यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा ने सराहा प्रदेश का “महिलाओं के लिये सुरक्षित पर्यटन स्थल” मॉडल

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा’ के विज़न को साकार करते हुए एमपी टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘महिलाओं के लिए सुरक्षित पर्यटन स्थल (STDW)’ परियोजना चलाई जा रही है। इसी क्रम में टूरिज्म बोर्ड में एक विशेष सत्र में यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु शोको इशिकावा ने परियोजना की प्रशिक्षित बालिकाओं से सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों व उपलब्धियों को जाना। यूएन विमेन इंडिया की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव सु शोको इशिकावा ने प्रशिक्षित बालिकाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और कौशल की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित और समावेशी पर्यटन के वैश्विक दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत है

महिला पर्यटकों के लिए सबसे सुरक्षित राज्य बनाने का संकल्प

एमपी टूरिज्म बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक  अभय अरविंद बेडेकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य मध्यप्रदेश को महिला पर्यटकों के लिए देश का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील पर्यटन गंतव्य बनाना है। प्रदेश में सुरक्षा, कौशल विकास और सामुदायिक सहभागिता के समन्वित प्रयासों से महिलाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा पर्यटन क्षेत्र अधिक समावेशी बन रहा है।

हस्तनिर्मित उपहारों में दिखी आत्मनिर्भरता की झलक

STDW प्रोजेक्ट पर हुए संवाद के दौरान परियोजना से जुड़ी महिलाओं एवं बालिकाओं ने अपने कौशल का परिचय देते हुए अतिथियों को स्वयं निर्मित हस्तशिल्प भेंट किए। इनमें हस्तनिर्मित स्मृति चिन्ह, फैब्रिक ज्वेलरी, फेंगशुई कलाकृतियां शामिल हैं। इन उत्पादों ने न केवल स्थानीय कला और रचनात्मकता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि परियोजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।

बैठक के दौरान यूएन विमेन के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के तहत विकसित कौशल प्रशिक्षण मॉडल, सामुदायिक सहभागिता और महिलाओं के आत्मविश्वास में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी और प्रेरणादायक पहल बताया। इस अवसर पर यूएन विमेन इंडिया की कंट्री डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव सु कांता सिंह और स्टेट रिप्रेजेंटेटिव सु जोयात्री राय भी उपस्थित रहीं।

 

उड़ीसा के पेयजल मंत्री नायक ने जल निगम की नवाचार आधारित कार्यप्रणाली की सराहना की

भोपाल

उड़ीसा के पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक के नेतृत्व में आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया। प्रतिनिधिमंडल ने निगम की संस्थागत व्यवस्था, परियोजना क्रियान्वयन प्रणाली, तकनीक आधारित मॉनिटरिंग, संचालन एवं संधारण (ओ एंड एम), वित्तीय प्रबंधन तथा मानव संसाधन विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी प्राप्त की। मंत्री नायक ने मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा अपनाई गई आधुनिक और नवाचार आधारित व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इनमें से कई व्यवस्थाओं को उड़ीसा में भी लागू करेंगे।

प्रबंध संचालक, म.प्र. जल निगम के.वी.एस. चौधरी ने प्रतिनिधिमंडल को जल जीवन मिशन के अंतर्गत प्रदेश में संचालित ग्रामीण नल-जल योजनाओं की प्रगति, डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था, रियल टाइम निगरानी प्रणाली, परियोजनाओं के संचालन एवं संधारण मॉडल, ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपयोग एवं विद्युत भुगतान की व्यवस्था, क्षमता विकास (ट्रेनिंग) कार्यक्रमों तथा तकनीक आधारित प्रबंधन प्रणाली पर विस्तृत जानकारी साझा की। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश जल निगम के संस्थागत ढांचे, सुशासन, वित्तीय मॉडल, परियोजना क्रियान्वयन, ‘जल रेखा’ एवं ‘पंचायत दर्पण’ जैसे तकनीकी नवाचारों की कार्यप्रणाली तथा ग्रामीण जलापूर्ति प्रबंधन की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इन व्यवस्थाओं को ग्रामीण पेयजल सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए उपयोगी बताते हुए इनके व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की।

बैठक में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच संस्थागत ढांचे, वित्तीय स्वायत्तता, परियोजनाओं के क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल गवर्नेंस तथा भविष्य में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उड़ीसा के पेयजल मंत्री नायक ने कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम ने जिस पेशेवर एवं परिणामोन्मुखी कार्यप्रणाली को विकसित किया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल है। अध्ययन भ्रमण के माध्यम से प्राप्त अनुभव उड़ीसा में ग्रामीण जल प्रदाय व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उड़ीसा के प्रतिनिधिमंडल में पंचायती राज एवं पेयजल विभाग के आयुक्त-सह-सचिव गिरिश एस.एन., पेयजल एवं स्वच्छता निदेशक विनीत भारद्वाज, अतिरिक्त सचिव श्रीमती मधुस्मिता सामल, इंजीनियर-इन-चीफ रत्नाकर सियाल सहित विभाग एवं स्टेट पीएमयू के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक में मध्यप्रदेश जल निगम मर्यादित के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी साझा की।

 

जल से ही प्रकृति का उद्भव और जीवन का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

जल गंगा संवर्धन अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल से ही प्रकृति का उद्भव और जीवन का विकास है। सबसे पहले पृथ्वी पर जलचर आए। जल से ही जीवन है। जल तत्व में सभी तत्व समाहित हैं। हम जब जल संरचनाओं को देखते हैं तो हमारा मन आनंद से भर जाता है। जल से स्नान के बाद हमें ताज़गी मिलती है। हमारे पूर्वजों ने जल के महत्व को समझा और निरंतर जल संरचनाओं का निर्माण किया। आज हमारा दायित्व है कि हम उन सब का संरक्षण करें एवं उन्हें सहेजें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में जल संरक्षण और संवर्धन का अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में भी गत 3 वर्षों से यह अभियान वृहद रूप से जन सहयोग से चलाया जा रहा है और बड़ी संख्या में जल संरचनाओं का संरक्षण एवं पुनरुद्धार किया गया है। आज यहां जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन कार्यक्रम है, परंतु मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल अलनीनो के प्रभाव से कम वर्षा का अनुमान है, इसलिये प्रदेश में अमृत सरोवर रैन वॉटर हार्वेस्टिंग, नदी संरक्षण जैसे जल स्रोतों के संरक्षण कार्य निरंतर जारी रहेंगे। गत 19 मार्च से लगभग 100 दिन प्रदेश में चले जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत प्रदेश में जल संवर्धन के 10 हज़ार 514 करोड़ की लागत से 3 लाख 63 हज़ार कार्य कराए गए। इन कार्यों में भरपूर जन समर्थन एवं जन सहयोग मिला है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को राजगढ़ जिले के भैंसवा माता क्षेत्र में प्रदेश में चले जल गंगा संवर्धन अभियान के तीसरे चरण के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 252 करोड़ 65 लाख रुपए के 31 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया। उन्होंने भैंसवा माता क्षेत्र के विकास के लिए 20 करोड़ रुपए प्रदान करने की घोषणा भी की। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुआ।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में पंच तत्वों, विशेष रूप से जल का विशेष महत्व है। हमारे यहां हर पवित्र कार्य जल के साथ ही होता है। प्रसिद्ध कवि रहीम ने भी पानी की महत्ता बताई। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत राजगढ़ जिले में बहुत अच्छा कार्य हुआ है। इस कार्य के लिए भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश में चिन्हित छह सर्वश्रेष्ठ जिलों में राजगढ़ जिले का भी नाम शामिल है। इसके लिए उन्होंने सभी संबंधितों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की समृद्धि का आधार सिंचाई की सुविधा है। गत 20 वर्षों में हमारी सरकारों में प्रदेश में सिंचाई के रकबे में तेजी से वृद्धि हुई है। हर खेत तक पानी पहुंचाना हमारा संकल्प है और हम उसे पूरा कर रहे हैं। हमारी सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम भी दिलवाया जा रहा है। हमारी सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2625 रुपए कर दिया है। किसानों को किसान सम्मन निधि दी जाती है। हमारी सवा करोड़ बहनों को लाडली बहना योजना का लाभ दिया जा रहा है। बच्चों को उनकी शिक्षा के लिए हर संभव सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय बनाए जा रहे हैं, जो उत्कृष्ट शिक्षा के केंद्र हैं। ये विद्यालय हमें सांदीपनि ऋषि, भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की याद दिलाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की निस्वार्थ मित्रता एवं प्रेम को आज पूरी दुनिया याद करती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि विश्व का सबसे बड़ा मेला, हमारी सनातन संस्कृति का प्रतिबिंब, सिंहस्थ उज्जैन मध्यप्रदेश में आयोजित होता है। इसे भव्य, दिव्य बनाने और श्रद्धालुओं के स्नान आदि की सुविधाओं के लिए उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के स्वच्छ एवं पावन जल में सहजता एवं सुविधापूर्वक, बिना किसी परेशानी के स्नान एवं उज्जैन तीर्थ के दर्शन हो सकें।

पानी की प्रत्येक बूंद का संरक्षण कर भावी पीढ़ी का भविष्य करें सुरक्षित : मंत्री पटेल

पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक हुए सभी कार्य प्रामाणिकता के साथ हुए है। इस साल बारिश के मौसम में कम वर्षा का अनुमान है इसलिए जल संचयन और जल स्त्रोतों का संरक्षण निरंतर जारी रखना आवश्यक है। हम सभी को पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है। राज्य सरकार और सभी अधिकारी-कर्मचारी जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मंत्री पटेल ने जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन को मां भैंसवा के पवित्र स्थल पर रखने के लिए आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संरक्षण के लिए किए भगीरथी प्रयास : राज्यमंत्री डॉ.टेटवाल

तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. गौतम टेटवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में जल संरक्षण और सिंचाई सुविधाएं को बढ़ाने के लिए भागीरथी प्रयास किए हैं। प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। जल संरक्षण के इस अभियान में पंचायतों को जोड़कर जनभागीदारी से कुएं, बावड़ी, तालाब, नदियों की सफाई और प्राचीन जल स्त्रोतों का जीर्णोद्धार किया गया है। राज्यमंत्री टेटवाल ने सांदीपनि विद्यालय, पीकेसी परियोजना से पानी, भैंसवा माता लोक निर्माण सहित अनेक निर्माण कार्यों की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

सांसद रोमल नागर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में विरासत से विकास की यात्रा अनवरत जारी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव पर भगवान बाबा महाकाल और मां बिजासन की विशेष कृपा है। सारंगपुर में 251 करोड़ रूपए की लागत से भैंसवा माता धार्मिक स्थल शेत्र का विकास किया जा रहा हैl रोजगार के स्थानीय साधन उपलब्ध कराते हुए यहां बहनों को कौशल विकास का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। साथ ही संस्कृत वैदिक पाठशाला, गोशाला, योग केंद्र और सामुदायिक भवन तैयार करने के कार्य किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के यह प्रयास समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजगढ़ जिले के सारंगपुर विकासखण्ड में प्रसिद्ध भैंसवा माता मंदिर में दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने दूधतलाई पर पहुंचकर पवित्र गंगा-पूजन किया। पर्यावरण संरक्षण और जीव-दया के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पशुओं को चारा खिलाया और गौ-पूजन भी किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत बेलपत्र का पौध-रोपण किया और नागरिकों को हरित पर्यावरण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2.0’ की विकास प्रदर्शनी का गहन अवलोकन किया और जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पारंपरिक रूप से ‘कन्या पाद पूजन’ और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत राजगढ़ जिले में हुए विभिन्न विकास कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष पुस्तिका का विमोचन भी किया। साथ ही राजगढ़ की स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को वैश्विक पटल पर लाने के उद्देश्य से जिला पुरातत्व एवं राजगढ़ पर्यटन पर केंद्रित एक विशेष प्रमोशनल फिल्म, आकर्षक कॉफी टेबल बुक तथा आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स का अनावरण भी किया।  

जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को 21 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की राशि के हितलाभ वितरित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत मंच से हितग्राहियों को 21 करोड़ 38 लाख रुपये से अधिक की राशि के लाभ और वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए। इसके तहत मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से 405 समूहों को कुल 20 करोड़ रुपये का बैंक ऋण वितरित किया गया, जिसमें श्रीमती कृष्णा भिलाला, श्रीमती रानी भिलाला और श्रीमती माया वर्मा प्रमुख रूप से लाभान्वित हुईं। पशुपालन विभाग की डॉ.भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना के अंतर्गत हितग्राही मंगलेश पाटीदार को 36 लाख रुपये और श्रीमती विमल यादव को 35.70 लाख रुपये की राशि के हितलाभ सौंपे गए। इसी तरह, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना के तहत कार्तिक माहेश्वरी (पार्वती एंटरप्राइजेस) को 22.50 लाख रुपये और राहुल परमार (अयोध्या ऑयल मिल) को 27.37 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत किराना व्यवसाय के लिए मनीष कुमार गुप्ता को 10 लाख रुपये और डेयरी प्रोडक्ट के लिए हितेष शर्मा को 5 लाख रुपये के चेक प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मनोज पाटीदार और बलराम को मिनी स्प्रिंकलर सेट के लिए प्रत्येक को 79 हजार 545 रुपये का अनुदान दिया गया, जबकि पी।एम। स्वनिधि योजना, नगरीय आवास विकास और प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रियंका जाटव, मांगी बाई, पूजा साहू सहित अन्य हितग्राहियों को 50 हजार रुपये के चेक और गृह प्रवेश के आवंटन पत्र वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा सारंगपुर क्षेत्र के विकास के लिए की गई प्रमुख घोषणाएं

1. सारंगपुर नगर के अंदर जीर्ण-शीर्ण पड़े शासकीय भवनों एवं आवासों का रेडेंसिफिकेशन योजना अंतर्गत पुनर्निर्माण किया जाएगा।

2. शासन संधारित अंबे माता मंदिर का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

3. नवीन स्वीकृत फोर लेन में हाउसिंग बोर्ड द्वारा आवासीय कॉलोनी विकसित की जाएगी।

4. पचोर और सारंगपुर क्षेत्र में विकास के लिए सड़को का निर्माण किया जाएगा।

5. सारंगपुर-संडावता मार्ग पर उतावली नदी पर ब्रिज का निर्माण किया जाएगा।

6. करौंदी से हीरापुरा तक 2 किमी सड़क के निर्माण सहित आवश्यक अन्य सभी मार्गों का निर्माण किया जाएगा।

7. भैंसवा माता लोक के विकास, निर्माण और सौंदर्गीकरण के लिए 20 करोड़ रूपये।

इस अवसर पर मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, विधायक नरसिंहगढ़ मोहन शर्मा, विधायक राजगढ़ अमर सिंह यादव, विधायक खिलचीपुर, हजारीलाल दांगी, ज्ञानसिंह गुर्जर, भोपाल संभाग आयुक्त कर्मवीर शर्मा, कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा सहित जन प्रतिनिधिगण व बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

 

 

आने वाली पीढ़ियां गुनगुनाएंगी जन परिषद के गीत : दीपक वोहरा

भोपाल 

जन परिषद के 37वें वार्षिक एवं सम्मान समारोह का आयोजन रवीन्द्र भवन, भोपाल में अत्यंत गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। समारोह में भारत के पूर्व राजदूत एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अग्रणी ज्ञातादीपक वोहरा,  डीजीपी ** कैलाश मकवाना, एसीएस ** अनुपम राजन तथा एयर मार्शलप्रमोद वास्तव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों का सम्मान भी किया गया।समारोह एल आई सी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया ।

अपने प्रेरक उद्बोधन में पूर्व राजदूतदीपक वोहरा ने कहा कि जन परिषद की 37 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उसके सेवा कार्यों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित पहचान को देखते हुए यह विश्वासपूर्वक कहा जा सकता है कि आने वाली पीढ़ियां जन परिषद के रचनात्मक गीतों को गुनगुनाएंगी। उन्होंने कहा कि आज विश्व अनेक चुनौतियों और अस्थिरताओं के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में जन परिषद जैसी संस्थाएं समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रही हैं।

 वोहरा ने कहा कि वे इन दिनों अत्यंत व्यस्त थे और भोपाल आने की स्थिति में भी नहीं थे, लेकिन जब उन्होंने जन परिषद के इतिहास, उपलब्धियों और कार्यों के बारे में जानकारी प्राप्त की तथा भोपाल के अपने मित्रों से संस्था के संबंध में चर्चा की, तो सभी ने जन परिषद की इतनी प्रशंसा की कि वे स्वयं को इस कार्यक्रम में आने से रोक नहीं सके। उन्होंने जन परिषद के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी संस्था के लिए 37 वर्षों तक निरंतर सक्रिय और प्रभावी बने रहना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।दीपक वोहरा जी ने आचार्य चाणक्य के छह सूत्रों को सरल एवं प्रेरक ढंग से प्रस्तुत करते हुए राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत विश्व की ओर नहीं देख रहा है, बल्कि पूरा विश्व आशा और विश्वास की दृष्टि से भारत की ओर देख रहा है।

उन्होंने उपस्थित जनों से आग्रह किया कि वे इन सूत्रों को अपने घरों तक पहुँचाएँ और अपने बच्चों को भी इनके बारे में अवश्य बताएं, ताकि उनमें संस्कार, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित हो।
उन्होंने बताया कि जन परिषद ने देशभर में 300 से अधिक इकाइयों एवं सहयोगी संगठनों का मजबूत नेटवर्क विकसित किया है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। यदि देश में जन परिषद जैसी सैकड़ों संस्थाएं और विकसित हो जाएं, तो राष्ट्र के सामाजिक और रचनात्मक वातावरण में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने जन परिषद को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
एसीएसअनुपम राजन ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज के विकास में जनभागीदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जन परिषद ने विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का जो प्रयास किया है, वह अनुकरणीय है।
एयर मार्शलप्रमोद वास्तव ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और समर्पण अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में जन परिषद के अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीपीएन.के. त्रिपाठी ने स्वागत भाषण देते हुए संस्था की 37 वर्षों की यात्रा, उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जन परिषद समाज, पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसशक्तिकरण के क्षेत्र में निरंतर कार्य करती रहेगी।

कार्यक्रम का वार्षिक प्रतिवेदन महेंद्र जोशी द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें संस्था की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों, सामाजिक अभियानों, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरण तथा सेवा परियोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संयोजकरामजी वास्तव ने किया तथा अंत मेंअजय वास्तव (नीलू जी) ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समारोह में जन परिषद के पदाधिकारी, सदस्यगण, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, बुद्धिजीवी, पत्रकार एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

विभिन्न सम्मानों से सम्मानित विभूतियां

समारोह में एंबेसडर ऑफ एक्सीलेंस सम्मान से पूर्व राजदूतदीपक वोहरा (नई दिल्ली) को सम्मानित किया गया। एक्सीलेंट गार्जियन ऑफ द हार्ट सम्मान से डॉ. सुब्रतो मंडल को सम्मानित किया गया।
कवि प्रदीप चौबे सम्मानप्रेमचंद द्वितीय (बड़नगर) को, सांसद विजय खंडेलवाल सम्मानमनोज तिवारी (गढ़ाकोटा) को तथा ललित

वास्तव सम्मानमोहन परिहार को प्रदान किया गया।

कुलभूषण दल्लौरी सम्मान सेललित अग्रवाल (इंदौर),अमित शर्मा एवंआशीष वास्तव को सम्मानित किया गया।
राजकमल वास्तव सम्मान डॉ. रूबी खान को प्रदान किया गया।

मां प्रभादेवी सम्मान सेउरज मिश्रा, मती शिल्पी अभिषेक भार्गव (गढ़ाकोटा),अतुल बनारसी,अंशुमन खरे, डॉ. प्रगति सेठ (झांसी)तथामोहन अग्रवाल को सम्मानित किया गया।

लक्ष्मी रायकवार सम्मानकमल सिंह को, डॉ. मंगल प्रसाद अग्रवाल सम्मानभरत तिवारी (सागर) को तथा प्रकाश प्रलय सम्मानगौरीशंकर धाकड़ (बरेली) को प्रदान किया गया।
पत्रकार के.के. अग्निहोत्री सम्मान सेधर्मेंद्र सिंह (भोपाल) एवंओमप्रकाश चौरसिया (गंजबासोदा) को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर बेस्ट चैप्टर सम्मान आष्टा, छिंदवाड़ा, सागर एवं मुलताई चैप्टर्स को प्रदान किया गया।
वहीं एक्टिव मेंबर्स ऑफ द ईयर के रूप मेंविनोद वास्तव,दुर्गेश रैकवार,नितिन वास्तव,संदीप गोलू तथारामेश्वर को सम्मानित किया गया।

 

डिफॉल्टरों को दोबारा लीज देने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

ग्वालियर 
मध्य प्रदेश में खनिज
विभाग के अफसरों और खनन माफिया की सांठगांठ से चल रहे घोटाले को लेकर ग्वालियर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। कोर्ट ने सरकार से सीधे पूछा।

जब अवैध खनन करने वालों पर करोड़ों रुपए की पेनल्टी बकाया है, तो उनसे अभी तक वसूली क्यों नहीं की गई? सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले इन डिफॉल्टरों को वापस खनन लीज किस आधार पर दे दी गई?

यह तल्ख सवाल जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता अकरम खान द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए किए हैं।

मामले में राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष सरकार का पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एक सप्ताह की मोहलत दी है। अगली सुनवाई 6 जुलाई 2026 को होगी।

साल 2017 से कुंडली मारकर बैठे हैं रसूखदार
याचिका में बताया है कि जिले के खनन माफिया पर 305 करोड़ 97 लाख रुपए की भारी-भरकम जुर्माना राशि बकाया है।

यह वसूली साल 2017 से लंबित है, लेकिन खनिज विभाग इसे वसूलने में पूरी तरह नाकाम रहा। नियमानुसार जुर्माना न चुकाने पर खदान संचालकों को ‘ब्लैकलिस्ट’ कर उनका खनन तुरंत रोका जाना चाहिए था। लेकिन, रसूखदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

रसूखदारों को तोहफे में मिली नई लीज
याचिका में यह भी बताया कि हद तो यह हो गई कि पुराने करोड़ों रुपए दबाकर बैठे खनन माफियाओं की खदानें न सिर्फ रिन्यू (नवीनीकरण) कर दी गईं, बल्कि उन्हें नई जगहों पर खनन करने के लिए नई लीजें भी आवंटित कर दी गईं हैं। मतलब उनके पेनल्टी न चुकाने को पूरी तरह नजरअंदाज किया है।

बिलौआ-बेरजा में 100 फीट तक खोद दी जमीन
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि ग्वालियर जिले के बिलौआ और बेरजा क्षेत्र में काले पत्थर (क्रशर गिट्टी) का सबसे बड़ा कारोबार है। यहां नियमों को ताक पर रखकर ऐसा अंधाधुंध अवैध खनन किया गया है जिसने पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया है। बिलौआ में अवैध खनन करने वालों ने जमीन को 25 से 30 मीटर (करीब 100 फीट) गहरे गड्ढों में तब्दील कर दिया है।

माफिया की जेब में गया राजस्व
खनिज विभाग ने जब पूर्व में इनकी जांच की थी, तो बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन पाया गया था। माफिया यहां से कई हजार घनमीटर कीमती काला पत्थर निकालकर बाजार में बेच चुके हैं। जो करोड़ों रुपए सरकारी खजाने में आने चाहिए थे, वे सीधे माफिया की जेब में चले गए।

 

MP में 10 साल बाद पदोन्नति प्रक्रिया तेज, आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी; सामान्य वर्ग ने जताई आपत्ति

भोपाल
 प्रदेश में पदोन्नति की तैयारी है। इसके लिए पदोन्नति के पदों का निर्धारण किया जाना है, लेकिन पुराने नियमों के आधार पर ही आरक्षित वर्ग को दोहरा लाभ देने की तैयारी की जा रही है। अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 16 और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित रहेंगे। शेष पद अनारक्षित श्रेणी में रहेंगे, लेकिन मेरिट में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी भी आ सकते हैं।

यदि ऐसा होता है तो संबंधित श्रेणी का एक पद कम हो जाएगा। इसका आशय ये हुआ कि अनारक्षित (सामान्य) वर्ग नुकसान में रहेगा क्योंकि उसका कोटा कम हो जाएगा। इसका ही विरोध सामान्य वर्ग के कर्मचारी कर रहे हैं। मंत्रालय सहित कई विभाग ऐसे हैं, जहां उच्च स्तर पर आरक्षित वर्ग का कब्जा हो गया है।

पदोन्नति नियम का पूरा मामला देखने वाले अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के स्थापना से जुड़े अधिकारियों के साथ सोमवार को मंत्रालय में बैठक की। इसमें बताया गया कि नए नियम के अनुसार भी कुल 36 प्रतिशत पद पदोन्नति के लिए आरक्षित रहेंगे, यानी चिह्नित पदों पर केवल अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की पदोन्नति हो सकेगी।

यदि किसी संवर्ग में पदोन्नत के लिए आरक्षित वर्ग का अधिकारी-कर्मचारी पात्र नहीं पाया जाता है तो वह स्थान रिक्त रहेगा। उसे किसी दूसरे वर्ग से भरा नहीं जाएगा। वहीं, अनारक्षित श्रेणी में जितने भी पद आएंगे, उसमें भी अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग को अवसर मिलेगा, क्योंकि अनारक्षित का मतलब सभी वर्गों से लिया गया है। इसे मेरिट से भी जोड़ा गया है।

इसके मायने यह हुए कि किसी आरक्षित वर्ग के अधिकारी-कर्मचारी की गोपनीय चरित्रावली ए प्लस प्लस रहती है और दूसरा कोई नहीं रहता है तो वह ऊपर आ जाएगा। सूत्रों का कहना है कि सभी विभागों से कहा गया है कि वे पदोन्नति के लिए तैयारी करके रख लें। वरिष्ठता सूची भी देख लें।

उल्लेखनीय है कि पदोन्नति नियम 2025 के अनुसार पदोन्नति की तैयारी करने के निर्देश मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसका आधार हाई कोर्ट द्वारा नियम पर किसी प्रकार का स्थगन न देने को बनाया गया है। वहीं, निर्णय सुरक्षित रखा गया है लेकिन अब संभावना यही है कि पहले बेंच गठित होगी और अंतिम सुनवाई करके निर्णय सुनाया जाएगा।

दो साल के पदों के हिसाब से होगी पदोन्नति
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पदोन्नति दो साल के हिसाब से होगी। एक बार की बैठक में आगे के पदों के लिए भी व्यवस्था कर ली जाएगी। पदोन्नति के पद पांच के लिए एक बार निर्धारित हो जाएंगे। इसके फिर कोई परिवर्तन नहीं होगा। यदि किसी संवर्ग में पहले से ही पदोन्नति से पद भरे हुए हैं तो वहां पदोन्नति नहीं होगी।

दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी होंगे लाभान्वित
भले ही दस साल बाद पदोन्नति का अवसर बन रहा हो, मगर दो लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे। प्रतिनियुक्ति के पद भी पदोन्नति की श्रेणी में आएंगे। किसी के लिए कोई पद रोककर नहीं रखा जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट कर दी गई है कि पदोन्नति 2025 के नियम लागू होने के बाद से दी जाएगी।

 

धान महोत्सव में किसानों की बल्ले-बल्ले! CM डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई को सिवनी से जारी करेंगे ₹2.82 करोड़

सिवनी 
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए 1 जुलाई का दिन खास रहने वाला है. सिवनी में आयोजित होने वाले धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव हजारों किसानों को आर्थिक सौगात देंगे. कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के जरिए कोदो और कुटकी की खेती करने वाले 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेजी जाएगी। 

सरकार की ओर से यह राशि 1000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दी जा रही है. इसका उद्देश्य श्रीअन्न यानी मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है, ताकि किसान इस फसल की ओर ज्यादा आकर्षित हों और उनकी आय में भी इजाफा हो सके. माना जा रहा है कि इस पहल से प्रदेश में कोदो और कुटकी के उत्पादन को नई रफ्तार मिलेगी। 

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश के 3,941 कोदो एवं कुटकी उत्पादक किसानों के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे डीबीटी के जरिए अंतरित करेंगे।यह राशि 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक सहायता प्राप्त होगी।

सिवनी में धान महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में
धान महोत्सव का आयोजन सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. जिला प्रशासन ने आयोजन को लेकर तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं और कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

कलेक्टर नेहा मीना की निगरानी में प्रशासन ने हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक की व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, बिजली और यातायात जैसी सभी जरूरी सुविधाओं की तैयारियां पूरी कर ली हैं. अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं ताकि कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के संपन्न हो सके। 

विकास परियोजनाओं की भी देंगे सौगात
धान महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री सिर्फ किसानों को प्रोत्साहन राशि ही नहीं देंगे, बल्कि जिले को कई विकास कार्यों की सौगात भी मिलेगी. कार्यक्रम में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया जाएगा. इससे जिले में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। 

सरकार का मानना है कि किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देना भविष्य की कृषि नीति का अहम हिस्सा है. ऐसे में धान महोत्सव किसानों के लिए सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि नई संभावनाओं का मंच भी साबित हो सकता है। 

वर्ष 2026 ‘कृषक कल्याण वर्ष’: आयोजित होगा धान महोत्सव
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चालू वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में खरीफ सीजन की शुरुआत के मौके पर कार्यक्रम स्थल पर ‘धान महोत्सव’ का भी आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में अच्छी बारिश, बेहतर पैदावार और अन्नदाताओं की समृद्धि की कामना के साथ ही किसानों को आधुनिक तरीके से धान की बोनी करने का संदेश दिया जाएगा।

सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, बड़ी संख्या में जुटेंगे किसान
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ अंजली शाह, अपर कलेक्टर सीएल चनाप सहित सभी संबंधित विभागों के जिला अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने सभी वीआईपी और आम नागरिकों के लिए पार्किंग, पेयजल, बिजली और स्वच्छता की पुख्ता व्यवस्था समय पर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिले के किसानों और आम जनता में खासा उत्साह देखा जा रहा है, जिसे देखते हुए कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना है।

प्रदर्शनी में शामिल प्रमुख आकर्षण होंगे—

    धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र
    प्राकृतिक एवं प्रमाणित बीजों की प्रदर्शनी
    कस्टम हायरिंग सेंटर
    प्राकृतिक एवं नैचुरल फार्मिंग मॉडल
    जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद
    पीएमएफएमई योजना के उत्पाद
    आम की विभिन्न उन्नत किस्में
    स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद
    लघु वनोपज आधारित उत्पाद
    स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद
    पोषण आहार प्रदर्शनी
    कृषिका एप की जानकारी

प्रदर्शनी के माध्यम से शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कृषि नवाचारों और विकास उपलब्धियों की जानकारी किसानों एवं नागरिकों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएगी।

प्रशासन ने तैयारियों को दिया अंतिम रूप
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के मार्गदर्शन में कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा व्यवस्था, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत आपूर्ति, यातायात प्रबंधन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी विभागों के अधिकारी समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।

 

42 साल में पहली बार इतना सूखा बरगी डैम, जलस्तर इतना गिरा कि दिखने लगी तलहटी; विशेषज्ञों ने जताई चिंता

जबलपुर 
बरगी बांध में 42 सालों बाद इतना पानी कम हो गया है कि बांध के तल से अनोखी चीजें निकलकर सामने आ रही है. कहीं, अचानक पुरानी नाव सामने आने से चर्चा का विषय बनी हुई है तो कहीं मंदिर दिखाई देने से लोग हैरान हैं. वहीं, बरगी बांध के दक्षिणी तट का गेट पूरी तरह ऊपर दिखाई देने लगा है, जिसे पिछले 42 सालों में लोगों ने जल भराव के बाद कभी नहीं देखा था। 

बरगी बांध के बुरे हाल, कभी नहीं सूखा इतना पानी
जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने इस विशाल डैम में रोजाना 5 सेंटीमीटर के करीब पानी कम हो रहा है. बरगी बांध का कुछ पानी गर्मी की वजह से उड़ जाता है, तो वहीं कुछ हिस्सा नर्मदा नदी में प्रवाह बनाए रखने, पावर प्लांट चलाने और नहरों के लिए निरंतर प्रवाहित किया जाता है. खरीफ के मौसम में किसानों को धान की खेती के लिए नहरों से पानी भेजा जाता है, जिससे अब बांध का पानी रिकॉर्ड स्तर तक गिर गया है. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारी और बांध के प्रभारी राजा राम रोहित ने बताया, ”बांध में रोज 5 सेंटीमीटर पानी की कमी आ रही है और बांध का वर्तमान जलस्तर समुद्र तल से 407.45 मीटर है. इसके अनुसार बांध में अब मात्र 5.5 मीटर पानी ही शेष बचा है। 

आज तक बांध का ऐसा हाल नहीं देखा
बरगी नगर में रहने वाले स्थानीय निवासी नीरज मिश्रा ने कहा, ” बचपन से ही बरगी नगर में ही रहे हैं लेकिन बांध में इतना कम पानी पहले कभी नहीं देखा. बरगी बांध का पानी कम होने के साथ ही बांध के कुछ ऐसे नजारे भी देखने को मिल रहे हैं, जो पहले लोगों ने कभी नहीं देखे. बरगी बांध में बायीं ओर से नहर से पानी नरसिंहपुर जिले के लिए जाता है और दायीं ओर पानी को सतना तक ले जाने की तैयारी है. फिलहाल यह पानी कटनी जिले तक जा रहा है। 

पहली बार 407 मीटर तक गिरा बरगी डैम का जलस्तर
बरगी डैम को फुल टैंक लेवल 422.76 मीटर है, वहीं इसकी दायीं नहर का गेट लगभग 409 मीटर पर लगा हुआ है और डैम का पानी कभी 408 मीटर के नीचे नहीं जाता था. लेकिन इस साल यह पानी 407 मीटर के स्तर तक गिर गया है. इसकी वजह से बांध की दायीं ओर का कैनाल गेट पानी के ऊपर नजर आ रहा है. नीरज मिश्रा ने कहा, ” बरगी बांध में पहली बार पानी 42 साल पहले भरा गया था और 42 साल में यह पहला मौका है जब यह गेट पानी के बाहर आया है। 

इतना बड़ा है डैम का कैनाल गेट
पानी से बाहर नजर आ रहा बरगी डैम का कैनाल गेट लगभग 50 फीट चौड़ाई और 100 फीट ऊंचाई का एक भीमकाय स्ट्रक्चर है, जिसमें 50 फीट हिस्सा हमेशा पानी में डूबा रहता है. बांध के इस हिस्से से जो पानी छोड़ा जाता है उससे दायीं नहर में पानी जाता है, यह नहर किसी नदी से कम नहीं है. इस हिस्से में लोहे के तीन बड़े गेट हैं. जब इससे पानी छोड़ा जाता है तो दायीं नहर में लगभग 20 फीट पानी होता है. यह इंजीनियरिंग का एक बड़ा नमूना है. इसी पानी को जबलपुर से कटनी और कटनी के आगे स्लीमनाबाद टनल से होते हुए सतना तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। 

बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार बांध का जलस्तर प्रतिदिन करीब 5 सेंटीमीटर घट रहा है। कम पानी के कारण बिजली उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। दो में से एक बिजली उत्पादन यूनिट बंद कर दी गई है, जबकि दूसरी यूनिट का संचालन भी सीमित कर दिया गया है।

15 साल में सबसे खराब स्थिति
बरगी बांध प्रबंधन के अनुसार 15 जून को बांध का जलस्तर 407.85 मीटर था, जो घटकर अब 407.45 मीटर रह गया है। यानी करीब 40 सेंटीमीटर पानी कम हो चुका है। वर्तमान में बांध में केवल 12.59 प्रतिशत पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में जल भंडारण करीब 22 प्रतिशत था।

जून में सिर्फ डेढ़ इंच बारिश
सामान्य तौर पर 30 जून तक जबलपुर में करीब 8 इंच बारिश दर्ज होती है, लेकिन इस वर्ष अब तक केवल करीब 1.5 इंच बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा अभी मंडला के आसपास है और इसके आगे बढ़ने की संभावना है।

बिजली उत्पादन पर असर
कम जलस्तर का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बरगी बांध की दो उत्पादन इकाइयों में से एक को 27 जून से बंद कर दिया गया है। दूसरी यूनिट, जो पहले 8 से 10 घंटे चलती थी, अब केवल 3 घंटे प्रतिदिन संचालित की जा रही है।

डैम के तल में नजर आया मंदिर और पुरानी बोट
बरगी बांध के जल भराव क्षेत्र में पानी कम होने की वजह से एक मंदिर भी चर्चा में है, जो हमेशा पानी में डूबा रहता था. इस बार ये मंदिर पानी के बाहर नजर आ रहा है. वहीं, दूसरी तरफ बरगी बांध के पुनर्वास विभाग की एक नाव भी चर्चा में है, जो लावारिस छोड़ दी गई थी और पानी कम होने की वजह से अब दिख रही है. बरगी बांध में अचानक इतना पानी कम क्यों हुआ यह चर्चा और जांच का विषय है. जांच ये होनी चाहिए कि बांध का पानी केवल जलवायु परिवर्तन की वजह से कम हुआ है या कोई लापरवाही बरती गई है. क्योंकि बांध से इस तरह पानी कम होना भविष्य में संकट की ओर इशारा कर रहा है। 

पानी की सप्लाई और सिंचाई पर बढ़ सकता है संकट
बरगी बांध से नर्मदा का पानी जबलपुर समेत कई शहरों में पेयजल आपूर्ति के लिए भेजा जाता है। इसी बांध से निकलने वाली नहरों से जबलपुर और नरसिंहपुर में सिंचाई होती है और भविष्य में कटनी व सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है।

लोग देखने पहुंच रहे सूखता बांध
जबलपुर निवासी आकाश कोष्ठा ने बताया कि बरगी बांध के सूखने की चर्चा सुनकर वे मौके पर पहुंचे। उनका कहना है कि बांध का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। नर्मदा के कई घाटों पर चट्टानें दिखाई देने लगी हैं और नदी का पानी भी पहले की तुलना में कम व गंदला नजर आ रहा है।

अल नीनो का असर भी माना जा रहा कारण
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अल नीनो प्रभाव के कारण इस वर्ष कम बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि जुलाई में अच्छी बारिश नहीं हुई तो मध्य प्रदेश के कई जलाशयों में जल संकट गहरा सकता है और इसका असर बिजली उत्पादन, सिंचाई तथा पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई : राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकमाता अहिल्याबाई : राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना पुस्तक का किया विमोचन

म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी ने किया पुस्तक का प्रकाशन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘लोकमाता अहिल्याबाई राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना’ पुस्तक का समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में विमोचन किया। मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित यह शोध संकलन बताता है कि लोकमाता, पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होल्कर का जीवन और कर्म किसी आकस्मिक महानता का परिणाम नहीं, बल्कि दीर्घ सांस्कृतिक धारा का स्वाभाविक विस्तार रहा। उनकी जीवन गाथा इस तथ्य का प्रमाण है कि भारतीय नारी संत, विदुषी, योद्धा होने के साथ-साथ कुशल शासिका भी रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विमोचित इस शोध संकलन में कुल 19 अध्याय हैं। पुस्तक अहिल्याबाई होल्कर की दृष्टि में नारी स्वाभिमान और समाजोत्थान, सांस्कृतिक पुनर्निर्माण से राष्ट्रीय एकता, पंचपरिवर्तन से समाज कल्याण, जीवन प्रबंधन की पाठशाला, बाल विवाह-सामाजिक कुरीति की चुनौतियाँ और समाधान पर शोध पत्रों का संकलन हैं। पुस्तक में देवी अहिल्याबाई होल्कर की राष्ट्र पुनरुत्थान की संकल्पना न्यायप्रियता और प्रशासनिक दक्षता, समग्र जीवन चिंतन, भारतीय हस्तशिल्प के उत्थान में अहिल्याबाई की भूमिका तथा महिलाओं के लिए न्याय और समानता पर शोधपरक लेख हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में लोकमाता अहिल्याबाई के अवदान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विश्लेषण पर भी पुस्तक में एक पाठ है। पुस्तक का मूल्य 160 रूपए मात्र है।

इस अवसर पर संचालक म.प्र. हिन्दी ग्रंथ अकादमी अशोक कड़ेल, राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक चंद्रचारु त्रिपाठी, माखनलाल चर्तुवेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी उपस्थिति थे।

 

MP Police का हाईटेक प्लान! अब ड्रोन से छोड़े जाएंगे आंसू गैस के गोले

भोपाल 

कानून-व्यवस्था की चुनौतीपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस अब अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने जा रही है। दंगा, उपद्रव और हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस पहली बार ऐसे हाईटेक ड्रोन खरीदेगी, जो जरूरत पड़ने पर हवा से ही आंसू गैस के गोले छोड़ सकेंगे।

भीड़ में जाने की जरूरत होगी कम
नई तकनीक के इस्तेमाल से पुलिसकर्मियों को सीधे उपद्रवी भीड़ के बीच जाने की जरूरत कम होगी। इससे पथराव और हिंसक हमलों में पुलिसकर्मियों के घायल होने की आशंका भी काफी कम हो जाएगी।

40 जिलों के लिए खरीदे जाएंगे विशेष ड्रोन
पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के 40 जिलों के लिए विशेष ड्रोन खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रत्येक ड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 14 लाख रुपये होगी। इनकी खरीद बीएसएफ टेकनपुर के माध्यम से की जाएगी।
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पहले चरण में 40 जिलों को मिलेगा एक-एक ड्रोन
प्रदेश के 55 जिलों में से पहले चरण में 40 जिलों को एक-एक ड्रोन उपलब्ध कराया जाएगा। बाकी 15 जिलों में जरूरत पड़ने पर नजदीकी जिलों से ड्रोन भेजे जाएंगे।

पहले लाइव निगरानी, फिर होगी सटीक कार्रवाई
इन ड्रोन में अत्याधुनिक कैमरे लगाए जाएंगे, जो उपद्रव प्रभावित क्षेत्र की लाइव निगरानी करेंगे। कंट्रोल रूम में मौजूद पुलिस अधिकारी वास्तविक समय में देख सकेंगे कि किस स्थान पर भीड़ सबसे ज्यादा उग्र है और आंसू गैस के गोले कहां छोड़ने से सबसे अधिक असर होगा।

सुरक्षित दूरी से होगी भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई
लाइव निगरानी के बाद ड्रोन के जरिए सुरक्षित दूरी से आंसू गैस के गोले छोड़े जाएंगे। इससे भीड़ को नियंत्रित करने की कार्रवाई अधिक प्रभावी और सुरक्षित होगी।

पुलिसकर्मियों की सुरक्षा होगी मजबूत
अब तक दंगों और हिंसक प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों को मौके पर जाकर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़ते थे। इस दौरान कई बार उपद्रवी उनके ऊपर पथराव और हिंसक हमले कर देते थे। ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस दूर से ही कार्रवाई कर सकेगी, जिससे पुलिस बल की सुरक्षा में बड़ा सुधार होगा।

लाइव रिकॉर्डिंग बनेगी अहम सबूत
इन ड्रोन की मदद से पूरी कार्रवाई की उच्च गुणवत्ता वाली लाइव रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। इससे उपद्रव, आगजनी, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपियों की आसानी से पहचान की जा सकेगी।

अदालत में भी काम आएगा वीडियो फुटेज
ड्रोन से रिकॉर्ड किया गया वीडियो अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे आरोपियों के खिलाफ प्रभावी और त्वरित कानूनी कार्रवाई करने में पुलिस को मदद मिलेगी।

दो से तीन महीने में मिल सकते हैं ड्रोन
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार ड्रोन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगले दो से तीन महीने के भीतर ये ड्रोन पुलिस को मिलने की संभावना है। 

मध्य प्रदेश में पहली बार होगा इस्तेमाल
देश के कुछ अन्य राज्यों में इस तरह की तकनीक का पहले से इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में पहली बार आंसू गैस छोड़ने वाले हाईटेक ड्रोन पुलिस बल का हिस्सा बनेंगे।

आधुनिक तकनीक से मजबूत होगी कानून-व्यवस्था
अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से भीड़ नियंत्रण की कार्रवाई पहले से अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी होगी। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यक्षमता भी काफी मजबूत होगी।

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