खरगोन की पहली महिला DIG बनीं सिमाला प्रसाद, पदभार संभालते ही अवैध हथियार और गांजा खेती पर सख्ती के संकेत

खरगोन

खरगोन में निमाड़ रेंज की पहली महिला डीआईजी सिमाला प्रसाद ने शुक्रवार को अपना पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर एसपी रवींद्र वर्मा और एएसपी बिट्टू सहगल ने उनका स्वागत किया। पदभार संभालने के बाद डीआईजी प्रसाद ने स्टाफ से शिष्टाचार भेंट की। 

डीआईजी सिमाला प्रसाद ने कहा कि निमाड़ के चारों जिलों – खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी में मजबूत कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने जनता को बेहतर पुलिसिंग प्रदान करने और लंबित मामलों के अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने पर जोर दिया।

अवैध काम करने वालों को डेटाबेस बनेगा उन्होंने अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की बात कही। डीआईजी ने विशेष रूप से अवैध देशी कट्टों और गांजे की खेती को पूरी तरह से खत्म करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने बताया कि इस दिशा में पहले भी कार्रवाई हुई है और यह आगे भी जारी रहेगी।

सिमाला प्रसाद ने कहा कि अब इंटीग्रेटेड कंबाइंड एफर्ट के साथ लगातार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि निमाड़ के तीन जिलों में अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों का डेटाबेस तैयार कर उनके पुनर्वास का प्रयास किया जाएगा, ताकि उन्हें अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि इस दिशा में पहले भी काम हुआ है, लेकिन अब और अधिक प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।

 

50 वर्षों से प्रदेश की धड़कन: समय को मात देने वाला सारंगपुर का स्वदेशी पॉवर ट्रांसफार्मर

50 वर्षों से प्रदेश की धड़कन: समय को मात देने वाला सारंगपुर का स्वदेशी पॉवर ट्रांसफार्मर

भोपाल

मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के राजगढ़ जिले के सारंगपुर स्थि‍त सब-स्टेशन में भारत की सरकारी कंपनी एनजीईएफ (न्यू गवर्नमेंट इलेक्ट्रिक फैक्‍ट्री) द्वारा 1976 का निर्मित 20 एमवीए क्षमता का एक पावर ट्रांसफार्मर आज केवल विद्युत उपकरण नहीं, बल्कि मालवा क्षेत्र के विकास, तकनीकी उत्कृष्टता और समर्पित रखरखाव की एक जीवंत मिसाल बन चुका है। वर्ष 1976 में पहली बार ऊर्जीकृत हुआ यह ट्रांसफार्मर पिछले 50 वर्षों से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को निरंतर और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति कर रहा है।

आधी शताब्दी की अपनी गौरवशाली यात्रा में इस ट्रांसफार्मर ने मौसम, तकनीक, विभिन्न क्षेत्र और विद्युत तंत्र के अनेक बदलाव देखे हैं, लेकिन सत्तर के दशक में निर्मित इसकी उच्च गुणवत्ता और मजबूत अभिकल्पना के कारण इसकी कार्यक्षमता एवं विश्वसनीयता आज भी उल्लेखनीय बनी हुई है। यह उस दौर का साक्षी है जब मालवा क्षेत्र औद्योगिक विकास की गति तेज हो रही है, यह आज भी उसी निष्ठा के साथ विकास की ऊर्जा का आधार बना हुआ है।

संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग का प्रेरक उदाहरण

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि आज जब ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग में आने वाले उपकरणों और तेजी से बदलती तकनीकों के बीच संसाधनों के अधिकतम उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है, तब सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आता है। यह केवल लोहे, तांबे और तेल से निर्मित मशीन नहीं, बल्कि उन हजारों अभियंताओं, तकनीशियनों और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता का प्रतीक है जिन्होंने पांच दशकों तक इसकी कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को बनाए रखा।

निर्धारित आयु से दोगुनी सेवा दे रहा है ट्रांसफार्मर

विद्युत क्षेत्र के मानकों के अनुसार किसी पॉवर ट्रांसफार्मर की सामान्य उपयोगी आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है। इसके विपरीत सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर अपनी निर्धारित आयु से दोगुना अर्थात 50 वर्षों तक सफलतापूर्वक सेवा प्रदान कर रहा है, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय तकनीकी उपलब्धि है।

सरकारी क्षेत्र का प्रतिष्ठित उपक्रम था एनजीईएफ

इस ट्रांसफार्मर का निर्माण एनजीईएफ (न्यू गवर्नमेंट इलेक्ट्रिकल फैक्ट्री) द्वारा किया गया था। कर्नाटक सरकार ने वर्ष 1956 में बेंगलुरु में इस सरकारी उपक्रम की स्थापना की थी। जर्मनी की एईजी कंपनी के तकनीकी सहयोग से प्रारंभ हुए इस उपक्रम ने देश और विदेश में अनेक बड़े पावर ट्रांसफार्मरों की सफल आपूर्ति की। लगभग 46 वर्षों तक उत्कृष्ट श्रेणी के विद्युत उपकरणों का निर्माण करने के बाद वर्ष 2002 में यह उपक्रम बंद हो गया।

विद्युत कंपनियों के समन्वित रखरखाव का परिणाम

इस असाधारण सफलता के पीछे तत्कालीन मध्यप्रदेश विद्युत मंडल, मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल तथा वर्तमान एमपी ट्रांसको के अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मचारियों की दशकों की मेहनत, दूरदर्शिता और प्रभावी रखरखाव नीति रही है। नियमित परीक्षण, समयबद्ध मेंटेनेंस, संतुलित लोड प्रबंधन तथा तकनीकी मानकों के कठोर अनुपालन ने इस ट्रांसफार्मर को निरंतर सक्षम बनाए रखा।

इसके साथ ही विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संबंधित फीडरों के उत्कृष्ट रखरखाव ने भी इसकी लंबी आयु सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाह्य फाल्ट और नेटवर्क व्यवधानों को न्यूनतम रखने के प्रयासों से ट्रांसफार्मर पर पड़ने वाले विद्युत एवं यांत्रिक तनाव में कमी आई, जिससे इसकी विश्वसनीयता और सेवा अवधि दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

मालवा की ऊर्जा गाथा का स्वर्णिम अध्याय

सारंगपुर का यह ट्रांसफार्मर केवल बिजली उपलब्ध नहीं करा रहा, बल्कि यह सिद्ध कर रहा है कि समर्पित रखरखाव, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्मनिष्ठा के बल पर किसी भी संसाधन की उपयोगिता और सेवा अवधि को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया जा सकता है। यह मालवा की ऊर्जा गाथा का एक स्वर्णिम अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों के अभियंताओं को प्रेरित करता रहेगा।

एमपी ट्रांसको नेटवर्क में आज भी क्रियाशील हैं एनजीईएफ के 20 ट्रांसफार्मर

एमपी ट्रांसको के नेटवर्क में वर्तमान में एनजीईएफ द्वारा निर्मित कुल 20 ट्रांसफार्मर क्रियाशील हैं। इनमें एक 160 एमवीए क्षमता का, पांच 40 एमवीए क्षमता के तथा 14 ट्रांसफार्मर 20 एमवीए क्षमता के हैं। ये सभी ट्रांसफार्मर 30 से 50 वर्ष तक की सफल सेवा दे चुके हैं और आज भी प्रदेश की विद्युत व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

 

अगले वेतन समझौते की तैयारी तेज, AIBOC की चार्टर ऑफ डिमांड्स समिति के सह-अध्यक्ष बने के. रवि कुमार

भोपाल। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों के आगामी वेतन समझौते (बाइपार्टाइट सेटलमेंट) की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (AIBOC) ने नवंबर 2027 से प्रभावी होने वाले अगले वेतन समझौते के लिए चार्टर ऑफ डिमांड्स (Charter of Demands) तैयार करने हेतु गठित उच्चस्तरीय समिति में कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (CBOA) के महासचिव के. रवि कुमार को सह-अध्यक्ष (Co-Chairman) नियुक्त किया है। बैंकिंग क्षेत्र में इस नियुक्ति को अधिकारी वर्ग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

IBA को सौंपा जाएगा अधिकारियों की मांगों का प्रारूप

जानकारी के अनुसार, यह समिति बैंक अधिकारियों की सेवा शर्तों, वेतन संरचना, भत्तों, कार्य परिस्थितियों और अन्य सेवा संबंधी मांगों का विस्तृत प्रारूप तैयार करेगी। इसके बाद इस चार्टर ऑफ डिमांड्स को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को आगामी वेतन वार्ता के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह समिति आगामी वेतन समझौते की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, क्योंकि इसी दस्तावेज के आधार पर IBA और अधिकारी संगठनों के बीच औपचारिक वार्ताएं आगे बढ़ेंगी।

सीबीओए ने जताया गर्व, अधिकारियों के हितों को मिलेगी मजबूती

कैनरा बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (CBOA) के उपाध्यक्ष के. के. त्रिपाठी ने कहा कि के. रवि कुमार की इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति न केवल सीबीओए बल्कि पूरे बैंकिंग अधिकारी वर्ग के लिए गर्व की बात है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्री रवि कुमार के अनुभव और नेतृत्व क्षमता का लाभ देशभर के बैंक अधिकारियों को मिलेगा तथा वे आगामी वेतन समझौते में अधिकारियों के हितों को प्रभावी ढंग से सामने रखेंगे।

दो दिवसीय भोपाल दौरे पर रहेंगे रवि कुमार

के. के. त्रिपाठी ने बताया कि के. रवि कुमार 12 और 13 जुलाई को दो दिवसीय भोपाल प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे विभिन्न संगठनात्मक बैठकों में भाग लेंगे तथा बैंक अधिकारियों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं पर चर्चा करेंगे।

इस दौरे के दौरान बैंकिंग क्षेत्र के समसामयिक विषयों, संगठन को मजबूत बनाने और आगामी वेतन समझौते से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

वेतन समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदें

बैंक अधिकारी संगठनों के बीच यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब नवंबर 2027 से लागू होने वाले नए वेतन समझौते की प्रारंभिक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि चार्टर ऑफ डिमांड्स में वेतन संशोधन के साथ-साथ कार्य-जीवन संतुलन, पदोन्नति, कार्यस्थल की सुविधाओं और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

बैंकिंग क्षेत्र के अधिकारियों का मानना है कि अनुभवी नेतृत्व के साथ तैयार होने वाला मांग-पत्र आगामी वार्ताओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने में मदद करेगा।

क्या है चार्टर ऑफ डिमांड्स?

चार्टर ऑफ डिमांड्स वह आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसमें बैंक अधिकारी संगठनों द्वारा वेतन वृद्धि, भत्तों, सेवा शर्तों, पदोन्नति, कार्य परिस्थितियों और अन्य कर्मचारी हितों से जुड़ी मांगों को शामिल किया जाता है। इसी दस्तावेज के आधार पर भारतीय बैंक संघ (IBA) और अधिकारी संगठनों के बीच वेतन समझौते की औपचारिक वार्ता होती है।

मुख्य बिंदु

  • AIBOC ने आगामी नवंबर 2027 वेतन समझौते की तैयारी शुरू की।
  • CBOA के महासचिव के. रवि कुमार बने चार्टर ऑफ डिमांड्स समिति के सह-अध्यक्ष
  • समिति भारतीय बैंक संघ (IBA) को मांग-पत्र प्रस्तुत करेगी।
  • 12-13 जुलाई को भोपाल प्रवास पर रहेंगे के. रवि कुमार।
  • बैंक अधिकारियों के साथ संवाद और संगठनात्मक बैठकों में करेंगे भागीदारी।
  • बैंक अधिकारी वर्ग ने नियुक्ति का स्वागत करते हुए इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

MP UCC: अब लिव-इन रिलेशन में रहना आसान नहीं, शादी जैसा रजिस्ट्रेशन और अलग होने पर तलाक जैसी प्रक्रिया

भोपाल

मध्य प्रदेश सरकार की समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा लगभग तैयार हो गया है. इसमें लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कई नए नियम शामिल किए गए हैं. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लिव-इन में रहने वाले कपल्स के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही, इस रिश्ते को खत्म करने की प्रक्रिया भी शादी और तलाक की तरह तय की जाएगी। 

मसौदे के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति ने अपने लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराया है और वह बाद में किसी अन्य व्यक्ति से शादी करना चाहता है, तो पहले उसे अपना लिव-इन रजिस्ट्रेशन रद्द कराना होगा. रजिस्ट्रेशन खत्म करने के लिए दोनों पक्षों की सहमति जरूरी नहीं होगी. एक पक्ष भी आवेदन देकर इसे निरस्त करा सकेगा. हालांकि, दूसरा पक्ष इस फैसले से असहमत होने पर अदालत में चुनौती दे सकता है। 

सरकार और विधि विभाग मसौदे को अंतिम रूप दे चुके हैं. अब गुरुवार को दिल्ली में यूसीसी समिति की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई के साथ अंतिम चर्चा होगी. इसके बाद सरकार मानसून सेशन में यूसीसी विधेयक पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 

पहले क्या थे प्रावधान?
ड्राफ्ट में उत्तराधिकार (संपत्ति के अधिकार) से जुड़े प्रावधानों को भी पहले के मुकाबले काफी कम किया गया है. पहले जहां ऐसे करीब 100 प्रावधान थे, अब उन्हें घटाकर लगभग 30 कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि इन बदलावों के बाद मध्य प्रदेश की यूसीसी, गुजरात और उत्तराखंड की यूसीसी से अधिक सरल और संक्षिप्त होगी. आदिवासी, घुमंतू और अर्द्धघुमंतू समुदायों को पहले की तरह इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। 

मसौदे के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन केवल बालिग (18 साल या उससे अधिक उम्र) लोग ही करा सकेंगे. इसके लिए दोनों पक्षों को अपनी उम्र से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे. रजिस्ट्रेशन जिले के रजिस्ट्रार के पास होगा। 

लिव-इन को लेकर प्रावधान
अगर कोई व्यक्ति पहले से किसी के साथ लिव-इन में रह रहा है और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ नया रजिस्ट्रेशन कराता है, तो ऐसी स्थिति की जानकारी रखने की व्यवस्था फिलहाल साफ नहीं है. इसलिए इस प्रावधान को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। 

सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर कोई व्यक्ति रजिस्ट्रेशन नहीं कराता, तो उसके खिलाफ अलग से कोई आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं होगा. यह व्यवस्था काफी हद तक लोगों की जागरूकता और आपसी सहमति पर आधारित रहेगी. वहीं, अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति लिव-इन में रहता है, तो ऐसे मामलों में पहले से लागू आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। 

सूत्रों के मुताबिक, अगर यह विधेयक मानसून सत्र में पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तो लिव-इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार से जुड़े कुछ प्रावधानों को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना भी है। 

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला, ₹800 करोड़ से अपग्रेड होगा स्टेट डेटा सेंटर, 24×7 मिलेंगी ऑनलाइन सेवाएं

भोपाल 
मध्य प्रदेश सरकार ने डिजिटल सेवाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं और पर्यावरण सुधार से जुड़े कई बड़े फैसले लिए हैं. मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. कैबिनेट ने प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए 800 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इस परियोजना के तहत डेटा सेंटर को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के अनुसार तैयार किया जाएगा. इसमें 630 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर पर और 170 करोड़ रुपये संचालन पर खर्च किए जाएंगे। 

सरकार के मुताबिक, डेटा सेंटर के अपग्रेड होने के बाद लोगों को सरकारी ऑनलाइन सर्विस 24 घंटे तेज, सुरक्षित और बिना रुकावट के मिल सकेंगी. इसके अलावा 75 करोड़ रुपये के एकल नागरिक डेटाबेस प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है. इसके लागू होने के बाद लोगों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं के लिए बार-बार रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा. एक ही डेटाबेस के जरिए पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। 

एक्सपर्ट डॉक्टरों की सीधी भर्ती
कैबिनेट ने सरकारी अस्पतालों में एक्सपर्ट डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव को भी मंजूरी दी है. अब एक्सपर्ट डॉक्टरों की नियुक्ति एमपी-पीएससी के बजाय विभागीय स्तर पर की जाएगी. हर महीने खाली पदों की जानकारी जारी की जाएगी और आवेदन के साथ-साथ इंटरव्यू के आधार पर डॉक्टरों का चुनाव होगा। 

नियुक्त डॉक्टरों को तीन साल तक उसी अस्पताल में सेवा देनी होगी और इस दौरान उनका ट्रांसफर नहीं किया जाएगा. यह व्यवस्था फिलहाल एक साल के लिए लागू की जाएगी. सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि प्रदेश में एक्सपर्ट डॉक्टरों के काफी पद खाली हैं और एमपी-पीएससी प्रोसेस में देरी के कारण भर्ती पूरी नहीं हो पा रही थी। 

65 शहरों में बनेंगे अर्बन फॉरेस्ट
पर्यावरण सुधार के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये की नमो हरित नगर योजना को मंजूरी दी है. इसके तहत साल 2031 तक प्रदेश के 65 नगरीय निकायों में अर्बन फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे. करीब 1911 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा। 

इस योजना के लिए हर साल 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. भोपाल समेत पांच बड़े शहरों को 5-5 करोड़ रुपये, नगर निगमों को 1.20 करोड़ रुपये और नगर परिषदों को 10-10 लाख रुपये दिए जाएंगे। 

केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों को बढ़ा मुआवजा
सरकार ने पन्ना जिले की केन-बेतवा, रूंज और मझगांव सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए 202.50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की है. अब प्रभावित परिवारों को मिलने वाला मुआवजा 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इससे विस्थापित परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी। 

भोपाल के बड़े तालाब के कैचमेंट पर बढ़ी प्लॉटिंग, 3 महीने में 11 हजार रजिस्ट्रियां, पर्यावरण पर बढ़ा खतरा

भोपाल
 राजधानी में बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया से लगे नीलबड़, रातीबड़, कलखेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ रही है। मास्टर प्लान में इन क्षेत्रों को पर्यावरण संरक्षण के लिए लो-डेंसिटी जोन घोषित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद छोटे-छोटे प्लॉट काटकर उनकी रजिस्ट्री और बिक्री लगातार जारी है। पंजीयन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 के बीच हुई 19 हजार रजिस्ट्रियों में से 11,220 रजिस्ट्रियां अकेले इन्हीं क्षेत्रों में हुई हैं।

जानकारी के अनुसार लो-डेंसिटी क्षेत्र में आबादी का दबाव सीमित रखने के लिए कम से कम 1000 वर्गमीटर के भूखंड पर ही निर्माण की अनुमति है। ऐसे प्लाट पर भी अधिकतम 60 वर्गमीटर (करीब 600 वर्गफीट) तक निर्माण किया जा सकता है। इसके विपरीत मौके पर 500 से 2000 वर्गफीट तक के छोटे प्लाट काटकर बेचे जा रहे हैं और उनकी रजिस्ट्रियां भी हो रही हैं। इससे कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित बसाहट तेजी से बढ़ रही है।

प्रशासन का कहना है कि हाल ही में पंजीयन विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल मास्टर प्लान के आधार पर रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती। ऐसे में प्रशासन के पास रजिस्ट्री रोकने का अधिकार सीमित हो गया है, जबकि अवैध कालोनियों का विस्तार लगातार जारी है।

इन इलाकों को लो-डेंसिटी श्रेणी में रखा गया
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार मास्टर प्लान में इन संवेदनशील इलाकों को आरजी-5 (लो-डेंसिटी) श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में बरखेड़ी कला, बरखेड़ी खुर्द, मेंडोरा-मेंडोरी, खुदागंज, चिचली, बैरागढ़ चिचली, गेहूंखेड़ा, दौलतपुर, चंदनपुरा, प्रेमपुरा, सेवनियां गौड़ सहित कई गांव शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने का प्रविधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं होने से बड़े तालाब का कैचमेंट और आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार दबाव में आता जा रहा है।

MP के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, नए टैरिफ में कंपनियों की मनमानी पर लगेगी लगाम

भोपाल

मध्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. राज्य सरकार और विद्युत नियामक आयोग ने नए रिटेल सप्लाई टैरिफ 2026-27 को मंजूरी दे दी है. इस नए टैरिफ में ‘प्रो-राटा’ (Proportional) बिलिंग व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया गया है. इस नए नियम के लागू होने से अब बिजली कंपनियों की मनमानी पर पूरी तरह रोक लगेगी और मीटर रीडिंग में होने वाली देरी का खामियाजा उपभोक्ताओं को नहीं भुगतना पड़ेगा। 

अक्सर देखा जाता था कि बिजली कंपनियां 30 दिन के बजाय 35 या 40 दिन में मीटर रीडिंग लेती थीं, जिससे उपभोक्ताओं की यूनिट बढ़ जाती थी और वे महंगे स्लैब के दायरे में आ जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। 

दिनों के अनुपात में बढ़ेगा स्लैब
अगर मीटर रीडिंग 30 दिन के बाद ली जाती है, तो 30 दिन वाले स्लैब को रीडिंग के दिनों के अनुपात में बढ़ा दिया जाएगा. अगर मीटर रीडिंग में 6 दिन की देरी होती है, तो स्लैब को 36 दिनों के अनुपात में बढ़ाकर लागू किया जाएगा। 

उपभोक्ताओं को अतिरिक्त यूनिट के कारण अब महंगे स्लैब का वित्तीय नुकसान नहीं सहना होगा. 30 दिन से ऊपर रीडिंग होने पर भी आपकी जेब ढीली नहीं होगी। 

गरीब उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
एलवी-1.1 (LV-1.1) कैटेगरी के ऐसे उपभोक्ता जिनका स्वीकृत लोड 100 वाट तक है और मासिक खपत 30 यूनिट से कम रहती है, उनका फिक्स्ड चार्ज पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है. अब इन उपभोक्ताओं से कोई फिक्स्ड चार्ज नहीं वसूला जाएगा। 

अस्थाई बिजली कनेक्शनों को लेकर दरें साफ:

*नए रिटेल सप्लाई टैरिफ में अस्थायी बिजली कनेक्शनों को लेकर भी दरें साफ कर दी गई हैं.

*सामान्य अस्थायी बिजली कनेक्शन पर अब घरेलू दर से 1.25 गुना अधिक ऊर्जा शुल्क (Energy Charge) देना होगा.

*शादी-ब्याह, सामाजिक या धार्मिक आयोजनों के लिए लिए जाने वाले अस्थायी कनेक्शन के लिए 8.94 रुपये प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा शुल्क तय किया गया है, जिसके साथ फिक्स्ड चार्ज अलग से देना होगा। 

10 साल बाद जेल विभाग में पदोन्नति का रास्ता साफ, अधिकारियों-कर्मचारियों के आदेश होंगे चरणबद्ध जारी

जेल विभाग में 10 वर्ष बाद पदोन्नति

विभिन्न संवर्गों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश चरणबद्ध रूप से होंगे जारी

भोपाल
मध्यप्रदेश शासन के पदोन्नति संबंधी निर्णय के अनुपालन में जेल विभाग में लगभग 10 वर्षों के अंतराल के बाद अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। जेल मुख्यालय द्वारा विभिन्न संवर्गों के पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश जारी किए गए हैं। यह निर्णय विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के मनोबल को सुदृढ़ करने के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता एवं कार्यकुशलता को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

जेल मुख्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार सहायक ग्रेड-1, स्टेनो टाइपिस्ट, लेखापाल, उप अधीक्षक (उद्योग), वरिष्ठ बुनाई प्रशिक्षक, वरिष्ठ बढ़ईगिरी प्रशिक्षक, दफ्तरी तथा जमादार के पदों पर पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति आदेश जारी होने के साथ ही संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके नवीन पदों के अनुरूप दायित्व सौंपने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है।

जेल विभाग द्वारा पदोन्नति की संपूर्ण प्रक्रिया शासन के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध ढंग से संचालित की जा रही है। विभाग पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति प्रकरणों का निरंतर परीक्षण एवं निराकरण कर रहा है। आगामी समय में अन्य पात्र अधिकारियों एवं कर्मचारियों के पदोन्नति आदेश भी चरणबद्ध रूप से जारी किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक पात्र अधिकारी एवं कर्मचारी को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल सके।

महानिदेशक जेल वरूण कपूर ने सभी पदोन्नत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पदोन्नति केवल अधिकार नहीं, बल्कि अधिक उत्तरदायित्व के साथ कार्य करने का अवसर भी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी पदोन्नत अधिकारी एवं कर्मचारी अपने नवीन दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ करते हुए विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

 

MP में सरकारी बसों की वापसी! 40 रूट तय, ई-टिकट और हर 10 सेकेंड में मिलेगी लाइव लोकेशन

भोपाल
 मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य में सरकारी बस सेवा शुरू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 40 प्रमुख लंबी दूरी के बस रूट चिन्हित कर लिए हैं। राज्य सड़क परिवहन योजना के तहत इन प्रस्तावित रूटों और बस सेवा व्यवस्था पर आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके बाद बसों के संचालन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
नई सरकारी बस सेवा में यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक टिकट (E-Ticket) की सुविधा मिलेगी। जिन मार्गों पर यात्रियों की संख्या अधिक होगी, वहां जरूरत के अनुसार अधिक बसों का संचालन किया जाएगा। साथ ही सभी बसों में आधुनिक जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे, जिससे हर 10 सेकेंड में बस की लाइव लोकेशन वेबसाइट पर अपडेट होती रहेगी।

PPP मॉडल पर होगा बसों का संचालन
परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार मध्यप्रदेश यात्री बस परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा अधिसूचित रूटों पर बसों का संचालन किया जाएगा। इन मार्गों के लिए राज्य परिवहन उपक्रम के नाम से परमिट जारी किए जाएंगे। साथ ही पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत निजी बस संचालकों के साथ समझौते किए जाएंगे। नई परिवहन नीति का उद्देश्य सार्वजनिक बस परिवहन को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और समयबद्ध बनाना है। योजना लागू होने के सात दिन बाद बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।

नई बसों में मिलेंगी ये सुविधाएं

    यात्रियों को इलेक्ट्रॉनिक टिकट जारी किए जाएंगे।
    अधिक ट्रैफिक वाले रूट्स पर अतिरिक्त बसें चलाई जाएंगी।
    सभी बसों में GPS ट्रैकिंग डिवाइस लगाए जाएंगे, जो हर 10 सेकंड में बस की लोकेशन को वेबसाइट पर अपडेट करेंगे।

परिवहन विभाग के नोटिफिकेशन के अनुसार, इन रूट्स पर राज्य परिवहन उपक्रम के नाम पर परमिट जारी किए जाएंगे। साथ ही सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी बस ऑपरेटरों के साथ समझौते भी किए जाएंगे। नई परिवहन नीति का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बस सेवा को व्यवस्थित, सुरक्षित और समयबद्ध बनाना है। योजना लागू होने के सात दिन बाद बसों का नियमित संचालन शुरू हो जाएगा।

किन जिलों को जोड़ेंगे नए रूट्स?
योजना के तहत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर, नरसिंहपुर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 40 महत्वपूर्ण इंटरसिटी मार्ग शामिल किए गए हैं।

इन जिलों से अलग-अलग मार्गों पर चलेगी बसें
योजना के अंतर्गत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर, नरसिंहपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख इंटरसिटी मार्ग नोटिफाई किए गए हैं।

ऐसे होगी बसों की सीट संख्या
योजना के अनुसार सामान्य मार्गों पर मिडी बस (23–34 सीट) चलेंगी जो साधारण, सेमी डीलक्स और डीलक्स कैटेगरी की होंगी। इसके साथ ही इंटरसिटी मार्गों पर स्टैंडर्ड बस (35–70 सीट) संचालित की जाएंगी जो एसी डीलक्स, एसी लग्जरी, एसी सुपर लग्जरी कैटेगरी की होंगी।

बसों की क्षमता और कैटेगरी
    सामान्य मार्गों पर मिडी बसें (23-34 सीट) चलाई जाएंगी, जो साधारण, सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणी की होंगी।

    इंटरसिटी मार्गों पर स्टैंडर्ड बसें (35-70 सीट) संचालित होंगी, जिनमें एसी डीलक्स, एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी उच्च श्रेणी की बसें शामिल होंगी।

 

इन प्रमुख शहरों और जिलों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, रतलाम, धार, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी, गुना, शाजापुर, देवास, सीहोर और नरसिंहपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों को जोड़ने वाले 40 प्रमुख इंटरसिटी रूट अधिसूचित किए गए हैं।

बसों की सीट क्षमता और श्रेणियां
योजना के अनुसार सामान्य मार्गों पर 23 से 34 सीटों वाली मिडी बसें संचालित की जाएंगी, जिन्हें साधारण, सेमी डीलक्स और डीलक्स श्रेणियों में रखा जाएगा। वहीं इंटरसिटी रूटों पर 35 से 70 सीटों वाली स्टैंडर्ड बसें चलाई जाएंगी, जिनमें एसी डीलक्स, एसी लग्जरी और एसी सुपर लग्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

खरीदे गए गेहूँ में पायी गई कमी के कारणों की पहचान करने के लिये जिला उपार्जन समितियों दिये निर्देश

भोपाल 

रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं खरीदी के बाद खरीदे गये गेहूं में कमी की जानकारी सामने आने पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण मंत्री श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत द्वारा अपर मुख्‍य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरूण शमी को गेहूं की खरीदी में पाई गई कमी की गहन समीक्षा करने एवं कमी के कारणों की पहचान कर संबंधित समितियों एवं परिवहनकर्ताओं से उसकी पूर्ति कराने के निर्देश दिये गये हैं।

इन निर्देशों के अनुक्रम में अपर मुख्‍य सचिव खाद्य ने सभी जिला कलेक्‍टरों को निर्देश दिये हैं कि कमी के संबंध में जिला उपार्जन समिति कारणों का पता लगाये एवं कमी की पूर्ति के लिए संबंधित समितियों अथवा परिवहनकर्ताओं से वसूली की कार्यवाही सुनिश्चित करे।

समर्थन मूल्‍य पर गेहूं की खरीदी में तुलाई, परिवहन, भंडारण आदि के हैंडलिंग कार्य में उपार्जित किये गये गेहूं की मात्रा में प्रति क्विंटल कुछ कमी आना एक सामान्‍य प्रक्रिया है। पिछले वर्षों में प्रति क्विंटल औसतन 176 ग्राम कमी देखने में आती थी। जबकि इस वर्ष गेहूं की खरीदी में 70 ग्राम प्रति क्विंटल की कमी देखने में आई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। यह भी गौरतलब है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गेहूं की खरीदी लगभग 30 प्रतिशत अधिक होने के बाद भी प्रति क्विंटल गेहूं की खरीद में कमी की मात्रा काफी कम रही है।

प्रदेश में समर्थन मूल्‍य पर गेहूं खरीदी का कार्य पंजीकृत सहकारी समितियों के साथ पंजीकृत स्‍व-सहायता समूह के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम के माध्‍यम से होता है। गेहूं खरीदी का कार्य सीधे तौर पर नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा नहीं किया जाता है।

प्रदेश में समर्थन मूल्‍य पर गेहूं की खरीदी का समस्‍त कार्य जिला कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता के गठित जिला स्‍तरीय उपार्जन समिति के माध्‍यम से किया जाता है। यह एक सामान्‍य प्रक्रिया है कि गेहूं की खरीद में पाई गई कमी की प्रतिपूर्ति जिला स्‍तरीय उपार्जन समिति द्वारा ही संबंधित समितियों/परिवहनकर्ताओं से वसूली कर की जाती है। जिला स्‍तरीय समिति द्वारा यह सुनिश्‍चित किया जाता है कि जिले में उपार्जित गेहूं में शासन को किसी प्रकार की आर्थिक क्षति न होने पाये।

अन्‍य जिलों की तरह सागर जिले में भी वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्‍य पर लगभग 49 हजार से अधिक किसानों से लगभग 36 लाख 20 हजार क्विंटल गेहूं की खरीदी की गई है । यद्यपि सागर जिले में पिछले वर्षों में औसतन रूप से प्रति क्विंटल 510 ग्राम गेहूं की कमी देखी गई है, जबकि इस वर्ष 318 ग्राम प्रति क्विंटल कमी देखने में आई है। जो गतवर्ष की तुलना में लगभग 192 ग्राम प्रति क्विंटल कम रही है। वर्तमान में प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्‍तरीय उपार्जन समिति द्वारा कमी की पहचान एवं सत्‍यापन की कार्यवाही की जा रही है। तदोपरांत वास्‍तविक कमी से संभावित आर्थिक क्षति की वसूली सहकारी समितियों एवं स्‍व-सहायता समूहों तथा परिवहनकर्ताओं से की जायेगी।

 

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