन और मरोड़ को कम करने में मददगार।
  • मेन्थॉल के कारण ठंडक का एहसास कराता है।
  • एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोन्यूट्रिएंट्स से भरपूर।
  • गर्मी के मौसम में शरीर को राहत पहुंचाने में सहायक।

कार्यक्रम की मुख्य बातें

  • भोपाल में डाबर इंडिया ने ‘पुदीना – द वंडर हर्ब’ अभियान लॉन्च किया।
  • आयुर्वेद विशेषज्ञों ने पुदीना के औषधीय गुणों पर विस्तृत जानकारी दी।
  • गर्मियों में पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव के लिए प्राकृतिक उपाय अपनाने की सलाह।
  • डाबर ने अपने आयुर्वेदिक ब्रांड ‘पुदीन हरा’ की उपयोगिता और विभिन्न उत्पादों की जानकारी साझा की।
  • अभियान का उद्देश्य आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य जागरूकता और प्राकृतिक जीवनशैली को बढ़ावा देना है।

AIBOC Appoints CBOA General Secretary K. Ravi Kumar as Co-Chairman of Charter of Demands Committee

Vivek Jha, Bhopal: Preparations for the next wage settlement of public sector bank officers, due from November 2027, have gained momentum with the All India Bank Officers’ Confederation (AIBOC) constituting a high-level committee to draft the Charter of Demands for submission to the Indian Banks’ Association (IBA). In a significant development, K. Ravi Kumar, General Secretary of the Canara Bank Officers’ Association (CBOA), has been appointed as the Co-Chairman of the committee.

The appointment is being viewed as a major recognition of his leadership and experience in representing the interests of bank officers across the country.

Committee to Prepare Charter of Demands for IBA

The newly constituted committee will prepare a comprehensive Charter of Demands covering salary revision, service conditions, allowances, career progression, welfare measures and other employment-related issues concerning bank officers.

The document will serve as the foundation for negotiations between AIBOC and the Indian Banks’ Association (IBA) for the wage settlement scheduled to take effect from November 2027.

Pride for CBOA and Banking Fraternity

Sharing the information, K. K. Tripathi, Vice President of the Canara Bank Officers’ Association (CBOA), said that the appointment of K. Ravi Kumar as Co-Chairman is a matter of pride not only for CBOA but for the entire banking officers’ fraternity.

He expressed confidence that under Ravi Kumar’s leadership, the concerns and aspirations of bank officers would receive stronger representation during the forthcoming wage negotiations.

Two-Day Visit to Bhopal

K. K. Tripathi informed that K. Ravi Kumar will be on a two-day visit to Bhopal on July 12 and 13. During his visit, he will participate in organizational meetings and interact with bank officers to discuss issues concerning the banking sector and the officers’ community.

The visit is also expected to include discussions on organizational strengthening, policy matters and preparations for the upcoming wage settlement.

Expectations Rise Ahead of Wage Negotiations

With the formation of the Charter of Demands Committee, expectations among bank officers have increased regarding the next wage revision. Banking circles believe that apart from salary enhancement, the committee is likely to address important issues such as career advancement, work-life balance, service conditions, allowances and employee welfare.

The banking fraternity expects that a well-structured Charter of Demands will strengthen negotiations with the IBA and help secure a more comprehensive and balanced wage settlement.


What is the Charter of Demands?

The Charter of Demands is an official document prepared by bank officers’ organizations outlining their proposals for salary revision, allowances, service conditions, promotions, welfare measures and other employment-related issues. It forms the basis of negotiations between the officers’ unions and the Indian Banks’ Association (IBA) for the next bipartite wage settlement.

Key Highlights

  • AIBOC has constituted the Charter of Demands Committee for the November 2027 Wage Settlement.
  • K. Ravi Kumar, General Secretary of CBOA, has been appointed Co-Chairman of the committee.
  • The committee will prepare and submit the Charter of Demands to the Indian Banks’ Association (IBA).
  • K. Ravi Kumar will visit Bhopal on July 12-13 for organizational meetings and interactions with bank officers.
  • Banking officers have welcomed the appointment and expressed confidence that it will strengthen representation of officers’ interests during the upcoming wage negotiations.

दतिया में बीजेपी में बगावत: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, आशुतोष तिवारी उम्मीदवार घोषित, सड़क पर उतरे समर्थक

हजारों कार्यकर्ताओं ने हाईवे जाम किया, बाजार रहे बंद; जिलाध्यक्ष समेत पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफे का दावा, समर्थकों ने लगाए सरकार विरोधी नारे।

मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। टिकट घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को अपना अभिभावक बताते हुए उनके मार्गदर्शन में चुनाव लड़ने की बात कही

वहीं, डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में विरोध तेज हो गया। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता जिला कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। विरोध के चलते शहर के कई बाजार भी बंद रहे।

इस बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित कई पदाधिकारियों और सभी भाजपा पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। साथ ही, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ नारेबाजी किए जाने की भी खबर सामने आई है।हालांकि, इस्तीफों, विरोध-प्रदर्शन और अन्य दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पार्टी नेतृत्व की ओर से होना अभी बाकी है। दतिया उपचुनाव में टिकट बदलने के फैसले के बाद भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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