सतना रेलवे स्टेशन पर बड़ी चूक, डिस्प्ले में इंटरसिटी तो प्लेटफॉर्म पर पहुंची महाकौशल एक्सप्रेस

सतना 

रेलवे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर चाहे जितने दावे करे, लेकिन बुधवार को सतना रेलवे स्टेशन पर हुई एक बड़ी लापरवाही ने इन दावों की पोल खोल दी। स्टेशन पर उद्घोषणा प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर जिस ट्रेन को इंटरसिटी एक्सप्रेस बताया जा रहा था, प्लेटफॉर्म पर उसके स्थान पर महाकौशल एक्सप्रेस पहुंच गई। इस गड़बड़ी से यात्रियों में भारी भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई।

यह गड़बड़ी उस वक्त हुई जब प्लेटफार्म नंबर एक पर यात्री इंटरसिटी एक्सप्रेस का इंतजार कर रहे थे। स्टेशन पर लगातार इंटरसिटी एक्सप्रेस के आगमन की घोषणा की जा रही थी। इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड पर भी इंटरसिटी का नाम प्रदर्शित हो रहा था। उद्घोषणा और डिस्प्ले पर भरोसा कर बड़ी संख्या में यात्री अपने-अपने सामान के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहे थे।

गलत उद्घोषणा से यात्रियों में मची अफरा-तफरी

लेकिन जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंची तो वह महाकौशल एक्सप्रेस निकली। अचानक हुए इस घटनाक्रम से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री भ्रमित होकर ट्रेन में चढ़ने और उतरने को लेकर असमंजस में दिखाई दिए। दरअसल रेलवे की उद्घोषणा प्रणाली और डिस्प्ले बोर्ड ही उनकी जानकारी का प्रमुख माध्यम होते हैं।

यदि इन्हीं में गलत जानकारी प्रसारित की जाए तो यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और किसी दिन यह लापरवाही बड़ी दुर्घटना या गंभीर अव्यवस्था का कारण भी बन सकती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर स्टेशन प्रबंधन की निगरानी में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या उद्घोषणा कक्ष और कंट्रोल सिस्टम के बीच समन्वय का अभाव है या फिर कर्मचारियों की लापरवाही इसका कारण बनी? फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

 

मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक, 34 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी

भोपाल

 मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले छतरपुर और छिंदवाड़ा में लू चली। बुधवार को छतरपुर जिले के खजुराहो का पारा 45.0 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा, वहीं नौगांव में भी पारा 44.6 डिग्री दर्ज किया गया। छिंदवाड़ा में दिन का तापमान सामान्य से 4.5 डिग्री अधिक यानी 40.8 डिग्री रिकॉर्ड हुआ, जिससे लोग लू के थपेड़ों से बेहाल रहे।

प्रदेश के पश्चिमी इलाकों में अधिकतम तापमान 34.0 से 43.6 डिग्री और पूर्वी क्षेत्रों में 39.0 से 45.0 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों तक प्रदेश के तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद पारे में 2 से 3 डिग्री गिरावट की संभावना जताई गई है।

सिवनी में 3.0 मिलीमीटर हुई वर्षा और 70 किमी की रफ्तार से चली आंधी

मौसम केंद्र के अनुसार बुधवार को सिवनी में 3.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और उमरिया में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चली और बिजली चमकी।

वहीं बैतूल, मंडला, अनूपपुर और शहडोल में 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। शाम होतेहोते जबलपुर, छतरपुर, दमोह, उज्जैन, रतलाम सहित कई जिलों में मौसम बदल गया।

आज यहां चलेंगी तेज हवाएं, येलो अलर्ट जारी

गुरुवार को रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सागर और छतरपुर सहित करीब 34 जिलों में गरजचमक के साथ वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका जताई गई है। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

प्रदेश के चार बड़े शहरों का तापमान

शहर

अधिकतम

न्यूनतम

भोपाल

40.4

27.6

इंदौर

38.9

25.4

ग्वालियर

43.1

29.4

जबलपुर

40.5

25.0

 

कांग्रेस विधायकों की एकजुटता ने भाजपा की रणनीति को किया विफल

कांग्रेस विधायकों की एकजुटता ने भाजपा की रणनीति को किया विफल

मैं कांग्रेस परिवार के अपने सभी विधायक साथियों का हृदय से धन्यवाद और अभिनंदन करता हूँ। जिस तरह से आप सभी ने लोकतांत्रिक मूल्यों, पार्टी की विचारधारा और जनता के विश्वास की रक्षा के लिए मजबूती से एकजुटता दिखाई, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है।

भाजपा के धनबल और दबाव की राजनीति के सामने नहीं झुके विधायक

हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में भाजपा ने अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए धनबल, सत्ता के प्रभाव और विभिन्न एजेंसियों के दबाव का सहारा लेने का हर संभव प्रयास किया। कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने और पार्टी की एकजुटता को कमजोर करने की कोशिशें लगातार की गईं। लेकिन कांग्रेस के सभी विधायक साथियों ने इन प्रयासों को पूरी तरह विफल कर दिया और यह साबित कर दिया कि वे जनता द्वारा दिए गए जनादेश और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

कांग्रेस की एकजुटता से घबराई भाजपा

जब भाजपा अपने सभी प्रयासों के बावजूद कांग्रेस परिवार में किसी प्रकार की टूट पैदा करने में सफल नहीं हो सकी, तब उसे यह एहसास हो गया कि कांग्रेस की ताकत उसकी एकजुटता में है। यही कारण है कि राजनीतिक मुकाबले में सफल न होने के बाद भाजपा ने ऐसे कदम उठाए, जिन पर गंभीर संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रश्न खड़े होते हैं। हमारा मानना है कि इसी वजह से अंततः हमारा नामांकन निरस्त करवाने जैसी स्थिति निर्मित की गई।

लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का संघर्ष

यह केवल किसी एक उम्मीदवार या किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है। यह लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा का विषय है। जब लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने का प्रयास होता है, तब विपक्ष की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। कांग्रेस हमेशा संविधान की भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है और आगे भी करती रहेगी।

जनता के विश्वास से मिलेगा जवाब

मध्य प्रदेश की जनता सब कुछ देख रही है और समझ रही है। जनता जानती है कि कौन लोकतंत्र को मजबूत करने का काम कर रहा है और कौन सत्ता के बल पर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रहा है। हमें विश्वास है कि प्रदेश की जनता उचित समय पर अपने मत के माध्यम से इसका जवाब देगी।

एकजुट कांग्रेस ही बनेगी परिवर्तन की ताकत

आज कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता, नेता और विधायक पूरी मजबूती के साथ एकजुट खड़ा है। यही एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। जब संगठन एकजुट होता है, तब कोई भी राजनीतिक शक्ति जनता की आवाज को दबा नहीं सकती। कांग्रेस की यही एकजुटता आने वाले समय में मध्य प्रदेश में परिवर्तन का आधार बनेगी।

मध्य प्रदेश में बदलाव का संकल्प

हम प्रदेश के किसानों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों और समाज के हर वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाते रहेंगे। हमारा लक्ष्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास, सामाजिक न्याय और जनकल्याण को सुनिश्चित करना है। इसी संकल्प और जनता के सहयोग के बल पर हम मध्य प्रदेश में एक नई दिशा और नया नेतृत्व स्थापित करेंगे।

मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस की यह एकजुटता, कार्यकर्ताओं का समर्पण और जनता का समर्थन आने वाले समय में मध्य प्रदेश से भाजपा को सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

एकजुट कांग्रेस, मजबूत लोकतंत्र और समृद्ध मध्य प्रदेश हमारा संकल्प है।

लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस का एक दिवसीय उपवास

भारतीय लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना पर प्रहार करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी सुश्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किया गया। कांग्रेस का मानना है कि यह निर्णय लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं के विपरीत है।

इसी के विरोध में आज भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने एक दिवसीय उपवास कर लोकतंत्र की रक्षा तथा निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया की मांग को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश में लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग और विपक्ष की आवाज़ को दबाने के प्रयास लगातार सामने आ रहे हैं। पार्टी का कहना है कि प्रदेश की जनता इन घटनाओं को गंभीरता से देख रही है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से अपना निर्णय देगी।

इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था की रक्षा के लिए उनका संघर्ष निरंतर जारी  रहेगा

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक 11 जून को नई दिल्ली में

भोपाल 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक 11 जून को नई दिल्ली में होने जा रही है। बैठक का विषय ‘2047 तक विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस अति महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए 10 जून को नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।

नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की इस बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्री और उप राज्यपाल एक साथ मिलकर समावेशी मानव विकास प्रारूप पर चर्चा करेंगे। बैठक मुख्यत: ‘मूलभूत मानव पूंजी और भविष्य के लिए तैयार कौशल’, ‘उत्पादक रोजगार, उद्यमिता और विकेंद्रीकृत विकास’, ‘स्वास्थ्य, पोषण और कल्याण’ एवं ‘सभी के लिए समानता और गरिमा’ से जुड़े विषयों पर केन्द्रित रहेगी। बैठक में देश भर में उद्यमिता को बढ़ावा देने, कौशल विकास को बढ़ाने और स्थायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

बैठक में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल/प्रशासक, केंद्रीय मंत्री पदेन सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में और नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

 

प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नायक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नायक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

गरीब परिवार में जन्में प्रधानमंत्री मोदी आज देश के गरीब परिवारों के लिए हैं आदर्श: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के 25 करोड़ लोगों को मकान दिलवाए, 80 करोड़ नागरिकों को बांटा जा रहा है नि:शुल्क अनाज
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने पर, मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुफा मंदिर के कार्यक्रम में हुए शामिल
प्रधानमंत्री मोदी को हनुमान चालीसा और प्रार्थना कार्यक्रम में शामिल होकर दी बधाई

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर प्रदेशवासियों की ओर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आज़ादी के बाद निर्वाचित रूप से सबसे अधिक अवधि तक देशसेवा करने का रिकॉर्ड आज अपने नाम किया है। वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नायक हैं, जिन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सर्वाधिक लंबे समय तक कार्य किया है। यह सभी देशवासियों के लिए गौरवशाली क्षण है। प्रधानमंत्री मोदी, जनता के हित में एकजुटता के साथ कार्य करते हैं। वे अपनी पूर्ण क्षमता के साथ भारत को दुनिया में नंबर-1 देश बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आंतरिक रूप से सुरक्षित है, और सीमा से बाहर भी दुश्मनों के दांत खट्टे कर भारतीय सेना ने अपनी सामर्थ्य सिद्ध की है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र सेवा के 12 वर्ष पूर्णहोने पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव, भोपाल के गुफा मंदिर में आयोजित हनुमान चालीसा और प्रार्थना कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हनुमान चालीसा का श्रवण कर भगवान का पूजन अर्चन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के बाद उपस्थित नागरिकों को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में स्थानीय सांसद आलोक शर्मा, रविन्द्र यति तथा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के भीतर जनसेवा और सीमा पर सामरिक सुरक्षा सशक्त हुई है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राम राज्य में कोई भूखा नहीं सोता था, बेटियां सुरक्षित थीं, गौमाता के पूजन के साथ-साथ सनातन संस्कृति के मंदिरों का वैभव था। प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल भी इन्हीं उपलब्धियों का साक्षी है। प्रधानमंत्री मोदी सादगीपूर्ण जीवनशैली के साथ देश सेवा में समर्पित हैं। उन्होंने देश के 25 करोड़ लोगों को मकान दिलवाए, 80 करोड़ नागरिकों को नि:शुल्क अनाज वितरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर निकलकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर रहे हैं। हम सभी के लिए गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश के भीतर जनसेवा और सीमा पर सामरिक सुरक्षा सशक्त हुई है।

देश में एक नए संकल्प का वातावरण है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान राम और हनुमान जी के आशीर्वाद से पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी पवित्र गीता में बताए कर्मवाद के सिद्धांत पर काम करते हैं। उन्होंने अपने कार्यों से पृथ्वी पर अपने जन्म को सार्थक किया है। गरीब परिवार में जन्मे प्रधानमंत्री मोदी आज देश के गरीब परिवारों के लिए एक आदर्श हैं। देश में एक नए संकल्प का वातावरण है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सबको अवसर मिलता है। प्रदेशवासी अपने जीवन में संकल्प लें, संघर्ष करें और आगे बढ़ें।

हम जो कहते हैं वो करके दिखाते हैं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बन चुका है। देश-दुनिया से श्रद्धालु मंदिर में प्रभु श्रीराम और हनुमान जी का आशीर्वाद ले रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हम जो कहते हैं वो करके दिखाते हैं। प्रभु श्रीराम की विशेष कृपा मध्यप्रदेश पर है, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के संकल्प के साथ देश आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का मध्यप्रदेश को लगातार आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है

स्थानीय सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने विगत वर्षों में विकास, सुशासन, आत्मनिर्भरता, डिजीटल नवाचार और इन्फ्रास्ट्रक्टर निर्माण में अभूतपूर्व उपलब्धियां दर्ज की हैं। प्रधानमंत्री मोदी के मन में गरीब, किसान, नारी सशक्तिकरण और युवाओं के गहरी संवेदना हैं। मध्यप्रदेश को हर पल उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन निरंतर प्राप्त हो रहा है।

 

भोपाल में पार्टी-फंक्शन से पहले लेनी होगी परमिशन, मेहमानों की जानकारी देना भी हुआ जरूरी

​​भोपाल
 शहर में स्वच्छता व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नगर निगम परिषद ने केंद्र सरकार के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को लागू करने का फैसला किया है. अब नगर निगम की नजर सिर्फ बड़े राजनीतिक या व्यावसायिक आयोजनों पर ही नहीं, बल्कि घरों में होने वाले छोटे-मोटे कार्यक्रमों जैसे बर्थ-डे पार्टी, सगाई, फेयरवेल और कॉलोनी के फंक्शन्स पर भी रहेगी। 

निगम अधिकारियों का कहना है कि नए नियमों का मुख्य उद्देश्य बड़े और छोटे आयोजनों से निकलने वाले कचरे पर नियंत्रण पाना और लोगों की जवाबदेही तय करना है. ऐसे में नियमों का उल्लंघन करने या खुले में कचरा फेंकने और जलाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 

​100 मेहमान जुटे तो 3 दिन पहले देनी होगी सूचना
​नए नियमों के अनुसार यदि किसी भी निजी, धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में 100 या उससे अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है, तो आयोजक को कार्यक्रम से 3 दिन पहले नगर निगम को इसकी लिखित जानकारी और अनुमति लेनी होगी. आयोजकों को पहले से यह बताना होगा कि कार्यक्रम कहां हो रहा है, कितने लोग आएंगे और वहां पैदा होने वाले कचरे के निपटारे के लिए क्या व्यवस्था की गई है. बिना सूचना दिए आयोजन करने या कचरा प्रबंधन के नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। 

बिना छंटनी पर 150 प्रतिशत जुर्माना
​अब भोपाल के हर घर और व्यावसायिक संस्थान को अपने कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रखना होगा. ऐसा न करने और 100 किलोग्राम से अधिक कचरा अलग-अलग श्रेणियों में देने पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जाएगा। 

कचरे को इन 4 भागों में विभाजित करना होगा अनिवार्य

​गीला कचरा- रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके और पेड़-पौधों की हरी पत्तियां.

​सूखा कचरा- रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, धातु, कांच की बोतलें और फटे-पुराने कपड़े.

​सैनिटरी कचरा – डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिश्यू पेपर और घरेलू स्तर का मेडिकल वेस्ट.

​घरेलू ई-वेस्ट – मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, बल्ब, घरेलू केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां.

​बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसर भी दायरे में
नगर ​निगम ने बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी तय की है, जिसमें शहर के लगभग 2 हजार आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी परिसर शामिल होंगे. नियमों के दायरे में आने वाले मानदंड इस प्रकार है। 

    ​आवासीय भवन – कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.
    ​होटल और रेस्टोरेंट – कुल फ्लोर एरिया 5,000 वर्ग मीटर या अधिक होने पर.
    कचरा उत्पादन – प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान.

पंचायत सचिवों के लिए नई तबादला नीति जारी, गृहग्राम और ससुराल में नहीं कर सकेंगे पदस्थापना

भोपाल

तबादला सीजन के बीच पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पंचायत सचिवों के स्थानांतरण को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी है। नई नीति के तहत अब कोई भी पंचायत सचिव अपने गृहग्राम या ससुराल की पंचायत में पदस्थ नहीं रह सकेगा। इसके साथ ही जिस पंचायत में सचिव के रिश्तेदार सरपंच या उपसरपंच बन जाएंगे, वहां से भी सचिव का तबादला किया जाएगा।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के आधार पर यह नई गाइडलाइन जारी की है। विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तय समय सीमा के भीतर स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कराई जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 23 हजार से ज्यादा पंचायत सचिव हैं।

15 जून तक होंगे तबादले
9 जून को जारी आदेश के अनुसार 15 जून तक जिले के भीतर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण किए जा सकेंगे। स्थानांतरण प्रस्ताव जिला कलेक्टर की अनुशंसा और प्रभारी मंत्री की स्वीकृति के बाद जारी किए जाएंगे। यह प्रक्रिया एक जून से ही मान्य की जाएगी।

विभागीय निर्देशों के मुताबिक स्थानांतरण आदेश मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा जारी किए जाएंगे। नई गाइडलाइन में जिला एवं अंतरजिला स्तर पर पंचायत सचिवों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी तय की गई है।

सरकार को इसलिए रखनी पड़ी शर्त
दिग्विजय सरकार ने वर्ष 1994 से 1996 के बीच पंचायत कर्मियों की नियुक्ति की थी, जो आज पंचायत सचिव हैं। तब नियुक्ति ग्राम सभा के अनुमोदन से की गई थी और ज्यादातर मामलों में ग्राम सभा ने सरपंच, उप सरपंच, पंच या गांव के प्रभावशाली व्यक्ति के रिश्तेदारों को नियुक्त किया था। ज्यादातर मामलों में देखने में आया है कि ये जनप्रतिनिधि रिश्तेदारी या अहसान के बदले सचिवों को वह सब करने के लिए राजी कर लेते हैं, जो वे चाहते हैं। ऐसे कई मामले जांच में आ चुके हैं। जिनमें सरपंच, उप सरपंच और सचिव ने मिलकर गड़बड़ी की है। इसलिए सरकार को तबादला नीति में यह शर्तें जोड़नी पड़ीं।

इन परिस्थितियों में स्थानांतरण होगा अनिवार्य
विभाग ने कुछ मामलों में ग्राम पंचायत सचिवों का स्थानांतरण अनिवार्य किया है, जिनमें इस तरह की परिस्थितियां शामिल हैं।

    यदि किसी ग्राम पंचायत में सचिव का रिश्तेदार पंचायत का सरपंच या उपसरपंच चुन लिया गया हो।
    सचिव को उसके पैतृक ग्राम या ससुराल स्थित ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं किया जाएगा।
    जो सचिव एक ही ग्राम पंचायत में 10 वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थ हैं, उन्हें प्राथमिकता से स्थानांतरित किया जाएगा।
    यदि 10 साल या अधिक समय से पदस्थ सचिवों की संख्या तबादला लिमिट से अधिक है तो पहले सबसे अधिक अवधि से पदस्थ सचिव का तबादला किया जाएगा।

प्रतिबंध अवधि में भी संभव होगा इनका स्थानांतरण
    स्थानांतरण प्रतिबंध अवधि के दौरान विशेष परिस्थितियों में इन सचिवों के तबादले किए जा सकेंगे।
    भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता या गंभीर शिकायतों के मामले।
    अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित होने की स्थिति।
    लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू अथवा अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई से जुड़े प्रकरण।
    उच्च प्राथमिकता वाले प्रशासनिक मामलों में शासन स्तर से प्राप्त निर्देश।
    ऐसे मामलों में विभागीय मंत्री की स्वीकृति के बाद आयुक्त, संचालक पंचायत राज द्वारा आदेश जारी किए जाएंगे।

अंतरजिला संविलियन केवल स्वैच्छिक आधार पर
    आदेश में अंतरजिला संविलियन (ट्रांसफर) को केवल स्वैच्छिक आधार पर अनुमति दी गई है।
    महिला सचिवों को विशेष सुविधा मिलेगी। इसमें विवाहित, विधवा एवं तलाकशुदा महिला ग्राम पंचायत सचिव अपने पति, ससुराल या माता-पिता के निवास वाले जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगी।
    अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त सचिव, यदि उनकी नियुक्ति वाले जिले के अलावा किसी अन्य जिले से संबंध रखते हैं, तो वे भी अपने मूल जिले में संविलियन के लिए आवेदन कर सकेंगे।
    इच्छुक सचिव को वर्तमान पदस्थापना जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को आवेदन देना होगा।
    आवेदन के साथ संबंधित जिले में रिक्त पद की उपलब्धता का सत्यापन किया जाएगा।
    रिक्त पद उपलब्ध होने पर प्रस्ताव पंचायत राज संचालनालय भोपाल भेजा जाएगा।
    प्रशासनिक स्वीकृति के बाद संविलियन आदेश जारी किए जाएंगे।
    संविलियन के बाद सचिव का नाम वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाएगा।
    अंतरजिला संविलियन का लाभ केवल एक बार ही दिया जाएगा।

Bhopal Recruitment 2026: गांधी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के 22 पदों पर भर्ती, 25 जून तक करें आवेदन

भोपाल
 राजधानी के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (जीएमसी) में सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित जीएमसी स्वशासी समिति द्वारा विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी और ब्रांड स्पेशियलिटी विभागों में रिक्त 22 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इच्छुक अभ्यर्थी 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं।

इन विभागों में होंगी नियुक्तियां
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 15 विभागों में नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें कम्युनिटी मेडिसिन (स्टेटिस्टिक्स), न्यूरोसर्जरी ट्रॉमा यूनिट, स्पोर्ट्स मेडिसिन, जनरल मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी, पीडियाट्रिक नियोनेटोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, फार्माकोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, रेडियोडायग्नोसिस, नेफ्रोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन जैसे विभाग शामिल हैं।

सातवें वेतनमान का मिलेगा लाभ
चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतनमान के वेतन मैट्रिक्स लेवल-11 के अनुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा राज्य शासन द्वारा स्वीकृत अन्य भत्ते एवं सुविधाएं भी नियमानुसार मिलेंगी।

तीन वर्ष के सेवा बांड पर होगी नियुक्ति
भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित चिकित्सकों की नियुक्ति प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के सेवा बांड या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, के आधार पर की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा विभाग का उद्देश्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाकर चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है। 

MP में सरकारी नौकरियों के लिए खत्म हुआ दो बच्चों का नियम, भाजपा सरकार का बड़ा फैसला

भोपाल 

मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में सरकारी सेवा नियमों से दो-बच्चों की शर्त को वापस ले लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्रस्तावित मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों में शामिल दो-बच्चों की शर्त के मसौदे को वापस ले लिया गया है और सरकारी पोर्टल से इसे ‘तत्काल’ हटाने का आदेश दिया गया है।

राज्य सरकार द्वारा देर शाम जारी एक रिलीज में कहा गया, ”मुख्यमंत्री ने यह बड़ा फैसला सरकारी कर्मचारियों और सरकारी सेवा की इच्छा रखने वाले अभ्यर्थियों के हित में यह बड़ा फैसला लिया है।”

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने इस मामले को देखा और आदेश दिया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के उस प्रस्ताव को वापस लिया जाए जिसमें सरकारी नौकरी के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त रखी गई थी।

मोहन यादव ने आधिकारिक पोर्टल से ट्राफ्ट को तुरंत हटाने को कहा है। हालांकि, यह नियम प्रदेश में काफी पुराना है। 2001 में सामान्य प्रशासन विभाग ने इस प्रावधान को लागू किया था। इसके तहत दो से अधिक जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सीधी भर्ती या विभागों में नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

सीएम ने नया आदेश प्रकाशित करने को कहा
मध्य प्रदेश में 2001 में लागू किए गए नियम के मुताबिक, 26 जनवरी 2001 के बाद दो से अधिक जीवित संतान वाले लोग सरकारी नौकरी के योग्य नहीं थे। इसके अलावा एमपी सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स 1965 के तहत दो से अधिक बच्चे होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार माना जाता था। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अब तक के सबी नियमों को हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने नया मसौदा तैयार करने का आदेश दिया है।

नए मसौदे के बाद सीएम का ऐक्शन
दरअसल, मध्य प्रदेश में सेवा की सामान्य शर्तें नियम 2026 का मसौदा तैयार किया गया था और इस पर आम लोगों से 15 जून तक सुझाव मांगे गए थे। इसमें लाए गए कई नए नियमों के बीच बच्चे वाले पुराने नियम को भी शामिल किया गया था। लेकिन अब मोहन यादव सरकार ने इसे खत्म करने का आदेश दे दिया है।

2001 में लागू हुआ थआ ‘टू चाइल्ड’ का नियम
यह याद किया जा सकता है कि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा लिए गए एक निर्णय के तहत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक प्रावधान लागू किया था जिसके अनुसार दो से ज्यादा जीवित बच्चों वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा में सीधी भर्ती और विभागीय नियुक्तियों के लिए अयोग्य माना जाता था।

2001 में लागू मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 26 जनवरी 2001 को या उसके बाद जिन उम्मीदवारों के दो से अधिक जीवित बच्चे थे, उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सामान्य सेवा शर्तें) नियम, 1961 के तहत सरकारी सेवा के लिए अयोग्य माना जाता था।

इसके अलावा, मध्य प्रदेश सेवा नियम (Conduct), 1965 के तहत दो से ज्यादा बच्चों का होना सरकारी कर्मचारियों के लिए कदाचार (मिसकंडक्ट) माना जाता था।

मुख्यमंत्री श्री यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को तुरंत प्रस्तावित नियमों का मसौदा वापस लेने और सरकारी सेवा से अयोग्यता से जुड़े उन सभी प्रावधानों को हटाने का निर्देश दिया है। यह प्रावधान दो से ज्यादा जीवित बच्चों के आधार पर लागू होते थे।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि नियमानुसार प्रक्रिया अपनाते हुए एक संशोधित मसौदा तैयार कर उसे प्रकाशित किया जाए।

UCC लागू करने की तैयारी में मोहन सरकार
क संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। यादव ने मीडिया से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति राज्य में यूसीसी लागू करने के लिए धर्मगुरुओं की राय लेगी।

मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “मध्य प्रदेश में यूसीसी को लागू किया जाएगा, क्योंकि आज धार्मिक-सामाजिक-पारिवारिक रूप से भिन्न-भिन्न मतों की आवश्यकता नहीं है। आज जरूरत यूसीसी की ओर बढ़ने की है।”

 

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