Share Market Today: रिलायंस-HDFC के दम पर शेयर बाजार में तूफानी तेजी, निवेशकों ने जमकर की कमाई

मुंबई 
शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को अचानक जोरदार तेजी देखने को मिली है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खबर लिखे जाने तक 500 अंक से ज्यादा की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 150 अंक के आसपास चढ़ा दिखाई दिया. इस बीच बैंकिंग स्टॉक्स में जोरदार तेजी दिखी और HDFC Bank से लेकर ICICI Bank तक के शेयर उछले, तो वहीं Reliance, Maruti और Mahindra जैसे शेयर भी उछल पड़े। 

सेंसेक्स-निफ्टी की अचानक बदली चाल 
शेयर मार्केट में सोमवार को कारोबार शुरू होते ही BSE Sensex अपने पिछले बंद 77,763 की तुलना में तेजी लेकर 77,940 पर ओपन हुआ और फिर अचानक इसकी रफ्तार तेज होती चली गई. करीब दो घंटे के कारोबार के बाद 30 शेयरों वाला ये इंडेक्स 526 अंकों की तेजी लेकर 78,289 पर जा पहुंचा। 

सेंसेक्स की तरह ही NSE Nifty भी रफ्तार पकड़े हुए नजर आया. ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 24,270 के लेवल से उछलकर 24,306 पर खुला और फिर सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए 150 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 24,428 के स्तर पर जा पहुंचा। 

रिलायंस समेत इन शेयरों ने दिखाया दम 
शेयर बाजार में अचानक आई इस तूफानी तेजी के दौरान बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल HDFC Bank Share (2.70%), M&M Share (2%), Reliance Share (1.35%) और BEL Share (1.60%) की तेजी लेकर बाजार को सपोर्ट कर रहे थे. इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में शामिल Dixon Share (4%), Godrej Properties Share (2.20%), Muthoot Finance Share (2%) की बढ़त लेकर कारोबार करते हुए नजर आए। 

स्मॉलकैप कैटेगरी में देखें, तो Wel Corp Share (5.50%), Radico Share (4.60%) और Manappuram Share (4.50%) की तेजी में कारोबार कर रहे थे। 

शेयर बाजार में तेजी के कारण
सप्ताह के पहले दिन शेयर मार्केट में आई इस जोरदार तेजी के पीछे के कारणों की बात करें, तो कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट से बाजार का सेंटीमेंट सुधरा है. इसके अलावा एशियाई शेयर बाजारों से भी मिले-जुले संकेत मिले थे. जापान-कोरिया के मार्केट में गिरावट नजर आई, तो वहीं हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स और ब्रिटेन का FTSE-100 ग्रीन जोन में कारोबार करता दिखा। 

भारतीय शेयर बाजार के लिए प्रमुख संकेतक माना जाने वाला Gift Nifty भी ओपनिंग के साथ ही तेज रफ्तार से भागता हुआ नजर आया और खबर लिखे जाने तक ये 170 अंक के आसपास तेजी लेकर ट्रेड कर रहा था। 

इन कारणों के अलावा बैंकों से मजबूत तिमाही अपडेट ने भी बाजार की तेजी को सपोर्ट किया. बीते सप्ताह के अंत में HDFC Bank, Axis Bank, Kotak Bank समेत कई बैंकों ने  ने अप्रैल-जून के लिए अनंतिम आंकड़े जारी किए, जो शानदार रहे  .

Silver Rate Fall: चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट, खरीदारी का सुनहरा मौका! जानें 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का ताजा भाव

नई दिल्ली

सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) में बीते सप्ताह तमाम उतार-चढ़ाव के बाद तेजी देखने को मिली थी, लेकिन सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर वायदा कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही दोनों कीमती धातुएं फिसल गईं. जहां सोना रेड जोन में ओपन होने के कुछ देर बाद रिकवरी मोड में नजर आया, तो अगले ही पल फिर से फिसल गया. हालांकि, चांदी में कारोबार बढ़ने के साथ गिरावट तेज होती दिखाई दी. 1 Kg Silver Price 1400 रुपये टूट गया और भाव में इस कमी के बाद अब वायदा चांदी अपने हाई लेवल से और भी ज्यादा सस्ती हो गई है। 

Gold की बदली-बदली चाल  
एमसीएक्स पर वायदा कारोबार की शुरुआत के साथ ही 4 सितंबर की एक्सपायरी वाली चांदी और 5 अगस्त की एक्सपायरी वाला सोना गिरावट के साथ ओपन हुआ. अपने पिछले बंद भाव 1,47,378 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में कीमती पीली धातु गिरावट के साथ 1,47,135 रुपये पर ओपन हुई और फिर गिरावट से उबरते हुए 1,47,509 तक उछली भी, लेकिन खबर लिखे जाने तक आधे घंटे के कारोबार के बाद ये फिर से रेड जोन में कारोबार कर रही थी। 

चांदी की कीमत में गिरावट तेज
जहां वायदा कारोबार में सोने की चाल ने हैरान किया, तो वहीं रेड जोन में खुलने के बाद वायदा चांदी का भाव फिसलता चला गया. MCX Silver Price देखें, तो बीते शुक्रवार के अपने बंद 2,37,410 रुपये की तुलना में सिल्वर प्राइस गिरावट के साथ खुला और कुछ देर में तेज गिरावट लेकर 2,36,001 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. यानी एक झटके में चांदी 1409 रुपये सस्ती हो गई। 

सोमवार को आई इस ताजा गिरावट के बाद वायदा कारोबार में सोना-चांदी की कीमतें अब अपने हाई लेवल से और भी ज्यादा कम हो गई है. बता दें कि साल के शुरुआती जनवरी महीने में Gold-Silver ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए हाई लेवल छुआ था. सोना जहां पहली बार 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकला था, तो चांदी ने इतिहास रचते हुए 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर पार किया था. हालांकि, इसके बाद हाई से दोनों लगातार क्रैश होती नजर आईं। 

बीते हफ्ते चमके थे सोना-चांदी 
जहां नए सप्ताह की शुरुआत सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के साथ हुई है. वहीं बता दें कि पिछले हफ्ते दोनों धातुओं के भाव उतार-चढ़ाव के बाद कुछ मिलाकर बढ़त में रहे थे. 26 जून को 10 Gram 24 Karat Gold का रेट 1,44,162 रुपये था, जो बीते शुक्रवार को 1,47,378 रुपये पर क्लोज हुआ था। 

वहीं चांदी की बात करें, तो इसकी कीमत भी बीते सप्ताह बढ़ी थी और 26 जून के 2,23,472 रुपये प्रति किलो के बंद भाव की तुलना में बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को ये कीमती धातु 2,37,410 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। 

(नोट- सोना-चांदी या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में किसी भी निवेश से पहले एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)

भारतीय शेयर बाजार में नई बुल रन की उम्मीद, मजबूत अर्थव्यवस्था से बनेगा तेजी का माहौल

नई दिल्ली
भारतीय शेयर बाजार पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है, लेकिन अब कई ऐसे बड़े आर्थिक संकेत सामने आ रहे हैं, जो आने वाले सालों में बाजार के लिए नई तेजी यानी अगली ‘बुल रन’ की नींव रख सकते हैं। मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि इस बार तेजी केवल सस्ते पैसे या विदेशी निवेश के दम पर नहीं, बल्कि भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ती कॉर्पोरेट कमाई, घरेलू निवेशकों की ताकत और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती अहमियत के कारण देखने को मिल सकती है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया के तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई थी। लेकिन, अब तस्वीर धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। कई ऐसे मैक्रोइकोनॉमिक संकेत हैं, जो भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में जाते दिख रहे हैं।

सबसे पहला बड़ा संकेत भारतीय रुपये की मजबूती और स्थिरता है। विदेशी निवेशक किसी भी देश में निवेश करने से पहले वहां की मुद्रा की स्थिति को काफी महत्व देते हैं। अगर रुपया स्थिर रहता है, तो विदेशी निवेशकों को मुद्रा में होने वाले नुकसान का डर कम रहता है। इसके साथ ही आयातित महंगाई पर भी कंट्रोल रहता है और कंपनियों के लिए भविष्य की लागत का अनुमान लगाना आसान हो जाता है। इससे निवेश का माहौल मजबूत होता है।

दूसरा बड़ा कारण भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) में कमी है। पिछले दो सालों में पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी रही। तेल की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन प्रभावित हुई। अब अगर यह तनाव कम होता है, तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और वे फिर से उभरते बाजारों, खासकर भारत की ओर रुख कर सकते हैं।

तीसरा और बेहद अहम कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में नरमी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल सस्ता होने से देश का आयात बिल कम होता है, महंगाई घटती है, सरकार पर वित्तीय दबाव कम होता है और कंपनियों की लागत भी घटती है। इससे मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, केमिकल और FMCG जैसे कई सेक्टरों की कमाई बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई कंट्रोल में रहने पर RBI के पास ब्याज दरों को लेकर अधिक लचीलापन रहता है, जिससे आर्थिक विकास को और गति मिल सकती है।

चौथा और सबसे मजबूत संकेत घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत है। पहले भारतीय शेयर बाजार काफी हद तक विदेशी निवेशकों (FPI) पर निर्भर रहता था, जब भी विदेशी निवेशक बिकवाली करते थे, बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिलती थी। लेकिन, अब स्थिति बदल चुकी है। SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए हर महीने म्यूचुअल फंड में आने वाला पैसा लगातार बढ़ रहा है। करोड़ों भारतीय अब नियमित निवेश कर रहे हैं, जिससे घरेलू निवेश बाजार को मजबूती मिल रही है। यही वजह है कि हाल के सालों में FPI की बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार अपेक्षाकृत मजबूत बना रहा।

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है या वे फिर से खरीदारी शुरू करते हैं, तो भारतीय बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। मजबूत रुपया, सस्ता कच्चा तेल, घटता वैश्विक तनाव और घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी मिलकर बाजार को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह भी याद रखना चाहिए कि शेयर बाजार कभी भी सीधी रेखा में नहीं चलता। बीच-बीच में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे और कुछ शेयरों का मूल्यांकन (Valuation) अभी भी महंगा माना जा रहा है। इसलिए केवल तेजी की उम्मीद में बिना रिसर्च के निवेश करना सही नहीं होगा। अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में लंबे समय के नजरिए से निवेश करना और पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना हमेशा बेहतर रणनीति मानी जाती है।

मौजूदा आर्थिक संकेत यह इशारा कर रहे हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। अगर यही रुझान आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले सालों में भारतीय शेयर बाजार की अगली बड़ी बुल रन (Bull Run) की शुरुआत इसी दौर से मानी जा सकती है। निवेशकों के लिए यह समय बाजार की दिशा को समझने और लंबी अवधि की रणनीति बनाने का हो सकता है।

 

भारत का सबसे बड़ा तेल-गैस खोज अभियान शुरू, 2.5 लाख वर्ग किमी क्षेत्र की होगी खोज

नई दिल्ली
 मिडिल ईस्ट संघर्ष ने भारत समेत कई देशों को एनर्जी को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की सीख दी। भारत बहुत पहले से ही कच्चे तेल और गैस में आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़े स्तर पर काम कर रहा है। और अब भारत जल्द ही अपने इतिहास के सबसे बड़े तेल और गैस खोज अभियान की शुरुआत करने जा रहा है।

केंद्र सरकार करीब 2.5 लाख वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के ऐसे क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की तलाश शुरू करेगी, जहां अब तक बड़े पैमाने पर खोज नहीं हुई है। इस अभियान का मकसद घरेलू उत्पादन बढ़ाकर रूस, सऊदी अरब, इराक समेत दूसरे देशों से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना है।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि सरकार जल्द ही इन नए क्षेत्रों को अन्वेषण के लिए नीलाम करेगी। उन्होंने कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और अब समय आ गया है कि देश अपने ही संसाधनों का अधिकतम उपयोग करे। इसके लिए भारत लगभग 95 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा

जहां नहीं हुई खोज वहां महाअभियान चलाएगा भारत
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। ऑयल मिनिस्ट्री के अनुसार, 2025-2026 में देश में कच्चे तेल का उत्पादन 25.98 मिलियन मीट्रिक टन था। यह भारत की कच्चे तेल की जरूरतों का सिर्फ 10 प्रतिशत है, जो लगभग 5,22,000 बैरल प्रति दिन (bpd) के बराबर है। यह आंकड़ा 2011 में 9,00,000 bpd से ज्यादा के पीक प्रोडक्शन से काफी कम है। भारत ने ईरान, वेनेजुएला, रूस से ज्यादा खरीद और कई अफ्रीकी देशों सहित कच्चे तेल के सप्लायर देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 करके ऊर्जा संकट का सामना किया। अब कच्चे तेल की निर्भरता दूसरे देशों पर कम करने के लिए भारत अपने यहां बड़े स्तर महाअभियान चलाएगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने AFP को बताया, “हम अभी लगभग 2,50,000 वर्ग किलोमीटर (96,500 वर्ग मील) के ऐसे इलाके की बोली लगाने की प्रक्रिया में हैं, जहा अभी तक कोई खोज नहीं हुई है।”

उन्होंने कहा, “हम 10 अरब डॉलर (लगभग 95 हजार करोड़ रुपये) के प्रोग्राम के जरिए तेल और गैस की खोज में बड़े पैमाने पर पैसा लगा रहे हैं।”

हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर ने यह साफ कर दिया कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में बड़ी चुनौती बन सकती है। इसी वजह से सरकार ने घरेलू तेल और गैस खोज अभियान को तेज करने का फैसला लिया है।

समुद्र में छिपा है तेल का खजाना!
सरकार की नजर खासतौर पर समुद्र के गहरे इलाकों पर है। अंडमान एवं निकोबार के आसपास के अपतटीय क्षेत्रों को तेल और गैस के लिहाज से काफी संभावनाशील माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां की भूगर्भीय संरचना दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हाइड्रोकार्बन समृद्ध क्षेत्रों जैसी है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री पुरी ने भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मौजूद “ऊर्जा के मौकों के भंडार” की तारीफ की है। यह द्वीप समूह 800 किलोमीटर (500 मील) लंबी द्वीपों की एक श्रृंखला है, जो पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील हैं और थाईलैंड व इंडोनेशिया से सटे समुद्रों में स्थित हैं।

हालांकि गहरे समुद्र में तेल निकालना आसान नहीं है। इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक, भारी निवेश और कई वर्षों तक लगातार काम करने की जरूरत होती है। इसी कारण सरकार अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों का भी सहयोग ले रही है।

पीएम मोदी ने की थी ‘समुद्र मंथन मिशन’ की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2025 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने भाषण के दौरान “समुद्र मंथन” मिशन की शुरुआत की। यह नाम हिंदू पौराणिक कथाओं की एक अहम घटना से लिया गया है, जिसका अर्थ है “समुद्र का मंथन”।

पीएम मोदी ने उस समय कहा था, “हम समुद्र के नीचे तेल और गैस के भंडार खोजने के लिए मिशन मोड में काम करना चाहते हैं और इसलिए भारत ‘नेशनल डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन’ शुरू करने जा रहा है।”

5 दिन में 66% तक का रिटर्न, इन 5 शेयरों ने निवेशकों को किया मालामाल

नई दिल्ली
पिछला हफ्ता शेयर बाजार के लिए पॉजिटिव रहा। पूरे हफ्ते के दौरान बीएसई सेंसेक्स 663.44 अंक या 0.86% बढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 214.85 अंक या 0.89% की बढ़त हुई और यह 24,270.85 पर बंद हुआ। जहां ये इंडेक्स 1 फीसदी से भी कम चढ़े, वहीं 5 शेयर ऐसे रहे, जिन्होंने निवेशकों को 5 ही दिन में 65.80 फीसदी तक रिटर्न दिया है।

गैलेक्सी बियरिंग्स
गैलेक्सी बियरिंग्स का शेयर पिछले हफ्ते टॉप पर रहा, जिसने 65.80 फीसदी रिटर्न दिया। इसका शेयर बीते हफ्ते 572.55 रुपये से 949.30 रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका शेयर बीएसई पर 10 फीसदी की उछाल के साथ 949.30 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की मार्केट कैपिटल 301.88 करोड़ रुपये है।

वेलजन डेनिसन
वेलजन डेनिसन का शेयर पिछले हफ्ते 52 फीसदी उछला। कंपनी का शेयर प्राइस 1202.10 रुपये से 1826.90 रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका शेयर बीएसई पर 2.30 फीसदी की गिरावट के साथ 1826.90 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की मार्केट कैपिटल 812.25 करोड़ रुपये है।

स्पेक्ट्रम फूड्स

स्पेक्ट्रम फूड्स का शेयर पिछले हफ्ते 49.14 फीसदी ऊपर चढ़ा। कंपनी का शेयर 12.19 रुपये से 18.18 रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका शेयर बीएसई पर 20 फीसदी की तेजी के साथ 18.18 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की मार्केट कैपिटल 44.07 करोड़ रुपये है।

लक्ष्मीपति इंजीनियरिंग वर्क्स
लक्ष्मीपति इंजीनियरिंग वर्क्स का स्टॉक पिछले हफ्ते 45.09 फीसदी ऊपर चढ़ा। हफ्ते के दौरान इस कंपनी का शेयर 383.90 रुपये से 557 रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को ये शेयर बीएसई पर एक दम फ्लैट 557 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की मार्केट कैपिटल 320.39 करोड़ रुपये है।

श्रेष्ठ फिनवेस्ट
श्रेष्ठ फिनवेस्ट का स्टॉक पिछले हफ्ते 41.67 फीसदी ऊपर चढ़ा। हफ्ते के दौरान इस कंपनी का शेयर 0.24 रुपये से 0.34 रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार को ये शेयर बीएसई पर 13.33 फीसदी की तेजी के साथ 59.76 रुपये पर बंद हुआ। इस भाव पर कंपनी की मार्केट कैपिटल 59.76 करोड़ रुपये है।

 

पेट्रोल-डीजल होगा सस्ता? सिटी बैंक ने कच्चे तेल पर की बड़ी भविष्यवाणी, आम लोगों को मिल सकती है राहत

नई दिल्ली
 दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की किल्लत का दौर अब खत्म होने की कगार पर है. मॉर्गन स्टैनली और गोल्डमैन सॉक्‍स के बाद अब दिग्गज अमेरिकी निवेश बैंक सिटी (Citigroup) ने भी भविष्यवाणी की है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ सकती हैं. अगर ऐसा होता है तो इससे भारतीय तेल कंपनियों पर बोझ कम होगा और देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती हो सकती है। 

सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फरवरी के अंत में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्‍य पर दोहरी नाकेबंदी जैसी स्थिति बन गई थी. इस वजह से कच्‍चे तेल की सप्‍लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई. लेकिन अब वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक अंतरिम समझौता होने से तनाव कम हुआ है और इस महत्‍वपूर्ण समुद्री रास्‍ते पर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है. कच्चा तेल पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध है. इस वजह से बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड दूसरी तिमाही में लगभग 30% तक टूटकर 71.92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। 

भरपूर मात्रा में उपलब्‍ध है कच्‍चा तेल
सिटी बैंक के विश्लेषकों के मुताबिक, तेल बाजार अब तेजी से अपनी पुरानी और सामान्य स्थिति में लौट रहा है. होर्मुज रूट खुलने से रिफाइनरियों को भरपूर कच्चा तेल मिल रहा है. दुनिया का सबसे बड़ा आयातक देश चीन फिलहाल बाजार से थोड़ी दूरी बनाए हुए है, जिससे कच्चे तेल की फिजिकल मांग कमजोर हुई है. वैश्विक तेल भंडारों में उम्मीद के मुकाबले बेहद कम गिरावट दर्ज की गई है, यानी स्टॉक में तेल की कोई कमी नहीं है। 

$60-65 के दायरे में आएगा ब्रेंट क्रूड
सिटी के विश्लेषकों का अनुमान है कि गर्मियों के दौरान अगर तेल की कीमतों में कोई अस्थायी तेजी आती भी है, तो उसे केवल बिकवाली का अवसर माना जाना चाहिए क्योंकि अंततः कीमतों को नीचे ही आना है. बैंक के मुताबिक, साल के अंत तक ब्रेंट क्रूड आसानी से 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच जाएगा। 

केवल सिटी ही नहीं, बल्कि दुनिया के अन्य बड़े वित्तीय संस्थान भी कच्‍चे तेल में गिरावट का अनुमान जता चुके हैं. गोल्डमैन सॉक्‍स ने कहा था कि ईरान विवाद शांत होने के बाद बाजार में फिर से ओवरसप्‍लाई की स्थिति बन जाएगी. वहीं, मॉर्गन स्टैनली (Morgan Stanley) भी पिछले कुछ हफ्तों में दो बार कच्चे तेल के अपने अनुमानित दामों में कटौती कर चुका है। 

भारत के लिए इसके क्या मायने हैं?
भारत अपनी जरूरत का करीब 80-85% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का $60 के स्तर पर आना भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकारी तेल कंपनियों (IOC, HPCL, BPCL) के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं होगा. कच्चे तेल के दाम कम होने से कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन बढ़ेगा. इससे कंपनियों को पेट्रोल और डीजल का रेट घटाने का मौका मिलेगा। 

₹82 से ₹170 प्रति लीटर तक मिलता है पेट्रोल, जानिए 5 तरह के फ्यूल में आपकी गाड़ी के लिए कौन-सा है बेस्ट

नई दिल्ली

इंडियन ऑटो मार्केट एक बड़े फ्यूल ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है, जहां ट्रेडिशनल फॉसिल फ्यूल की जगह तेजी से इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल को चलन में लाया गया है. प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने देश में कई तरह के पेट्रोल ऑप्शन को बेचने शुरू कराया है. आज भारतीय मार्केट में नॉर्मल ऑक्टेन रेटिंग से लेकर हाई-परफॉर्मेंस और फ्लेक्स-फ्यूल कैटेगरी के कुल 5 पेट्रोल ऑप्शन बिक रहे हैं। 

आपकी गाड़ी के इंजन, उसकी क्षमता और पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी के आधार पर इन फ्यूल्स को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है और इनकी कीमतों में भी काफी ज्यादा अंदर है. आइए, भारत में उपलब्ध E20 से लेकर E85 तक के सभी प्रकार के पेट्रोल के बारे में जानते हैं. ये किस तरह की गाड़ियों के लिए हैं और इनकी फिलहाल कीमत क्या है? ये भी जानेंगे। 

1. रेगुलर पेट्रोल (E20 – 91 Octane)
ये भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला सामान्य पेट्रोल है, जिसका इस्तेमाल हर आम बाइक, स्कूटर और कार में होता है. देश के सभी पेट्रोल पंपों पर अब ये फ्यूल 20% इथेनॉल मिश्रण यानी E20 स्टैंडर्ड के साथ ही मिल रहा है. 91 ऑक्टेन रेटिंग वाला ये पेट्रोल रोजमर्रा की शहर में ड्राइविंग और ईको-फ्रेंडली सफर के लिए सबसे सस्ता और व्यावहारिक विकल्प है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹102.12/लीटर है। 

2. प्रीमियम पेट्रोल (E20 – 95 Octane)
इंडियन ऑयल का XP95 और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का Power Petrol इस कैटेगरी में आते है. ये भी E20 स्टैंडर्ड (20% इथेनॉल) पर ही बेस्ड है, लेकिन इसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 होती है. इसमें स्पेशल डिटर्जेंट एडिटिव्स मिले होते हैं जो इंजन के वाल्व को साफ रखते हैं. ये मॉडर्न टर्बो-पेट्रोल कारों और प्रीमियम स्कूटर्स के लिए बेहतरीन माइलेज और स्मूथ परफॉर्मेंस देता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹109.24/लीटर है। 

3. सुपर-प्रीमियम पेट्रोल (0% Ethanol – 100 Octane)
इंडियन ऑयल का XP100 इस कैटेगरी का सबसे बड़ा उदाहरण है. ये भारत का इकलौता पेट्रोल है, जो पूरी तरह से इथेनॉल-मुक्त (0% Ethanol) होता है और इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 होती है. ये फ्यूल बेहद महंगा है और इसे खासतौर पर सुपरकार्स, रेसिंग बाइक्स और विंटेज कारों के लिए तैयार किया गया है, ताकि उनके इंजनों को अधिकतम पावर मिल सके. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹170/लीटर है। 

4. E85 पेट्रोल (Flex-Fuel)
इसे फिलहाल फ्यूचर फ्यूल के हिसाब से देखा जा रहा है. E85 पेट्रोल केवल फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स (FFVs) के लिए पेश किया गया है. इसमें 85% तक इथेनॉल और सिर्फ 15% पेट्रोल होता है. टोयोटा, मारुति और हीरो मोटोकॉर्प ने मार्केट में E85 पर चलने वाले कुछ मॉडल्स उतारे हैं. ये पर्यावरण के लिए बेहद सुरक्षित और रेगुलर पेट्रोल से काफी सस्ता है, लेकिन इसे सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में ही डाला जा सकता है. दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल ₹82.12/लीटर है। 

5. E100 (प्योर इथेनॉल फ्यूल)
केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के सहयोग से भारत में E100 यानी 100% शुद्ध इथेनॉल ईंधन को भी हरी झंडी मिल चुकी है. ये पूरी तरह से गन्ने, मक्के और कृषि अपशिष्ट से बनने वाला बायोफ्यूल है, जिसमें पेट्रोल की एक बूंद भी नहीं होती. वर्तमान में चुनिंदा पायलट प्रोजेक्ट्स और विशेष रूप से डिजाइन की गई फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स और कारों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है. इसकी कीमत अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

Share Market Today: 650 अंक उछला सेंसेक्स, 200 अंक चढ़ा निफ्टी; IT और मेटल शेयरों में जोरदार खरीदारी

मुंबई 

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर मार्केट में खुलते ही उछाल देखा गया. 650 अंक या 0.84 प्रतिशत की उछाल के साथ 78,152.34 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी लगभग 200 अंक या 0.83 प्रतिशत की बढ़त लेकर 24,375.65 पर ओपन हुआ. आईटी, मेटल, फार्मा और केमिकल शेयरों में जोरदार खरीदारी के दम पर बेंचमार्क सूचकांकों में करीब 1-1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. हालांकि कुछ मिनटों के भीतर बाजार थोड़ा स्थिर दिखा. सुबह 9:23 बजे निफ्टी 50 करीब 173 अंकों के उछाल के साथ 24,352 पर ट्रेड करता दिखा, जबकि सेंसेक्‍स 542 अंकों के उछाल के साथ 78,042 के लेवल पर कारोबार करता दिखा। 

रुपये में भी लगातार मजबूती देखी जा रही है. शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय करेंसी रुपया डॉलर के मुकाबले 18 पैसे चढ़कर 95.17 के लेवल पर कारोबार करता दिखा। 

बाजार की शुरुआती बड़ी बातें
मुंबई शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स सुबह 650 अंक या 0.84 प्रतिशत की भारी उछाल के साथ 78,152.34 के स्तर पर खुला. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 200 अंक या 0.83 प्रतिशत की मजबूती लेकर 24,375.65 के स्तर पर खुला. बाजार के इस शुरुआती उछाल से निवेशकों ने कुछ ही मिनटों में मोटी कमाई की। 

सेक्टर्स का हाल: कहां रही तेजी, कहां मंदी?
बाजार को ऊपर ले जाने में आज आईटी कंपनियों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। 

आईटी और मेटल में धूम: निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की बड़ी तेजी देखी गई. इसके साथ ही मेटल (धातु) इंडेक्स भी 1.66 प्रतिशत ऊपर चढ़ गया। 

छोटे और फार्मा शेयर चमके: छोटे आईटी और टेलीकॉम शेयरों के साथ-साथ केमिकल इंडेक्स में 0.82 प्रतिशत और फार्मा इंडेक्स में 0.72 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई. छोटे और मझोले शेयरों में भी निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया। 

यहां दिखा दबाव: इस चौतरफा तेजी के बीच बैंकिंग सेक्टर में थोड़ी सुस्ती रही. सरकारी बैंकों का इंडेक्स (Nifty PSU Bank) 0.87 प्रतिशत गिर गया. इसके अलावा टाटा मोटर्स, एनटीपीसी, एसबीआई और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली। 

उतार-चढ़ाव में आई कमी
बाजार में जोखिम और डर को मापने वाला पैमाना यानी ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) आज 1.62 प्रतिशत गिरकर 12.09 के स्तर पर आ गया. इसका घटना इस बात का संकेत है कि बाजार में अभी घबराहट कम है और स्थिरता बढ़ रही है। 

बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार का रुख सकारात्मक बना रहेगा, लेकिन निवेशकों को थोड़ा सावधान भी रहना चाहिए। 

निफ्टी के लिए जरूरी स्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का 24,000 के ऊपर बने रहना बहुत जरूरी है. अगर यह इसके ऊपर टिका रहता है, तो तेजी का दौर जारी रहेगा. बाजार के लिए पहला बड़ा अवरोध 24,300 और फिर 24,450 पर है। 

गिरावट पर यहां है सहारा: अगर बाजार में कोई बड़ी गिरावट आती है, तो 24,050 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट (सहारा) का काम करेगा. यदि यह स्तर भी टूटता है, तो निफ्टी 23,900 तक नीचे जा सकता है। 

विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि दुनिया भर के बाजारों में टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों में चल रही बिकवाली पर नजर रखें, क्योंकि इसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। 

आईटी सेक्‍टर्स में ज्‍यादा उछाल 
सेक्टर के लिहाज से बात करें तो निफ्टी आईटी (Nifty IT) में करीब 2 फीसदी का उछाल देखा गया, जबकि निफ्टी मेटल (Nifty Metal) 1.66 फीसदी मजबूत हुआ. इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम, केमिकल्स और फार्मा सूचकांकों में क्रमशः 1 फीसदी, 0.82 फीसदी और 0.72 फीसदी से अधिक की तेजी रही। 

इसके विपरीत, निफ्टी पीएसयू बैंक (Nifty PSU Bank) इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 के शेयरों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV), एनटीपीसी (NTPC), एसबीआई (SBI) और एक्सिस बैंक (Axis Bank) सबसे ज्यादा नुकसान में रहने वाले शेयरों में शामिल थे। 

व्यापक बाजार (Broader Market) में भी मजबूती बनी रही. निफ्टी स्मॉलकैप 50 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में क्रमशः 0.48 प्रतिशत और 0.46 प्रतिशत की बढ़त देखी गई. वहीं, निफ्टी 100 में 0.46 प्रतिशत और निफ्टी 500 में 0.41 प्रतिशत की तेजी आई. बाजार में उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाला सूचकांक ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) 1.62 फीसदी गिरकर 12.09 के स्तर पर आ गया। 

एक्‍सपर्ट्स का क्‍या कहना है? 
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, शॉर्ट टर्म के लिए बाजार का नजरिया सतर्कता के साथ सकारात्मक (Cautiously Optimistic) बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी के लिए 24,000 के स्तर से ऊपर बने रहना व्यापक रूप से तेजी के ट्रेंड को सकारात्मक रखता है. बाजार के लिए तात्कालिक रुकावट (Immediate Resistance) 24,300 पर है, जिसके बाद अगला रेजिस्टेंस 24,450 पर देखा जा रहा है। 

गिरावट की स्थिति में 24,050 एक महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल (Key Support Level) बना हुआ है. अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार में 23,900 की तरफ एक सुधारात्मक गिरावट (Correction) आ सकती है। 

एक्सपर्ट्स ने यह भी सलाह दी है कि निवेशकों को वैश्विक स्तर पर तकनीकी शेयरों में चल रही बिकवाली (Global Technology Sell-off) पर नजर रखनी चाहिए. सेमीकंडक्टर शेयरों में दोबारा कमजोरी आने से घरेलू आईटी शेयरों में हालिया तेज रैली के बाद मुनाफावसूली (Profit Booking) देखने को मिल सकती है। 

कमोडिटी और वैश्विक बाजारों के संकेत 
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 0.77 प्रतिशत बढ़कर 72.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहा। 

एशियाई बाजारों में भी आज ज्यादातर शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे, जहां निक्केई (Nikkei), हैंगसेंग (Hang Seng) और कोस्पी (KOSPI) में 3 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। 

इससे पहले, तकनीकी शेयरों में बिकवाली के कारण कल रात अमेरिकी बाजार (Wall Street) गिरावट के साथ बंद हुए थे. वहां नैस्डैक (Nasdaq) 0.80 प्रतिशत टूट गया था, जबकि एसएंडपी 500 (S&P 500) बिना किसी खास बदलाव के सपाट बंद हुआ था। 

इंदिरा नूयी के बयान पर छिड़ी बहस, बोलीं- ‘भारत में रहती तो पेप्सिको की CEO नहीं बन पाती’, चीन की भी की तारीफ

 कैलिफोर्निया

पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंदिरा नूयी ने भारत को लेकर बेहद तीखे बयान दिए हैं। भारतीय मूल की इंदिरा नूयी ने एक इंटरव्यू में चीन को भारत की तुलना ज्यादा सुविधाजनक बताया है। उन्होंने भारत की कार्यसंस्कृति और सामाजिक व्यवस्था की भी तीखी आलोचना की है। इंदिरा नूयी ने ‘हूवर इंस्टिट्यूशन’ के एक विशेष इंटरव्यू में लीडरशिप, अपने अमेरिकी सफर और भारत को लेकर कई बेबाक और दिलचस्प टिप्पणियां की हैं।
भारत में होती तो इतनी बड़ी कंपनी की CEO नहीं बन पाती

नूयी ने अमेरिका के ‘मेरिटोक्रेटिक’ यानी योग्यता आधारित सिस्टम की तारीफ करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अगर वह अमेरिका नहीं आतीं, तो शायद इस मुकाम तक नहीं पहुंच पातीं। भारत की सामाजिक और कॉर्पोरेट व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल उठाते हुए नूयी ने दावा किया कि उनके जैसी सफलता भारत में रहकर हासिल करना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा, “एक अप्रवासी अपनी जेब में बिना कुछ लिए आता है और एक प्रतिष्ठित अमेरिकी कंपनी का CEO बन जाता है… ऐसा दुनिया के किसी और देश में नहीं हो सकता। मैं दुनिया के किसी भी अन्य देश में, यहां तक कि भारत में भी कभी सीईओ नहीं बन सकती थी।”
चीन की तारीफ, भारत को बताया ‘गंदा’

एक यात्री के तौर पर चीन और भारत की तुलना करते हुए नूयी ने कहा कि चीन बहुत ‘सजातीय’ और व्यवस्थित है, जबकि भारत पूरी तरह से ‘अराजक’ है। उन्होंने कहा, “चीन में काफी हद तक एक जैसी संस्कृति और लोग हैं। एक पर्यटक के तौर पर भारत की तुलना में चीन में समय बिताना आसान है। अगर आपको साफ-सुथरी और व्यवस्थित जिंदगी पसंद है, तो भारत में रहना आपके लिए नामुमकिन होगा। भारत की खूबसूरती उसकी अव्यवस्था में ही है। अगर आपको यह अव्यवस्था पसंद आती है, तो आप बार-बार यहां आना चाहेंगे।” उन्होंने सड़क पर कारों के बीच चलती गायों का उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग सिर्फ साफ-सफाई और व्यवस्था पसंद करते हैं, उनके लिए भारत को समझना मुश्किल होगा, लेकिन भारतीय लोग इसी तरह की अव्यवस्था के बीच रास्ते निकालना जानते हैं।
60 और 70 के दशक का भारत और महिलाओं की स्थिति

अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए नूयी ने बताया कि औपनिवेशिक शासन के बाद का युवा भारत कैसा था। उनका जन्म भारत की आजादी के सात-आठ साल बाद हुआ था। उन्होंने बताया, “60 और 70 के दशक में भारत एक नया देश था और उस समय महिलाएं समाज में कोई बड़ी ताकत नहीं थीं। अधिकांश महिलाएं घर पर ही रहती थीं।” हालांकि, उन्होंने अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पिता और दादा ने उन्हें “दुनिया जीतने और बड़े सपने देखने” के लिए प्रेरित किया, जिसने उन्हें अमेरिका जाने का साहस दिया।
भारतीय लोकतंत्र: धीमी प्रगति, लेकिन यही इसकी ताकत है

नूयी ने चीन के सेंट्रलाइज्ड विकास मॉडल और भारतीय लोकतंत्र की तुलना करते हुए बेहद दिलचस्प विश्लेषण किया। उन्होंने माना कि चीन ने सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था के कारण लाखों लोगों को गरीबी से निकाला और एक सुपरपावर बना। वहीं भारत को लेकर उन्होंने कहा, “भारत अभी भी एक विश्व शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है क्योंकि वहां लोकतंत्र का शासन है और जब हर किसी के पास वोट और अपनी बात कहने का अधिकार होता है, तो प्रगति धीमी होती है।”

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें भारत के लोकतांत्रिक होने पर खुशी है क्योंकि सत्तावादी शासनों के पास ‘सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण’ का कोई तंत्र नहीं होता है, जो उनका सबसे बड़ा नुकसान है। उन्होंने एक बेहतरीन उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका की तरह भारत के हर छोटे-बड़े कस्बे में एक ‘कोर्टहाउस’ होता है, जो लोगों को यह भरोसा देता है कि उनके पास अधिकार हैं। चीन में ऐसा नहीं है क्योंकि वहां सरकार ही नियम बनाती और फैसला करती है।
भारत-अमेरिका संबंध: स्वाभाविक भागीदार

भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर नूयी ने दोनों देशों को एक-दूसरे का ‘नेचुरल पार्टनर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जिसकी 50% से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। इसके साथ ही यहां दुनिया की सबसे बड़ी अंग्रेजी बोलने वाली आबादी है। उनके अनुसार, सॉफ्टवेयर, इंजीनियरिंग और AI के क्षेत्र में भारतीय प्रतिभाएं दुनिया के भविष्य के लिए बेहद अहम होने जा रही हैं। दोनों देशों के संबंधों में उतार-चढ़ाव पर उन्होंने सलाह दी कि, “अमेरिका और भारत के नेताओं को कोई भी कड़ा कदम उठाने या ईगो में आने से पहले एक-दूसरे की जगह खुद को रखकर सोचना चाहिए।”

भू-राजनीति और चीन के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए नूयी ने भारत की सुरक्षा को अमेरिकी हितों के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जब चीन के साथ जियो-पॉलिटिकल रेस की बात आती है, तो भारत एक धुरी बन जाता है। नूयी ने कहा, “यह देखते हुए कि भारत कितने ‘खराब पड़ोस’ में है, यह बेहद अहम है कि अमेरिका भारत की रक्षा करे और वहां लोकतंत्र को फलने-फूलने दे।
कौन हैं इंदिरा नूयी?

इंदिरा नूयी भारतीय मूल की एक बेहद प्रभावशाली अमेरिकी बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं। उन्हें मुख्य रूप से दुनिया की सबसे बड़ी फूड और बेवरेज कंपनियों में से एक, पेप्सिको की पूर्व सीईओ और चेयरपर्सन के रूप में उनके शानदार नेतृत्व के लिए जाना जाता है।

शादी से पहले उनका नाम इंदिरा कृष्णमूर्ति था। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1955 को तमिलनाडु के मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। उन्होंने 1975 में मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 1976 में भारत के प्रतिष्ठित IIM कलकत्ता से पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम (MBA) पूरा किया।

1978 में वह उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं। 1980 में उन्होंने प्रतिष्ठित Yale School of Management से पब्लिक और प्राइवेट मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की। अपने शुरुआती दिनों में पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने रिसेप्शनिस्ट के तौर पर भी नाइट शिफ्ट में काम किया था।

येल से पढ़ाई के बाद उन्होंने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG), मोटोरोला और आसिया ब्राउन बोवेरी (ABB) जैसी दिग्गज कंपनियों में काम किया। उन्होंने रणनीतिक योजना के प्रमुख के रूप में 1994 में पेप्सिको जॉइन किया और कंपनी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई। 2006 में उन्हें पेप्सिको का CEO और 2007 में चेयरपर्सन बनाया गया। वह पेप्सिको के 42 साल के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला थीं।

Google को बड़ा झटका, EU कोर्ट ने एंटीट्रस्ट केस में ₹4.1 लाख करोड़ की पेनाल्टी पर लगाई मुहर

 नई दिल्ली

गूगल को यूरोप में एक बड़ा कानूनी झटका लगा है. यूरोपीय संघ (EU) की सबसे बड़ी अदालत ने एंड्रॉयड से जुड़े एंटीट्रस्ट मामले में गूगल की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही कंपनी पर लगाया गया 4.1 अरब यूरो (करीब 4.10 लाख करोड़ रुपये) का रिकॉर्ड जुर्माना बरकरार रहेगा. यह मामला पिछले आठ साल से चल रहा था। 

यह जुर्माना पहली बार 2018 में यूरोपीय आयोग (European Commission) ने लगाया था. आयोग का आरोप था कि Google ने Android ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके अपने सर्च और क्रोम ब्राउज़र को बढ़ावा दिया और दूसरी कंपनियों के लिए कंपटीशन करना मुश्किल बना दिया। 

उस समय कंपनी पर 4.34 अरब यूरो का जुर्माना लगाया गया था. बाद में 2022 में एक निचली अदालत ने इसे घटाकर 4.1 अरब यूरो कर दिया, लेकिन जुर्माना खत्म नहीं किया. अब EU की सर्वोच्च अदालत ने भी इसी फैसले को सही माना है। 

अदालत ने कहा कि गूगलग और उसकी पैरेंट कंपनी Alphabet की अपील खारिज की जाती है. कोर्ट के मुताबिक, एंड्रॉयड से जुड़े समझौतों के जरिए गूगल ने अपने प्रभुत्व का गलत फायदा उठाया और बाजार में कंपटीशन को प्रभावित किया। 

गूगल पर क्या आरोप हैं?
यूरोपीयन यूनियन का कहना था कि गूगल स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से ऐसी शर्तें रखता था, जिनके तहत गूगल प्ले स्टोर का लाइसेंस लेने के लिए गूगल सर्च और क्रोम को पहले से इंस्टॉल करना जरूरी होता था। 

आयोग का मानना था कि इससे दूसरे सर्च इंजन और ब्राउज़र को बराबरी का मौका नहीं मिला और एंड्रॉयड बाजार में गूगल की पकड़ और मजबूत होती गई। 

गूगल ने इस फैसले पर निराशा जताई है. कंपनी का कहना है कि एंड्रॉयड एक ओपन और फ्री प्लेटफॉर्म है, जिसने मोबाइल इंडस्ट्री में कंपटीशन बढ़ाने और हजारों कंपनियों को कारोबार करने का मौका दिया है। 

गूगल का यह भी कहना है कि अदालत ने एंड्रॉयड को खुला और सभी के लिए उपलब्ध बनाए रखने में कंपनी के निवेश को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। यह फैसला Google के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले कुछ सालों में यूरोप ने कंपनी पर कई एंटी ट्रस्ट मामलों में कार्रवाई की है. एंड्रॉयड केस के अलावा गूगल शॉपिंग और ऑनलाइन ऐड्स से जुड़े मामलों में भी कंपनी को अरबों यूरो के जुर्माने का सामना करना पड़ा है। 

यूरोपीयन यूनियन लगातार बड़ी टेक कंपनियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है और उनका मानना है कि बाजार में निष्पक्ष कंपटीशन बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। इस फैसले के बाद Android मामले में Google की कानूनी लड़ाई लगभग खत्म हो गई है और कंपनी को 4.1 अरब यूरो का जुर्माना भरना होगा. यह अब भी यूरोप में किसी टेक कंपनी पर लगाए गए सबसे बड़े एंटीट्रस्ट जुर्मानों में से एक है। 

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