मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कपिला गौशाला पहुंचकर किया गौ पूजन

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य, बिजली मंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को उज्जैन के ग्राम रत्नाखेड़ी स्थित कपिला गौशाला पहुंचकर गौ-माता की पूजा कर पशु आहार खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य शासन द्वारा स्थानीय निकायों के माध्यम से गौशाला संचालन का मॉडल विकसित किया गया है। इसके तहत नगरीय एवं ग्रामीण निकायों को गौशाला संचालन के लिए आवश्यक सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही बड़े स्तर पर सामुदायिक गौशाला संचालित करने के इच्छुक संस्थानों एवं व्यक्तियों को भी शासन द्वारा प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की गौशालाओं में लगभग 4 लाख गोवंश सुरक्षित रूप से संरक्षित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अच्युतानंद जी महाराज के सहयोग से गौ सेवा एवं गौ संरक्षण के प्रति जनभागीदारी लगातार बढ़ रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित विभिन्न नगरों में लोग अपने जन्मदिन एवं अन्य विशेष अवसरों पर गौशालाओं में जाकर गौ सेवा करते हैं, जिससे गौ सेवा के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ी है।

कपिला गौशाला, रत्नाखेड़ी में लगभग 2000 गौवंश को रखने की क्षमता विकसित की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत चार शेड्स (24-60m) प्रत्येक में अनुमानित 500 गोवंश के रहने की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त गोवंश औषधालय, भूसा भंडारण शेड, गौ सेवा शाला, बायोगैस संयंत्र, प्रशासनिक भवन, प्रयोगशाला, डेयरी, गोवंश अंतिम संस्कार क्षेत्र, आगंतुकों के लिए पार्किंग एवं उद्यान क्षेत्र, वॉच टावर तथा वृक्षारोपण क्षेत्र का निर्माण भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने गौशाला का निरीक्षण व्यवस्थाओं का जायजा लिया। गौ शाला के रख-रखाव के लिए नगर निगम द्वारा किये जा रहे कार्यों एवं गौशाला में गौ वंश के लिए की गई  व्यवस्थाओं के लिए नगर निगम की प्रशंसा की।उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा इस क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे गौ संरक्षण एवं संवर्धन के एक आदर्श केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापतिमती कलावती यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीण जन उपस्थित थे।

 

UPSC परीक्षा से टकराव के बाद MPPSC ने बदला मेन्स परीक्षा का शेड्यूल

इंदौर

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 और राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तारीख आपस में टकरा रही है। इसके चलते मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने अपनी परीक्षा प्री-पोन कर दी। महज चौबीस घंटे में परीक्षा की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले जहां 17 अगस्त से पेपर होना थे, वे अब 8 अगस्त से आयोजित किए जाएंगे। आयोग ने परीक्षा का नया शेड्यूल पोर्टल पर जारी कर दिया है।
यूपीएससी परीक्षा से टकरा रही थी तारीखें

जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा को लेकर लगे अंतरिम स्थगन (स्टे) को हटाने के बाद अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली। लंबे इंतजार के बाद आयोग (एमपीपीएससी) ने शुक्रवार को राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025, 17 से 22 अगस्त के बीच रखी थी, लेकिन शनिवार को अभ्यर्थियों ने 21 अगस्त से यूपीएससी की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा होना बताया।

इसके बाद आयोग ने आनन-फानन में राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तारीख में बदलाव कर दिया है, क्योंकि जिन केंद्रों पर पीएससी की परीक्षा होना है, उन्हीं केंद्रों पर यूपीएससी भी करवाई जाएगी। ऐसे में केंद्रों ने भी दोनों परीक्षाएं एक साथ करवाने में असहमति जताई है। आयोग ने नया शेड्यूल जारी करते हुए 8 से 13 अगस्त के बीच छह पेपर रखे हैं।

3 अगस्त से जारी होंगे एडमिट कार्ड

राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होगी। 25 जून से 15 जुलाई के बीच बिना विलंब शुल्क ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। मध्य प्रदेश के मूल निवासियों को 400 रुपये और अन्य राज्यों के चयनित अभ्यर्थियों को 800 रुपये पंजीयन शुल्क देना होगा। 15 जुलाई के बाद ऑनलाइन आवेदन करने पर अभ्यर्थियों से विलंब शुल्क वसूला जाएगा। जबकि एडमिट कार्ड भी 3 अगस्त से अभ्यर्थी डाउनलोड कर सकेंगे।

इन 12 जिलों में होंगे परीक्षा केंद्र

आयोग ने परीक्षा के लिए 12 जिलों में परीक्षा केंद्र रखे हैं, जिसमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रतलाम, सतना, सागर, शहडोल, बड़वानी, उज्जैन और बालाघाट शामिल हैं।

 

प्रदेश की भावांतर भुगतान योजना को मिला प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2026

भोपाल 

मध्यप्रदेश शासन की किसान हितैषी एवं नवाचार आधारित भावांतर भुगतान योजना-2025 को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 20 जून 2026 को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, अगस्त क्रांति मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना के मार्गदर्शन में भावांतर योजना-2025 तथा ई-मंडी योजना को एकीकृत डिजिटल ढांचे के अंतर्गत सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह पहल किसानों को मूल्य संरक्षण, त्वरित भुगतान और पारदर्शी कृषि विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भावांतर योजना-2025 के अंतर्गत सोयाबीन की खरीदी पूर्णतः ई-मंडी एप्लीकेशन के माध्यम से की गई। यह देश में पहली बार लागू की गई एक अभिनव व्यवस्था है जिसका उद्देश्य किसानों को बाजार भाव में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में न्यूनतम समर्थन मूल्य और वास्तविक बिक्री दर/मॉडल रेट के बीच के अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके।

मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल की ओर से यह सम्मान प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम के निर्देशन में सहायक संचालक योगेश नागले, गोविंद शर्मा एवं निरंजन सिंह द्वारा ग्रहण किया गया। दोनों एप्लीकेशन एन.आई.सी. भोपाल द्वारा विकसित की गई हैं।

पुरस्कार समारोह में अध्यक्ष प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद प्रो. एस. महेंद्र देव, अपर सचिव विधि एवं न्याय मंत्रालय डॉ. मनोज कुमार, संचालक इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनामिक रिलेशंस डॉ. शेखर ऐय्यर, महानिदेशक आरआईएस प्रो. सचिन कुमार शर्मा, तथा अध्यक्ष स्कॉच ग्रुप समीर कोचर सहित कई गणमान्य नागरिक एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की किसान कल्याण और कृषि विपणन सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है और राज्य की डिजिटल कृषि विपणन व्यवस्था की सफलता को रेखांकित करती है।

 

उज्जैन-सांवेर-इंदौर क्षेत्र के विकास का नया पर्याय बनेगा फोरलेन ग्रीन फील्ड कॉरीडोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इंदौर, उज्जैन और सांवेर सहित अन्य शहरों को 5 हजार 657 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात मिली है। यह प्रदेश की जनता के लिए ऐतिहासिक क्षण है। इंदौर के पितेृश्वर महादेव से बाबा महाकल तक आने के लिए सीधी सड़क का भूमि-पूजन हुआ है। यह परियोजना पीथमपुर को निमाड़ क्षेत्र में आगे दिल्ली-मुंबई इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ेगा और क्षेत्र के लिए आर्थिक समृद्धि का अहम मार्ग बनेगा। राज्य सरकार ने किसानों की मांग पर इसकी ऊंचाई कम की है, जिससे किसानों को भी आवागमन में लाभ मिलेगा। प्राचीन काल में इस मार्ग से वर्षभर साधु-संत और श्रद्धालु पैदल यात्रा करते थे। ग्रीन फील्ड कॉरीडोर उज्जैन-सांवेर-इंदौर क्षेत्र के विकास का नया पर्याय बनेगा। यह परियोजना सिंहस्थ के दृष्टिगत प्रदेश को बड़ी सौगात है। करीब 48 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का निर्माण लगभग 2 हजार 935 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केन्द्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री खट्टर के साथ सांवेर विधानसभा क्षेत्र के चंद्रावतीगंज में शनिवार को इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरीडोर का भूमि-पूजन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने विभिन्न योजना के हितग्राहियों को हितलाभ और सड़क सुरक्षा के मद्देनजर हेलमेट वितरित किए।

ग्रीन फील्ड कॉरीडोर विकास का बनेगा नया पर्याय

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरिडोर इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के समीप सिंहस्थ बायपास तक पहुंचेगा। इस मार्ग के बन जाने से इंदौर और उज्जैन के बीच आवागमन अधिक सुगम और तेज होगा, साथ ही सिंहस्थ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। फतेहाबाद और चंद्रावतीगंज इंदौर-उज्जैन के बीच व्यापार-व्यवसाय का प्रमुख केंद्र रहा है, ग्रीनफील्ड कॉरीडोर विकास का नया पर्याय बनेगा। यह रोड उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन सिटी के लिए नए सूर्योदय के समान है। अब इंदौर, उज्जैन, देवास, शाजापुर, धार और रतलाम तक 16 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले मेट्रोपॉलिटन एरिया में 6 रेलवे जंक्शन, 2 एयरपोर्ट, 4 हवाई पट्टी और 2 राजमार्ग शामिल होंगे। सड़क मार्ग, उद्योग-व्यापार-कृषि और रोजगार सहित सभी क्षेत्रों के विकास में अहम योगदान देता है। अब फतेहाबाद को रेलवे के डबल ट्रैक की भी सौगात मिलने जा रही है।

हेलमेट सुरक्षा अभियान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में दोपहिया वाहन चालकों का जीवन सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने हेलमेट सुरक्षा अभियान आरंभ किया है। सड़क हादसों के समय हेलमेट लोगों की जान बचाने में ईश्वरीय भू्मिका निभाता है। इसी क्रम में इंदौर प्रशासन द्वारा आज हेलमेट वितरण किया जा रहा है।

स्वनिधि योजना में 20 हजार व्यापारियों को 51 करोड़ रूपए किये जारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को 2 हजार 548 करोड़ रुपये से अधिक आवासों का भूमि-पूजन किया और प्रदेश में 992 करोड़ से निर्मित 38 हजार आवासों में गृह-प्रवेश कराया गया। इसके साथ ही 446 करोड़ की लागत से 116 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं 310.82 करोड़ की 37 परियोजनाओं का भूमि-पूजन भी किया। क्षेत्र के 20 हजार छोटे व्यापारियों को स्वनिधि योजना अंतर्गत 51 करोड़ रूपए राशि जारी की गई। कार्यक्रम में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत सीवर और जल निकासी की परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ और फायर ब्रिगेड के 36 स्टेशनों के लिये वाहन और उपकरण उपलब्ध कराए गए।

मध्यप्रदेश ने किसानों से सबसे अधिक गेहूं खरीदने का बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सनातन संस्कृति में गौमाता पूज्य है, यह हमें अपनी संस्कृति पर गर्व का अवसर देती है। राज्य सरकार ने वृंदावन गांव और गीता भवन तैयार करने का संकल्प लिया है। प्रदेश की लाड़ली बहनों के बैंक खातों में हर माह 15 तारीख से पहले 1500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार ने अनेक किसान हितैषी निर्णय लिए हैं। मध्यप्रदेश ने किसानों से सबसे अधिक गेहूं खरीदने का राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम किया है। प्रदेश के पौने 14 लाख किसानों से गेहूं उपार्जन कर प्रति क्विंटल 2625 रुपए का भुगतान किया है।

प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों के शासन में भारत ने बनाई अपनी विशिष्ट पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 12 वर्षों के शासन काल में भारत ने देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सबसे पहले नक्सलवाद से मुक्त होने वाला राज्य बना है। नक्सल उन्मूलन कर हमने समर्पण करने वालो को मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य किया है। आज देशभर से नक्सलवाद का सफाया हो चुका है। भारत सरकार देश के अंदर और सीमाओं को सुरक्षित रख रही है।

विगत 12 सालों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से आए बाहर : केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल

केंद्रीय मंत्री आवास एवं शहरी कार्य मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विरासत से विकास की प्रेरणा दी है और इसी को ध्येय बनाकर मध्यप्रदेश में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में उज्जैन में स्मार्ट सिटी के उत्कृष्ट कार्य हुए हैं, यह सराहनीय पहल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एक दूरदर्शी सोच रखने वाले मुख्यमंत्री हैं, जो मध्यप्रदेश को बहुत आगे ले जाएंगे। हमारी सांस्कृतिक विरासत के बिना हमारा गौरव शून्य हो जाएगा। उज्जैन देशभर में आस्था का प्रमुख केंद्र बनें, इसके लिए कार्य जारी है। प्रधानमंत्री मोदी ने काशी में विश्वनाथ धाम, अयोध्या में भव्यराम मंदिर और केदारनाथ धाम में विकास को नई दिशा दी है। देश में प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के कार्य काल में कई अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। भारत ने आज दुनिया के देशों को नेतृत्व दिया है। देश में गरीब-जरूरतमंदों को नि:शुल्क आवास, राशन और गैस कनेक्शन दिए गए हैं। विगत 12 सालों में भारत में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।

सिंहस्थ – 2028 में शिप्रा मैया के जल से आचमन औैर स्नान करेंगे श्रद्धालु

जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव भव्य और दिव्य सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए पूरे संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। उज्जैन में माँ शिप्रा के घाटों का निर्माण तेजी से पूर्ण किया जा रहा है। सिंहस्थ – 2028 में आने वाले श्रद्धालु शिप्रा मैया के जल से आचमन औैर स्नान करेंगे। सांवेर के 54 गांवों के किसान मां नर्मदा मैया के जल से सिंचाई कर रहे हैं, क्षेत्र के गांव-गांव तक नर्मदा जल पहुंचाने का कार्य जारी है। राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के मूल मंत्र के साथ हर वर्ग की चिंता करती है। कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास कैलाश विजयवर्गीय, नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्रीमती प्रतिमा बागरी, इंदौर सांसद शंकर लालवानी, उज्जैन-आलोट सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेश नाथ, राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार, विधायक मधु वर्मा, विधायक मनोज पटेल, उज्जैन महापौर मुकेश टटवाल, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

 

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा का रखें ध्यान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने सिंहस्थ : 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में 778 करोड़ रुपए राशि की लागत से किए जा रहे 29.15 किमी लंबे नवीन घाट निर्माण कार्य की प्रगति का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घाट निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ : 2028 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का सिंहस्थ अनुभव सनातन संस्कृति के वैभव के अनुरूप हो।

अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने नवीन घाट निर्माण कार्य की विस्तार से जानकारी दी। एसीएस डॉ. राजौरा ने बताया कि 29.15 किमी नवीन घाट का निर्माण 778 करोड़ रुपए राशि से किया जा रहा है। नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए 150 से अधिक स्थान चिन्हित किए गए हैं। नवीन घाट निर्माण कार्य अंतर्गत 18.20 किमी लंबी रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जा चुका है। लगभग 7 किमी नवीन घाट निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्य तेजी से प्रगतिरत है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, नगरीय आवास एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में नीम, रुद्राक्ष, पीपल के पौधे रोप कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हे कि प्रदेश वनों से आच्छादित रहे।

कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण, टनल मे उतर कर देखी गुणवत्ता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट का भी निरीक्षण किया। परियोजना के टनल भाग में उतरकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने चिंतामन जवासिया गांव के समीप स्थित शाफ्ट नंबर-2 पर फेज नंबर-3 के कार्य की विस्तृत जानकारी ली। एसीएस डॉ. राजेश राजौरा द्वारा योजना की जानकारी दी गई। टनल पहुंच एवं रखरखाव संबंधी तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी गई।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित जल को शहर में शिप्रा नदी के प्रमुख घाटों एवं तीर्थ स्थलों में मिलने से रोकना है, जिससे शिप्रा नदी का जल स्वच्छ बना रहे। परियोजना के अंतर्गत ग्राम जमालपुरा, तहसील उज्जैन में कान्ह नदी पर एक बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे दूषित जल को क्लोज डक्ट के माध्यम से 30.15 किमी दूर गम्भीर बांध के डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा।

परियोजना की लागत 919.94 करोड़ रुपए है। इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी (कट एंड कवर डक्ट: 18.15 किमी + टनल: 12.00 किमी) है। टनल भाग में 4 शाफ्टों का निर्माण पहुंच एवं सफाई तथा रखरखाव के लिए किया गया है। डक्ट का डी-आकार का क्रॉस सेक्शन, अधिकतम 40 क्यूसेक दूषित जल की निकासी क्षमता रखता है। परियोजना को आगामी 25 वर्ष तक की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद आगामी 15 वर्ष तक संचालन एवं संधारण का प्रावधान है।

वर्तमान में बैराज का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा हेड रेगुलेटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कट एंड कवर भाग की कुल 18.15 किमी लंबाई में से 4.50 किमी में प्री-कास्ट सेगमेंट्स का लेइंग कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है। 18.15 किमी में से 10.30 किमी लंबाई में लेइंग करने योग्य प्री-कास्ट सेगमेंट्स तैयार किए जा चुके हैं। टनल भाग के निर्माण के लिये चारों शाफ्टों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। टनल की कुल 12 किमी लंबाई में से 8.15 किमी की खुदाई कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की और कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अवलोकन एवं भ्रमण के समय महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापतिमती कलावती यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

 

योग : स्वस्थ मानवता, संतुलित प्रकृति और सतत भविष्य का आधार- राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल 

भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा ने विश्व को सदैव जीवन जीने की दिशा दी है। “वसुधैव कुटुम्बकम्” का भाव केवल एक दर्शन नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का मार्ग है। इसी परंपरा का अमूल्य उपहार है — योग। आज योग केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का माध्यम बन चुका है।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को “अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस” के रूप में मान्यता मिलना भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है। यह केवल एक दिवस की औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवता को बेहतर भविष्य देने का वैश्विक अभियान है। प्रधानमंत्री जी ने योग को जन-जन तक पहुँचाकर उसे आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाया है। आज विश्व के करोड़ों लोग योग को स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति के लिए अपना रहे हैं।

योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन का समग्र विज्ञान

आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, असंतुलित जीवनशैली, मानसिक तनाव और बढ़ती बीमारियों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन का समग्र विज्ञान बनकर सामने आता है। योग हमें यह सिखाता है कि जीवन केवल उपभोग का नाम नहीं है। भविष्य केवल संसाधनों के दोहन से सुरक्षित नहीं होगा। सतत विकास का अर्थ है — संसाधनों का सजग, संवेदनशील और विवेकपूर्ण उपयोग।

प्रकृति का सम्मान और शरीर का सम्मान — दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जिस प्रकार प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है, उसी प्रकार अपने शरीर और मन के संतुलन को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। योग हमें यही संतुलन सिखाता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए “Lifestyle for Environment (LiFE)” के मंत्र और योग का दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं। LiFE हमें जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है और योग उस जीवनशैली को व्यवहार में उतारने की शक्ति देता है।

 मानवता का भविष्य उपभोग में नहीं, संयमित और सजग जीवन में निहित

आज दुनिया में संसाधनों की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, लेकिन मानवता का भविष्य केवल अधिक उपभोग में नहीं, बल्कि संयमित और सजग जीवन में निहित है। योग हमें भीतर से अनुशासित बनाता है। यह हमें सिखाता है कि सुख केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति से प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए “पंच प्रण” के संकल्पों में विकसित भारत का निर्माण, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और नागरिक कर्तव्य का भाव — इन सभी का आधार स्वस्थ और जागरूक नागरिक ही हो सकते हैं। योग इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम है। जब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होगा, तभी वह राष्ट्र निर्माण में अपनी सर्वोत्तम भूमिका निभा सकेगा।

“फिट इंडिया मूवमेंट” भी इसी सोच का विस्तार है। स्वस्थ भारत ही सक्षम भारत बन सकता है। आज स्वास्थ्य का अर्थ केवल अस्पताल और उपचार नहीं रह गया है। आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्र अब “Preventive Healthcare” यानी रोगों की रोकथाम बन रहा है। यदि हम अपनी जीवनशैली को संतुलित रखें, नियमित योग करें, मानसिक तनाव को नियंत्रित करें और प्रकृति के अनुरूप जीवन जिएँ, तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। मध्यप्रदेश में सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को केवल उपचार तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। योग, आयुष, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और जन-जागरूकता को हम स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं। हमारा प्रयास है कि नागरिक लंबे जीवन के साथ स्वस्थ, सक्रिय और गरिमापूर्ण जीवन जिएँ।

आज विश्व के सामने एक बड़ी चुनौती “मानसिक स्वास्थ्य” भी है। आधुनिक जीवन में भौतिक सुविधाएँ बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक शांति कम होती जा रही है। चारों ओर तनाव, प्रतिस्पर्धा, असुरक्षा और असंतुलन दिखाई देता है। ऐसे समय में योग हमें भीतर से जोड़ने का माध्यम बनता है। योग केवल शरीर को स्वस्थ और सशक्त बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया है।

जब व्यक्ति स्वयं के भीतर स्थिर होता है, तभी वह समाज और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनता है। योग हमें प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संतुलित दृष्टि सिखाता है। यह हमें बाहरी अराजकता के बीच भी भीतर की शांति खोजने की क्षमता देता है। यही कारण है कि आज योग की आवश्यकता केवल भारत को नहीं, सम्पूर्ण विश्व को है।

जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भी योग की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। बढ़ता प्रदूषण, असंतुलित खान-पान, निष्क्रिय जीवनशैली और मानसिक तनाव मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। योग शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से संतुलित और भावनात्मक रूप से स्थिर बनाता है।

स्वस्थ मानव संसाधन ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। केवल आर्थिक संसाधन किसी देश को महान नहीं बनाते। यदि नागरिक स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और सकारात्मक होंगे, तभी राष्ट्र दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। इसलिए योग केवल व्यक्तिगत अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी माध्यम है।

आज आवश्यकता है कि हम योग को एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ। बच्चों से लेकर युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक, हर आयु वर्ग के लिए योग उपयोगी है। विशेष रूप से वृद्धजन स्वास्थ्य और जेरियाट्रिक केयर के संदर्भ में योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ और शांतिपूर्ण वृद्धावस्था केवल चिकित्सा से नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली से संभव है। योग वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय, आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से सकारात्मक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भारत ने सदैव विश्व को केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग दिया है। योग उसी मार्ग का प्रकाश है। यह शरीर, मन, समाज और प्रकृति — सभी के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया है। यदि मानवता को स्वस्थ, शांतिपूर्ण और सतत भविष्य की ओर बढ़ना है, तो योग को जीवन का हिस्सा बनाना ही होगा।

आइए, हम सब योग को केवल अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन दर्शन के रूप में अपनाएँ और स्वस्थ मानवता, संतुलित प्रकृति तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ।

 

राष्ट्रपतिमुर्मु के मुख्य आतिथ्य में जबलपुर में होगा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

भोपाल

राष्ट्रपतिदौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस राज्य स्तरीय कार्यक्रम रविवार 21 जून को जबलपुर में सदर स्थित गैरिसन ग्राउंड में सुबह 6 बजे से आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम “स्वस्थ आयु के लिये योग” की थीम पर आयोजित किया जा रहे सामूहिक योग में लगभग 5 हजार नागरिकों की सहभागिता होगी। साथ ही 31 स्कूलों के लगभग 3 हजार 400 छात्र-छात्राएं भी शामिल रहेंगे।

कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवडा़, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार शामिल होंगे।

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया है। इस वर्ष योग दिवस “स्वस्थ आयु के लिए योग” की अवधारणा को समर्पित है। आज पूरे विश्व में योग के लिये एक अदभुत वातावरण बना है। पूरा विश्व आज योग कर रहा है। भारतवर्ष के नागरिकों के लिये गौरव का क्षण है। योग का विधिवत विज्ञान यहाँ सुरक्षित है। योग दर्शन की विरासत से आज पूरा विश्व समाज लाभान्वित हो रहा है। नई पीढी इस अलौकिक समय के साक्षी बन रही हैं। हम आज गौरव और आनंद से भरे हैं। योग धर्म, जाति और रंग की सीमाओं से परे है। भारत का गौरव बढाने वाला क्षण तो है ही बल्कि पूरे विश्व को परम चेतना के प्रति जाग्रत करने का क्रांतिकारी कदम भी है।

रविवार को होगा रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर का 36वां दीक्षांत समारोह 21 जून को राष्ट्रपतिद्रौपदी मुर्मु के मुख्य आतिथ्य में ऐतिहासिक एवं भव्य स्वरूप में आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल पटेल करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा उच्च शिक्षा मंत्री परमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।

141 विद्यार्थियों को मिलेंगे 240 स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के 141 मेधावी विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। राष्ट्रपतिमुर्मु चयनित विद्यार्थियों को 20 स्वर्ण पदक प्रदान करेंगी।

182 शोधार्थियों को मिलेगी पीएचडी सहित विभिन्न उपाधियां

समारोह में 182 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त 3 विद्वानों को डी-लिट, एक को डीएससी तथा एक विशिष्ट व्यक्तित्व को मानद उपाधि प्रदान किए जाने का प्रस्ताव है। विभिन्न संकायों के पात्र विद्यार्थियों को स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधियां भी प्रदान की जाएंगी।

राष्ट्रपति सहित विशिष्ट अतिथियों के साथ ग्रुप फोटो रहेगा विशेष आकर्षण

दीक्षांत समारोह का एक विशेष आकर्षण स्वर्ण पदक धारकों एवं उपाधि प्राप्तकर्ताओं का राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री के साथ ग्रुप फोटो होगा। यह अवसर विद्यार्थियों के लिए जीवनभर की अमूल्य स्मृति बनेगा।

 

ओल्ड भोपाल होलसेल रेडिमेड एवं होजरी व्यापारी संघ को मिला नया नेतृत्व

विवेक झा, भोपाल। ओल्ड भोपाल होलसेल रेडिमेड एवं होजरी व्यापारी संघ के चुनाव संपन्न होने के बाद नए पदाधिकारियों का शपथ ग्रहण समारोह अग्रवाल विश्रांति भवन में गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में गुरुमुख दास चावला ने अध्यक्ष पद की शपथ ली, जबकि मनोज जैन आर.एम. लगातार पांचवीं बार सचिव (मंत्री) चुने गए। इस अवसर पर व्यापारियों ने व्यापारिक हितों के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए 11 हजार पौधे लगाने का सामूहिक संकल्प भी लिया।

दीप प्रज्ज्वलन से हुई समारोह की शुरुआत

शपथ ग्रहण समारोह का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में शहर के अनेक व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य नई कार्यकारिणी का स्वागत करने के साथ-साथ व्यापारिक एकता और सामाजिक दायित्वों को आगे बढ़ाने का संदेश देना भी था।

व्यापार के साथ सामाजिक सरोकारों पर रहेगा जोर

समारोह के दौरान नवनिर्वाचित पदाधिकारियों और उपस्थित व्यापारियों ने शिक्षा, चिकित्सा और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। विशेष रूप से 11 हजार पौधे लगाने का निर्णय लेते हुए संस्था ने हरित भोपाल के निर्माण में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई।

गोविंद गोयल बोले— व्यापारी समाज बदलाव का वाहक

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष गोविंद गोयल ने नवनिर्वाचित टीम को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि व्यापारिक संगठन केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज के विकास और जनकल्याण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारिक हितों के साथ सामाजिक सरोकार और सहयोग की भावना से किए गए कार्य अन्य संस्थाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं।

मनोज जैन आर.एम. ने रखी संगठन की प्राथमिकताएं

समारोह का संचालन करते हुए सचिव मनोज जैन आर.एम. ने संगठन की भावी कार्ययोजना और एजेंडे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि व्यापारी हितों की रक्षा, उपभोक्ता जागरूकता, व्यापारिक समस्याओं के समाधान तथा सामाजिक सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाना नई कार्यकारिणी की प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने सभी सदस्यों से संगठन को और मजबूत बनाने में सक्रिय सहयोग की अपील की।

एसीपी बिट्टू सिंह सहित कई गणमान्य रहे मौजूद

शपथ ग्रहण समारोह में एसीपी बिट्टू सिंह की विशेष उपस्थिति रही। इसके अलावा चेंबर के महामंत्री ललित तातेड, संस्थापक अध्यक्ष मनोज बांगा, निवर्तमान अध्यक्ष अशोक माटा, कांग्रेस नेता महेश मालवीय सहित अनेक गणमान्य नागरिक और व्यापारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

नई कार्यकारिणी में इन पदाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

नई कार्यकारिणी में गुरुमुख दास चावला को अध्यक्ष, मनोज जैन आर.एम. को सचिव, प्रकाश और अनुज जैन को उपाध्यक्ष, विष्णु अग्रवाल को कोषाध्यक्ष, गोपाल पंजवानी को सह-सचिव तथा अजय जैन को सह-कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पर्यावरण संरक्षण को बनाया प्रमुख एजेंडा

संगठन ने स्पष्ट किया कि आगामी कार्यकाल में व्यापारिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। 11 हजार पौधों का रोपण अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा, जिसमें व्यापारी समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्य संकल्प

  • व्यापारिक हितों की प्रभावी पैरवी
  • शिक्षा एवं चिकित्सा क्षेत्र में सामाजिक योगदान
  • पर्यावरण संरक्षण के लिए 11,000 पौधे लगाने का अभियान
  • व्यापारी एकता और उपभोक्ता हितों को मजबूत करना

15 लाख से अधिक युवाओं को मिली बड़ी सौगात: प्रधानमंत्री ने PM-VBRY के तहत 2,400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि जारी की

विवेक झा, भोपाल। देश में औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और युवाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शुक्रवार को प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) के तहत 15 लाख से अधिक लाभार्थियों के खातों में लगभग 2,400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि हस्तांतरित की। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से यह राशि जारी की और रोजगार सृजन को विकसित भारत की आधारशिला बताया।

कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देशभर के 200 क्षेत्रीय केंद्रों पर किया गया। मध्यप्रदेश में भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) और एचईजी सभागार, मंडीदीप में भी विशेष आयोजन हुए, जहां बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि, नियोक्ता, कर्मचारी और युवा शामिल हुए।

भोपाल और मंडीदीप में रोजगार उत्सव जैसा माहौल

भोपाल के मैनिट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि मंडीदीप में भोजपुर विधायक सुरेंद्र पटवा ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। दोनों स्थानों पर रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं, उद्योग संगठनों, नियोक्ताओं, सरकारी अधिकारियों और ईपीएफओ के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।

कार्यक्रम के दौरान एक प्रेरक पहल के रूप में विभिन्न नियोक्ताओं ने 25 से अधिक नव-नियुक्त कर्मचारियों को मौके पर ही रोजगार पत्र (Employment Letters) प्रदान किए। इससे उपस्थित युवाओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला और योजना के प्रत्यक्ष लाभ का प्रदर्शन हुआ।

100 से अधिक नियोक्ता और 700 कर्मचारी बने कार्यक्रम का हिस्सा

भोपाल और मंडीदीप में आयोजित दोनों क्षेत्रीय कार्यक्रमों में 100 से अधिक बड़े नियोक्ता शामिल हुए, जबकि करीब 700 कर्मचारियों और लाभार्थियों ने सहभागिता की। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने योजना को रोजगार बढ़ाने और कुशल युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

प्रधानमंत्री बोले – विकसित भारत का सबसे मजबूत आधार है युवा रोजगार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि औपचारिक रोजगार और युवा सशक्तिकरण विकसित भारत के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि 15 लाख से अधिक युवाओं के खातों में सीधे 2,400 करोड़ रुपए की राशि का हस्तांतरण सरकार की पारदर्शी और तेज़ कार्यप्रणाली का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि पहली बार संगठित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता देकर सरकार उद्योगों की जरूरतों और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच की दूरी को कम कर रही है। इससे सम्मानजनक रोजगार और आत्मनिर्भरता दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा विशेष प्रोत्साहन

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजना में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। इससे उद्योगों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए कर्मचारियों की भर्ती के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने कौशल को लगातार विकसित करें और नए अवसरों का लाभ उठाकर देश की आर्थिक प्रगति में भागीदार बनें।

श्रम मंत्री ने गिनाईं रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की उपलब्धियां

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत तेजी से विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि चार श्रम संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले दशक में सामाजिक सुरक्षा का दायरा 19 प्रतिशत से बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो चुका है और वर्ष 2014 से 2024 के बीच लगभग 17 करोड़ रोजगार सृजित हुए हैं। साथ ही, भारत की बेरोजगारी दर घटकर लगभग 3.1 प्रतिशत रह गई है, जो वैश्विक औसत से काफी कम है।

भोपाल की झलक

गौतम टेटवाल बोले – कौशल विकास और रोजगार को मिलेगा नया बल

मैनिट, भोपाल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश के कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की यह योजना प्रदेश के युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास प्रणाली को लगातार मजबूत कर रही है ताकि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

उन्होंने विश्वास जताया कि PM-VBRY विशेष रूप से मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा रोजगार सृजन की गति को तेज करेगी।

मंडीदीप में सुरेंद्र पटवा ने दी दीर्घकालिक रोजगार की सीख

मंडीदीप में आयोजित कार्यक्रम में विधायक सुरेंद्र पटवा ने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी संस्थान में लंबे समय तक कार्य कर अपने कौशल और अनुभव को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई रोजगार योजनाएं युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं और इनका अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।

लाभार्थियों ने कहा – योजना बनी आर्थिक संबल

कार्यक्रम में शामिल लाभार्थियों और नियोक्ताओं ने योजना के सकारात्मक प्रभाव साझा किए। नियोक्ताओं ने कहा कि दो वर्षों तक मिलने वाले प्रोत्साहन से नए कर्मचारियों की नियुक्ति आसान हुई है और भर्ती लागत में कमी आई है।

वहीं पहली बार औपचारिक रोजगार पाने वाले युवाओं ने कहा कि 15,000 रुपए तक की प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता ने नौकरी की शुरुआती अवधि में उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है। उनका मानना है कि इससे वे आत्मविश्वास के साथ अपने करियर की शुरुआत कर पा रहे हैं।

क्या है PM-VBRY?

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) का उद्देश्य औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देना, पहली बार नौकरी करने वाले युवाओं को आर्थिक सहायता देना और नियोक्ताओं को अतिरिक्त रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत पात्र युवाओं को 15,000 रुपए तक का लाभ दिया जाता है, जबकि अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले नियोक्ताओं को दो वर्षों तक प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाती है। विनिर्माण क्षेत्र के लिए यह सहायता अतिरिक्त दो वर्षों तक बढ़ाई गई है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं

  • 15 लाख से अधिक लाभार्थियों को 2,400 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि।
  • पहली बार नौकरी करने वाले पात्र युवाओं को 15,000 रुपए तक का लाभ।
  • अतिरिक्त भर्ती करने वाले नियोक्ताओं को दो वर्षों तक प्रोत्साहन।
  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अतिरिक्त दो वर्ष की सहायता।
  • भोपाल और मंडीदीप में 100 से अधिक नियोक्ता और करीब 700 प्रतिभागियों की मौजूदगी।
  • लाइव कार्यक्रम के दौरान 25 से अधिक युवाओं को रोजगार पत्र वितरित किए गए।
  • योजना का उद्देश्य रोजगार सृजन, कार्यबल का औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करना है।

UIMR मास्टर प्लान से बदलेगी MP के 6 जिलों की तस्वीर, 5 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

इंदौर.

मध्य प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने के लिए मालवा अंचल से विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047′ के संकल्प को गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के सबसे बड़े क्षेत्रीय विकास मॉडल यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) की रूपरेखा साझा की है।

सरकार ने इस महा-परियोजना के दायरे को बढ़ाते हुए अब 16 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया है, जिससे मालवा के 6 जिलों की करीब सवा करोड़ आबादी सीधे लाभान्वित होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी योजना केवल महानगरों के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य इंदौर की आर्थिक तरक्की का लाभ आसपास के छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाना है। इस रणनीति के तहत इंदौर को मुख्य ग्रोथ इंजन बनाकर उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जिलों का संतुलित व आधुनिक विकास सुनिश्चित किया जाएगा। इस वृहद क्षेत्र में कुल 38 तहसीलें और 2,781 गांव शामिल किए गए हैं।

5 लाख युवाओं को रोजगार और 14 नए इंडस्ट्रियल पार्क
योजना का सबसे मजबूत पक्ष रोजगार और औद्योगिक क्लस्टर्स का निर्माण है। क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार 13,500 हेक्टेयर से अधिक का विशाल लैंड बैंक तैयार कर रही है, जहां 14 नए औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे। इस कदम से मालवा अंचल में लगभग 5 लाख युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होने का अनुमान है।

शहरों को विशिष्ट औद्योगिक पहचान दी जाएगी:
पीथमपुर: इसे इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में ढाला जाएगा।
उज्जैन: यहां की विक्रम उद्योगपुरी को औद्योगिक गतिविधियों के मुख्य केंद्र के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।
रतलाम: इस जिले को बड़े लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट (निर्यात) हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

’60 मिनट एक्सेस’ और दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़ाव
क्षेत्रीय परिवहन को सुगम बनाने के लिए ’60 मिनट एक्सेस’ मॉडल की परिकल्पना की गई है। इसके तहत पूरे 16 हजार वर्ग किलोमीटर के दायरे में ऐसी उन्नत सड़क और परिवहन प्रणाली तैयार होगी, जिससे कोई भी नागरिक एक घंटे के भीतर मुख्य आर्थिक केंद्रों तक पहुंच सकेगा। इसके लिए इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे और मेट्रो के विस्तार जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही, इस पूरे रीजन को सीधे दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान होगी।

कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए मार्गों का निर्माण
उज्जैन की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए विभिन्न मार्गों का निर्माण भी किया जा रहा है। शहर की आंतरिक सड़कों का निर्माण एवं चौड़ीकरण कार्य भी जारी है। सिंहस्थ के लिए 5 रेलवे ओवरब्रिज और 17 नदी पुलों का निर्माण किया जा रहा है। सिंहस्थ के दौरान रियल टाइम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात…
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 19, 2026

देश का अनूठा ‘लैंड पूलिंग’ मॉडल और ब्लू-ग्रीन पॉलिसी
भूमि अधिग्रहण को लेकर सरकार ने एक अभिनव और किसान-हितैषी दृष्टिकोण अपनाया है। इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए देश का पहला अनूठा लैंड पूलिंग मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत 17 गांवों के किसानों से जमीन तो ली जाएगी, लेकिन विकास कार्यों के बाद उनकी 60 प्रतिशत भूमि पूरी तरह विकसित अवस्था में वापस सौंप दी जाएगी। इससे किसान सिर्फ अपनी जमीन खोने वाले पक्षकार नहीं, बल्कि विकास के सीधे हिस्सेदार बनेंगे।
पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट को ‘ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट’ नीति पर आधारित किया गया है। नर्मदा नदी सहित सभी प्राकृतिक जल स्रोतों और जंगलों के आसपास बिना अनुमति के निर्माण पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। उद्योगों के लिए ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ नीति अनिवार्य होगी और नए क्लस्टर्स को पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

अध्यात्म और डेटा-आधारित वैज्ञानिक नियोजन
मालवा की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार ने वर्ष 2047 तक पर्यटन क्षेत्र का राज्य की जीडीपी में 10 प्रतिशत योगदान तय करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को मिलाकर एक भव्य आध्यात्मिक और हेरिटेज टूरिज्म सर्किट का निर्माण किया जाएगा, जिसमें नर्मदा रिवरफ्रंट और रूरल टूरिज्म के जरिए स्थानीय लोगों को आय के साधन मिलेंगे। अव्यवस्थित शहरीकरण और अनियोजित बसाहट की चुनौतियों से निपटने के लिए ‘मध्य प्रदेश महानगरीय क्षेत्र नियोजन एवं विकास अधिनियम-2025’ के तहत एक हाई-टेक मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनाई जाएगी। यह विंग भविष्य की जनसंख्या, ट्रैफिक और बुनियादी जरूरतों का वैज्ञानिक व डेटा-आधारित विश्लेषण कर एडवांस प्लानिंग करेगी, जिससे आने वाले दशकों में भी यह रीजन देश के सबसे सुव्यवस्थित और आधुनिक क्षेत्रों में शुमार रह सके।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu