NEET UG Re-Exam को लेकर NTA की नई गाइडलाइन जारी, नए छात्रों की एंट्री पर रोक

भोपाल.

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने NEET UG री-एग्जाम और परीक्षा शुल्क रिफंड को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एजेंसी के अनुसार री-एग्जाम 21 जून को दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस बार परीक्षा अवधि में 15 मिनट का अतिरिक्त समय जोड़ा गया है। पहले परीक्षा शाम 5:00 बजे तक समाप्त होती थी, लेकिन अब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और अन्य औपचारिकताओं के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

परीक्षा के लिए नहीं देनी होगी अतिरिक्त फीस
NTA ने स्पष्ट किया है कि री-एग्जाम में शामिल होने वाले उम्मीदवारों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी और दोबारा परीक्षा के लिए भी कोई फीस नहीं देनी होगी। इस तरह री-एग्जाम उम्मीदवारों के लिए पूरी तरह निशुल्क रहेगा।

27 मई तक जमा करनी होगी बैंक डिटेल्स
परीक्षा शुल्क का रिफंड प्राप्त करने के लिए उम्मीदवारों को NTA के पोर्टल पर अपनी बैंक जानकारी जमा करनी होगी। इसके लिए एजेंसी ने ऑनलाइन सुविधा शुरू की है। उम्मीदवार लॉगिन आईडी और पासवर्ड की मदद से पोर्टल पर लॉगिन कर ‘रिफंड लिंक’ के माध्यम से अपनी बैंक डिटेल्स भर सकते हैं। बैंक डिटेल्स में खाताधारक का नाम, बैंक का नाम, अकाउंट नंबर और IFSC कोड दर्ज करना अनिवार्य होगा। उम्मीदवार चाहें तो कैंसिल चेक की स्कैन कॉपी भी अपलोड कर सकते हैं। हालांकि यह वैकल्पिक रखा गया है। NTA ने साफ किया है कि एक बार जानकारी सबमिट होने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। बैंक डिटेल्स जमा करने की अंतिम तिथि 27 मई निर्धारित की गई है।

नए उम्मीदवार नहीं भर सकेंगे फॉर्म
NTA के अनुसार री-नीट परीक्षा केवल उन्हीं उम्मीदवारों के लिए आयोजित की जा रही है जिन्होंने पहले आवेदन किया था। नए अभ्यर्थियों को आवेदन करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही उम्मीदवार अपने चुने गए परीक्षा माध्यम में भी कोई बदलाव नहीं कर पाएंगे।

सभी उम्मीदवारों को मिलेगा फीस रिफंड
एजेंसी ने कहा है कि रद्द हुई परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों को फीस रिफंड दिया जाएगा, चाहे वे री-एग्जाम में शामिल हों या नहीं। हालांकि रिफंड पाने के लिए पोर्टल पर बैंक जानकारी देना अनिवार्य होगा।

परीक्षा केंद्र और शिकायत प्रक्रिया
NTA के मुताबिक री-एग्जाम के लिए पहले वाला परीक्षा केंद्र मिलना जरूरी नहीं है। परीक्षा केंद्र उम्मीदवारों द्वारा चुने गए शहरों के आधार पर रैंडम तरीके से आवंटित किए जाएंगे। उम्मीदवार अपने वर्तमान पते को अपडेट कर परीक्षा केंद्र के लिए दो शहरों का विकल्प चुन सकते हैं। एग्जाम सेंटर से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए उम्मीदवार सबूतों के साथ NTA की आधिकारिक हेल्पडेस्क ईमेल neetug2026@nta.ac.in पर संपर्क कर सकते हैं।

मन की शांति ही तन का योग सादृश्य…यही है आर्ट ऑफ लिविंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मन की शांति ही तन का योग सादृश्य…यही है आर्ट ऑफ लिविंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

रविशंकर जी का 70वां जन्मोत्सव
प्रदेशवासियों की ओर से रविशंकर के लिए जन्मोत्सव की मंगलकामनाएं लेकर
स्वयं उदयपुरा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. यादव
के जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के स्थापना दिवस समारोह में हुए शामिल

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमने कभी दुनिया को हथियारों के बल पर जीतने की चेष्ठा नहीं की। हमने विश्वशक्ति नहीं, विश्वगुरु बनने का मार्ग चुना है। हमने हमेशा सबके सुख की कामना की है और वैश्विक कल्याण का नारा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की शांति ही तन के योग सादृश्य है। जब मन शांत होता है, तभी शरीर सही संतुलन, स्वास्थ्य और सामंजस्य में रहता है। यही आर्ट ऑफ लिविंग है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ हमारी संस्कृति का मूल है और रविशंकर जी इसी संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित कर रहे हैं। ने दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को तनाव से मुक्ति दिलाकर शांत, स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग दिखाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को कर्नाटक राज्य में आर्ट ऑफ लिविंग के इंटरनेशनल सेन्टर, उदयपुरा, बैंगलुरू में रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने रविशंकर से कहा कि वे मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से उन्हें जन्मोत्सव की अनंत और अशेष मंगलकामनाएं देने स्वयं यहां (उदयपुरा) आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 7 दशक की की ऊर्जा और करुणा इस व्यस्त और ऊथल पुथल के दौर में भी हर दिन नई और चिरयुवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इस विश्व को की देन है। यह सेवा, साधना और शांति का परम संगम है। आर्ट ऑफ लिविंग पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गये निष्काम कर्मयोग और जीवन को एक उत्सव की तरह जीने की कला का सहज मार्ग है, एक नव वैश्विक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग सिर्फ जीवन जीने की कला नहीं, जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने योग, प्राणायाम, ध्यान और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से जोड़कर लोगों को आत्मिक शांति प्रदान की है। करीब एक माह का यह आर्ट ऑफ लिविंग वैश्विक सम्मेलन वास्तव में मानवता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां मन शांत होता है, वहीं समाज भी समृद्ध होता है। मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग आध्यात्मिक संगठन को वैश्विक पुनीत सामाजिक कार्यों के लिए बधाई देते हुए कहा कि आप सब भारत की ध्यान, योग, साधना, मेडिटेशन, सुदर्शन क्रिया जैसी प्राचीन आध्यात्मिक परम्पराओं को पुनर्जीवित कर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का भी उत्थान कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र, बेंगलुरु आकर देवलोक जैसा आनंद प्राप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति में भाषाओं का गुलदस्ता है। भाषा कोई भी हो, लेकिन चेहरे के भाव से ही बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। गुजरात के सोमनाथ में गुरूदेव के आशीर्वाद से सोमनाथ उत्सव भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रत्येक सांस के साथ जीवन और मृत्यु साथ-साथ चलती है। दोनों परमपिता परमात्मा के हाथ में है। श्रीरविशंकर जी ने 70वें जन्मदिन के अवसर पर 20 दिवसीय उत्सव मनाने का निर्णय लिया है। संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु स्वयं से साक्षात्कार करने के लिए बेंगलुरु स्थित इस केंद्र में आते हैं। हमारी संस्कृति में हमारे गुरु ही हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। हमारा जीवन यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे यानी जैसा पिंड है, वैसा ही ब्रह्मांड है की अवधारणा पर चलता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य का भोजन तीन प्रकार का है। बगैर भोजन के 30 दिन तक जीवित रह सकते हैं। पानी हमें 7 दिन तक जिंदा रख सकता है। गुरुदेव ने हमें प्राण से परमानंद और परमानंद से परमात्मा की ओर जाने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसारिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य का जीवन नियत है। हमारा यह जीवन ऊर्जा और चेतना के साथ प्रकृति से भी जुड़ा रहे, इसके लिए के सभी सामाजिक सेवा प्रकल्प विशेष महत्व रखते हैं। बेंगलुरु के इस आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र में हमें सांस्कृतिक चेतना और शांति का मार्ग प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के जय घोष के साथ गुरुदेव रविशंकर जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सह्स्त्रायु को प्राप्त हों और दीर्घकाल तक हम सबके जीवन का मार्गदर्शन करते रहें।

कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। न्यूज फर्स्ट मीडिया हाऊस के सीईओ एस. रवि कुमार एवं टीवी 9 के वरिष्ठ एंकर रंगनाथ भारद्वाज ने कन्नड़ भाषा में दिये संबोधन में कहा कि गुरुदेव रविशंकर विश्व शांति के दूत हैं। आपने पूरे विश्व के लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग के साथ-साथ आर्ट ऑफ लविंग भी सिखाया है।

कार्यक्रम में तेलंगाना राज्य के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला, श्रीमती जानकी शुक्ला, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी, उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह, फिल्म अभिनेता जैकी श्राफ, एशियन पेंट के मालिक जलस दानी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। 

सूरज दूर होने के बावजूद धरती पर क्यों बढ़ रही गर्मी? जानिए नौतपा और हीटवेव का असली विज्ञान

 भोपाल 
मई का आखिरी हफ्ता शुरू होने वाला है और जून बस आने वाला है. इसी के साथ पूरे देश में गर्मी आग उगल रही है. दोपहर में सड़कें तवे जैसी जल रही है और घरों की दीवारें भी भट्टी की तरह तप रही है. ये हाल तब है जब नौतपा नहीं आया है. नौतपा देश में 25 मई से 2 जून के बीच पड़ने वाला है. ऐसे में एक सवाल हर किसी के मन में आ रहा है कि आखिर नौतपा से पहले और नौतपा के समय इतनी गर्मी क्यों पड़ती है. दिलचस्प बात यह है कि इस समय पृथ्वी सूरज के सबसे करीब नहीं बल्कि उससे काफी दूर होती है. फिर भी भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के देशों में नौतपा के दौरान तापमान 45 से 48 डिग्री तक पहुंच जाता है. तो आइए जानते हैं इस खबर में पूरा खेल। 

लोग मानते हैं कि इस दौरान शायद सूरज धरती के ज्यादा करीब आ जाता है, लेकिन असल वजह कुछ और ही है. वैज्ञानिकों और ज्योतिष दोनों के अनुसार यह समय प्रकृति के सबसे शक्तिशाली चक्रों में से एक माना जाता है. यही वजह है कि नौतपा शुरू होने से पहले ही देश के कई हिस्से भट्टी की तरह तपने लगे हैं और नौतपा के दौरान भीषण गर्मी पड़ती है। 

दरअसल गर्मी की असली वजह सूरज और धरती के बीच की दूरी नहीं बल्कि पृथ्वी का झुकाव है. नौतपा के दौरान पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब 23.5 डिग्री झुकी हुई होती है. मई और जून के दौरान उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर झुक जाता है. इससे सूर्य की किरणें भारत पर सीधे और लंबवत पड़ती हैं. जब किरणें सीधी पड़ती हैं तो ज्यादा ऊर्जा एक छोटे हिस्से पर जमा होती है और तापमान तेजी से बढ़ जाता है. यही कारण है कि जनवरी में सूरज अपेक्षाकृत करीब होने के बावजूद ठंड रहती है, क्योंकि तब किरणें तिरछी पड़ती हैं. नौतपा के दौरान यही सीधी धूप धरती को सबसे ज्यादा गर्म करती है। 

नौतपा का संबंध ज्योतिष में रोहिणी नक्षत्र से भी माना जाता है. मान्यता है कि जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो पृथ्वी पर गर्मी चरम पर पहुंच जाती है. इस साल 25 मई से 2 जून तक नौतपा रहने वाला है. मौसम विभाग (IMD) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हीटवेव का असर और बढ़ सकता है. कई शहरों में रात का तापमान भी 30 डिग्री से ऊपर बना रहेगा. यानी लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी. डॉक्टरों ने दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप से बचने की सलाह दी है। 

वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो नौतपा मानसून की तैयारी का भी अहम हिस्सा है. तेज गर्मी समुद्र से ज्यादा नमी खींचती है. यही नमी बाद में मानसूनी बारिश का आधार बनती है. मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि अगर नौतपा के दौरान अच्छी गर्मी पड़े तो मानसून मजबूत हो सकता है. यही कारण है कि किसान भी नौतपा को बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी कहा जाता है कि ‘जितना तपेगा नौतपा, उतना बरसेगा सावन.’ हालांकि अत्यधिक गर्मी लोगों के लिए परेशानी भी बन जाती है और बिजली-पानी की मांग अचानक बढ़ जाती है। 

इन दिनों उत्तर भारत के शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. दिल्ली में गर्म हवाएं और कंक्रीट की इमारतें तापमान को और बढ़ा रही हैं. राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके तो मानो आग उगल रहे हैं. कई जगहों पर सड़कें पिघलने जैसी स्थिति बन गई है. वहीं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के शहरों में भी लू का असर लगातार बढ़ रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में कुछ हिस्सों में धूल भरी आंधी और हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन उससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। 

गर्मी से बचाव इस समय सबसे जरूरी है. डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में पानी की कमी सबसे बड़ा खतरा बन सकती है. ऐसे में ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. ORS, नींबू पानी और छाछ जैसे पेय शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनने चाहिए और धूप में निकलते समय सिर ढकना जरूरी है. बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उन पर हीट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा रहता है। 

नौतपा सिर्फ मौसम नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का भी हिस्सा है. कई जगहों पर सूर्य पूजा की परंपरा निभाई जाती है. लोग जल दान और अन्न दान करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. हालांकि वैज्ञानिकों के लिए यह पृथ्वी, सूर्य और मौसम के बीच संतुलन का एक अद्भुत उदाहरण है. यही समय हमें प्रकृति की असली ताकत का एहसास भी कराता है। 

आखिर में समझने वाली सबसे बड़ी बात यही है कि गर्मी का कारण सूरज का पास आना नहीं बल्कि पृथ्वी का झुकाव और सूर्य की सीधी किरणें हैं. नौतपा इस प्रभाव को और ज्यादा तीव्र बना देता है. इसलिए आने वाले दिनों में सावधानी बेहद जरूरी है. क्योंकि तपती धरती के बाद ही मानसून की राहत मिलने वाली है। 

मुरैना के डायल-112 हीरोज ट्रक दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 02 व्यक्तियों को त्वरित सहायता से पहुँचाया अस्पताल

भोपाल 

मुरैना जिले के थाना कैलारस क्षेत्र में डायल-112 जवानों की तत्पर एवं संवेदनशील कार्रवाई से ट्रक के अनियंत्रित होकर पलटने से घायल दो व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर उपचार उपलब्ध कराया गया। इस त्वरित कार्रवाई से घायलों को शीघ्र चिकित्सकीय सहायता मिल सकी।

23 मई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कैलारस क्षेत्र अंतर्गत निरार शीतलापुरी के पास एक ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गया है, जिसमें 02 व्यक्ति घायल हो गए हैं एवं तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कैलारस थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक  विजय पाल गुर्जर एवं पायलट  मनोज धाकड़ ने पाया कि ट्रक अनियंत्रित होकर पलट जाने से दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

डायल-112 जवानों ने सभी घायलों को तत्काल एफआरव्ही वाहन की सहायता से शासकीय अस्पताल, कैलारस पहुँचाया।

डायल-112 की त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई से घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध हो सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आपात परिस्थितियों में आमजन की सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

प्रदेश व्यापी ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना 2026-27 हुई ऑनलाइन गिद्ध गणना में लगभग 10 हजार 742 गिद्ध पाये गये

भोपाल 

प्रदेश व्यापी गिद्ध गणना-2026-27 के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन गणना 22 मई से 24 मई 2026 तक सूर्योदय से प्रातः 9 बजे तक प्रदेश के सभी 16 वृत्त, 9 टाईगर रिजर्व, वन विकास निगम के क्षेत्रों एवं अन्य संरक्षित क्षेत्रों में गिद्ध गणना का कार्य वन विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के अतिरिक्त स्वयंसेवकों के सहयोग से गिद्ध गणना ऑनलाइन ऐप के माध्यम से किया गया है, जिससे आंकड़ों का संकलन शीघ्र हो पाया है। मध्यप्रदेश में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना की शुरूआत वर्ष 2016 से की गई थी, जिसमें 7,028 गिद्धों का आंकलन किया गया था। विगत वर्ष 2025 में शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना की गई थी। इस वर्ष 2026 में भी शीतकालीन गणना की गई है।

इस वर्ष ग्रीष्मकालीन गिद्ध गणना ऐप के माध्यम से ऑनलाइन की गई। गणना का कार्य विभिन्न वनमंडलों एवं टाईगर रिजर्व/राष्ट्रीय उद्यानों में सभी स्थानों पर कार्य किया गया। गिद्ध गणना में लगभग 10 हजार 742 गिद्ध पाये गये, जिसमें 9394 वयस्क एवं 1348 किशोर गिद्ध पाये गये। इस वर्ष 10 हजार 742 गिद्ध की संख्या पिछले वर्ष की गिद्ध संख्या 9509 से लगभग 1200 संख्या में ज्यादा है, जो कि बेहतर संरक्षण को इंगित करती है।

गिद्धों की गणना के लिये ‘ऑनलाइन ऐप’ तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से गिद्धों की गणना की गई। ‘ऐप’ के माध्यम से गणना किये जाने पर आंकड़ों के संकलन एवं रिपोर्ट तुरंत लाइव प्राप्त होने से कार्य क्षमता में वृद्धि हुई है। ऐप के माध्यम से गणना किये जाने के लिये मास्टर ट्रेनर्स, अशासकीय संस्थाओं एवं अधिकारियों/कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया गया था।

गिद्धों की गणना के लिये गणनाकर्मी एवं स्वयंसेवक आदि सुबह सूर्योदय के तत्काल बाद प्रथम चरण में चयनित गिद्धों के घोंसलों के समीप पहुंच जाते थे। उन्होंने घोंसलों के आसपास बैठे गिद्धों एवं उनके नवजातों की गणना कर ऐप में उसकी जानकारी दर्ज की। गणना में केवल आवास/विश्राम स्थलों पर बैठे हुए गिद्धों को ही गणना में लिया गया। उड़ते हुए गिद्धों को गणना में नहीं लिया गया। इस वर्ष वन विभाग के कर्मचारियों के साथ पूरे प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, छात्र एवं स्थानीय नागरिकों ने इस गणना में भाग लिया। कंट्रोल रूम वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में बनाया जाकर गणना के बाद डाटा संकलन का कार्य किया जा रहा है।

 

गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व- डॉ. मोहन यादव

भोपाल

भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में नदियों को मात्र जल स्रोत नहीं, बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है। इनमें गंगा का स्थान सर्वोपरि है। गंगा दशहरा या गंगावतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार है। इस दिन को गंगा दशहरा, गंगा दशमी या दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह पर्व गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। दरअसल, गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व है.

गंगा यानी पवित्र-साफ जल के इसी महत्व को समझते हुए यशस्वी प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी ने जल संरक्षण को एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने जल को विकास का प्रमुख पैरामीटर बनाते हुए हर घर जल और जल है तो कल है के संकल्प को साकार किया। उनके नेतृत्व में जल शक्ति मंत्रालय का गठन, जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी ऐतिहासिक पहल हुईं, जिन्होंने देश की जल सुरक्षा को नई दिशा दी है।

अमृत सरोवर योजना ने जल संरक्षण को नया आयाम दिया। प्रत्येक जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया। अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर तैयार हो चुके हैं। इनसे वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधा बढ़ी है। यह मिशन आजादी का अमृत महोत्सव का हिस्सा है और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। नमामी गंगे परियोजना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नदी फ्रंट विकास और जैव विविधता संरक्षण के कार्य भी हो रहे हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाके तहत प्रति बूंद अधिक फसल का मंत्र दिया गया, जिसमें ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा मिला। कैच द रेन अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन आंदोलन बनाया। प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि पानी बचाना स्वच्छ भारत मिशन की तरह सामूहिक दायित्व है। उनके मार्गदर्शन में लाखों जल संरचनाएं बनीं, चेकडैम, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और पारंपरिक जल स्रोतों का पुनरुद्धार हुआ।

इन प्रयासों का परिणाम साफ दिखता है। भूजल रिचार्ज बढ़ा है, ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों की संख्या घटी है और कई जिलों में जल संकट कम हुआ है। प्रधानमंत्री  मोदी का विजन केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि जल संरक्षण को संस्कृति और आदत बनाने का है। वे बच्चों को वाटर वॉरियर्स बनाने और समाज को जिम्मेदार बनाने पर जोर देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण भारत की विकास यात्रा का अभिन्न अंग बन गया है। ये प्रयास न केवल वर्तमान की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल-समृद्ध भारत का आधार तैयार कर रहे हैं। जल संरक्षण अब मात्र नीति नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का हिस्सा बन चुका है।

मध्यप्रदेश भी, जिसे प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध माना जाता है, जल संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय पहल कर रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक चलाया गया। चालू वर्ष-2026 में भी यह अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन करना है, ताकि प्रदेश जल संकट से मुक्त हो सके।अभियान के तहत नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों, चेकडैम और अन्य जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, गहरीकरण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। नए जल स्रोतों का निर्माण, वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और पुरानी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार अभियान के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रदेश में 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के संधारण, हजारों तालाबों के गहरीकरण, नई जल संरचनाओं का निर्माण और लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

मध्यप्रदेश कृषि प्रधान राज्य है। यहां की अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि जल पर निर्भर है। बढ़ती जनसंख्या, अनियमित वर्षा, भूजल स्तर में गिरावट और जल प्रदूषण ने जल संकट को गहरा दिया है। इस अभियान का महत्व इन्हीं चुनौतियों के समाधान में निहित है।

अभियान से वर्षा जल का अधिकतम संचयन होता है, जिससे सिंचाई सुविधा बढ़ती है। भूजल स्तर में वृद्धि से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी फसल उत्पादन संभव होता है। खेत तालाबों, रिज-टू-वैली मॉडल और जल संरक्षण संरचनाओं से किसानों की आय बढ़ रही है।

मध्यप्रदेश में प्राचीन बावड़ियां, तालाब और जल संरचनाएं सांस्कृतिक धरोहर हैं। उनका जीर्णोद्धार सांस्कृतिक गौरव बढ़ाता है और पर्यटन को बढ़ावा देता है।अभियान जनभागीदारी पर आधारित है। पानी चौपाल जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलें, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इससे जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हो रही है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से सामुदायिक जिम्मेदारी बढ़ रही है।

इस अभियान से मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में भारी वृद्धि, नदियों का पुनःप्रवाह और लाखों जल संरचनाओं का निर्माण राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

यह अभियान केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प है।यशस्वी प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में यह जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में सफल हो रहा है।यह मध्यप्रदेश के भविष्य की नींव है। यह हमें सिखाता है कि जल ही जीवन है और उसकी रक्षा हमारा दायित्व है। यदि हम आज जल स्रोतों का संरक्षण करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां समृद्ध जल संसाधनों का उपयोग कर सकेंगी। प्रदेशवासियों को इस अभियान से जुड़कर जल संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। स्वच्छ, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा।

 

भिण्ड पुलिस की तत्परता और सूझबूझ से टली बड़ी अनहोनी

भोपाल 

​भिण्ड जिले के थाना गोहद चौराहा क्षेत्र में मध्यप्रदेश पुलिस का मानवीय, साहसिक एवं संवेदनशील चेहरा उस समय देखने को मिला, जब एक व्यक्ति शराब के नशे की हालत में भिण्ड रोड किनारे लगे एयरटेल टॉवर पर चढ़ गया। सूचना मिलते ही गोहद चौराहा थाना पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर सूझबूझ, धैर्य और मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्यवाही करते हुए व्यक्ति को सुरक्षित नीचे उतारकर एक बड़ी अनहोनी टाल दी।

23 मई को थाना गोहद चौराहा पुलिस को सूचना प्राप्त हुई कि एक व्यक्ति मोबाइल टॉवर पर चढ़ गया है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी गोहद चौराहा रामनरेश यादव पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे तथा वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। एसडीओपी गोहद श्री महेन्द्र गौतम ने स्वयं मौके पर पहुंचकर पूरे रेस्क्यू अभियान की कमान संभाली। व्यवस्था एवं सुरक्षा बनाए रखने हेतु थाना प्रभारी गोहद सहित पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।

घटना की गंभीरता को देखते हुए कंट्रोल रूम के माध्यम से एसडीआरएफ टीम एवं नगर पालिका गोहद की फायर ब्रिगेड को भी मौके पर बुलाया गया। पुलिस द्वारा टॉवर पर चढ़े व्यक्ति से लगातार मोबाइल फोन एवं शासकीय वाहनों में लगे पी.ए. सिस्टम के माध्यम से संवाद स्थापित किया गया। साथ ही उसके पिता, पत्नी एवं बच्चों से भी बात कराकर उसे सुरक्षित नीचे उतरने के लिए समझाइश दी गई।

हालांकि व्यक्ति शराब के नशे में होने के कारण किसी की बात सुनने की स्थिति में नहीं था। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस कर्मचारी, एसडीआरएफ टीम एवं स्थानीय साहसी युवकों की मदद से योजनाबद्ध तरीके से रेस्क्यू अभियान चलाया गया। इस दौरान एसडीआरएफ टीम द्वारा सुरक्षा जाल लगाया गया, वहीं आरक्षक 621 श्री परशुराम रावत ने साहस का परिचय देते हुए अपनी जान की परवाह किए बिना टॉवर पर चढ़कर उक्त व्यक्ति को सुरक्षित अपने कंधे पर बैठाया और रस्सियों के सहारे नीचे उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस की तत्परता एवं साहसिक कार्यवाही के चलते व्यक्ति को सुरक्षित बचा लिया गया। पुलिस द्वारा व्यक्ति का मेडिकल परीक्षण कराकर सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया गया।

मध्यप्रदेश पुलिस लगातार कानून व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं एवं जनसुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए हर परिस्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्पर है।

 

मध्यप्रदेश पुलिस का अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ रातभर चला प्रदेशव्यापी विशेष कॉम्बिंग गश्त अभियान

भोपाल

​मध्यप्रदेश में अपराधियों, फरार वारंटियों और असामाजिक तत्वों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा आमजन में सुरक्षा का भाव मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा प्रदेश में व्यापक स्तर पर समय-समय पर ‘कॉम्बिंग गश्त’ अभियान लगातार जारी है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में देर रात से शुरू होकर सुबह तक चली इस विशेष कार्रवाई में प्रदेशभर के 2500 से अधिक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी मुस्तैदी से मैदान में उतरे।

​इस राज्यव्यापी अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने विभिन्न जिलों में रिकॉर्ड 2100 से अधिक वारंट तामील/ वारंटी गिरफ्तार किए। इसके साथ ही सूचीबद्ध बदमाशों, गुंडों, हिस्ट्रीशीटरों और जिला बदर अपराधियों की धरपकड़ व चेकिंग की गई। अभियान के दौरान आबकारी एक्ट, जुआ-सट्टा, अवैध हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ भी कार्रवाही की गई।

​प्रमुख कार्रवाई:

​ग्वालियर : पुलिस ने रातभर में 249 फरार वारंटियों (121 स्थायी और 128 गिरफ्तारी वारंट) को गिरफ्तार किया। इसके अलावा 303 गुंडों व हिस्ट्रीशीटरों की जांच कर अवैध शराब व हथियारों पर कार्रवाई की गई।

​जबलपुर : अपराधियों एवं वारंटियों की धरपकड़ हेतु जबलपुर पुलिस द्वारा कॉम्बिंग गस्त के दौरान 120 स्थाई वारंट एवं 71 गिरफ्तारी वारंट सहित कुल 191 वारंट तामील किए गए।

​टीकमगढ़ (मेगा कॉम्बिंग ऑपरेशन) : दो दिवसीय विशेष अभियान के तहत जिले में स्थाई 6, गिरफ्तारी 55 एवं 160 जमानती एवं 246 अन्य सहित कुल 467 वारंट तामील किए गए। साथ ही सघन वाहन चेकिंग और आबकारी एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए।

मुरैना : पुलिस ने 73 स्थायी वारंटी, 63 गिरफ्तारी वारंटी, ईनामी एवं फरार 14 बदमाशों सहित कुल 150 वारंटियों को गिरफ्तार किया। इसके अतिरिक्त 28 हिस्ट्रीशीटर गुंडे तथा 18 जिलाबदर अपराधियों की चेकिंग की गई। इसके अलावा थाना पहाड़गढ़ पुलिस द्वारा 08 पेटी अवैध देशी शराब कीमत लगभग 44 हजार रुपए की जब्त कर आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।

विदिशा : पुलिस द्वारा जिलेभर में 720 ठिकानों पर दबिश देकर कॉम्बिंग ऑपरेशन संचालित किया गया। अभियान के दौरान 29 स्थायी, 102 गिरफ्तारी एवं 166 जमानती वारंट सहित कुल 297 वारंट तामील किए गए। इसके अतिरिक्त 201 बदमाशों के ठिकानों पर रेड, 158 हिस्ट्रीशीटरों की चेकिंग एवं 11 जिला बदर व्यक्तियों की जांच की गई।

उज्जैन : पुलिस द्वारा अभियान के दौरान 85 स्थाई वारंट, 110 गिरफ्तारी वारंट एवं 05 वसूली वारंट सहित कुल 200 वारंट तामील किए गए। पुलिस द्वारा 150 से अधिक निगरानी, गुंडा एवं चाकूबाज बदमाशों की घर-घर जाकर चेकिंग की गई, जबकि 50 से अधिक जिला बदर आरोपियों का सत्यापन किया गया। हत्या एवं हत्या के प्रयास जैसे गंभीर मामलों में फरार 04 आरोपियों को भी रात्रिकालीन दबिश देकर गिरफ्तार किया गया।

​खंडवा : पुलिस ने 30 स्थायी, 97 गिरफ्तारी और 17 अन्य वारंट तामील कर 144 आरोपियों को गिरफ्तार किया ।

​मन्दसौर : पुलिस द्वारा कॉम्बिंग गश्त के दौरान 78 स्थायी एवं 31 गिरफ्तारी वारंटियों सहित कुल 109 वारंटियों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही 114 हिस्ट्रीशीटर, गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की चेकिंग की गई। कार्रवाई के दौरान थाना शामगढ़ पुलिस ने 68 ग्राम एमडी ड्रग तथा थाना नाहरगढ़ पुलिस ने एक बलेनो कार से 65 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त करने में सफलता प्राप्त की। इसके अतिरिक्त 11 आबकारी प्रकरणों में 16 आरोपियों की गिरफ्तारी कर 57.24 लीटर अवैध शराब जब्त की गई तथा जुआ-सट्टा के 07 प्रकरणों में कार्रवाई की गई। मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत 32 चालान कर 14 हजार 800 रुपए का समन शुल्क वसूल किया गया।

​शाजापुर : पुलिस ने 150 वारंट (53 स्थायी और 97 गिरफ्तारी) तामील किए। गुंडा-बदमाशों और जिला बदर अपराधियों की सघन जांच की ।

​सिवनी : जिले में 103 वारंटियों (53 स्थायी और 50 गिरफ्तारी) को गिरफ्तार कर निगरानी बदमाशों की चेकिंग की गई।

​खरगोन : पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 19 स्थायी और 68 गिरफ्तारी वारंटियों सहित कुल 87 अपराधियों को गिरफ्तार किया।

प्रदेशभर में संचालित इस विशेष अभियान का उद्देश्य अपराधियों में कानून का भय उत्पन्न करना, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करना तथा आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण मजबूत करना है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा आगे भी इसी प्रकार प्रभावी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

 

मन की शांति ही तन का योग सादृश्य…यही है आर्ट ऑफ लिविंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमने कभी दुनिया को हथियारों के बल पर जीतने की चेष्ठा नहीं की। हमने विश्वशक्ति नहीं, विश्वगुरु बनने का मार्ग चुना है। हमने हमेशा सबके सुख की कामना की है और वैश्विक कल्याण का नारा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की शांति ही तन के योग सादृश्य है। जब मन शांत होता है, तभी शरीर सही संतुलन, स्वास्थ्य और सामंजस्य में रहता है। यही आर्ट ऑफ लिविंग है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ हमारी संस्कृति का मूल है और श्री श्री रविशंकर जी इसी संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित कर रहे हैं। श्री श्री ने दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को तनाव से मुक्ति दिलाकर शांत, स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग दिखाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को कर्नाटक राज्य में आर्ट ऑफ लिविंग के इंटरनेशनल सेन्टर, उदयपुरा, बैंगलुरू में श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

 मुख्यमंत्री ने श्री श्री रविशंकर से कहा कि वे मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से उन्हें जन्मोत्सव की अनंत और अशेष मंगलकामनाएं देने स्वयं यहां (उदयपुरा) आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 7 दशक की श्री श्री की ऊर्जा और करुणा इस व्यस्त और ऊथल पुथल के दौर में भी हर दिन नई और चिरयुवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इस विश्व को श्री श्री की देन है। यह सेवा, साधना और शांति का परम संगम है। आर्ट ऑफ लिविंग पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गये निष्काम कर्मयोग और जीवन को एक उत्सव की तरह जीने की कला का सहज मार्ग है, एक नव वैश्विक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग सिर्फ जीवन जीने की कला नहीं, जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने योग, प्राणायाम, ध्यान और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से जोड़कर लोगों को आत्मिक शांति प्रदान की है। करीब एक माह का यह आर्ट ऑफ लिविंग वैश्विक सम्मेलन वास्तव में मानवता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां मन शांत होता है, वहीं समाज भी समृद्ध होता है। मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग आध्यात्मिक संगठन को वैश्विक पुनीत सामाजिक कार्यों के लिए बधाई देते हुए कहा कि आप सब भारत की ध्यान, योग, साधना, मेडिटेशन, सुदर्शन क्रिया जैसी प्राचीन आध्यात्मिक परम्पराओं को पुनर्जीवित कर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का भी उत्थान कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र, बेंगलुरु आकर देवलोक जैसा आनंद प्राप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति में भाषाओं का गुलदस्ता है। भाषा कोई भी हो, लेकिन चेहरे के भाव से ही बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। गुजरात के सोमनाथ में गुरूदेव श्री श्री के आशीर्वाद से सोमनाथ उत्सव भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रत्येक सांस के साथ जीवन और मृत्यु साथ-साथ चलती है। दोनों परमपिता परमात्मा के हाथ में है। श्रीश्री रविशंकर जी ने 70वें जन्मदिन के अवसर पर 20 दिवसीय उत्सव मनाने का निर्णय लिया है। संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु स्वयं से साक्षात्कार करने के लिए बेंगलुरु स्थित इस केंद्र में आते हैं। हमारी संस्कृति में हमारे गुरु ही हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। हमारा जीवन यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे यानी जैसा पिंड है, वैसा ही ब्रह्मांड है की अवधारणा पर चलता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य का भोजन तीन प्रकार का है। बगैर भोजन के 30 दिन तक जीवित रह सकते हैं। पानी हमें 7 दिन तक जिंदा रख सकता है। गुरुदेव श्री श्री ने हमें प्राण से परमानंद और परमानंद से परमात्मा की ओर जाने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसारिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य का जीवन नियत है। हमारा यह जीवन ऊर्जा और चेतना के साथ प्रकृति से भी जुड़ा रहे, इसके लिए श्री श्री के सभी सामाजिक सेवा प्रकल्प विशेष महत्व रखते हैं। बेंगलुरु के इस आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र में हमें सांस्कृतिक चेतना और शांति का मार्ग प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के जय घोष के साथ गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्री श्री सह्स्त्रायु को प्राप्त हों और दीर्घकाल तक हम सबके जीवन का मार्गदर्शन करते रहें।

कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। न्यूज फर्स्ट मीडिया हाऊस के सीईओ श्री एस. रवि कुमार एवं टीवी 9 के वरिष्ठ एंकर श्री रंगनाथ भारद्वाज ने कन्नड़ भाषा में दिये संबोधन में कहा कि गुरुदेव श्री श्री रविशंकर विश्व शांति के दूत हैं। आपने पूरे विश्व के लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग के साथ-साथ आर्ट ऑफ लविंग भी सिखाया है।

कार्यक्रम में तेलंगाना राज्य के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला, श्रीमती जानकी शुक्ला, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय कोयला मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री श्री दिनेश प्रताप सिंह, फिल्म अभिनेता श्री जैकी श्राफ, एशियन पेंट के मालिक श्री जलस दानी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हमने कभी दुनिया को हथियारों के बल पर जीतने की चेष्ठा नहीं की। हमने विश्वशक्ति नहीं, विश्वगुरु बनने का मार्ग चुना है। हमने हमेशा सबके सुख की कामना की है और वैश्विक कल्याण का नारा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की शांति ही तन के योग सादृश्य है। जब मन शांत होता है, तभी शरीर सही संतुलन, स्वास्थ्य और सामंजस्य में रहता है। यही आर्ट ऑफ लिविंग है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ हमारी संस्कृति का मूल है और श्री श्री रविशंकर जी इसी संदेश को पूरे विश्व में प्रसारित कर रहे हैं। श्री श्री ने दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को तनाव से मुक्ति दिलाकर शांत, स्वस्थ और सुखी जीवन का मार्ग दिखाया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार को कर्नाटक राज्य में आर्ट ऑफ लिविंग के इंटरनेशनल सेन्टर, उदयपुरा, बैंगलुरू में श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव एवं आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

 मुख्यमंत्री ने श्री श्री रविशंकर से कहा कि वे मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से उन्हें जन्मोत्सव की अनंत और अशेष मंगलकामनाएं देने स्वयं यहां (उदयपुरा) आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 7 दशक की श्री श्री की ऊर्जा और करुणा इस व्यस्त और ऊथल पुथल के दौर में भी हर दिन नई और चिरयुवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इस विश्व को श्री श्री की देन है। यह सेवा, साधना और शांति का परम संगम है। आर्ट ऑफ लिविंग पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता में बताये गये निष्काम कर्मयोग और जीवन को एक उत्सव की तरह जीने की कला का सहज मार्ग है, एक नव वैश्विक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग सिर्फ जीवन जीने की कला नहीं, जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग ने योग, प्राणायाम, ध्यान और भारतीय संस्कृति की मूल भावना से जोड़कर लोगों को आत्मिक शांति प्रदान की है। करीब एक माह का यह आर्ट ऑफ लिविंग वैश्विक सम्मेलन वास्तव में मानवता का उत्सव है। उन्होंने कहा कि जहां मन शांत होता है, वहीं समाज भी समृद्ध होता है। मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग आध्यात्मिक संगठन को वैश्विक पुनीत सामाजिक कार्यों के लिए बधाई देते हुए कहा कि आप सब भारत की ध्यान, योग, साधना, मेडिटेशन, सुदर्शन क्रिया जैसी प्राचीन आध्यात्मिक परम्पराओं को पुनर्जीवित कर व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का भी उत्थान कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि आर्ट ऑफ लिविंग अंतरराष्ट्रीय केंद्र, बेंगलुरु आकर देवलोक जैसा आनंद प्राप्त हो रहा है। भारतीय संस्कृति में भाषाओं का गुलदस्ता है। भाषा कोई भी हो, लेकिन चेहरे के भाव से ही बहुत कुछ स्पष्ट हो जाता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है। गुजरात के सोमनाथ में गुरूदेव श्री श्री के आशीर्वाद से सोमनाथ उत्सव भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी प्रत्येक सांस के साथ जीवन और मृत्यु साथ-साथ चलती है। दोनों परमपिता परमात्मा के हाथ में है। श्रीश्री रविशंकर जी ने 70वें जन्मदिन के अवसर पर 20 दिवसीय उत्सव मनाने का निर्णय लिया है। संपूर्ण विश्व से श्रद्धालु स्वयं से साक्षात्कार करने के लिए बेंगलुरु स्थित इस केंद्र में आते हैं। हमारी संस्कृति में हमारे गुरु ही हमें अंधेरे से प्रकाश की ओर लेकर जाते हैं। हमारा जीवन यत् पिंडे तत् ब्रह्मांडे यानी जैसा पिंड है, वैसा ही ब्रह्मांड है की अवधारणा पर चलता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मनुष्य का भोजन तीन प्रकार का है। बगैर भोजन के 30 दिन तक जीवित रह सकते हैं। पानी हमें 7 दिन तक जिंदा रख सकता है। गुरुदेव श्री श्री ने हमें प्राण से परमानंद और परमानंद से परमात्मा की ओर जाने का मार्ग दिखाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांसारिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य का जीवन नियत है। हमारा यह जीवन ऊर्जा और चेतना के साथ प्रकृति से भी जुड़ा रहे, इसके लिए श्री श्री के सभी सामाजिक सेवा प्रकल्प विशेष महत्व रखते हैं। बेंगलुरु के इस आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र में हमें सांस्कृतिक चेतना और शांति का मार्ग प्राप्त होता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल के जय घोष के साथ गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्री श्री सह्स्त्रायु को प्राप्त हों और दीर्घकाल तक हम सबके जीवन का मार्गदर्शन करते रहें।

कार्यक्रम को अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। न्यूज फर्स्ट मीडिया हाऊस के सीईओ श्री एस. रवि कुमार एवं टीवी 9 के वरिष्ठ एंकर श्री रंगनाथ भारद्वाज ने कन्नड़ भाषा में दिये संबोधन में कहा कि गुरुदेव श्री श्री रविशंकर विश्व शांति के दूत हैं। आपने पूरे विश्व के लोगों को आर्ट ऑफ लिविंग के साथ-साथ आर्ट ऑफ लविंग भी सिखाया है।

कार्यक्रम में तेलंगाना राज्य के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला, श्रीमती जानकी शुक्ला, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव, केंद्रीय कोयला मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी, उत्तरप्रदेश के राज्यमंत्री श्री दिनेश प्रताप सिंह, फिल्म अभिनेता श्री जैकी श्राफ, एशियन पेंट के मालिक श्री जलस दानी भी विशेष रूप से उपस्थित थे। 

मंत्री विश्वास सारंग ने किया करोड़ों की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमि-पूजन

भोपाल

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने रविवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत वार्ड 78, विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से होने वाली सीवेज परियोजना एवं अन्य विकास कार्यों का भूमि-पूजन किया। मंत्री  सारंग ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार मध्यप्रदेश में विकास और जनकल्याण के नए आयाम स्थापित कर रही है। हर वर्ग के कल्याण और हर क्षेत्र का समुचित विकास सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री  सारंग ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल विकास कार्य करना नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन को सुगम भी बनाना है। मंत्री  सारंग ने कहा कि इस परियोजना से स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होगी, जलभराव एवं गंदगी की समस्या से राहत मिलेगी तथा नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्राप्त होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

हज़ारों परिवारों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ

वार्ड 78 स्थित विश्वकर्मा नगर में 23 करोड़ से अधिक की लागत से निर्माण होने वाली इस परियोजना के अंतर्गत 13 करोड़ रुपये की लागत से 42 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बनाया जाएगा तथा 9 करोड़ रुपये की लागत से 8079 हाउस सीवर कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे, जिससे लगभग 35,306 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। परियोजना पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वच्छता, आधुनिक सीवेज व्यवस्था और सुगम नागरिक सुविधाएं प्राप्त होंगी। इससे न केवल जनजीवन अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनेगा बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी।

कार्यक्रम में मंत्री  सारंग का क्षेत्रवासियों द्वारा पुष्पवर्षा एवं माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। और क्षेत्रवासियों ने करोड़ों की लागत से होने वाले इन विकास कार्यों की सौगात के लिए आभार व्यक्त किया।

 

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