संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन बना भोपाल का दूसरा जंक्शन, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे हुजूर विधानसभा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया, कहा— बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

भोपाल के संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन को अब आधिकारिक रूप से जंक्शन का दर्जा मिल गया है। आदेश जारी होने के बाद यह स्टेशन भोपाल का दूसरा जंक्शन बन गया है। इस उपलब्धि पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं भोपाल सांसद आलोक शर्मा का आभार व्यक्त किया।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यह निर्णय हुजूर विधानसभा क्षेत्र और संत नगर के समग्र विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। जंक्शन बनने से क्षेत्र की व्यापारिक पहचान को मजबूती मिलेगी, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से सीधा रेल संपर्क स्थापित होने से आवागमन और परिवहन अधिक सुगम होगा।

उन्होंने बताया कि ट्रेन सुविधाओं के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। संत हिरदाराम नगर को आधुनिक रेलवे सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में पहले भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। विधायक शर्मा के प्रयासों से ही स्टेशन को रतलाम डीआरएम से भोपाल डीआरएम में शामिल किया गया था तथा ‘बैरागढ़ स्टेशन’ का नाम बदलकर ‘संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन’ किया गया।

वर्तमान में अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत स्टेशन के आधुनिकीकरण का कार्य भी तेज गति से जारी है। जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद अब क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी, ट्रेनों की संख्या में वृद्धि, व्यापारिक विकास और रोजगार के नए आयाम स्थापित होने की उम्मीद है।

26 साल बाद खुला रहस्य: भाखड़ा नहर से मिली लापता परिवार की वैन, अंदर मिले कंकाल

साल 2000 में शादी से लौटते वक्त अचानक गायब हुआ था पूरा परिवार

साल 2000 में कोटला गांव के रहने वाले मुन्नी लाल, तेज राम, सुरजीत सिंह और सुरजीत का 8 साल का बेटा कालू एक शादी समारोह में शामिल होकर घर लौट रहे थे। सभी लोग तेज राम की नई वैन में सवार थे, जिसे उन्होंने हादसे से कुछ समय पहले ही खरीदा था।

लेकिन उस रात चारों लोग कभी घर नहीं पहुंचे। परिवार और गांव वालों ने हर जगह तलाश की। पुलिस जांच हुई, निजी गोताखोर लगाए गए, यहां तक कि परिवार वालों ने जमीन बेचकर खोज अभियान चलाया, लेकिन वैन और उसमें सवार लोगों का कोई सुराग नहीं मिला।

अब 26 साल बाद इस रहस्य से पर्दा उठा है। जानकारी के मुताबिक, भाखड़ा नहर में एक दूसरे मामले की जांच के दौरान गोताखोरों को नहर की तलहटी में एक पुरानी वैन दिखाई दी। जब वैन को बाहर निकाला गया तो उसके अंदर कंकाल, यूनिफॉर्म और कई पुराने सामान मिले।

माना जा रहा है कि अंधेरे में रास्ता भटकने के कारण वैन नहर में गिर गई होगी, जिससे चारों लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया है।

“Cockroach Janta Party” Meme नहीं, युवाओं का गुस्सा है — उमंग सिंघार

बेरोज़गारी, पेपर लीक और टूटी व्यवस्था से परेशान युवा अब अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने “Cockroach Janta Party” को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल एक meme या सोशल मीडिया trend नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह उस पीढ़ी का गुस्सा है, जो लगातार बेरोज़गारी, पेपर लीक और खराब व्यवस्था का सामना कर रही है।

12 Million+ लोग इसलिए नहीं जुड़े क्योंकि यह trend है, बल्कि इसलिए क्योंकि देश का युवा अब चुप रहने को तैयार नहीं है।

उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि युवाओं की आवाज़ को सुनिए, दबाइए मत।

BJP का दबदबा अभी लंबा चलेगा? प्रदीप गुप्ता बोले- 20 साल तक मजबूत रहेगी पकड़

नई दिल्ली

एक्सिस माय इंडिया (Axis My India) के प्रमुख और पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रदीप गुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि 2014 में शुरू हुआ भाजपा के राजनीतिक दबदबे का मौजूदा दौर कम से कम 20 साल तक जारी रहेगा। ‘द एक्सिस माई इंडिया’ सर्वेक्षण संस्था के प्रमुख गुप्ता ने तर्क दिया कि सत्तारूढ़ दल की स्थिति तब तक सुरक्षित रहेगी जब तक उसके शासन का प्रदर्शन बहुत कमजोर नहीं हो जाता। मालूम है कि प्रदीप गुप्ता के एक्सिस माय इंडिया के अतीत में ज्यादातर सर्वे और एग्जिट पोल्स सही साबित हुए हैं। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव के एग्जिट पोल में उनसे चूक हो गई थी।

कांग्रेस के लंबे समय तक रहे राजनीतिक प्रभुत्व के साथ तुलना करते हुए, गुप्ता ने कहा कि भारतीय राजनीति एक पार्टी के प्रभाव के एक और दौर की साक्षी बन रही है। गुप्ता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ”राजनीति में एक सीमा होती है। पहले, कांग्रेस ने 1977 तक लगातार शासन किया। उसके बाद, उसे मुश्किलें आने लगीं। उन दिनों, हम लगभग 20 साल तक चलने वाली राजनीतिक पीढ़ी की बात करते थे। वह 20 साल का दौर अब भी बना रहेगा।”

‘राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है BJP’
उन्होंने कहा कि भाजपा भी इसी तरह लंबे समय तक भारतीय राजनीति का केंद्रीय ध्रुव बनी रह सकती है। उनके विचार में, सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों का भविष्य काफी हद तक मौजूदा सरकार के कामकाज पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, ”इतना बड़ा जनादेश मिलने के बाद, भाजपा से उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। इसलिए भाजपा और एनडीए को अब शानदार कामकाज करना होगा।” गुप्ता ने कहा, ”जब तक उनका प्रदर्शन कमजोर या खराब नहीं होता, वे जीतते रहेंगे और विपक्ष हारता रहेगा।”

‘कांग्रेस के लिए विरासत में मिले मुद्दों का बोझ बना हुआ है’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पहले कुशासन रहने की धारणाओं से जुड़े ‘विरासत में मिले मुद्दों’ का बोझ बना हुआ है जिससे उसके राजनीतिक नुकसान की भरपाई एक लंबी प्रक्रिया बन गई है। उन्होंने कहा, ”अगर आप 2029 की भी बात करें, तो इसका मतलब होगा लगभग 15 साल (कांग्रेस के लिए सत्ता से बाहर रहने के)। मुझे लगता है कि उन्हें पूरे देश को मनाने में कम से कम पांच साल और लग सकते हैं।” गुप्ता ने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभुत्व ने जनता की आकांक्षाएं भी बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, ”जब आप बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचते हैं, तो बाद में नीचे आने की भी प्रवृत्ति बनी रहती है। भाजपा भी उस स्तर पर पहुंच गई है जहां उससे आकांक्षाएं बढ़ गई हैं।”

‘यूपी में शासन के प्रति संतुष्टि का स्तर अच्छा, पंजाब में मिला-जुला’
वहीं, प्रदीप गुप्ता का कहना है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है और सत्तारूढ़ भाजपा मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि जनता योगी आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से काफी हद तक संतुष्ट है। गुप्ता ने कहा कि पंजाब में चार-कोणीय मुकाबले के उभरने के कारण सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के प्रति जनता की संतुष्टि का स्तर ”मिला-जुला’ बना हुआ है। प्रदीप गुप्ता ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन दोनों राज्यों में अपनी एजेंसी के जमीनी स्तर पर किए गए काम से प्राप्त अवलोकन साझा किए। दोनों राज्यों में 2027 की शुरुआत में चुनाव प्रस्तावित है और जिनके परिणामों का व्यापक राष्ट्रीय प्रभाव होने की उम्मीद है।

पेट्रोल-डीजल के बाद अब महंगाई का नया झटका! रुपये की गिरावट बढ़ाएगी बोझ

नई दिल्‍ली
मिडिल ईस्‍ट में तनाव और तेल की कीमतें ऊपर जाने के कारण पेट्रोल और डीजल के दाम में अभी तक दो बार बढ़ोतरी की गई है और आगे भी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इन सबसे परे सरकार एक और बड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है, जिसका बोझ आम आदमी के ऊपर आ सकता है। 

दरअसल, पिछले कुछ समय से भारतीय करेंसी (Rupee) में बड़ी गिरावट देखी गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपया एक साल के दौरान 10 से 12 फीसदी तक गिर गया है. ऐसे में कई एक्‍सपर्ट्स रुपये को 100 लेवल के पार जाने की संभावना जता रहे हैं. इस बीच, RBI कई बड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, ताकि रुपये की गिरावट को रोका जा सके।  

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में स्थिरता लाने के लिए आरबीआई रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर रहा है. साथ ही करेंसी ट्रांसफर और डॉलर जुटाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है. ऐसे में अगर रेपो रेट में बढ़ोतरी की जाती है तो इस संकट के समय में आपके बैंक लोन की ईएमआई बढ़ जाएगी, जो मिडिल क्‍लास के लिए एक बड़े झटके से कम नहीं होगा। 

रुपया 97 के करीब पहुंचने पर बढ़ी टेंशन 
बुधवार को रुपये के नए रिकॉर्ड लो ने सिर्फ देश के लोगों को ही चिंता में नहीं डाल दिया, बल्कि RBI अधिकारी भी तनाव में आ गए. रिपोर्ट का दावा है कि 97 के करीब रुपया पहुंचने के बाद  गवर्नर संजय मल्होत्रा समेत कई शीर्ष अधिकारियों ने संभावित उपायों पर चर्चा करने के लिए आंतरिक बैठकें की हैं। 

क्‍या-क्‍या उपाय कर सकता है आरबीआई? 
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उपलब्ध विकल्पों में से एक ब्याज दरों में वृद्धि करना है. आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी की अलगी बैठक 5 जून को होगा, जिसमें रेपो रेट बढ़ोतरी पर विचार किया जा सकता है. अन्‍य उपायों में एनआरआई डिपॉजिट स्‍कीम के माध्‍यम से विदेशों से डॉलर जुटाना और सॉवरेन डॉलर बॉन्ड बेचना शामिल है। 

2013 से मिलता-जुलता दिख रहा ये उपाय 
विचाराधीन उपाय 2013 के टेपर टैंट्रम काल के दौरान उठाए गए कुछ उपायों से मिलते-जुलते हैं. उस समय भारत ने विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बैंकों के माध्यम से NRIs के लिए डिपॉजिट स्‍कीम शुरू की थीं. आरबीआई का अनुमान है कि इस बार इन योजनाओं से 50 अरब डॉलर तक की राशि आ सकती है, जबकि पहले यह राशि लगभग 30 अरब डॉलर थी। 

बता दें RBI की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 जून तक होनी है. समिति ने इस साल अपनी मानक दर को 5.25% पर अनचेंज रखा है, हालांकि ज्‍यादातर इकोनॉमिस्‍ट में तेजी के कारण आने वाले महीनों में इसमें तेजी की भविष्यवाणी कर रहे हैं।  

PM मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को बड़ा फायदा, $40 अरब निवेश समेत कई अहम सौदे

नई दिल्ली

 दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस समय भारत सिर्फ एक बाजार नहीं बल्कि एक भरोसेमंद ताकत बनकर उभर रहा है. यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पांच देशों की यात्रा अब सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं मानी गई, इसे भारत के आर्थिक भविष्य की बड़ी जीत के तौर पर देखा गया है. विदेशों में अक्सर भारत की राजनीतिक बहस चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी. दुनिया की दिग्गज कंपनियों के सीईओ भारत में निवेश बढ़ाने की बात कर रहे थे. सेमीकंडक्टर से लेकर लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी तक, हर सेक्टर में भारत को लेकर उत्साह दिखाई दिया. करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं ने यह संकेत दिया कि वैश्विक कंपनियां अब चीन प्लस वन रणनीति में भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं. यही कारण है कि इस दौरे को भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है। 

पीएम मोदी की इस यात्रा के दौरान 50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक हुई. इन कंपनियों की कुल वैल्यू लगभग 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है. इनमें से कई कंपनियां पहले से भारत में काम कर रही हैं, लेकिन अब वे अपने कारोबार का दायरा बढ़ाना चाहती हैं. अधिकारियों के मुताबिक, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, बढ़ती खपत और स्थिर नीतियां विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं. संयुक्त अरब अमीरात ने अकेले करीब 5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹45 हजार करोड़ के नए निवेश की घोषणा की. सरकार इसे भारत की मजबूत ग्लोबल इमेज और निवेशकों के भरोसे का बड़ा संकेत मान रही है. विपक्ष जहां सरकार पर सवाल उठाता रहा है, वहीं इस निवेश ने यह संदेश दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक पकड़ लगातार मजबूत हो रही है। 

किन सेक्टर्स में आएंगे सबसे ज्यादा पैसे
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान जिन कंपनियों से बातचीत हुई, उनमें टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं. अधिकारियों का कहना है कि इन कंपनियों का भारत में पहले से करीब 180 अरब डॉलर का निवेश और कारोबारी एक्सपोजर है. अब वे नए प्रोजेक्ट्स और एक्सपेंशन प्लान पर तेजी से काम करना चाहती हैं. इससे आने वाले वर्षों में लाखों रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। 

इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत को सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं. चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बाद कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों को काफी समर्थन मिला। 

UAE ने सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया?
संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच तेजी से मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का यह बड़ा असर है. दोनों देशों के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापार और निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 

किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, सेमीकंडक्टर,
एआई, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे सेक्टर हैं जहां सबसे ज्यादा निवेश आने की संभावना है. भारत सरकार इन सेक्टर्स में पहले ही कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है. विदेशी कंपनियां अब भारत को लंबे समय के निवेश केंद्र के रूप में देख रही हैं। 

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा संकेत?
करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी इजाफा होगा. सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। 

क्या विपक्ष के सवालों का जवाब है यह दौरा?
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर अक्सर विपक्ष सवाल उठाता रहा है. लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का मौका दिया है. भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और मोदी की व्यक्तिगत कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है। 

पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत को कितना निवेश मिला?
प्रधानमंत्री मोदी की पांच देशों की यात्रा के दौरान करीब ₹3.5 लाख करोड़ यानी लगभग 40 अरब डॉलर के निवेश और कारोबारी विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई. इनमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. UAE ने अकेले 5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारत के कई रणनीतिक सेक्टर्स में होगा। 

किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है?
सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स, टेक्नोलॉजी, एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सबसे बड़े निवेश होंगे. भारत सरकार पहले से इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीतियां चला रही है. इससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़ सकते हैं। 

क्या यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा देगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े निवेश से भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ेगी, नई टेक्नोलॉजी आएगी और लाखों रोजगार पैदा होंगे. साथ ही भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में हिस्सेदारी मजबूत होगी. इससे भारत की आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में बड़ा फायदा मिल सकता है। 

स्वास्थ्य विभाग पर कुर्की का संकट

2011 में कीटनाशक सप्लाई करने वाली कंपनी ने 15 साल बाद भी भुगतान नहीं मिलने पर कोर्ट के आदेश के बाद शुरू की कार्रवाई

मध्य प्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब कोलकाता से आई एक टीम विभाग में कुर्की की कार्रवाई के लिए पहुंच गई। मामला साल 2011 में स्वास्थ्य विभाग को सप्लाई किए गए इंसेंटिसाइड यानी कीटनाशक के भुगतान से जुड़ा है।

कंपनी “नीतापुर इंडस्ट्रीज” का आरोप है कि उसने डायरेक्टर ऑफ हेल्थ सर्विसेज को करीब 50 लाख 70 हजार रुपए का इंसेंटिसाइड सप्लाई किया था, लेकिन विभाग ने अब तक भुगतान नहीं किया। कंपनी प्रतिनिधि के मुताबिक मामला पहले आर्बिट्रेशन में गया, फिर सुप्रीम कोर्ट और बाद में जबलपुर हाईकोर्ट तक पहुंचा।

प्रतिनिधि का दावा है कि ब्याज और कंपाउंडिंग इंटरेस्ट जोड़ने के बाद बकाया राशि अब करीब 5 करोड़ रुपए हो चुकी है। कंपनी का कहना है कि कोर्ट के आदेशों और समय दिए जाने के बावजूद भुगतान जारी नहीं किया गया।

कंपनी प्रतिनिधि पुनानसेश बुनिया ने बताया कि यह एक छोटी प्रोपराइटरशिप कंपनी है और लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल कुर्की की कार्रवाई को लेकर विभागीय अधिकारियों में हलचल बनी हुई है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नीदरलैंड ने भारत को लौटाए 1000 साल पुराने ताम्र पत्र, चोल इतिहास से जुड़ा खास कनेक्शन

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नीदरलैंड दौरे पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए. पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच रक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा और समुद्री सहयोग समेत कई अहम क्षेत्रों में साझेदारी के लिए सहमति बनी.

इसके अलावा नीदरलैंड की यात्रा में देश को एक बड़ी सांस्कृतिक और राजनयिक उपलब्धि भी हासिल हुई है. देश की करीब 1000 साल पुरानी विरासत वापस मिल गई है. नीदरलैंड की डच सरकार ने 11वीं सदी की अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं (Anaimangalam Copper Plates) को भारत को सौंप दिया है. आईए जानते हैं कि ‘लाइडेन प्लेट्स’ (Leiden Plates) के नाम से मशहूर 30 किलोग्राम की ये 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाओं में क्या लिखा है? इनका तमिलनाडु और चोल वंश से क्या कनेक्शन है?

क्या हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को ‘लीडेन प्लेट्स’ भी कहा जाता है. ये 11वीं सदी की अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक तांबे की प्लेटें हैं, जो दक्षिण भारत के गौरवशाली चोल राजवंश से संबंधित हैं. लगभग 30 किलोग्राम वजनी इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं, जो एक विशाल तांबे की अंगूठी से जुड़ी हुई हैं. इस पर चोल शासक राजेंद्र चोल प्रथम की शाही मुहर भी अंकित है. 1690 ईस्वी के आसपास इन्हें डच ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी भारत से नीदरलैंड ले गए थे. लंबे समय तक ये लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) में सुरक्षित थीं. इसीलिए इनको इतिहासकार लीडेन प्लेट्स के नाम से भी जानते हैं.

अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं का क्या है इतिहास: अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं 1005 ईस्वी के आसपास चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल के दौरान जारी की गई थीं. ये पट्टिकाएं चोल शासकों द्वारा तमिलनाडु के नागापट्टनम में स्थित ‘चूड़ामणि विहार’ नामक बौद्ध मठ को अनैमंगलम गांव का राजस्व और कर दान करने के शाही आदेश को प्रमाणित करती हैं. यह मठ दक्षिण-पूर्व एशिया (जावा/सुमात्रा) के शैलेंद्र सम्राट द्वारा बनवाया गया था.

कैसी दिखती हैं अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाएं: अनैमंगलम पट्टिकाओं में 21 तांबे की प्लेटें शामिल हैं, जिन्हें एक कांस्य की अंगूठी से बांधा गया है. इस अंगूठी पर राजा राजेंद्र चोल प्रथम की मुहर लगी है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में शासन किया था. 5 प्लेटों पर संस्कृत में शिलालेख हैं और बाकी 16 प्लेट्स पर तमिल में शिलालेख हैं. संस्कृत में चोल राजाओं का इतिहास और वंशावली लिखी हुई है.

जबकि तमिल भाषा में दान और प्रशासनिक नियमों की जानकारी दी गई है. तमिल में प्रशासनिक डेटा, भूमि की सीमाएं, टैक्स छूट और स्थानीय शासन के नियम लिखे गए हैं. ये प्लेटें राजेंद्र चोल प्रथम की आधिकारिक शाही मुहर से बंद की गई हैं. इस मुहर पर चोल बाघ का प्रतीक, दो मछलियां (पांड्य प्रतीक) और एक धनुष (चेर प्रतीक) अंकित हैं, जो दक्षिण भारत पर चोलों की सर्वोच्चता को दर्शाते हैं.

ताम्र पट्टिकाओं पर क्या लिखा है: तांबे की 5 पट्टियां संस्कृत भाषा में हैं, जिन पर चोल राजवंश की वंशावली अंकित है. इसकी शुरुआत विष्णु की स्तुति और पौराणिक दिव्य (सूर्यवंशी) पूर्वजों के नामों से होती है. वहीं, तमिल भाग राजा राजराज प्रथम (शासनकाल: 985-1012 ई.) के शासनकाल से संबंधित है, जो राजेंद्र चोल प्रथम के पिता थे. शिलालेख में कहा गया है कि राजा राजराज प्रथम ने अपने शासनकाल के 21वें वर्ष में यह घोषणा की थी कि एक बौद्ध तीर्थस्थल (विहार) के निर्माण के लिए एक गांव (अनैमंगलम) का संपूर्ण राजस्व और उसकी भूमि दान में दी जाएगी.

चोलों की हिंदू धर्म के प्रति आस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: यह शिलालेख चोलों की धार्मिक सहिष्णुता (एक हिंदू सम्राट द्वारा बौद्ध मठ को आर्थिक सहायता देना) का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है. इसके साथ ही यह श्रीविजय साम्राज्य (आधुनिक सुमात्रा, इंडोनेशिया) जिसके शासक ने इस मठ का निर्माण करवाया था, के साथ उनके गहरे समुद्री और भू-राजनीतिक संबंधों को भी उजागर करता है.

तांबे की 3 छोटी प्लेट्स में क्या लिखा: तीन तांबे की प्लेट्स भी एक कांस्य की अंगूठी से एक साथ बांधी हैं. इस पर राजा कुलोत्तुंग चोल प्रथम (जिन्होंने 1070 से 1120 तक शासन किया) की मुहर लगी है. इन पर तमिल में शिलालेख हैं. चोल प्लेटें, जो 1862 से लीडेन विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित हैं. जो दक्षिण भारत में शाही फरमानों (राजकीय आदेशों) के महत्वपूर्ण स्रोत हैं. ये प्लेटें चोल और श्रीविजय साम्राज्यों के बीच संबंधों के बारे में ऐतिहासिक जानकारी भी देती हैं. इनका कुल वजन 30 किलोग्राम है.

चोल वंश का पूरा इतिहास खोलती हैं ये तांबे की प्लेट्स: इन तांबे की प्लेट्स को चोल साम्राज्य के सबसे मूल्यवान अभिलेखों में से एक माना जाता है, जिनमें इनके प्रशासन, कराधान, भूमि सुधार, सिंचाई प्रणालियों और व्यापारिक प्रथाओं का विस्तृत विवरण मिलता है. ये शिलालेख इस राजवंश की धार्मिक सद्भाव की भावना को भी उजागर करते हैं. इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया के श्रीविजय शासकों द्वारा स्थापित एक बौद्ध विहार के लिए ‘अनैमंगलम’ गांव को दान में दिए जाने का उल्लेख है.

इतिहासकारों का मानना ​​है कि ये प्लेट्स लगभग एक हजार साल पहले दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मौजूद मजबूत समुद्री, कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों का दुर्लभ प्रमाण प्रस्तुत करती हैं. चोल शासन के स्वर्ण युग से जुड़ी ये पट्टिकाएं भारत के दो सबसे शक्तिशाली समुद्री सम्राटों- राजराज चोल प्रथम (985-1014 ईस्वी) और उनके बेटे राजेंद्र चोल प्रथम (1014-1044 ईस्वी) के शासनकाल को दर्शाती हैं.

अनैमंगलम गांव का इतिहास: अनैमंगलम, भारत के तमिलनाडु राज्य में नागापट्टनम के पास स्थित एक गांव है. ऐतिहासिक दृष्टि से यह गांव इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने ‘चूड़ामणि विहार’ नामक बौद्ध मठ को शाही भूमि दान में दी थी. इस मठ का निर्माण 1005 ईस्वी के आसपास श्रीविजय राजा श्री विजय मारविजयतुंगवर्मन ने करवाया था.

सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने इस मठ के भरण-पोषण के लिए अनैमंगलम गांव से प्राप्त होने वाले राजस्व को अनुदान के रूप में दे दिया था. राजराजा के पुत्र, राजेंद्र चोल प्रथम ने इस अनुदान को औपचारिक रूप प्रदान करते हुए, इसे 24 ताम्र-पत्रों (21 बड़े और 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाने का आदेश दिया.

चोल वंश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण हैं ताम्र पट्टिकाएं: लीडेन ताम्र-पत्रों (Leiden Plates) में इस गांव का उल्लेख होना, चोलों की अत्यंत सुव्यवस्थित कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमाण है. गांव के राजस्व को बौद्ध मठ को सौंपकर, चोल प्रशासन ने स्थानीय करों, कृषि-उपज और भूमि-राजस्व को सीधे तौर पर इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रखरखाव के लिए प्रभावी ढंग से उपयोग में लाया. यह घटना गांव-स्तरीय स्वशासन और भूमि-स्वामित्व की उन अत्यंत बारीकी से प्रलेखित प्रणालियों के अध्ययन के लिए एक ऐतिहासिक ‘केस स्टडी’ के रूप में कार्य करती है, जिनके लिए चोल राजवंश विश्व-प्रसिद्ध है.

अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं के नीदरलैंड पहुंचने की क्या है कहानी: राजेंद्र चोल प्रथम ने संस्कृत और तमिल में 24 ताम्रपत्रों (21 बड़े, 3 छोटे) पर उत्कीर्ण करवाकर अनुदान को औपचारिक रूप दिया था. ये चोल प्रतीक चिह्न वाले एक विशाल कांसे के छल्ले से बंधी हुई हैं. पट्टिकाएं खुदाई के दौरान संभवतः 1687 और 1700 के बीच डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) द्वारा विजफ सिन्नेन किले के निर्माण और ‘चीनी’ पैगोडा स्थल के पुनर्निर्माण के दौरान मिली थीं.

खुदाई के समय, तमिलनाडु के नागापट्टनम पर VOC का कब्जा था और यह डच क्षेत्राधिकार के तहत एक व्यापारिक केंद्र के रूप में कार्य करता था. अनैमंगलम ताम्र पट्टिकाओं को 17वीं सदी के अंत में डच ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से तमिलनाडु के नागापट्टनम पर नियंत्रण करने के बाद भारत से बाहर निकाला गया था. ये वस्तुएं संभवतः 1712 में पादरी फ्लोरेंटियस कैम्पर और उनकी पत्नी (कैम्पर-केटिंग परिवार) द्वारा नीदरलैंड ले जाई गई थीं.

हालांकि, उन्हें ये कैसे प्राप्त हुईं, यह कहना मुश्किल है. लेकिन, कैम्पर-केटिंग परिवार के वंशजों ने 1862 में इन प्लेट्स को लीडेन विश्वविद्यालय को दान कर दिया था. जहां उनके रिश्तेदार, हेनड्रिक एरेंट हैमेकर, पहले पूर्वी भाषाओं के प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे.

भारत को कैसे वापस मिली प्राचीन विरासत: भारत 2012 से ही अनैमंगलम प्लेट्स की वापसी के लिए औपचारिक रूप से प्रयास कर रहा था. 2023 में ये प्रयास तब और तेज हो गए, जब भारत ने UNESCO की सांस्कृतिक संपत्ति की वापसी को बढ़ावा देने वाली अंतर-सरकारी समिति के के सामने अपना पक्ष रखा. इस बीच नीदरलैंड्स ने औपनिवेशिक काल के दौरान हटाई गई सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी के संबंध में एक प्रगतिशील राष्ट्रीय नीति अपनाई.

डच औपनिवेशिक संग्रह समिति ने भारत के दावे की समीक्षा की और आधिकारिक तौर पर यह निष्कर्ष निकाला कि 1000 साल पुरानी ये प्लेट्स दक्षिण भारत से उनके असली मालिकों की सहमति के बिना ले जाई गई थीं. समिति की सिफारिश के बाद, लीडेन विश्वविद्यालय के कार्यकारी बोर्ड ने इस कलाकृति की बिना शर्त वापसी को मंजूरी दे दी. साथ ही, भारत के लोगों के लिए इसके गहरे ऐतिहासिक, सभ्यतागत और भावनात्मक महत्व को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया.

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सौंपी जाएंगी ताम्र प्लेट्स: चोल प्लेटें नई दिल्ली स्थित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपी जाएंगी. ASI, भारत के संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और देश में पुरातात्विक अनुसंधान तथा संरक्षण के लिए प्रमुख संस्था है. ASI ही यह तय करेगा कि इन वस्तुओं को भारत में आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा या नहीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड्स के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के बीच हुआ यह औपचारिक हस्तांतरण, दोनों देशों के बीच “रणनीतिक साझेदारी” और आपसी सम्मान के एक नए युग का प्रतीक है.

नीदरलैंड के साथ भारत ने किए 17 समझौते: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड दौरे पर रक्षा, सेमीकंडक्टर निर्माण और ग्रीन एनर्जी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग के लिए 17 महत्वपूर्ण समझौते (MoUs) किए. साथ ही दोनों देशों के बीच संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर तक मजबूत किया गया. भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण (फैब) को बढ़ावा देने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (Tata Electronics) और डच कंपनी एएसएमएल (ASML) के बीच समझौता हुआ है. साथ ही भारत और नीदरलैंड्स ने वर्ष 2026-2030 के लिए ‘रणनीतिक साझेदारी रोडमैप’ की शुरुआत की है, जिससे रक्षा, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में साझा प्रगति होगी.

रणनीतिक साझेदारी का रोडमैप क्या है: भारत और नीदरलैंड ने 2026-2030 के लिए रणनीतिक साझेदारी रोडमैप को अपनाया है. इसके तहत व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, राजनीतिक संवाद, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, ऊर्जा संक्रमण, AI, क्वांटम तकनीक, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाया जाएगा. इससे दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी.

भारत-नीदरलैंड में रक्षा-सुरक्षा सहयोग पर जोर: पीएम मोदी और जेटन की वार्ता में रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर जोर दिया गया. दोनों देशों ने रक्षा मंत्रालयों के बीच संवाद, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. साथ ही तकनीक हस्तांतरण, सह-विकास और सह-उत्पादन के जरिए रक्षा उपकरण निर्माण को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई. नीदरलैंड ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के प्रति समर्थन दोहराया.

सेमीकंडक्टर निर्माण में सहयोग पर बनी बात: पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटन ने सेमीकंडक्टर निर्माण में सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का अहम स्तंभ बताया. दोनों नेताओं ने धोलेरा में भारत के पहले फ्रंट-एंड सेमीकंडक्टर फैब के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच हुए समझौते को ऐतिहासिक कदम बताया. इसके अलावा डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर और भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के बीच सहयोग पर भी सहमति बनी.

ऊर्जा, जल प्रबंधन और ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर भी हुआ समझौता: हरित हाइड्रोजन विकास के लिए दोनों देशों ने भारत-नीदरलैंड रोडमैप तैयार किया. इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा और चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी. भारत और नीदरलैंड ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में नमामि गंगे मिशन, शहरी नदी प्रबंधन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और गुजरात की कल्पसर परियोजना में तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने का फैसला किया.

व्यापार और निवेश को नई गति देने के लिए हुआ समझौता: पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटन ने व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया. दरअसल, नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है. इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिली, जो पहले से ही 27.8 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. दोनों देशों ने सीमा शुल्क सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे व्यापार प्रक्रियाएं आसान होंगी और वैध व्यापार को बढ़ावा मिलेगा.

कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में भी सहयोग करेगा नीदरलैंड: दोनों देशों ने कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए भी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत डेयरी, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण और संरक्षित खेती में निवेश बढ़ाया जाएगा. बेंगलुरु में पशुपालन उत्कृष्टता केंद्र में भारत-डच डेयरी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा भी की गई.

स्वास्थ्य क्षेत्र में संक्रामक रोगों, डिजिटल हेल्थ, महिला स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य अनुसंधान में सहयोग को आगे बढ़ाने पर दोनों देशों में सहमति बनी है. शिक्षा क्षेत्र में उच्च शिक्षा सहयोग समझौते और भारतीय तथा डच विश्वविद्यालयों के बीच नए शैक्षणिक सहयोग का भी स्वागत किया गया.

 

इबोला को लेकर भारत सरकार अलर्ट, एयरपोर्ट्स पर बढ़ाई गई स्क्रीनिंग

नई दिल्ली

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे इबोला वायरस के खतरे को देखते हुए देश के सभी बंदरगाहों, हवाई अड्डों और एंट्री पॉइंट्स पर सख्त हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। यह कदम विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा पिछले हफ्ते इबोला प्रकोप को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किए जाने के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है। एडवाइजरी के अनुसार, अत्यधिक जोखिम वाले देशों से आने या वहां से होकर गुजरने करने वाले यात्रियों की सघन निगरानी की जाएगी। उनमें कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देश शामिल हूं।

इन देशों से आने वाले किसी भी यात्री में यदि बीमारी के लक्षण दिखते हैं तो उन्हें इमिग्रेशन चेक से पहले एयरपोर्ट के हेल्थ ऑफिसर या हेल्प डेस्क को इसकी सूचना देनी होगी। यदि कोई यात्री इबोला के किसी संदिग्ध या पुष्ट मरीज के खून या शारीरिक तरल पदार्के सीधे संपर्क में आया है, तो उसे भी अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट करना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील करते हुए कहा, “यात्रियों की सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों को ध्यान में रखते हुए कृपया हेल्थ स्क्रीनिंग और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों में सहयोग करें।” यह व्यवस्था काफी हद तक कोविड-19 महामारी के दौर की याद दिलाती है।

राहत की बात यह है कि वर्तमान में भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह एडवाइजरी पूरी तरह से एहतियाती तौर पर जारी की गई है। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई थी कि यह वायरस बेहद तेजी से फैल रहा है, जिसके बाद ही इसे अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया।

खतरे को भांपते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बुधवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्यों को सभी मोर्चों पर तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

एसओपी के मुताबिक, केंद्र ने राज्यों के साथ विस्तृत SOP साझा की है, जिसमें आगमन से पहले और बाद की स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन प्रोटोकॉल, केस मैनेजमेंट, रेफरल सिस्टम और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया शामिल है। स्वास्थ्य सचिव ने सभी नामित स्वास्थ्य केंद्रों को आपसी समन्वय के साथ निगरानी रखने और समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

यह वायरस ऑर्थोइबोलावायरस परिवार से संबंधित एक जूनोटिक संक्रमण है, जो इंसानों के लिए बेहद घातक और जानलेवा साबित हो सकता है। सामान्य फ्लू की तरह बुखार, कमजोरी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द इसके लक्षण है। गंभीर स्थिति में उल्टी और दस्त जैसे लक्षण होते हैं।

शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगों से बिना किसी स्पष्ट कारण के खून बहना इस बीमारी का सबसे मुख्य और विशिष्ट लक्षण है।

कैसे फैलता है यह संक्रमण?

संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीना, आंसू, उल्टी, मल और मां के दूध जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से।

वायरस से दूषित कपड़ों, बिस्तरों या सतहों को छूने से।

संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति के शव के सीधे संपर्क में आने से भी यह तेजी से फैलता है।

SOP की भी की जा रही समीक्षा
सरकार की ओर से उठाए गए प्रमुख कदमों में स्क्रीनिंग, निगरानी, क्वॉरंटीन और केस मैनेजमेंट से जुड़े एसओपी की समीक्षा शामिल है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को इबोला जांच के लिए नामित किया गया है, जबकि चरणबद्ध तरीके से अन्य प्रयोगशालाओं को भी तैयार किया जा रहा है।

अपील जारी, घबराएं नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें। कहा, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह सतर्क और किसी भी उभरती स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

कैसे फैलता है इबोला वायरस
बता दें कि इबोला वायरस को जानलेवा संक्रमण माना जाता है। इसमें हेमोरेजिक फीवर यानी रक्त स्त्राव के साथ बुखार होता है। इससे पीड़ित मरीज को तेज बुखार आता है और शरीर के इंटर्नल अंगों में खून बहना शुरू हो जाता है और ऑर्गन फेलियर जैसी चीजें भी होती हैं।

    इबोला वायरस संक्रमित जंगली जानवरों (जैसे चमगादड़) का मांस खाने से इंसानों में पहुंच सकता है।
    इसके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, मल-मूत्र या उल्टी के सीधे संपर्क में आने से फैलता है।
    बता दें कि इबोला वायरस पानी या हवा के संपर्क में आने पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता।

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड का पाकिस्तान में खात्मा, आतंकी हमजा ढेर

श्रीनगर 

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हमजा बुरहान का खात्मा कर दिया गया है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुजफ्फराबाद में एक अज्ञात हमलावर ने उसे गोलियों से भूनकर खत्म कर दिया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हमजा बुरहान 2019 में कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के मास्टरमाइंड्स में एक था। यह शख्स खुद को एक शिक्षक बताता था। वह लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर पाकिस्तान में छिपता फिर रहा था।

इस घटनाक्रम से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। अरजुमंद गलजार डार उर्फ हमजा बुरहान प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल बद्र (Al-Badr) का प्रमुख कमांडर था।हजमा बुरहान मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। वह 2017 में उच्च शिक्षा के बहाने पाकिस्तान गया था। इसके बाद वह स्थानीय युवाओं की भर्ती करने, आतंकी फंडिंग जुटाने और घुसपैठ नेटवर्क को संचालित करने में सक्रिय हो गया।

UAPA कानून के तहत आतंकवादी घोषित
14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हुए थे। इस बर्बर हमले की साजिश में बड़ी भूमिका होने के कारण, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने 2022 में उसे यूएपीए (UAPA) कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया था। मंत्रालय के अनुसार हमजा बुरहान पुलवामा और दक्षिण कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती कराने और आतंकवाद के लिए आर्थिक सहायता जुटाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था लेकिन अब उसका खात्मा हो चुका है।

पहलगाम हमले में भी था शामिल
बता दें कि पुलवामा की घटना भारत में सुरक्षाकर्मियों पर किया गया अब तक का सबसे घातक हमला था, जिसे जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने अंजाम दिया था। 14 फरवरी, 2019 को जैश के एक आतंकवादी ने लेथपोरा में CRPF के काफिले में विस्फोटकों से भरी एक कार से टक्कर मार दी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इस घटना की जंच कर रही भारतीय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)ने हमजा बुरहान का नाम पुलवामा हमले की साजिश रचने और आतंकवादियों को स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक और वित्तीय मदद पहुंचाने वाले मुख्य किरदारों में शामिल किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह सिर्फ पुलवामा ही नहीं बल्कि कश्मीर घाटी के पहलगाम और अन्य क्षेत्रों में हुए बड़े आतंकी हमलों को सीमा पार से सीधे निर्देशित कर रहा था।

पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुआ था
पुलवामा हमला 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर में हुआ था, जिसमें CRPF के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक कर आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया था।
हमजा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था

2017 में पुलवामा से पाकिस्तान चला गया था
हमजा बुरहान पुलवामा हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल था. वह खुद को पाकिस्तान में टीचर बताता था. साथ ही 2019 के बाद से कई आतंकी घटनाओं में शामिल रहा था. वह पीओके के इलाके में कई आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग दे रहा था. साथ ही बॉर्डर इलाके में वह आतंकियों को घुसपैठ कराने में मदद करता था। 

हमजा बुरहान का पूरा नाम अरजुमंद गुलजार डार है. इसे हमजा बुरहान के नाम से भी जाना जाता है अपने सर्किल में ये आतंकी ‘डॉक्टर’ के नाम से भी जाना जाता है। 

27 साल का हमजा बुरहान पुलवामा के रत्नीपोरा का रहने वाला है. हमजा 2017 में पाकिस्तान गया और वहां जाकर आतंकवादी संगठन ‘अल बद्र’ में शामिल हो गया. ‘अल बद्र’ को भारत में एक आतंकवादी संगठन के तौर पर लिस्ट किया गया है. हमजा ‘अल बद्र’ के कमांडर के तौर पर काम कर रहा था। 

ये शख्स पुलवामा में ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ से विस्फोटक बरामद होने के मामलों में, जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF पर ग्रेनेड हमले में और युवाओं को आतंकवादी संगठन ‘अल बद्र’ में शामिल होने के लिए उकसाने के मामलों में शामिल पाया गया है। 

ISI ने मुहैया कराया था ऑफिस और सिक्योरिटी
आतंकी हमजा बुरहान उर्फ डॉक्टर न सिर्फ पुलवामा के अलावा दूसरे आतंकी हमले में शामिल था बल्कि वह युवाओं को बरगलाकर उन्हें कट्टरपंथ के रास्ते पर ले जाता था. इस काम के लिए ISI ने उसे एक ऑफिस मुहैया कराया था. और इसकी सुरक्षा में 24 घंटे AK-47 के साथ गनर तैनात रहते थे। 

आतंकी गतिविधियों का अड्डा मुजफ्फराबाद
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित मुजफ्फराबाद भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों का अड्डा है. यहां कई तंजीमों के लोग रहते हैं और उसी की आड़ में भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं. आतंकी हमजा बुरहान इसी काम में शामिल था और वह लो प्रोफाइल रहता था। 

पुलवामा हमला और भारत का ऑपरेशन बालाकोट 
14 फरवरी 2019 को दोपहर करीब 3:15 बजे जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर एक भयानक आतंकी हमला हुआ.  पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी और स्थानीय कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार ने 300-350 किलो IED से भरी SUV को CRPF के काफिले की एक बस में घुसा दिया. इसमें 40 CRPF जवान शहीद हो गए और कई घायल हुए. यह 1989 के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमला था. जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। 

हमले के 12 दिन बाद 26 फरवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बालाकोट स्थित जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ट्रेनिंग कैंप पर सर्जिकल एयर स्ट्राइक किया. इसमें बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए। 
 

उसकी हत्या ऐसे समय में हुई है, जब पाकिस्तान में आतंकी संगठनों और कट्टरपंथी नेटवर्क से जुड़े कई लोगों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। हमजा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था। बता दें कि हाल के सालों में कई आतंकियों को अज्ञात हमलावरों ने निशाना बनाया है या तो गैंगवार में उनकी मौत हुई है।

PoK में एक स्कूल टीचर का फर्जी पहचान के साथ रह रहा था
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बताया जा रहा है कि वह पिछले कई सालों से PoK में एक स्कूल टीचर का फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। वहीं आतंकी ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ के नेटवर्क को चला रहा था। वैसै वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। 

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