इंदौर में बन रहा MP का पहला डबल डेकर फ्लाईओवर, सितंबर में जनता को मिलेगी बड़ी सौगात

  इंदौर
इंदौर शहर विकास की राह में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इसी के चलते शहर के लवकुश चौराहे पर बन रहे डबल डेकर फ्लाईओवर ब्रिज का एक हिस्सा बनकर तैयार हो गया है, जिसकी लोड टेस्टिंग का काम भी पूरा किया जा चुका है। अब दूसरे हिस्से की स्लैब डालने की तैयारी चल रही है। जुलाई में स्ट्रक्चर का काम लगभग खत्म हो जाएगा, लेकिन बरसात की वजह से डामर की मास्टिंग नहीं होने पर सितंबर में सौगात मिल सकेगी। बता दें कि, इस फ्लाईओवर के बनने से इसके जरिए रोजाना दो लाख से ज्यादा वाहनों की आवाजाही आसान हो सकेगी।

160 करोड़ की लागत से बन रहा मध्य प्रदेश का पहला डबल डेकर फ्लाईओवर शहर के लवकुश चौराहे पर बनकर तैयार होने जा रहा है। हालांकि, इस फ्लाईओवर का निर्माण अगस्त 2025 में पूरा होकर शुरू हो जाना था। अहमदाबाद की ठेकेदार कंपनी विजय एम मिस्त्री कंस्ट्रक्शन कंपनी को साइट व अन्य बाधाएं हटाकर देने में देरी हो गई, जिसकी वजह से दिसंबर तक का समय उसे दिया गया था।

7 महीने लेट, कलेक्टर की सख्ती के बाद पकड़ी रफ्तार
तकनीकी कारण और ठेकेदार कंपनी की धीमी चाल की वजह से सात माह लेट चल रहा है। उसमें भी कलेक्टर कलेक्टर शिवम वर्मा ने ब्रिज का दौरा कर सख्ती की जिसकी वजह से ठेकेदार कंपनी सक्रिय हुई और काम में समय से काफी धीमी रफ्तार से ही सही पर काम पूरा होने जा रहा है।

शुरुआती अगस्त तक दूसरी लोड टेस्टिंग
काम में तेजी आने से ब्रिज के बीच वाले हिस्से के दोनों तरफ बो स्ट्रिंग गर्डर लॉन्च हो गई और एक हिस्से में स्लैब डालकर लोड टेस्टिंग कर दी गई है। दूसरे हिस्से की स्लैब डालने की तैयारी की जा रही है, जिस पर सरिए का जाल बनकर तैयार हो गया है। 15 जुलाई तक ये काम पूरा हो जाएगा, जिसके बाद अगस्त की शुरुआत तक लोड टेस्टिंग भी कर दी जाएगी।

ठेकेदार को धूप निकलने का इंतजार
इधर, ठेकेदार कंपनी बाकी हिस्से को भी पूरा करने की बात कह रही है। इसके बावजूद ब्रिज अगस्त में शुरू नहीं हो पाएगा, क्योंकि ब्रिज पर डामर का मास्टिंग की जाती है। ये काम बरसात के चलते हो पाना संभव नहीं है। क्योंकि, इसके लिए धूप की आवश्यकता होती है। सितंबर में मौसम साफ मिलने पर ये काम भी पूरा करने की बात कही जा रही है। ऐसे में संभावना है कि, सितंबर तक शहरवासियों को प्रदेश के पहले डबल डेकर फ्लाईओवर की सौगात मिल जाएगी।

लोक कलाओं में शुरू होंगे नए सर्टिफिकेट कोर्स, राज्य मंत्री श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी के निर्देश

संस्कृति विभाग के विश्वविद्यालयों की समीक्षा बैठक में प्रवेश, प्लेसमेंट, अधोसंरचना और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर; रिक्त पदों की भर्ती और लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश।

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लोक कलाओं से जुड़े नए सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं और कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे

बैठक में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रवेश, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट, अधोसंरचना विकास और विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की गई। राज्य मंत्री ने शासन स्तर पर लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे और रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

समीक्षा के दौरान बताया गया कि राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में वर्तमान में 122 पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें संगीत, नृत्य, ललित कला, नाट्य एवं रंगकर्म सहित विभिन्न विषय शामिल हैं। राज्य मंत्री ने विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों एवं पाठ्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इनका लाभ उठा सकें।

सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय ने बैठक में जानकारी दी कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में 16 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। राज्य मंत्री श्री लोधी ने शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने और शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

बैठक में संस्कृति विभाग के संचालक श्री एन.पी. नामदेव, उपसचिव श्री राजेश गुप्ता, राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे, सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार श्री रामनिवास गुप्ता सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

15 दिवसीय प्रदेशव्यापी जन-जागरूकता अभियान बना जन-आंदोलन

भोपाल 

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 24 जून से 08 जुलाई 2026 तक संचालित 15 दिवसीय प्रदेशव्यापी “सेफ क्लिक 2.0” साइबर सुरक्षा जन-जागरूकता अभियान का आज नरोन्‍हा प्रशासन अकादमी, भोपाल स्थित स्वर्ण जयंती सभागार में समापन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा रहे। समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर)  ए. साईं मनोहर, पुलिस आयुक्त भोपाल  संजय कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, सामुदायिक पुलिस सदस्य, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक  मकवाणा ने कहा कि जनवरी 2025 में अधिकारियों को दिए गए नववर्ष संदेश में उन्होंने तीन प्रमुख चुनौतियों—साइबर अपराध, नशे के विरुद्ध जन-जागरूकता तथा सड़क सुरक्षा—को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए निरंतर जन-भागीदारी आधारित अभियान संचालित करने का आह्वान किया था। उसी संकल्प के अनुरूप मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “सेफ क्लिक”तथा “नशे से दूरी है जरूरी “व्यापक जन-जागरूकता अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “सेफ क्लिक 1.0” के सकारात्मक परिणामों के कारण प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिली है। जागरूक नागरिकों द्वारा समय पर पुलिस को सूचना देने से अनेक मामलों में तत्काल कार्रवाई कर पीड़ितों को राहत दिलाई गई। उन्होंने भोपाल के डिजिटल अरेस्ट प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि पीड़ित की त्वरित सूचना पर पुलिस ने लाइव हस्तक्षेप कर साइबर अपराध को विफल किया।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं, इसलिए मध्यप्रदेश पुलिस भी समय-समय पर नई एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को सतर्क कर रही है। उन्होंने बताया कि “सेफ क्लिक 2.0” को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर)  ए. साईं मनोहर एवं उनकी टीम ने बदलते साइबर परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया, जिसके परिणामस्वरूप यह अभियान जन-जन तक पहुँचने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में साइबर अपराध कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होंगे। ऐसे में जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच है। मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराध पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के लिए फर्जी बैंक खातों की पहचान कर उन्हें बंद कराने, फर्जी सिम कार्डों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा साइबर ठगी की राशि समय रहते होल्ड कराकर पीड़ितों को वापस दिलाने जैसे नवाचारों पर निरंतर कार्य कर रही है।

पुलिस महानिदेशक ने बताया कि 25 दिसंबर 2025 को ग्वालियर से माननीय केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा साइबर ठगी से संबंधित ई-जीरो एफआईआर प्रणाली का शुभारंभ किया गया, जिसके साथ मध्यप्रदेश देश का दूसरा राज्य बना जहाँ साइबर ठगी के मामलों में ई-जीरो एफआईआर की सुविधा लागू की गई। प्रारंभ में यह व्यवस्था एक लाख रुपये या उससे अधिक की साइबर ठगी के मामलों के लिए लागू थी, जिसे बाद में घटाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया, ताकि अधिकाधिक पीड़ितों को त्वरित न्याय एवं राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि इससे पुलिस का कार्यभार अवश्य बढ़ा है, किन्तु नागरिकों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना मध्यप्रदेश पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आज प्रत्येक नागरिक का दिन मोबाइल के एक क्लिक से प्रारंभ होता है और उसी पर समाप्त होता है। ऐसे समय में साइबर जागरूकता अत्यंत आवश्यक हो गई है। अभियान के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, शासकीय एवं निजी संस्थानों सहित विभिन्न स्थानों पर पहुँचकर लाखों विद्यार्थियों एवं नागरिकों को साइबर सुरक्षा के व्यवहारिक उपायों की जानकारी दी।

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने कहा कि अभियान का समापन अवश्य हुआ है, किन्तु साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्कता कभी समाप्त नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, पासवर्ड अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें तथा किसी भी प्रकार की साइबर ठगी होने पर तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ। उन्होंने कहा कि समय पर दी गई सूचना से ठगी की राशि होल्ड कराने तथा अपराधियों तक शीघ्र पहुँचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्‍होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से लाखों विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। 60 हजार से अधिक सीयूजी सिम पर साइबर सुरक्षा संदेश प्रसारित किए गए तथा देश की चार प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के माध्यम से लगभग 5 करोड़ बल्क एसएमएस नागरिकों तक भेजे गए।

महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग की लगभग 60 हजार आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, ग्राम पंचायतों, पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, जीआरपी, पुलिस वेलफेयर सेंटर, साइबर जागरूकता रथ, चौपाल, मैराथन, रैली, धार्मिक स्थलों तथा एमपीएल क्रिकेट लीग सहित अनेक माध्यमों से साइबर सुरक्षा का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाया गया।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर)  ए. साईं मनोहर ने अपने आभार उद्बोधन में अभियान की सफलता का श्रेय पुलिस महानिदेशक  मकवाणा के दूरदर्शी नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन को दिया। उन्होंने कहा कि “सेफ क्लिक 1.0” की सफलता के बाद “सेफ क्लिक 2.0” को और अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप यह अभियान जन-जन तक पहुँचकर एक जन-आंदोलन बन गया। उन्होंने कहा कि “Prevention is Better Than Cure” का सिद्धांत साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में पूरी तरह लागू होता है और जन-जागरूकता ही साइबर अपराधों की रोकथाम का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने अभियान को सफल बनाने में प्रदेश के सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों, प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया, स्कूल शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, दूरसंचार कंपनियों, स्वयंसेवी संगठनों तथा अभियान से जुड़े सभी विभागों का आभार व्यक्त किया। साथ ही साइबर मुख्यालय की टीम एवं विशेष रूप से  प्रणय नागवंशी सहित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित योगदान की सराहना की।

उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर ने अभियान की विस्तृत रूपरेखा एवं उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि 15 दिवसीय अभियान के दौरान प्रत्येक दिवस के लिए अलग-अलग विषय निर्धारित कर प्रदेशभर में योजनाबद्ध गतिविधियाँ संचालित की गईं। विद्यार्थियों एवं युवाओं को साइबर सुरक्षा का “ब्रांड एम्बेसडर” बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट, एआई आधारित साइबर अपराध, वॉइस क्लोनिंग, फिशिंग, क्यूआर कोड फ्रॉड, निवेश संबंधी साइबर ठगी तथा सोशल मीडिया सुरक्षा जैसे विषयों पर संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाकर उन्हें अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक करने का संदेश दिया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों एवं ग्राम सभाओं के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया। कृषि मंडियों, श्रमिक समूहों एवं ग्रामीण समुदायों तक पहुँचकर डिजिटल लेन-देन के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई।

अभियान से पूर्व साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं युवाओं की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश में मेगा हैकाथॉन का भी आयोजन किया गया, जिसमें भोपाल, इंदौर एवं जबलपुर सहित विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय स्तर की टीमों ने भाग लिया।

उल्लेखनीय है कि “सेफ क्लिक 2.0” अभियान के दौरान प्रदेशभर में 8,600 से अधिक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के अंतर्गत नागरिकों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा रही। जिसका परिणाम है कि 1 करोड़ से अधिक नागरिकों तक प्रत्यक्ष रूप से साइबर सुरक्षा का संदेश पहुँचाया गया, जबकि डिजिटल एवं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से 6करोड़ से अधिक लोगों तक साइबर जागरूकता का व्यापक प्रसार किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भोपाल एवं इंदौर के पुलिस कमिश्‍नर सहित डिंडौरी, अलीराजपुर, दतिया एवं बैतूल जिलों के पुलिस अधीक्षकों को सम्मानित किया गया। 

मेट्रो निर्माण से प्रभावित मार्गों की तत्काल करायें मरम्मत, आमजन की सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: राज्यमंत्री गौर

भोपाल 

पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु और अर्धघुमन्तु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने कहा है कि भोपाल महानगर के विकास के लिए मेट्रो परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है, किंतु इसके निर्माण के दौरान नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा अथवा कष्ट का सामना न करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को सुगम एवं सुरक्षित आवागमन सहित समस्त आवश्यक जनसुविधाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिक जवाबदेही है। राज्यमंत्री  गौर ने बुधवार को मंत्रालय में गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मेट्रो परियोजना के कारण क्षतिग्रस्त हुए प्रमुख मार्गों के पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में समीक्षा बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के दल के साथ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया।

राज्यमंत्री  गौर ने डीआरएम से एम्स, आई.टी.आई. से रत्नागिरी तिराहे तथा डीआरएम रोड एवं अलकापुरी मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने सड़कों पर निर्मित गड्ढों को अविलंब भरने तथा इस कार्य में शिथिलता अथवा लापरवाही बरतने वाले संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मार्गों की जर्जर स्थिति के कारण यातायात व्यवस्था बाधित हो रही है और वर्षाकाल में जलभराव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जिससे नागरिकों का दैनिक जीवन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने इन विसंगतियों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्णतः सुधारने के निर्देश दिए।

राज्यमंत्री  गौर ने परियोजना के क्रियान्वयन में गति लाने के उद्देश्य से निर्देश दिए कि आई.टी.आई. से रत्नागिरी मार्ग के पुनर्निर्माण के लिए वर्तमान अनुबंधित ठेकेदार के माध्यम से ही समस्त आवश्यक सुधार कार्य कराए जाएं। साथ ही उन्होंने निर्देशित किया कि भविष्य में सड़क निर्माण के विस्तृत प्राक्कलन (एस्टीमेट) तैयार करते समय सभी विभाग आपस में समन्वय स्थापित करें।

जनसुरक्षा को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए राज्यमंत्री  गौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मेट्रो निर्माण के दौरान अस्थाई रूप से हटाई गई स्ट्रीट लाइट्स को पुनः स्थापित किया जाए, ताकि रात्रि के समय नागरिकों का आवागमन पूर्णतः सुरक्षित हो सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सड़कों पर निर्मित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) को त्वरित चिन्हित कर वहां पुख्ता सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोहराया कि ढांचागत विकास अपरिहार्य है, परंतु नागरिकों की सुरक्षा और सुविधा से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता उच्च स्तरीय होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

 

जबलपुर में गेहूं भंडारण का बड़ा घोटाला, दो सरकारी गोदामों से 1000 टन अनाज गायब

जबलपुर

जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं के भंडारण में एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में अन्नपूर्णा और मां नर्मदा वेयरहाउस से करीब 1000 टन गेहूं गायब मिलने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्टॉक में कमी छिपाने के लिए दूसरे गोदामों के रिकॉर्ड से गेहूं की कागजी अदला-बदली कर दी गई। मामला उजागर होने के बाद भोपाल स्तर पर हलचल तेज हो गई है और अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम जबलपुर पहुंचेगी।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के जांच और कार्रवाई का बयान सामने आने के बाद जबलपुर में हड़कंप मचा है। उपार्जन समिति से जुड़े अधिकारियों से भी इस संबंध में पूछताछ हो सकती है। वहीं समिति और समूहों की भूमिका को भी खंगाला जाएगा। इतना ही नहीं सूत्रों की मानें तो जांच में यह भी देखा जाएगा कि रिकॉर्ड में हेरफेर किन अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया। यदि अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो वेयरहाउस संचालकों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिर सकती है।

रिकॉर्ड में फेरबदल कर छिपाई गई कमी

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक जिन गोदामों में गेहूं कम मिला, वहां स्टॉक का मिलान करने के बजाय अन्य वेयरहाउस के रिकॉर्ड में कागजी समायोजन कर कमी को छिपाने का प्रयास किया गया। जांच एजेंसियां अब स्टॉक रजिस्टर, परिवहन चालान, उठाव रिकॉर्ड और ऑनलाइन पोर्टल के आंकड़ों का मिलान कर रही हैं।

जिले में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले श्रीजी वेयरहाउस से करीब 1400 टन धान गायब होने का मामला भी सामने आया था। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े घोटाले के बावजूद अब तक न तो गायब धान की पूरी वसूली हो सकी है और न ही भुगतान संबंधी विवाद का अंतिम निराकरण हुआ है। इससे वेयरहाउस प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

भोपाल से होगी उच्चस्तरीय जांच

सूत्रों के अनुसार भोपाल से आने वाली जांच टीम पूरे मामले की परत-दर-परत जांच करेगी। टीम यह पता लगाएगी कि गेहूं वास्तव में कहां गया, रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर किया गया और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ एफआईआर दर्ज होने की भी संभावना जताई जा रही है।

समर्थन मूल्य पर खरीदे गए अनाज के भंडारण को लेकर जबलपुर में पिछले कुछ वर्षों में लगातार अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। अब अन्नपूर्णा और मां नर्मदा वेयरहाउस का मामला सामने आने के बाद सरकारी भंडारण व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है।
मुख्य बिंदु:

  •     अन्नपूर्णा और मां नर्मदा वेयरहाउस से करीब 1000 टन गेहूं गायब।
  •     कमी छिपाने के लिए दूसरे वेयरहाउस के रिकॉर्ड से कागजी अदला-बदली का आरोप।
  •     जांच के लिए भोपाल से उच्चस्तरीय टीम जबलपुर आएगी।
  •     कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना।
  •     श्रीजी वेयरहाउस से 1400 टन धान गायब होने का मामला अब भी पूरी तरह नहीं सुलझा।

 

लोक कलाओं में शुरू करें सर्टिफिकेट कोर्स : राज्य मंत्री लोधी

भोपाल

संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी ने मंत्रालय में संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालित विश्वविद्यालयों की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। राज्य मंत्री  लोधी ने कला के क्षेत्र में रुचि रखने वाले युवाओं और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लोक कलाओं से संबंधित नए सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में प्रवेश की स्थिति, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के प्रयासों, अधोसंरचना विकास और विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शासन स्तर पर लंबित मामलों का त्वरित निपटारा किया जाए और रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में कुल 122 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें संगीत के 48, नृत्य के 30, ललित कला, नाट्य एवं रंगकर्म के 08 तथा अन्य 06 पाठ्यक्रम शामिल हैं। राज्य मंत्री  लोधी ने इन पाठ्यक्रमों की सराहना की और जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों तथा उनके अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों और कोर्सेस का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि दूर-दराज के विद्यार्थियों तक भी इसकी जानकारी पहुँच सके।

सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा इस समय कुल 16 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन पाठ्यक्रमों में एम.ए. के 09, एम.एस.सी. का 01, एम.एफ.ए. का 01, डिप्लोमा के 02 और सर्टिफिकेट के 03 कोर्सेस शामिल हैं। राज्य मंत्री  लोधी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि विश्वविद्यालयों में शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं।

बैठक में संस्कृति विभाग के संचालक  एन.पी. नामदेव और उपसचिव  राजेश गुप्ता उपस्थित रहे। इनके साथ ही राजा मान सिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्रबुद्धे, सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार  रामनिवास गुप्ता सहित विभिन्न संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य और प्रशासनिक प्रभारी भी बैठक उपस्थित थे।

 

नशामुक्त, साइबर सुरक्षित एवं जनकेंद्रित पुलिसिंग पर डीजीपी कैलाश मकवाणा ने दिए निर्देश

भोपाल 

केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह द्वारा निर्देशित “नशामुक्त भारत” अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए तैयार त्रिवर्षीय रोडमैप के प्रभावी क्रियान्वयन तथा प्रदेश में मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई, साइबर अपराध नियंत्रण एवं जनशिकायतों के त्वरित निराकरण की समीक्षा के लिये पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा के निर्देशानुसार प्रदेश के सभी रेंज पुलिस उप महानिरीक्षक एवं भोपाल तथा इंदौर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्तों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता एवं साइबर)  ए. साई मनोहर, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स एवं एसटीएफ)  डी. निवास वर्मा तथा अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायत एवं कल्याण)  सोलोमन यश कुमार मिंज ने विभिन्न विषयों पर विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जन-आंदोलन के रूप में संचालित होगा “नशे से दूरी, है जरूरी 2.0” अभियान- डीजीपी  मकवाणा

पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने अधिकारियों को कहा कि प्रदेश में मादक पदार्थों के उन्मूलन, साइबर अपराधों की प्रभावी रोकथाम तथा आमजन की शिकायतों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की प्रत्येक कार्रवाई समयबद्ध, तकनीक आधारित तथा परिणामोन्मुखी होनी चाहिए, जिससे शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्रभावी प्राप्ति सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने निर्देश दिए कि 15 जुलाई से प्रारंभ होने वाले राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान “नशे से दूरी, है जरूरी 2.0” को केवल एक सरकारी अभियान तक सीमित न रखते हुए जन-आंदोलन का स्वरूप दिया जाए। इसके लिए सभी जिलों में विभिन्न विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक एवं सामुदायिक संस्थाओं, युवा संगठनों तथा समाज के सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। अभियान के माध्यम से युवाओं, विद्यार्थियों एवं आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया जाए।

डीजीपी  मकवाणा ने कहा कि मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध सख्त एवं सतत् प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावी विवेचना, वित्तीय अनुसंधान तथा संगठित अपराधियों एवं तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक, डिजिटल विश्लेषण एवं त्वरित जांच प्रक्रिया का प्रभावी उपयोग किया जाए, जिससे साइबर अपराधियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई कर पीड़ितों को समय पर राहत प्रदान की जा सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन एवं जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों का समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित किया जाए। शिकायतों के निस्तारण में संवेदनशीलता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, जिससे आमजन का पुलिस के प्रति विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।

उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रवर्तन, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, व्यापक जन-जागरूकता तथा बेहतर शिकायत निवारण के माध्यम से नशामुक्त, साइबर सुरक्षित एवं सुरक्षित मध्यप्रदेश के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी अधिकारी पूर्ण प्रतिबद्धता एवं समन्वय के साथ कार्य करें।

मादक पदार्थों के विरुद्ध त्रिवर्षीय रोडमैप पर जोर

बैठक के प्रथम सत्र में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नारकोटिक्स तथा एस टी एफ़)  डी. निवास वर्मा द्वारा जनवरी से जून 2026 तक एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत दर्ज प्रकरणों की समीक्षा करते हुए मादक पदार्थों के उन्मूलन के लिए तैयार त्रिवर्षीय विजन डॉक्यूमेंट एवं रोडमैप प्रस्तुत किया गया। उन्‍होंने अधिकारियों को वाणिज्यिक मात्रा के प्रकरणों में वित्तीय अनुसंधान को प्राथमिकता देने, क्लैंडेस्टाइन लैब्स पर प्रभावी कार्रवाई करने, सीमावर्ती राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने, शिक्षण संस्थानों के आसपास ड्रग फ्री जोन का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने, प्रभावी विवेचना के माध्यम से संगठित नेटवर्क एवं मुख्य अपराधियों तक पहुंचने तथा जिला स्तरीय एनकोर्ड समितियों की बैठकों को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए। बैठक में 15 जुलाई से प्रारंभ होने वाले “नशे से दूरी, है जरूरी 2.0” राज्यव्यापी जन-जागरूकता अभियान की रूपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए इसे व्यापक जनभागीदारी के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए।

साइबर अपराधों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर/गुप्तवार्ता)  ए. साई मनोहर द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रभावी कार्यवाही के संबंध में समीक्षा की गई। उन्‍होंने 25 हजार रूपए से अधिक की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 72 घंटे के भीतर अनिवार्य रूप से e-ZERO एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्‍होंने महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित साइबर अपराधों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से साइबर हॉटस्पॉट की पहचान कर विशेष अभियान संचालित करने, MRM Portal के माध्यम से पीड़ितों की फ्रीज राशि शीघ्र वापस कराने, साइबर अन्वेषण से जुड़े अधिकारियों का नियमित प्रशिक्षण कराने तथा आमजन को साइबर अपराधों के प्रति लगातार जागरूक करने के निर्देश भी दिए।

सीएम हेल्पलाइन एवं जनसुनवाई शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर बल

बैठक के तीसरे सत्र में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (शिकायत)  सोलोमन यश कुमार मिंज, द्वारा सीएम हेल्पलाइन के लेवल-3 एवं लेवल-4 की लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए उनके त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही जनसुनवाई में प्राप्त सभी आवेदनों का समयबद्ध एवं संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

 

इंदौर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब हिंदी में! SGSITS की नई पहल, छात्रों को मिला बड़ा विकल्प

इंदौर

मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एसजीएसआईटीएस (SGSITS) ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया है। नए शैक्षणिक सत्र से संस्थान पहली बार हिंदी माध्यम में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने जा रहा है। इस कोर्स की सबसे खास बात यह है कि छात्रों को पूरे चार साल तक लगातार पढ़ाई करने की बाध्यता नहीं होगी। नई शिक्षा नीति के तहत तैयार इस पाठ्यक्रम में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा दी गई है, जिससे छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ने पर भी योग्यता के अनुसार रोजगार हासिल कर सकेंगे और बाद में दोबारा पढ़ाई पूरी कर सकेंगे।

हिंदी माध्यम में शुरू होगी बीटेक सिविल इंजीनियरिंग
श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एसजीएसआईटीएस) इंदौर ने ग्रामीण और हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। संस्थान में नए शैक्षणिक सत्र से पहली बार हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की जा रही है। इसकी शुरुआत बीटेक सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच से की गई है।

चार साल लगातार पढ़ने की बाध्यता नहीं
इस विशेष पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों को लगातार चार साल तक पढ़ाई करना अनिवार्य नहीं होगा। यदि कोई छात्र पहले वर्ष के बाद पढ़ाई छोड़ता है तो वह आईटीआई ड्राफ्ट्समैन स्तर पर काम करने के योग्य होगा। दूसरे वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह साइट सुपरविजन का कार्य कर सकेगा। तीन वर्ष पूरे करने पर छात्र को सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा मिलेगा, जबकि चौथा वर्ष पूरा करने पर बीटेक की डिग्री प्रदान की जाएगी।

मजदूर और इंजीनियर के बीच भाषा की दूरी होगी कम
संस्थान के अनुसार इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों और इंजीनियरों के बीच भाषा की बाधा को खत्म करना है। अधिकांश निर्माण स्थलों पर कामगारों से हिंदी या स्थानीय भाषा में ही संवाद किया जाता है। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले कई इंजीनियरों को डिजाइन, सुरक्षा नियम और तकनीकी निर्देश समझाने में कठिनाई होती है। हिंदी माध्यम में पढ़ाई होने से यह संवाद अधिक सहज और प्रभावी होगा।

प्रवेश प्रक्रिया जारी, फिलहाल दो छात्रों ने लिया दाखिला
इस हिंदी माध्यम कोर्स को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से मंजूरी मिल चुकी है। कोर्स के लिए कुल 60 सीटें निर्धारित की गई हैं। पहले चरण की काउंसलिंग में 35 सीटें आवंटित हुई थीं, लेकिन अभी तक केवल दो छात्रों ने प्रवेश लिया है। संस्थान का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया अभी जारी है। अधिकारियों के मुताबिक पूरा सिलेबस तैयार कर लिया गया है और विद्यार्थियों को हिंदी भाषा में अध्ययन सामग्री और पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।

नई शिक्षा नीति के तहत मिलेगा मल्टीपल एंट्री-एग्जिट का लाभ
यह पूरा पाठ्यक्रम नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत संचालित होगा। इसमें छात्रों को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट की सुविधा मिलेगी। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार बीच में पढ़ाई छोड़कर नौकरी कर सकते हैं और बाद में दोबारा प्रवेश लेकर कोर्स पूरा कर सकते हैं। इस प्रणाली में पारंपरिक अंकों की जगह क्रेडिट पॉइंट दिए जाएंगे। 

पारंपरिक भारतीय निर्माण शैली भी होगी पाठ्यक्रम का हिस्सा
संस्थान ने पाठ्यक्रम में भारत की पारंपरिक इंजीनियरिंग और निर्माण कला को भी शामिल किया है। इसमें प्राचीन मंदिरों, महलों और ऐतिहासिक संरचनाओं की निर्माण तकनीकों का अध्ययन कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय निर्माण विरासत की भी जानकारी मिल सके।

ग्रामीण छात्रों को मिलेगा सबसे अधिक फायदा
एसजीएसआईटीएस के प्रशासनिक अधिकारी संदीप नारुलकर के अनुसार मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए इंजीनियरिंग के जटिल विषयों को समझना आसान होगा। उन्होंने बताया कि स्थानीय भाषा में पढ़ाई होने से रोजगार और कौशल विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। शिक्षक भी कक्षा में सरल और सहज भाषा का उपयोग कर पढ़ा सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों को निर्माण स्थलों पर व्यावहारिक कार्य के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।

 

पीथमपुर प्रदेश की औद्योगिक शक्ति का महत्वपूर्ण केन्द्र : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र मध्यप्रदेश की औद्योगिक शक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है। किसान इरिगेशन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जैसी कंपनियां प्रदेश में निवेश, रोजगार और तकनीकी प्रगति को नई दिशा दे रही हैं। “मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। हमारी प्राथमिकता है कि उद्योगों से युवाओं को रोजगार मिले, किसानों को आधुनिक तकनीक उपलब्ध हो और प्रदेश आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंचाई और जल संरक्षण के क्षेत्र में आधुनिक पाइप, ड्रिप और स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई इकाई कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में किसान इरिगेशन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की चौथी नवीन विनिर्माण इकाई के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फैक्ट्री परिसर में शिव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान से पूजा-अर्चना भी की। मुख्यमंत्री ने कंपनी प्रबंधन को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उद्योगों का विस्तार केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि समाज के समग्र विकास का भी आधार है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नई विनिर्माण इकाई के प्रारंभ होने से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा प्रदेश में कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े आधुनिक उत्पादों के उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योग, कृषि और तकनीक के समन्वय से विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवीन इकाई का अवलोकन किया और पाइप निर्माण में उपयोग की जा रही अत्याधुनिक मशीनों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कंपनी द्वारा कृषि, सिंचाई और जल प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कंपनी प्रबंधन को बधाई दी।

कंपनी के एमडी कुणाल अग्रवाल ने जानकारी दी कि किसान इरिगेशन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की स्थापना लगभग 40 वर्ष पूर्व हुई थी। वर्तमान में कंपनी की कुल 5 इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से 4 इकाइयां पीथमपुर में स्थित हैं। कंपनी पीवीसी पाइप्स, एचडीपीई पाइप्स, सीपीवीसी एवं यूपीवीसी पाइप्स और फिटिंग्स के निर्माण के साथ-साथ वॉटर टैंक, ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर इरिगेशन सिस्टम के निर्माण का कार्य करती है। चौथी नवीन इकाई में एचडीपीवी और डीडब्ल्यूसी पाइप्स का निर्माण किया जाएगा, जिससे कृषि, सिंचाई और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को आधुनिक उत्पाद उपलब्ध होंगे।

कार्यक्रम में धार विधायक  नीना वर्मा, जनप्रतिनिधिगण, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, आईजी अनुराग तथा धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा सहित कम्पनी के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 

पासपोर्ट सत्यापन को अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के लिए संभाग स्तरीय पुलिस प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन

भोपाल

आमजन को पासपोर्ट संबंधी सेवाएं अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपलब्ध कराने तथा पुलिस सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा संभाग स्तर पर पुलिस प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम मेंअतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक गुप्‍तवार्ता  ए.साईं मनोहर के मार्गदर्शन एवं उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्‍यवस्‍था  तरूण नायक के निर्देशन में इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में पहली बार इंदौर संभाग स्तरीय पुलिस प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तकनीकी एवं प्रक्रियागत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

कार्यशाला में पुलिस उपायुक्त (आसूचना/सुरक्षा)  अमन सिंह राठौड़, पुलिस मुख्यालय भोपाल की सहायक पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मती रश्मि मिश्रा, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (आसूचना) मती प्रियंका डुडवे, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भोपाल एवं इंदौर तथा टीसीएस की तकनीकी टीम के प्रतिनिधि, इंदौर संभाग के सभी आठ जिलों—इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी एवं बुरहानपुर—के पासपोर्ट सत्यापन कार्य से जुड़े पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी प्रशिक्षण में शामिल हुए, जबकि संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

इस अवसर पर पुलिस आयुक्त  संतोष कुमार सिंह ने कहा कि पासपोर्ट सत्यापन केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह नागरिकों के विश्वास, राष्ट्रीय सुरक्षा एवं प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संवेदनशीलता, पारदर्शिता तथा निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण सत्यापन सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

पासपोर्ट ऑफिसर  सुतांशु चौरसिया ने कहा कि पुलिस एवं पासपोर्ट विभाग के उत्कृष्ट समन्वय के परिणामस्वरूप वर्ष 2024 एवं 2025 में मध्यप्रदेश ने पासपोर्ट सत्यापन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए दक्षता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ कार्य करने पर बल दिया।

अतिरिक्‍त पुलिस आयुक्त (अपराध/मुख्यालय)  आर.के. सिंह ने कहा कि समयबद्ध, निष्पक्ष एवं तथ्यपरक पुलिस सत्यापन ही नागरिकों को त्वरित एवं विश्वसनीय पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराने का आधार है।

कार्यशाला के दौरान एआईजी मती रश्मि मिश्रा, क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय भोपाल एवं इंदौर तथा टीसीएस की टीम द्वारा पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही पासपोर्ट कार्य को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनहितैषी बनाने के लिए विचार-विमर्श किया गया तथा सत्यापन के दौरान महत्वपूर्ण पहलुओं एवं सावधानियों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया गया।

मध्यप्रदेश पुलिस का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कार्यकुशलता को और अधिक सशक्त बनाते हुए आमजन को शीघ्र, सरल, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण पासपोर्ट सेवाएं उपलब्ध कराना तथा पुलिस एवं पासपोर्ट विभाग के मध्य समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाना है। प्रदेश के अन्य संभागों में भी इसी प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन चरणबद्ध रूप से किया जाएगा, ताकि पूरे प्रदेश में पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक दक्ष, एकरूप एवं समयबद्ध बनाया जा सके। 

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