लोकतंत्र की रक्षा में सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

संविधान, चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर देश का विश्वास हुआ और मजबूत।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र की मजबूती और संविधान की गरिमा को और अधिक सशक्त करने वाला है।

यह फैसला उन सभी निराधार आरोपों और राजनीतिक भ्रमों का उत्तर है, जो लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए जा रहे थे। चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता लोकतंत्र की आधारशिला है।

एक स्वच्छ, पारदर्शी और विश्वसनीय मतदाता सूची ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान होती है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय उसी दिशा में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक कदम है।

मैं इस महत्वपूर्ण निर्णय का हृदय से अभिनंदन करती हूँ और देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अपनी पूर्ण आस्था व्यक्त करती हूँ।

Gunjan Chowksey

Advocate, Supreme Court of India

State Media Panelist, BJP Madhya Pradesh

District Vice President, BJP Bhopal

 

कर्नाटक में ‘बिहार फॉर्मूला’ की चर्चा, सिद्धारमैया राज्यसभा तो बेटे को मंत्री पद?

बेंगलुरु 

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे वक्त से चल रही सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार की खींचतान अब एक संभावित फॉर्मूले की ओर बढ़ती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को राज्यसभा की सीट और राष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका सौंपी जाएगी, जबकि उनके बेटे डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया को नई सरकार के कैबिनेट में मंत्री पद दिया जा सकता है। 

इससे डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो सकता है. कांग्रेस का ये फॉर्मूला पार्टी में संतुलन और कर्नाटक सरकार में नेतृत्व परिवर्तन का साफ संकेत दे रहा है. साथ ही सूत्रों ने बताया कि शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 

सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को दिल्ली में हुई कांग्रेस आलाकमान की मैराथन बैठक में ये फॉर्मूला तय किया गया है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने करीब सात घंटे चक कर्नाटक में मौजूदा राजनीतिक खींचतान को लेकर चर्चा की। 

हालांकि, कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर किसी भी नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा से इनकार किया है, लेकिन अंदरखाने चल रही राजनीतिक कवायद ने इस अटकल को और मजबूत कर दिया है कि सिद्धारमैया अब मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। 

जल्द इस्तीफा दे सकतें हैं सिद्धारमैया
बैठक की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया को साफ कर दिया है कि कांग्रेस अब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपना चाहती है, क्योंकि वह देश में कांग्रेस के सबसे बड़े-सम्मानित पिछड़ा वर्ग चेहरों में से एक हैं. पार्टी चाहती है कि साल 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्र की राजनीति में आएं और राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी व प्रभावी सांगठनिक भूमिका निभाएं. सूत्रों ने ये भी बताया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। 

KPCC के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे शिवकुमार
सूत्रों ने ये भी बताया कि डीके शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफ देंगे. उनकी जगह सतीश जारकीहोली को पार्टी अध्यक्ष बनाया जा सकता है. सतीश अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखते हैं। 

कांग्रेस आलाकमान द्वारा निकाले गए इस नए समझौते के अनुसार, वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया अब कर्नाटक की सक्रिय मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर केंद्र की राजनीति का रुख करेंगे, जहां पार्टी उन्हें राज्यसभा की सुरक्षित सीट देकर दिल्ली भेजेगी. सिद्धारमैया के केंद्र में जाने के बाद राज्य में डीके शिवकुमार के नए मुख्यमंत्री के तौर पर सरकार बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा, जिससे दोनों गुटों के बीच का बड़ा गतिरोध हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। 

शिवकुमार को सम्राट की तरह कुर्सी 

सत्ता के ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की लंबी चली यह रार अब आखिरकार अपने अंजाम तक पहुंचती नजर आ रही है, डीके शिवकुमार का इंतजार अब खत्म होने की ओर है. कुर्सी की इस लड़ाई का अब पटाक्षेप होता दिख रहा है. कांग्रेस या कांग्रेस के नेताओं ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर अभी कुछ नहीं कहा है, लेकिन दिल्ली में सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ कांग्रेस आलाकमान की बैठक, इस बैठक के बाद बेंगलुरु में बढ़ी हलचल इसी तरफ इशारा करते हैं। 

चर्चा एक फॉर्मूले की भी है. इस फॉर्मूले के मुताबिक सीएम सिद्धारमैया को राज्यसभा के रास्ते दिल्ली लाए जाने की चर्चा है. सीएम सिद्धारमैया के बेटे डॉक्टर यतींद्र सिद्धारमैया को डीके शिवकुमार की कैबिनेट में मंत्री पद दिया जा सकता है. सीएम बनाए जाने के बाद शिवकुमार कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी भी छोड़ सकते हैं और यह पद सिद्धारमैया के भरोसेमंद सतीश जारकीहोली को दिया जा सकता है। 

यह फॉर्मूला कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन के लिए निकाला गया है. बात कांग्रेस पार्टी की है. लेकिन यह है कुछ वैसा ही, जैसा हाल ही में बिहार में देखने को मिला. बिहार में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे. नीतीश कुमार राज्यसभा चले गए, मुख्यमंत्री और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को नई सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया और सत्ता का सरदार सम्राट चौधरी बन गए। 

ठीक यही फॉर्मूला कांग्रेस अब कर्नाटक में अपनाती नजर आ रही है. सीएम सिद्धारमैया को नीतीश कुमार की तरह राज्यसभा भेजने के साथ ही पार्टी निशांत की तरह यतींद्र को मंत्री पद ऑफर कर रही है. बिहार में जनता दल (यूनाइटेड) के नीतीश कुमार की जगह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने थे. कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह कुर्सी शिवकुमार को मिलेगी। 

फर्क इतना है कि बिहार में मसला दो गठबंधन सहयोगियों के बीच का था और कर्नाटक में बात दो नेताओं की बीच की है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया ने अभी इस फॉर्मूले पर हां या ना नहीं कहा है. सीएम सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपनी सरकार के कैबिनेट मंत्रियों को ब्रेकफास्ट पर बुलाया है. इसे लेकर भी आधिकारिक तौर पर सरकार या पार्टी की ओर से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन डीके शिवकुमार के शेड्यूल में इसका जिक्र है। 

TMC में बगावत के संकेत! ममता बनर्जी की पार्टी छोड़ सकते हैं 20 सांसद

कलकत्ता

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही बरकरार हैं। कहा जा रहा है कि एक दर्जन से ज्यादा विधायक खुलकर पार्टी की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं। वहीं, अटकलें ये भी हैं कि करीब 15 सांसद जल्द ही टीएमसी छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। इसके अलावा पार्टी नंदीग्राम में होने वाले उप चुनाव को लेकर उम्मीदवार खोजने में भी परेशानी का सामना करती नजर आ रही है।

विधायक हो रहे हैं नाराज
टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 18 बड़े नेता ऐसे हैं, जो खुलकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। इनमें सुखेंदु शेख रॉय, सांसद काकोली घोष दस्तीदार, देव अधिकारी, कल्याण बनर्जी, रचना बनर्जी, विधायक कुणाल घोष, रिताब्रता बनर्जी, अरुणव सेन, संदीपन साहा, नियामत शेख, पूर्व मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी, मनोज तिवारी, रविंद्रनाथ घोष, पूर्व विधायक अतीन घोष, खगेश्वर रॉय, सौरव चक्रवर्ती, रत्ना चटर्जी, तपन चटर्जी का नाम शामिल है।

20 सांसद बदल सकते हैं पाला
संघवाद प्रतिदिन की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा है कि 12 टीएमसी सांसदों ने भाजपा में शामिल होने या समर्थन देने की तैयारी कर ली है। इसके अलावा दल बदलने की तैयारी कर रहे सांसदों की लिस्ट में 5 से 6 नाम और हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि ये सांसद कौन होंगे और कब तक दल बदल की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 12 से ज्यादा सांसदों से चर्चा चल रही है और आंकड़ा 20 तक पहुंच सकता है।

100 से ज्यादा पार्षद दे चुके इस्तीफा
खबर है कि बीते कुछ दिनों में 100 से ज्यादा पार्षद इस्तीफा दे चुके हैं। खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब निकाय चुनाव में कुछ ही समय बाकी है। इतना ही नहीं पार्षद अब खुलकर टीएमसी नेतृत्व और सांसद अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर मॉडल पर सवाल उठा रहे हैं। ममता बनर्जी ने पार्षदों से एकजुट रहने की अपील की है।

नंदीग्राम में उम्मीदवार नहीं मिल रहा
ममता बनर्जी के सामने एक और बड़ी चुनौती नंदीग्राम से खड़ी होती दिख रही है। कहा जा रहा है कि टीएमसी को इस सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं मिल रहा है। कई बड़े नेता यहां से चुनाव लड़ने से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर उन्हें साल 2021 में शुभेंदु अधिकारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। 2026 में भी अधिकारी ने यहां से जीत दर्ज की, लेकिन भवानीपुर सीट से विधायक रहते हुए नंदीग्राम को छोड़ने का फैसला किया था।

तमिलनाडु में CM विजय का बड़ा गेमप्लान, अपने दम पर बहुमत हासिल करने की तैयारी?

चेन्नई

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार बनाई जरूर है, लेकिन उनका इरादा कुछ और ही लगता है. विजय जल्दी से जल्दी अपने बूते सरकार चलाना चाहते हैं. और यह गठबंधन साथियों, खास तौर पर कांग्रेस, के लिए काफी चिंता वाली बात हो सकती है। 

एक तरफ विजय लोक कल्याणकारी कदम उठा रहे हैं, और ऐन उसी वक्त विरोधी खेमे में बगैर बुलडोजर के ही तोड़-फोड़ की कार्रवाई चल रही होती है. विजय के सलाहकारों की टीम देश भर के नेताओं से सीखने और उस पर अमल करने की रणनीति पर काम कर रही है। 

मुख्यमंत्री ने सहकारी बैंकों से लिए गए किसानों के 50,000 रुपये तक के फसल लोन माफ कर दिए हैं. सरकारी ऐलान के अनुसार, जिन बड़े किसानों ने सहकारी बैंकों से फसल लोन लिया है, उन्हें भी 5 हजार रुपये की राहत दिए जाने की बात है। 

राज्यसभा में डेब्यू, और उपचुनावों की तैयारी
तमिलनाडु में 18 जून को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होना है. तमिलनाडु की मेलम विधानसभा सीट से चुन लिए जाने के बाद सीवी शनमुगम ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. मुख्यमंत्री विजय उसी सीट के जरिए टीवीके की राज्यसभा में एंट्री करना चाहते हैं। 

चर्चा है कि टीवीके में रिटायर्ड आईएएस अफसर यू सगायम को राज्यसभा भेजने पर विचार किया जा रहा है. तमिलनाडु में यू सगायम ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए मशहूर रहे हैं. उनकी ईमानदारी के कई किस्से सुनाए जाते हैं। 

खास बात यह है कि यू सगायम ऐसे अफसर हैं जिनका 28 साल की सेवा में 25 बार ट्रांसफर हुआ. यू सगायम को राज्यसभा भेज कर मुख्यमंत्री थलपति विजय तमिलनाडु की जनता को संदेश देना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वो क्या करना चाहते हैं, और ऐसा करने से उनके पहले की डीएमके और एआईएडीएमके सरकारें अपने आप निशाने पर आ जाती हैं। 

राज्यसभा के साथ ही टीवीके नेतृत्व की नजर तमिलनाडु की चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव हैं. एक सीट तो मुख्यमंत्री विजय ने ही खाली की है, जबकि तीन सीटें टीवीके में शामिल होने वाले विधायकों के AIADMK छोड़ने से खाली हुई हैं। 

AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार और पी. सत्यभामा ने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर JCD प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया. मरगथम कुमारवेल मदुरंतकम सीट से, पी सत्यभामा धारापुरम सीट से और एस जयकुमार पेरुनदुरई सीट से AIADMK के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. धारापुरम और पेरुनदुरई को AIADMK का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जबकि मदुरंतकम चेन्नई के पास महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। 

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब सीवी शनमुगम के नेतृत्व में टीवीके सरकार को समर्थन देने वाले 25 विधायकों में से कुछ के कैबिनेट में शामिल होने पर बातचीत चल रही थी. लेकिन, वाम दलों, वीसीके और टीवीके के ही कुछ नेताओं के दबाव में अचानक यह प्लान ड्रॉप कर दिया गया। 

इस्तीफा देने वाले विधायक अब टीवीके के चुनाव निशान सीटी पर फिर से मैदान में उतरेंगे. उपचुनाव जीतने के बाद वे टीवीके के विधायक बन जाएंगे, और उसके बाद किसी भी गठबंधन साथी को कोई आपत्ति नहीं होगी – खास बात यह है कि सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। 

कांग्रेस और टीवीके का साथ कब तक
तीन विधायकों का इस्तीफा तो ट्रेलर लगता है. जननायगन के समानांतर विजय की सियासी पिक्चर अभी बाकी है. टीवीके के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि कम से कम 7 से 8 विधायक अभी आने वाले दिनों में ऐसे ही इस्तीफा दे सकते हैं। 

टीवीके के पास फिलहाल 107 विधायक हैं. टीवीके ने 108 सीटें जीती थीं, जिनमें मुख्यमंत्री विजय की जीती हुई दो सीटें शामिल थीं. विजय ने अपनी एक सीट खाली कर दी थी. अब अगर उपचुनावों में सभी सीटों पर जीत हासिल होती है, तो टीवीके के पास 111 सीटें हो जाएंगी. तमिलनाडु में बहुमत का आंकड़ा 118 है. टीवीके सरकार को कांग्रेस की पांच विधायकों का समर्थन हासिल है। 

अगर उपचुनाव घोषित होने से पहले और विधायक इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो जाते हैं, तो टीवीके को सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी. सबसे ज्यादा 5 सीटों वाली कांग्रेस से छुटकारा पाना आसान हो जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, टीवीके के सीनियर नेताओं का मानना है कि विजय जैसे करिश्माई नेता के इर्द-गिर्द बनी पहली पीढ़ी की राजनीतिक पार्टी चुनाव के बाद बने सहयोगी दलों पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रह सकती। 

एक सीनियर टीवीके नेता का कहना है, अगर ये सीटें साथ में जाती हैं, तो बात बहुत मायने रखती है. जब लोगों को लगता है कि सरकार खुद को स्थिर कर रही है, तो जनता के बीच माहौल बदलने लगता है। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की रणनीति जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला से काफी हद तक मिलती जुलती लगती है. हालांकि, दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरण में थोड़ा फर्क भी है. उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था. विजय ने कांग्रेस के साथ चुनाव बाद गठबंधन किया है। 

कांग्रेस ने चुनाव से पहले तो उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन कर लिया था, लेकिन सरकार में शामिल नहीं हुई. उमर अब्दुल्ला ने भी कांग्रेस को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. धीरे धीरे गठबंधन रस्मअदायगी भर रह गया. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के 6 विधायक हैं. कहने को तो कांग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पार्टी की वही स्थिति है जैसी तमिलनाडु की पिछली डीएमके सरकार में थी। 

ऐसा ही एक उदाहरण दिल्ली में मिलता है. 2013 में अरविंद केजरीवाल भी बहुमत के आंकड़े से पिछड़ गए थे. पहली बार सरकार बनाने के लिए केजरीवाल ने कांग्रेस का सपोर्ट लिया था, लेकिन अपने बूते सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव तक इंतजार करना पड़ा, विजय तमिलनाडु में ये सब पहले ही कर लेना चाहते हैं। 

क्या टीवीके नेता थलपति विजय का ताजा एक्शन बीजेपी के ‘ऑपरेशन लोटस’ जैसा है?

देखा जाए तो तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए टीवीके के राजनीतिक सपोर्ट लेने की शुरुआत गठबंधन की कोशिश के रूप में हुई थी. जिसमें AIADMK के बागियों का भी समर्थन मिला था. लेकिन, अब रणनीतिक बदलाव साफ साफ नजर आने लगा है. अब जो कुछ हो रहा है, वह कुछ हद तक राजनीतिक अधिग्रहण जैसा माना जा सकता है. बीते वक्त में कर्नाटक और मध्य प्रदेश में बीजेपी को ऐसे तौर तरीके अपनाते देखा जा चुका है, जिसे ‘ऑपरेशन लोटस’ के रूप में याद किया जाता है।

 रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ताधारी टीवीके जिस तरीके से कदम बढ़ा रही है, तमिलनाडु की राजनीति के कई नेता निजी तौर पर इसे कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मान कर चल रहे हैं, और टीवीके का मकसद पूरी तरह साफ है – अब एक ही मिशन है, सहयोगी दलों पर निर्भरता कम करने के साथ ही 234 सदस्यों वाली विधानसभा में सीधे 118 के महत्वपूर्ण आंकड़े तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना। 

‘लोटस’ नहीं, ऑपरेशन ‘एल’
टीवीके की रणनीति में बीजेपी की राजनीति की जो झलक देखने को मिल रही है, उसे तमिलनाडु की राजनीति में अब एक नया नाम भी मिल चुका है – ऑपरेशन एल

यह नाम बताया है AIADMK नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के करीब माने जाने वाले एक नेता ने. जब उनसे पूछा गया कि ‘एल’ का क्या मतलब है, तो उन्होंने लोटस नहीं बल्कि कई और नाम बता डाले. इंडियन एक्सप्रेस से हंसते हुए वो कहते हैं, लॉटरी, या लीमा या लीव… जो चाहो समझ लो। 

AIADMK नेता का यह कटाक्ष टीवीके में दबदबा रखने वाले नेताओं के इर्द-गिर्द घूमता है. एल से लॉटरी कहने का उनका आशय टीवीके के भीतर काफी प्रभावशाली माने जाने वाले अर्जुन से है, जो लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन के दामाद हैं. लीमा नाम AIADMK विधायक लीमा रोज मार्टिन की तरफ इशारा है, जो मार्टिन की पत्नी हैं. लीव का मतलब विधायकों के AIADMK छोड़ने से भी जोड़ा जा सकता है, और वैसे भी AIADMK का चुनाव निशान ‘टू लीव्स’ यानी दो पत्तियां हैं – और पार्टी के टूटने को दो में से एक पत्ती के अलग होने की तरफ इशारा है। 

 

 

बवाल रोजगार और भर्ती व्यवस्था को लेकर युवाओं में गुस्सा, प्रयागराज में परीक्षा केंद्र पर हंगामा

प्रयागराज के झूंसी में SSC GD परीक्षा केंद्र पर बवाल, गड़बड़ी के आरोप में छात्रों ने की तोड़फोड़

Prayagraj के झूंसी स्थित Sunita Singh Mahila Mahavidyalaya में SSC GD परीक्षा के दौरान छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए केंद्र परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों और अव्यवस्थित प्रबंधन की वजह से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इस घटना के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, युवाओं में बढ़ती नाराज़गी और रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल media पर भी मामले को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

नोएडा फेज-2 में मजदूरों का बड़ा प्रदर्शन: वेतन, बोनस और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग

करीब 1,000 से अधिक फैक्ट्री कर्मचारियों ने बढ़ती महंगाई और कम वेतन के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली।

नोएडा फेज-2 में हजारों फैक्ट्री कर्मचारियों ने वेतन, बोनस और कथित श्रमिक शोषण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल श्रमिकों का कहना है कि मौजूदा समय में ₹11,000 से ₹13,000 की सैलरी में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने ₹20,000 न्यूनतम वेतन और 8 घंटे की निर्धारित शिफ्ट लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि यह सिर्फ मांग नहीं बल्कि श्रमिकों का अधिकार है, जो उन्हें संविधान और श्रम कानूनों के तहत मिलना चाहिए।

मजदूरों का आरोप है कि लगातार बढ़ती महंगाई, लंबे कार्य घंटे और कम वेतन के कारण उनका जीवन संकट में है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। इसी बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई, जिसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने की बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर मजदूरों के वेतन, कार्य परिस्थितियों और श्रमिक अधिकारों को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी है।

संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन बना भोपाल का दूसरा जंक्शन, विकास को मिलेगी नई रफ्तार

विधायक रामेश्वर शर्मा ने इसे हुजूर विधानसभा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक सौगात बताया, कहा— बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार के खुलेंगे नए अवसर

भोपाल के संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन को अब आधिकारिक रूप से जंक्शन का दर्जा मिल गया है। आदेश जारी होने के बाद यह स्टेशन भोपाल का दूसरा जंक्शन बन गया है। इस उपलब्धि पर विधायक रामेश्वर शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, मुख्यमंत्री मोहन यादव एवं भोपाल सांसद आलोक शर्मा का आभार व्यक्त किया।

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यह निर्णय हुजूर विधानसभा क्षेत्र और संत नगर के समग्र विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। जंक्शन बनने से क्षेत्र की व्यापारिक पहचान को मजबूती मिलेगी, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से सीधा रेल संपर्क स्थापित होने से आवागमन और परिवहन अधिक सुगम होगा।

उन्होंने बताया कि ट्रेन सुविधाओं के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। संत हिरदाराम नगर को आधुनिक रेलवे सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में पहले भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। विधायक शर्मा के प्रयासों से ही स्टेशन को रतलाम डीआरएम से भोपाल डीआरएम में शामिल किया गया था तथा ‘बैरागढ़ स्टेशन’ का नाम बदलकर ‘संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन’ किया गया।

वर्तमान में अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत स्टेशन के आधुनिकीकरण का कार्य भी तेज गति से जारी है। जंक्शन का दर्जा मिलने के बाद अब क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी, ट्रेनों की संख्या में वृद्धि, व्यापारिक विकास और रोजगार के नए आयाम स्थापित होने की उम्मीद है।

“2021 के हिंसा मामले का आरोपी आकाश सिंह हावड़ा में पुलिस कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार”

“पुलिसकर्मियों पर फायरिंग और बमबाजी के मामले में आरोपी को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, राजनीतिक माहौल गरम”

“हावड़ा की सड़कों से सामने आई ये तस्वीरें अब पूरे बंगाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन चुकी हैं…”

“2021 में पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने और 20 से ज्यादा बम फेंकने के मामले में आरोपी बताए जा रहे टीएमसी से जुड़े आकाश सिंह को पुलिस ने कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के दौरान सामने आए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।”

“बीजेपी ने इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था की जीत बताया, वहीं टीएमसी समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई कह रहे हैं।”

“घटना के बाद बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। सवाल उठ रहे हैं—क्या यह कानून का सख्त संदेश है या राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन?”

“आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताइए।

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TMC में बड़ी टूट के संकेत! BJP के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार कर रहे 20 से ज्यादा सांसद

कलकत्ता

बंगाल में बदलाव हो गया. अब बदलाव के दायरे का विस्तार हो रहा है. बंगाल में 206 सीटों के साथ भाजपा ने सरकार बना ली. ममता बनर्जी की टीएमसी 80 पर ही अटक गई. ममता अब भी मानने को तैयार नहीं कि उनकी हार स्वाभाविक है. यह 15 साल से जनता के भीतर पनप रहे असंतोष और आक्रोश की स्वाभाविक परिणति है. पर, ममता टीएमसी की हार को भाजपा और चुनाव आयोग की साजिश मानती हैं. वे अपनी हार पर रोज ही विलाप के अंदाज में दोनों को खरी-खोटी सुनाती हैं. अब तो हालत यह हो गई है कि टीएमसी के उनके साथी भी भरोसेमंद नहीं रहे. नगर निकायों के पार्षद थोक में इस्तीफा दे रहे हैं. टीएमसी के ज्यादातर सांसद और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. पार्टी की बैठकों-कार्यक्रमों में उनकी गैरहाजिरी इसका संकेत है. ममता को भी अब लगने लगा है कि उनके लोग जान-बूझ कर दूरी बना रहे हैं. तभी तो उन्हें कहना पड़ रहा है कि जिन्हें जाना है, वे चले जाएं. बचे-खुचे लोगों से वे टीएमसी को पुनर्जीवित कर लेंगी। 

पार्षदों के थोक में इस्तीफे
विधानसभा चुनावों में हार के बाद नगरपालिकाओं में टीएमसी पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया है. आधा दर्जन से अधिक नगरपालिकाओं में थोक के भाव टीएमसी पार्षदों के इस्तीफे हुए हैं. यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. फालता सीट पर आए नतीजे के बाद डायमंड हार्बर में भी पार्षदों के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है. पार्षदों के इस्तीफे की शुरुआत उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा से हुई थी. कुल 35 में 30 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफे सौंप दिए. इसी तरह हालीशहर के 23 पार्षदों में 16 ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. उत्तर बैरकपुर, गारुलिया और डायमंड हार्बर में इस्तीफों का सिलसिला जारी है. कई और नगरपालिकाओं और निगमों में भी टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफे दिए हैं. कोलकाता नगर निगम में भी टीएमसी के पार्षद पाला बदलने को बेताब दिखते हैं.
ममता बनर्जी के खिलाफ बगावती तेवर देखने को मिले। 

कब होगा दल बदल!
रिपोर्ट में कहा गया है कि फिलहाल सांसदों की संख्या को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल, चर्चाएं इस बात को लेकर हैं कि दल बदल कानून से बचने के लिए कितने सांसदों की जरूतर होगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे लेकर मॉनसून सत्र तक स्थिति साफ हो सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि दल बदल के कथित प्रयासों में लगे कई सांसद पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के करीबी हैं।

विधायक बना रहे हैं दूरी
चुनाव में हार के बाद 20 मई को पहली बार टीएमसी ने प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में टीएमसी विधायक शामिल नहीं हुए थे। यह घटनाक्रम पार्टी के आंतरिक विचार-विमर्श के एक दिन बाद सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर जनता से जुड़ने के लिए सड़क पर उतरने की राजनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा हुई थी।

हालांकि, 80 विधायकों में से केवल 35 ही कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे राजनीतिक गलियारों में संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। यह ऐसे समय में हुआ है जब पार्टी चुनावी हार के बाद खुद को फिर से संगठित करने की कोशिश कर रही है।

विपक्ष के नेता पद के लिए पार्टी की पसंद माने जा रहे शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने आंतरिक कलह की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि कई विधायक संगठनात्मक जिम्मेदारियों और अन्य व्यावहारिक कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

एजेंसी वार्ता के अनुसार, फलता में भाजपा की जीत के बाद डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के आठ पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए। डायमंड हार्बर नगर पालिका में टीएमसी के 16 पार्षद थे। इस शहरी स्थानीय निकाय में दूसरी किसी पार्टी का एक भी पार्षद नहीं था। आठ पार्षदों ने सोमवार को अलग-अलग कारणों का हवाला देते हुए अपने इस्तीफे सौंपे हैं।

बैठकों व कार्यक्रमों से दूरी
ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से अब तक जितनी बैठकें की हैं, उनमें पार्टी के सभी विधायक नहीं शामिल हुए. शामिल न होने की कोई वजह बताना भी विधायकों ने मुनासिब नहीं समझा. चूंकि बैठकें टीएमसी चीफ ममता ने बुलाई थीं, इसलिए सबकी उपस्थिति जरूरी थी. खासकर तब, जब पार्टी के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा हो गया है. टीएमसी के सांसद भी ममता से दूरी बनाने लगे हैं. चुनाव परिणाम आने के बाद ममता की बुलाई पहली ही बैठक से 10-12 नवनिर्वाचित विधायक नदारद रहे. विरोध प्रदर्शनों में सभी विधायकों की भागीदारी ममता बनर्जी सुनिश्चित नहीं कर पाईं। 

अभिषेक के नेतृत्व पर प्रश्न
इतना ही नहीं, अब तो ममता बनर्जी और उनके भतीजे सांसद अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर भी सांसद-विधायक खुल कर सवाल उठाने लगे हैं. टीएमसी के सामने 2021 के बाद यह दूसरा बड़ा संकट है. कालीघाट में हुई समीक्षा बैठकों में कुणाल घोष, रितुव्रत बनर्जी जैसे वरिष्ठ विधायकों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के फैसलों पर सीधे सवाल उठाए. विधायकों का मानना है कि बंद कमरों में रणनीति बनाने से पार्टी फिर से मजबूत नहीं होगी. इसके लिए कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना होगा. बागी नेताओं का आरोप है कि बंद कमरे में आलाकमान द्वारा लिए गए फैसले जबरदस्ती नेताओं पर थोपे गए, जिससे जमीनी स्तर के नेताओं और पार्षदों ने पार्टी से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। 

MP काकोली के तल्ख तेवर
टीएमसी के संकट को इससे भी समझा जा सकता है. ममता ने 4 बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार से लोकसभा में मुख्य सचेतक का पद छीन कर कल्याण बनर्जी को दे दिया. इससे काकोली की नाराज हुईं. ममता का यह फैसला उन्हें पार्टी के भीतर अपना अपमान लगा. भाजपा ने उनकी नाराजगी को भुना लिया. केंद्र सरकार ने काकोली को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ‘Y’ श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा मुहैया कराई है. इंटेलिजेंस ब्यूरो की थ्रेट असेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर उन्हें यह सुरक्षा दी गई है. सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब टीएमसी के लिए राजनीतिक रणनीति बनाने वाली आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा भी दे दिया है. काकोली की नाराजगी सामान्य बात इसलिए नहीं है कि यह सांसदों में भगदड़ का संकेत हो सकता है. उनकी तरह और भी कई सांसद हैं, जो पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं। 

सांसद-विधायक साथ छोड़ेंगे?
टीएमसी के एक सांसद की बातों पर भरोसा करें तो आने वाले कुछ दिनों में ममता बनर्जी को जोर का झटका लगने वाला है. लोकसभा में टीएमसी के अभी 29 सांसद हैं. लोकसभा में सर्वाधक सांसदों वाली विपक्ष की यह दूसरी पार्टी है. पर, अब यह स्थिति बदलने वाली है. भाजपा से ग्रीन सिग्नल मिला तो झटके में 20-25 लोग पाला बदल सकते हैं. कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और अन्य एक-दो सांसदों को छोड़ कर बाकी को साथ लेने के लिए भाजपा तैयार है. चर्चा है कि अगले ही महीने भाजपा इसे मूर्त रूप दे सकती है. लोकसभा में अभी भाजपा के 240 सांसद हैं. बहुमत का आंकड़ा 272 का है. अगर टीएमसी के सांसद टूट कर भाजपा के साथ जाते हैं तो भाजपा सांसदों की लोकसभा में संख्या बहमत के आंकड़े के करीब हो सकती है. अभी केंद्र में भाजपा के ही नेतृत्व में सरकार है, लेकिन अकेले बहुमत न रहने के कारण उसे एनडीए के साथी दलों के सहारे सरकार बनानी पड़ी है। 

सतना में कांग्रेस का दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर प्रारंभ

बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाने, नेतृत्व विकास और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पदाधिकारियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

सतना। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत, सक्रिय एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सतना एवं मैहर जिले के ब्लॉक अध्यक्षों, नगर अध्यक्षों तथा मंडलम अध्यक्षों के लिए दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का शुभारंभ सतना में किया गया। प्रशिक्षण शिविर में संगठन सशक्तिकरण, जनसरोकारों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने तथा आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करने पर विशेष चर्चा की गई।

प्रशिक्षण शिविर के प्रथम दिवस मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की भूमिका तथा जनता के बीच कांग्रेस की विचारधारा को प्रभावी रूप से पहुंचाने पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण अभियान मध्यप्रदेश में कांग्रेस संगठन को नई ऊर्जा, नई दिशा और मजबूत आधार प्रदान करेगा तथा भविष्य में एक सशक्त, संगठित और जनहित के लिए संघर्ष करने वाली कांग्रेस के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

पूर्व मंत्री एवं विधायक राजेंद्र सिंह ने अपने संगठनात्मक अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर पर जनसंपर्क बढ़ाने और बूथ स्तर तक कांग्रेस की सक्रियता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

इस अवसर पर संगठन प्रभारी डॉ. संजय कामले, राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी, मतदाता सूची पुनरीक्षण विभाग के प्रभारी ललित सेन तथा मीडिया विभाग के प्रवक्ता आनंद जाट ने विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण सत्रों को संबोधित किया। वक्ताओं ने संगठन विस्तार, मतदाता सूची पुनरीक्षण, प्रभावी संवाद, मीडिया प्रबंधन तथा बूथ स्तर पर कांग्रेस की गतिविधियों को मजबूत करने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।

मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रशिक्षण प्रभारी महेंद्र जोशी ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी पदाधिकारियों को संबोधित करेंगे तथा संगठन को और अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनाने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

प्रशिक्षण शिविर में सतना ग्रामीण कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा, मैहर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष धर्मेश घई, सतना शहर कांग्रेस अध्यक्ष आरिफ इकबाल सिद्दीकी सहित सतना एवं मैहर जिले के सभी ब्लॉक अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष एवं मंडलम अध्यक्ष उपस्थित रहे।

दो दिवसीय यह प्रशिक्षण शिविर संगठनात्मक क्षमता विकास, नेतृत्व निर्माण, बूथ सशक्तिकरण तथा कांग्रेस की नीतियों और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। कांग्रेस नेतृत्व ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूती मिलेगी तथा कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी।

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