टैलेंट सर्च 2026-27 बना खेल प्रतिभाओं का महाअभियान

भोपाल

खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं की पहचान एवं उन्हें राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “टैलेंट सर्च 2026-27” का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में चयन ट्रायल्स आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खिलाड़ी उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। इस महाअभियान के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिल रहा है।

विभिन्न खेलों के ट्रायल्स में दिखा खिलाड़ियों का उत्साह

अब तक प्रदेश के विभिन्न जिलों में शूटिंग, पुरुष एवं महिला हॉकी, स्लालम, बैडमिंटन, घुड़सवारी, तीरंदाजी, जूडो, रोइंग, कुश्ती एवं फेंसिंग सहित अनेक खेलों के चयन ट्रायल्स सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। प्रत्येक चयन स्थल पर बड़ी संख्या में बालक एवं बालिका खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी तकनीकी दक्षता, फिटनेस एवं खेल कौशल का प्रदर्शन किया। खिलाड़ियों के साथ अभिभावकों एवं प्रशिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन प्रदान किया।

विशेषज्ञों की निगरानी में हुई चयन प्रक्रिया

चयन प्रक्रिया विभाग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप अनुभवी प्रशिक्षकों एवं विशेषज्ञ चयनकर्ताओं की निगरानी में संपन्न की जा रही है। खिलाड़ियों का परीक्षण शारीरिक दक्षता, तकनीकी कौशल तथा खेल विशेष की आवश्यकताओं के आधार पर किया जा रहा है, जिससे योग्य प्रतिभाओं का चयन कर उन्हें राज्य खेल अकादमियों में प्रशिक्षण का अवसर उपलब्ध कराया जा सके।

आगामी दिनों में इन खेलों के होंगे चयन ट्रायल्स

टैलेंट सर्च अभियान के अंतर्गत आगामी दिनों में भी प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर एथलेटिक्स, ट्रायथलॉन, बॉक्सिंग, क्याकिंग एवं केनोइंग, बैडमिंटन, पुरुष एवं महिला हॉकी, तीरंदाजी एवं ताइक्वांडो सहित विभिन्न खेलों के चयन ट्रायल्स निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही विभिन्न जिलों एवं संभागीय केंद्रों पर खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रहा है प्रतिभा चयन अभियान

भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, सतना, रीवा, गुना, शिवपुरी, दतिया, सागर, नर्मदापुरम, बैतूल, कटनी, मंदसौर, उज्जैन, सिवनी, बड़वानी, मंडला, झाबुआ, अलीराजपुर, धार सहित प्रदेश के अनेक जिलों में चयन ट्रायल्स का आयोजन किया जा रहा है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को भी राज्य स्तरीय खेल अकादमियों तक पहुंचने का समान अवसर प्राप्त हो रहा है।

खिलाड़ियों से अधिकाधिक भागीदारी की अपील

खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने प्रदेश के खिलाड़ियों, अभिभावकों, विद्यालयों एवं खेल संस्थाओं से अपील की है कि जिन खेलों के चयन ट्रायल्स आगामी दिनों में आयोजित होने हैं, उनमें अधिक से अधिक खिलाड़ी निर्धारित तिथि एवं पात्रता के अनुसार भाग लें। टैलेंट सर्च 2026-27 केवल चयन प्रक्रिया नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की नई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

भोपाल पुलिस का नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन, शराब तस्कर गिरफ्तार; 7 करोड़ की ड्रग्स विनिष्टीकरण के लिए चयनित

शाहजहाँनाबाद में 305 क्वार्टर अवैध शराब जब्त, वहीं 44 मामलों में 335.934 किलोग्राम गांजा-चरस नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू

भोपाल। भोपाल पुलिस का नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में शाहजहाँनाबाद पुलिस ने अवैध शराब की तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरी ओर विभिन्न मामलों में जब्त करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थों को विनिष्टीकरण (नष्ट करने) के लिए चयनित किया गया है।

शाहजहाँनाबाद पुलिस ने कार में चोरी-छिपे अवैध शराब की तस्करी कर रहे सीहोर निवासी 36 वर्षीय शिवकरन को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 305 क्वार्टर देशी शराब (करीब 55 लीटर) जब्त की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 24 हजार रुपये बताई गई है। आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ में अवैध शराब के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज हो चुका है। यह कार्रवाई जनसंवाद और सक्रिय मुखबिर तंत्र की मदद से की गई।

वहीं, भोपाल पुलिस ने 44 अलग-अलग मामलों में जब्त 335.934 किलोग्राम मादक पदार्थों को विनिष्टीकरण के लिए चयनित किया है। इनमें 327.134 किलोग्राम गांजा और 8.800 किलोग्राम चरस शामिल है, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये है। कुल 44 प्रकरणों में से 35 मामले क्राइम ब्रांच भोपाल के हैं, जबकि हबीबगंज, बैरागढ़ और जहांगीराबाद थानों के तीन-तीन मामले भी इसमें शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि विनिष्टीकरण समिति ने एनडीपीएस एक्ट और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत मादक पदार्थों का परीक्षण कर उन्हें नष्ट करने के लिए चयनित किया है। न्यायालयीन आदेश के अनुसार इनका विनिष्टीकरण किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई।

भोपाल पुलिस ने दोहराया कि “नशा मुक्त समाज, सुरक्षित भोपाल” के लक्ष्य के साथ अवैध शराब और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

देवास के डायल-112 हीरोज घर की राह भटके 03 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल 

देवास जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं तत्पर कार्यवाही से घर से निकलकर रास्ता भटक गए 03 वर्षीय बालक को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई सहायता से मासूम सकुशल अपने परिवार तक पहुँच सका।

01 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना औद्योगिक क्षेत्र अंतर्गत अमृत स्वीट्स के पास एक 03 वर्षीय बालक मिला है, जो घर का रास्ता भटक गया है तथा अपने परिजनों के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है। सूचना प्राप्त होते ही थाना औद्योगिक क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल मौके के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षकश्री सचिन चौहान एवं पायलट श्री देवेंद्र भारती ने मौके पर पहुंचकर बालक को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके उपरांत डायल-112 टीम ने बालक को एफआरव्ही वाहन में साथ लेकर आसपास के क्षेत्रों में उसके परिजनों की तलाश एवं पूछताछ की, किन्तु कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसके बाद बालक को सुरक्षित थाने लाया गया।

कुछ समय पश्चात बालक के माता-पिता उसकी तलाश करते हुए थाना पहुँचे। आवश्यक पहचान एवं सत्यापन उपरांत बालक को सुरक्षित उनके सुपुर्द किया गया। अपने बच्चे को सकुशल पाकर परिजनों ने डायल-112 सेवा एवं पुलिस जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता ही नहीं, बल्कि बच्चों एवं आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य भी निरंतर कर रही है।

 

विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का प्रदेश में भव्य शुभारंभ

भोपाल 

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका सृजन एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का आज प्रदेशभर में उत्साहपूर्ण शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रदेश के सभी जिलों में जिला प्रशासन द्वारा जन सम्मेलन-सह-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किए गए।

केन्द्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति के ओबुलवारिपल्ले मंडल स्थित मुक्कावरिपल्ली ग्राम में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM-G] का राष्‍ट्रीय स्‍तर परभव्‍य शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि विकसित भारत – जी राम जी के तहत सबसे अधिक पिछड़ी पंचायतों में भी रोजगार और बुनियादी ढाँचे के लिये अधिक निधि, अधिक सहायता और अधिक अवसर मिलेंगे।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने संस्कारधानी जबलपुर में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) का राज्य स्‍तर पर जन सम्मेलन-सह-लॉन्च किया। कार्यकम के दौरान उन्‍होंने योजना के विभिन्न आयामों और जन-कल्याणकारी नीतियों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। उन्‍होंने कहा की तकनीक और पारदर्शिता का यह अद्भुत समागम सुशासन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ हम सभी को राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में पूरी निष्ठा के साथ जुटने की प्रेरणा देता है, केंद्र व राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित कर विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमति सुमित्रा बाल्मीकि सहित स्थानीय प्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्रीगण, सांसद, विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए मिशन के उद्देश्यों एवं प्रावधानों की जानकारी दी। राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी कराया गया, जिससे उपस्थित नागरिकों ने मिशन के उद्देश्य एवं प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रमों में पंचायत पदाधिकारी, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएँ, श्रमिक, हितग्राही, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिकों ने सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में नवीन विकास कार्यों का शुभारंभ, IEC प्रदर्शनी, पोस्टर एवं बैनर प्रदर्शन, सफलता की कहानियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। कार्यक्रमों में उपस्थित नागरिकों को मिशन के प्रमुख प्रावधानों, विशेष रूप से 125 दिवस रोजगार गारंटी, डिजिटल कार्यप्रणाली, पारदर्शी भुगतान व्यवस्था, प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी तथा विकेन्द्रीकृत ग्राम स्तरीय योजना निर्माण के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रदेश में आयोजित इन कार्यक्रमों ने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जनसहभागिता आधारित विकास मॉडल को नई दिशा प्रदान की है। राज्य शासन का उद्देश्य है कि मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार, बेहतर आजीविका के अवसर तथा टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का लाभ सुनिश्चित किया जाए।

 

उज्जैन का “त्रिनेत्र” मॉडल शहरों की सुरक्षा एवं स्मार्ट निगरानी व्यवस्था का बनेगा आधार

भोपाल 

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में उज्जैन ने डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है। जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 2 दिवसीय 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में  महाकालेश्वर मंदिर में लागू किए गए एआई-आधारित एकीकृत निगरानी तंत्र “त्रिनेत्र” (TRINETRA) को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत प्रतिष्ठित स्वर्ण (गोल्ड) पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने स्वर्ण पुरस्कार प्राप्त किया। कलेक्टर  रौशन कुमार ने उज्जैन जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए पुरस्कार प्राप्त किया। उन्होंने इस उपलब्धि को मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन तथा सभी के सामूहिक प्रयास तथा निरंतर परिश्रम का परिणाम बताया।

सम्मेलन के पहले दिन देश के विभिन्न राज्यों के जिला प्रशासनिक अधिकारियों एवं राज्यों ने अपने-अपने ई-गवर्नेंस नवाचारों का प्रदर्शन किया। कलेक्टर एवं अध्यक्ष उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड  रौशन कुमार सिंह द्वारा “त्रिनेत्र” परियोजना का विस्तृत प्रेजेंटेशन किया गया, जिसे उपस्थित विशेषज्ञों एवं प्रतिनिधियों द्वारा अत्यधिक सराहा गया।

सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में तथा राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस दौरान  महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक  प्रथम कौशिक,  पलाश शर्मा,  सचिन जैन एवं आईटी टीम उपस्थित रही।

उज्जैन का त्रिनेत्र मॉडल निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा

डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, भारत सरकार और उज्जैन के “त्रिनेत्र” प्रोजेक्ट को अखिल भारतीय स्तर पर लागू करने के लिये शीघ्र ही एक एमओयू होगा। उज्जैन में विकसित इस स्वदेशी एआई मॉडल की सफलता एवं देशव्यापी अनुकरणीयता पर केंद्र सरकार की मुहर है — अब उज्जैन का “त्रिनेत्र” मॉडल देश के अन्य शहरों की सुरक्षा एवं स्मार्ट निगरानी व्यवस्था का आधार बनेगा। यह न केवल उज्जैन, अपितु संपूर्ण मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।

 

प्रवेश ले रहे विद्यार्थियों के लिए बेहतर विकल्प बना AEDP, 2024 बैच के विद्यार्थी उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए चयनित

भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग में वर्तमान में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है। ऐसे में बी.ए., बी.कॉम. और बी.एससी. में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) रोजगारोन्मुखी उच्च शिक्षा का आकर्षक विकल्प बनकर सामने आया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप संचालित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को सामान्य स्नातक शिक्षा के साथ उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है। तीसरे वर्ष में विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाई करने के बजाय उद्योगों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलता है, जहां वे वास्तविक कार्यस्थल पर प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। इससे पढ़ाई पूरी होने तक वे उद्योगों की कार्यप्रणाली से परिचित हो जाते हैं और रोजगार के बेहतर अवसरों के लिए तैयार होते हैं।

2024 बैच की सफलता बनी नई प्रेरणा

AEDP की सफलता अब पहले ही बैच में दिखाई देने लगी है। वर्ष 2024 में इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थी अब दो वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद विभिन्न उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए चयनित किए जा रहे हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह कार्यक्रम केवल डिग्री प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही उद्योगों से जोड़कर उनके करियर की मजबूत नींव तैयार कर रहा है।

इसी का उदाहरण इंदौर में आयोजित चयन प्रक्रिया में देखने को मिला। इसमें शामिल 37 विद्यार्थियों में से 20 विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा अप्रेंटिसशिप के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। यह परिणाम इस कार्यक्रम की प्रभावशीलता और उद्योगों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

पढ़ाई के साथ उद्योगों का अनुभव

AEDP पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों से अलग है। पहले दो वर्षों में विद्यार्थियों को बी.ए., बी.कॉम. अथवा बी.एससी. की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ संबंधित उद्योगों से जुड़े विषयों, तकनीकों और व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यानी प्रथम वर्ष से ही विद्यार्थियों का फोकस केवल डिग्री प्राप्त करने पर नहीं, बल्कि रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर भी रहता है।

तीसरे वर्ष में विद्यार्थियों को उनके विषय से संबंधित उद्योगों में अप्रेंटिसशिप के लिए भेजा जाता है। वहां वे अनुभवी विशेषज्ञों के साथ काम करते हुए वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव प्राप्त करते हैं। अप्रेंटिसशिप के दौरान उन्हें नियमानुसार स्टाइपेंड भी मिलता है तथा उद्योग में उनके कार्य एवं प्रदर्शन के आधार पर अंतिम वर्ष का मूल्यांकन किया जाता है। इससे विद्यार्थियों को अलग से पारंपरिक पढ़ाई के बजाय व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने का अवसर मिलता है और स्नातक डिग्री के साथ उद्योगों का अनुभव भी प्राप्त होता है।

भर्ती अभियान में मिला उद्योगों का भरोसा

इंदौर में आयोजित भर्ती अभियान में लॉजिस्टिक्स एवं रिटेल क्षेत्र की अग्रणी कंपनियों—कैरीफास्ट लॉजिस्टिक्स, आपार लॉजिस्टिक्स, मोज़ेक ग्रुप और लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स—ने सहभागिता की। इसमें पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, इंदौर तथा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के बी.कॉम. लॉजिस्टिक्स पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने साक्षात्कार दिए। कंपनियों ने एमआईएस ऑपरेटर, वेयरहाउस सुपरवाइजर, लॉजिस्टिक्स कोऑर्डिनेटर, बैक-एंड ऑपरेशंस एग्जीक्यूटिव और सप्लाई चेन सपोर्ट एसोसिएट जैसे पदों के लिए चयन प्रक्रिया आयोजित की। चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार से 17 हजार रुपये प्रतिमाह तक स्टाइपेंड के साथ उद्योगों में कार्य करने और सीखने का अवसर मिलेगा।

भर्ती परिणामों में कैरीफास्ट लॉजिस्टिक्स ने सर्वाधिक 11 विद्यार्थियों को शॉर्टलिस्ट किया, जबकि मोज़ेक ग्रुप ने 7 और लोटस इलेक्ट्रॉनिक्स ने 4 विद्यार्थियों का चयन किया। इनमें से कुछ विद्यार्थियों को इंदौर तथा भोपाल स्थित इकाइयों में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा।

साक्षात्कार के दौरान विद्यार्थियों ने तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास, समस्या समाधान क्षमता और व्यावसायिक समझ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उद्योग प्रतिनिधियों ने लॉजिस्टिक्स संचालन, इन्वेंट्री प्रबंधन, डेटा विश्लेषण, कार्यस्थल संचार, माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल, गूगल शीट्स, ईआरपी प्लेटफॉर्म तथा अन्य डिजिटल टूल्स पर विद्यार्थियों की दक्षता की सराहना की।

बढ़ रहा है विद्यार्थियों का रुझान

मध्यप्रदेश में शैक्षणिक सत्र 2024-25 के 963 विद्यार्थी वर्ष 2026 में अप्रेंटिसशिप के लिए पात्र हैं। वहीं, 2025-26 सत्र में AEDP के अंतर्गत 4,513 विद्यार्थियों ने विभिन्न सहभागी संस्थानों में प्रवेश लिया है, जो इस कार्यक्रम के प्रति विद्यार्थियों के बढ़ते विश्वास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

पहले ही बैच की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम विद्यार्थियों को केवल स्नातक डिग्री ही नहीं, बल्कि उद्योगों का व्यावहारिक अनुभव, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि वर्तमान प्रवेश सत्र में यह कार्यक्रम युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

 

प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों और जनजातीय संस्कृति की अनूठी पहचान है बैतूल का कुकरू खामला

भोपाल 

प्राकृतिक सौंदर्य, हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध, बैतूल जिले की भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू एक अनछुआ रमणीय पर्यटन स्थल है। समुद्र तल से लगभग 3,668 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पर्वतीय क्षेत्र वर्षा ऋतु में बादलों, कोहरे, घने वनों और हरियाली से आच्छादित रहता है। अदना नदी का प्रवाह, मिश्रित वन और तेलिया सागौन के विशाल वृक्ष इस क्षेत्र की प्राकृतिक विशेषताओं में शामिल हैं। वर्षभर सुहावने मौसम वाला कुकरू प्रकृति प्रेमियों, ट्रैकिंग और बाइकिंग के शौकीनों के लिए उपयुक्त पर्यटन स्थल है। यहाँ स्थित सनराइज प्वाइंट और सनसेट प्वाइंट प्रमुख आकर्षण हैं। कुकरू अपनी कॉफी के साथ कोदो-कुटकी, आँवला, शहद, हर्रा, बहेड़ा, सफेद मूसली और भिलवा जैसे वन उत्पादों के लिए भी प्रसिद्ध है। स्थानीय मोटे अनाज से बने पारंपरिक व्यंजन और वन उपज एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प यहाँ की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का हिस्सा हैं।

कॉफी बागानों से मिली विशिष्ट पहचान

कुकरू-खामला क्षेत्र ऐतिहासिक कॉफी बागानों के लिए भी जाना जाता है। यहाँ वर्ष 1944 में कॉफी की खेती प्रारंभ हुई थी, जिसने इस क्षेत्र को विशेष पहचान दिलाई। देश में गिने चुने प्रांतों में ही उच्च किस्म की कॉफी की खेती होती है। कुकरू में लगभग 110 एकड़ क्षेत्र में उच्चतम किस्म की अरेबिका कॉफी का उद्यान है, जिसमें से 10 एकड़ में कॉफी की खेती की जाती है। मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड तथा वन विभाग द्वारा इन बागानों के संरक्षण एवं संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।

ईको टूरिज्म और पर्यटन अधोसंरचना का होगा विस्तार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में कुकरू के भ्रमण के दौरान इसे प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की हैं। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से कुकरू, चिखलदरा, मुक्तागिरी और मेलघाट को जोड़ते हुए एकीकृत पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा।

परियोजना के अंतर्गत ईको टूरिज्म का विस्तार, सनराइज एवं सनसेट प्वाइंट का उन्नयन, आधुनिक सुविधाओं से युक्त ईको रिसॉर्ट का विकास, पर्यटन अधोसंरचना का विस्तार तथा ट्रैकिंग, नेचर ट्रेल्स और अन्य साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

जनजातीय समुदायों को मिलेगा रोजगार और स्वरोजगार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनजातीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से होमस्टे योजना प्रारंभ करने की घोषणा की है। इन होमस्टे का संचालन मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यप्रणाली के अनुरूप किया जाएगा तथा ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मध्यप्रदेश टूरिज्म द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही पर्यटकों को जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को निकट से जानने का अवसर मिलेगा।

कुकरू तक पहुँचना आसान

भोपाल से कुकरू की दूरी लगभग 270 किलोमीटर और बैतूल से लगभग 90 किलोमीटर है। रेल मार्ग से भोपाल और बैतूल के बीच नियमित ट्रेन सेवाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें भोपाल–नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस सहित अन्य प्रमुख ट्रेन शामिल हैं। बैतूल से कुकरू तक टैक्सी और अन्य स्थानीय वाहनों से आसानी से पहुँचा जा सकता है। सड़क मार्ग से भोपाल से बैतूल और वहाँ से शाहपुर होते हुए कुकरू पहुँचा जा सकता है। अंतिम चरण का पर्वतीय मार्ग प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है।

प्रकृति, संस्कृति और ईको टूरिज्म का संगम

कुकरू प्राकृतिक सौंदर्य, कॉफी बागानों, जनजातीय संस्कृति और ईको टूरिज्म का समन्वित अनुभव प्रदान करता है। यहाँ ईको टूरिज्म सेंटर के अंतर्गत पर्यटकों के लिए रेस्ट हाउस की सुविधा उपलब्ध है तथा मध्यप्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (MPEDB) द्वारा प्रशिक्षित स्टाफ आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराता है। मानसून के दौरान कुकरू की हरियाली और प्राकृतिक वातावरण इसे मध्यप्रदेश के प्रमुख प्रकृति पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान प्रदान करते हैं।

 

18 जिलों में होंगे नर्मदा जयंती कार्यक्रम, नदी संरक्षण से समाज को भी जोड़ें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। यह आबादी नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर ही निर्भर है। नर्मदा हमारी धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे हर तरह से निर्मल और अविरल बनाए रख कर नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न आयोजन किए जायें। नर्मदा और इसकी सहायक नदियों सहित पूरे प्रदेश में नदियों के संरक्षण के लिए समाज को विशेषकर युवाओं को जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की बैठक में इस नदी क्षेत्र के विकास के निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा के विकास से जुड़ना एक पवित्र काम है। सभी विभाग के अधिकारी पूरे समर्पण से यह काम करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूर्णत: अतिक्रमण मुक्त कर पथिकों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाये और परिक्रमा मार्ग पर संकेतक (सूचना पट्टिकाएं) भी लगाए जाए। नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर जहां मंदिर हैं वहां श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र भी स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ कराने की व्यवस्था भी कराएगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्मदा समग्र से समन्वय कर नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सभी आश्रमों की सूचियां तैयार कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देशित किया कि वे सामूहिक प्रयास कर किसानों को घाटी क्षेत्र में नकद फसलों की पैदावार लेने के लिए प्रेरित करें।

बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि नर्मदा नदी के सीमावर्ती प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर आयोजन किए जाएंगे। माँ नर्मदा की भव्य आरती, नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाएंगे।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि माँ नर्मदा के जल को सदैव निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए विभाग द्वारा ‘नमन मिशन’ तैयार किया गया है। यह मिशन मां नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्राधिकृत होगा। मुख्यमंत्री इस नमन मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिशन की साधारण सभा के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव इस मिशन के सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मिशन के सह-सचिव होंगे। मिशन को क्रियान्वित करने के लिए इस साल 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है।

एसीएस श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पहले से विद्यमान 3 समितियों (मंत्रिमण्डल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति) का भी सहयोग लिया जाएगा। मिशन के संचालन में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय विकास, वन, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, वित्त, पर्यटन, विधि, उद्यानिकी, मत्स्य, राजस्व, जनजातीय कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, धर्मस्व, योजना एवं आर्थिकी सांख्यिकी एवं खनिज संसाधन विभाग सदस्य के रूप में तथा 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे। इस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राज्य अनुदान की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने बताया कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए 32 लाख रुपये का योजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी क्षेत्र में करीब 415 हैक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग 2.70 लाख पौधे लगायेगा।

अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नर्मदा घाटों को निर्मल बनाये रखने की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा कोष पोर्टल भी बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों के सीएमओ को नर्मदा क्षेत्र के विकास के लिए नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 एसटीपी तैयार किए जा रहे है। यह काम दिसम्बर 2027 तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के विकास के लिए यहां स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) तैयार की जाएगी। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि महेश्वर में 18 होमस्टे तैयार किए है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 13 गावों में 79 होमस्टे तैयार किए गये हैं।

बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, खनिज साधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, योजना आर्थिकी सांख्यिकी, एवं अन्य विभागों ने भी नर्मदा घाटी क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।

 

78 कार्यालय सहायक ग्रेड- तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति

भोपाल 

मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड भोपाल द्वारा मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण एवं युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन के 78 प्रशिक्षुओं की नई भर्ती एवं नियुक्ति की गई है।

नवनियुक्त सभी 78 कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं ने 29 मई को पावर डिस्ट्रीब्यूशन ट्रेनिंग सेंटर (PDTC), भोपाल में कार्यभार ग्रहण कर प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रारंभिक प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत उन्हें कंपनी के विभिन्न शहर एवं संचालन-संधारण वृत्तों में प्रशिक्षण के शेष मॉड्यूल पूर्ण करने के लिये पदस्थ किया गया है। इससे प्रशिक्षुओं को मैदानी स्तर पर कार्य का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा तथा वे भविष्य में अधिक दक्षता एवं प्रभावशीलता के साथ अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे।

यह भर्ती कंपनी के मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे प्रदेश के योग्य एवं शिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर प्राप्त हुआ है। साथ ही कंपनी के विभिन्न कार्यालयों एवं क्षेत्रीय इकाइयों में मानव संसाधन की आवश्यकता की पूर्ति की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया गया है। कार्यालय सहायक ग्रेड-तीन प्रशिक्षुओं की नियुक्ति से कंपनी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक गति मिलेगी तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त होगी।

 

दतिया उपचुनाव: जनता फिर कांग्रेस पर जताएगी भरोसा — उमंग सिंघार

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग के षड्यंत्र से कांग्रेस विधायक की सदस्यता रद्द हुई। कार्यकर्ताओं से अभी से चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान।

दतिया। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता के नाम संदेश जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया की जनता ने कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती को भारी बहुमत से विधायक चुना था, लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग के षड्यंत्र के कारण उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई।

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा अब जल्दबाजी में दतिया विधानसभा में उपचुनाव कराकर इस सीट पर कब्ज़ा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दतिया की जनता पर पूरा भरोसा है और जनता एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में अपना जनादेश देगी।

उन्होंने दतिया के सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे अभी से चुनाव की तैयारियों में जुट जाएँ और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करें। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन से इस बार भी दतिया में कांग्रेस का परचम लहराएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ उपचुनाव लड़ेगी और जनता के विश्वास को जीतने के लिए हर स्तर पर प्रयास करेगी।

 

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