दिल्ली के लालकिला मैदान में आदिवासी संगठनों का विशाल प्रदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पहुंचे

नई दिल्ली 

 देश की राजधानी दिल्ली का लालकिला मैदान आज एक बड़े जनजातीय सांस्कृतिक समागम और प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इस विशाल रैली और सभा में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग, मध्य प्रदेश के रतलाम सहित देशभर से लाखों की संख्या में जनजातीय समाज के लोग परंपरागत वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ दिल्ली पहुंच रहे हैं। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए अंबिकापुर से जनजातीय समाज के लोगों को लेकर दो विशेष ट्रेनें दिल्ली के लिए रवाना हुई थीं, जबकि हजारों लोग अपने निजी साधनों से भी यहां पहुंचे हैं। अन्य राज्यों से भी लोग पहुंच रहे है।

जनजातीय समाज द्वारा दिल्ली के पांच प्रमुख ऐतिहासिक स्थानों से एक साथ विशाल रैलियां निकाली जा रही हैं, जो सीधे लालकिला मैदान पहुंचकर एक महा-सभा में तब्दील होगी। इन रैलियों के रूट इस प्रकार हैं…

  •     राजघाट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर
  •     रामलीला मैदान से लाल किला: 2.8 किलोमीटर
  •     अजमेरी गेट से लाल किला: 2.5 किलोमीटर
  •     कुदसिया बाग से लाल किला: 2 किलोमीटर
  •     श्यामगिरी मन्दिर से लाल किला: 3.5 किलोमीटर

गृहमंत्री अमित शाह होंगे शामिल, राष्ट्रपति और पीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन

लालकिला मैदान में आयोजित होने वाले इस मुख्य कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। इस प्रदर्शन के माध्यम से देश का मूल जनजातीय समाज राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक संयुक्त ज्ञापन सौंपेगा। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मतांतरित (धर्म परिवर्तन कर चुके) लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर करने के लिए ‘डिलिस्टिंग’ कानून बनाने की मांग करना है।

 

बदरीनाथ के पास कंचनगंगा में ग्लेशियर टूटने से हलचल, प्रशासन सतर्क

उत्तराखंड

उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम से 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की खबर है। हालांकि, इस घटना में किसी प्रकार के नुकसान की खबर नहीं है। हर वर्ष नीचे की तरफ खिसक रहा ग्लेशियर गर्मी में तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है। इस मामले में चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने कहा कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मार्च-अप्रैल में गिर रही ज्यादा बर्फ
पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है। बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी-फरवरी से ज्यादा बर्फ अब मार्च-अप्रैल में गिर रही है। इसका सीधा असर वाटर बैंक माने जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ेगा। इस पैटर्न के कारण ट्री लाइन भी लगातार ऊपर को खिसक रही है। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के शोध में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ताजा शोध जर्मनी की एप्लाइड जियोमेटिक्स शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है।

सर्दियों में कम बर्फबारी
हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा हो रही बर्फबारी का कारण पश्चिमी विक्षोभ में आई असमानता है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में कमी आ रही है। गर्मियों में इसके बढ़ने से बर्फबारी के साथ बारिश, ओलावृष्टि और आपदाओं के खतरे बढ़े हैं। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान कहते हैं कि बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस बदलाव से जूझ रहा है।

आर्थिक और सामाजिक नुकसान
पर्यावरणविद् पद्मविभूषण डॉ. अनिल जोशी के मुताबिक, हिमालय में मौसम के बदले पैटर्न से आर्थिक और सामाजिक नुकसान का खतरा भी बढ़ा है। इससे खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी और अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं। पर्यटन और हॉर्टिकल्चर भी प्रभावित होगा।

सामान्य से अधिक तापमान
पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल में गिरी है। मार्च में ये आकड़ा 84 सेंटीमीटर रहा, जबकि जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर ही बर्फ पड़ी। दिसंबर में महज चार बार बर्फबारी हुई, वह भी बेहद ऊपरी क्षेत्र में। वैज्ञानिकों के मुताबिक अध्ययन क्षेत्र में बर्फबारी रिकॉर्ड करने लायक भी नहीं हुई। इससे ग्लेशियर और आसपास के क्षेत्र का तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। कुछ जगहों पर तापमान में 0.1 से बढ़कर 5 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हुई है।

कमजोर पड़ रहे ग्लेशियर
डॉक्टर पंकज चौहान ने बताया कि मार्च-अप्रैल में हो रही बर्फबारी से ग्लेशियर खतरे में पड़ सकते हैं। चूंकि इन महीनों में तापमान अधिक रहता है इसलिए जिस गति से बर्फ पड़ती है, उसी गति से पिघल भी रही है और ग्लेशियर कमजोर पड़ रहे हैं। ये भविष्य में जलधाराओं को प्रभावित करेंगे, साथ ही आपदा के खतरों को भी बढ़ाएंगे।

पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती, ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के निर्देश जारी

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को लेकर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को उनके देश वापस भेजने के लिए विशेष ‘होल्डिंग सेंटर’ बनाने के  निर्देश जारी किए हैं.

शुभेंदु सरकार की ओर से इस संबंध में पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को लिखित निर्देश और गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं. सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में इन होल्डिंग सेंटरों को बनाने के लिए सही जगह की पहचान करने और आगे की कार्रवाई जल्द से जल्द शुरू करने को कहा है.

प्रशासन का फोकस सीमावर्ती जिलों और उन इलाकों पर है, जहां अवैध प्रवासियों के छिपे होने की ज्यादा उम्मीद रहती है.

डिपोर्ट होने तक सेंटरों में रखे जाएंगे घुसपैठिए
सरकार के बनाए जा रहे इन होल्डिंग सेंटरों का मकसद अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कड़ी नजर रखना है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को सीधे जेल में रखने के बजाय इन सेंटरों में ट्रांसफर किया जाएगा.

जब तक इन पकड़े गए विदेशी नागरिकों की पहचान की पुष्टि करने और उन्हें कानूनी रूप से उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें इन्हीं होल्डिंग सेंटरों में रखा जाएगा.

चुनाव प्रचार के दौरान किया था ये वादा
बता दें कि बीजेपी ने इसी साल हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राज्य से अवैध प्रवासियों को निकालने का वादा किया था. अमित शाह ने अपने एक संबोधन में साफ तौर पर कहा था कि जिस तरह बीजेपी ने असम में घुसपैठ को पूरी तरह से खत्म किया, उसी तरह पार्टी बंगाल में भी अवैध घुसपैठ पूरी तरह से खत्म कर देगी. अब राज्य में बीजेपी की सरकार कायम होने के बाद, पार्टी अपने उस वादे को पूरा करने में जुट गई है.

भारत-अमेरिका वार्ता में मजबूत साझेदारी पर जोर, जयशंकर-रुबियो की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली

 भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के बीच में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा पर आए मार्को रुबियो और डॉ. जयशंकर ने सुबह की द्विपक्षीय बैठक के बाद आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों देशों के मजबूत होते रिश्तों की रूपरेखा साझा की. इस कूटनीतिक मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापक रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और ऊर्जा सहयोग की समीक्षा करना तथा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर आपसी समझ को मजबूत करना था.

दोनों नेताओं ने कल अमेरिकी विदेश मंत्री की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात के बाद आज अपनी बैठक में पश्चिम एशिया, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया, खाड़ी देशों के घटनाक्रमों और यूक्रेन संघर्ष जैसे वैश्विक संकटों पर गहन रणनीतिक बातचीत की है. दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नवीनीकृत करने के साथ-साथ एक व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर भी हस्ताक्षर किए हैं.

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उनके बीच आज सुबह द्विपक्षीय वार्ता का पहला दौर संपन्न हुआ है. दोनों नेता इस चर्चा के बीच में हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस के तुरंत बाद लंच पर शेष मुद्दों को पूरा करने के लिए वापस वार्ता की मेज पर लौटेंगे. हालांकि, ये सचिव रुबियो की पहली भारत यात्रा है, लेकिन वे अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही एक-दूसरे के साथ नियमित संपर्क में बने हुए हैं.

विदेश मंत्री ने उठाया वीजा का मुद्दा
बातचीत के दौरान जयशंकर ने भारत के वैध यात्रियों को अमेरिकी वीजा मिलने में आ रही हैं चुनौतियों को भी उठाया. इसके जवाब में रुबियो ने कहा कि सबसे पहले, मैं अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीयों के योगदान को स्वीकार करता हूं. भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि ये संख्या बढ़ती रहे… जो बदलाव अभी हो रहे हैं या अमेरिका में हमारी प्रवासन सिस्टम का आधुनिकीकरण, ये कदम केवल भारतीय को टारगेट नहीं करता, बल्कि ये नियम पूरे वर्ल्ड के लिए है, इसे पूरी दुनिया में लागू किया जा रहा है.

USA में घुसपैठ कर चुके हैं 20 मिलियन लोग
उन्होंने कहा कि हम आधुनिकीकरण के दौर में हैं. अमेरिका में प्रवासन संकट रहा है. ये भारत की वजह से नहीं है, लेकिन व्यापक रूप से, पिछले कुछ वर्षों में 20 मिलियन से अधिक लोग अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कर चुके हैं और हमें इस चुनौती का सामना करना पड़ा है… एक देश के रूप में आप जो कुछ भी करते हैं, वह आपके राष्ट्रीय हित में होना चाहिए और इसमें आपकी आव्रजन नीति भी शामिल है. मेरा मानना ​​है कि अमेरिका आव्रजन के मामले में दुनिया का सबसे स्वागत करने वाला देश है. हर साल लगभग दस लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और इसमें महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.

‘क्यूबा से आए थे मेरे माता-पिता’
अमेरिकी विदेश मंत्री ने खुलासा करते हुए बताया कि मेरे माता-पिता 1956 में क्यूबा से स्थायी निवासी के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका में आए थे. इस प्रक्रिया ने हमें समृद्ध किया है, लेकिन ये एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो हर युग में मॉर्डन वक्त की वास्तविकताओं के हिसाब हो. हम ऐसा कर रहे हैं और ये बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. इसलिए संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में उस सिस्टम में सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है, जिसके द्वारा हम ये तय करते हैं कि हमारे देश में कितने लोग आते हैं, कौन आता है, कब आता है. जब भी आप कोई सुधार करते हैं, जब भी आप लोगों को एंट्री देने के सिस्टम में कोई बदलाव करते हैं तो एक बदलाव (संक्रमणकालीन) का दौर होता है जो कुछ मतभेद और कठिनाइयां पैदा करता है… ये कदम केवल भारत को टारगेट नहीं करता, ये एक ऐसी प्रणाली है, जिसे वैश्विक स्तर पर लागू किया जा रहा है. लेकिन हम एक बदलाव के दौर में हैं और इस रास्ते में कुछ बाधाएं तो आएंगी ही, लेकिन हमें लगता है कि अंततः हमारा उद्देश्य एक बेहतर सिस्टम, एक अधिक कुशल प्रणाली होगी, जो पहले की प्रणाली से बेहतर काम करेगी और साथ ही अधिक टिकाऊ भी होगी.

रुबियो ने की भारत की तारीफ
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताते हुए इस यात्रा को अपने लिए एक बड़ा सम्मान कहा. उन्होंने रणनीतिक साझेदारी को परिभाषित करते हुए कहा कि अमेरिका और भारत दुनिया के कई अन्य देशों के साथ अलग-अलग या क्षेत्रीय मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन एक ‘रणनीतिक साझेदारी’ इन सब से बहुत अलग और कहीं अधिक व्यापक होती है. ये तब होती है जब दो देशों के हित पूरी तरह एक दिशा में संरेखित होते हैं.

मार्को रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग की चौड़ाई और दायरा ही ये साबित करता है कि भारत अमेरिका का कितना महत्वपूर्ण वैश्विक साझेदार है. उन्होंने कहा कि इस रिश्ते की शुरुआत दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से होती है. भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से दोनों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं क्योंकि दोनों देशों के नेता सीधे तौर पर अपनी जनता और मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं.

मेक इन इंडिया पर जोर
साथ ही रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि दोनों देशों ने हाल ही में अपने 10-वर्षीय प्रमुख रक्षा भागीदारी ढांचा समझौते को नया जीवन दिया है और व्यापक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस रोडमैप पर साइन किए हैं.

उन्होंने बताया कि रक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए दोनों देशों ने भारत के ‘मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण को ध्यान में रखने और हाल के वैश्विक संघर्षों से सीखे गए कड़े सबकों को शामिल करने के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की है.

आपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रविवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्तर की महत्वपूर्ण वार्ता की. इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा हुई. इस बैठक में जयशंकर के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जबकि अमेरिका की ओर से मार्को रुबियो अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के साथ उपस्थित थे.

 

भारत दौरे पर मार्को रुबियो का बड़ा दावा, बोले- ईरान मुद्दे पर जल्द आ सकती है ‘अच्छी खबर’

नई दिल्ली

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे के दौरान ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। चार दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली पहुंचे रुबियो ने कहा कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को ईरान मुद्दे पर ‘अच्छी खबर’ मिल सकती है। रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि शायद अगले कुछ घंटों में दुनिया को कुछ अच्छी खबर मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित शांति समझौता होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव को समाप्त करेगा।

बता दें कि ईरान ने अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के जवाब में इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया था। रुबियो ने जोर देकर कहा कि यह समझौता उस प्रक्रिया की शुरुआत करेगा जिसका अंतिम लक्ष्य एक ऐसी दुनिया बनाना है जहां किसी को भी ईरानी परमाणु हथियारों से डरने या चिंता करने की जरूरत न पड़े।

ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता
इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए ईरान की कार्रवाई की निंदा की। रुबियो ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों को नुकसान पहुंचाने की धमकी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

शनिवार को ट्रंप ने क्या कहा था?
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा था कि वह ईरान के नवीनतम प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए अपने वार्ताकारों से मिल रहे हैं और रविवार तक युद्ध फिर से शुरू करने के बारे में फैसला करेंगे। ट्रंप ने ‘एक्सियोस’ से बात करते हुए कहा था कि इस बात की ”पूरी तरह से 50/50” संभावना है कि वह कोई ‘अच्छा’ सौदा कर पाएंगे
या फिर उन्हें पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे।

वहीं, ट्रंप ने रविवार सुबह दावा किया कि इजरायल और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ व्यापक परामर्श के बाद ईरान के साथ शांति समझौते पर ‘काफी हद तक’ बातचीत हो चुकी है। तीन महीने से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अहम प्रगति मानी जा रही है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि औपचारिक घोषणा से पहले समझौते के अंतिम विवरण पर चर्चा जारी है। उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग से हुई बातचीत को ‘बहुत अच्छी’ बताया। ट्रंप ने इस वार्ता को ‘शांति से संबंधित समझौता ज्ञापन’ करार दिया। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट किया कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाए रखेगा

फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान केवल गुजरने वाले जहाजों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने की अनुमति देने को तैयार हुआ है, लेकिन इसका मतलब ‘मुक्त आवागमन की पूर्ण बहाली’ नहीं है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ट्रंप के पोस्ट को ‘प्रचार’ बताया। आईआरजीसी ने कहा कि समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। आईआरजीसी के बयान में कहा गया है कि ट्रंप ने पहले परमाणु कार्यक्रम को किसी भी समझौते की मुख्य शर्त बताया था, लेकिन ईरान की ओर से इस पर कोई सहमति नहीं बनी है। इस स्तर पर परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा भी नहीं हुई है।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी पर बोले मार्को रूबियो, रिश्तों को बताया “वैश्विक सहयोग का आधार”

नई दिल्ली

 भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने आज दिल्ली में अपने समकक्ष एस. जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान कहा कि भारत और अमेरिका न केवल सहयोगी हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं, जो दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम करते हैं।

रूबियो ने आज सुबह अपने भारतीय समकक्ष जयशंकर से मिले। प्रतिनिधिमंडल-स्तर की बातचीत के दौरान शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि रणनीतिक संबंध भारत और अमेरिका के रिश्तों को अन्य देशों से अलग बनाते हैं।

रूबियो ने क्या कहा?
उन्होंने कहा, “अमेरिका और भारत सिर्फ सहयोगी नहीं हैं। हम रणनीतिक सहयोगी हैं और यह बात बेहद अहम है। जाहिर है हम दुनिया भर के देशों के साथ कई अलग-अलग मुद्दों पर काम करते हैं, लेकिन हमारी रणनीतिक साझेदारी ही इस रिश्ते को सबसे अलग बनाती है।”

रूबियो ने आगे कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि यह साझेदारी सिर्प इसी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में, वैश्विक स्तर पर सहयोग करने के अवसर भी देती है। और जैसा कि मैंने कहा और जैसा कि कल रात हमने खाने पर थोड़ी चर्चा भी की थी इसमें पश्चिमी गोलार्ध और वैसी ही दूसरी जगहें भी शामिल हो सकती हैं।”

‘भारत-अमेरिका रखते हैं साझा हित’
उन्होंने आगे कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते कई साझा हित रखते हैं। उन्होंने आगे कहा, “हम दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। सिर्फ यही बात हमारे बीच जबरदस्त सहयोग के लिए एक मजबूत आधार है। हमारे इतने सारे साझा हित हैं कि हमारे लिए उन पर लगातार काम करते रहना पूरी तरह से समझदारी की बात है।”

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, “यह किसी चीज को फिर से बहाल करने या उसमें नई जान डालने के बारे में नहीं है। मैंने कुछ लोगों को इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते देखा है बल्कि यह तो उस पहले से ही बहुत ठोस और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के बारे में है, जो हमारी सबसे अहम साझेदारियों में से एक है। मैं तो यहां तक कहूंगा कि यह दुनिया की सबसे अहम साझेदारियों में से एक है।”

तेलंगाना में भीषण गर्मी का कहर, हीटस्ट्रोक से 51 लोगों की मौत

हैदराबाद

 तेलंगाना राज्य में गर्मी लोगों पर भारी पड़ रही है. शनिवार को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हीटस्ट्रोक से 51 लोगों की मौत हो गई. सबसे ज़्यादा मौतें वारंगल जिले में हुईं, जहां 23 लोगों की मौत हुई.

संयुक्त करीमनगर जिले में 11, खम्मम में सात, आदिलाबाद में पांच और नलगोंडा में पांच लोगों की जान चली गई. उनमें से एक की मौत सरस्वती अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान हीटस्ट्रोक से हुई. वहीं शुक्रवार को तेज गर्मी की वजह से 34 लोगों की मौत हो गई. राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने ऐलान किया कि मरने वालों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा.

तेज़ गर्मी और लू को देखते हुए, मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने सचिवालय में इमरजेंसी रिव्यू किया. उन्होंने बताया कि जिन मंडलों और गांवों में सबसे ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया जाता है, उनकी पहचान की जानी चाहिए और वहां के लोगों को पहले से चेतावनी दी जानी चाहिए और जागरूकता फैलाई जानी चाहिए.

मंत्री ने आदेश दिया कि बस स्टैंड, बाजार, मुख्य सड़कों, उन इलाकों में जहां मजदूर ज़्यादा काम करते हैं और जहां लोग ज़्यादा आते-जाते हैं, वहां ठंडा पीने का पानी, छाछ और ओआरएस पैकेट उपलब्ध कराए जाने चाहिए.

जीवों की रक्षा करना हमारी ज़िम्मेदारी: उन्होंने कहा कि कलेक्टरों को खुद हीटवेव की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और गांव और मंडल लेवल के सभी स्टाफ को फील्ड लेवल पर रहना चाहिए.

उन्होंने कहा कि सनस्ट्रोक के लक्षण दिखते ही इमरजेंसी मेडिकल सर्विस को इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए. मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि लोगों के साथ-साथ जीवों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है और उन्होंने पानी की टंकियों और मिट्टी के बर्तनों के जरिए पक्षियों और जानवरों को पीने का पानी देने की अपील की.

तेलंगाना के 15 जिलों में 45 डिग्री से ज़्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया. सबसे ज़्यादा 46.3 डिग्री तापमान कोठागुडेम जिले में रिकॉर्ड किया गया, जबकि सबसे कम 39.8 डिग्री तापमान नारायणपेट जिले में रिकॉर्ड किया गया.

आंध्र प्रदेश में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत
दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश में तेज गर्मी की वजह से, अकेले शनिवार को अलग-अलग इलाकों में हीटस्ट्रोक से 16 लोगों की मौत हो गई. इनमें से बारह मौतें एनटीआर, कृष्णा और गुंटूर जिलों में हुईं. मचावरम मंडल (पलनाडु ज़िला) के वेमावरम गांव के जल्ला कोंडालू (54), केथनकोंडा के पठान नागुलमीरा (32), कोटिकलापुडी की मेका निर्मला (50), कांचीकाचेरला के मोहम्मद अबिदुन्निसा (26) और मेडिकोंडुरु मंडल (गुंटूर ज़िला) के सिरिपुरम के कडियाला बलैया (94) की मौत हीटस्ट्रोक की वजह से हुई. वहीं विजयवाड़ा के पंडित नेहरू बस स्टेशन पर हीटस्ट्रोक की वजह से तीन यात्रियों की मौत हो गई.

इसी तरह सत्यनारायणपुरम पुलिस स्टेशन के इलाके में एक अनजान व्यक्ति (60) की मौत हो गई, जबकि पेनामलुरु मंडल (कृष्णा ज़िला) के चोडावरम में एक भिखारी (45) की मौत हो गई. वारंगल के वी. नरसय्या (50) की विजयवाड़ा के ओल्ड टाउन इलाके में राजकुमारी थिएटर के पास हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. मुटलुरु, वट्टीचेरुकुरु मंडल (गुंटूर जिला) में, पदावला बसवैया (86) तेज़ गर्मी के कारण बीमार पड़ गए और बाद में उनकी मौत हो गई. आखिर में, पिडुगुराल्ला शहर (पलनाडु जिला) में डोंडेती वेंकटरावम्मा (80) और केबीपी अग्रहारम, रविकामथम मंडल (अनकापल्ली जिला) में दिव्यांग गडिगोयिला सत्यनारायण (28) की भी हीटस्ट्रोक से मौत हो गई. एलुरु जिले के पेडावेगी मंडल के पेडावेगी निवासी मारगानी श्रीनिवास राव (60) और उसी मंडल के कोप्पाका निवासी चल्लारी रत्नाला राव (55) की मौत हो गई.

इबोला संकट पर भारत अलर्ट: कांगो-युगांडा यात्रा से बचने की सलाह

 नई दिल्ली

 इबोला बीमारी के प्रकोप को देखते हुए, भारत सरकार ने रविवार को उन भारतीय नागरिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है जो कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में रह रहे हैं या वहां यात्रा कर रहे हैं।

सरकार ने उन्हें स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।

अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने परामर्श में कहा है कि कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान में बदलती स्थिति और विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों को देखते हुए, सभी भारतीय नागरिकों को अगली सूचना तक इन देशों की अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप और जोखिम
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में अभी तक बुन्दिबुग्यो वायरस स्ट्रेन के कारण होने वाली इबोला बीमारी का कोई मामला सामने नहीं आया है। अफ्रीका सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने आधिकारिक तौर पर कांगो और युगांडा को प्रभावित करने वाले बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन के प्रकोप को महाद्वीपीय सुरक्षा का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

कांगो और युगांडा की सीमाओं से सटे दक्षिण सूडान जैसे देशों को भी संक्रमण के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

निगरानी बढ़ाने के निर्देश
WHO की आपातकालीन समिति ने 22 मई को प्रवेश बिंदुओं पर रोग निगरानी को मजबूत करने के लिए अस्थायी सिफारिशें जारी की हैं।

इसका उद्देश्य उन यात्रियों का पता लगाना, उनका आकलन करना और उन्हें रिपोर्ट करना है जो ऐसे क्षेत्रों से आ रहे हैं जहाँ बुन्दिबुग्यो वायरस की पुष्टि हुई है और जिनमें अस्पष्ट बुखार के लक्षण हैं।

इबोला की गंभीर स्थिति
इबोला बीमारी एक वायरल रक्तस्रावी बुखार है, जो इबोला वायरस के बुन्दिबुग्यो स्ट्रेन के संक्रमण से होता है। यह एक अत्यंत गंभीर बीमारी है जिसकी मृत्यु दर काफी अधिक है।

बुन्दिबुग्यो वायरस के कारण होने वाली इबोला बीमारी को रोकने या इलाज के लिए कोई वैक्सीन या विशिष्ट उपचार स्वीकृत नहीं है।

जम्मू-कश्मीर में बड़ा ऑपरेशन: बारामूला में आतंकी ठिकाना ध्वस्त, विस्फोटक बरामद

जम्मू कश्मीर

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. उत्तरी कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में चलाए गए संयुक्त तलाशी अभियानों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के ठिकानों को ढूंढ निकाला और उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया.

सुरक्षा बलों को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के क्रीरी इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी. जिसके बाद सेना और स्थानीय पुलिस ने नीलसर इलाके में एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया था.

आतंकवादी इस जगह का इस्तेमाल दोबारा न कर सकें, इसलिए सुरक्षा बलों ने इस ठिकाने को तुरंत तबाह कर दिया. पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है.

23 विस्फोटक स्टिक्स बरामद
इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने इलाके में बने एक गुप्त आतंकी ठिकाने का पर्दाफाश किया. सुरक्षा बलों को इन ठिकानों से भारी मात्रा में विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद हुई. ठिकाने की तलाशी लेने पर वहां से करीब 23 विस्फोटक स्टिक्स और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई.

बांदीपोरा में प्राकृतिक गुफाओं में बना था ठिकाना
इससे पहले उत्तरी कश्मीर के ही बांदीपोरा जिले से भी ऐसी ही एक कामयाबी की खबर आई थी. सुरक्षा बलों ने बांदीपोरा के अरागम इलाके में स्थित खंजपत्री के जंगलों में एक बड़े आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया था. ये कार्रवाई 14 से 15 मई के बीच एक विशेष ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय ऑपरेशन’ के तहत की गई थी. इस बड़े ऑपरेशन को सेना की 13 राष्ट्रीय राइफल्स, बांदीपोरा पुलिस और CRPF की तीसरी बटालियन ने मिलकर अंजाम दिया था.

युद्ध जैसा सामान बरामद
पहाड़ी इलाके में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों की नजर वहां बनी प्राकृतिक गुफाओं पर गई. जब इन गुफाओं की तलाशी ली गई त वहां छिपाकर रखा गया भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान बरामद हुआ. इस ठिकाने से रोजमर्रा के कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स टूल्स, खाने-पीने का राशन, बर्तन जैसी चीजें भी मिली थीं.

SBI ग्राहकों के लिए बड़ी राहत! 25-26 मई की बैंक हड़ताल टली, सामान्य रहेंगे सभी कामकाज

नई दिल्ली

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के लिए जरूरी खबर है। बैंक ने बताया कि 25 और 26 मई 2026 को होने वाली बैंक कर्मचारियों की हड़ताल फिलहाल टाल दी गई है। इसका मतलब है कि इन दोनों दिनों में देशभर में SBI की सभी शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी और ग्राहकों को सभी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के मिलती रहेंगी।

SBI ने क्या कहा?
SBI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बयान में कहा, “हम अपने सम्मानित ग्राहकों को सूचित करते हैं कि ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन (AISBISF) द्वारा 25 और 26 मई 2026 को प्रस्तावित हड़ताल टाल दी गई है। हमारी सभी शाखाएं सामान्य रूप से काम करेंगी और सभी नियमित बैंकिंग सेवाएं प्रदान करेंगी।”

क्यों टल गई हड़ताल?
SBI स्टाफ एसोसिएशन, बंगाल सर्किल के सचिव सुदीप दत्ता ने कहा, ‘प्रबंधन के साथ मुंबई में हुई बैठक पॉजिटिव रही और कर्मचारी महासंघ की कई मांगों पर प्रगति हुई है। इन परिस्थितियों में प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित कर दिया गया है।’

SBI कर्मचारी महासंघ के महासचिव एल चंद्रशेखर ने अपने सदस्यों को भेजे संदेश में कहा, “मुंबई स्थित कॉरपोरेट सेंटर में बैंक प्रबंधन और महासंघ के बीच हुई बैठक सकारात्मक रही। हमें यह बताते हुए खुशी है कि हमारी मांगों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। चर्चा के दौरान हुई प्रगति को देखते हुए प्रस्तावित हड़ताल स्थगित कर दी गई है।”

क्या थी मांगें?
यह हड़ताल All India State Bank of India Staff Federation (AISBISF) ने बुलाई थी। यूनियन का कहना था कि बैंक में कर्मचारियों की कमी, आउटसोर्सिंग, पेंशन से जुड़े मुद्दे और वेतन असमानता जैसे कई मामलों पर लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। यूनियन ने 16 मांगों की एक सूची रखी थी। इसमें नए कर्मचारियों की भर्ती, खाली पदों को भरना, स्थायी नौकरियों में आउटसोर्सिंग बंद करना, NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम) में ज्यादा लचीलापन देना और कर्मचारियों के ट्रांसफर नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल थीं।

कर्मचारी संगठन का कहना था कि स्टाफ कम होने से मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है। साथ ही, कई शाखाओं में सुरक्षा गार्डों की कमी से सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि, बैंक प्रबंधन और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के बाद फिलहाल यह आंदोलन वापस ले लिया गया है। इससे बैंकिंग सेवाओं में संभावित रुकावट टल गई है और ग्राहकों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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