डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग को नई गति देने पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में हुआ मंथन

भोपाल 

रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप महानिदेशक (स्वदेशीकरण)  सुशील कुमार सतपुते ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थान और शिक्षण संस्थाएं एक साझा मंच पर आकर नवाचार आधारित रक्षा विनिर्माण को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत औद्योगिक एवं नवाचार आधारित इको सिस्टम विकसित करना समय की आवश्यकता है और केंद्र व राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा।

रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20-21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन “आत्मनिर्भरता इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग : प्रमोटिंग स्टेट-लेवल इकोसिस्टम्स” की तैयारियों के तहत मध्यप्रदेश शासन द्वारा एमपीआईडीसी मुख्यालय, भोपाल में तीसरे चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय फ्लैगशिप परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।

कार्यशाला में देशभर के 40 से अधिक प्रमुख उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और नीति विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भागीदारी कर अपने सुझाव साझा किए। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय पहल में ‘इंडिजेनाइजेशन, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम’ विषय पर सह-नेतृत्व (को-लीड) राज्य की भूमिका निभा रहा है।

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य की उद्योग अनुकूल नीतियां, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना, उपलब्ध संसाधन तथा कुशल मानव संसाधन इसे देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला राज्य की भावी रणनीति तय करने के साथ उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की रूपरेखा, राज्यों की भूमिका तथा मध्यप्रदेश की सह-नेतृत्व जिम्मेदारी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान बताया गया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए सात प्रमुख रणनीतिक विषय निर्धारित किए हैं, जिन पर राज्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

एमपीआईडीसी द्वारा डिफेंस एवं एयरोस्पेस रणनीति वर्ष 2026-30 प्रस्तुत की गई। इसमें राज्य की वर्तमान औद्योगिक स्थिति, छह रणनीतिक स्तंभों तथा 24 प्रमुख पहलों के माध्यम से रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने की कार्ययोजना साझा की गई। प्रस्तुतीकरण में जबलपुर की सैन्य वाहन निर्माण क्षमता, इटारसी के आयुध उत्पादन, ग्वालियर के बायो-केमिकल अनुसंधान तथा कटनी की धातुकर्म विशेषज्ञता को मध्यप्रदेश की प्रमुख औद्योगिक शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण चरण हितधारकों के साथ सातों रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा रहा। उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। विशेष रूप से स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार आधारित इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर उपयोगी सुझाव सामने आए।

कार्यशाला में बीईएमएल, आईआरईएल, आयुध निर्माणी इटारसी, सेंट्रल प्रूफ एस्टैब्लिशमेंट इटारसी, एमपीएमएसएमई, ग्लोबल स्किल पार्क, आईआईएसईआर भोपाल तथा एमपीएसईडीसी सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं डीआरडीओ, आईआईटी दिल्ली, बीएचयू, धारवाड़, इंदौर, जम्मू, कानपुर, भिलाई, गांधीनगर एवं मद्रास, आईआईएससी बेंगलुरु, नासकॉम, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑर्डनेंस लिमिटेड, गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्रा. लि. तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इन संस्थानों की भागीदारी से कार्यशाला को राष्ट्रीय दृष्टिकोण और तकनीकी विशेषज्ञता मिली। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक ने कार्यशाला के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर 30 जून 2026 तक राज्य की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रक्षा उत्पादन विभाग को भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मध्यप्रदेश की रणनीति और सुझावों का आधार बनेगी।

 

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्यप्रदेश ने हासिल की बहुआयामी उपलब्धियां : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्यप्रदेश ने हासिल की बहुआयामी उपलब्धियां : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु

सिकल सेल उन्मूनल मिशन भावी पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ऐतिहासिक पहल
केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में किया सराहनीय कार्य
प्रधानमंत्री मोदी ने शहडोल से लांच किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन
आनुवंशिक रोगों की जांच की उपलब्धि में मध्यप्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण
राष्ट्रपति ने म.प्र. में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में हुई सामुदायिक भागीदारी को सराहा
मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल
सिकल सेल मुक्त मध्यप्रदेश का हमारा संकल्प जन सहयोग से होगा साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस का हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम

ओंकारेश्वर

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। मैं इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया। मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जाँच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिये जा चुके हैं।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित response देने की दूरदर्शी सोच भी थी।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किये गये वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। ICMR, Tribal Health Research Institutes, AIIMS, NHM, WHO और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आंकलन सामने आया कि:-

    भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं।

    लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं।

    सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय क्षेत्र में है।

    अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, Genetic Science और डिजिटल मॉनिटरिंग को एकसाथ जोड़कर यह राष्ट्र व्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी:

    पहलाः बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना।

    दूसराः व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना।

    तीसराः प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाये रखना।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी carrier भी पहचाने जा चुके हैं। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अनजाने ही अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं। संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्यप्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जाँच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया गया है। गत वर्ष 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक चले “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” अंतर्गत मध्यप्रदेश ने 4 लाख से अधिक महिलाओं की सिकल सेल स्क्रीनिंग का कीर्तिमान स्थापित करके इस समस्या के समाधान हेतु अमूल्य योगदान दिया है। मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर विद्यार्थियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा रही है। जनजातीय विद्यार्थियों को भी परामर्श, उपचार एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। दूरस्थ एवं दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) के माध्यम से निरंतर स्क्रीनिंग की जा रही है।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि पिछले वर्ष विश्व सिकल सेल दिवस पर प्रदेश में “सिकल मित्र” पहल का शुभारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत जागरूकता बढ़ाने, रोगियों को सहायता प्रदान करने तथा उन्हें शासकीय स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए शासकीय एवं गैर शासकीय संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा एनसीसी कैडेट्स को प्रशिक्षित किया गया है। इन सार्थक पहलों के लिए मैं प्रदेश के सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों को बधाई देती हूं। मुझे विश्वास है कि सभी प्रदेशों की समेकित शक्ति और सक्रियता से हम वर्ष 2047 से बहुत पहले ही देश से सिकल सेल संबंधी रोगों के उन्मूलन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य में अवश्य सफल होंगे। देश में जनजातीय समुदाय की सबसे बड़ी संख्या मध्यप्रदेश में है। मैं आशा करती हूं कि मध्यप्रदेश द्वारा जनजातीय विकास के अनेक क्रीर्तिमान स्थापित किए जाएंगे।

डिजिटल और जेनेटिक कार्ड समाज के लिए जन्म कुण्डली के समान : राज्यपाल पटेल

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोग केवल स्वास्थ्य की समस्या नहीं, बल्कि विशेष रूप से जनजातीय समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी गंभीर चुनौती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सिकल सेल उन्मूलन को राष्ट्रीय मिशन का स्वरूप दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वर्ष 2023 में शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 का शुभारंभ किया गया। मध्यप्रदेश में इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।

राज्यपाल पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक एक करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और लगभग 95 से 96 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। आगामी दो से तीन महीनों में शेष कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने जनजातीय क्षेत्रों में बीमारी के प्रति जागरूकता और सतर्कता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्यपाल पटेल ने बताया कि प्रदेश में एलोपैथिक उपचार के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के उपयोग पर भी कार्य किया जा रहा है और इसके प्रारंभिक परिणाम सकारात्मक रहे हैं। उन्होंने सिकल सेल रोगियों से अपील की कि उपचार में दोनों पद्धतियों का समन्वित उपयोग करें। उन्होंने डिजिटल जेनेटिक कार्ड को विवाह संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह जन्म कुंडली की तरह उपयोगी है और विवाह से पूर्व इसका मिलान आवश्यक है। इससे भावी पीढ़ियों को इस आनुवंशिक बीमारी से बचाया जा सकेगा।

सिकल सेल उन्मूलन मिशन, आयोजन नहीं बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का है संकल्प : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आदि शंकराचार्य की तपोभूमि और जननायक टंट्या मामा की कर्मस्थली पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन से जनजागरूकता बढ़ाकर इस गंभीर बीमारी की रोकथाम की दिशा में देश और प्रदेश मिलकर कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान आने वाली पीढ़ियों को सिकल सेल जैसी घातक बीमारी से बचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी का प्रभाव केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार और कई पीढ़ियां इसकी पीड़ा झेलती हैं। इसलिए इसे रोकना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु की उपस्थिति को प्रेरणादायी बताते हुए उनका अभिनंदन किया और कहा कि उनके सान्निध्य में यह संकल्प और अधिक मजबूत हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वर्ष 2023 में शहडोल से शुरू किए गए राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज यह अभियान राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में गर्भवती महिलाओं की पहचान कर परामर्श, जेनेटिक कॉउंसलिंग और सिकल सेल कार्ड वितरण जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 3700 से अधिक ‘सिकल मित्र’ भी जन-जागरूकता के इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार मजबूत कर रही है। उन्होंने बताया कि जहां पहले प्रदेश में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 32 तक पहुंच रही है। आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा में भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि खरगौन में क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना कर राज्य सरकार विकास के सभी पैमाने पर आगे बढ़ रही है। वीरांगना रानी दुर्गावती और राजा भभूत सिंह जैसे महान नायकों के नाम पर कैबिनेट बैठकें आयोजित की गई हैं। छिंदवाड़ा में बादल भोई और जबलपुर में राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह संग्रहालय का लोकार्पण किया है। सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए जनजातीय पर्व भगोरिया को राजकीय उत्सव का दर्जा दिया गया है। कन्या छात्रावासों के नाम भी जनजातीय नायकों के नाम पर रखे गए हैं। जनजातीय भाई-बहनों का कल्याण और उनका समग्र विकास सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सिकल सेल के खिलाफ यह लड़ाई समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही जीती जा सकेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माँ नर्मदा और ओंकारेश्वर महाराज की पावन धरती पर संकल्प लेते हुए कहा कि जब तक सिकल सेल उन्मूलन अभियान पूरी तरह सफल नहीं होगा, तब तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रदेश आगमन के लिए आभार व्यक्त किया।

उप-मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन- 2047 में सबसे अच्छा कार्य किया है। सिकल सेल को जड़ से खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2023 में शहडोल से एक मिशन की शुरुआत की थी। इसे राज्यपाल पटेल के प्रयासों ने और गति प्रदान की है। प्रदेश के जनजातीय बहुल जिलों में अब तक 1 करोड़ 32 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। मध्यप्रदेश सिकल सेल एमीनिया की स्क्रीनिंग के मामले में अग्रणी राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा है। अब कुंडली से पहले सिकल सेल स्क्रीनिंग कार्ड का मिलान किया जाने लगा है। इसके लिए प्रदेशभर में जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है, जिससे कोई भी सिकल सेल का वाहक न बने।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन-2047 में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि और अधिकारियों को सम्मानित भी किया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन

प्रदेश में संचालित योजनाओं की सराहना की

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने ओंकारेश्वर में राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047 के अंतर्गत आयोजित विश्व सिकलसेल दिवस-2026 के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी के अवलोकन के दौरान राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने सिकलसेल उन्मूलन मिशन-2047 के तहत मध्यप्रदेश में किए जा रहे कार्यों, नवाचारों एवं जन-जागरूकता अभियानों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सिकलसेल रोग की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार तथा प्रभावित परिवारों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस दौरान राज्यपाल पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार, जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर डॉ. विजय शाह, धार्मिक न्यास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायकगण सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और सिकलसेल उन्मूलन मित्र उपस्थित थे। 

90 डिग्री ब्रिज के बाद भोपाल का नया ‘कमाल’, फुटपाथ बना दिया लेकिन पहुंचने का रास्ता ही नहीं छोड़ा

 भोपाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है। 

शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है। 

स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है। 

सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं। 

रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है। 

ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं?

फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल
लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है। 

रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। 

 

Monsoon 2026: मानसून से पहले उमस का कहर, बैतूल में 90% और भोपाल में 64% ह्यूमिडिटी; IMD का अलर्ट जारी

भोपाल
 देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोग बड़ी शिद्दत से दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मानसून की प्रगति में एक ‘अस्थायी ठहराव’ देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 18 जून 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, रांची और मुजफ्फरपुर पर ही टिकी हुई है। आखिर वातावरण में नमी बढ़ने के बावजूद मानसून की रफ्तार क्यों थम गई है और मध्यप्रदेश में इसका क्या असर होने वाला है, आइए विस्तार से समझते हैं।

मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों को कवर कर चुकी है और आने वाले 4-5 दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।

क्यों थम गई मानसून की रफ्तार?
मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून की गति धीमी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी का खामोश होना है। इस समय खाड़ी में कोई मजबूत निम्न दाब क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जो मानसूनी हवाओं को आगे धकेलने के लिए ऊर्जा देता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

    जेट स्ट्रीम का प्रभाव उपोष्ण पश्चिमी जेट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
    प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है और साल के उत्तरार्ध में अल नीनो परिस्थितियां बनने की संभावना है।

    वहीं मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल हिंद महासागर में मानसून को सहारा नहीं दे पा रहा है।

    सिस्टम की कमी: मध्य भारत में फिलहाल किसी मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है।

मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ने पकड़ी भारी रफ्तार
भले ही मानसून की आधिकारिक एंट्री में थोड़ा ठहराव आया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में उमस का ग्राफ अचानक बहुत ऊपर चला गया है, जो इस बात का सीधा संकेत है कि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है।

शाम के समय दर्ज की गई सापेक्षिक आर्द्रता के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं
    बैतूल: 90 प्रतिशत
    रायसेन: 77 प्रतिशत
    पचमढ़ी: 73 प्रतिशत
    भोपाल: 64 प्रतिशत

खजुराहो-नौगांव में पारा 41 पार, पर तपन हुई कम
वातावरण में बादलों और नमी की मौजूदगी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में खजुराहो 41.4°C और नौगांव 41.0°C सबसे गर्म दर्ज किए गए, जबकि पश्चिमी हिस्से में दतिया 41.2°C में तेज गर्मी रही। हालांकि, नमी बढ़ने से रातें अब भी गर्म बनी हुई हैं, जहां खजुराहो में न्यूनतम तापमान 28.0°C और सतना में 27.9°C दर्ज किया गया।

शैलेन्द्र कुमार नायक, मौसम, जलवायु एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल
पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश?
सिवनी: 22.6 मिमी
श्योपुर: 20.4 मिमी
बैतूल: 16.6 मिमी
रीवा: 13.0 मिमी
राजगढ़: 13.0 मिमी
भोपाल: 14.0 मिमी
सतना: 12.0 मिमी
सागर: 8.7 मिमी

अगले 2 से 3 दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, इसे ‘ब्रेक मानसून’ कहना गलत होगा, यह सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मध्यप्रदेश में मानसून के स्वागत के लिए माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वर्षा की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या विदर्भ के ऊपर कोई चक्रवाती घेरा मजबूत होगा, मानसून पूरी ताकत से एमपी में दाखिल हो जाएगा।

इन जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट
मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना समेत कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है।

    प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
    भोपाल सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना।
    कुछ जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
    अगले 2 दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के आसार।
    किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल

मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित

भोपाल 

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन

वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है।

कैसे होगी निगरानी

इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा।

क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया

विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है।

निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम

गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।

 

MP में शिक्षकों के स्वैच्छिक तबादलों के आवेदन आज से, नए नियमों को लेकर बढ़ा विरोध

भोपाल
 मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि एक दिन बढ़ाते हुए अब 19 जून से आनलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्णय लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। 28 से 30 जून तक आदेश जारी होंगे।

पहले आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण तिथि आगे बढ़ाई गई। हालांकि, स्थानांतरण नीति में शामिल नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियम इतने कड़े बनाए गए हैं कि अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले की प्रक्रिया का लाभ ही नहीं उठा पाएंगे। साथ ही, आवेदन के लिए केवल कुछ दिनों का समय दिए जाने पर भी आपत्ति जताई जा रही है।

90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त सबसे बड़ी बाधा
शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने तबादले के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जो कई शिक्षकों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी कारणों का खामियाजा अब उन्हें तबादला प्रक्रिया से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है।

जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ
नए नियमों के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण की पात्रता से बाहर रखा गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि जिनके प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें भी ड्यूटी अवधि में स्वतः निरस्त माना जाएगा।

नियमों में राहत की मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक ढंग से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को इन नियमों से राहत मिलने के बजाय निराशा हाथ लग रही है।

 

सिग्नल केबल चोरी से मुंबई-हावड़ा रूट प्रभावित, 3 घंटे थमीं ट्रेनें; 19 गाड़ियां हुईं लेट

सतना 

मुंबई-हावड़ा रेलखंड पर सतना-मैहर के बीच लगरगवां स्टेशन के पास गुरुवार को सिग्नल की 7 मीटर केबल चोरी हो गई। इस घटना के कारण रेल संचालन लगभग तीन घंटे तक प्रभावित रहा, जिससे अप और डाउन लाइन की 19 ट्रेनें देरी से चलीं। 

सिग्नल विभाग के कर्मचारियों ने केबल काट कर ले जा रही महिलाओं को देखा और तत्काल आरपीएफ को सूचित किया। मौके पर पहुंची आरपीएफ टीम ने पीछा कर दोनों आरोपियों को चोरी की गई केबल के साथ पकड़ लिया। बाद में इंजीनियरों ने क्षतिग्रस्त केबल को जोड़कर रेल संचालन को सामान्य किया।

19 ट्रेनें देरी से चलीं इस घटना से प्रभावित होने वाली ट्रेनों में अप लाइन की अयोध्या-एलटीटी, गोरखपुर-एलटीटी, दानापुर-एसएमवीटी, दरभंगा-अहमदाबाद, वाराणसी-एकता नगर और सतना-कटनी मेमू शामिल थीं। वहीं, डाउन लाइन में डॉ. अंबेडकर नगर-रीवा, एलटीटी-दानापुर स्पेशल, जबलपुर-रीवा शटल सहित पांच से अधिक मालगाड़ियां भी प्रभावित हुईं।

आरपीएफ पोस्ट प्रभारी बीरेन्द्र यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कल्ली उर्फ सुखमंती (55) निवासी उतैली और चिद्दी उर्फ चिंतामणि निवासी संग्राम कॉलोनी, थाना कोलगवां के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ रेल संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

 

उज्जैन में एक्शन मोड में CM मोहन और केंद्रीय मंत्री खट्टर, कई विभागों की होगी हाई लेवल समीक्षा

उज्जैन 
 मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर 19 जून को उज्जैन दौरे पर रहेंगे. इस दौरान केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री खट्टर दो महत्त्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों में शामिल होंगे. प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में आयोजित इन बैठकों में कई विभागों की समीक्षा हो सकती है। 

शाम को शुरू होंगी दो महत्वपूर्ण बैठकें
उज्जैन में सीएम व केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति में पहली बैठक शाम 6 बजे होगी. इस बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा होगी. वहीं, इसके बाद आयोजित दूसरी बैठक में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत प्रदेश में चल रहे कार्यो और विद्युत वितरण व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ 2028 से जुड़े और अन्य विकास कार्यो की भी समीक्षा कर सकते हैं। 

प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में होंगी बैठकें
मुख्यमंत्री वीर भारत संघ्राहलय, कान्हा डक्ट परियोजना और केंद्र सरकार की सहायता राशि से चलने वाली अन्य योजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं। 

तैयार होगा उज्जैन व अन्य शहरों के विकास का रोडमैप
दरअसल, उज्जैन में होने वाली समीक्षा बैठकें केवल विभागीय समीक्षा तक समिति नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, बिजली सुधार और धार्मिक पर्यटन विकास के रोडमैप को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री ल मनोहरलाल खट्टर के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी हो गई हैं, जिससे समीक्षा बैठकों की व्यवस्थाओं में कोई कमी न हो. हालांकि, इन बैठकों के बाद क्या महत्वपूर्ण निणर्य होने है ये देर शाम आधिकारिक बयानों के बाद ही सामने आ पाएगा। 

समीक्षा बैठक में इन मुद्दों पर जोर दे सकते हैं सीएम व केंद्रीय मंत्री
मध्यप्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार माना जा रहा है पहली बैठक में निम्लिखित मुद्दों पर सरकार का फोकस हो सकता है। 

    नगरीय निकायों में कचरा संग्रहण और निस्तारण व्यवस्था को और मजबूत करना.
    शहरों की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए विशेष अभियान.
    कचरे से खाद और ऊर्जा उत्पादन परियोजना को बढ़ावा.
    खुले में कचरा फेंकने और प्लास्टिक उपयोग पर सख्ती बढ़ाना.
    सिंहस्थ के कार्यों के साथ-साथ उज्जैन सहित धार्मिक और पर्यटन शहरों में विशेष सफाई मॉडल लागू करना.
    नगर निगमों की रैंकिंग के आधार पर जवाबदेही तय करना.
    बिजली वितरण कम्पनियों के तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करना.
    स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाना.
    ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों का उन्नयन.
    किसान और घरेलू उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर.
    बिजली चोरी रोकने का विशेष अभियान.

NEET परीक्षा के लिए MP में कड़े इंतजाम, सेंटरों पर जैमर-CCTV; भोपाल, इंदौर और रतलाम के बीच स्पेशल ट्रेनें चलेंगी

भोपाल

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 21 जून को है। परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रदेश के सभी केंद्रों पर CCTV कैमरे और जैमर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए हर सेंटर के बाहर एक बड़ी घड़ी लगाई जाएगी।

भोपाल में कुल 13 हजार 774 स्टूडेंट्स परीक्षा देंगे। इसे लेकर जिला प्रशासन, पुलिस के साथ रेलवे भी तैयारी कर रहा है। 32 केंद्र प्रभारियों के साथ कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को वन-टू-वन मीटिंग की। इसमें बताया गया कि कई बार दो से तीन सेंटरों के नाम एक जैसे होते हैं, जिससे परीक्षार्थी कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसलिए उन्हें केंद्र का नाम और स्थान क्लियर रखें।

हमीदिया रोड पर जो सेंटर हैं, उसके रास्ते में लोग गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इस वजह से स्टूडेंट्स को देरी हो सकती है। इसलिए पुलिस गाड़ियों को तुरंत हटा दें। पुराने शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। बैरिकेडिंग में सेंटर का नाम छिप सकता है। इसलिए सेंटर की ओर रास्ता दिखाने वाले बोर्ड लगेंगे।

भोपाल में 13 हजार 774 छात्र देंगे परीक्षा
भोपाल में 13 हजार 774, छिंदवाड़ा 4303, गुना में 1839, विदिशा में 1709, नर्मदापुरम में 1283 और अशोकनगर में 865 परीक्षार्थियों के आने की संभावना है।

देखिए ट्रेन का शेड्यूल
रेलवे इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच एक ट्रिप स्पेशल ट्रेन चलाएगा। यह स्पेशल ट्रेन इंदौर एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से भोपाल आने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में सुविधा प्रदान करेगी।

गाड़ी संख्या 09354 इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन का संचालन 20 जून को किया जाएगा। ट्रेन इंदौर स्टेशन से सुबह 11.25 बजे प्रस्थान कर फतेहाबाद में दोपहर 12 बजे, बड़नगर में दोपहर 12.42 बजे, रतलाम में 1.30 बजे, नागदा में दोपहर 2.23 बजे, उज्जैन में दोपहर 3.25 बजे, मक्सी में शाम 4.30 बजे, शुजालपुर में शाम 5.21 बजे, सीहोर में शाम 6 बजे, बैरागढ़ स्टेशन पर शाम 6.18 बजे और शाम 5 बजे भोपाल स्टेशन पर पहुंचेंगी।

इसी प्रकार वापसी में गाड़ी संख्या 09353 भोपाल–रतलाम स्पेशल ट्रेन 20 जून 2026 को भोपाल स्टेशन से शाम 7.40 बजे प्रस्थान कर संत हिरदाराम नगर में रात 8.08 बजे, सीहोर में रात 8.34 बजे, शुजालपुर में रात 8.59 बजे, मक्सी में रात 9.59 बजे, उज्जैन में रात 11.05 बजे एवं अगले दिन नागदा रात 12.05 बजे आगमन कर गंतव्य स्टेशन रतलाम रात 12.55 बजे पहुंचेगी।

ऐसा रहेगा कोच कम्पोजिशन 

ट्रेन में 13 स्लीपर कोच, 2 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआर/डी सहित कुल 17 कोच रहेंगे। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि नीट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संभावित अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए और उनके आवागमन को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से ये स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

विश्व सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति का बड़ा बयान, बोलीं—स्क्रीनिंग लक्ष्य समय से पहले हुआ पूरा; MP की सराहना

ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची। सिकल सेल से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। 1.25 करोड़ लोगों के स्क्रीनिंग की लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ। 

राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा आज सिकल सेल दिवस पर लोगों के स्वास्थय के बारे में जागरुक करना है। सिकल सेल एनिमिया में मध्यप्रदेश सरकार ने बहुआयामी उपलब्धि हासिल किया है। इसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं।

ये संतोष की बात है कि 2023 में राष्ट्र मिशन में उन्होंने जो लक्ष्य देश के सामने रखे थे। उसमें स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। जितना मुझे अवगत कराया गया है उसमें सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो गई है।

लोगों को कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया
इनमें ज्यादातर को लोगों को जेनेटिक कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया है। सिकल सेल से जुड़े चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया है। पिछले कुछ वर्षों से समग्र रुप से जो प्रयास किए है, वो अत्यंत सराहनीय है। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से एनिमिया सिकल सेल मिशन को लॉंच किया था।

इस पहल के पीछे न केवल सरकार का दृढ़ संकल्प था। बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित निष्कर्ष देने का दूरदर्शी सोच भी थी। मुझे बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रुप में देश में पहली बार ऐसा मिशन पूरा किया गया। केवल स्वास्थय से जुड़ी समस्याओं के रुप में नहीं देखा जाता है। इसे जनजातीय स्वास्थय का मुद्दा, अनुवांशिका से जुड़े जागरुकता और प्रीवेंटिव हेल्थ कैयर की चुनौती से सामाजिक आचरण में बदलाव के रुप में भी देखा गया है।

मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्टभूमि में स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, AIIMS, NAHM, WHO और विभिन्न राज्यों सरकारों ने इस विषय पर विभिन्न आयामों पर काम किया है। मैं यह जानकार खुश हूं, आज मैं कुछ स्टॉल को देख रही थी। केवल एलोपेथ नहीं, आयुर्वेद भी इसमें रिसर्च करके निकाले है।

2027 तक लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग करना लक्ष्य
आज विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर ओंकारेश्वर में माननीय राष्ट्रपति महोदया की उपस्थिति में जनजागरूकता का यह महत्वपूर्ण आयोजन हो रहा है। हमें प्रसन्नता है कि मध्य प्रदेश ने सिकल सेल स्क्रीनिंग के क्षेत्र में कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

हमारा लक्ष्य वर्ष 2027 से पहले सभी लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग पूरी करना है, ताकि इसके बाद उपचार और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा सके। सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जनजातीय समाज सदैव इस अभियान को याद रखेगा। सरकार इस बीमारी के उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

सीएम बोले- 2027 तक 1.60 करोड़ स्क्रीनिंग का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओंकार महाराज और मां नर्मदा की पावन भूमि पर आज विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राज्यपाल मंगूभाई पटेल शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, तभी इस अभियान की नींव रखी गई थी।

वर्ष 2023 में शहडोल से सिकल सेल उन्मूलन अभियान 2.0 की शुरुआत हुई। पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है। वर्ष 2027 से पहले 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अभियान की लगातार निगरानी की और हर दो महीने में समीक्षा बैठक लेकर इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इलाज प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई
कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. आनंद ओनकर ने बताया कि खालवा, छैगांव माखन, पुनासा और पंधाना विकासखंडों से ऐसे सरपंचों का चयन किया गया है, जिन्होंने अपने गांवों में सिकल सेल स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

आयोजन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग और इलाज प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें मरीजों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और बीमारी से बचाव के तरीकों पर भी प्रकाश डाला जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श भी प्रदान की गई।

डॉक्टर बोले-सिकल सेल एनीमिया आनुवंशिक बीमारी
डॉक्टर ओनकर ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसकी पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ोतरी को विवाह पूर्व जांच से रोका जा सकता है। विवाह से पहले युवक-युवती दोनों की जांच कर उन्हें संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है। जांच रिपोर्ट और सिकल सेल कार्ड के आधार पर संतान में बीमारी की संभावना बताई जाती है, जिसके बाद नवयुगल स्वयं निर्णय लेते हैं।

कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के निर्देशन में खंडवा जिले में बड़े पैमाने पर सिकल सेल स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनजागरूकता, समय पर जांच और उचित परामर्श से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। विश्व सिकल सेल दिवस का यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu