लाड़ली बहना योजना की 37वीं किश्त जारी, CM मोहन यादव ने बहनों के खातों में भेजे 1500 रुपए

सागर.

मध्य प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए रविवार का दिन बड़ी सौगात लेकर आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले की देवरी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले केसली क्षेत्र से प्रदेश की लाडली बहनों के खातों में योजना की 37वीं किस्त की राशि सफलता पूर्वक ट्रांसफर कर दी।

इस बार सरकार ने हर पात्र महिला के खाते में 1500-1500 रुपये की राशि भेजी है। इस सिंगल क्लिक ट्रांसफर के जरिए प्रदेश की लगभग 1.25 करोड़ महिलाओं के खातों में कुल 1,835 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि पहुंचाई गई। इस मुख्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल बहनों को आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी रफ्तार दी। सीएम डॉ. यादव ने केसली में 190.85 करोड़ रुपये की लागत वाले कुल 53 विकास कार्यों की आधारशिला रखी और उद्घाटन किया। इसमें 28 नए कार्यों का भूमिपूजन तथा 25 पूर्ण हो चुके कार्यों का लोकार्पण शामिल है।

घर बैठे ऐसे जांचें अपनी भुगतान की स्थिति
यदि आप लाडली बहना योजना के लाभार्थी हैं और यह चेक करना चाहते हैं कि आपके खाते में राशि पहुंची है या नहीं, तो आप इसकी ऑनलाइन जांच बेहद आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाएं। होमपेज पर दिए गए ‘आवेदन एवं भुगतान की स्थिति’ वाले विकल्प को चुनें। इसके बाद मांगी गई जगह पर अपनी समग्र आईडी अथवा रजिस्ट्रेशन संख्या दर्ज करें। अब आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी (OTP) आएगा, जिसे दर्ज करके वेरिफाई करते ही आपके स्क्रीन पर भुगतान का पूरा विवरण आ जाएगा।

अंतिम सूची में अपना नाम देखने का तरीका
अगर आप यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि आपका नाम लाभार्थियों की सूची में बरकरार है या नहीं, तो इसके लिए भी पोर्टल पर व्यवस्था की गई है। आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘अंतिम सूची’ के विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद अपना मोबाइल नंबर और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड दर्ज करें। ‘ओटीपी प्राप्त करें’ पर क्लिक करने के बाद मोबाइल पर आए वन-टाइम पासवर्ड को भरें। इसे सबमिट करते ही आपके सामने पूरी सूची आ जाएगी, जिसमें आप अपना नाम देख सकती हैं।

नए रजिस्ट्रेशनों को लेकर क्या है स्थिति?
लाडली बहना योजना के तहत नए आवेदन फॉर्म भरने का इंतजार कर रही महिलाओं को फिलहाल अभी और प्रतीक्षा करनी होगी। साल 2023 के बाद से ही योजना के नए रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से बंद हैं। हालांकि सरकार ने समय-समय पर आर्थिक सहायता राशि में बढ़ोतरी जरूर की है, लेकिन इस बार सागर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भी नए फॉर्म भरे जाने को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में नई पात्र महिलाओं को अगली घोषणा तक थोड़ा और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

राशि अंतरण एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन
केसली, जिला सागर में लाड़ली बहना योजना अंतर्गत आयोजित लाड़ली बहनों के खाते में राशि अंतरण एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन व लोकार्पण कार्यक्रम में सहभागिता
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 14, 2026

MP में PUC सर्टिफिकेट के नियम सख्त, अब OTP वेरिफिकेशन के बिना नहीं बनेगा प्रमाणपत्र

भोपाल.

मध्यप्रदेश में अब पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी सत्यापन अनिवार्य (OTP Verification) कर दिया गया है। भोपाल सहित पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिना ओटीपी सत्यापन के किसी भी वाहन का पीयूसी प्रमाण पत्र (PUC Certificate) जारी नहीं किया जाएगा।

नई प्रणाली लागू होने से उन वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ सकती है, जिनके वाहन रिकॉर्ड में पुराना, गलत या बंद मोबाइल नंबर दर्ज है। ऐसे वाहन मालिकों को पहले परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर अपडेट कराना होगा।

केंद्र सरकार के निर्देश पर लागू हुई व्यवस्था
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) ने यह नई व्यवस्था लागू की है। डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर किरण शर्मा के अनुसार, जैसे ही किसी पीयूसी केंद्र पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज किया जाएगा, सिस्टम वाहन डेटाबेस से वाहन मालिक का मोबाइल नंबर प्राप्त करेगा। इसके बाद उसी नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। वाहन प्रदूषण जांच में पास होने के बाद ओटीपी सत्यापन पूरा होने पर ही पीयूसी प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा।

फर्जी पीयूसी पर लगेगी रोक
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर का उपयोग कर कई वाहनों के पीयूसी सर्टिफिकेट बनाए जा रहे थे। वास्तविक वाहन मालिक की पहचान और मोबाइल सत्यापन नहीं होने के कारण रिकॉर्ड की शुद्धता पर सवाल उठते थे। नई व्यवस्था में वाहन के पंजीयन रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर पर ही ओटीपी जाएगा। इससे गलत जानकारी देकर या किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पीयूसी बनवाना आसान नहीं होगा।

वाहन मालिकों के लिए क्या बदलेगा?

  • पीयूसी बनवाने के लिए मोबाइल ओटीपी अनिवार्य होगा।
  • वाहन रिकॉर्ड में सही मोबाइल नंबर दर्ज होना जरूरी रहेगा।
  • ओटीपी सत्यापन नहीं होने पर सर्टिफिकेट जारी नहीं होगा।
  • गलत या पुराना नंबर होने पर रिकॉर्ड अपडेट कराना पड़ेगा।
  • भविष्य में पीयूसी एक्सपायर होने से पहले मोबाइल अलर्ट मिलेगा।
  • फर्जी जानकारी के आधार पर पीयूसी बनवाने पर रोक लगेगी।

भोपाल में रोज 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट
भोपाल आरटीओ डॉ. जितेंद्र शर्मा के अनुसार, राजधानी में लगभग 60 पीयूसी केंद्र संचालित हो रहे हैं। यहां प्रतिदिन करीब 2500 पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। पूरे मध्यप्रदेश में 550 से 600 पीयूसी केंद्रों के माध्यम से रोजाना 22 हजार से 25 हजार तक पीयूसी प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। प्रदेश में कुल वाहनों की संख्या लगभग 2.5 करोड़ बताई जा रही है, जबकि भोपाल में 20 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं।

वाहन मालिकों को मिलेगा एक्सपायरी अलर्ट
परिवहन विभाग भविष्य में ऐसी व्यवस्था भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत पीयूसी की वैधता समाप्त होने से पहले वाहन मालिकों को मोबाइल संदेश भेजा जाएगा। इससे वाहन मालिक समय रहते सर्टिफिकेट का नवीनीकरण करा सकेंगे और नियम उल्लंघन से बच पाएंगे।

500 कारतूस एक साथ खरीदने पर सख्ती, धोखाधड़ी के बाद जिला प्रशासन ने सीमित किए गन लाइसेंस

भोपाल.

भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया।

दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच हुई, जिसमें 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए।

इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ शुरू करते हुए नियमों के पेंच कस दिए हैं। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, उनके लिए अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब नए नियमों के तहत एक शूटर को एक बार में अधिकतम सिर्फ 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे। अगर किसी खिलाड़ी को इससे ज्यादा की जरूरत होगी, तो उसे खेल संचालक से बाकायदा सत्यापन कराना होगा।

यही नहीं, प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी कैंची चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी केवल दो गन के लाइसेंस रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। प्रशासन अब हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें कानून बदलकर कारतूस के ‘खोखों’ (खाली शेल) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अब शूटर्स को यह भी लिखित में देना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा। 

Ladli Behna Yojana: आज जारी होगी 37वीं किस्त, सागर के केसली से बहनों के खातों में राशि भेजेंगे CM मोहन यादव

भोपाल.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार, 14 जून को सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के केसली से राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 37वीं किस्त (Ladli Behna Yojana 37th Installment) जारी करेंगे।

इस अवसर पर प्रदेश की सवा करोड़ से अधिक पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं।

190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दौरे के दौरान केसली क्षेत्र में 190.85 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात भी देंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

महिलाओं को आर्थिक सहायता का लाभ
लाड़ली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और घरेलू जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकें। 37वीं किस्त के अंतर्गत एक बार फिर 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि प्राप्त होगी।

क्या है लाड़ली बहना योजना?
लाड़ली बहना योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, स्वास्थ्य और पोषण में सुधार के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। योजना का लाभ उन्हीं महिलाओं को मिलता है जो मध्यप्रदेश की स्थानीय निवासी हों। परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। परिवार में कोई सरकारी कर्मचारी नहीं होना चाहिए और पांच एकड़ से अधिक भूमि या चारपहिया वाहन नहीं होना चाहिए। विवाहित, विधवा और तलाकशुदा महिलाएं, जिनकी आयु 21 से 60 वर्ष के बीच है, योजना के लिए पात्र हैं।

ऐसे चेक करें किस्त का स्टेटस
लाड़ली बहना योजना की किस्त का स्टेटस चेक करने के लिए महिलाएं आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाकर “आवेदन व भुगतान की स्थिति” विकल्प पर क्लिक कर सकती हैं। इसके बाद समग्र आईडी या रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करना होगा। ओटीपी सत्यापन के बाद भुगतान की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।

बॉक्सिंग वर्ल्ड कप के लिए मध्यप्रदेश की मुक्केबाज माही लामा का भारतीय टीम में चयन

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य बॉक्सिंग अकादमी, भोपाल की प्रतिभावान मुक्केबाज माही लामा का चयन चीन में आयोजित होने वाले World Cup of Boxing 2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। माही लामा 60 किलोग्राम भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता 15 से 20 जून 2026 तक चीन में आयोजित की जाएगी, जिसके लिए भारतीय दल आज रात चीन के लिए रवाना होगा।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की मजबूत उपस्थिति

माही लामा का भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं के निरंतर उभरते स्तर और राज्य बॉक्सिंग अकादमी में उपलब्ध कराए जा रहे उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का प्रमाण है। विश्व स्तरीय इस प्रतियोगिता में उनकी सहभागिता प्रदेश के लिए गौरव का विषय है तथा यह राज्य में विकसित हो रही उत्कृष्ट खेल संस्कृति को भी दर्शाता है।

कठोर परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन का परिणाम

माही लामा ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी पहचान बनाई है। उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्हें भारतीय टीम में स्थान प्राप्त हुआ है। अब वे विश्व कप जैसे प्रतिष्ठित मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा और कौशल का प्रदर्शन करेंगी।

प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत

माही लामा की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प, नियमित अभ्यास और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा जा सकता है। उनकी उपलब्धि प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं के उत्साह को और अधिक प्रोत्साहित करेगी।

खेल मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने माही लामा को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माही लामा चीन में आयोजित बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को करेंगे उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि, भू-आवंटन पत्र और हितलाभ का वितरण

“समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश” कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में

भोपाल 

प्रदेश में उद्यमिता को नई दिशा देने के साथ रोजगार सृजन को गति प्रदान कर “विकसित मध्यप्रदेश” बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए रविवार 14 जून को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में वृहद कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विभिन्न जिलों के एमएसएमई उद्यमियों, स्टार्ट-अप्स तथा अन्य योजनाओं के हितग्राहियों को सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का वितरण करेंगे। इस दौरान उद्यमियों को भू-आवंटन पत्र, स्टार्टअप नीति अंतर्गत स्वीकृत विभिन्न लाभ और मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत युवाओं को हितलाभ भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य कुमार काश्यप भी उपस्थित रहेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए एमएसएमई उद्यमियों एवं स्टार्टअप प्रतिनिधियों से सीधा संवाद भी करेंगे। संवाद के माध्यम से उद्यमी अपने अनुभव साझा करेंगे तथा राज्य सरकार द्वारा लागू की गई नीतियों और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। साथ ही वे उद्यमिता को और अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव और अपेक्षाएं भी प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम में सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चेतन्य काश्यप विशेष रूप से विभाग द्वारा प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देंगे। प्रमुख सचिव एमएसएमई राघवेंद्र सिंह द्वारा विभाग की प्रमुख उपलब्धियों, योजनाओं एवं भावी कार्ययोजना का उल्लेख किया जाएगा।

कार्यक्रम की थीम समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश” रखी गई है। सूक्ष्म लघु,उद्यम विभाग कार्यक्रम में प्रदेश में औद्योगिक निवेश, उद्यमिता संवर्धन और रोजगार सृजन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को प्रदर्शित करेगा। यह कार्यक्रम प्रदेश के एमएसएमई क्षेत्र, स्टार्टअप पारिस्थितिकी और नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को नई ऊर्जा प्रदान करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई क्षेत्र को आर्थिक विकास का प्रमुख आधार मानते हुए निरंतर ऐसी नीतियां और व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिले और युवाओं में स्वरोजगार की भावना विकसित हो तथा नवाचार को प्रोत्साहन प्राप्त हो। राज्य की नई औद्योगिक एवं निवेशोन्मुखी नीतियों के परिणामस्वरूप प्रदेश में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। इससे बड़ी संख्या में युवाओं, महिलाओं और प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को उद्यम स्थापना के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

संवाद से प्राप्त सुझाव प्रदेश की औद्योगिक एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में उपयोगी सिद्ध होंगे।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थानों के पदाधिकारी, निवेशक, स्टार्टअप संस्थापक, युवा उद्यमी तथा प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए हितग्राही बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन केवल हितलाभ वितरण तक सीमित न रहकर उद्यमिता को जन-आंदोलन का स्वरूप देने, नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर एवं विकसित मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में सामूहिक संकल्प का अवसर भी बनेगा।

मध्यप्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल उद्योगों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें रोजगार मांगने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनाना तथा नवाचार, कौशल और उद्यमिता के माध्यम से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। “समृद्ध एमएसएमई–विकसित मध्यप्रदेश” कार्यक्रम इसी व्यापक सोच और दूरदृष्टि को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

 

भारतीय क्रिकेट टीम में चुने गए लोकेंद्र आर्य, कभी गांव वाले कहते थे- ‘लंगड़ा बेटा किसी काम का नहीं’

बड़वानी
‘गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते।’
यह कहना है बाएं पैर से दिव्यांग लोकेंद्र आर्य का। उनका सिलेक्शन दिव्यांग क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ऑफ इंडिया (DCCBI) की इंडिया-ए टीम में हुआ है। वह 13 से 15 जून तक हरियाणा के यमुनानगर में होने वाले केसरी दिव्यांग टूर्नामेंट-2026 में इंडिया-ए की ओर से मैदान में उतरेंगे।

सिलेक्शन के बाद लोग बधाई देने घर आ रहे हैं। मिठाई खिला कर फूल माला पहनाकर स्वागत कर रहे हैं। पिता रूमा आर्य पेशे से किसान हैं। बड़वानी जिले में सेंधवा के मोरदड़ गांव पहुंची। यहां लोकेंद्र और पिता से बात करके उनका सफर जानने की कोशिश की।

क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे लोग
यहां टीले पर बने कच्चे मकान के सामने बड़ा सा शामियाना लगा है। चारपाई के साथ 20-25 कुर्सियां रखी हैं। घर के बाहर फूलों की मालाएं और गुलदस्ते लिए किसी का इंतजार कर रहे हैं।

इतने में घर के अंदर से एक 27 साल का युवक एक पैर से लंगड़ाते हुए बाहर आया। माला और गुलदस्ता लिए खड़े लोग उसे एक-एक कर माला पहनाते और फोटो खिंचवाने लगता है। ये वही लोग हैं, जो इसे कभी लंगड़ा कहकर चिढ़ाते थे। उसके पिता से कहते- ऐसा बेटा पैदा किया है, किसी काम का नहीं है। ये क्या करेगा।

दाएं हाथ के बल्लेबाज लोकेंद्र वर्तमान में दिव्यांग क्रिकेट एसोसिएशन मध्यप्रदेश की सतपुड़ा डिवीजन (ग्रामीण) टीम के कप्तान हैं। बचपन में लोगों ने उनके पैरों की कमजोरी को लेकर ताने दिए थे। क्रिकेट खेलने पर हंसी उड़ाते थे, लेकिन उन्होंने इन बातों को अपनी ताकत बनाया।

लोग बोलते- हमारे बच्चों को बिगाड़ देगा
लोकेंद्र कहते हैं कि इस मुकाम पर पहुंचने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं सुना और सहा है, ये मैं ही जानता हूं। लोगों के तानों से परेशान होकर पिताजी बचपन में ही विकलांग आश्रम में छोड़ आए थे। वे भी क्या करते, ताने और घर के हालत ऐसे नहीं थे कि मेरी इलाज और पढ़ाई के साथ देखभाल कर पाते। सोचता था कि जिंदगी ऐसे ही कट जाएगी।

क्रिकेट खेलने का शौक, तो तीन-चार साल की उम्र से ही था। खड़ा तो ठीक से हो नहीं पाता था, लेकिन प्लास्टिक का बैट जरूर अपने पास ही रखता था। थोड़ा बड़ा हुआ, तो लकड़ी के पल्ले को बैट बना लिया। अपने गांव के हम उम्र बच्चों के साथ खेलना शुरू कर दिया। तब गांव वाले पिताजी से कहते कि तेरा ये लंगड़ा लड़का खुद तो किसी काम का नहीं है, हमारे बच्चों को भी बिगाड़ रहा है। पिताजी भी मुझे डांटते, घर से बाहर जाने के लिए मना करते। छोटा था, इसलिए कुछ समझ नहीं पाता था।

आश्रम से मिली नई राह और जिंदगी
विकलांग सेवा आश्रम में शुरुआती दिन मुश्किल से कटे। हर पल मां की याद आती थी। सोचता था, मेरा पैर ऐसा क्यों है? क्यों मैं अपने दोनों छोटे भाइयों की तरह अपने घर में रह सकता। आश्रम पहुंचा, तो वहां सीनियर्स को क्रिकेट खेलते देखा। मन को तसल्ली हुई। धीरे-धीरे अपने दोस्तों के साथ मैं भी क्रिकेट खेलने लगा। वहां जो हमारे वार्डन थे, वो हमेशा मोटिवेट करते। जितनी पढ़ाई करना हो करो, जितना खेलना हो खेलो।

कबीर के दोहे ने दी प्रेरणा
आश्रम में हम लोग प्रार्थना भी करते थे। कबीर ग्रंथावली का एक दोहा है- मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीत। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥ पहले तो इस दोहे को ऐसे ही दोहरा लेते थे। लेकिन, जब इसका अर्थ समझ आया, तो अमल करना शुरू कर दिया। सोच लिया कि अब किसी भी हालत और कीमत में अपने आपको और अपने मन को कभी हारने नहीं देना है।

लोकेंद्र कहते हैं कि 2021 में विश्व दिव्यांग दिवस पर दिव्यांग क्रिकेटर टीम के कप्तान ब्रजेश द्विवेदी के बारे में पता चला। उनके बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला वे IIT इंदौर में नौकरी करते हैं। दो-तीन दिन बाद उनसे मिलने IIT इंदौर पहुंच गया। उन्हें क्रिकेट को लेकर अपने जुनून के बारे में बताया। उन्होंने मेरा ट्रायल कराया। इसके कुछ महीने बाद ही खास तौर से हमारे लिए सतपुड़ा डिवीजन के नाम से टीम बन गई।

चंदे से खरीदी पहली किट
शुरुआत में लेदर बॉल से खेलने के दिक्कत हुई। किट भी नहीं थी। दोस्तों ने चंदा जमा कर किट की व्यवस्था की। शुरुआत में सेंधवा के किला परिसर स्थित मंडी में डामर सड़क पर खेले। इसके बाद निवाली के खेल परिसर में प्रैक्टिस करना शुरू किया। आज भी यहां से हर शनिवार रविवार को सेंधवा से 20 किमी दूर निवाली मैच खेलने जाते हैं। तीन साल पहले मेरी शादी हुई। आईटीआई करने के बाद बीए कर रहा हूं।

बेटी को खेलते देख मिलता है सुकून
तीन साल पहले 22 मार्च 2023 को टिकेश्वरी से शादी हुई। एक बेटी है। जब बेटी होने वाली थी, उस समय मन में डर था। लगता था कि कहीं बच्चा भी मेरी तरह तो नहीं होगा। ऐसे में पत्नी का समय समय डॉक्टरों से उपचार ओर जांच करवाते रहे। खुशी होती है, जब अपनी बेटी को सभी बच्चों के साथ अच्छे से खेलता देखता हूं।

महाकाल मंदिर में लाइट एंड साउंड शो के लिए ₹100 शुल्क, दर्शन-आरती समेत श्रद्धालुओं का खर्च ₹1050 तक पहुंच सकता है

उज्जैन 

बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की जेब पर और बोझ बढ़ने वाला है। महाकाल मंदिर परिसर में चलने वाले प्रसिद्ध लाइट एंड साउंड शो को देखने के लिए अब श्रद्धालुओं को 100 रुपए प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा।गौरतलब है कि करीब 7 महीने तक मुफ्त संचालन के बाद अब इस शो को पेड किया गया है।

18 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है शो
इस शो का लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 अक्टूबर 2025 को दीपावली के अवसर पर किया था। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने इसे करीब 18 करोड़ 7 लाख रुपए की लागत से तैयार किया है।

करीब 25 मिनट के इस शो में वॉटर स्क्रीन, फाउंटेन, लेजर लाइट और बेहतरीन साउंड इफेक्ट्स के जरिए भगवान महाकाल, मां क्षिप्रा और प्राचीन अवंतिका नगरी (उज्जैन) की गौरव गाथा दिखाई जाती है।

शुल्क लगाने के पीछे मंदिर समिति का तर्क
मंदिर प्रशासन का कहना है कि इस भव्य शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब 1.5 लाख रुपए का खर्च आ रहा है। मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इसी खर्च को पूरा करने और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए 100 रुपए का एंट्री शुल्क रखने का फैसला लिया गया है।

हर माह 15 लाख रुपए कमाई का अनुमान
कमाई के लिहाज से देखें तो मंदिर समिति को इस फैसले से अच्छी आय होने की संभावना है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, रोजाना करीब 500 श्रद्धालु लाइट एंड साउंड शो देखने पहुंच रहे हैं। यदि प्रत्येक श्रद्धालु से 100 रुपए शुल्क लिया जाता है तो समिति को प्रतिदिन लगभग 50 हजार रुपए की आय होगी।

इस हिसाब से एक महीने में करीब 15 लाख और सालभर में लगभग 1.8 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है, जबकि शो के संचालन और रखरखाव पर हर महीने करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में यह व्यवस्था मंदिर समिति के लिए आय का एक नया स्रोत भी बन सकती है।

संध्या और शयन आरती के लिए भी लेते हैं 250 रुपए
यह पहली बार नहीं है जब महाकाल मंदिर में किसी सुविधा के लिए शुल्क बढ़ाया या लगाया गया हो। इससे पहले भी कई बदलाव हुए हैं। 19 फरवरी 2026 से संध्या आरती और शयन आरती के लिए भी 250 रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क लिया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह फ्री थी। वीआईपी या शीघ्र दर्शन के लिए पहले से ही शुल्क लिया जा रहा है।

श्रद्धालु बोले- बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ
महाकाल मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भस्म आरती में ही रोजाना करीब 1700 श्रद्धालुओं को ऑनलाइन प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में लाइट एंड साउंड शो पर शुल्क लगने के बाद मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का खर्च बढ़ जाएगा।

जहां एक तरफ मंदिर प्रशासन इसे मेंटेनेंस के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं श्रद्धालुओं के एक वर्ग का कहना है कि धार्मिक परिसर में होने वाले इस शो को पहले की तरह ही मुफ्त रखा जाना चाहिए था, क्योंकि आरती और शो के शुल्कों से आम भक्तों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

पटवारी संविलयन नीति 2026 जारी: गृह तहसील में पोस्टिंग पर रोक, नई सीनियरिटी व्यवस्था लागू

भोपाल 

राजस्व विभाग मध्य प्रदेश ने तबादलों की अवधि (15 जून) समाप्त होने से तीन दिन पहले पटवारियों के संविलयन की नई नीति 2026 जारी कर दी है। नई नीति में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पटवारी की पदस्थापना उसकी गृह तहसील में नहीं की जाएगी। साथ ही नए जिले में पदस्थ होने के बाद वरिष्ठता वहीं की सीनियरिटी सूची के आधार पर तय होगी।

नीति के अनुसार पटवारी का पद जिला संवर्ग का होने के कारण अलग से संविलयन नीति लागू की गई है। इसमें कहा गया है कि पटवारी परीक्षा 2022 का परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए पटवारी ही अंतर जिला संविलयन के पात्र होंगे। हालांकि वर्ष 2022 की परीक्षा पास कर नियुक्त हुए पटवारियों को कुछ विशेष परिस्थितियों में संविलयन का लाभ मिलेगा।

इन शर्तों के साथ पात्र होंगे 2022 की परीक्षा पास करने वाले पटवारी
    वर्ष 2022 की पटवारी परीक्षा में पास होने वाले पटवारी केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन कर सकेंगे।

    अगर पटवारी पति या पत्नी शासकीय कर्मचारी हैं उनकी एक ही जिले की पदस्थापना की जरूरत है तो संबंधित जिले में पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में मौका दिया जाएगा।

    विवाहित महिला, विधवा, तलाकशुदा, परित्यकता महिला पटवारी होने पर या पटवारी को गंभीर बीमारियां जैसे कैंसर, किडनी, डायलिसिस, ओपन हार्ट सर्जरी से ग्रस्त होने पर पटवारी का पद रिक्त होने की स्थिति में तबादले का अधिकार रहेगा।

    आपसी आधार पर संविलियन के मामलों में भी जो आवेदन मिलेंगे उसमें भी तबादला हो सकेगा।

प्रोबेशन संबंधी कार्यवाही नए जिले में होगी
संविलियन नीति में यह भी कहा गया है कि जिन पटवारी का संविलियन होता है उनकी परिवीक्षा अवधि समाप्ति संबंधी कार्यवाही नए जिले में की जाएगी। इस संबंध में सभी विभागीय शर्तों का पालन पूर्व जिले की भांति नए जिले में पटवारी को करना होगा। पटवारी के संविलयन उपरांत पटवारी की व्यक्तिगत नस्ती एवं जांच, दंड और विशेष दायित्व आदि के संबंध में सभी जानकारी पुराने जिले द्वारा नए जिले को दी जाएगी। पटवारी के संविलयन की संख्या का निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति के आधार पर होगा।

ऐसे होंगे पटवारी तबादले के लिए आवेदन
    आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे।
    ऑनलाइन आवेदन में अपनी विशिष्ट श्रेणी जैसे चयन का वर्ग सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस, एससी, एसटी और ओपन वर्ग, ओपन महिला, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांग की स्थिति की जानकारी देनी होगी। ऑनलाइन आवेदन के साथ कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    पटवारी जिनके खिलाफ लोकायुक्त या अन्य किसी मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज है वह अपात्रता की श्रेणी में आएंगे।

    संविलयन संबंधी आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन मध्य प्रदेश द्वारा जारी किए जाएंगे।

पद रिक्त हुए तो ही संविलयन किया जाएगा
पटवारी के संविलयन में यह भी कहा गया है कि जिस जिले में संविलयन चाहा गया है उस जिले में संबंधित वर्ग के रिक्त पद उपलब्ध होने की स्थिति में ही संविलयन किया जाएगा।

आरक्षण के प्रावधानों एवं जिला आरक्षण रोस्टर के परिपालन में ही संविलियन किया जाएगा। जिले के अंदर पदस्थापना कलेक्टर द्वारा की जाएगी किंतु किसी भी पटवारी को उसके गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा।

आदेश जारी होने के 15 दिन के भीतर पटवारी को संविलयन किए गए जिले में उपस्थिति देनी होगी।

आरक्षण नियमों के विपरीत नहीं होगी पोस्टिंग
इसमें यह भी शर्त तय की गई है कि संविलयन पर एक बार जिला आवंटित हो जाने पर दोबारा जिला परिवर्तन की पात्रता नहीं रहेगी। प्रशासनिक दृष्टि से किए गए संविलयन में ही पटवारी द्वारा नए जिले में पदभार ग्रहण करने पर उसे जिले की संधारित सूची से पटवारी की वरिष्ठता की गणना कर वरीयता तय की जाएगी। पटवारी को एक बार जिला आवंटित होने पर उसे जिले में अनिवार्य उपस्थिति देनी होगी। जिले में आरक्षित पदों से अधिक एवं आरक्षण नियमों के विपरीत पद स्थापना नहीं की जाएगी।

सिंहस्थ 2028 होगा हाईटेक: AI बताएगा कब आएगा आंधी-तूफान, करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा योजना

उज्जैन
 सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2028 की तैयारियां जोरो पर हैं. वर्ष 2016 सिंहस्थ के दौरान आए भीषण आंधी तूफान और प्राकृतिक आपदा की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र से सांसद अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग उठाई है. सांसद अनिल फ़िरोजिया ने चर्चा में कहा, ”मैंने मौसम विभाग दिल्ली मुख्यालय को एक लेटर लिखा है। 

2016 में आई थी प्राकृतिक आपदा
अनिल फिरोजिया ने लिखा, ”सभी के संज्ञान में है कि, पिछली बार सिंहस्थ महापर्व वर्ष 2016 के दौरान उज्जैन में प्राकृतिक आपदा आई थी और कई टिन शेड, पेड़ धराशाई हो गए थे. लोग घायल भी हुए थे, जिससे प्रशासन और श्रद्धालु दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. आने वाला समय 2028 में सिंहस्थ का है, और हम चाहते हैं कि उस वक़्त ऐसी परिस्थितियां नहीं बने। 

अनिल फिरोजिया ने मौसम पूर्वानुमान व्यवस्था की उठाई मांग
सांसद ने कहा, ”सिंहस्थ महापर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग को पत्र लिखते हुए संज्ञान में लाया कि, उज्जैन में अत्याधुनिक मौसम पूर्वानुमान उपकरण की अभी कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. आधुनिक यंत्र लगाए जाएं ताकि पूर्वानुमान लग जाए मौसम की क्या स्थिति रहेगी. जिससे प्रशासन पहले से सतर्क हो जाए और उससे निपटने की तैयारी कर सके. देश विदेश से आने वाले लाखों करोड़ों दर्शनार्थियों को सुरक्षित किया जा सके. वर्ष 2028 में दर्शनार्थियों की संख्या पिछली बार से 3 गुना अधिक होने की संभावना है. ऐसे में मौसम संबंधी सटीक और समय पर पूर्वानुमान उपलब्ध होना बेहद आवश्यक है। 

सिंहस्थ 2016 बनाम 2028 मौसम प्रबंधन और व्यवस्थाओं में क्या होगा अंतर
मौसम विशेषज्ञ बताते हैं, यदि केंद्र और राज्य समय पर स्वीकृति देता है तो वर्ष 2028 तक उज्जैन में कई तरह से व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। 

पहला रियल टाइम वेदर स्टेशन– सिंहस्थ क्षेत्र में कई स्वचलित मौसम केंद्र लगाए जाते हैं, जो हर कुछ मिनट में हवा की गति, तापमान, नमी और वर्षा की जानकारी दें। 

दूसरा डॉप्लर रडार कवरेज– इंदौर उज्जैन क्षेत्र के लिए उन्नत रडार कवरेज मिलने पर 30 मिनट से 3 घण्टे तक आंधी और तूफान की चेतावनी संभव हो सकेगी। 

तीसरा AI आधारित पूर्वानुमान- वर्ष 2028 तक AI आधारित मौसम पूर्वानुमान से स्थानीय स्तर पर बेहतर सटीक चेतावनियां जारी की जा सकती हैं। 

चौथा श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट सिस्टम- मोबाइल संदेश, एलईडी स्क्रीन, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से तत्काल चेतावनी, पांचवा मजबूत अस्थाई ढांचे 2016 के अनुभव के बाद टेंट, शेड, विद्युत पोल और घाट क्षेत्र की संरचनाओं को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu