कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव: डीके शिवकुमार बने मुख्यमंत्री, मंत्रियों ने भी ली शपथ

कर्नाटक

कर्नाटक में पिछले तीन साल से चल रहा मुख्यमंत्री पद का विवाद आखिरकार थम गया है। कांग्रेस के अहम रणनीति कार माने जाने वाले डीके शिवकुमार राज्य की बागडोर अपने हाथों में ले ली है। बुधवार को कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी में डीके शिवकुमार ने पद और गरिमा की शपथ ली। उनके साथ कर्नाटक कांग्रेस के बड़े दलित नेता जी परमेश्वर ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही डीके के 13 और मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र का नाम भी शामिल है

राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए निकले डीके शिवकुमार सबसे पहले अपनी मां के आवास पर पहुंचे। यहां पर उन्होंने उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह सीधे लोकभवन पहुंचे, जहां पर कांग्रेस के तमाम बड़े नेता समेत संत समाज उनकी प्रतीक्षा में था। शिवकुमार ने सबसे पहले वहां मौजूद संतों का अभिवादन किया। संतों ने मिलकर ‘होने वाले मुख्यमंत्री’ को पटका पहनाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद शिवकुमार मंच पर पहुंचे, जहां सबसे पहले उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का गले लगकर अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का स्वागत किया।

संविधान की प्रति लेकर ली शपथ
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले शिवकुमार को बुलाया, तो डीके के हाथ में लाल रंग की संविधान की प्रति भी थी। इसी प्रति को हाथ में लेकर उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली, जिस वक्त डीके शपथ ले रहे थे उनके कार्यकर्ताओं के बीच में जबरदस्त जोश देखने को मिला। शपथ लेने के बाद डीके ने मंच पर जनता के सामने झुककर उनका अभिवादन किया। डीके के शपथ लेने के बाद जी परमेश्वरा ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद एक-एक करके बाकी मंत्रियों ने भी अपने पद की शपथ ली। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बेटे यतींद्र भी शामिल थे।

नए मंत्रियों में कौन-कौन शामिल?
कर्नाटक में तीन साल के उठा पटक के बाद सत्ता संभालने वाले डीके शिवकुमार की टीम में नए नाम भी शामिल हुए हैं। उप मुख्यमंत्री के रूप में जी. परमेश्वर ने शपथ ली है। इसके अलावा के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, रामलिंगा रेड्डी, सतीश जारकीहोली, कृष्णा बायर गौड़ा, प्रियांक खरगे, यू.टी. खादर, ईश्वर खंड्रे, यतींद्र सिद्दारमैया, बैरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल ने भी मंत्री के रूप में पद और गरिमा की शपथ ली।

वीआईपी रहा सीएम शिवकुमार का शपथ ग्रहण
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह भव्य रहा है। इस दौरान उनके परिवार के सदस्य में मौजूद रहे। उनकी मां गौरम्मा, पत्नी उषा और उनके बच्चे शामिल थे। समारोह में धार्मिक गुरु, फिल्म जगत की हस्तियां, खिलाड़ी और उद्योगपति भी मौजूद थे। चालीस से अधिक धर्मगुरु समारोह में उपस्थित थे। इसके अलावा अभिनेता रविचंद्रन, अभिनेत्री जयमाला, किच्चा सुदीप, रम्या, पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद और उद्योगपति अनिल कुंबले जैसी जानी-मानी हस्तियां भी मौजूद थीं। परंपरा से हटकर शपथ ग्रहण समारोह पश्चिम दिशा के बजाय पूर्व दिशा की ओर मुख करके आयोजित किया गया। यह निर्णय आध्यात्मिक और ज्योतिषीय सलाहकारों की सलाह पर लिया गया था। लोक भवन परिसर में स्थित ‘ग्लास हाउस’ में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जहां निर्धारित स्थानों पर लगभग 3,500 मेहमानों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। धर्मगुरुओं के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी, जबकि समारोह की कार्रवाई को सभी तक पहुंचाने के लिए छह एलईडी स्क्रीन लगाई गई थीं। इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से अधिक वीआईपी पास जारी किए गए थे।

बता दें, तीन साल तक चली खींचतान के बाद सिद्दारमैया ने आखिर कार अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद शिवकुमार का राजतिलक तय माना जा रहा था। हालांकि, दिल्ली में पार्टी नेताओं ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन बाद में पूरा मामला खुल गया। दिल्ली से लौटकर आए सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दिया और इसके साथ ही पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया गया। शिवकुमार ने विधायकों के साथ अपना समर्थन दिखाते हुए राज्यपाल से शपथ के लिए समय मांगा। इसके बाद तीन जून की तारीख तय हुई। बुधवार तीन जून को पद और गरिमा की शपथ लेने के साथ ही कर्नाटक में कांग्रेस का किंगमेकर आखिरकार किंग बन ही गया।

 

मुंबई में मौसम का डबल अटैक! आंधी-तूफान और झमाझम बारिश का अलर्ट, मॉनसून पर बड़ा अपडेट

मुंबई 

महाराष्ट्र में झमाझम बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है। IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में आंधी और तूफान की संभावनाएं जताई हैं। खास बात है कि मॉनसून की एंट्री का तारीख नजदीक आने के साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम बदलने लगा है। कहा जा रहा है कि पुणे में पूरे सप्ताह बारिश की संभावनाएं जताई जा रही हैं। मौसम विभाग का कहना है कि 4 जून को मॉनसून केरल में दस्तक दे सकता है।

खबर है कि मुंबई और पुणे के साथ ठाणे और पालघर जिले में येलो अलर्ट जारी कर दिया गया है। यहां बारीश और तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके अलावा कोंकण और पश्चिम महाराष्ट्र बेल्ट में प्री मॉनसून गतिविधियां और मजबूत हो सकती हैं। ऐसे में क्षेत्र में झमाझम बारिश होने के आसार हैं। खास बात है कि महाराष्ट्र के कई जिले लंबे समय से उमस और गर्मी का सामना कर रहे थे। ऐसे में बारिश तापमान राहत दे सकती है।
4 जून तक मुंबई में बारिश

खास बात है कि इस सप्ताह की शुरुआत से ही मुंबई में बारिश दर्ज की जा रही थी। अब संभावनाएं हैं कि 4 जून तक शहर में बारिश हो सकती है। वहीं, पुणे में कम से कम 6 जून तक हल्की बारिश हो सकती है। फिलहाल, शहर में 3 और 5 जून को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, 4 जून को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। इस दौरान बारिश जारी रहने की संभावनाएं हैं।

मौसम के जानकारों का कहना है कि अगले 5 दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाएं चल सकती हैं। इस दौरान इनकी रफ्तार 40 से 50 किमी प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि इस दौरान आंधी-तूफान के साथ कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। खास बात है कि एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि बारिश के मौजूदा दौर का मॉनसून के आगमन से लेना देना नहीं है।
महाराष्ट्र में मॉनसून

क्षेत्रीय मौसम विभाग का कहना है कि प्री मॉनसून गतिविधियों के लिए पूरे महाराष्ट्र में स्थिति अनुकूल हैं। दोपहर और शाम के समय में बारिश की ज्यादा संभावनाएं हैं।
4 जून को आएगा मॉनसून

मंगलवार को IMD ने बताया कि मॉनसून 4 जून के आसपास केरल पहुंच सकता है। आईएमडी ने अपने दैनिक पूर्वानुमान में कहा, ‘दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप तथा केरल और तमिलनाडु के कुछ भागों में चार जून के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून के और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।’

आईएमडी ने पहले अनुमान जताया था कि केरल में मानसून की दस्तक 26 मई के आसपास होगी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। बाद में विभाग ने 29 मई को कहा कि मानसून अगले हफ्ते पहुंच सकता है।

₹2,000 करोड़ विवाद के बाद IndusInd Bank पर बढ़ा दबाव, PMO और RBI तक पहुंची शिकायत

मुंबई 

प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंक इंडसइंड बैंक की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बैंक में करीब ₹2,000 करोड़ की डेरिवेटिव्स अकाउंटिंग गड़बड़ी सामने आने के बाद अब एक व्हिसलब्लोअर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और कई अन्य नियामक एजेंसियों से मामले की जांच की मांग की है।

मामले से जुड़े डॉक्यूमेंट्स के अनुसार शिकायत की प्रतियां गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) और अन्य एजेंसियों को भी भेजी गई हैं। इस खबर के बाद शुरुआती कारोबार में ही इंडसइंड बैंक के शेयर आज करीब 2.50 प्रतिशत से अधिक नीचे 888.80 रुपये पर आ गए।

अंदरूनी कारोबार और गवर्नेंस में खामियों के आरो
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक शिकायत में बैंक के पूर्व पूर्वी भारत जोनल हेड समीर अग्रवाल पर इनसाइडर ट्रेडिंग यानी गोपनीय जानकारी के आधार पर शेयर ट्रेडिंग का आरोप लगाया गया है। व्हिसलब्लोअर का दावा है कि समीर अग्रवाल ने बैंक की गोपनीय जानकारियों का इस्तेमाल करते हुए अपने परिवार और संबंधित संस्थाओं के जरिए शेयरों में कारोबार कराया। आरोप है कि सार्वजनिक रूप से महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने से पहले करीब ₹815 करोड़ के शेयर डील के जरिए लगभग ₹46 करोड़ का लाभ कमाया गया।

माइक्रोफाइनेंस लोन और ऑडिट रिपोर्ट को लेकर भी सवाल
शिकायत में केवल इनसाइडर ट्रेडिंग ही नहीं, बल्कि कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर, माइक्रोफाइनेंस लोन की एवरग्रीनिंग, ऑडिट निष्कर्षों को दबाने और कथित अनियमितताओं को छिपाने के प्रयास शामिल हैं। व्हिसलब्लोअर का आरोप है कि बैंक के कुछ सीनियर अफसरों और बोर्ड के सदस्यों ने इन मुद्दों को दबाने की कोशिश की।

इंडसइंड बैंक ने आरोपों को किया खारिज
बता दें इकनॉमिक टाइम्स द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में इंडसइंड बैंक ने इन आरोपों को खारिज किया है। बैंक ने कहा कि वह व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करता। बैंक के अनुसार सभी शिकायतों की आंतरिक रूप से जांच की गई है और आवश्यक कार्रवाई नियामकीय नियमों तथा बैंक की नीतियों के अनुसार की गई है। बैंक ने यह भी कहा कि कुछ मामलों की जानकारी उसने स्वयं संबंधित अधिकारियों को दी थी। चूंकि मामला अभी समीक्षा के दायरे में है, इसलिए बैंक इस पर और टिप्पणी नहीं करेगा।

बढ़ सकती है नियामकों की निगरानी
विशेषज्ञों का मानना है कि ₹2,000 करोड़ की अकाउंटिंग गड़बड़ी के बाद सामने आई इस नई शिकायत से इंडसइंड बैंक पर नियामकीय निगरानी और बढ़ सकती है। अगर जांच एजेंसियां आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाती हैं, तो बैंक और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच शुरू हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब अनुकंपा नियुक्ति में भी बेटियों को मिलेगा बराबरी का हक

 नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के बाद बेटियों के अधिकार को लेकर बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विवाह के बाद भी बेटी परिवार का ही अंग है. किसी बेटी को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए सिर्फ इसलिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि वह विवाहित है. सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े फैसले ने विवाहित बेटियों के अधिकार को लेकर छाई भ्रम की धुंध हटा दी है। 

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया कि निवास एक अलग पात्रता शर्त है, जिसका मूल्यांकन प्रत्येक मामले के तथ्यों पर किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी विवाहित बेटियों के अधिकार खारिज किए जाने को इस धारणा के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता कि हर विवाहित बेटी जरूरी रूप से कहीं और रहती है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक निर्णय उन अनुमानों पर आधारित नहीं किया जा सकता, जो व्यापक हैं और जीवंत वास्तविकताओं से कटे हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता निशा ने तर्क दिया कि विवाहित बेटियों को एक लाभकारी योजना से बाहर करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है और यह समानता की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करता है. सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि विवाहित बेटियाँ आम तौर पर अपने वैवाहिक घरों में चली जाती हैं। 

सरकार की ओर से दलील यह भी दी गई कि विवाह के बाद बेटियां स्थानीय निवास की आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा का उद्देश्य उत्तराधिकार का अधिकार बनाना नहीं, एक मृतक के परिवार को तत्काल वित्तीय राहत देना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली में निरंतरता सुनिश्चित करना है. एक बार जब निर्भरता को मानक रूप में स्वीकार कर लिया जाता है, तो एक विवाहित बेटी को केवल इसलिए बहिष्कृत करना तर्कहीन हो जाता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर फैसला सुनाया कि क्या विवाहित बेटियों को संवैधानिक रूप से ‘परिवार’ की परिभाषा से बाहर रखा गया है? क्या अनुकंपा के आधार पर उन्हें उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस दिया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2025 में दिए अपने निर्णय में कहा था कि केवल अविवाहित बेटी को ही अनुकंपा के आधार पर माता या पिता के नाम से लाइसेंस वाली उचित मूल्य की राशन दुकान का आवंटन अनुकंपा के आधार पर ट्रांसफर हो सकता है। 

याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अपनी याचिका में विवाहित बेटी ने यह तर्क दिया था कि वह अपने पिता की मृत्यु के बाद मां और एक विकलांग बहन की देखभाल कर रही है। 

तिरुपति में मुंडन का नया रिकॉर्ड, एक साल में 12.4 लाख श्रद्धालुओं ने चढ़ाए बाल

तिरुपति
 आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुमाला तिरुपति मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर को बाल चढ़ाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है।मंदिर प्रबंधन तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अनुसार, 1 से 27 मई तक कुल 12,43,063 श्रद्धालुओं ने अपने बाल अर्पित किए। यह आंकड़ा पिछले वर्षों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना है।

पिछले सालों से तुलना
मई 2024 में यह संख्या लगभग 10.65 लाख थी, जबकि इससे पहले की अवधि में 10.18 लाख भक्तों ने बाल चढ़ाए थे। मंदिर अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों, हफ्ते के आखिरी मे भीड़ और देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों के आने से इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एक दिन का रिकॉर्ड
18 से 23 मई के बीच रोजाना 50,000 से अधिक भक्तों ने मुंडन करवाया। खासतौर पर 23 मई को 57,580 बाल चढ़ावे दर्ज किए गए, जो हाल के वर्षों में एक दिन का सबसे अधिक आंकड़ा है।

24 घंटे मुंडन सेवाएं
भीड़ को ठीक तरीके से संभालने के लिए TTD ने मुख्य कल्याणकट्टा सहित 11 मिनी मुंडन केंद्रों पर सेवाएं 24 घंटे चालू रहती हैं। 1,150 से अधिक नाई (जिनमें 269 महिला नाई शामिल हैं) शिफ्ट में काम कर रहे हैं ताकि भक्तों को बिना इंतजार के समय में सेवा मिल सके।

167 करोड़ के बाल
धार्मिक आस्था के साथ-साथ ये बाल TTD के लिए बड़े राजस्व का स्रोत भी बन गए हैं। इन्हें ‘काला सोना’ कहा जाता है। इकट्ठा किए गए बालों को सॉर्टिंग और ग्रेडिंग के बाद चीन, इटली, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में नीलाम किया जाता है, जहां इनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में होता है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2020-21 में बाल नीलामी से 67 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी, जो 2023-24 में बढ़कर 167 करोड़ रुपये हो गई। 2024-25 में यह 190 करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान है और अगले वित्तीय वर्ष में 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है।

भक्तों की सुविधा पर जो
TTD ने मुंडन केंद्रों पर स्वच्छता, स्टरलाइज्ड ब्लेड, गर्म पानी, पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था और टोकन सिस्टम जैसी सुविधाएं बढ़ा दी हैं ताकि भक्तों को सुरक्षित और आरामदायक अनुभव मिले।

114 राफेल डील क्यों है खास? 90 लड़ाकू विमान भारत में बनेंगे, बढ़ेगा स्वदेशी रक्षा उत्पादन

 नई दिल्ली

भारतीय रक्षा क्षेत्र और वायु सेना (IAF) के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स (Rafale Fighter Jets) खरीदने की मेगा डील की दिशा में सबसे बड़ा और औपचारिक कदम उठा लिया है। 

रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस सरकार को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR – Letter of Request) जारी कर दिया है, जो सरकारी स्तर (G-to-G) पर होने वाले रक्षा समझौतों की आधिकारिक शुरुआत है. लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली यह मेगा डील भारत का अब तक का सबसे बड़ा फाइटर जेट खरीद कार्यक्रम है। 

यह सौदा न केवल भारतीय वायु सेना की घटती ‘स्कवाड्रन क्षमता’ को मजबूत करेगा, बल्कि देश को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के मामले में एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगा. इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि यह ‘बाय ग्लोबल, मेक इन इंडिया’ नीति के तहत आ रहा है, जिसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन और रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा। 

क्यों खास है 114 राफेल की नई डील?
यह नई राफेल डील साल 2016 में हुई 36 राफेल विमानों की खरीद से बिल्कुल अलग और कई गुना बड़ी है. पिछली बार भारत ने सभी 36 विमान फ्रांस से तैयार स्थिति (Fly-away condition) में खरीदे थे. लेकिन इस बार भारत सरकार की प्राथमिकता देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. इस नई मेगा डील की सबसे मुख्य विशेषताएं हैं…

22 से 24 जेट्स फ्रांस से तैयार होकर आएंगे: वायुसेना की आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए लगभग 22 से 24 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस में डसॉल्ट एविएशन की मैरिनेक फैक्ट्री से पूरी तरह तैयार स्थिति में उड़कर भारत आएंगे. इससे वायुसेना को तुरंत आधुनिक कॉम्बैट क्षमता मिलेगी। 

90 से 94 जेट्स का निर्माण भारत में होगा: इस डील की असली ताकत यह है कि कुल 114 विमानों में से करीब 90 से 94 फाइटर जेट्स का उत्पादन भारत में किया जाएगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब राफेल जैसे विश्वस्तरीय 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस की धरती से बाहर किसी अन्य देश में किया जाएगा। 

50% स्वदेशी पुर्जों का होगा इस्तेमाल: भारत में बनने वाले इन राफेल विमानों में कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री, तकनीक और पुर्जे पूरी तरह से भारतीय यानी ‘स्वदेशी’ होंगे. इसके साथ ही, इस समझौते के तहत भारत को यह अधिकार और तकनीकी पहुंच मिलेगी कि वह अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों (जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल को राफेल जेट में सीधे इंटीग्रेट कर सके) .

कौन सी भारतीय कंपनियां बनेंगी डसॉल्ट एविएशन की पार्टनर?
फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन अकेले भारत में इतने बड़े पैमाने पर विमानों का निर्माण नहीं कर सकती. इसके लिए उसे भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के साथ हाथ मिलाना होगा। 

साझेदारी की रेस में सबसे आगे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Limited – TASL) का नाम है. जून 2025 में ही डसॉल्ट एविएशन और टाटा (TASL) ने राफेल के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य धड़ या बॉडी) को भारत में बनाने के लिए एक बड़े रणनीतिक समझौते की घोषणा की थी। 

इसके अलावा, भारत की सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिसके पास लड़ाकू विमान बनाने का दशकों पुराना अनुभव है। 

निजी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियां जैसे लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा डिफेंस और भारत फोर्ज भी इस विशाल सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकती हैं. ये भारतीय कंपनियां राफेल के विंग्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार कंपोनेंट्स, केबिन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों के निर्माण में डसॉल्ट के साथ मिलकर काम करेंगी। 

कहां होगा इन फाइटर जेट्स का प्रोडक्शन और मेंटेनेंस?
90 से अधिक राफेल विमानों का उत्पादन भारत के किन शहरों में होगा, इसे लेकर औद्योगिक गलियारों में भारी उत्साह है. सबसे बड़ा हब हैदराबाद बनने जा रहा है, जहां टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और डसॉल्ट एविएशन मिलकर राफेल के फ्यूजलेज और मुख्य बॉडी पार्ट्स के निर्माण के लिए एडवांस्ड फैसिलिटी स्थापित कर रहे हैं। 

इसके अलावा, विमानों की अंतिम असेंबली लाइन (Final Assembly Line) को लेकर भी कयास जारी हैं, जिसके लिए महाराष्ट्र या कर्नाटक के रक्षा औद्योगिक पार्कों पर विचार किया जा सकता है। 

उत्पादन के साथ-साथ, विमानों के रख-रखाव को लेकर भी भारत ने बाजी मार ली है. डसॉल्ट एविएशन ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास एक अत्याधुनिक ‘मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल’ (MRO) फैसिलिटी स्थापित की है, जिसका नाम DAMROI (Dassault Aviation Maintenance, Repair and Overhaul India) है। 

यह सेंटर पहले से ही चालू हो चुका है. वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास मौजूद मिराज-2000 और 36 राफेल विमानों की सर्विसिंग का काम संभाल रहा है. भविष्य में भारत में बनने वाले 94 राफेल विमानों की सर्विसिंग और अपग्रेडेशन भी इसी एमआरओ हब के जरिए देश के भीतर ही संभव होगी। 

रक्षा क्षेत्र में लगेंगी कितनी नौकरियां?
यह निवेश भारतीय रोजगार बाजार के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है. रक्षा विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक इस मेगा प्रोजेक्ट से भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियां पैदा होंगी। 

    हाई-टेक इंजीनियरिंग नौकरियां: विमान के डिजाइन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और असेंबली के लिए हजारों एयरोस्पेस इंजीनियरों, डेटा साइंटिस्ट्स और तकनीशियनों की सीधी भर्ती होगी। 

    एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा: 50% स्वदेशी पुर्जों की शर्त के कारण भारत की सैकड़ों छोटी और मध्यम (MSME) कंपनियों को कलपुर्जे बनाने के ऑर्डर मिलेंगे. इससे स्थानीय स्तर पर वेल्डिंग, मशीनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में काम करने वाले कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार की बाढ़ आ जाएगी। 

    कौशल विकास (Skill Development): फ्रांस की तकनीक भारत में ट्रांसफर (Transfer of Technology) होने से भारतीय कार्यबल को वैश्विक स्तर की हाई-टेक ट्रेनिंग मिलेगी, जो भविष्य में भारत के अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) के विकास में काम आएगी। 

भारतीय वायु सेना के लिए क्यों जीवनदान है यह सौदा?
वर्तमान में भारतीय वायु सेना (IAF) लड़ाकू विमानों की भारी किल्लत से जूझ रही है. दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना के पास 42 लड़ाकू विमान स्क्वॉड्रन होने चाहिए. लेकिन पुराने मिग-21 जैसे विमानों के रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर वर्तमान में लगभग 29 से 30 स्क्वॉड्रन पर आ गई है। 

पड़ोसी देश पाकिस्तान जहां हाल ही में चीन से पांचवीं पीढ़ी के जे-35 (J-35) विमान लेने की फिराक में है, वहीं चीन लगातार अपनी हवाई ताकत बढ़ा रहा है. ऐसे में 114 राफेल विमानों का वायु सेना में शामिल होना भारत के पलड़े को भारी कर देगा. राफेल अपने खतरनाक एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और ‘मिट्योर’ जैसी लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए जाना जाता है। 

यह महा-डील न केवल भारत की हवाई सरहदों को अभेद्य बनाएगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश को आत्मनिर्भरता की एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी. वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक इस सौदे के अंतिम कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। 

लाड़की बहन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, 16 हजार पुरुष उठा रहे थे लाभ

मुंबई 

महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहन योजना’ की जांच में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं. दस्तावेजों की जांच और ई-केवाईसी प्रक्रिया के बाद सरकार ने करीब 80 लाख लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया है. जांच में यह भी खुलासा हुआ कि हजारों पुरुष महिलाओं के नाम पर इस योजना का लाभ उठा रहे थे। 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि योजना शुरू करते समय पात्रता के लिए कुछ शर्तें तय की गई थीं, लेकिन शुरुआती चरण में स्व-प्रमाणन (Self Certification) के आधार पर आवेदन स्वीकार किए गए थे. बाद में नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने लाभार्थियों के सत्यापन को लेकर सवाल उठाए, जिसके बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच और केवाईसी अभियान शुरू किया। 

जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सरकार की तरफ से कराए गए विभिन्न सरकारी डेटाबेस के मिलान के बाद कई तरह की गड़बड़ियां सामने आईं. जांच में पता चला कि करीब 16 हजार पुरुषों ने खुद को महिला बताकर योजना का लाभ लिया. इसके अलावा लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारी, 10 लाख आयकरदाता और 4 से 5 लाख ऐसे लाभार्थी पाए गए जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन मौजूद है, जबकि योजना के नियमों के तहत वे पात्र नहीं थे। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 74 हजार ऐसी महिलाएं भी पाई गईं, जिनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी, जबकि करीब 2 लाख महिलाओं की उम्र 65 वर्ष से अधिक निकली. दोनों ही श्रेणियां योजना की पात्रता शर्तों से बाहर हैं। 

ई-केवाईसी नहीं कराने वालों पर भी कार्रवाई
जांच में यह भी सामने आया कि करीब 62 लाख लाभार्थियों ने बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद ई-केवाईसी नहीं कराया. सरकार ने ई-केवाईसी की समय-सीमा तीन बार बढ़ाई थी और करीब पांच महीने तक लोगों को दस्तावेज सत्यापन का अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लाभार्थियों ने प्रक्रिया पूरी नहीं की। 

सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी पहचान सत्यापन की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी खातों, पहचान की चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी को रोकना है। 

अब भी 1.60 करोड़ महिलाओं को मिल रहा लाभ
उधर मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अपात्र लाभार्थियों को हटाने के बावजूद योजना का लाभ अभी भी करीब 1.60 करोड़ पात्र महिलाओं को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना को पारदर्शी बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि सहायता राशि केवल वास्तविक और पात्र महिलाओं तक ही पहुंचे। 

राज्य सरकार का दावा है कि इस कार्रवाई से योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सकेगा. वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग रहा है कि शुरुआती चरण में इतनी बड़ी संख्या में अपात्र लोगों के आवेदन कैसे स्वीकृत हो गए। 

केंद्रीय कर्मचारियों को जल्द मिल सकती है बड़ी राहत, 4 महीने का DA एरियर आने के संकेत

नई दिल्ली

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को जुलाई 2026 छमाही के महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) का इंतजार है। बीते छमाही में कर्मचारियों के DA में 2 पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई थी और यह 60 फीसदी हो गया। अब ऐसा अनुमान है कि सरकार डीए में 3 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। अगर ऐसा हुआ तो केंद्रीय कर्मचारियों का डीए बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगा। डीए की बढ़ोतरी जुलाई से लागू होगी लेकिन इसका सितंबर या अक्टूबर में ऐलान होने की उम्मीद है। अगर सितंबर में ऐलान होता है तो तीन महीने- जुलाई, अगस्त और सितंबर का एरियर मिलेगा। वहीं, अक्टूबर में ऐलान होता है तो चार महीने- जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का एरियर मिलेगा। आइए डिटेल जान लेते हैं।

क्यों 3 पर्सेंट का है अनुमान?
लेबर ब्यूरो की ओर से जारी ताजा महंगाई के आंकड़ों के बाद संकेत मिल रहे हैं कि सरकार DA में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। अप्रैल 2026 के लिए जारी ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (CPI-IW) बढ़कर 149.9 पर पहुंच गया है। इसी के आधार पर DA की गणना होती है।

शुरुआती चार महीनों के आंकड़ों के बाद अनुमान है कि जून तक यह गणना 63 फीसदी के ऊपर बनी रह सकती है। आमतौर पर DA को पूरे अंक में लागू किया जाता है, इसलिए जुलाई से 63 फीसदी महंगाई भत्ता मिलने की संभावना जताई जा रही है।

कितनी होगी बढ़ोतरी?
अगर 3 फीसदी बढ़ोतरी होती है तो न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 पाने वाले कर्मचारी का DA हर महीने ₹540 बढ़ जाएगा। ऐसे में सितंबर के महीने में एरियर 1500 रुपये से ज्यादा और अक्टूबर के महीने में 2000 रुपये से ज्यादा मिलेगा।

आठवें वेतन आयोग के दौर में ऐलान
यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हो रही है जब 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज है। कर्मचारी संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से पहले कम से कम 50 फीसदी DA को बेसिक पे में मर्ज किया जाए। बता दें कि सरकार ने पिछले साल आठवें वेतन आयोग का गठन किया था। यह वेतन आयोग सिफारिशें अगले साल की पहली छमाही तक सरकार को सौंप सकता है। हालांकि, सिफारिशें बैकडेट में जाकर एक जनवरी 2026 से लागू होने की उम्मीद की जा रही हैं। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों को सरकार एरियर के तौर पर मोटी रकम दे सकती है। यह एरियर 18 से 20 महीने तक का हो सकता है।

32 हजार टन सोने को लेकर सरकार का बड़ा प्लान, 1% भी बाजार में आया तो घट सकता है आर्थिक बोझ

नई दिल्ली
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों जनता से सालभर सोना नहीं खरीदने की अपील करके सभी को चौंका दिया था. सरकार का तर्क था कि सोने की बढ़ती खपत से देश का आयात बिल काफी बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ रहा है. इस अपील का कितना असर हुआ या होगा, ये तो नहीं पता लेकिन सरकार ने सोने की वजह से आयात बिल पर पड़ने वाले बोझ को कम करने का दूसरा प्‍लान बना लिया है. सरकार की न‍िगाह देश के घरों और मंदिरों में जमा करीब 32 हजार टन सोने पर है. उसका मानना है कि इसमें से अगर 1 फीसदी सोना भी हर साल बाजार में आ जाए तो आयात बिल को एक तिहाई से भी ज्‍यादा कम किया जा सकता है। 

भारत में सोने की खरीद निवेश कम और जरूरत ज्‍यादा लगती है. त्‍योहार हो या शादी अथवा अन्‍य कोई मौका, सोने के गहने खरीदना परंपरा से जुड़ा होता है. हालांकि, हर साल सोने की यह खरीद धीरे-धीरे उनके पास ऐसे गोल्‍ड का भंडार तैयार कर देती है, जिसका लंबे समय तक कोई इस्‍तेमाल नहीं होता है. पीएम मोदी ने भी अपनी अपील में इसी तरफ इशारा किया था कि लोग विदेश से नया सोना आयात करने के बजाय, घरों में कैद सोने को ही बाजार में लाएं और रीसाइकिल कराएं। 

देश में कितना है सोने का भंडार
गोल्‍ड इंडस्‍ट्री से जुड़े एक्‍सपर्ट का मानना है कि भारतीय घरों में करीब 30 से 32 हजार टन सोने का भंडार है, जिसकी कीमत 3.8 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है. यह आंकड़ा कई देशों की जीडीपी से भी ज्‍यादा है. कुछ एक्‍सपर्ट का तो दावा है कि यह आंकड़ा 35,000 टन तक जा सकता है. इसमें से ज्‍यादातर सोने का भंडार बैंक लॉकर्स, अलमारियों और तिजोरियों में भरा हुआ है. अगर इसमें से छोटा सा हिस्‍सा भी इकनॉमी में वापस आ जाए तो इसका बड़ा असर पड़ेगा. सरकार की मंशा भी यही है कि इस सोने को वापस सिस्‍टम में लाया जाए। 

आखिर क्‍या है गोल्‍ड रीसाइकलिंग
यह बात तो समझ में आती है कि सरकार की मंशा गोल्‍ड रीसाइकलिंग करने की है, लेकिन यह काम होगा कैसे और इसका फायदा क्‍या होगा. गोल्‍ड रीसाइकलिंग का मतलब है पुराने या टूटे गहनों, सिक्‍कों, बार, उद्योगों के स्‍क्रैप और इलेक्‍ट्रॉनिक प्रोडक्‍ट में इस्‍तेमाल किए गए सोने को वापस रिफाइन करके शुद्ध सोने में बदलना. सबसे पहले इन प्रोडक्‍ट की शुद्धता मापी जाती है और फिर उसे पिघलाकर रिफाइन किया जाता है. इस प्रक्रिया से उच्‍च मानक वाला 99.9 फीसदी शुद्धता का सोना प्राप्‍त होता है. फिर इस गोल्‍ड का इस्‍तेमाल ज्‍वैलरी बनाने, सिक्‍के व अन्‍य बुलियन प्रोडक्‍ट को तैयार करने में किया जाता है। 

रीसाइकिल से कितना होगा फायदा
देश में आयात बिल के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि वित्‍तवर्ष 2025-26 में सोने की डिमांड पूरी करने के लिए 72.4 अरब डॉलर (6.87 लाख करोड़ रुपये) आयात पर खर्च करने पड़े. बाजार एक्‍सपर्ट का मानना है कि अगर देश में मौजूद सोने के भंडार में से 1 फीसदी भी बाजार में वापस लाया जा सके तो आयात को 30 फीसदी से ज्‍यादा कम किया जा सकता है. इस कदम से 300 टन सोने को हर साल वापस सिस्‍टम में लाया जा सकता है, जो आयात बिल का बोझ 2.29 लाख करोड़ रुपये तक कम कर सकता है। 

मॉनसून को लेकर बड़ी खुशखबरी, 4 जून को केरल में होगी एंट्री; भारी बारिश का अलर्ट

 तिरुवनंतपुरम

मॉनसून के आगमन को लेकर बड़ी खबर आ रही है। इसके मुताबिक केरल में मॉनसून 4 जून को दस्तक देगा। इस दिन भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। आम तौर पर मॉनसून एक जून से शुरू होता है। मौसम विभाग ने कहाकि अगले दो- तीन दिन में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं।

केरल में सात दिन का अलर्ट
केरल में मॉनसून के आगमन पर, भारतीय मौसम विभाग के वैज्ञानिक, नीता के गोपाल ने कहाकि मॉनसून शुरू होने की परिस्थितियां तैयार हो रही हैं। इसलिए हम इसके लिए 4 जून की तारीख घोषित करते हैं। 4 जून की शाम से हम अच्छी बारिश देखेंगे। उन्होंने कहाकि चूंकि भारी बारिश होने की संभावना है, इसलिए पूरे केरल में सात दिन तक ‘ऑरेंज’ या ‘येलो’ अलर्ट रहेगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहाकि अगर भारी बारिश जारी रहती है तो हमें सतर्क रहना चाहिए। इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों के लिए प्रतिबंधों के साथ ऑरेंज अलर्ट रहेगा।

अनुकूल हैं हालात
मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए अनुकूल हालात हैं। इस तरह दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर, लक्षद्वीप द्वीपसमूह, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य औरपूर्व हिस्सों और बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व के शेष हिस्सों में 4 जून के आसपास यह आगे बढ़ सकता है।

आईएमडी ने पहले बताई थी यह तारीख
गौरतलब है कि आईएमडी ने इससे पहले केरल में मॉनसून के आगमन की तारीख 26 मई बताई थी। हालांकि, मॉनसून के आगे बढ़ने की प्रक्रिया में देरी हुई और विभाग ने 29 मई को कहा था कि इसका आगमन अगले सप्ताह हो सकता है। पिछले हफ्ते जारी अपने संशोधित पूर्वानुमान में आईएमडी ने कहाकि इस मौसम में बारिश सामान्य से कम रहेगी। आईएमडी ने यह भी कहा कि इस वर्ष भारत में दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 90 फीसदी बारिश होने की संभावना है।

क्या है एलपीए
एलपीए से आशय किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे एक माह या पूरे मौसम के दौरान हुई वर्षा के उस औसत से है, जिसकी गणना आमतौर पर 30 से 50 वर्षों के दीर्घकालिक आंकड़ों के आधार पर की जाती है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर पूरे भारत में मौसमी वर्षा का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है। यदि किसी वर्ष मॉनसून के दौरान होने वाली वर्षा एलपीए के 90 फीसदी से कम रहती है, तो आईएमडी उसे कम वर्षा वाला मॉनसून घोषित करता है।

आईएमडी के अनुसार, इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा होने की एक प्रमुख वजह अल नीनो परिस्थितियों का विकसित होना हो सकता है। अल नीनो की स्थिति आमतौर पर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान वर्षा को प्रभावित करती है और बारिश कम होने की आशंका बढ़ जाती है।

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