उद्यानिकी का विस्तार बनेगा कृषि वर्ष में किसानों की समृद्धि का आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश में कृषि एवं उससे जुड़ी संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक कार्य योजना पर अमल जारी हे। कृषि वर्ष में विशेष रूप से उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश में एक लाख 32 हजार 147 हैक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हमारा उद्देश्य किसानों को परंपरागत खेती के साथ अधिक लाभकारी उद्यानिकी गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करना है।

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना के अनुसार फल फसलों के क्षेत्र में 18 हजार हैक्टेयर, सब्जी उत्पादन में 54 हजार हैक्टेयर, मसाला फसलों में 56 हजार हैक्टेयर, पुष्प उत्पादन में 3 हजार 500 हैक्टेयर, औषधीय फसलों में 600 हैक्टेयर तथा संरक्षित खेती में 47 हैक्टेयर क्षेत्र वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश सरकार का मानना है कि बदलते कृषि परिदृश्य में उद्यानिकी फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष की अवधारणा को केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए पशुपालन, मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन तथा उद्यानिकी जैसी गतिविधियों को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया है। शासन की मंशा है कि खेती को बहुआयामी बनाकर किसानों को वर्षभर आय सृजन के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। इसी दिशा में उद्यानिकी विभाग किसानों को उन्नत पौध सामग्री, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, पॉली हाउस, शेडनेट तथा खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करा रहा है।

प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र की लगातार बढ़ती सफलता इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है। वर्ष 2022-23 में मध्यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों का कुल क्षेत्रफल 25 लाख 96 हजार 793 हैक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 28 लाख 60 हजार 952 हैक्टेयर तक पहुंच गया है। इसी प्रकार उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में लगभग 37 लाख 68 हजार 200 मीट्रिक टन की वृद्धि हुई है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की बढ़ती जागरूकता, आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश की भौगोलिक विविधता और अनुकूल जलवायु उद्यानिकी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड, महाकौशल और चंबल क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के फल, सब्जी और मसाला फसलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में आम, संतरा, अमरूद, पपीता, टमाटर, प्याज, लहसुन, धनिया और मिर्च जैसी फसलों की खेती किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।

केंद्र और राज्य की योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से प्रदेश में उद्यानिकी आधारित कृषि मॉडल को मजबूत आधार मिल रहा है। किसानों को बाजार, प्रसंस्करण और निर्यात से जोड़ने के प्रयास भी तेज किए गए हैं, ताकि उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

कृषि वर्ष 2026 के अंतर्गत उद्यानिकी फसलों के क्षेत्र विस्तार का यह अभियान केवल उत्पादन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन तथा कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में यह प्रयास मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी उद्यानिकी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एमपी की बेटी माही लामा का विश्व कप के लिए चयन, चीन में करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग एकेडमी की प्रतिभाशाली बॉक्सर माही लामा ने एनआईएस पटियाला में आयोजित असेसमेंट रैंकिंग ट्रायल में शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप के लिए भारतीय टीम में अपना स्थान सुनिश्चित किया है। 60 किलोग्राम भार वर्ग में माही ने 13 मई से 15 मई 2026 तक आयोजित ट्रायल्स में लगातार बेहतरीन जीत दर्ज कर चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया। अब वे 15 जून से 20 जून 2026 तक चीन के गुइयांग शहर में आयोजित होने वाले विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

शानदार प्रदर्शन के दम पर हासिल किया चयन

माही लामा ने अपने पहले मुकाबले में हरियाणा की विंका को 4:1 के अंतर से हराया। इसके बाद दूसरे मुकाबले में महाराष्ट्र की दिशा पाटिल के खिलाफ 5:0 से एकतरफा जीत दर्ज कर अपनी श्रेष्ठता साबित की। लगातार दो प्रभावशाली जीतों के साथ उन्होंने विश्व कप के लिए चयन सुनिश्चित किया।

प्रदेश और देश के लिए गौरव का क्षण

माही लामा की यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उन्होंने न केवल प्रदेश का नाम रोशन किया है, बल्कि देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा भी प्रस्तुत की है।

विश्व कप में दिखेगा भारतीय मुक्केबाजी का दम

चीन के गुइयांग शहर में आयोजित होने वाले विश्व कप में माही लामा भारतीय टीम की ओर से चुनौती पेश करेंगी। यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा और क्षमता साबित करने का बड़ा अवसर होगी।

कड़ी मेहनत और अनुशासन का परिणाम

माही की सफलता उनके निरंतर अभ्यास, अनुशासन और अकादमी में मिल रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने कठिन मुकाबलों में धैर्य और तकनीकी कौशल का शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया।

युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत

माही लामा की उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है। यह साबित करता है कि समर्पण, मेहनत और सही मार्गदर्शन के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है।

खेल मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्रीविश्वास कैलाश सारंग ने माही लामा को इस उपलब्धि पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

अकादमी की उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का परिणाम

मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को आधुनिक सुविधाएं, वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। माही लामा की यह सफलता प्रदेश की मजबूत खेल अधोसंरचना और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है।

 

 

उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने की अंतर्राज्यीय वन्यजीव मांस तस्कर की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज

भोपाल 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंड पीठ में गठित युगल पीठ ने स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में काला हिरण, चिंकारा, सांभर, चीतल आदि वन्यजीवों का शिकार कर उनके अवयवों की तस्करी मुंबई (महाराष्ट्र) तक करने वाले संगठित गिरोह के सरगना की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ख़ारिज कर दी है। याचिका की   सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि आरोपी द्वारा पूर्व में दायर धारा 439 सीआरपीसी के तहत जमानत आवेदन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी दो मृत काले हिरणों के साथ वीडियो क्लिप में पाया गया था तथा गिरफ्तारी की समस्त वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसलिए आरोपी की हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता और यह याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्रों में काला हिरण, चिंकारा, सांभर, चीतल आदि वन्यजीवों का शिकार कर उनके अवयवों की तस्करी मुंबई (महाराष्ट्र) तक करने वाले संगठित गिरोह के विरुद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 21 अगस्त 2025 को दर्ज किया गया था। प्रकरण की विवेचना में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ तथा वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह सामने आया कि गिरोह पिछले कई वर्षों से मध्यप्रदेश में आकर स्थानीय सदस्यों के साथ मिलकर वन्य जीवों का शिकार कर रहा था। एसटीएसएफ द्वारा इस गिरोह के कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 4 आरोपी महाराष्ट्र तथा 2 आरोपी मध्यप्रदेश के हैं।

गिरोह के सदस्य साहब अंतुले को 27 अक्टूबर 2025 को मुंबई (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, इंदौर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। आरोपी की जमानत याचिका इंदौर खंडपीठ द्वारा 26 फरवरी 2026 को निरस्त कर दी गई थी। आरोपी पिछले 6 माह से जेल में निरुद्ध है। आरोपी द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए इंदौर खंडपीठ की युगल पीठ के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। सुनवाई में न्यायालय ने कहा कि आरोपी द्वारा पूर्व में दायर धारा 439 सीआरपीसी के तहत जमानत आवेदन पहले ही निरस्त किया जा चुका है। न्यायालय ने यह भी माना कि आरोपी दो मृत काले हिरणों के साथ वीडियो क्लिप में पाया गया था तथा गिरफ्तारी की समस्त वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। इसलिए आरोपी की हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता और यह याचिका बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में स्वीकार्य नहीं है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता न्यायिक आदेश के तहत वैध हिरासत में है तथा इस मामले में बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट लागू नहीं होती। प्रकरण में प्रस्तुत साक्ष्यों एवं विवेचना के आधार पर न्यायालय ने आरोपी की याचिका निरस्त कर दी। 

ग्वालियर में 95 हजार उपभोक्ताओं पर बड़ा असर! गैस बुकिंग बंद होने की तैयारी, जानें वजह

ग्वालियर 

 शहर के हजारों रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चेतावनी सामने आई है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद जिन उपभोक्ताओं ने अब तक ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है, वे 31 मई 2026 के बाद एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पाएंगे। ग्वालियर में ऐसे उपभोक्ताओं की संख्या 95 हजार 143 तक पहुंच गई है।

आपूर्ति विभाग के अनुसार, ई केवाईसी का उद्देश्य फर्जी और डुप्लीकेट गैस कनेक्शनों पर रोक लगाना है। इसके जरिए यह सत्यापित किया जा रहा है कि उपभोक्ता जीवित है या नहीं और कहीं एक ही परिवार में नियमों के विरुद्ध एक से अधिक कनेक्शन तो संचालित नहीं हो रहे।

रिफिलिंग की सुविधा जारी रहेगी
सत्यापन पूरा होने के बाद ही उपभोक्ताओं को सब्सिडी और रिफिलिंग की सुविधा जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को कई बार मौका देने के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने प्रक्रिया पूरी नहीं कराई। अब ऐसे कनेक्शनों पर तकनीकी दिक्कतें शुरू हो गई हैं और समयसीमा निकलने के बाद पोर्टल से कनेक्शन ब्लॉक कर दिए जाएंगे। उपभोक्ता अपनी संबंधित गैस एजेंसी पर आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट के जरिए ई-केवाईसी करा सकते हैं। मोबाइल ऐप के माध्यम से भी यह सुविधा उपलब्ध है।

3 लाख 73 हजार 162 हैं गैस कनेक्शन
शहर में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के कुल 3 लाख 73 हजार 162 गैस कनेक्शन हैं, जिनमें से 95 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की ई-केवाईसी लंबित है। इधर, शहर में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क का विस्तार होने के बावजूद लोग एलपीजी पर ही अधिक निर्भर बने हुए हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी कमर्शियल पीएनजी कनेक्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ पाए हैं।

अब सिर्फ अंतिम मौका
31 मई तक ई केवाईसी कराना अनिवार्य है। जिन उपभोक्ताओं की ई केवाईसी नहीं हुई है, उनकी बुकिंग बंद हो जाएगी। ये अंतिम मौका दिया गया है। – अरविंद भदौरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक

35 दिन’ बाद मिलेगा LPG गैस सिलेंडर
ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब शहर की रसोई तक पहुंचने लगा है। गैस संकट की आशंका के बीच घरेलू उपभोक्ताओं ने सिलेंडर की एडवांस बुकिंग बढ़ा दी है। लोग घर में एक भी खाली सिलेंडर नहीं रखना चाहते, जिसके चलते गैस एजेंसियों पर दबाव अचानक बढ़ गया है। स्थिति यह है कि जहां पहले घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी 28 दिन में हो जाती थी, वहीं अब उपभोक्ताओं को 33 से 35 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। शहर में इस समय 15 हजार से अधिक उपभोक्ता सिलेंडर की वेटिंग में बताए जा रहे है।

शादियों में भी घटा कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग
गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार पहले शादी समारोहों के लिए कमर्शियल सिलेंडर की मांग अधिक रहती थी और लोग कार्ड के साथ आवेदन करते थे। अब महंगे दामों के कारण ऐसे आवेदन कम हो गए हैं।

भोपाल को मिलेगा 35.611 किमी लंबा वेस्टर्न बायपास, लेकिन कटेंगे 3200 बड़े पेड़

भोपाल 

भोपाल शहर में अभी अरेरा हिल्स की 45 साल पुरानी हरियाली में से 2000 पेड़ों को हटाने का मामला अभी ही रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी 45 हेक्टेयर वनक्षेत्र में से 3200 बड़े व दस हजार छोटे झाड़-झाड़ियों को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट में ये हरियाली खत्म करने की पटकथा लिख दी गई है।

हालांकि इसके विरोध में आवाजें उठी और सरकार के पास 40 शिकायतें पहुंच गई है। स्थानीय लोगों का दबाव भी है और अब फिर डिजाइन बदलने पर विचार शुरू हो गया है। खासतौर पर समसगढ़ और इससे लगे क्षेत्र में वन व कैचमेंट को बचाने आवाज तेज हुई है।

भानपुर केकड़िया से फंदा कलां तक कटेंगे पेड़
जबलपुर राजमार्ग स्थित भानपुर पश्चिम बायपास चार लेन पेव्हड शोल्डर प्रोजेक्ट है। भोपाल केकडिया से शुरू होकर भोपाल देवास मार्ग स्टेट हाईवे 28 के फंदा कलां पर जुड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग 45 व 46 से आंकर इंदौर की ओर जाने वाले भारी वाहन शहरी क्षेत्र में प्रवेश किए बिना आवागमन कर सकेंगे। इसकी लंबाई 35.611 किमी. प्रस्तावित है। बायपास एक लेन पांच किमी लंबाई में वनक्षेत्र है। यहां सात स्थानों पर 610 मीटर लंबाई में वायडक्ट बनाया जाएगा, ताकि वन्यजीव ट्रैफिक से उलझे बिना निकल जाएं। वनक्षेत्र मार्ग निर्माण में 45 हेक्टेयर भूमि के साथ 3200 पेड़ प्रभावित होंगे।

ऐसे समझें ग्रामवार जमीन व पेड़

-हेक्टयर निजी भूमि जबकि 7.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। भू अर्जन में चार भवन व 35 पेड़ प्रभावित होंगे।

-भानपुर केकड़िया में 8.45 हेक्टेयर निजी व 8.38 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित।

-झागरिया खुर्द में 19.30 हेक्टेयर निजी जबकि 2.11 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। यहां आठ भवन व 40 पेड़ हटेंगे।

-फंदा कलां में बड़ा तालाब वेटलैंड में पानी पहुंचाने वाले नाले हैं। यहां नालों पर ब्रिज व कल्वर्ट बनाना प्रस्तावित ।

-फंदाखुर्द में 1.75 हेक्टेयर निजी भूमि व 0.20 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां 20 पेड़ प्रभावित होंगे।

-सरवर में 2.04 हेक्टेयर निजी व 0.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां एक भवन हटेगा।

-समसपुरा में 7.02 हेक्टेयर निजी भूमि व 3.43 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां तीन भवन व 54 पेड़ हटेंगे।

-पिपलिया धाकड़ में 6.62 हेक्टेयर निजी भूमि व 1.01 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। एक भवन व 23 पेड़ हटेंगे।

-थुआखेड़ा में 12.1284 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।

-नरेला में 12.89 हेक्टेयर निजी व 0.65 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 150 पेड़ हटेंगे।

-मूंडला में 12.40 हेक्टेयर निजी व 0.75 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 70 पेड़ हटेंगे।

-आंवला में 15.28 हेक्टेयर निजी व 0.34 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। चार भवन व 50 पेड़ हटेंगे।

-हताईखेड़ी में 3.85 हेक्टेयर निजी व 0.22 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। 50 पेड़ हटेंगे।

-जाटखेड़ी में 7.72 निजी व 0.91 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित।

पश्चिम बायपास में वन व कैचमेंट का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा। पहले की डिजाइन में कम था। इसे पूरी तरह से वन व कैचमेंट से दूर करना चाहिए। हमने शिकायतें की है। मामले में कोर्ट में भी ले जाएंगे। – राशीदनूर खान, पर्यावरण एक्टिविस्ट

 

सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, डिजिटल तकनीक से मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, डिजिटल तकनीक से मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा मध्यप्रदेश
लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान किया तैयार
जीआईएस आधारित लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप किया गया विकसित

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेजी से एक नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” की परिकल्पना को मध्यप्रदेश साकार कर रहा है। प्रदेश में अभूतपूर्व गति से सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सार्वजनिक अधोसंरचना निर्माण हो रहा है। लोक निर्माण विभाग ने “लोक निर्माण से लोक कल्याण” को अपना मूल मंत्र बनाकर विकास को सीधे जनता की सुविधा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देशभर में सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार हुआ है। प्रदेश में सड़क संपर्क, शहरी यातायात, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

वैज्ञानिक तरीके से तैयार हो रहा सड़क नेटवर्क

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सड़क श्रेणियों के पुनर्गठन तथा रोड नेटवर्क रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिससे सड़क निर्माण और रखरखाव की प्राथमिकताएँ अधिक स्पष्ट हुई हैं। विभाग द्वारा “लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप” विकसित किया गया है। यह ऐप GIS आधारित तकनीक पर कार्य करता है और इसके माध्यम से प्रदेश में 71 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों, लगभग 3 हजार भवनों तथा 1400 से अधिक पुलों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस सर्वेक्षण से विभाग को अधोसंरचना की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर योजनाएँ अधिक सटीक और व्यावहारिक तरीके से तैयार की जा रही हैं।

रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से बेहतर कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है। मास्टर प्लान के अंतर्गत शहरों के लिए बायपास मार्ग, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतर सड़क संपर्क, जिला मुख्यालयों के बीच तेज कनेक्टिविटी तथा यातायात दबाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा दूरी और समय कम करने के उद्देश्य से 6 नए ग्रीनफील्ड सड़क मार्गों की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन क्षेत्रों को नई गति मिलने की संभावना है।

जीआईएस आधारित डिजिटल बजट प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के अनुरूप लोक निर्माण विभाग ने जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल लागू किया है। इस प्रणाली से प्रत्येक सड़क प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर दर्ज किया जाता है। इससे यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित सड़क पहले से किसी अन्य योजना में शामिल है या नहीं। इस व्यवस्था ने योजनाओं में दोहराव को समाप्त करने के साथ विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है।

लोकपथ 2.0 : नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल सुविधा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित “लोकपथ” ऐप को अब उन्नत स्वरूप में “लोकपथ 2.0” के रूप में विकसित किया गया है। यह ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल गाइड की तरह कार्य कर रहा है। इस ऐप में रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल एवं पेट्रोल पंप की लोकेशन, एसओएस सुविधा और सड़क दुर्घटना संभावित स्थानों की चेतावनी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ऐप ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिल रही है।

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था, 25 ठेकेदार किये गये ब्लैक लिस्टेड

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया तथा कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) लागू किया जा रहा है। इससे योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ अधोसंरचना विकास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से निर्मित गड्ढों को “लोक कल्याण सरोवर” के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार किए जा चुके हैं और 600 नए सरोवर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सड़क किनारे भूजल रिचार्ज व्यवस्था, फ्लाई-ओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तथा ग्रीन बिल्डिंग निर्माण जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा शासकीय भवनों को ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

तेजी से आगे बढ़ रहा सड़क और पुल निर्माण कार्य

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 77 हजार किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में विभाग द्वारा 11,632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं मजबूतीकरण, 5,741 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 190 पुल एवं फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में 16,954 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य तथा 531 पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम होगा तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड परियोजनाओं से मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर कनेक्टिविटी विस्तार के लिए 6 प्रमुख विकास पथ (एक्सप्रेसवे) परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में रिंग रोड परियोजनाओं पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद शहरों में यातायात दबाव कम होगा, यात्रा समय घटेगा और औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी।

NHAI के साथ लगभग 1 लाख करोड़ का समझौता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में अधोसंरचना विकास को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का समझौता किया गया है। इनमें से 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है तथा कई परियोजनाओं पर निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। इन परियोजनाओं से मध्यप्रदेश देश के प्रमुख आर्थिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर से अधिक प्रभावी रूप से जुड़ सकेगा।

विकसित मध्यप्रदेश की दिशा में मजबूत कदम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की विकासोन्मुखी सोच से मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर अधोसंरचना विकास की नई कहानी लिख रहा है।

“लोक निर्माण से लोक कल्याण” की अवधारणा को केंद्र में रखकर प्रदेश में सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और सार्वजनिक अधोसंरचना निर्माण के माध्यम से आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह विकास यात्रा मध्यप्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार सिद्ध होगी।

 

धार भोजशाला से ज्ञानवापी तक, देशभर में कहां-कहां चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद? देखें पूरी लिस्ट

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मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला के संबंध में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को बड़ी राहत दी है. कोर्ट का यह मानना है कि भोजशाला मूल रूप से एक मंदिर है. भोजशाला कमाल मौला मस्जिद विवाद की सुनवाई हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के सामने हुई. इसने पूरे भारत में चल रहे कई मंदिर मस्जिद के  विवादों पर राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर से तेज कर दिया है. बीते कुछ सालों में देशभर की अदालतों में ऐसी याचिकाओं में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है जिनमें हिंदू संगठन और याचिकाकर्ताओं ने यह दावा किया है कि प्राचीन मंदिरों को तोड़कर कथित तौर पर मस्जिद या फिर दरगाह बनाई गई थीं. आइए जानते हैं उन सभी विवादों के बारे में। 

ज्ञानवापी मस्जिद मामला 
   धार भोजशाला को कोर्ट ने मंदिर माना, हिंदू पक्ष को मिली राहत।
    ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में ASI सर्वे, पूजा की अनुमति मिली।
    मथुरा कृष्ण जन्मभूमि, संभल-लखनऊ मस्जिद पर भी चल रहे विवाद।
    पूजा स्थल अधिनियम 1991 इन मामलों में बड़ी कानूनी बाधा।
    अजमेर दरगाह, कुतुब मीनार पर भी हिंदू मंदिरों पर निर्माण के दावे।

इस समय चल रहे सबसे चर्चित विवादों में से एक वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा है. हिंदू पक्ष का यह कहना है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ दिया गया था और उसके बाद उसी जगह पर मस्जिद बनाई गई थी। 

यह मामला तब और तेज हो गया जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक सर्वे में कथित तौर पर मस्जिद परिसर के नीचे एक बड़े हिंदू मंदिर से जुड़े अवशेष, खंभे, नक्काशी और ढांचागत सबूत मिले. अदालत ने परिसर के अंदर व्यास जी का तहखाना क्षेत्र में हिंदू पूजा पाठ की भी अनुमति दे दी है. इससे यह विवाद इस समय न्यायपालिका के सामने मौजूद सबसे संवेदनशील धार्मिक मामलों में से एक बन गया है। 

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि 
एक और बड़ी कानूनी लड़ाई श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद के आसपास चल रही है. याचिकाकर्ताओं का यह दावा है कि ईदगाह का निर्माण प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़ने के बाद किया गया था. इसे भगवान कृष्ण का जन्म स्थान माना जाता है. मस्जिद के ढांचे को हटाने और उस जगह का वैज्ञानिक सर्वे करने की मांग वाली कई याचिका इस समय इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित हैं. अयोध्या और ज्ञानवापी के बाद यह मामला सबसे बड़े धार्मिक संपत्ति विवादों में से एक बनकर उभरा है। 

संभल और लखनऊ मस्जिद विवाद 
शाही जामा मस्जिद विवाद भी तब विवादों में आ गया जब यह दावा सामने आया की मस्जिद का निर्माण श्री हरिहर मंदिर के ऊपर किया गया था. यह मंदिर कल्कि पूजा परंपराओं से जुड़ा है. एक स्थानीय अदालत के आदेश के बाद एक एडवोकेट कमिश्नर ने मस्जिद परिसर का सर्वे किया. इस पर मुस्लिम पक्ष ने कड़ा विरोध जताया। 

इसी तरह टीला वाली मस्जिद के मामले में भी कानूनी कार्रवाई चल रही है. हिंदू याचिकाकर्ताओं का यह तर्क है कि यह ढांचा लक्ष्मण टीला पर स्थित प्राचीन शेषनागेश्वर तिलेश्वर महादेव मंदिर के ऊपर बना है. वैज्ञानिक सर्वे और मंदिर की बहाली की मांग वाली याचिकाएं अभी विचाराधीन हैं। 

अजमेर दरगाह और कुतुब मीनार का मामला 
राजस्थान में अजमेर शरीफ दरगाह और उसके पास स्थित अढ़ाई दिन का झोपड़ा को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं. हिंदू संगठनों का यह दावा है कि इन ढांचों का निर्माण प्राचीन हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परिसरों को तोड़कर किया गया था और वह भगवान शिव की पूजा और संस्कृत शिक्षा से जुड़े थे। 

इसी के साथ दिल्ली में कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद से जुड़ी याचिकाएं लगातार कानूनी ध्यान आकर्षित कर रही हैं. याचिकाकर्ता अक्सर उन शिलालेखों का हवाला देते हैं जिनमें कथित तौर पर यह जिक्र है कि मस्जिद के निर्माण में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। 

क्या है सबसे बड़ी कानूनी बाधा? 
इन सब मामलों में पूजा स्थल अधिनियम 1991 सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. यह कानून किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है, जैसा कि वह 15 अगस्त 1947 को मौजूद था. हालांकि अदालतें इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या विवादित धार्मिक ढांचे के ऐतिहासिक स्वरूप का सर्वे और जांच करना इस अधिनियम के तहत कानूनी रूप से लीगल है या फिर नहीं। 

प्रदेश एवं देश तेजी से ग्रीन एनर्जी की दिशा में बढ़ रहे हैं आगे : मंत्रीशुक्ला

भोपाल 

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रीराकेश शुक्ला ने कहा हैं कि प्रदेश एवं देश तेजी से ग्रीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाला समय सौर ऊर्जा का है। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा न केवल बिजली व्यय को कम करने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मंत्रीशुक्ला शुक्रवार को भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय “सोलर एक्सपो 2026” के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।

मंत्रीशुक्ला ने सोलर एक्सपो में नागरिकों से स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा के रूप में सौर ऊर्जा को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने एक्सपो में ऊर्जा विकास निगम सहित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर पीएम सूर्य घर योजना सहित अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा वेंडर्स से संवाद किया। एक्सपो में बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता कर सौर ऊर्जा तकनीकों, बिजली बचत के उपायों एवं शासकीय योजनाओं के संबंध में जानकारी हासिल की।एक्सपो का उद्देश्य नागरिकों में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

भोपाल में आयोजित 3 दिवसीय सोलर एक्सपो में सौर ऊर्जा से संबंधित नवीन तकनीकों, उपकरणों एवं शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई।

 

जब पानी घर पहुंचा, तब बदली ग्राम कंधारी की तस्वीर

जब पानी घर पहुंचा, तब बदली ग्राम कंधारी की तस्वीर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल जीवन मिशन बना ग्रामीण बदलाव का आधार

मंत्री  उइके के मार्गदर्शन में बसई समूह जल प्रदाय योजना से बदला हजारों लोगों का जीवन

भोपाल

कभी पानी के लिए घंटों इंतजार, हैंडपंपों पर लंबी कतारें और दूर-दूर तक बर्तनों के साथ पानी की तलाश में जाती महिलाएं ग्राम कंधारी की पहचान हुआ करती थीं। गर्मी का मौसम आते ही गांव में पेयजल संकट और गहरा जाता था। कई परिवारों का पूरा दिन पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और महिलाओं की दिनचर्या ही बदल जाती थी। आज वही ग्राम कंधारी बदलती ग्रामीण तस्वीर का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां घर-घर पहुंचता शुद्ध पेयजल लोगों के जीवन में सहजता, सम्मान और विश्वास लेकर आया है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना को जनजीवन से जोड़ते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है, जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों के जीवन पर दिखाई दे। जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित बसई समूह जल प्रदाय योजना ने दतिया जिले के ग्राम कंधारी सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में इसी परिवर्तन को वास्तविक रूप दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के सतत मार्गदर्शन और नियमित मॉनिटरिंग के कारण योजना का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले परिवारों तक पहुंच रहा है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजनाओं की गुणवत्ता और नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आया है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की स्थिति मजबूत हुई है।

बसई समूह जल प्रदाय योजना लगभग 52.26 करोड़ रूपये की लागत से विकसित की गई। योजना के माध्यम से दतिया एवं भांडेर क्षेत्र के 32 गांवों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। योजना के क्रियान्वयन के बाद ग्राम कंधारी में हर घर नल कनेक्शन के जरिए नियमित जल आपूर्ति शुरू हुई, जिससे ग्रामीण जीवन की पूरी तस्वीर बदल गई।

करीब 352 परिवारों वाले ग्राम कंधारी में पहले पेयजल की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में सीमित हैंडपंप होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार महिलाओं और बच्चों को दूरस्थ स्थानों तक जाकर पानी लाना पड़ता था। पानी की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती थीं। गांव के लोगों के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि रोजाना संघर्ष का विषय था।

योजना शुरू होने के बाद गांव में बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला। अब घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले जहां दिन का अधिकतम समय पानी जुटाने में निकल जाता था, वहीं अब वे परिवार और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी राहत मिली है और उनको पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति बेहतर हुई है तथा जलजनित बीमारियों में कमी आई है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में यह बदलाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है।

ग्राम कंधारी की यह कहानी केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर है, जहां विकास योजनाएं आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों तक पहुंच रहा शुद्ध पेयजल अब ग्रामीण सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई पहचान बन चुका है।

 

मध्यप्रदेश में कुटीर और ग्रामोद्योग को मिलेगी नई उड़ान, खादी-हथकरघा और महिला रोजगार पर फोकस

कुटीर और ग्रामोद्योग को नए आयाम देने की तैयारी में मध्यप्रदेश

हथकरघा, खादी, रेशम और महिला रोजगार पर विशेष फोकस

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार अब कुटीर एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को रोजगार, नवाचार और बाजार से जोड़कर नया स्वरूप देने जा रही है। पारंपरिक शिल्प को आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ाने और ग्रामीण कारीगरों को बेहतर आय और पहचान दिलाने के लिये निरंतर कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की पहचान महेश्वरी, चंदेरी, खादी और रेशम जैसे उत्पादों को सिर्फ संरक्षित ही नहीं, बल्कि विस्तारित और प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश

हथकरघा क्लस्टर का विस्तार : महेश्वरी और चंदेरी की सफलता को देखते हुए प्रदेश के अन्य जिलों में भी नए हथकरघा क्लस्टर चिन्हित कर विकसित किए जाएंगे।

खादी उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा: पुराने कॉटन मिल क्षेत्रों और पारंपरिक बुनाई वाले इलाकों को जोड़कर खादी उत्पादन की नई योजना बनेगी। इसका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय रोजगार सृजित करना है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर: लूम और चरखा प्रदाय योजना को महिला एवं बाल विकास तथा कृषि विभाग के साथ जोड़कर रोजगारपरक बनाया जाएगा। रेशम उत्पादन को लखपति दीदियों से जोड़ने का लक्ष्य है।

ब्रांड आउटलेट का विस्तार : मृगनयनी, कबीरा और विंध्यावैली जैसे ब्रांड के एम्पोरियम अब फ्रेंचाइजी मॉडल पर अन्य जिलों में खुलेंगे। पर्यटन निगम के साथ मिलकर प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आउटलेट स्थापित किए जाएंगे।

धार्मिक और सांस्कृतिक उत्पादों को बढ़ावा: धार्मिक स्थानों के लिए गुणवत्तापूर्ण पूजन सामग्री के उत्पादन और विक्रय को अनुदान और बैंक ऋण आधारित योजना से जोड़ा जाएगा।

नवाचार और युवा जुड़ाव: इंदौर की साड़ी वॉकथॉन की तर्ज पर उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर में आयोजन होंगे। साड़ी पहनावे को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कार योजना भी शुरू होगी।

रेशम और सिल्क टेक पार्क का विस्तार: ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन में “प्राकृत” रेशम शोरूम खुलेंगे। पचमढ़ी के सिल्क टेक पार्क की तर्ज पर रातापानी और अमरकंटक में भी संभावनाएं तलाशी जाएंगी।

ग्रामोद्योग इकाइयों को एमएसएमई से जोड़ना: ग्रामोद्योग इकाइयों की स्थापना के लिए एमएसएमई विभाग की उद्यम क्रांति योजना के तहत लक्ष्य और आवंटन सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन अनुसार कुटीर और ग्रामोद्योग सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का आधार है।

 

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