सिंधु जल पर पाकिस्तान को भारत का करारा जवाब, अमेरिका-रूस-चीन जैसी दलील से मजबूत हुआ पक्ष

नई दिल्ली
सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान बिलबिला रहा है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने इस समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. अब पाकिस्तान गीदड भभकियां दे रहा है, और सीधे तौर पर हिंसा का सहारा लेने की बात कर रहा है. लेकिन बड़बोले पाकिस्तान को ये पता नहीं है कि भारत के पास अमेरिका, रूस और चीन द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक तर्क है. इसी तर्क का सहारा लेकर ये तीनों बड़े देश अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गए और अपनी राष्ट्रीय चिंताओं और हित को ज्यादा तवज्जो दी। 

अभी हाल ही में पाकिस्तान के मंत्री ने अताउल्लाह तरार ने एक सेमिनार में कहा है कि भारत इंडस वॉटर ट्रीटी (IWT) यानी सिंधु जल समझौते को संशोधित, रद्द या निलंबित नहीं कर सकता है. लेकिन पाकिस्तान ने भारत की चिंता आतंकवाद पर मुंह सिल लिया है। 

हालांकि भारतीय रक्षा विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े देशों द्वारा किए गए समझौतों के उल्लंघन के उदाहरण देकर भारत के वैध अधिकार पर जोर दिया है और कहा है कि भारत को आतंकवाद को लेकर अपनी चिंता दूर करने के लिए हर कदम उठाने का अधिकार है। 

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रिटायर्ड) ने एक्स पर ट्वीट कर कहा कि अगर अमेरिका JCPOA से हट सकता है, रूस INF ट्रीटी से दूर जा सकता है और चीन दक्षिण चीन सागर पर हेग के फैसले को खारिज कर सकता है, तो भारत भी राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में IWT को अस्थायी रूप से निलंबित कर सकता है। 

कहने का अर्थ है कि दुनिया की बड़ी ताकतों ने अंतरराष्ट्रीय समझौतों को तब नज़रअंदाज़ किया या उनसे बाहर निकल गए, जब वे उनके राष्ट्रीय हितों के काम के नहीं रहे. रक्षा विशेषज्ञ पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पीआर शंकर (रि) का कहना है कि ताकतवर देश संधियों का सख्ती से पालन करने के बजाय रणनीतिक/राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों को ज़्यादा अहमियत देते हैं, इसलिए भारत भी IWT के मामले में ऐसा कर सकता है। 

सिंधु जल समझौता 1960 में भारत और Pakistan के बीच हुआ एक ऐतिहासिक जल-बंटवारा समझौता है, जिसकी मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी. इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया. रावी, ब्यास और सतलुज का अधिकांश जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चेनाब का मुख्य उपयोग पाकिस्तान को दिया गया। 

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के संदर्भ में भारत लंबे समय से इस समझौते की समीक्षा की मांग कर रहा है। 

आइए समझते हैं कि दुनिया की बड़ी ताकतें कब अपने राष्ट्रीय हित में अंतर्राष्ट्रीय समझौते से बाहर निकल गईं। 

ईरान डील (JCPOA) से 2018 में अलग हुआ अमेरिका 
क्या हुआ: राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका 2015 के ‘जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन’ (JCPOA) से 2018 में एकतरफ़ा तौर पर खुद को अलग कर लिया और दूसरे हस्ताक्षरकर्ताओं (UK, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन, EU) के विरोध के बावजूद फिर से ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए। 

अमेरिका क्या तर्क दिए: अमेरिका का तर्क था कि यह डील बुनियादी तौर पर खराब थी. ट्रंप ने इसे अबतक का सबसे खराब डील कहा. अमेरिका का कहना है कि इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी गतिविधियों और “सनसेट क्लॉज़” (समय-सीमा वाली शर्तें) जैसे मुद्दों को ठीक से नहीं सुलझाया गया था, जिनकी वजह से ईरान को आगे चलकर एडवांस्ड न्यूक्लियर काम फिर से शुरू करने की इजाज़त मिल जाती. ट्रंप इसे एक बुरा सौदा मानते थे जिससे ईरान तो मजबूत हुआ, लेकिन उसके न्यूक्लियर इरादों या अमेरिका के सहयोगियों पर कोई खास रोक नहीं लगी. इसे एक राजनीतिक प्रतिबद्धता माना गया जिसका लागू होना अमेरिका की इच्छाशक्ति पर निर्भर था. मौका देखकर अमेरिका इस डील से बाहर निकल गया. 2025-2026 में इसी मुद्दे को लेकर भयंकर युद्ध हुआ है। 

INF (Intermediate-Range Nuclear Forces) से बाहर निकला रूस 
क्या हुआ:
अमेरिका ही नहीं दुनिया के दूसरे देश भी अंतरराष्ट्रीय संधियों का अपनी सुविधा के अनुसार व्याख्या करते रहे हैं. 1987 में अमेरिका और सोवियत संघ (अब रूस) के बीच एक समझौता हुआ. यह एक परमाणु नियंत्रण समझौता था, इसमें 500 से 5500 किलोमीटर रेंज वाली जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया था. यह शीत युद्ध को कम करने वाला ऐतिहासिक समझौता था। 

इसके बावजूद दोनों देश अपने मिशन पर गुप्त रूप से लगे रहे. अमेरिका ने 2019 में अपनी ज़िम्मेदारियों से पीछ हट गया. फिर रूस ने भी ऐसा ही किया. इसके बाद’इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस ट्रीटी’ खत्म हो गई। 

दोनों देशों ने क्या तर्क दिए: अमेरिका ने रूस पर संधि का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि रूस प्रतिबंधित 9M729/SSC-8 मिसाइल बना रहा है। 

रूस ने तर्क दिया कि अमेरिका/नाटो की गतिविधियों (जैसे यूरोप में मिसाइल डिफेंस सिस्टम) और सुरक्षा के बदलते माहौल के कारण यह संधि अब पुरानी हो चुकी है. चीन द्वारा बिना किसी रोक-टोक के इंटरमीडिएट-रेंज मिसाइलें बनाई जा रही हैं. इसलिए अब इस संधि का कोई मतलब नहीं है. यानी कि इस संधि को लेकर किसी देश की प्रतिबद्धता नहीं थी। 

दोनों पक्षों ने संधि का पालन करना बंद कर दिया, जिससे यह संधि खत्म हो गई। 

UN संधि के फैसले को चीन ने ठुकराया
क्या हुआ दुनिया की एक और महाशक्ति चीन भी अपनी सुविधा के अनुसार ही संधियों का पालन किया. फ़िलीपींस की ओर से लाए गए एक मामले में  UNCLOS ने चीन के खिलाफ फैसला सुनाया और दक्षिण चीन सागर में चीन की ओर से कृत्रिम द्वीप बनाने को गलत करार दिया. चीन ने इस फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया. UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea) संयुक्त राष्ट्र का समुद्री कानून पर अंतरराष्ट्रीय संधि है। 

चीन ने क्या तर्क दिया: चीन ने कभी भी ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया. उसका तर्क था कि इस विवाद में संप्रभुता का मामला शामिल है, जिस पर ट्रिब्यूनल कोई फैसला नहीं दे सकता है. और द्विपक्षीय बातचीत ही सही रास्ता है. उसने इस फैसले को गैर-कानूनी और राजनीतिक मकसद से प्रेरित माना और कहा कि यह उसकी “निर्विवाद” क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों पर बाध्यकारी नहीं है. इसके बावजूद चीन ने अपनी गतिविधियां जारी रखीं। 

ये उदाहरण दिखाते हैं कि बड़े देश राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा खतरों या दूसरे पक्ष के उल्लंघन के आधार पर अंतरराष्ट्रीय समझौतों से हट सकते हैं. IWT के मामले में भारत पाकिस्तान के आतंकवाद को पूरजोर तरीके से उठा सकता है. पाकिस्तान विश्व बैंक या अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख कर सकता है. लेकिन वास्तविकता यह है कि शक्ति संतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा अक्सर कानूनी मान्यताओं और बाध्यताओं से ऊपर होती है। 

 

भोपाल पुलिस का नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन, शराब तस्कर गिरफ्तार; 7 करोड़ की ड्रग्स विनिष्टीकरण के लिए चयनित

शाहजहाँनाबाद में 305 क्वार्टर अवैध शराब जब्त, वहीं 44 मामलों में 335.934 किलोग्राम गांजा-चरस नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू

भोपाल। भोपाल पुलिस का नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में शाहजहाँनाबाद पुलिस ने अवैध शराब की तस्करी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरी ओर विभिन्न मामलों में जब्त करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थों को विनिष्टीकरण (नष्ट करने) के लिए चयनित किया गया है।

शाहजहाँनाबाद पुलिस ने कार में चोरी-छिपे अवैध शराब की तस्करी कर रहे सीहोर निवासी 36 वर्षीय शिवकरन को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 305 क्वार्टर देशी शराब (करीब 55 लीटर) जब्त की, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 24 हजार रुपये बताई गई है। आरोपी के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पूछताछ में अवैध शराब के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पहले भी आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज हो चुका है। यह कार्रवाई जनसंवाद और सक्रिय मुखबिर तंत्र की मदद से की गई।

वहीं, भोपाल पुलिस ने 44 अलग-अलग मामलों में जब्त 335.934 किलोग्राम मादक पदार्थों को विनिष्टीकरण के लिए चयनित किया है। इनमें 327.134 किलोग्राम गांजा और 8.800 किलोग्राम चरस शामिल है, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये है। कुल 44 प्रकरणों में से 35 मामले क्राइम ब्रांच भोपाल के हैं, जबकि हबीबगंज, बैरागढ़ और जहांगीराबाद थानों के तीन-तीन मामले भी इसमें शामिल हैं।

पुलिस ने बताया कि विनिष्टीकरण समिति ने एनडीपीएस एक्ट और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत मादक पदार्थों का परीक्षण कर उन्हें नष्ट करने के लिए चयनित किया है। न्यायालयीन आदेश के अनुसार इनका विनिष्टीकरण किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई।

भोपाल पुलिस ने दोहराया कि “नशा मुक्त समाज, सुरक्षित भोपाल” के लक्ष्य के साथ अवैध शराब और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

बेंगलुरु की खदान में ग्रेनाइट का विशाल पत्थर गिरा, मध्य प्रदेश के 5 और छत्तीसगढ़ के 1 मजदूर की मौत

बेंगलुरु

कर्नाटक के बेंगलुरु शहरी जिले में गुरुवार को एक ग्रेनाइट खदान में हुए भीषण हादसे में सात प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। मृतकों में पांच मजदूर मध्य प्रदेश, एक छत्तीसगढ़ और एक कर्नाटक के यादगीर जिले का निवासी था। पुलिस ने शुरुआती जांच में हादसे के पीछे गंभीर लापरवाही की आशंका जताई है।

यह हादसा बेंगलुरु शहरी जिले के मडापट्टना क्षेत्र में हुआ, जहां खदान में ऊपर से ग्रेनाइट का विशाल पत्थर खिसककर नीचे काम कर रहे मजदूरों पर आ गिरा। पत्थर की चपेट में आने से सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के समय खदान में कुल 16 मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें चार मजदूर सुरक्षित बच गए।

खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे

सेंट्रल रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एस. गिरीश ने बताया कि खदान में ऊपर और नीचे दो क्रशर संचालित हो रहे थे। ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग का काम चल रहा था, तभी अचानक एक बड़ा ग्रेनाइट पत्थर नीचे खिसक गया और वहां काम कर रहे मजदूरों पर गिर पड़ा। उन्होंने कहा कि इस हादसे में घायल सभी पांच मजदूरों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है।

शुरुआती जानकारी में हुई थी मृतकों की पहचान में गलती

हादसे के तुरंत बाद पुलिस सूत्रों ने बताया था कि अधिकांश मृतक बिहार के रहने वाले हैं, लेकिन बाद में जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि पांच मृतक मध्य प्रदेश के निवासी थे। वहीं, कुछ समय के लिए मृतकों की संख्या आठ होने की भी चर्चा रही, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की। अधिकारियों के अनुसार हादसे में कुल सात लोगों की ही जान गई है।
मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा

खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अधिकारी रंगप्पा ने बताया कि खदान संचालक ने मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये तथा घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है।

नई खनन गाइडलाइन बनाएगी सरकार

हादसे पर शोक जताते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार पूरे प्रदेश में खनन गतिविधियों के लिए नई सुरक्षा गाइडलाइन लागू करेगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हादसा ब्लास्टिंग से नहीं, बल्कि मिट्टी और चट्टान के खिसकने के कारण हुआ है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी

मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल सरकार की पहली प्राथमिकता हादसे के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना है। मुआवजे की घोषणा भी की जाएगी, लेकिन उससे पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

जांच के आदेश, जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि हादसे की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि खदान संचालन की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी। यदि किसी अधिकारी या संबंधित विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने राज्य में अवैध खनन गतिविधियों पर भी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार इन्हें रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगी।

विपक्ष और केंद्रीय मंत्री ने सरकार को घेरा

केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में खनन माफिया और प्रभावशाली लॉबी मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी कर केवल मुनाफे पर ध्यान दे रही है। उन्होंने सरकार से सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की।

वहीं, कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने भी राज्य सरकार को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल जाना और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में मजदूरों की जान से खिलवाड़ न हो।
घटनास्थल का मंजर था बेहद भयावह

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। विशाल ग्रेनाइट पत्थर के नीचे आने से माल ढोने वाले वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि एक ट्रैक्टर भी बुरी तरह चकनाचूर हो गया। मृतकों और घायलों के परिजनों के विलाप से पूरे इलाके में मातम पसरा रहा।

यादगीर निवासी एक मृतक के परिजन ने बताया कि वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और बेटियों की शादी के बाद कर्ज चुकाने के लिए बेंगलुरु में मजदूरी कर रहा था। उसकी मौत से परिवार के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

 

दतिया उपचुनाव: जनता फिर कांग्रेस पर जताएगी भरोसा — उमंग सिंघार

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा और चुनाव आयोग के षड्यंत्र से कांग्रेस विधायक की सदस्यता रद्द हुई। कार्यकर्ताओं से अभी से चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान।

दतिया। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम जनता के नाम संदेश जारी किया है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया की जनता ने कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती को भारी बहुमत से विधायक चुना था, लेकिन भाजपा और चुनाव आयोग के षड्यंत्र के कारण उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई।

उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि भाजपा अब जल्दबाजी में दतिया विधानसभा में उपचुनाव कराकर इस सीट पर कब्ज़ा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को दतिया की जनता पर पूरा भरोसा है और जनता एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में अपना जनादेश देगी।

उन्होंने दतिया के सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे अभी से चुनाव की तैयारियों में जुट जाएँ और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करें। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के समर्थन से इस बार भी दतिया में कांग्रेस का परचम लहराएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ उपचुनाव लड़ेगी और जनता के विश्वास को जीतने के लिए हर स्तर पर प्रयास करेगी।

 

सरकार की शिक्षा व्यवस्था हाई कोर्ट के कटघरे में!

शिक्षकों के 1.15 लाख से अधिक पद रिक्त, हजारों स्कूल बिना शिक्षक और मूलभूत सुविधाओं के; सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। प्रदेश में स्वीकृत 2.89 लाख शिक्षक पदों में से 1,15,678 पद रिक्त हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि 1,895 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक नहीं है।

शिक्षा का बुनियादी ढांचा भी गंभीर संकट से गुजर रहा है। प्रदेश के लगभग 5,000 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है और 59,000 स्कूलों में कंप्यूटर जैसी आवश्यक डिजिटल सुविधाओं का अभाव है।

इन कमियों का सीधा असर विद्यार्थियों पर पड़ा है। पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22.03 लाख विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लोगों के घटते विश्वास को दर्शाती है।

इन्हीं परिस्थितियों को लेकर अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भी सरकार से जवाब तलब किया है। यह स्थिति प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

मुख्यमंत्री से अपेक्षा है कि शिक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए रिक्त शिक्षक पदों पर शीघ्र भर्ती, स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ। प्रदेश के बच्चों का भविष्य केवल प्रचार और घोषणाओं से नहीं, बल्कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेह शासन से सुरक्षित होगा।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से की सौजन्य भेंट

भोपाल स्थित निवास पर मुलाकात के दौरान प्रदेश के समसामयिक राजनीतिक एवं संगठनात्मक विषयों पर हुई चर्चा।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह से उनके भोपाल स्थित निवास पर सौजन्य भेंट की।

इस अवसर पर दोनों नेताओं के बीच प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, जनहित से जुड़े मुद्दों तथा संगठन को और अधिक मजबूत बनाने सहित विभिन्न समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।

यह मुलाकात कांग्रेस की संगठनात्मक मजबूती, जनसरोकारों और प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई इस भेंट के दौरान जनहित के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करने के संकल्प को दोहराया गया।

 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से विधायक कमलेश्वर डोडियार की महत्वपूर्ण मुलाकात

आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों के मुद्दों पर साझा रणनीति, विधानसभा से सड़क तक उठेगी जनता की आवाज

भोपाल सैलाना विधानसभा क्षेत्र के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष से सौजन्य मुलाकात कर प्रदेश के आदिवासी, दलित, पिछड़े एवं अन्य वंचित वर्गों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में जनहित से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से उठाने और उनके समाधान के लिए साझा रणनीति पर सहमति बनी।

जनहित के मुद्दों पर हुई विस्तृत चर्चा

बैठक के दौरान विधायक कमलेश्वर डोडियार ने सैलाना विधानसभा सहित आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल, सड़क, वन अधिकार, किसानों की समस्याओं तथा युवाओं से जुड़े विभिन्न विषयों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में आदिवासी, दलित एवं पिछड़े वर्गों को मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इन समस्याओं को विधानसभा और जनआंदोलन दोनों स्तरों पर मजबूती से उठाया जाएगा।

विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठेंगे मुद्दे

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आश्वस्त किया कि आगामी विधानसभा सत्र में इन सभी विषयों को तथ्यात्मक और प्रभावी तरीके से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता से जुड़े सवालों पर जवाबदेह बनाने के लिए विपक्ष पूरी मजबूती के साथ अपनी भूमिका निभाएगा।

प्रदेशव्यापी जनआंदोलन की बनी रणनीति

बैठक में प्रदेशभर में जनहित के मुद्दों को लेकर साझा आंदोलन को अधिक व्यापक और प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए समन्वित प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।

जनता के अधिकार सर्वोच्च प्राथमिकता

विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि जनता के अधिकारों की रक्षा करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और विकास का लाभ पहुंचाने के लिए वे निरंतर संघर्ष करते रहेंगे। साथ ही लोकतांत्रिक तरीके से जनसमस्याओं को विधानसभा के भीतर और बाहर प्रभावी रूप से उठाया जाएगा।

जनहित की राजनीति को मिलेगी मजबूती

यह मुलाकात प्रदेश की राजनीति में जनहित के मुद्दों को केंद्र में रखने तथा आदिवासी, दलित, पिछड़े और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को और अधिक मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

PM मोदी-जापान PM ताकाइची की अहम मुलाकात, फार्मा-डिफेंस समेत कई क्षेत्रों में हुए बड़े समझौते

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज जापानी समकक्ष सनाए ताकाइची के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की। बैठक के बाद उन्होंने जापानी पीएम को अपनी छोटी बहन और दूरदर्शी नेता बताया। दोनों देशों के बीच कितने करार हुए? दोनों प्रधानमंत्रियों ने किन बातों को खास तौर पर रेखांकित किया? 

भारत और जापान के बीच आज अहम द्विपक्षीय समझौते हुए। दोनों देशों के बीच हुए वार्षिक सम्मेलन के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के अलावा फार्मा सेक्टर से जुड़े समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस वार्ता भी की। अपनी गर्मजोशी और प्रधानमंत्री पद से इतर इंसानी रिश्ते के लिए दुनियाभर में मशहूर पीएम मोदी ने जापानी समकक्ष को अपनी छोटी बहन बताया।

पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा ‘मेरी छोटी बहन, प्रधानमंत्री सनाए तकाइची, दोनों प्रतिनिधिमंडलों के सम्मानित सदस्य, मीडिया के सदस्य, नमस्कार और कोनिचिवा (इसका मतलब जापानी भाषा में हैलो होता है)। 

उन्होंने आगे कहा कि भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री तकाइची की भारत की पहली यात्रा पर उनका स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। इसके  साथ ही एक दूरदर्शी और व्यापक रूप से सम्मानित नेता भी हैं। वे नारा प्रांत से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का एक प्रमुख केंद्र है।’

शिखर वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई बड़े फैसलों का ऐलान किया. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सनाए ताकाइची की भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय लिख रही है. उन्होंने ताकाइची को ‘जापान फर्स्ट प्रधानमंत्री’ और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि भारत और जापान मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साझा विजन पर काम कर रहे हैं. इस दौरान रक्षा, निवेश, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी। 

भारत-जापान रिश्तों को नई ऊंचाई देने वाले बड़े फैसले

    16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते एक साल में भारत और जापान के बीच 120 नए कारोबारी समझौते हुए हैं. अब दोनों देशों का लक्ष्य अगले 10 सालों में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निवेश को आकर्षित करना है. यह निवेश विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। 

    रक्षा सहयोग भी इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा. भारत और जापान ने अपने पहले रक्षा सह-विकास (Defence Co-development) प्रोजेक्ट पर साइन किए. इसके तहत दोनों देश संयुक्त रूप से रक्षा तकनीकों का विकास करेंगे. सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इस समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है। 

आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर बनी नई रणनीति
दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर साझा रोडमैप तैयार करने का भी ऐलान किया. इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाया जाएगा. साथ ही दोनों देशों ने मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करने पर भी सहमति जताई, ताकि वैश्विक संकटों के दौरान उद्योगों पर असर कम पड़े। 

ग्रीन एनर्जी में नई शुरुआत, बायोगैस मिशन लॉन्च
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘गोवर्धन पहल’ के तहत भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव की शुरुआत का भी ऐलान किया. इस पहल के जरिए देशभर में आधुनिक बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे. जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की ग्रामीण क्षमता को जोड़ने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है। 

भारत-जापान में किन मुद्दों पर सहमति बनी?
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सप्लाई चेन, निवेश और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान के बीच सिर्फ आर्थिक साझेदारी ही नहीं, बल्कि विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा हितों का भी मजबूत रिश्ता है. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों के विकास के साथ-साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि में भी अहम भूमिका निभाएगी। 

इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति
दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि वे मुक्त, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं. समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान को लेकर दोनों नेताओं ने साझा प्रतिबद्धता दोहराई. रक्षा अभ्यास, समुद्री सहयोग और आधुनिक तकनीकों में साझेदारी बढ़ाने पर भी सहमति बनी। 

प्रधानमंत्री मोदी ने सनाए ताकाइची को ‘छोटी बहन’ क्यों कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने यह संबोधन दोनों देशों के बीच विश्वास, आत्मीयता और मजबूत रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक बताते हुए दिया. यह भारत-जापान संबंधों की गहराई और व्यक्तिगत नेतृत्व स्तर पर बेहतर तालमेल को भी दर्शाता है। 

भारत-जापान शिखर सम्मेलन में सबसे बड़ा समझौता कौन-सा रहा?
सबसे अहम समझौता दोनों देशों के पहले रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट पर हुआ. इसके अलावा 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य, आर्थिक सुरक्षा रोडमैप और भारत-जापान बायोगैस इनिशिएटिव भी बड़े फैसलों में शामिल रहे। 

भारत को इन समझौतों से क्या फायदा होगा?
जापानी निवेश बढ़ने से भारत में रोजगार, विनिर्माण, हाई-टेक उद्योग, बुनियादी ढांचे और हरित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी. वहीं रक्षा और तकनीकी सहयोग भारत की रणनीतिक क्षमता को भी बढ़ाएगा। 

इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र पर पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री तकाइची की इस यात्रा के साथ, हम अपनी ‘विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। आज, भारत और जापान दोनों ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। एक स्वतंत्र, समृद्ध और नियमों पर आधारित ‘इंडो-पैसिफिक’ क्षेत्र हमारी साझा प्राथमिकता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और बाजार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं के तौर पर, हमने आज कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। 

बेंगलुरु में ISRO मुख्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट; परिसर खाली कराया गया

बेंगलुरु
कर्नाटक की राजधानीबेंगलुरु में स्थित इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के हेडक्वार्टर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया गया। मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड हेडक्वार्टर में जांच-पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, ISRO के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के ऑफिस को धमकी भरा ईमेल आया था। इसके बाद इसरो के कैंपस को खाली कराया गया। कई टीमें संदिग्ध वस्तुओं की जांच की। अधिकारियों के अनुसार इसरो को धमकी भरा मेल गाजियाबाद से भेजा गया था। वहां पर उस व्यक्ति का पता लगाकर उसे पकड़ लिया गया है।

कैंपस खाली करवाकर सर्च ऑपरेशन
पुलिस के मुताबिक एहतियात के तौर पर सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया गया और इमारत की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान कोई संदिग्ध चीज नहीं मिली और बाद में धमकी को झूठा करार दिया गया है। पुलिस ने ईमेल भेजने वाले से पूछताछ कर रही है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में न्यू बीईएल रोड पर स्थित ‘अंतरिक्ष भवन’ में स्थित है।

29 जून को बम धमकी के फर्जी ईमेल भेजने वाला पकड़ा गया
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने कई संगठनों और एक एयर इंडिया की उड़ान को बम की धमकी वाले फर्जी ईमेल भेजने के आरोप में एक व्यक्ति को पकड़ा है। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि यह व्यक्ति गाजियाबाद का निवासी है। 36 वर्षीय आरोपी 2008 से मानसिक बीमारी का इलाज करा रहा है।

29 जून को भेजे गए इन ईमेल में राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय  सहित कई उच्च सुरक्षा प्रतिष्ठानों में बम होने का दावा किया गया था। नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की उड़ान के लिए भी एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया। इससे तत्काल सुरक्षा जांच शुरू हुई और कई एजेंसियों को सतर्क किया गया। पुलिस ने बताया कि सभी संबंधित संगठनों और सुरक्षा एजेंसियों को सूचित किया गया था। मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया और धमकियां फर्जी पाई गईं। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की, जिसमें ईमेल के डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया गया। तकनीकी जांच के दौरान, पुलिस ने दो मेल खातों का विश्लेषण किया। इन खातों का उपयोग ईमेल भेजने के लिए किया गया था। ईमेल ट्रेल की विस्तृत जांच से जांचकर्ताओं को खातों से जुड़े एक मोबाइल नंबर तक पहुंचने में मदद मिली।

तकनीकी निगरानी का उपयोग करते हुए, पुलिस दल ने 30 जून को संदिग्ध को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के संयोग नगर में खोज निकाला। पुलिस मौके पर पहुंची और उसके निवास पर संदिग्ध निशांत त्यागी की जांच की। पुलिस के अनुसार, त्यागी ने ओपन स्कूलिंग के माध्यम से अपनी शिक्षा पूरी की थी। उसने 2010 में स्नातक डिग्री कार्यक्रम में दाखिला लिया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया।

मानसिक स्वास्थ्य और आगे की जांच
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वह कथित तौर पर 2008 से मानसिक बीमारी से पीड़ित है। वह वर्षों से विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में इलाज करा रहा है। उसके परिवार के सदस्यों ने भी पुलिस को उसके लंबे चिकित्सा इतिहास के बारे में बताया। पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान कोई विस्फोटक या संदिग्ध सामग्री बरामद नहीं हुई। ईमेल भेजने के पीछे के मकसद और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच जारी है, जिसके परिणाम के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इसरो का गतिविधियों का होता है प्रबंधन
इसरो का मुख्यालय होने के कारण इस इलाके की सुरक्षा व्यवस्था काफी चाक चौबंद रहती है। बेंगलुर से इसरो की सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष गतिविधियों का प्रबंधन किया जाता है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी। मूल इकाई (INCOSPAR) के रूप में यह 1962 में अस्तित्व में आया था और 1972 में इसे अंतरिक्ष विभाग (DOS) के अंतर्गत लाया गया। अंतरिक्ष भवन जो कि इसरो का प्रशासनिक केंद्र है। यह लगभग 4.3 एकड़ (17,400 वर्ग मीटर) के परिसर में फैला हुआ है। इसरो के मुख्यालय को उड़ाने की धमकी देने वाले शख्स की गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरु पुलिस उत्तर प्रदेश पुलिस के संपर्क में है। अरेस्ट किए गए शख्स से पूछताछ करने के साथ उसका बैकग्राउंड खंगाला जा रहा है। 

भारत ने निभाई दोस्ती, अब पेट्रोल-डीजल संकट से जूझ रहे रूस को भेज रहा फ्यूल

नई दिल्ली
भारत ने रूस के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का फर्ज एक बार फिर से निभाया है. जब पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूस का कच्चा तेल खरीदने से ज्यादातर देश पीछे हट गए थे, तब भारत ने बड़ी मात्रा में रूसी तेल खरीदकर उसका साथ दिया था. अब एक बार फिर भारत मुश्किल वक्त में रूस के काम आया है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीद रहा, बल्कि उसकी ईंधन की कमी दूर करने के लिए उसे गैसोलीन यानी पेट्रोल की सप्लाई कर रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों से पैदा हुए फ्यूल संकट के बीच रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए गैसोलीन का आयात शुरू कर दिया है। 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों की वजह से रूस की कई ऑयल रिफाइनरियां प्रभावित हुई हैं. इसके चलते देश में पेट्रोल की भारी कमी हो गई है. कई इलाकों में राशनिंग करनी पड़ रही है, पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग रही हैं और गैसोलीन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं. ऐसे हालात में रूस ने भारत से समुद्री रास्ते के जरिए गैसोलीन मंगाना शुरू कर दिया है। 

भारत से रवाना हुए पहले टैंकर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत से अब तक कम से कम 60 हजार मीट्रिक टन गैसोलीन रूस के लिए भेजा जा चुका है. दो टैंकरों में करीब 30 हजार से 40 हजार टन तक का फ्यूल लोड किया गया है. हालांकि अभी यह साफ नहीं हुआ है कि भारत की कौन सी रिफाइनरी इस सप्लाई को पूरा कर रही है। 

हर महीने 4 लाख टन फ्यूल आयात करेगा रूस
रूस की योजना सिर्फ भारत पर निर्भर रहने की नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक वह भारत के अलावा बेलारूस समेत दूसरे देशों से भी हर महीने करीब 4 लाख टन गैसोलीन आयात करना चाहता है. बेलारूस पहले ही अपनी सप्लाई बढ़ा चुका है और जून के पहले पखवाड़े में उसने रूस को रेल मार्ग से भेजे जाने वाले गैसोलीन की मात्रा लगभग तीन गुना कर दी है। 

यूक्रेन के हमलों से बढ़ा संकट
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भी मान चुके हैं कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने देश की रिफाइनिंग क्षमता को प्रभावित किया है. गर्मियों में रूस में रोजाना करीब 1.10 लाख टन गैसोलीन की खपत होती है. ऐसे में घरेलू उत्पादन कम होने से सरकार को आयात का सहारा लेना पड़ रहा है. रूस की संसद ने हाल ही में टैक्स नियमों में बदलाव कर फ्यूल आयात को बढ़ावा देने और सब्सिडी देने का भी फैसला किया है। 

रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बना भारत
दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ भारत रूस को गैसोलीन भेज रहा है, वहीं दूसरी तरफ भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी बना हुआ है. शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक जून में भारत ने रूस से रोजाना करीब 27 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा रही. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बने तनाव के बीच भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से सस्ते कच्चे तेल की खरीद और बढ़ा दी है। 

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