राजा रघुवंशी केस: सोनम को कैसे मिली जमानत? मेघालय हाईकोर्ट ने बताई पूरी वजह, परिवार जाएगा सुप्रीम कोर्ट

 इंदौर
मेघालय हाई कोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखने के एक दिन बाद राजा रघुवंशी के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है. राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने मंगलवार को कहा कि परिवार जल्द ही सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करेगा। 

विपिन रघुवंशी ने कहा कि उन्हें अभियोजन पक्ष की पैरवी से संतुष्टि नहीं है. इसलिए अब उनका परिवार न्याय की लड़ाई अपने दम पर लड़ेगा और इसके लिए निजी वकील नियुक्त करेगा. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी के समय सोनम को गिरफ्तारी के आधारों की जानकारी क्यों नहीं दी. उनके मुताबिक, इसी कानूनी चूक का फायदा सोनम को जमानत मिलने में मिला। 

दरअसल, मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें निचली अदालत द्वारा 27 अप्रैल को दी गई सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया और सोनम को प्रभावी तरीके से गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए. अदालत ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) का उल्लंघन माना। 

मेघालय हाईकोर्ट ने साफ की तस्वीर
मेघालय हाई कोर्ट ने  ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सोनम रघुवंशी को ज़मानत दी गई थी. सोनम पर 2025 में मेघालय में हनीमून के दौरान अपने पति की हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है. जस्टिस डब्ल्यू डिएंगडोह की सिंगल-जज बेंच ने राज्य सरकार की आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया. सरकार ने 27 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई ज़मानत को रद्द करने की मांग की थी। 

जस्टिस डिएंगडोह ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार जिस तरह से तैयार किए गए थे, उससे पता चलता है कि उसमें “न्यायिक सोच का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया”.  कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि ऐसी तैयारी बिना किसी सोच-विचार के की गई थी और कहीं भी कोई खास आरोप या जानकारी नहीं मिलती. पुलिस स्पष्ट भी नहीं कर सकी कि आखिर सोनम रघुवंशी के खिलाफ असल में क्या आरोप हैं?

कोर्ट ने राज्य की याचिका खारिज की
कोर्ट ने कहा कि अगर गिरफ्तारी के आधार की जानकारी इस तरह दी जाती है तो यह गिरफ्तारी करने वाली एजेंसी की ओर से न्यायिक सोच के पूरी तरह से इस्तेमाल न किए जाने को दिखाता है. कोर्ट ने राज्य की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि उसके पास ज़मानत रद्द करने के लिए अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई आधार नहीं है। 

क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि राजा रघुवंशी और सोनम की शादी 11 मई 2025 को इंदौर में हुई थी. दोनों 20 मई को हनीमून मनाने मेघालय गए थे. 23 मई को सोनम के लापता होने की खबर सामने आई, जबकि 2 जून को राजा का शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) स्थित एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था। 

किसे हई थी सजा?
इस मामले में पुलिस ने सोनम रघुवंशी, उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा और उसके तीन दोस्तों को हत्या की साजिश और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था. सोनम करीब 10 महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुई है। 

उज्जैन अब लिख रहा है औद्योगिक विस्तार की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उज्जैन अब लिख रहा है औद्योगिक विस्तार की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विक्रम उद्योगपुरी में 1200 करोड़ रूपए से अधिक की लागत से निर्मित पेप्सिको के फ्लेवर कंसनट्रेट निर्माण संयंत्र का किया वर्चुअली लोकार्पण

उज्जैन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि  दिन मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उज्जैन जो पहले से ही धार्मिक नगरी के रूप में पूरे विश्व में प्रसिद्ध है अब औद्योगिक विस्तार की भी नई इबारत भी लिख रहा है। हमारे लिए यह अत्यंत गौरवशाली क्षण है। राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों से मध्यप्रदेश ग्लोबल निवेश का हब बन रहा है। औद्योगिक विस्तारीकरण से प्रदेश के कई युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को उज्जैन के विक्रम उद्योगपुरी के ग्राम नरवर स्थित 1266 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित पेप्सिको फ्लेवर कंसनट्रेट निर्माण संयंत्र के लोकार्पण समारोह को भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में उज्जैन नगरी विश्व के सबसे समृद्ध और सम्पन्न व्यापारिक नगरों में गिनी जाती थी। हमारा लक्ष्य है कि उज्जैन नगरी उसी वैभव को पुन: प्राप्त करें। आस्था के साथ उज्जैन उद्योग निवेश और रोजगार का भी अग्रणी केंद्र बनें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग स्थापित कर मालवा की प्रगति को निरंतर गति दी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए सशक्त उद्यमी समृद्ध मध्यप्रदेश का सफल आयोजन किया जा रहा है।

देश का फ्लेवर कंसनट्रेट का दूसरा संयंत्र उज्जैन में हुआ प्रारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की इस अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई का शुभारंभ होने पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि भारत में इस विशिष्ट और उच्च तकनीकी फ्लेवर कंसनट्रेट निर्माण के केवल 02 संयंत्र है, जिनमें से 01 आज से उज्जैन में प्रारंभ हो रहा है। विक्रम उद्योगपुरी में 22 एकड़ क्षेत्र में 1226 करोड़ रुपए के निवेश से इस संयंत्र की स्थापना की गई है। पूरी तरह ऑटोमेशन पर आधारित इस संयंत्र से 800 युवाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। यह नया संयंत्र भारत में कंपनी की विनिर्माण क्षमता को और मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलने के साथ क्षेत्र में सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में पेप्सिको इंडिया और साउथ एशिया के सीईओ जागृत कोटेचा ने कहा कि हमारे लिए यह अत्यंत हर्ष का क्षण है कि हमारी कंपनी को बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में म.प्र. शासन के सहयोग से संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिला। उन्होंने इसके लिये मुख्यमंत्री डॉ. यादव, म.प्र. शासन और एमपीआईडीसी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेंश नाथ जी महाराज ने कहा कि उज्जैनवासियों के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार द्वारा किये जा रहे विशेष प्रयासों से औद्योगिक क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। नवीन उद्योगों की स्थापना हो रही है। उज्जैन नगरी धार्मिक पहचान के साथ औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।

कार्यक्रम में म.प्र. हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष ओम जैन, नगर निगम सभापती श्रीमती कलावती यादव, प्रबंध निर्देशक एमपीआईडीसी चंद्रमौली शुक्ला, एमपीआईडीसी उज्जैन के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर, पेप्सिको कंपनी के हरदीप भाटिया, कंपनी के सीईओ इंटरनेशनल बेवरेजेस यूजीन विलेमसेन, जनरल मैनेजर एवं सीनियर वाईस प्रेसिडेंट इवान नॉर्टन सहित नागरिक उपस्थित थे।

 

ऋषिकेश से इंदौर आ रही बस में भीषण आग, 8 यात्रियों की दर्दनाक मौत; अधिकांश मृतक इंदौर के

इंदौर / दौसा
ऋषिकेश से इंदौर आ रही एक निजी बस में टक्कर के बाद आग लगने से 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, राजस्थान के दौसा में हुए इस हादसे में मारे गए ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से बताए जा रहे हैं. वहीं, कई लापता ओंकारेश्वर के पास के भी बताए जा रहे हैं. इस भीषण दुर्घटना में 29 लोग घायल भी हुए. वहीं, इंदौर से मृतकों के परिजन राजस्थान के दौसा के लिए रवाना हो गए हैं। 

मरने वालों में ज्यादातर इंदौर से
ऋषिकेश से इंदौर चलने वाली हंस ट्रेवल्स की एक बस से कई यात्री इंदौर आने के लिए निकले थे लेकिन बुधवार अल सुबह दौसा के पास बस की टक्कर सामने चल रहे ट्रक से हो गई, जिसके बाद अचानक आग लग गई. आग लगने से बस में सवार 8 लोग जिंदा जल गए. वहीं, तकरीबन 29 घायल हो गए, जिनका इलाज दौसा स्थित सरकारी अस्पताल में चल रहा है. मृतकों में इंदौर की याचिका, नेहा, दिशा, सुवानंद, प्रदीप, महक, योगिनी, जितेंद्र शामिल हैं. इस बात की पुष्टि मृतकों के परिजनों द्वारा की जा रही है. वहीं, इंदौर के पास रहने वाली निर्मला, प्रियंका और भूमि घटना के बाद से लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही। 

मृतकों के परिजनों का बुरा हाल, बोले- कुछ पता नहीं चल रहा
पूरे घटनाक्रम की जानकारी इंदौर में रहने वाले अभिनव पांडे के परिजनों को लगी तो वह दौसा के लिए रवाना हुए हैं. उन्होंने ईटीवी भारत से कहा, ” घटना कैसे हुई और कौन कहां है इसे लेकर कुछ साफ जानकारी नहीं मिल पा रही है. इसलिए सभी घटनास्थल के लिए इंदौर से रवाना हो गए हैं और उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे.” प्रारंभिक तौर पर बताया जा रहा है कि जिन लोगों की इस पूरे घटनाक्रम में मौत हुई है वह ऋषिकेश और हरिद्वार घूमने के लिए गए हुए थे और देर रात वहां से बस के माध्यम से इंदौर के लिए निकले थे, तभी राजस्थान में हादसा हो गया। 

दौसा एडिशनल एसपी योगेंद्र फौजदार ने बताया कि घटनाक्रम रात करीब 3 बजे के आसपास का है. हादसे में अब तक 6 लोगों के शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया जा चुका है. मामुली घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है. उन्होंने बताया कि घायलों को अभी मृतकों के बारे में जानकारी नहीं दी गई है. एडिशनल एसपी ने बताया कि बस में 39 से अधिक सवारियां होने का अनुमान लगाया है. हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है. हादसे के दौरान आगे चल ट्रेलर का चालक और खलासी भी घायल हुए हैं। 

जानकारी के अनुसार, हादसा शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे हुआ. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और देखते ही देखते उसमें आग लग गई. बस में फंसे 6 यात्रियों की जिंदा जलने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 अन्य यात्रियों ने सिर में गंभीर चोट लगने के कारण दम तोड़ दिया. हादसे की सूचना मिलते ही जिला पुलिस प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया. वहीं, दौसा की जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा का कहना है कि बस ऋषिकेश से इंदौर जा रही थी, तभी सुबह करीब 3:15 या 3:30 बजे जयपुर-बांदीकुई एक्सप्रेसवे पर टक्कर के बाद उसमें आग लग गई. करीब 24 या 25 लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे और उन्हें बचा लिया गया. वे अभी ठीक हैं. कुल हताहतों की संख्या के बारे में हम इस समय केवल अनुमानित आंकड़ा ही बता सकते हैं, अंतिम संख्या अभी पक्की नहीं है. करीब सात से आठ लोगों की मौत हुई है। 

समय पर पहुंचती फायर ब्रिगेड टीम तो कई जान बच जाती : इस दर्दनाक हादसे के बाद राहत कार्य को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं. स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि दुर्घटना की सूचना पुलिस और एक्सप्रेसवे प्रबंधन को तत्काल दे दी गई थी, लेकिन करीब एक घंटे तक फायर ब्रिगेड मौके पर नहीं पहुंची. ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर राहत और बचाव कार्य शुरू हो जाता तो बस में फंसे कई यात्रियों की जान बचाई जा सकती थी. उनका दावा है कि मदद के इंतजार में यात्री बस के भीतर ही फंसे रहे, जिससे पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई. फिलहाल पुलिस ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है, जबकि घायलों का उपचार जारी है. प्रशासन दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रहा है। 

घटना को लेकर CM और सांसद ने दुख जताया : हादसे को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट पर दुख जताया. उन्होंने लिखा कि दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई सड़क दुर्घटना में जनहानि का समाचार पीड़ादायक है. ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें. घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करता हूं. दौसा सांसद मुरारीलाल मीना ने भी दुख प्रकट किया है. साथ ही सरकार से पैसेंजरों की सुरक्षा को लेकर काम करने की बात कही है। 

राज्यपाल और पूर्व सीएम ने भी व्यक्त की संवेदना : राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस पर हुए भीषण सड़क हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने ईश्वर से मृतकों की पुण्यात्मा की शांति और शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है. साथ ही घायलों के जल्द स्वस्थ होने की भी कामना की है. हादसे को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने भी एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई एक भीषण सड़क दुर्घटना में कई लोगों की मृत्यु होने का समाचार बेहद दुखद है. इस हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं. ईश्वर उन्हें इस कठिन समय में संबल प्रदान करें एवं दिवंगतों की आत्मा को शांति प्रदान करें. घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिवनी को देंगे 494.16 करोड़ के 629 विकास कार्यों की सौगात

मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिवनी को देंगे 494.16 करोड़ के 629 विकास कार्यों की सौगात

कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन राशि का लाभ
मुख्यमंत्री राज्य-स्तरीय धान महोत्सव में होंगे शामिल

सिवनी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 01 जुलाई को सिवनी जिले में राज्य-स्तरीय धान महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले को विकास और किसान कल्याण की अनेक सौगातें देंगे। महोत्सव में कोदो-कुटकी उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि का अंतरण, 494.161 करोड़ रुपये लागत के 629 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन और हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया जाएगा। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंषाना, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद श्रीमती भारती पारधी सहित जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य के कोदो-कुटकी उत्पादक 3,941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड 82 लाख 99 हजार 300 रूपये की प्रोत्साहन राशि सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे। यह राशि किसानों को 1 हजार रूपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

महोत्सव में विभिन्न विभागों द्वारा थीम आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। प्रदर्शनी में धान बुवाई के आधुनिक कृषि यंत्र, प्राकृतिक खेती एवं प्राकृतिक बगीचे, कस्टम हायरिंग सेंटर, जीआई टैग एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद, पोषण आहार प्रदर्शनी, डिजिटल जमीन, कृषिका एप तथा किसान क्रेडिट कार्ड से संबंधित जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। प्रदर्शनी परिसर में आकर्षक सेल्फी प्वाइंट भी आमजन के लिए विशेष आकर्षण रहेगा।

 

रेलवे का नया मोबाइल ऐप लॉन्च, अब ट्रेन 15 मिनट से ज्यादा लेट हुई तो तुरंत मिलेगा अलर्ट

भोपाल 
भारतीय रेलवे से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद अच्छी खबर है। आने वाले समय में ट्रेनों के लेट होने की समस्या से काफी हद तक छुटकारा मिल सकता है। रेलवे ने ट्रेनों की आवाजाही पर सटीक और रियल-टाइम नजर रखने के लिए एक आधुनिक एंड्रॉयड मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया है। इस खास ऐप का नाम ‘Punctuality BZA’ है, जिसे साउथ कोस्ट रेलवे के विजयवाड़ा डिवीजन द्वारा विकसित किया गया है।

इस डिजिटल तकनीक के आने से अब रेलवे के परिचालन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी अपने स्मार्टफोन पर ही किसी भी ट्रेन की सटीक लोकेशन, उसकी गति और देरी से जुड़ी पल-पल की जानकारी हासिल कर सकेंगे। पहले जिस काम के लिए सिर्फ कंप्यूटर सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता था, वह काम अब बेहद तेज और आसान हो गया है।

एक ही डैशबोर्ड पर मिलेगी पूरी कुंडली
‘Punctuality BZA’ एप्लीकेशन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसके सिंगल डैशबोर्ड पर ही यूजर को ट्रेन संचालन से जुड़ी तमाम जानकारियां मिल जाती हैं। इस ऐप में मिलने वाली मुख्य सुविधाएं इस प्रकार हैं:

    लाइव ट्रैकिंग: अलग-अलग रूट और सेक्शन पर ट्रेनों की मौजूदा स्थिति की लाइव मॉनिटरिंग।

    इंटेलिजेंट अलर्ट सिस्टम: यदि कोई ट्रेन अपने निर्धारित समय से 15 मिनट से अधिक लेट होती है, तो यह ऐप अधिकारियों को तुरंत अलर्ट भेजता है।

    जीपीएस कनेक्टिविटी: यह ऐप सीधे ‘जीपीएस आधारित लेट ट्रेन मॉनिटरिंग सिस्टम’ से जुड़ा है, जो ट्रेनों की आवाजाही को खुद-ब-खुद रिकॉर्ड करता है।

    कागजी कार्रवाई से मुक्ति: ट्रेन के लेट होने की वजहों को डिजिटल माध्यम से तुरंत दर्ज कर लिया जाता है, जिससे पुराना कागजी काम बेहद कम हो गया है। इससे ट्रेन मैनेजरों को सुरक्षित ट्रेन संचालन पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

पुराने सिस्टम (ICMS) की कमियों से मिलेगा छुटकारा
इस नई तकनीक के आने से पहले रेलवे मुख्य रूप से ‘इंटीग्रेटेड कोचिंग मैनेजमेंट सिस्टम’ (ICMS) के वेब पोर्टल का इस्तेमाल करता था। पुराने सिस्टम में अधिकारियों को बार-बार वन-टाइम पासवर्ड (OTP) डालकर लॉगइन करना पड़ता था। साथ ही, अलग-अलग जानकारियों के लिए बार-बार कंप्यूटर स्क्रीन बदलनी पड़ती थी, जिससे समय की बर्बादी होती थी। नया ऐप इस पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और ‘यूजर-फ्रेंडली’ बनाता है।

यात्रियों और रेलवे को क्या होगा बड़ा फायदा?
इस ऐप के जरिए मिलने वाले सटीक डेटा से रेलवे के उच्च अधिकारियों को विपरीत परिस्थितियों में तुरंत और सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी। जब रेलवे स्टाफ के पास हर ट्रेन की रियल-टाइम लोकेशन होगी, तो वे ट्रेनों को ज्यादा कुशलता से री-शेड्यूल कर पाएंगे, जिसका सीधा फायदा यात्रियों को होगा और उनकी असुविधाएं कम होंगी। विजयवाड़ा डिवीजन में इस ऐप के सफल प्रयोग के बाद अब इसे भारतीय रेलवे के अन्य डिवीजनों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।

 

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर

पीएम सूर्य घर योजना में तीन किलोवॉट के सौर संयंत्र लगाने पर मिल रही 78 हजार रूपये की सब्सिडी : ऊर्जा मंत्री तोमर

अब तक 1 लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ताओं के खातों में पहुंची 100 करोड़ रूपये से अधिक की सब्सिडी

भोपाल
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल एक लाख 43 हजार 150 उपभोक्‍ता लाभान्वित हुए हैं। इनके बैंक खातों में 1010 करोड़ 25 लाख रूपये की सब्सिडी जमा कराई जा चुकी है। योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयंत्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयंत्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

कहां करें आवेदन

पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। योजना में शामिल होने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए संबंधित विद्य़ुत वितरण कंपनी की वेबसाइट अथवा उपाय एप, वॉट्सऐप चेटबॉट एवं टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं।

कंपनीवार स्थिति

मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 51 हजार 343 सोलर संयंत्रों पर 361 करोड़ 99 लाख, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 58 हजार 715 संयंत्रों पर 4162 करोड़ 30 लाख 39 हजार और पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी क्षेत्र में 33 हजार 092 सोलर संयंत्रों पर 231 करोड़ 95 लाख 50 हजार रूपये की सब्सिडी दी गई है।

 

साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों के नए दौर में उत्तर प्रदेश, कक्षा-कक्ष से मिली सीख पर तय होगी भविष्य की शैक्षणिक रणनीति

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया। बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित ‘पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग’ एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने किया।

टीएलपीएस रिपोर्ट ने दिखाई कक्षा-कक्ष में बदलाव की वास्तविक तस्वीर

कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज है। रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में होने वाला सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पर बनी साझा रणनीति

‘स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियों को अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी एवं शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा, प्रभावी अकादमिक सहयोग और सतत मार्गदर्शन को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए।

अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों और अकादमिक नेतृत्व से किया सीधा संवाद

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए।

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

समापन सत्र में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे।

30 जून तक 2 लाख 93 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रवेश

भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित ई-प्रवेश पोर्टल पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 30 जून 2026 तक प्रदेशभर में 5,48,778 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 4,68,539 विद्यार्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा 2, 93, 257 विद्यार्थियों ने विभिन्न स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर लिया है।

पिछले वर्ष कि तुलना में इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। प्रवेश में 42.03 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष 30 जून तक 2,06,482 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 2,93,257 हो गई है। यानी एक वर्ष में 86,775 अधिक विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेकर नया रिकॉर्ड बनाया है।

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, ऑनलाइन, सरल एवं विद्यार्थी-केंद्रित प्रवेश व्यवस्था, महाविद्यालयों में समयबद्ध दस्तावेज सत्यापन तथा प्रभावी काउंसलिंग व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

विद्यार्थियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने रिक्त सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया को और अधिक सरल बना दिया है। अब जिन शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में सीटें रिक्त हैं, वहाँ इच्छुक विद्यार्थी सीधे संबंधित महाविद्यालय पहुँचकर उसी दिन पंजीयन, दस्तावेज सत्यापन एवं सीट आवंटन की समस्त प्रक्रिया पूर्ण करा सकेंगे। सीट आवंटित होने के तुरंत बाद विद्यार्थी उसी दिन निर्धारित शुल्क जमा कर प्रवेश प्राप्त कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को किसी अतिरिक्त चरण अथवा प्रतीक्षा का सामना नहीं करना पड़ेगा और रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया तेजी से पूर्ण हो सकेगी।

उच्च शिक्षा विभाग ने सभी पात्र विद्यार्थियों से आग्रह किया है कि वे अपने निकटतम शासकीय अथवा अशासकीय महाविद्यालय में उपलब्ध रिक्त सीटों की जानकारी प्राप्त कर इस विशेष सुविधा का लाभ उठाएँ तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना प्रवेश सुनिश्चित करें।

 

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को म‍िला जी आई टैग

वर्ष 2030 तक उदानिकी फसलों का क्षेत्र 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ेगा

भोपाल
मध्यप्रदेश ने इतिहास बनाते हुए एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों के लिए जी आई टैग हासिल करने में सफलता हासिल की है। देश में यह पहली बार हुआ है जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में जीआई टैग मिला है। इनमें गुना का धनिया, नरसिंहपुर बरमान घाट का बेंगन, बैतूल गजरिया आम, खरगौरी की लाल मिर्च, मांडू की खुरसानी इमली, जबलपुर का मटर, सिवनी का सीताफल, मालवी आलू और गराड़ू, नरसिंहपुर गुड, जबलपुर सिंघाड़ा, आलीराजपुर का नूरजहां आम, बुरहानपुर का केला, इंदौरी जीरावन, रतलाम सैलाना बालम ककड़ी और छतरपुर का पान शामिल है

इसके अलावा उज्जैन की इमली, आलीराजपुर का अचारी आम, मालवा का सफेद प्याज, झाबुआ का दाल पानिया, मंदसौर का देशी जीरा, बुरहानपुर की जलेबी, अशोक नगर की खिरनी को जी आई टैग दिलवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कृषक कल्याण वर्ष में यह एक बड़ी उपलब्ध‍ि है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के आय को दो गुना बढ़ाने के लिए उनसे उदयानिकी फसलों की खेती से जुड़ने का आव्हान किया है। फिलहाल 28 लाख हेक्टेयर में उदयानिकी फसलों की खेती हो रही है। वर्ष 2030 तक 30 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है।

कुम्भराज धनिया

कुम्भराज धनिया गुना जिले में लगभग 60 वर्षों से उगाया जा रहा है। यह किस्म 85-90 दिन में पककर तैयार होती है। इसकी उपज लगभग 12-15 कुंटल प्रति हेक्टर प्राप्त होती है। इसमें लगभग 0.4 से 0.50 प्रतिशित वाष्पशील तेल है, जिसकी वजह से इसमें बहुत अच्छी खुशबू व मिठास आती है। धनिया गुना जिले से अन्य देशो को निर्यात किया जा रहा है। कुम्भराज धनिया का स्वाद दूसरे धनिया की तुलना में तेज और बेहतर है, इसका चमकीला हरा रंग, उत्तम आकृत्ति और माप तथा शानदार सुगंध है। अकेले गुना में सालाना लगभग 32,000 मीट्रिक टन धनिया का उत्पादन होता है जो पूरे देश के कुल उत्पादन का 20 से 25 प्रतिशत है।

बरमान भटे

नर्मदा की बालुई मिट्टी में पैदा होने वाले भटे का जायका कुछ अलग ही है। यही कारण है कि बाहर से भी लोग अक्सर अपने माध्यमों से बरमान के भटे को बुलाते है, मंडियों में बरमान के भटे की तलाश रहती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि नर्मदा किनारे कम तापमान होने की वजह से यहां के भटे का स्वाद अलग रहता है।

बैतूल का गजर‍िया आम

बैतूल जिले में खेड़ला किला, भवरगढ़, सांवलीगढ़, शेरगढ़ और असीरगढ़ किले जो 500 साल से ज्यादा पुराने किलो में आते हैं। जो यह बताते है की बैतूल गोंड राजाओ का केंद्र था। भारत वर्ष का सर्वसुलभ एवं लगभग हर प्रान्त में आसानी से उगाया जा सकने वाला फल आम है। ताजे फल के उपयोग के अतिरिक्त आम के फलों से अनेक परिरक्षित पदार्थ बनाये जाते हैं। कच्चे आम का अचार, अमचूर आदि बनाये जाते जबकि पके आम से स्क्वैश, जूस, शर्बत, जैम, अमावट आदि बनाये जाते हैं। अधिकतर आम के बाग अवैज्ञानिक तरीके से लगाये गये हैं, इनकी उत्पादकता अत्यन्त कम है।

खरगोन मिर्च

खरगोन जिले की मिर्च सबसे महत्वपूर्ण फसलों में से एक है। जिले में साल दर साल मिर्च की खेती का क्षेत्रफल और उत्पादन बढ़ रहा है। सबसे बड़ी मिर्च मण्डियों में से एक यहाँ खरगोन जिले में सनावद के पास बेदिया में स्थित है। निमाड़ और मालवा क्षेत्र राज्य के सर्वाधिक मिर्च उत्पादक क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की लाल मिर्च चीन, पाकिस्तान, मलेशिया और सऊदी अरब को निर्यात की जाती है।

खुरासानी इमली

मांडव की माटी का जादू ऐसा है कि जो भी यहां आया, यहीं का होकर रह गया। अलग-अलग सभ्यताओं के राजवंश हों या भेंर की वनस्पतियां, सभी यहां की मिट्टी के साथ एक हो गए। ऐसा ही एक उदाहरण अफ्रीका के शुष्क राज्य का बाओबाब है। 14 वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान मांडव लाया गया था और इसका नाम ‘बाओबाब से बदलकर खुरासानी इमली कर दिया गया था। इसे एक और नाम मांडवी इमली से भी जाना जाता है। यह पेड़ ऐसा लगता है जैसे किसी ने जड़ों सहित इसको उल्टा लगा दिया हो। ऊपर और तना नीचे, पत्तियाँ केवल वर्षा ऋतु में ही बढ़ती हैं।

सीताफल

सिवनी जिले में 656 हेक्टेयर क्षेत्र में 6500 मीट्रिक टन से अधिक सीताफल का उत्पादन होता है। सीताफल का वजन 600 से 700 ग्राम होने के कारण इसका नाम जंब सीताफल रखा गया है। अपने विशिष्ट आकार और स्वाद के कारण इसकी प्रदेश और देश में भी अच्छी मांग है।

मालवी आलू

भारतीय आलू रोग प्रतिरोधकता, आकार, माप, त्वचा, रंग आदि के मामले में अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता को पूरा करता है और आलू का प्रसंस्करण इसे अधिक आर्थिक मूल्य देता है। भारत के भीतर, मध्य प्रदेश राज्य वर्तमान में आलू का पांचवां सबसे बड़ा उत्पादक है। राज्य की हिस्सेदारी 6.68 प्रतिशत थी और 2014-15 से 2018-19 के बीच पांच वर्षों के लिए उत्पादन औसत 3225.95 है। मध्य प्रदेश के कई कृषि जलवायु क्षेत्रों में से, मालवा क्षेत्र मध्य प्रदेश में आलू उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

हरी मटर जबलपुर

हरी मटर जबलपुर की एक लोकप्रिय सब्जी और प्रमुख रबी फसल है। ये काफी पौष्टिक भी होते हैं और इनमें उचित मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हरी मटर या “गार्डन मटर”, छोटे, गोलाकार बीज हैं जो पाएसम सटाईवम पौधे द्वारा उत्पादित फली से आते हैं। वे सैकड़ों वर्षों से मानव आहार का हिस्सा रहे हैं और दुनिया भर में खाए जाते हैं। फसल अवधि 40-60 दिन है। जिले में वर्ष 2018-19 में हरी मटर की कुल बुआई 31,360 हेक्टेयर क्षेत्र में की गयी है तथा वर्ष 2018-19 का वार्षिक उत्पादन 52,500 टन है।

गराडू

गराडू (हायस्कोरियालाटा) मालवा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रमुख फसलों में से एक है। यह रतालू की विभिन्न प्रजातियों में से एक है और स्वतंत्र रूप से खेती की गई है। मालवा में गराडू एकमात्र ऐसा है जिसकी नियमित रूप से खेती की जाती है और खाई जाती है, गराडू की उत्पत्ति का केंद्र लगभग मालवा प्लेटू है और भारत का अन्य भाग भी हो सकता है। गराडू को पर्यंत रतालू के नाम से भी जाना जाता है। गराडू (बैंगनी रतालू) मालवा क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण फसल है, इसकी सत्र में विभिन्त्र पारंपरिक और आधुनिक मिठाइयों में उपयोग किया जाता है।

नरसिंहपुर गुड़

भारत दुनिया का एक प्रमुख गुड़ उत्पादक देश है, यह दुनिया में लगभग 58 प्रतिशत गुड़ उत्पादन में योगदान देता है। गुड़ उद्योग मध्य प्रदेश में बहुत लोकप्रिय है, यह भारत में लगभग 6 प्रतिशत गुड़ उत्पादन का योगदान देता है। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर जिला गुड़ निर्माण के लिए लोकप्रिय है। यहां ज्यादातर काली कपास मिट्टी है जिसमें मिट्टी की मात्रा 60-65% है, पानी धारण करने की क्षमता अधिक है। सितंबर-अक्टूबर में बोए गए गने के साथ सहफसली खेती। मध्य प्रदेश के कुल गत्रा क्षेत्र का लगभग 65% (लगभग 75000 हेक्टेयर) नरसिंहपुर जिले में है। इसे मध्य प्रदेश का चीनी का कटोरा कहा जाता है। इस जिले में 2500-3000 टीसीडी क्षमता वाली 09-10 चीनी मिलें है, लेकिन गन्ना विकास गतिविधियां नहीं कर रही हैं। ऐसे में किसान अब गुड़ उत्पादन उद्यमिता विकसित करने के लिए काफी उत्सुक हैं।

जबलपुर सिंघारा

सिंघाड़ा की खेती के लिए सात महीने की मेहनत लगती है. पौधे को अपने पूर्ण आकार में विकसित होने में चार महीने लगते हैं और फल आने में तीन महीने और लगते हैं। बुआई का मौसम मई-जून के गर्मियों के महीनों में शुरू होता है। किसान एक छोटे पोखर पा छोटे जलाशय में बीज बोते हैं। एक महीने के भीतर, पौधा एक बेल में बदल जाता है जिसे बाद में बड़े तालाब में प्रत्यारोपित किया जाता है। फलों की तुड़ाई दिसम्बर-जनवरी माह में की जाती है। जबलपुर, सतना और आसपास के जिलों में सिंधारा की खेती करने वाले लगभग 4,500 किसान हैं, जो मध्य प्रदेश में सिंधारा के मुख्य हितधारक हैं। ताजा सिंघाड़ा अपनी उच्च जल सामग्री (80%), स्टार्च (52%), प्रोटीन (1.87%) और टीएसएस (7-8%) के लिए जाना जाता है।

नूरजहाँ आम

मध्य प्रदेश का कट्टीवाड़ा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, हाल ही में, इसने एक और अनोखे आकर्षण नूरजहाँ आम के लिए सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल की है। इनका वजन 3-3.5 किलोग्राम होता है और यह एक फुट तक लंबे हो सकते हैं। इस किस्म के उत्पादकों का मानना है कि यह सैकड़ों साल पहले अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश तक पहुंची थी। और जबकि इस फल के कई उत्पादक हैं, इस किस्म के सबसे प्रसिद्ध आम नूरजहाँ मैंगो फार्म्स से आते हैं, जिसका स्वामित्व और प्रबंधन किया जाता है।

 

सिवनी में 1 जुलाई को धान महोत्सव, CM मोहन यादव किसानों को देंगे ₹2.82 करोड़ और विकास कार्यों की सौगात

सिवनी 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 1 जुलाई यानी आज  सिवनी के पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित धान महोत्सव में शामिल होने आ रहे हैं। इसके लिए आयोजन स्थल पर बड़े स्तर पर तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित आगमन को लेकर कलेक्टर नेहा मीना के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा कार्यक्रम स्थल, हेलीपैड, सुरक्षा, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, यातायात सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

इस आयोजन में मुख्यमंत्री किसानों को सौगात देंगे तो वहीं कृषि, श्रीअन्न संवर्धन और विकास कार्यों को समर्पित होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सिंगल क्लिक के माध्यम से कोदो एवं कुटकी उत्पादक प्रदेश के 3941 किसानों के बैंक खातों में 2 करोड़ 82 लाख 99 हजार 300 रुपए की प्रोत्साहन राशि अंतरित करेंगे। ये राशि 1000 रुपए प्रति क्विंटल की दर से प्रदान की जा रही है, जिससे श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को आर्थिक संबल मिलेगा।

विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे सीएम
कलेक्टर नेहा मीना ने बताया कि, कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिले के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी करेंगे। साथ ही, विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विभिन्न विभागों द्वारा लगाई जाने वाली थीम आधारित विकास प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी में धान बुवाई के कृषि यंत्र, प्राकृतिक बीजों की प्रदर्शनी, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राकृतिक फार्मिंग मॉडल, जीआई टैग प्राप्त सीताफल एवं मिलेट्स उत्पाद, पीएमएफएमई उत्पाद, आम की विभिन्न किस्में, स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प और मिट्टी कला उत्पाद, लघु वनोपज, स्थानीय उद्यमियों के उत्पाद तथा पोषण आहार का प्रदर्शन किया जाएगा। कृषिका ऐप की जानकारी भी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।

इस दिशा में अहम कदम है धान महोत्सव
श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषक तत्व से भरपूर होते हैं और इन्हें कम पानी में उगाया जा सकता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बन गए हैं। भारत सरकार और राज्य सरकारें श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही हैं, जिनमें प्रोत्साहन राशि और बाजार लिंकेज शामिल हैं। ये पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाती है, बल्कि उपभोक्ताओं को स्वस्थ खाद्य विकल्प भी प्रदान करती है। सिवनी में धान महोत्सव इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री का दौरा जिले के विकास कार्यों की समीक्षा और नई परियोजनाओं की घोषणा के लिए अहम माना जा रहा है। इन दौरों से स्थानीय प्रशासन को जनता से सीधे जुडऩे और उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिलता है। उम्मीद की जा रही है कि मुख्यमंत्री का सिवनी दौरा क्षेत्र में चल रही योजनाओं की प्रगति का आकलन करने और भविष्य की विकास रणनीतियों को आकार देने में सहायक होगा। यह अवसर स्थानीय जनता के लिए भी अपनी अपेक्षाएं व्यक्त करने का एक मंच प्रदान करेगा, जिससे शासन-प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है।

कलेक्टर ने व्यवस्थाएं परखीं
मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर नेहा मीना ने कार्यक्रम स्थल पॉलिटेक्निक ग्राउंड, हेलीपैड स्थल, सेफ हाउस और सुकतरा हवाई पट्टी का निरीक्षण किया। उन्होंने इन सभी स्थानों पर चल रही तैयारियों का जायजा किया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मंच की व्यवस्था, दर्शकों की बैठक व्यवस्था, पार्किंग स्थल, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, साफ सफाई और यातायात प्रबंधन सहित अन्य आवश्यक पहलुओं का बारीकी से जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी तैयारियों को निर्धारित समय पर पूर्ण करने तथा प्रत्येक व्यवस्था को व्यवस्थित एवं त्रुटिरहित रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu