विद्यार्थी हित, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर आधारित कार्य संस्कृति विकसित करें विश्वविद्यालय : मंत्री परमार

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान केंद्र हैं, जहाँ समाज की समस्याओं का समाधान करने वाले श्रेष्ठ, संवेदनशील, नैतिक एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों का निर्माण होता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रोजगार के योग्य बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम, उत्तरदायी एवं नवाचारी बनाना है। विश्वविद्यालयों को इसी लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा। मंत्री  परमार बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल में आयोजित “शिक्षा संवाद” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य सभी विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी-केंद्रित व्यवस्था के आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की कार्य संस्कृति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक निर्णय विद्यार्थी हित, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया जाए।उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज को दिशा देने वाले सशक्त शैक्षणिक संस्थान बनें।

मंत्री  परमार ने कहा कि आदर्श विश्वविद्यालय वही है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, समयबद्ध शैक्षणिक गतिविधियाँ, अनुशासित व्यवस्था, शोध की सशक्त संस्कृति, नवाचार तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ विद्यार्थी केवल डिग्री प्राप्त न करें, बल्कि समाज एवं राष्ट्र की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने वाले सक्षम नागरिक बनकर निकलें।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्राध्यापकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है, जिससे शिक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की उपस्थिति भी ‘सार्थक ऐप’ के माध्यम से दर्ज की जायेगी, जिससे नियमित उपस्थिति, अनुशासन, कक्षाओं में सहभागिता तथा शिक्षण की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

मंत्री  परमार ने कहा कि समय पर प्रवेश, समय पर परीक्षा और समय पर परिणाम, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा की आधारशिला हैं। परीक्षा प्रणाली को पूर्णतः पारदर्शी, तकनीक आधारित एवं त्रुटिरहित बनाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन, ऑनलाइन परीक्षा प्रबंधन तथा आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाए। विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित सर्वोपरि हैं और उनसे किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालयों में शोध एवं नवाचार की सशक्त संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल देते हुए कहा कि अनुसंधान केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि समाज, उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं स्थानीय समस्याओं के समाधान से जुड़ा हो। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय भाषाओं, कौशल आधारित शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योगों के साथ समन्वय को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, नवाचार, अनुसंधान की प्रवृत्ति एवं राष्ट्रभावना का विकास करना है। विश्वविद्यालयों को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए, जहाँ से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम हो।

मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता, शोध, नवाचार, सुशासन एवं विद्यार्थी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को ऐसे आदर्श संस्थानों के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ से ज्ञान, कौशल, संस्कार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण विद्यार्थी निकलकर राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ।

मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि परिसर में स्वच्छ, सुरक्षित, अनुशासित एवं विद्यार्थी-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए। पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, खेल सुविधाएँ, डिजिटल संसाधन, शोध अवसंरचना, प्लेसमेंट गतिविधियाँ एवं कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण शोध, उद्योगों से समन्वय, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को विश्वविद्यालयों की प्राथमिकता बनाने पर बल दिया।

विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों से किया संवाद

मंत्री  परमार ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। उन्होंने परीक्षा, शोध, छात्रवृत्ति, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, डिजिटल सुविधाओं, प्लेसमेंट, खेल गतिविधियों एवं अन्य शैक्षणिक विषयों से जुड़े सुझाव और समस्याएँ गंभीरता से सुनीं।

मंत्री  परमार ने संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जहाँ विद्यार्थियों की प्रत्येक समस्या का संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ समाधान हो तथा संवाद की संस्कृति निरंतर सशक्त होती रहे।

गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का किया निरीक्षण

मंत्री  परमार ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय परिसर स्थित गर्ल्स एवं बॉयज हॉस्टल का निरीक्षण किया। उन्होंने छात्रावासों में स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन व्यवस्था, पेयजल, विद्युत, अध्ययन कक्ष, स्वच्छ शौचालय एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं सभी आवश्यक सुविधाओं से युक्त आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जाए। छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं आधारभूत सुविधाओं के उन्नयन का कार्य प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिल सके।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. विवेक शर्मा, समाजसेवी  चेतस सुखाड़िया, विश्वविद्यालय के कुलसचिव, अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

देवास के वारसी नगर से जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, गुजरात ATS की बड़ी कार्रवाई

देवास

गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने गुरुवार को देवास के वारसी नगर से जैश ए मोहम्मद के एक संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है।

एसपी पुनीत गेहलोद ने बताया कि गुजरात एटीएस ने पुख्ता इंटेल के बाद देवास में डेरा डाला था। एटीएस ने स्थानीय पुलिस काे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद देवास पुलिस के सहयोग से आराेपित को चिन्हित कर पकड़ा गया।

सूत्रों के अनुसार पकड़े गए आरोपित का नाम बिलाल दुर्रानी घाघरा है। शंका है कि संदिग्ध गुजरात में जैश ए मोहम्मद का आतंकी नेटवर्क खड़ा करने के लिए यह स्लीपर सेल की तैयारी कर रहे थे।

बता दें कि शहर का वारसी नगर क्षेत्र नाहर दरवाजा थाना क्षेत्र में आता है, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी रहती है। गिरफ्तारी के संबंध में स्थानीय पुलिस ने अधिक जानकारी नहीं दी है।

हालांकि बताया जा रहा है कि एटीएस आरोपित काे लेकर रवाना हो चुकी है। इधर देवास से संदिग्ध पकड़ाने के बाद देवास पुलिस भी सतर्क हो गई है। मामले में जांच की जा रही है।

सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण बने आनंदोत्सव, हर बच्चे की हो सहभागिता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को मंत्रालय में लोकार्पण के लिए तैयार हो चुके प्रदेश के सभी सांदीपनि विद्यालयों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन विद्यालयों का लोकार्पण औपचारिक कार्यक्रम न होकर शिक्षा, संस्कृति और जनभागीदारी का सामाजिक उत्सव बने। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संचालित ‘स्कूल चलें अभियान’ के दौरान आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में बच्चों, उनके अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण आनंद के उत्सव के रूप में मनाया जाए। यह नए भवनों के उद्घाटन के साथ हमारे नौनिहालों के उज्ज्वल भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नए अध्याय का शुभारंभ है। उन्होंने निर्देश दिए कि कार्यक्रमों को यादगार बनाने के लिए बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, विभिन्न प्रतियोगिताएँ तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जाएँ। साथ ही सभी बच्चों को स्वल्पाहार एवं मिष्ठान्न वितरित किया जाए, जिससे यह अवसर उनके लिए अविस्मरणीय बन सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरु सांदीपनि के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित एक लघु पुस्तिका (पॉकेट बुक) प्रकाशित कर विद्यार्थियों में वितरित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुरु सांदीपनि तत्समय सामाजिक समरसता के सबसे बड़े पैरोकार थे। उन्होंने जाति, वर्ग, रंग का भेद न करके अमीर-गरीब से लेकर राज परिवार के बच्चों सहित गरीबों और किसानों के बच्चों को शिक्षा-दीक्षा दी। सभी को समान रूप से दीक्षित किया। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में हम सबके विशेषकर विद्यार्थियों को जानना जरूरी है। इससे विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, गुरु-शिष्य संबंधों और नैतिक मूल्यों के बारे में जानकारी और प्रेरणा मिलेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण पहले ही हो चुका है, वहाँ प्रवेशोत्सव उत्साहपूर्वक आयोजित किया जाए, जिससे अधिक से अधिक बच्चों का विद्यालयों से जुड़ाव बढ़े। उन्होंने अधिकारियों से सभी तैयारियाँ समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक सांदीपनि विद्यालय प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त और आधुनिक शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह तथा स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह ने वर्चुअली सहभागिता की।

बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने बताया कि वर्तमान में 70 सांदीपनि विद्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें स्कूल शिक्षा विभाग के 46 एवं जनजातीय कार्य विभाग के 24 (कुल 70) सांदीपनि विद्यालय लोकार्पण के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिलों के प्रभारी मंत्री एवं अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में इनका लोकार्पण कराया जाये। उन्होंने कहा कि आने वाली गुरु पूर्णिमा (29 जुलाई) के दिन हर जिले के एक सांदीपनि विद्यालय में प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में गुरु पूर्णिमा उत्सव मनाया जाये। इसमें विज्ञान प्रदर्शनी आयोजन, गुरुजनों का सम्मान, विद्यार्थियों एवं शिक्षकों द्वारा किए गए नवाचारों की जानकारी प्रदाय, विद्यार्थियों द्वारा डिजिटल एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रदर्शन सहित स्कूल के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान जैसे आयोजन किये जायें।

बैठक में मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य  गुलशन बामरा सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

 

JCB ड्राइवर की बहादुरी: भयंकर बाढ़ में फंसे परिवार की बचाई जान

छोटी बच्ची, माँ और पिता को सुरक्षित बाहर निकालकर पेश की मानवता की मिसाल

भयंकर बाढ़ के बीच एक JCB ड्राइवर ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक परिवार की जान बचा ली। तेज़ बहाव और चारों ओर फैले पानी के बीच एक घर में एक छोटी बच्ची अपने माता-पिता के साथ फंसी हुई थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था।

ऐसे कठिन समय में JCB ड्राइवर ने अपनी जान की परवाह किए बिना मशीन को बाढ़ के पानी के बीच पहुँचाया और सावधानीपूर्वक परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सबसे पहले छोटी बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया, जिसके बाद उसकी माँ और पिता को भी सकुशल रेस्क्यू कर लिया गया।

इस साहसिक बचाव अभियान ने साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में हिम्मत, समझदारी और मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है। स्थानीय लोगों ने JCB ड्राइवर की बहादुरी की जमकर सराहना की और उसे एक वास्तविक हीरो बताया।

मुख्य  बिंदु

  • भयंकर बाढ़ में एक परिवार घर के अंदर फंस गया था।
  • JCB ड्राइवर ने जोखिम उठाकर रेस्क्यू अभियान चलाया।
  • छोटी बच्ची और उसके माता-पिता को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
  • स्थानीय लोगों ने ड्राइवर की बहादुरी और मानवता की प्रशंसा की।

यह घटना हमें सिखाती है कि आपदा के समय साहस और मानवता से बढ़कर कुछ नहीं होता। JCB ड्राइवर का यह वीरतापूर्ण कार्य लंबे समय तक लोगों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक: विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी प्रदेश की समृद्धशाली विरासत

मध्यप्रदेश पर्यटन क्विज-2026 के लिए ऑनलाइन पंजीयन 25 जुलाई 2026 तक: विद्यार्थियों को जानने को मिलेगी प्रदेश की समृद्धशाली विरासत

“बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश”की जिला स्तरीय क्विज 07 अगस्त को होगी आयोजित
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता और उपविजेता टीमों को मिलेगा पर्यटन का आकर्षक उपहार
साल 2025 में 24489 विद्यार्थियों ने लिया था उत्साहपूर्वक हिस्सा, 8163 विद्यालयों ने द्वारा कराया गया था पंजीयन

भोपाल 

मध्यप्रदेश के समृद्धशाली इतिहास, परंपराओं, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक विविधताओं, कला, प्राकृतिक संपदा और पर्यटन की असीम संभावनाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘पर्यटन क्विज-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। जिला स्तरीय इस क्विज में भाग लेने के लिए विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन पंजीयन 1 जुलाई से 25 जुलाई 2026 तक शाम 5:30 बजे तक आधिकारिक वेबसाइट   

https://www.mptourism.com/tourismquiz2026/schools/ के माध्यम से किया जा सकता है। विद्यार्थियों में पर्यटन के माध्यम से सीखने की प्रवृत्ति को विकसित करने, मध्यप्रदेश पर्यटन की संभावनाओं से जुड़े ज्ञान का संचार करने के उद्देश्स से आयोजित हो रहे इस क्विज में प्रदेश के सभी शासकीय, अशासकीय, सी.बी.एस.ई. (CBSE) एवं केंद्रीय विद्यालयों के कक्षा 9वीं से 12वीं के अध्ययनरत छात्र-छात्राएं सहभागिता कर सकते हैं।

7 अगस्त को”बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश” की जिला स्तरीय क्विज

मध्य प्रदेश पर्यटन क्विज-2026 “बूझो जानो फिर देखो अपना प्रदेश” का जिला स्तरीय आयोजन आगामी 07 अगस्त 2026 को प्रदेश के समस्त जिलों में एक साथ किया जाएगा। पर्यटन क्विज-2026 क्विज में पूछे जाने वाले प्रश्न मध्य प्रदेश के पर्यटन, कला, संस्कृति, धार्मिक, प्राकृतिक परिवेश और ऐतिहासिक संवर्धन पर आधारित होंगे। जिला स्तर पर प्रतियोगिता दो चरणों में संपन्न होगी। प्रथम चरण की लिखित परीक्षा के आधार पर चयनित शीर्ष 06 टीमों के मध्य द्वितीय चरण में ‘ऑडियो-विजुअल/मल्टीमीडिया’ आधारित क्विज का आयोजन किया जाएगा। जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली विद्यालयीन टीम राज्य स्तरीय क्विज में जिले का प्रतिनिधित्व करेगी।

साल 2025 में 24,489 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक लिया था हिस्सा

मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2016 से (कोविड महामारी के कारण वर्ष 2020-21 को छोड़कर) प्रतिवर्ष पर्यटन क्विज का सफल आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2025 में आयोजित पर्यटन क्विज को विद्यार्थियों का अभूतपूर्व उत्साह प्राप्त हुआ, जिसमें 24,489 विद्यार्थियों ने भागीदारी की तथा 8,163 विद्यालयों ने अपने विद्यार्थियों का पंजीयन कराया। यह उल्लेखनीय सहभागिता विद्यार्थियों में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। पर्यटन क्विज-2026 का ध्येय भी विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों से परिचित कराना, उनमें पर्यटन के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा अपने गौरवशाली प्रदेश की विरासत और पर्यटन संभावनाओं से जोड़ना है, ताकि भावी पीढ़ी प्रदेश की अनमोल धरोहरों से परिचित हो सके। 

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से विजेता टीमों को मिलेगा निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का उपहार

मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा विद्यार्थियों को पर्यटन के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आकर्षक पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। प्रत्येक जिले की प्रथम तीन विजेता टीमों को मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के होटलों में 2 रात्रि एवं 3 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन प्रदान किया जाएगा। वहीं, अगली तीन उपविजेता टीमों को 1 रात्रि एवं 2 दिवस के निःशुल्क पर्यटन भ्रमण का कूपन दिया जाएगा।इन कूपनों के अंतर्गत विद्यार्थियों के आने-जाने, आवास, भोजन तथा स्थानीय भ्रमण का संपूर्ण व्यय मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों को प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हो सके।

 

अल्पवर्षा पर CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, किसानों के लिए तैयार हुआ मास्टर प्लान

भोपाल 

 संभावित अल्पवर्षा की आशंका को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जुलाई को मंत्रालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी समेत विभिन्न विभागों की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने कहा कि कम बारिश की संभावना को संकट के बजाय बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय रहते तैयारी करने का अवसर माना जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करते हुए किसानों तक समय पर जरूरी जानकारी और मार्गदर्शन पहुंचाने के निर्देश दिए, ताकि कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।

 मुख्यमंत्री  यादव ने  कहा कि कम वर्षा की संभावना को चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समय पर तैयारी के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।उन्होंने बारिश की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना चाहिए और किसानों को समय पर मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो कि कृषि उत्पादन और किसानों की आय प्रभावित न हो।अधिकारियों ने बताया कि यादव ने सचिवालय में किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं अन्य विभागों द्वारा अब तक की गई तैयारियों की समीक्षा की।

किसानों को वैज्ञानिक खेती और कम पानी वाली फसलों के लिए किया जाएगा प्रेरित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि प्रदेश का हर किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक तरीके और उचित तैयारी के साथ कर सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को ऐसी फसलों के बारे में जागरूक किया जाए, जिन्हें कम पानी की जरूरत होती है और जो कम समय में तैयार हो जाती हैं। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर, कोदो और कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि ये फसलें कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं और किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकती हैं।

बुआई में जल्दबाजी न करें, पर्याप्त नमी के बाद ही करें खेती
मुख्यमंत्री ने किसानों को सलाह देने के निर्देश दिए कि पर्याप्त नमी बनने से पहले बुआई न करें। खेतों में नमी संरक्षण के उपाय अपनाने के साथ-साथ कम अवधि में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए।

उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की सलाह किसानों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाई जाए, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सही फसल का चयन किया जा सके। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

दो वर्षों में जल संरक्षण और जलापूर्ति को मजबूत करने की तैयारी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान कर टैंकर आपूर्ति की आकस्मिक योजना तैयार की जाएगी। अमृत 2.0 के अंतर्गत जलप्रदाय योजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक गांव की समीक्षा होगी और बंद या अधूरी नल-जल योजनाओं की मरम्मत के लिए 90 दिन का विशेष अभियान चलाया जाएगा।

‘जलाभिषेक 2.0’ अभियान के तहत पुराने तालाबों, कुओं, बावड़ियों और अन्य जल संरचनाओं का सर्वे कर उनका जीर्णोद्धार किया जाएगा। मनरेगा के सहयोग से प्रत्येक विकासखंड में कम से कम 100 जल संरचनाओं को अगले दो वर्षों में पुनर्जीवित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूजल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम और खेत-तालाब निर्माण को मिशन मोड में आगे बढ़ाएगी। “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में” की अवधारणा पर विशेष रूप से काम किया जाएगा। इसके साथ ही रबी सीजन से पहले नहरों की सफाई और मरम्मत पूरी करने तथा अंतिम छोर तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।

कम पानी वाली खेती और जिला स्तर पर आकस्मिक फसल योजना तैयार
बैठक में जानकारी दी गई कि दलहन, तिलहन और श्रीअन्न जैसी कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इनके समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था भी मजबूत की जाएगी। धान उत्पादक क्षेत्रों में डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) और वैकल्पिक गीला-सूखा सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने के साथ प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है।

जलाशयों के संचालन के लिए तय होगा स्पष्ट प्रोटोकॉल
सरकार इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर और गांधीसागर सहित सभी प्रमुख जलाशयों के संचालन में तय नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। जल उपयोग की प्राथमिकता में सबसे पहले पेयजल, उसके बाद सिंचाई और अंत में विद्युत उत्पादन रखा जाएगा। इसके अलावा राज्य स्तर पर रियल-टाइम जल डैशबोर्ड तैयार किए जाएंगे, जिससे जलाशयों और जल संसाधनों की लगातार निगरानी की जा सके। “जल गंगा संवर्धन” अभियान की तर्ज पर जनभागीदारी वाले कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे। प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट से निपटने के लिए अलग आकस्मिक योजना तैयार होगी।

फसल बीमा, डिजिटल सर्वे और सोशल मीडिया से किसानों तक पहुंचेगी जानकारी
बैठक में बताया गया कि आरबीसी 6(4) के तहत फसल क्षति सर्वे के लिए राजस्व, कृषि और पंचायत विभाग के अधिकारियों का संयुक्त प्रशिक्षण पहले ही पूरा कराया जाएगा। डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट इमेजरी के माध्यम से नुकसान का आकलन कर 15 दिनों के भीतर सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

फसल बीमा का दायरा बढ़ाने और दावों का शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के लिए भी कार्यवाही की जा रही है। राज्य स्तरीय आकस्मिक कार्ययोजना विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। उन्नत बीज वितरण, फसल प्रदर्शन और बलराम तालाब योजना के तहत वर्षा जल संरक्षण के लक्ष्य जिलों को दिए जा चुके हैं।

सरकार सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से किसानों को मौसम पूर्वानुमान, खेती से जुड़ी सलाह और आवश्यक जानकारी लगातार उपलब्ध कराएगी। सभी जिलों के कलेक्टरों को सिंचाई, जलभराव, जीवन रक्षक सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता और सूखे की स्थिति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। 26 से 30 जून के बीच आयोजित ग्राम सभाओं में भी आकस्मिक कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय पर और सही निर्णय लेने और विभागों के बीच प्रभावी समन्वय के साथ, राज्य कम वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे किसानों को उन फसलों की खेती के महत्व के बारे में व्यापक रूप से शिक्षित करें जिनमें कम पानी की आवश्यकता होती है और इसमें समय भी कम लगता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को मोटे अनाज और दलहन फसलों जैसे ज्वार, बाजरा, काले चने, हरे चने, अरहर और कोदो-कुटकी का चयन करना चाहिए क्योंकि वे कम पानी में भी बेहतर पैदावार दे सकते हैं।यादव ने किसानों से जल्दबाजी में बुवाई से बचने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में पर्याप्त नमी होने के बाद ही ऐसा किया जाना चाहिए और नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के सुझावों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाना चाहिए ताकि वे उपयुक्त फसलों का चयन कर सकें। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक किये जाये कार्यक्रम आयोजित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

खेती की लागत कम करना और किसानों की आय बढ़ाना हमारी प्राथमिकता
किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत संचालित गतिविधियों की समीक्षा

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों का कल्याण राज्य सरकार का कर्तव्य है। खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए गतिविधियों को प्राथमिकता पर लिया जाना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। कृषकों के हित संवर्धन के लिए लागू कार्यक्रमों और योजनाओं का क्रियान्वयन मिशन मोड में किया जाए। किसानों से सीधे संवाद के लिए राजधानी से लेकर मैदानी स्तर तक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। दुग्ध उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष रूप से सहायक है। किसानों को उन्नत नस्ल की गाय उपलब्ध कराने में निजी संस्थाओं का सहयोग भी लिया जाए। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के केन्द्रों का अधिक से अधिक विस्तार हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत अब तक हुए कार्यक्रमों की मंत्रालय में समीक्षा कर रहे थे। बैठक में आगामी प्रस्तावित कार्यक्रमों के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, मुख्य सचिव अनुराग जैन तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन हो

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को कम पानी और अल्प अवधि की फसलों के लिए जागरूक किया जाए। फसल चक्र में परिवर्तन और प्राकृतिक व जैविक खेती के प्रोत्साहन के लिए वातावरण बनाना आवश्यक है। खेती-किसानी से जुड़े स्थानीय पर्व और त्यौहारों तथा फसल चक्र के अनुसार किसानों से संवाद स्थापित किया जाए। सुगमता और सरलता सुनिश्चित करते हुए सहकारी समितियों की प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन किया जाए।

सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव और संभागीय मुख्यालयों पर होंगे फूड फेस्टिवल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में जानकारी दी गई कि ऑनलाईन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल और किसानों के लिए ई-पासबुक सुविधा का शुभारंभ जुलाई माह में ही किया जाएगा। राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन भी होगा। उत्कृष्ट कार्य करने वाले मैदानी कार्यकर्ताओं तथा पशुपालकों को पुरस्कृत और सम्मानित करने के लिए उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन होगा। प्रदेश के सभी जिलों में बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जाएंगे और सभी संभागीय मुख्यालयों पर फूड फेस्टिवल होंगे।

इंदौर में होगा सब्जी महोत्सव और एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम

बैठक में बताया गया कि खरगौन में राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन और कपास एवं मिर्च महोत्सव के आयोजन की योजना है। अन्तर्देशीय मत्स्य पालन और जलीय कृषि पर जबलपुर में कार्यक्रम होगा। इसी प्रकार जबलपुर में ही कुक्कुट पालकों और उद्यमियों का सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा। बुरहानपुर में केला महोत्सव, उज्जैन में हाईटेक नर्सरी और संरक्षित खेती पर कार्यशाला, सागर और रतलाम में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) का राज्य स्तरीय सम्मेलन, नीमच में उद्यानिकी में आधुनिक तकनीक पर कार्यशाला, इंदौर में सब्जी महोत्सव तथा एक्वाकल्चर मार्केटिंग सिम्पोजियम और भोपाल पराली प्रबंधन पर कार्यशाला के साथ ही नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव के अंतर्गत राज्य स्तरीय किसान सम्मेलन भी प्रस्तावित है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव के.सी गुप्ता, नीरज मंडलोई, प्रमुख सचिव डी.पी. आहूजा, उमाकांत उमराव, आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह उपस्थित थे।

 

MPESB Recruitment 2026: कृषि विस्तार अधिकारी के 2784 पदों पर आवेदन शुरू, ग्रेजुएट उम्मीदवार तुरंत करें अप्लाई

भोपाल 

 मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB), भोपाल ने किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के अंतर्गत ग्रुप-2, सब-ग्रुप-1 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के माध्यम से कुल 2,784 रिक्तियां भरी जाएंगी। इच्छुक उम्मीदवार 17 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आज से ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। अभ्यर्थी 17 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद 2 अगस्त से भर्ती परीक्षा आयोजित की जाएगी।

यह भर्ती परीक्षा समूह-2, उप समूह-1 के तहत आयोजित की जा रही है। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

73% आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट
कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती में राज्य की आरक्षण व्यवस्था लागू की है। अनुसूचित जाति (SC) को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति (ST) को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत (न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। 73 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान पर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

आरक्षण के साथ जारी होगा रिजल्ट

इस भर्ती में कुल 73 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अनुसूचित जाति को 20 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 16 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा।

2 अगस्त को दो पालियों में होगी परीक्षा
कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को आयोजित होगी। परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिलेगा।

परीक्षा में आधार सत्यापन अनिवार्य
परीक्षा में शामिल होने के लिए आधार आधारित सत्यापन अनिवार्य रहेगा। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र भी साथ लाना होगा। पहचान पत्र के बिना परीक्षा में प्रवेश नहीं मिलेगा।

मोबाइल, स्मार्ट वॉच और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित
परीक्षा केंद्र में मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। परीक्षा शुरू होने के बाद से लेकर परीक्षा समाप्त होने तक किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष छोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इन उम्मीदवारों को आवेदन की पात्रता नहीं
कर्मचारी चयन मंडल ने भर्ती के लिए कुछ पात्रता शर्तें भी तय की हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं, वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे।

जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है, वे भी आवेदन नहीं कर सकेंगे। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष भी इस भर्ती के लिए पात्र नहीं होंगे।

ऐसे करें आवेदन
योग्य और पात्र अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर 17 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 अगस्त से परीक्षा आयोजित की जाएगी।

परीक्षा केंद्र के लिए जरूरी नियम
– परीक्षा में शामिल होने के लिए बायोमेट्रिक (आधार आधारित) सत्यापन अनिवार्य होगा।
– प्रवेश पत्र के साथ एक वैध फोटोयुक्त पहचान पत्र लाना जरूरी है।
– परीक्षा केंद्र पर तय रिपोर्टिंग समय के बाद एंट्री नहीं मिलेगी।
– मोबाइल, स्मार्ट वॉच और कैलकुलेटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह बैन रहेंगे।
– परीक्षा शुरू होने के बाद पेपर खत्म होने से पहले उम्मीदवार कक्ष नहीं छोड़ सकेंगे।

ये लोग नहीं कर पाएंगे आवेदन
– जिन उम्मीदवारों के 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद दो से अधिक बच्चे हैं, वे आवेदन नहीं कर सकते।
– यदि पुरुष का विवाह 21 वर्ष और महिला का विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हुआ हैए तो वे पात्र नहीं होंगे।
– महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी सिद्ध पाए गए पुरुष आवेदक भी इस भर्ती के लिए अयोग्य होंगे।
– योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

कौन कर सकता है आवेदन?

    आवेदन की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक होगा। 

    आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार के पास निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना अनिवार्य है।

    अनारक्षित (UR) वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित की गई है।

    SC/ST/OBC/EWS/PwD, महिला उम्मीदवार, पूर्व सैनिक एवं संविदा कर्मचारी न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष की आयु तक आवेदन कर सकते हैं।

    पूर्व सैनिकों को सेवा अवधि के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ भी मिलेगा।

    आयु में छूट मध्य प्रदेश शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को प्रदान की जाएगी।

 

जॉर्जिया के हाईवे पर बारिश के बीच जेटलाइनर हादसा: चौंका देने वाला मंजर

जॉर्जिया के हाईवे पर बारिश के बीच जेटलाइनर हादसा: चौंका देने वाला मंजर

  सोमवार दोपहर जॉर्जिया में भारी बारिश के दौरान एक बड़ा विमान हादसा सामने आया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक कमर्शियल जेटलाइनर लैंडिंग के बाद रनवे से आगे निकल गया और फिसलते हुए कई लेन वाले व्यस्त हाईवे तक पहुंच गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज बारिश और गीली सतह के कारण विमान को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो गया। विमान के हाईवे की ओर बढ़ते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के दौरान विमान के पीछे धुएं और मलबे की लकीर दिखाई दी, जिससे घटनास्थल का दृश्य बेहद भयावह बन गया।

फिलहाल संबंधित एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों की ओर से विमान में सवार यात्रियों और चालक दल की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

यदि आप इस क्षेत्र में हैं, तो स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और प्रभावित मार्गों से दूर रहें। किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी अपडेट पर ध्यान दें।

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श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का बनेगा महत्वपूर्ण केंद्र : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में 243 पदों के सृजन का प्रस्ताव शीघ्र करें तैयार

भोपाल 

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा के सशक्तीकरण एवं संस्थागत विकास संबंधी प्रस्तावों की समीक्षा की। बैठक में अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अनुपम राजन उपस्थित थे। बैठक में श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, रीवा में अध्ययन-अध्यापन, शोध, प्रकाशन, परीक्षा, प्रशासनिक एवं विस्तार गतिविधियों के सुचारु संचालन के लिए शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों के सृजन के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। परिसर के लिए कुल 243 पदों के सृजन तथा उनकी पूर्ति तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें 117 शैक्षणिक, 4 प्रशासनिक तथा 122 गैर-शैक्षणिक पद सम्मिलित हैं।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर संस्कृत, वैदिक अध्ययन, भारतीय दर्शन, प्राचीन शास्त्रों तथा भारतीय ज्ञान परम्परा के अध्ययन-अध्यापन और शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। परिसर में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध मार्गदर्शन और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। उन्होंने परिसर के संधारण एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पदों की स्वीकृति से श्रीरामानुज संस्कृत परिसर में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के मानकों के अनुरूप शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा। साथ ही संस्कृत भाषा, वैदिक ज्ञान, भारतीय दर्शन और पारम्परिक विद्या प्रणालियों के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यापक प्रसार को नई गति मिलेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि श्रीरामानुज संस्कृत परिसर, लक्ष्मण बाग, रीवा की स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा 5 अक्टूबर 2023 को की गई थी। परिसर में संस्कृत, वैदिक अध्ययन तथा भारतीय शास्त्रों एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित विषयों में अध्ययन-अध्यापन एवं शोध कार्य संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में परिसर में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन सीमित मानव संसाधनों से किया जा रहा है। परिसर में वेद, वेदान्त दर्शन, व्याकरण, साहित्य, ज्योतिष, संस्कृत, योग, पुराणेतिहास, धर्मशास्त्र, वास्तुशास्त्र, संगीत, मानविकी, पौरोहित्य, हिन्दू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परम्परा और शिक्षाशास्त्र सहित विभिन्न विभागों की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने इन विभागों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग मानकों के अनुरूप प्रोफेसर, सह प्राध्यापक एवं सहायक प्राध्यापक के पद सृजित किए जाने के लिए प्रस्ताव शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए।

 

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