त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा का उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किया अभिनंदन

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा का उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किया अभिनंदन

28वें एओएमएसआई मिड-टर्म कन्वेंशन एवं 14वें एओएमएसआई पोस्टग्रेजुएट कन्वेंशन—मिडकॉम्स 2026 में होंगे शामिल

भोपाल

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा का उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने गुरुवार को निवास कार्यालय, भोपाल में आत्मीय अभिनंदन किया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. साहा और उप मुख्यमंत्री शुक्ल के मध्य विभिन्न समसामयिक विषयों और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों को लेकर चर्चा हुई। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती स्वप्ना साहा भी उपस्थित थीं। त्रिपुरा मुख्यमंत्री डॉ. साहा मध्यप्रदेश प्रवास पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. साहा भोपाल में आयोजित 28वें एओएमएसआई मिड-टर्म कन्वेंशन एवं 14वें एओएमएसआई पोस्टग्रेजुएट कन्वेंशन—मिडकॉम्स 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश स्टेट चैप्टर तथा पीपुल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में यह राष्ट्रीय सम्मेलन 2 से 4 जुलाई 2026 तक पीपुल्स यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन की थीम “क्रिएटिंग अ होलसम सर्जन” अर्थात “समग्र सर्जन का निर्माण” है। यह सम्मेलन ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अकादमिक आयोजन है, जिसमें देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञ, वरिष्ठ चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षक, शोधकर्ता तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थी सहभागिता करेंगे। सम्मेलन में नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों, जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं तथा चिकित्सा शिक्षा के विविध आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

 

केतन हत्याकांड पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली MP की डेंटिस्ट सस्पेंड, वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई

भोपाल

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड (Ketan Agarwal murder case) का मजाक उड़ाने को लेकर मध्य प्रदेश की डेंटिस्ट डॉ. मुस्कान सोनी को ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने पांच साल के लिए सस्पेंड कर दिया है। डॉ. मुस्कान ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक 19 सेकंड की एक वीडियो स्टोरी अपलोड की थी जिसमें उन्होंने ‘आई हेट मेन’ हैशटैग का इस्तेमाल कर मृतक केतन अग्रवाल का मजाक उड़ाया था। मुस्कान सोनी का वीडियो वायरल हो गया जिसके बाद उनकी सोशल मीडिया पर आलोचना और ट्रोलिंग शुरू हो गई। एआईडीएसए द्वारा सस्पेंड किए जाने के बाद मुस्कान ने दो वीडियो अपलोड किए जिनमें उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी है।

डॉ मुस्कान ने स्टोरी में क्या बोला था?
डेंटिस्ट मुस्कान सोनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से कुछ दिन पहले एक वीडियो स्टोरी शेयर की थी। इस वीडियो में उन्होंने कहा था कि – पुणे का जो लड़का था उसके बाल नहीं थे। अब ऐसे झूठ बोलोगे तो मरोगे ही न। तो हैशटैग आई हेट मेन। मुस्कान ने इसके बाद वीडियो में हंसते हुए कहा कि दो आदमी क्या मर गए, मर्द समाज में डर फैल गया।’ मुस्कान का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होना शुरू हो गया। वीडियो वायरल होते ही लोगों ने डेंटिस्ट की आलोचना और उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।

AIDSA ने लिया एक्शन, डेंटिस्ट पांच साल के लिए सस्पेंड
डॉ. मुस्कान के वीडियो पर ऑल इंडिया डेंटल स्टूडेंट्स एंड सर्जन्स एसोसिएशन (AIDSA) ने संज्ञान लिया। उन्होंने एक आदेश जारी कर डॉ. मुस्कान सोनी को AIDSA के सभी पदों और सदस्यता से सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंशन ऑर्डर में AIDSA ने कहा कि ‘डॉ. मुस्कान सोनी को अनुशासनहीनता का काम करते हुए पाया गया है और उन्होंने मृतक केतन अग्रवाल के बारे में बहुत ही अनुचित, आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की है, जो AIDSA के संविधान, आचार संहिता और नैतिक मूल्यों का उल्लंघन है। यह सस्पेंशन जारी होने की तारीख से पांच साल तक प्रभावी रहेगा जब तक कि सक्षम अधिकारी द्वारा इसे संशोधित या रद्द नहीं किया जाता।’

वीडियो बनाकर मांगी माफी
सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद मुस्कान सोनी ने 4 मिनट 45 सेकंड की वीडियो अपलोड किया। इस वीडियो में मुस्कान ने केतन हत्याकांड पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी और अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि- मैंने जो स्टोरी पोस्ट की थी उसके लिए माफी मांगती हूं। मैं अपने द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों के लिए माफी मांगती हूं। मुस्कान ने आगे मामले में सफाई देते हुए कहा कि ‘जिस दिन केतन अग्रवाल का केस सामने आया था उस दिन मैंने स्टोरी लगाकर कहा था कि ऐसी घटना किसी भी मासूम व्यक्ति के साथ नहीं होनी चाहिए।’ मुस्कान ने आगे बताया कि ‘मेरी इस स्टोरी के बाद मुझे कई पुरुषों ने कमेंट और मैसेज कर कहा था कि बस मैंने ही उनका(मर्दों) स्टैंड लिया। इसीलिए आप जो देखते हो वो हमेशा सच नहीं हो सकता।’ इसके बाद डॉ. मुस्कान ने एक और वीडियो अपलोड किया जिसमे उन्होंने सोशल मीडिया पर हो रही उनकी ट्रोलिंग को लेकर आपत्ति दर्ज की।

क्या है केतन मर्डर केस
जानकारी के लिए बता दें कि बीते दिनों महाराष्ट्र के पुणे में 26 साल के रियल एस्टेट बिजनसमैन केतन अग्रवाल की उसकी 20 साल की मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह यहां भी केतन को घूमने के बहाने से लोहगड़ किले के पास से उसे धक्का दे दिया गया जिससे उसकी जान चली गई। राजा की मां ने मामले पर बात करते हुए कहा कि ‘लड़कियों को ऐसा कदम उठाने की हिम्मत आखिर कहा से आ रही है। सोनम ने भी हनीमून के दौरान राजा को खाई से गिरा दिया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी।

छतरपुर में आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, शराब की 20 बड़ी दुकानों के ठेके निरस्त

छतरपुर

छतरपुर जिले में आबकारी विभाग ने बड़े शराब ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के 20 बड़ी शराब दुकानों के ठेके निरस्त कर दिए हैं। जिले के सबसे महत्वपूर्ण और व्यावसायिक रूप से लाभकारी छतरपुर, खजुराहो और हरपालपुर समूहों के शराब ठेकेदारों द्वारा निर्धारित लाइसेंस ड्यूटी जमा नहीं करने पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई से शराब ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है और साथ ही सरकार को लगने वाले करोड़ों रुपए के राजस्व घाटे पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

ठेकेदार नवीन पांडेय पर 85 करोड़ बकाया- सूत्र
सूत्रों के अनुसार, इन समूहों का संचालन कर रहे ठेकेदार नवीन पांडेय पर कुल मिलाकर लगभग 85 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि बकाया है। यह राशि उस निर्धारित लाइसेंस ड्यूटी का हिस्सा है, जिसे ठेकेदार को तय समय-सीमा के भीतर सरकारी खजाने में जमा करना था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार को बकाया राशि जमा करने के लिए बार-बार औपचारिक नोटिस दिए गए थे। कई बार चेतावनी देने के बावजूद, जब ठेकेदार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो विभाग के पास कठोर कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

पहली बार ऐसे हालात
छतरपुर जिले के आबकारी इतिहास में यह पहली बार है जब इतने बड़े समूहों के ठेकेदारों ने बोली लगाने के मात्र तीन-चार महीनों के भीतर ही घुटने टेक दिए हैं। यह स्थिति न केवल ठेकेदार की वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाती है, बल्कि आबकारी विभाग की टेंडर प्रक्रिया और पार्टी की आर्थिक साख की जांच की प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। विशेषज्ञ इसे एक प्रणालीगत विफलता के रूप में देख रहे हैं, जहां ऊंची बोली लगाकर ठेका तो हासिल कर लिया गया, लेकिन बाद में राजस्व की भरपाई करने में ठेकेदार पूरी तरह असफल रहे।

छत्रसाल और भोले विश्वनाथ के लाइसेंस रद्द
कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के तहत,
विभाग ने छत्रसाल बेवरेजेज और भोले विश्वनाथ एसोसिएट्स नामक कंपनियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। ये वही कंपनियां थीं जो इन 20 प्रमुख शराब दुकानों का संचालन कर रही थीं। लाइसेंस रद्द होने के तुरंत बाद, विभाग ने इन दुकानों को अपने पूर्ण नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्रभावित दुकानें और तत्काल प्रभाव
इस निर्णय से जो 20 दुकानें प्रभावित हुई हैं, उनमें शहर की 8 बड़ी दुकानें शामिल हैं, उनमें राजनगर, खजुराहो, बमीठा, गंज बसारी, चंद्रनगर, टौरिया टेक और गठेवरा-सारंगपुर और हरपालपुर क्षेत्र की दो अन्य प्रमुख दुकानें भी इस कार्रवाई के दायरे में आई हैं।

आगे का रास्ता: नया टेंडर और सरकारी कब्जा
    सरकारी नियंत्रण: सहायक आबकारी आयुक्त ने पुष्टि की है कि तत्काल प्रभाव से सभी 20 दुकानें अब विभाग के सीधे नियंत्रण में आ गई हैं। जब तक कोई नया स्थायी इंतजाम नहीं हो जाता, इन दुकानों का संचालन सरकारी कर्मचारी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शराब की बिक्री पूरी तरह बंद न हो और सरकार को कुछ राजस्व मिलता रहे, साथ ही शराब माफिया पर भी नकेल कसी जा सके।

    पुनः नीलामी : विभाग बहुत जल्द इन सभी 20 दुकानों के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जल्दी ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि दुकानों का संचालन सुचारू रूप से पुनः प्रारंभ किया जा सके।

वायरल गर्ल के पति को बड़ा झटका, अग्रिम जमानत याचिका खारिज; कोर्ट बोला- सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका

खरगोन
महाकुंभ से वायरल हुईं मोनालिसा ने इसी साल 11 मार्च को अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान संग केरल में शादी की थी. उनकी इंटरफेथ मैरिज पर जमकर बवाल हुआ. बताया गया कि मोनालिसा नाबालिग हैं. फरमान पर उन्हें भड़काने के आरोप लगे. हालांकि फरमान ने मीडिया के सामने मोनालिसा के 18 प्लस होने का दावा किया. फिर जांच पड़ताल में सामने आया कि मोनालिसा नाबालिग हैं. अब इस केस में फरमान की मुश्किल और बढ़ गई है। 

जेल जाएंगे फरमान?
खरगोन जिले के जिला न्यायालय मण्डलेश्वर की विशेष POCSO कोर्ट ने फरमान की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की. फरमान पर नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर शादी करने के आरोप हैं. फरमान पर नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर शादी करने का आरोप एक्ट्रेस के माता-पिता ने लगाया था. कोर्ट ने माना कि आरोपी फरार है, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है. महेश्वर थाने में बीएनएस, सहित अन्य धाराओं में दर्ज मामले में राहत देने से कोर्ट ने इनकार किया है। 

महेश्वर पुलिस ने इन धाराओं में केस डायरी पेश की
मोनालिसा के मामले में ऑडियो विभाग के अधिकारी पुलिस महेश्वर श्वेता शुक्ला ने पुलिस थाना महेश्वरी में धारा 137,( 2), 81,83, 87 भारतीय न्याय संहिता और धारा 9 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम साथ ही धारा 3(2) v, 3(2) (va) अजजा, अजा अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की केस डायरी सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। 

महेश्वर नगरपरिषद में गलत बर्थडेट दर्ज
जांच की शुरुआत केरल के नयनार देवा मंदिर से हुई. मंदिर प्रशासन ने जांच में बताया कि मोनालिसा और फरमान की शादी आधार कार्ड में लिखी ऐज के बेसिस पर की गई है. केरल के पुअर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में इस शादी का पंजीकरण किया गया है. इसमें मोनालिसा के गलत जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया है. जांच टीम ने पाया कि ये गलत जन्म प्रमाण पत्र नगरपालिका महेश्वर से जारी किया गया है. उसके बाद जांच टीम ने तत्काल मध्यप्रदेश महेश्वर के सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की. फिर पाया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 हुआ था. जिसके आधार पर वो केरल में संपन्न विवाह 11 मार्च, 2026 को मात्र 16 वर्ष 2 माह और 12 दिन की थी। 

साथ ही जांच टीम ने पूर्व में स्थानीय नगरपालिका महेश्वर द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, जो गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें मोनालिसा की जन्म तिथि 1/1/2008 लिखाई गई थी, उसे निरस्त करवाने में भी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया. जन्म प्रमाण पत्र के इस दस्तावेजी प्रमाण ने विवाह के पक्षकारों  की साजिश को बेनकाब कर दिया. मोनालिसा के माता-पिता ने उनके रक्त संबंधियों के जाति प्रमाण पत्र भी आयोग को उपलब्ध कराए गए. जिससे ये बात भी साबित हो गई कि मोनालिसा के माता-पिता अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य हैं। 

महेश्वर के सरकारी रिकार्ड में नाबालिग मोनालिसा
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष अन्तर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक गहन छानबीन की. 72 घंटे में केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सारे तार जोड़कर सच को उजागर कर दिया। 

MP Congress: पीसी शर्मा का कैलाश विजयवर्गीय पर तंज, बोले- ‘अगर सरकार में सुनवाई नहीं हो रही तो इस्तीफा दे दें’

MP Congress: पीसी शर्मा का कैलाश विजयवर्गीय पर तंज, बोले- ‘अगर सरकार में सुनवाई नहीं हो रही तो इस्तीफा दे दें’

भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाज़ी का दौर लगातार जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा और अपनी ही पार्टी से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ कोर्ट के निर्देशों, कांग्रेस में कथित ‘स्लीपर सेल’ विवाद और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को लेकर तीखे बयान दिए।

जीतू पटवारी के कोर्ट मामले पर क्या बोले?

जीतू पटवारी के खिलाफ कोर्ट के निर्देशों को लेकर पूछे गए सवाल पर पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पूरे मध्य प्रदेश में लगातार दौरे करते रहते हैं। संभव है कि इसी वजह से वे किसी पेशी में उपस्थित नहीं हो पाए हों। उन्होंने कहा कि अगली तारीख पर वे अदालत में पेश हो जाएंगे और इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

बाप-बेटे का मामला, बाकी लोग बीच में न पड़ें’

दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह से जुड़े विवाद और पार्टी में चल रही बयानबाज़ी पर पीसी शर्मा ने इसे “बाप-बेटे का मामला” बताया। उन्होंने कहा कि पिता-पुत्र के बीच की बात को दूसरे लोगों को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए और वे आपस में इस मामले को सुलझा लेंगे।

स्लीपर सेल पर साधा निशाना

कांग्रेस में ‘स्लीपर सेल’ को लेकर चल रही बहस पर पीसी शर्मा ने कहा कि जो लोग ऐसे आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपना गिरेबान झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि असली स्लीपर सेल वे लोग हैं जो कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं और बाद में पार्टी में पद हासिल कर लेते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय पर कसा तंज

प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को लेकर भी सवाल पूछा। इस पर पीसी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “अगर कैलाश विजयवर्गीय जी के साथ न्याय नहीं हो रहा है और सरकार में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।”

सियासी बयानबाज़ी तेज

पीसी शर्मा के इन बयानों से साफ है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और भाजपा पर हमले दोनों एक साथ जारी हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।

महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की हुई शुरुआत, आईईएचई भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर किया गया आत्मीय स्वागत

महाविद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की हुई शुरुआत, आईईएचई भोपाल में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का तिलक लगाकर किया गया आत्मीय स्वागत

Working Together Towards Excellence के संकल्प के साथ शुरू हुई नई शैक्षणिक यात्रा

भोपाल

प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में बुधवार से नए शैक्षणिक सत्र 2026 की शुरुआत हो गई है। उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान (आईईएचई), भोपाल में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए “दीक्षारंभ प्रवेश उत्सव एवं अभिमुखीकरण कार्यक्रम” उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं तथा उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं से परिचित कराते हुए उच्च शिक्षा की नई यात्रा के लिए तैयार करना था। इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक संकल्प “Working Together Towards Excellence” को विद्यार्थियों के समक्ष मार्गदर्शक विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के अंतर्गत नवप्रवेशित विद्यार्थियों का मुख्य प्रवेश द्वार पर अक्षत एवं तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। हरित वसुंधरा क्लब के तत्वावधान में विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों द्वारा वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, अध्ययन संसाधनों, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा उच्च शिक्षा में सफलता के लिए आवश्यक कौशलों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम करने तथा संस्थान की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपराओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर संस्थान के संचालक डॉ. (प्रो.) प्रज्ञेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता एवं कौशल विकास का सशक्त आधार है। उन्होंने कहा कि आईईएचई भोपाल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचार आधारित शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने संस्थान के इस वर्ष के संकल्प “Working Together Towards Excellence” का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्कृष्टता का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब शिक्षक एवं विद्यार्थी सहयोग, समर्पण और सहभागिता की भावना के साथ मिलकर कार्य करें। उन्होंने सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

दीक्षारंभ समारोह के अंतर्गत वाणिज्य, कला एवं विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए पृथक-पृथक अभिमुखीकरण सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में विद्यार्थियों का शिक्षकों से परिचय कराया गया तथा पाठ्यक्रम, अध्ययन पद्धति, अकादमिक अवसरों, अनुसंधान गतिविधियों एवं संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई |

मानसिक स्वास्थ्य के बारे में दी गई जानकारी

दीक्षारंभ कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “Mental Health and Wellness Program” रहा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यबल के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन एवं सकारात्मक जीवनशैली के महत्व से अवगत कराया गया।

1 जुलाई 2026 को आयोजित सत्र में एम्स भोपाल की बाल मनोवैज्ञानिक डॉ. अनुराधा कुशवाहा ने विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक वातावरण में सहज रूप से समायोजित होने, अध्ययन एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने तथा मानसिक रूप से सुदृढ़ रहने के व्यावहारिक उपाय बताए। वहीं, 2 जुलाई 2026 को सागर पब्लिक स्कूल, भोपाल की मनोवैज्ञानिक डॉ. इंदु सिंह विद्यार्थियों से संवाद कर मानसिक स्वास्थ्य एवं वेलनेस से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगी।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के शिक्षकों ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा व्यक्तित्व विकास, ज्ञान विस्तार एवं उज्ज्वल भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक, सांस्कृतिक, खेल एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया।

बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावक

इस अवसर पर कुल 756 नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि 117 अभिभावकों  ने भी कार्यक्रम में सहभागी होकर संस्थान की शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान का वार्षिक टैगलाइन “Working Together Towards Excellence” विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के सामूहिक संकल्प के रूप में प्रतिध्वनित हुआ।

उल्लेखनीय है कि संस्थान की सामान्य परिषद के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, कार्यसमिति के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, एवं आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा के मार्गदर्शन में संस्थान निरंतर उत्कृष्टता एवं नवाचार की दिशा में अग्रसर है।

 

जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे दादा ईश्वरदास रोहाणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे दादा ईश्वरदास रोहाणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, विधि, पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 12 विभूतियों का सम्मान
स्व. ईश्वरदास रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का किया विमोचन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में गौरव शिखर सम्मान समारोह-2026 को किया संबोधित
जबलपुर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिभाओं ने संपूर्ण देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे दादा स्व. ईश्वरदास रोहाणी स्मृति गौरव शिखर सम्मान 2026 में 12 महान विभूतियों का सम्मान गौरवशाली क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है। हम विश्व को एक परिवार मानते हैं। इसी प्रकार स्व. रोहाणी भी अपने कार्यों के बलबूते आज समाज कल्याण के प्रतीक बने। वे एक कर्मयोगी थे, जिन्होंने गरीब से गरीब के जीवन को रोशन करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन निर्माण के प्रति समर्पित राष्ट्र-साधक स्व. रोहाणी का अद्वितीय योगदान प्रेरणादायी रहेगा। उनकी शुचिता और विराट व्यक्तित्व यादगार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जबलपुर में आयोजित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रोहाणी की पावन स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह चंद्रा ने की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राचीन समृद्ध संस्कृति गुरुकुल परंपरा से पल्लवित थी। भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल बनीं, जो आज भी हमें कठिन समय में अपने मित्रों की सहायता के लिए प्रेरित करती है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने समाज को कर्म की श्रेष्ठता का संदेश दिया है।

इन 12 हस्तियों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में समाज के विभित्र क्षेत्रों में अपनी साधना और उत्कृष्ट योगदान से राष्ट्र निर्माण में संलग्न 12 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए सुरेखा चुडास्मा, समाज सेवा में जीवन समर्पित करने वाले डॉ. कैलाश गुप्ता, महिला सशक्तिकरण के लिए सुज्ञानेश्वरी दीदी, संस्कृति एवं कुटुंब प्रबोधन के लिए नंदलाल नेगांधी, युवा प्रेरणा के लिए सरबजीत सिंह कलासी, सनातन ज्ञान के लिए पंडित रोहित दुबे, उद्योग के क्षेत्र में नितिन चंडोक, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. वाई. आर. यादव, पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्याम कटारे, सेवानिवृत्त अधिकारियों की श्रेणी में सब लेफ्टिनेंट (रिटा.) आर. एन. तिवारी, विधि के क्षेत्र में पूर्व सांसद आर. एन. सिंह, न्याय क्षेत्र में जस्टिस देवव्रत माधव धर्माधिकारी का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यक्रम में सम्मानित हुईं विभूतियों के कार्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं।

कार्यक्रम के आयोजक और विधायक अशोक रोहाणी ने कहा कि स्व. रोहाणी ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित करने की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि ऐसे आयोजन से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, विधायक नीरज सिंह लोधी, विधायक संतोष बरकड़े, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अजय विश्नोई, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।

 

CM हेल्पलाइन में 1.77 लाख शिकायतें 3 महीने से लंबित, जनता की सुनवाई पर लगा ब्रेक!

भोपाल 

प्रदेश में आम लोगों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई मुख्यमंत्री हेल्पलाइन खुद धीमी पड़ती नजर आ रही है। सरकारी समीक्षा में सामने आया है कि एक लाख 77 हजार से अधिक शिकायतें ऐसी हैं, जिनका तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद भी निपटारा नहीं हो सका। सबसे ज्यादा लंबित मामले राजस्व, गृह और नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़े हैं। इन विभागों से संबंधित शिकायतें महीनों तक अटकी रहने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। यहीं नहीं 200 से ज्यादा शिकायतों को तो अटेंड भी नहीं किया गया। यही वजह है कि सीएम हेल्पलाइन में लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है।   

सबसे ज्यादा दबाव राजस्व विभाग पर
लंबित शिकायतों के मामले में राजस्व विभाग सबसे ऊपर है। विभाग में 1.02 लाख से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं, जबकि इनमें 30 हजार से अधिक मामले ऐसे हैं, जिन्हें 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। भूमि सीमांकन, नामांतरण, खसरा सुधार और अवैध कब्जे जैसे मामलों में लोगों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। अकेले अवैध कब्जे से जुड़ी हजारों शिकायतें अब भी लंबित हैं। 

पुलिस से जुड़ी शिकायतों में भी नहीं मिल रही राहत
गृह विभाग में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां 54 हजार से ज्यादा शिकायतें लंबित हैं और इनमें करीब 16 हजार मामले 100 दिन की सीमा पार कर चुके हैं। सबसे अधिक शिकायतें एफआईआर दर्ज नहीं होने, पुलिस जांच में देरी और गिरफ्तारी नहीं किए जाने से जुड़ी हैं। इससे कानून व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के निराकरण पर सवाल उठ रहे हैं।

शहरों की बुनियादी सुविधाओं के मामले भी अटके
नगरीय विकास एवं आवास विभाग में भी हजारों शिकायतों का समाधान तय समय में नहीं हो पाया है। साफ-सफाई, सीवेज, पेयजल, प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़कों की मरम्मत और अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामलों में लोग लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। 

शिकायतें बढ़ीं, समाधान की रफ्तार घटी
इस वर्ष जनवरी से अब तक सीएम हेल्पलाइन में 81 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी है जो अभी तक संबंधित स्तर पर लंबित है। वहीं एल-3 और एल-4 स्तर पर भी करीब 1.92 लाख शिकायतें तय समय सीमा के बाद भी निपटारे का इंतजार कर रही हैं। वहीं, राजस्व विभाग के  अधिकारी का कहना है कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाती है और उनका निदान किया जाता है। कुछ शिकायतें नीतिगत होने के कारण उनमें समय लगता हैं।  

भोपाल में महिला अपराध 20% बढ़े, विशेषज्ञ ने बताया- बेटियों को स्मार्टफोन देने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

भोपाल
 राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों के बीच एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार तेजी आ रही है। स्थिति कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामलों में सीधे 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भोपाल इस वक्त महिला सुरक्षा के मामले में एक तरह से ‘बारूद के ढेर’ पर बैठा है।

हर दिन एक रेप और एक छेड़छाड़ की वारदात
पुलिस से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भोपाल में दुष्कर्म के 305 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 367 हो गए। इस साल यानी 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के आंकड़े भी डराने वाले हैं। इस अवधि में अब तक 167 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 164 मामले आए थे। इसका सीधा मतलब यह है कि राजधानी में औसत रूप से हर दिन एक दुष्कर्म और एक छेड़छाड़ का मामला पुलिस स्टेशन पहुंच रहा है। हालांकि, इस साल छेड़छाड़ के मामलों में 7% की मामूली गिरावट (155 केस) देखी गई है।

60% मामलों में ‘सोशल मीडिया’ का खूनी खेल
इस पूरे ट्रेंड पर चिंता जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक गहरे और नए खतरे की ओर इशारा किया है, वह है सोशल मीडिया। भोपाल में हो रहे महिला और बाल अपराधों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।

हमने जितने मामलों का विश्लेषण किया है, उनमें से लगभग 60% मामलों का कोई न कोई लिंक सोशल मीडिया से जुड़ा है। छोटी बच्चियों, किशोरियों और यहां तक कि नाबालिग लड़कों को भी ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा है। पॉक्सो के कई मामलों में बच्चों को ऑनलाइन बातचीत के जरिए प्रभावित किया गया। आरोपी फर्जी नाम, गलत उम्र और झूठी पहचान बताकर पहले बच्चों का भरोसा जीतते हैं, और फिर यह दोस्ती प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण में बदल जाती है।

अर्चना सहाय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व डायरेक्टर, चाइल्डलाइन, भोपाल

‘माता-पिता की बात सुनना बंद कर रही हैं लड़कियां’
अर्चना सहाय ने पारिवारिक ताने-बाने पर पड़ रहे इसके असर को लेकर सचेत किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लड़कियां ऑनलाइन बने दोस्तों के प्रभाव में इस कदर आ जाती हैं कि वे अपने माता-पिता की बातें सुनना तक बंद कर देती हैं। कुछ मामलों में तो बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी या घर से भागने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को स्मार्टफोन देने से पहले पैरेंट्स उन्हें सायबर सेफ्टी के बारे में जरूर शिक्षित करें।

अधिकांश मामलों में ‘अपराधी’ कोई अनजान नहीं
इधर, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़िता का कोई परिचित, रिश्तेदार या सोशल मीडिया का करीबी दोस्त ही निकलता है। हालांकि, मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे पुलिस का तर्क है कि अब समाज में जागरूकता बढ़ी है, जिससे लोग चुप रहने के बजाय थानों में आकर एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है।

 

MP में UCC विधेयक की तैयारी तेज, मतांतरित आदिवासियों को लेकर समिति कर रही कानूनी मंथन

भोपाल
 मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें आदिवासियों के साथ-साथ मतांतरित आदिवासी भी कानून के दायरे से बाहर रखे जा सकते हैं। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई वाली समिति को जन परामर्श में बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं। अधिकतर का पक्ष है कि जब आदिवासी मतांतरित हो गया तो फिर उसे आदिवासियों को मिलने वाले अधिकार व सुविधा नहीं मिलने चाहिए। सैद्धांतिक तौर पर सभी इससे सहमत भी हैं लेकिन समिति कानूनी प्रावधान देख रही है।

जन परामर्श में मिले विविध सुझाव
जन परामर्श के दौरान भोपाल में पूर्व न्यायाधीश मोहन पी तिवारी ने आदिवासियों को लेकर यह तर्क रखा था कि इनकी अपनी परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं, इसलिए इन्हें कानून के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। जहां तक बात मत परिवर्तन करने वाले आदिवासियों की है, तो वे मतांतरण के बाद आदिवासी तो रह नहीं गए। ब्राह्मण व ऊंची जातियों के बच्चों से विवाह कर रहे हैं, फिर भी आदिवासी बने हुए हैं।

वनवासी कल्याण आश्रम एसएस कुमरे ने भी इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की लड़की अगर दूसरी जाति में विवाह करती है तो उस पर यूसीसी लागू होना चाहिए। इसी तरह के अन्य सुझाव भी आए हैं।

कानूनी पहलुओं का अध्ययन
सूत्रों का कहना है कि समिति में इस विषयों को लेकर काफी विचार-विमर्श हुआ है। कानूनी पहलू देखे गए। दरअसल, संविधान के प्रविधान अनुसार अनुसूचित जनजातियों के लिए धर्म आधारित कोई रोक-टोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी व्यक्ति किसी भी धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) को अपना ले, फिर भी वह कानूनी रूप से अपना अनुसूचित जनजाति का दर्जा और उससे जुड़े अधिकार बनाए रख सकता है। जाति प्रमाण पत्र भी बनते हैं और आरक्षण का लाभ भी मिलता है।

 

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