कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने दिया इस्तीफा

जीतू पटवारी और राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप, प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर उठाए सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने करीब 30 साल तक संगठन से जुड़े रहने के बाद अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भेजा है। इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जीतू पटवारी और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए।

प्रदेश नेतृत्व पर साधा निशाना

राकेश सिंह यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस में समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि संगठन में फैसले एकतरफा लिए जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में जनहित के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम करना संभव नहीं रह गया है।

जीतू पटवारी पर लगाए गंभीर आरोप

यादव ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सके। उन्होंने पटवारी पर जमीनों की दलाली जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य पेश नहीं किया है।

राहुल गांधी पर भी की टिप्पणी

राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व को लेकर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं कर रहा और इससे संगठन लगातार कमजोर हो रहा है।

मीडिया डिबेट और संगठन की कार्यशैली पर उठाए सवाल

यादव ने कहा कि पार्टी द्वारा कार्यकर्ताओं को मीडिया डिबेट से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वे जनता के सामने अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति जनसेवा के उद्देश्य से करते हैं, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार

राकेश सिंह यादव के इस्तीफे और उनके आरोपों ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल, उनके आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नरोत्तम मिश्रा की वापसी के संकेत? दतिया उपचुनाव के बाद बदल सकते हैं प्रदेश के राजनीतिक समीकरण

भोपाल

दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। आर्थिक अनियमितता के मामले में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद होने के बाद रिक्त हुई इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। परिणाम तीन अगस्त को आएगा।

भाजपा से दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा यहां से प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा नरोत्तम मिश्रा को चुनाव लड़वाने के संकेत दे चुकी है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से नरोत्तम मिश्रा का यह वनवास समाप्त होने की संभावना है। हार के ढाई साल बाद यदि वह उपचुनाव में जीत दर्ज करते हैं तो मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार और संगठन में उनका कद फिर से मजबूत हो जाएगा।

 

मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में महारुद्र यंत्र फिर हुआ काला, जांच की मांग तेज

मंदसौर

भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में लगा चांदी का महारुद्र यंत्र बार-बार काला हो रहा हैं। कुछ माह पहले ही महारुद्र यंत्र की रतलाम के भक्तों की मंडली द्वारा सफाई की गई थी।

अबकी बार सिर्फ महारुद्र यंत्र ही काला हुआ हैं, चांदी का छत्र, दरवाजे पर चमक बरकरार हैं। मंदिर प्रबंधक का कहना हैं की सावन माह में गर्भगृह के रुद्र यंत्र सहित दरवाजे, छत की सफाई होगी।

भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में करीब 11 साल पहले 1 करोड़ रुपए से बना महारुद्र यंत्र कुछ-कुछ दिनों में ही काला पड़ रहा हैं। कई बार सफाई की गई हैं, लेकिन महारुद्र यंत्र की चांदी बार-बार काली हो रही हैं। गर्भगृह में करीब 260 किलो चांदी का रुद्रयंत्र लगा हुआ हैं।

महाशिवरात्रि पर्व के पहले गर्भगृह के दरवाजों, छत्र एवं महारुद्र यंत्र की सफाई कर चकाचक किया गया था। चांदी के दरवाजे और छत की चमक तो पहले जैसी बनी हुई हैं, लेकिन महारुद्र यंत्र काला हो गया।

प्रयोगशाला की तरह ही कार्य हो रहा है। प्रारंभ में जब महारुद्र यंत्र एवं चांदी के सभी आयटम कुछ-कुछ दिनों में काले हो रहे थे तब निर्माता द्वारा 3.5 किलो चांदी का लेप बनाकर यंत्र पर चढ़ाया था।

मंदिर समिति से उस समय कहा था की इससे यंत्र काला नहीं पड़ेगा लेकिन कुछ समय बाद ही यंत्र काला पड़ने लगा और वह अब भी कायम हैं।

मंदिर प्रबंधक राहुल रुनवाल ने बताया मंदिर गर्भगृह में चांदी के महारुद्र यंत्र, छत्र, दरवाजों की समय-समय पर सफाई हो रही हैं। सावन माह में फिर चांदी की सफाई होगी।

निर्माण कार्यों का हर 15 दिनों में करें निरीक्षण, नागरिक सुविधाओं के काम में न हो लापरवाही : शंगीता आर.

रायपुर

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव  शंगीता आर. ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ रायपुर नगर निगम के अधिकारियों की बैठक लेकर राजधानी रायपुर में विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने रायपुर नगर निगम मुख्यालय में आयोजित बैठक में तकनीकी कारणों से लंबित अप्रारंभ कार्यों की बाधाएं दूर कर उन्हें तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जोन कमिश्नरों को हर 15 दिनों में कार्यस्थलों का निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक  आर. एक्का और रायपुर नगर निगम के आयुक्त  संबित मिश्रा भी बैठक में मौजूद थे।

सचिव  शंगीता आर. ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि राजधानी में नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य बुनियादी सेवाओं की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए सभी जोन कमिश्नरों, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारियों और नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारियों का गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ निर्वहन करने को कहा। 

नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव ने शहर के जलभराव वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर व्यापक सफाई अभियान चलाने तथा जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी नियमित एवं प्लेसमेंट अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने से कार्यक्षमता और सेवा वितरण दोनों बेहतर होते हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के आवासों के निर्माण में तेजी लाने को कहा। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की समीक्षा के दौरान रायपुर की स्वच्छता रैंकिंग को सुधारने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने को कहा।

सचिव  शंगीता आर. ने राजधानी की गरिमा के अनुरूप स्वच्छता व्यवस्था विकसित करने, शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने तथा कचरा परिवहन की व्यवस्था की नियमित निगरानी व समीक्षा करने को कहा। उन्होंने नालंदा परिसर की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  शशांक पाण्डेय, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक  पुलक भट्टाचार्य, मुख्य अभियंता  राजेश शर्मा और रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक  एस.के. सुन्दरानी सहित नगर निगम के सभी अपर आयुक्त, उपायुक्त, जोन कमिश्नर, अभियंता, सभी विभागों के प्रभारी अधिकारी, स्वच्छ भारत मिशन के वार्ड प्रभारी, जोन स्वास्थ्य अधिकारी तथा जोन सहायक राजस्व अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

दिल्ली में हुई व्यापार बोर्ड की बैठक – मंत्री काश्यप ने किया मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व

भोपाल 

सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में शुक्रवार को सम्पन्न हुई बोर्ड ऑफ ट्रेड की महत्वपूर्ण बैठक में मध्यप्रदेश की ओर से प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश की निर्यात क्षमता, औद्योगिक विकास एवं निवेश संभावनाओं पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी।

बोर्ड बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की। इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, देश के प्रमुख उद्योगपति, निर्यातक, व्यापार बोर्ड के सदस्य, विभिन्न राज्यों के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

एमएसएमई मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व एवं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के प्रयासों से संपन्न हुए 9 मुक्त व्यापार समझौते भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हैं। उन्होंने सभी राज्यों से इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने तथा निर्यात को नई गति देने के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।

मंत्री काश्यप ने कहा कि भारत को वर्ष 2030-31 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुंचाने में मध्यप्रदेश अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य निर्यात वृद्धि के साथ-साथ आयात पर निर्भरता कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

मंत्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश ने राज्य निर्यात नीति, जिला निर्यात कार्य योजनाओं, जिला निर्यात संवर्धन परिषदों, राज्य स्तरीय निर्यात संवर्धन परिषद तथा ‘एक जिला–एक उत्पाद जैसी पहलों के माध्यम से मजबूत निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है। प्रदेश का वस्तु निर्यात लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आगामी वर्षों में इसे और अधिक गति देने के लिए ठोस रणनीति पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का टेक्सटाइल, फार्मा एवं इंजीनियरिंग क्षेत्र तेजी से निर्यात वृद्धि का आधार बन रहा है।

मंत्री काश्यप ने कहा कि मध्यप्रदेश में देश का पहला पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां लगभग 36 औद्योगिक इकाइयों के साथ ₹26,000 करोड़ से अधिक के निवेश समझौते हो चुके हैं तथा भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। साथ ही, उन्होंने इंदौर में टेक्सटाइल टेस्टिंग फैसिलिटी तथा एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल का क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किए जाने का भी अनुरोध किया, जिससे प्रदेश के निर्यातकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रदेश में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग पार्क तथा भोपाल के निकट सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किया जा रहा है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं मोबाइल विनिर्माण को नई गति मिलेगी। उन्होंने सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित किए जाने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने हाल के महीनों में 20 नए जीआई टैग प्राप्त किए हैं, जिनमें अधिकांश कृषि एवं उद्यानिकी उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना आवश्यक है, ताकि वैश्विक बाजारों की गुणवत्ता आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सके।

उन्होंने मध्यप्रदेश के भूमि बैंक की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए 13 स्थानों की पहचान की गई है तथा लगभग 12,000 एकड़ भूमि निवेशकों के लिए उपलब्ध कराई गई है। यह औद्योगिक विकास एवं बड़े निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री काश्यप ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को निर्यात वृद्धि का आधार बताते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में संचालित आई सी डी पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसे देखते हुए उन्होंने जबलपुर एवं रीवा क्षेत्र में नए आई सी डी तथा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क स्थापित करने का अनुरोध किया, जिससे पूर्वी मध्यप्रदेश के उद्योगों एवं निर्यातकों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश प्राकृतिक संपदा, वन्यजीव एवं इको-टूरिज्म की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। चीता परियोजना की सफलता तथा वन्य पर्यटन की बढ़ती संभावनाएं प्रदेश को विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन भी विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक सशक्त माध्यम है और इसके लिए विशेष रणनीति तैयार किए जाने की आवश्यकता है।

मंत्री काश्यप ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन,, ई मार्केट प्लेस,,जेम सहित विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन पहलों की सराहना करते हुए कहा कि इनका लाभ अधिक से अधिक एमएसएमई स्टार्टअप्स,ओ डी ओ पी उत्पादकों एवं नए निर्यातकों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश जैसे लैंड-लॉक्ड राज्यों को LIFT योजना में शामिल करने तथा FTA के प्रभावी उपयोग हेतु जिला एवं क्लस्टर स्तर पर विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाने का भी सुझाव दिया। मंत्री काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास, निर्यात संवर्धन एवं निवेश आकर्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश न केवल राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण एवं निर्यात शक्ति बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

 

सिंधिया राजघराने के 37 साल पुराने विवाद का होगा अंत, 8 जुलाई को कोर्ट में पूरी होगी औपचारिक प्रक्रिया

ग्वालियर

 सिंधिया राजघराने की करीब 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर लगभग चार दशक से चला आ रहा पारिवारिक विवाद अब समाधान की ओर बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी तीनों बुआ वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे तथा ऊषा राजे के बीच संपत्ति बंटवारे को लेकर हुए आपसी समझौते की औपचारिक प्रक्रिया आठ जुलाई को न्यायालय में पूरी की जाएगी। इसके लिए ये दोनों पक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। बता दें कि वसुंधरा राजे राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जबकि यशोधरा राजे मध्य प्रदेश में मंत्री रह चुकी हैं।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद समाप्त करने पर राजी हो गए हैं। समझौते का प्रार्थनापत्र ग्वालियर जिला न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। न्यायालय ने पिछली सुनवाई के दौरान पक्षकारों को राजीनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे और 90 दिनों के भीतर पूरे विवाद का समाधान कर उसकी पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि निर्धारित समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित याचिका को पुनः बहाल किया जा सकता है।

 

ई-रिक्शा चालकों के सामने नई मुसीबत, ‘चाइनीज ऐप’ से हैक हो रहे वाहन

 ग्वालियर

ग्वालियर की सड़कों पर इन दिनों ई-रिक्शा चालकों के सामने एक अजीबोगरीब और बेहद परेशान करने वाली मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती और सिरफिरे युवक राह चलते ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। ये युवक ‘चाइनीज मोबाइल एप्लीकेशन’ का इस्तेमाल कर चलते-चलते ही ई-रिक्शा की इलेक्ट्रिक बैटरी को रिमोटली लाक कर देते हैं।

बैटरी लॉक होते ही गाड़ी का चक्का जाम हो जाता है और वह टस से मस नहीं होती। इस नए किस्म की खुराफात से न सिर्फ गरीब ई-रिक्शा चालक परेशान होना पड़ रहा है, बल्कि पुलिस महकमा भी हैरान है। पुलिस के पास ऐसी एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों शिकायतें पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी पेंच और अचानक गायब हो जाने वाले ऐसे सिरफिरों के कारण पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।

ऐसे दिया जा रहा वारदात को अंजाम

पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि इन दिनों बाजार में आने वाले नए ई-रिक्शा आधुनिक फीचर्स और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी से लैस हैं। शरारती तत्व इसी का फायदा उठा रहे हैं।
  
कनेक्टिविटी की कमजोरी: शरारती युवक ई-रिक्शा के पास आते हैं या पीछे बैठते हैं और अपने मोबाइल ऐप के जरिए रिक्शा के ब्लूटूथ सिग्नल को हैक कर लेते हैं।
   
 बैटरी लॉक: ऐप के जरिए वे रिक्शा के ‘बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम’ में सेंध लगाकर उसे लाक कर देते हैं।
 
 एजेंसी के चक्कर: एक बार बैटरी लॉक होने के बाद रिक्शा सड़क पर ही ठप हो जाता है। इसे दोबारा चालू करने का कोई तरीका चालकों के पास नहीं होता। मजबूरी में उन्हें भारी-भरकम किराया देकर रिक्शा खिंचवाकर संबंधित कंपनी की एजेंसी ले जाना पड़ता है, जहां साफ्टवेयर के जरिए ही इसे दोबारा अनलाक किया जाता है।

दिनभर की कमाई बैटरी खुलवाने में चली गई

ग्वालियर थाने पहुंचे रमेश कुमार, नवीन कुशवाह सहित करीब आधा दर्जन ई-रिक्शा चालकों के साथ ऐसा हुआ। इन लोगों ने बताया कि पूरे दिन में 400 से 500 रुपये की कमाई होती है। ई-रिक्शा लाक होने के कारण एक बार में करीब एक हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट के मुताबिक

यह मामला बीएमएस हैकिंग से जुड़ा है। कई चाइनीज और सस्ते ई-रिक्शा या उनकी बैटरियों में डिफाल्ट ब्लूटूथ पासवर्ड (जैसे 0000 या 1234) होता है। शरारती तत्व इंटरनेट पर मौजूद एपीके फाइलों या चाइनीज क्लोन ऐप्स के जरिए इन डिफाल्ट पासवर्ड को क्रैक कर लेते हैं। या कई कंपनियां पासवर्ड से लैस ही नहीं करती। ब्लूटूथ आन रख देती हैं।
ई-रिक्शा चालक रखें इन बातों का ध्यान

 डिफाल्ट पासवर्ड बदलें: ई-रिक्शा खरीदते ही चालक सबसे पहले अपनी बैटरी के ब्लूटूथ का डिफाल्ट पासवर्ड बदलें।
 ब्लूटूथ विजिबिलिटी बंद रखें: यदि संभव हो, तो रिक्शा के ब्लूटूथ की ‘विजिबिलिटी’ को ‘हिडन’ मोड पर रखें ताकि कोई बाहरी डिवाइस उसे सर्च न कर सके।

 लागिन-पासवर्ड याद रखें: जब ई-रिक्शा खरीदते हैं तो कंपनी द्वारा लागिन-पासवर्ड, कंपनी का एप डाउनलोड कर दिया जाता है। इसे हमेशा याद रखें। कंपनी सामान्य पासवर्ड रखती है। इसके अपने हिसाब से बदल दें।

पुलिस की अपील- संदिग्धों की तुरंत दें सूचना

इस मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतें लगातार मिल रही हैं। साइबर सेल को इस मामले की जांच में लगाया गया है और उस ऐप को भी ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है जिससे यह लाक किया जा रहा है। आरोपित राह चलते या सवारी बनकर इस हरकत को अंजाम देते हैं, इसलिए उन्हें तुरंत पकड़ना चुनौती बना हुआ है।

पुलिस ने चालकों से अपील की है कि यदि कोई सवारी रिक्शा में बैठकर मोबाइल पर संदिग्ध हरकत करती दिखे, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें।

आटो-टेंपो चालकों पर शक और सोशल मीडिया का असर

पुलिस को इस मामले में आटो-टेंपो चालकों पर शक है। ऐसा इनपुट मिला है। सवारी के चक्कर में आटो, टेंपो चालक यह हरकत कर रहे हैं।

ई-रिक्शा लाक करने की वीडियो इंस्टा, फेसबुक, यूट्यूब पर इन दिनों खूब चल रही हैं। इसी में एप का प्रचार भी हो रहा है।

 

खिवनी अभयारण्य से लाए गए घायल बाघ “युवराज” का वन विहार में हो रहा उपचार

भोपाल

खिवनी अभयारण्य, देवास में आपसी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल हुए नर बाघ ‘युवराज’ का वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल के रेस्क्यू सेंटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बाघ को 27 जून 2026 को रेस्क्यू कर वन विहार लाया गया था। शुक्रवार को उसकी स्थिति का विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण राज्य पशु चिकित्सालय, जहांगीराबाद के वरिष्ठ वेटरिनरी सर्जन डॉ. एस.के. तुमड़िया, वन विहार के वरिष्ठ वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अतुल गुप्ता तथा वन विहार के पशु चिकित्सक डॉ. विनीत द्वारा किया गया।

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बाघ के आगे के दोनों पैर और पिछले बाएं पैर में गहरे घाव हैं। एक्स-रे परीक्षण से आगे के दोनों पंजों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। उसके पिछले बाएं पैर में गहरा घाव होने के कारण छह टांके लगाए गए हैं। उपचार के दौरान बाघ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल की जा रही है। डॉ. अतुल गुप्ता घायल बाघ की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान वन विहार के संचालक  विजय कुमार, सहायक संचालक डॉ. रूही हक तथा सफारी प्रभारी  सीता काकोड़िया भी उपस्थित रहीं।

 

 

भारत और जर्मनी दो भाईयों की तरह : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार को जर्मनी के 4 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री से मध्यप्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल में जर्मनी के केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के कार्यकारी बोर्ड की सदस्या एवं बैंक की सीईओ सु क्रिस्टियाने लाईबेक, कंट्री डायरेक्टर  वूल्फन मूथ, जर्मन दूतावास के प्रतिनिधि  गॉटफ्रीड वॉन और अन्य सदस्य, प्रबंध संचालक म.प्र. औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड  चंद्रमौली शुक्ला,  विशेष गढ़पाले सहित केन्द्र सरकार के अधिकारी भी उपस्थित थे।

मुख्यनमंत्री डॉ. यादव ने भारत एवं जर्मनी के बीच दशकों पुरानी मित्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश भाईयों की तरह हैं। इनमें आपसी साझेदारी को और अधिक प्रबल बनाने में मध्यप्रदेश बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। सरकार जर्मनी के उद्योगपतियों और निवेशकों से लगातार सम्पर्क में है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऊर्जा क्षेत्र में केएफडब्ल्यू डेवलपमेंट बैंक के सहयोग की सराहना करते हुए आशा जताई कि हमारी साझेदारी दिन-ब-दिन और भी सुदृढ़ होगी। जर्मनी के सहयोग से हमारा मध्ययप्रदेश एक ऊर्जा दक्ष हरित और समृद्ध राज्य बनेगा।

केएफडब्ल्यू बैंक के प्रतिनिधिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अवगत कराया गया कि एनर्जी रिफार्म प्रोग्राम अन्तर्गत वितरण कंपनियों में स्मार्ट मीटर की स्थापना एवं फीडर विभक्तिकरण कार्य के लिए लगभग 1120 करोड़ रूपये का वित्त पोषण किया जा रहा है। बैंक द्वारा इस साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए एनर्जी रिफार्म फेज-2 अंतर्गत प्रदेश में विद्युत वितरण अधोसंरचना निर्माण तथा सौर घंटों में कृषि फीडरों की आपूर्ति के लिये अधोसंरचनात्मक निर्माण कार्यों के लिए लगभग 200 मिलियन यूरो के वित्तीय सहयोग पर भी रूचि दिखाई है।

 

मध्यप्रदेश के लिए रूपए 5,00,856 करोड़ की वार्षिक ऋण योजना 2026-27 जारी

भोपाल

मुख्य सचिव  अनुराग जैन ने मंत्रालय में शुक्रवार को वित्त विभाग के अधिकारियों और राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के समन्वयक से कहा है कि वे जिलों से प्राप्त जिला स्तरीय क्रेडिट प्लान का हर हाल में क्रियान्वयन कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और सुदृढ़ बनाएं। मुख्य सचिव  जैन ने राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा प्रस्तुत वार्षिक साख योजना 2026-27 का विमोचन कर जारी की। विमोचन के दौरान अपर मुख्य सचिव वित्त  मनीष रस्तोगी, आयुक्त संस्थागत वित्त सु सोनिया मीना, क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय रिजर्व बैंक सु सुजाता लाल, उपमहाप्रबंधक नाबार्ड  विजेंद्र सिंह, उपमहाप्रबंधक राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति  पवन कुमार अग्रवाल, भारतीय स्टेट बैंक के महाप्रबंधक  निशंका रॉय सहित अन्य बैंक के अधिकारी उपस्थित हुये।

जारी क्रेडिट प्लान के अनुसार कुल वार्षिक ऋण योजना रुपए 5,00,856 करोड़ निर्धारित की गई है। जो गत वर्ष के लक्ष्य 4,19,110 करोड़ रूपए का 119.50 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए फार्म क्रेडिट के लिए 1,28,866 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य का 106.56 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 120.56 प्रतिशत अधिक है।

फसल ऋण (Crop Loan) का लक्ष्य रुपए 88,638 करोड़ रूपये रखा गया है, जो गत वर्ष के लक्ष्य का 101.22 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 122.36 प्रतिशत है। कुल कृषि क्षेत्र के लिए रुपए 1,65,117 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो गत वर्ष के लक्ष्य से 113.07 तथा उपलब्धि का 121.85 प्रतिशत है।

मध्यप्रदेश शासन की उद्योगोन्मुखी नीतियों को देखते हुए एमएसएमई क्षेत्र के लिए 1,62,967 करोड़ रुपए का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है जो पिछले वर्ष के लक्ष्य का 121.64 प्रतिशत तथा उपलब्धि का 120.90 प्रतिशत है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। इस क्षेत्र का लक्ष्य गत वर्ष के लक्ष्य की तुलना में 731.11 प्रतिशत तथा उपलब्धि की तुलना में 167.70 प्रतिशत बढ़ाया गया है। प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के लिए कुल 3,45,915 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो कुल वार्षिक ऋण योजना का लगभग 69 प्रतिशत है तथा गत वर्ष के लक्ष्य का 117.76 प्रतिशत एवं उपलब्धि का 121.58 प्रतिशत है।

बैठक में विश्वास व्यक्त किया गया कि समस्त बैंकों के साथ ही राज्य शासन के विभागों, भारतीय रिज़र्व बैंक, नाबार्ड तथा सभी संबंधित एजेंसियों के समन्वित प्रयास से वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान राज्य में समयबद्ध ऋण प्रवाह सुनिश्चित करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की जाएगी।

 

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