लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त कल जारी, ₹1500 के साथ CM मोहन यादव दे सकते हैं नई सौगात

भिंड

मध्य प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई रविवार को भिंड के दौरे पर रहेंगे। वे यहां लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त जारी करने आ रहे हैं। बता दें कि इस बार लाड़ली बहना योजना की किस्त के 1500 रुपए की राशि भेजने और बहनों के साथ संवाद का कार्यक्रम भिंड जिले के लहार में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम के बाद सीएम लहार में भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा के घर जाएंगे, जहां वे मातृ शोक व्यक्त करने पहुंचेंगे।

पहले महेगांव से भेजने वाले थे 1500 रुपए

बता दें कि लाड़ली बहना योजना की 1500 रुपए राशि भेजने का कार्यक्रम पहले मेहगांव के मंडी परिसर में होना तय था।  मंत्री राजेश शुक्ला, कलेक्टर किरोड़ीलाल मीना समेत जिले के अन्य अधिकारियों और जन्मप्रतिनिधियों के जायजे के बाद और बारिश की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम का स्थल को बदला गया है।

लहार में दो घंटे का कार्यक्रम (Ladli Behna Yojana 38th installment)
जानकारी के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव लहार में दो घंटे रुकेंगे। लाडली बहना योजना का कार्यक्रम (Ladli Behna Yojana Program) यहां 1 बजे शुरू होकर 3 बजे संपन्न होगा। लहार में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी गईं। वहीं विधायक अम्बरीश ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक को लेकर भी दिशा-निर्देश दे दिए हैं।

प्रदेश की लाड़ली बहनों को नई सौगात देने की तैयारी
मोहन सरकार ने प्रदेश में लखपति गोपालक दीदी योजना (Ladli Behna Yojana and lakhpati gopalak didi yojana) शुरू की है। इसमें महिलाओं को मुफ्त में दुधारू नस्ल की गाय व भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए अलग से बजट जरूरी नहीं होगा, बल्कि हितग्राहियों के घरों में गैर नस्लीय गाय-भैसों की पहचान कर उनका कृत्रिम तकनीक से उच्च नस्ल से गर्भाधान कराया जाएगा। इस तरह उच्च नस्ल की बछिया और पड़िया का जन्म होगा और नस्ल सुधार के जरिए बहनाओं के घरों में अच्छी नस्ल के दुधारू मवेशी तैयार होंगे।

प्रारंभिक चरण में सरकार का दावा है कि इस तरह महिलाओं के घरों में उच्च नस्ल की गाय और भैंसों से अतिरिक्त दूध मिलेगा, सालाना 3 से 4 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी।

कैसे मिलेगा योजना का लाभ?

– अब ज्यादा फोकस गैर नस्लीय मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान पर होगा। विकासखंडों को लक्ष्य दिए।

– प्रशिक्षण सत्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी, गैर नस्लीय मवेशियों की पहचान के लिए अभियान चलाया जाएगा।

– जो मैदानी अमला काम नहीं कर रहा, उन्हें हटाया जाएगा। कृत्रिम गर्भाधान किट वापस लेने होंगे।

– विकासखंड स्तर पर दक्षता मूल्यांकन समिति होंगी, इसमें हर माह समीक्षा होंगी। प्रत्येक पंचायत में एक मैत्री कार्यकर्ता होने चाहिए।

गांव की अर्थव्यवस्था को बदलने का मॉडल
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि यह योजना केवल एक डेयरी विकास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदलने का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक मॉडल है। इसके लिए प्रत्येक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए हैं। मासिक समीक्षा करेंगे। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में यह बेहद असरदार होगी।

MP Weather: अगले 3 दिन हल्की बारिश, फिर अगले हफ्ते भारी बारिश का अलर्ट; 30 जिलों में सामान्य से ज्यादा बरसात

भोपाल 

मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय मानसूनी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके चलते अगले तीन दिन तक अधिकांश जिलों में रिमझिम और हल्की बारिश होगी। शनिवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत सभी 55 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। कई स्थानों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

 14 जुलाई से फिर बदलेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक, पाकिस्तान के ऊपर नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश में दिखाई देगा। इसी वजह से 14 जुलाई से कुछ जिलों में एक बार फिर भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

खरीफ फसलों के लिए राहत भरा मौसम
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल तेज बारिश में आई कमी खरीफ फसलों के लिए फायदेमंद रहेगी। लगातार बारिश से कई जिलों के खेतों में पानी भर गया था, जिससे फसलों में गलन और नुकसान का खतरा बढ़ने लगा था। अब हल्की बारिश रहने से जलभराव कम होगा और फसलों को राहत मिलेगी।

पाक में मानसून का नया सिस्टम एक्टिव, एमपी में दिखेगा असर
पाकिस्तान के ऊपर एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है, जिसका असर अगले सप्ताह मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देगा। विभाग का अनुमान है कि 14 जुलाई से प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर भारी बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम के बदलते मिजाज पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए अच्छे संकेत
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल तेज बारिश में आई यह कमी कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों के खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई थी, जिससे खरीफ फसलों में गलन और नुकसान की आशंका बढ़ने लगी थी। अब यदि कुछ दिन हल्की बारिश होती है तो खेतों से अतिरिक्त पानी निकल सकेगा और फसलों को बेहतर बढ़वार के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा।

प्रदेश में 9.5 इंच बारिश दर्ज 
बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून में सामान्य से कम वर्षा होने के बावजूद जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में अच्छी बारिश ने पूरे प्रदेश की स्थिति बदल दी है। अब तक मध्य प्रदेश में लगभग 240 मिलीमीटर यानी करीब 9.5 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 222.1 मिलीमीटर मानी जाती है। इस तरह प्रदेश में औसत से लगभग 8 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से 24 प्रतिशत ज्यादा वर्षा हुई है, जबकि पूर्वी मध्य प्रदेश अभी भी सामान्य से करीब 8 प्रतिशत पीछे चल रहा है।

सबसे अधिक वर्षा देवास जिले में दर्ज
प्रदेश में पूरे मानसून सीजन के दौरान औसतन 37.3 इंच बारिश होती है। इस बार अब तक सबसे अधिक वर्षा देवास जिले में दर्ज की गई है, जहां सामान्य से 115 प्रतिशत अधिक यानी करीब 18 इंच बारिश हो चुकी है। हरदा में लगभग 15 इंच, इंदौर और सीहोर में करीब 14-14 इंच तथा राजधानी भोपाल में 13.1 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई है। दूसरी ओर, आलीराजपुर प्रदेश का सबसे कम बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां अब तक केवल करीब 2.25 इंच वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले सप्ताह मानसून दोबारा सक्रिय होने के बाद बारिश के आंकड़ों में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।

इन जिलों में सामान्य से ज्यादा और कम बारिश
अब तक आगर-मालवा, भोपाल, इंदौर, देवास, गुना, ग्वालियर, हरदा, खंडवा, खरगोन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा, छिंदवाड़ा, पन्ना और सिवनी समेत कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। वहीं अनूपपुर, बालाघाट, जबलपुर, कटनी, मंडला, रीवा, सागर, सतना, सीधी, सिंगरौली, नर्मदापुरम, रायसेन, शिवपुरी और कुछ अन्य जिलों में अभी भी सामान्य से कम वर्षा हुई है। 

जुलाई ने बदली बारिश की तस्वीर
जून में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद जुलाई के शुरुआती नौ दिनों में अच्छी वर्षा ने स्थिति बदल दी। प्रदेश में अब तक करीब 240 मिलीमीटर (9.5 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य 222.1 मिलीमीटर से करीब 8 प्रतिशत अधिक है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 24 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है, जबकि पूर्वी हिस्से में अभी भी 8 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है।

देवास सबसे आगे, भोपाल-इंदौर में भी अच्छी बारिश
प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इस सीजन में देवास सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 115 प्रतिशत अधिक यानी करीब 18 इंच बारिश हो चुकी है। हरदा में 15 इंच, इंदौर और सीहोर में 14 इंच, जबकि भोपाल में 13.1 इंच वर्षा दर्ज की गई है। दूसरी ओर, आलीराजपुर में सबसे कम करीब 2.25 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। 

2023 की हार के बाद अब टिकट भी कटा, क्या दतिया में खत्म हो रहा है नरोत्तम मिश्रा का सियासी दौर?

दतिया

दतिया का उपचुनाव अब सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है. इसने ग्वालियर-चंबल की राजनीति में सबसे बड़ी बहस छेड़ दी है. बीजेपी ने अपने सबसे चर्चित नेताओं में शामिल पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतार दिया है. जिससे दतिया में बवाल मच गया और गुस्साए समर्थकों ने हाईवे जाम कर दिया. वहीं समर्थकों को जब पुलिस टीम हटाने गई तो पथराव कर दिया. जिससे कई पुलिसकर्म भी घायल हो गए.  जिसके बाद बवालियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोडे़. साथ ही कई को हिरासत में भी लिया है. नरोत्तम के टिकट कटने से सवाल सिर्फ इतना नहीं कि टिकट किसे मिला, बल्कि यह भी है कि जिस नेता ने 15 साल तक दतिया का प्रतिनिधित्व किया, मंत्री रहे, प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे, उसी पर पार्टी ने आखिर भरोसा क्यों नहीं जताया?

दरअसल नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक रिश्ता सिर्फ दतिया से नहीं, बल्कि ग्वालियर-चंबल की राजनीति से भी गहराई से जुड़ा रहा है. उनका पैतृक घर डबरा में है. वर्ष 2008 के परिसीमन में डबरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद उन्होंने दतिया विधानसभा का रुख किया. बीजेपी के टिकट पर 2008, 2013 और 2018 में लगातार चुनाव जीते और शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। 

2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए थे नरोत्तम मिश्रा
हालांकि 2023 का विधानसभा चुनाव उनकी राजनीति का सबसे बड़ा झटका साबित हुआ. तत्कालीन गृह मंत्री रहते हुए वे कांग्रेस के राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए. इसके बाद राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने से दतिया सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई. राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक यही चर्चा रही कि बीजेपी एक बार फिर नरोत्तम मिश्रा पर दांव लगाएगी. पार्टी के भीतर भी उनका नाम प्रमुख दावेदार माना जा रहा था. लेकिन उम्मीदवारों की सूची जारी हुई तो तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी। 

टिकट मिला आशुतोष तिवारी को और यहीं से शुरू हो गई नई राजनीतिक बहस
बीजेपी ने इस फैसले की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है. लेकिन राजनीतिक चर्चाओं और पार्टी सूत्रों के हवाले से कई कारण सामने आ रहे हैं. इनमें 2023 की हार, स्थानीय स्तर पर एंटी-इन्कम्बेंसी, संगठन का आंतरिक फीडबैक, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और नए सामाजिक समीकरणों पर दांव जैसे पहलुओं की चर्चा है. इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

आशुतोष तिवारी को अपेक्षाकृत नया चेहरा माना जाता है. माना जा रहा है कि पार्टी इस चुनाव में सिर्फ उम्मीदवार नहीं बदल रही, बल्कि यह संदेश भी देना चाहती है कि अब जीत की संभावना, स्थानीय स्वीकार्यता और संगठन की रणनीति वरिष्ठता से अधिक महत्वपूर्ण होगी. हालांकि टिकट बदलते ही दतिया में विरोध भी सामने आया. नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने प्रदर्शन किए, झांसी-ग्वालियर हाईवे पर जाम लगाया और संगठन के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरें भी सामने आईं। 

ओबीसी मतदाता चुनाव में निभाते हैं अहम भूमिका
यह संकेत है कि चुनौती अब सिर्फ कांग्रेस से मुकाबले की नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की भी है. दतिया विधानसभा में करीब ढाई लाख मतदाता हैं. अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, कुशवाह, यादव, ठाकुर, वैश्य और अन्य ओबीसी वर्ग चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभाते हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस बार इन्हीं सामाजिक समीकरणों को नए तरीके से साधने की कोशिश कर रही है। 

दूसरी ओर कांग्रेस इसे बीजेपी की अंदरूनी असहमति बताकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश में है. वहीं आजाद समाज पार्टी की मौजूदगी मुकाबले को और रोचक बना सकती है. एक समय था जब दतिया में चुनाव का मतलब नरोत्तम मिश्रा माना जाता था. लेकिन इस उपचुनाव ने यह संदेश जरूर दिया है कि राजनीति में कोई सीट किसी एक नेता की स्थायी जागीर नहीं होती. चुनावी राजनीति में अंतिम फैसला संगठन का होता है और संगठन का पहला पैमाना जीत होता है। 

बीजेपी के लिए चुनैती बनी दतिया सीट
दतिया का उपचुनाव अब सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं है. यह चुनाव इस बात की भी परीक्षा है कि क्या बीजेपी का नया प्रयोग सफल होगा? क्या नरोत्तम मिश्रा अपने समर्थकों के साथ पूरी ताकत से पार्टी के लिए प्रचार करेंगे और क्या ग्वालियर-चंबल की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन का नया अध्याय शुरू हो चुका है. इन सभी सवालों के जवाब अब 30 जुलाई के मतदान और 3 अगस्त को आने वाले नतीजों में मिलेंगे। 

दतिया क्यों है हाई-प्रोफाइल सीट?
वर्षों तक नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक गढ़. 2008, 2013 और 2018 में लगातार विधायक बने. शिवराज सरकार में गृह मंत्री समेत कई अहम विभाग संभाले. 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से चुनाव हार गए. कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने से सीट रिक्त हुई है. जिसके लिए 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। 

आशुतोष तिवारी पर दांव क्यों?
अपेक्षाकृत नया चेहरा और संगठन में सक्रिय भूमिका है. ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति है. सोशल इंजीनियरिंग के जरिए नया नेतृत्व तैयार करने की कोशिश भी है. दतिया में करीब 2.40 लाख मतदाता हैं. जिननें अनुसूचित जाति : 58–60 हजार, ब्राह्मण : 33–35 हजार, जाटव-अहिरवार : 33–40 हजार,  कुशवाह : 28–30 हजार, यादव : 14–18 हजार, ठाकुर : 14–18 हजार, वैश्य : 12–15 हजार,  मुस्लिम : 7–8 हजार, अन्य ओबीसी : 15–20 हजार हैं। 

2023 से ब्राह्मण, वैश्य और कुशवाह वोटों में बिखराव की चर्चा है. ऐसे में बीजेपी में इस बार सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश है. स्थानीय संगठन को ज्यादा महत्व दिया गया है. लेकिन बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी है. ऐसे में कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। 

तो क्या इसलिए भी कट गया नरोत्तम मिश्रा का टिकट?
बताया जा रहा है कि दिल्ली स्तर पर कराए गए सर्वे में उनकी स्थिति उम्मीद के मुताबिक मजबूत नहीं पाई गई. सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व ने केवल उम्मीदवार की लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और भविष्य की राजनीतिक स्वीकार्यता का भी आकलन कराया और आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया। 

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, टिकट बदलने के पीछे केवल चुनावी गणित नहीं बल्कि सत्ता संतुलन भी बड़ी वजह हो सकता है. डॉ. नरोत्तम मिश्रा यदि उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते तो उनके मंत्री बनने और महत्वपूर्ण विभाग मिलने की संभावनाएं थी. ज़ाहिर है कि इससे बीजेपी और सरकार में एक नया शक्ति केंद्र बनता. वहीं एमपी बीजेपी में पहले से सीएम मोहन यादव के अलावा शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे कई शक्ति केंद्र हैं।  

ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान किसी नए शक्ति केंद्र के बनने से बच रहा था और इसी रणनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए आशुतोष तिवारी को टिकट दिया जो संभागीय संगठन प्रभारी रह चुके हैं. शायद यही वजह है कि बीजेपी ने एक ब्राह्मण नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर दूसरे ब्राह्मण आशुतोष तिवारी को टिकट दिया है. इससे जातिगत और सामाजिक संतुलन यथावत रहेगा। 

स्कूली शिक्षा में ड्रॉप-आउट दर हुई शून्य, हमारे सांदीपनि विद्यालय मॉडल की देश में हो रही है सराहना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

स्कूली शिक्षा में ड्रॉप-आउट दर हुई शून्य, हमारे सांदीपनि विद्यालय मॉडल की देश में हो रही है सराहना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का है सबसे सशक्त माध्यम
हमारे बच्चे खूब पढ़ें, लिखें, आगे बढ़े, हम संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने के लिए कर रहे हैं लगातार प्रयास
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुण्योदय प्रकल्प के संस्थापक स्व. लक्ष्मण सिंह गौड़ की जयंती पर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने स्कूली छात्राओं को वितरित कीं महापुरुषों के जीवन पर आधारित पुस्तकें एवं कॉपियां

इन्दौर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि शिक्षा ही समाज में परिवर्तन लाने का सबसे बड़ा और सशक्त माध्यम है। हमारी सरकार बच्चों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए संकल्पित हैं। हमारे बच्चे खूब पढ़ें, लिखें, जीवन में आगे बढ़े, इसके लिए हम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बच्चों को आधुनिक तरीके से गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख और संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे सांदीपनी विद्यालय, पीएमस्कूल और प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस के रूप में प्रदेश में शिक्षा की त्रिवेणी बन रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश ने प्राथमिक स्कूली शिक्षा स्तर पर ड्रॉप-आउट दर को शून्य करने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। हमारे सांदीपनि विद्यालय मॉडल की पूरे देश में सराहना हो रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शनिवार को इन्दौर में हिन्द रक्षक पुण्योदय प्रकल्प के कार्यक्रम में शामिल होकर स्कूली छात्राओं को राष्ट्र के महापुरुषों के जीवन चरित्र पर केन्द्रित निशुल्क पुस्तकें एवं कॉपियां वितरित की। मुख्यमंत्री ने स्कूली छात्राओं से संवाद कर से उन्हें स्नेहपूर्वक खूब तरक्की करने का शुभाशीष भी दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में हमारे सरकारी विद्यालयों ने शानदार प्रदर्शन किया है। सरकारी विद्यालयों का रिजल्ट प्राइवेट विद्यालयों से बेहतर रहा। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बोर्ड के परीक्षा परिणामों में हमारे सांदीपनी विद्यालयों के 58 विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राजनीति से ज्यादा राष्ट्रहित सर्वोपरि एवं राष्ट्र प्रथम की नीति को केंद्र में रखते हुए समाज सुधार और लोगों को प्रेरित करने वाले अनेक कार्य हो रहे हैं। हिंद रक्षक संगठन के संस्थापक और जननेता स्व. लक्ष्मण सिंह गौड़ (लखन दादा) युवा शक्ति के प्रेरणा स्त्रोत थे। उन्होंने समाज की बेहतरी के लिए तत्कालीन सरकार के कुशासन के खिलाफ आवाज उठाई, मुझे भी उनका सहयोगी बनने का सौभाग्य मिला। आज स्व. गौड़ की 68वीं जयंती पर पुण्योदय प्रकल्प के जरिए हर साल 60 हजार से अधिक विद्यार्थियों को कॉपी-किताबें और महापुरुषों के प्रेरक जीवन प्रसंगों पर केन्द्रित पुस्तकें बांटी गई हैं। हिंद रक्षक प्रकल्प का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से आज भी समाज को प्रेरणा मिलती है। हमारे युवा इससे प्रेरणा लें और गरीब-जरूरतमंदों मित्रों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहें। राज्य सरकार ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव को धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालय बनाए गए हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से स्कूली शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार नजर आ रहा है। प्रदेश के शासकीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं की ड्रॉप आउट दर शू्न्य हो चुकी है। अब प्रदेश का कोई भी बेटा-बेटी शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा।

पुण्योदय प्रकल्प के संयोजक एकलव्य गौड़ ने कहा कि हिंद रक्षक प्रकल्प के संस्थापक स्व. लक्ष्मण सिंह गौड़ ने वर्ष 2004 में इस प्रकल्प की शुरुआत की थी। जिसके अंतर्गत 60 हजार से अधिक स्कूली विद्यार्थियों को 11 जुलाई से 11 अगस्त के दौरान पूरे एक महीने में 3 लाख से अधिक कॉपी-किताबें बांटी जाएंगी। सभी विद्यार्थी इनका सदुपयोग करें।

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, इन्दौर सांसद शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री एवं विधायक सुऊषा सिंह, पूर्व राज्यमंत्री एवं विधायक महेंद्र हार्डिया, विधायिका श्रीमती मालिनी गौड़, विधायक गोलू शुक्ला, विधायक भगवानदास सबनानी, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, समाजसेवी गौरव रणदिवे, श्रवण चावड़ा, सुमित मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी उपस्थित थे।

 

सरदार सरोवर समझौते पर उठे सवाल : मध्यप्रदेश के वैध अधिकारों और हजारों विस्थापितों के पुनर्वास से समझौता न हो – नर्मदा बचाओ आंदोलन

सरदार सरोवर समझौते पर उठे सवाल : मध्यप्रदेश के वैध अधिकारों और हजारों विस्थापितों के पुनर्वास से समझौता न हो – नर्मदा बचाओ आंदोलन

बड़वानी, 
 सरदार सरोवर परियोजना के कारण मध्यप्रदेश में जलमग्न हुई वन भूमि, शासकीय भूमि तथा अन्य सार्वजनिक संसाधनों की भरपाई को लेकर वर्षों से चले आ रहे अंतर्राज्यीय विवाद के बीच हाल ही में हुए समझौते पर नर्मदा बचाओ आंदोलन ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। आंदोलन का कहना है कि केंद्रीय गृहमंत्री और केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की मध्यस्थता में हुए इस समझौते का अधिकृत विवरण अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जबकि विभिन्न माध्यमों से प्रसारित खबरों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। ऐसे में पूरे समझौते की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है, ताकि मध्यप्रदेश शासन तथा विस्थापित परिवारों के वैधानिक अधिकारों पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

बांध की ऊंचाई बढ़ने के साथ बढ़ी क्षति, बदला मुआवजे का दावा

नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर, राहुल यादव, राजकुमार सिन्हा, गोखरू मांगल्या, शोभाराम सोलंकी एवं ओमप्रकाश पाटीदार ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जब वर्ष 2000 तक सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 90 मीटर तक सीमित थी, तब मध्यप्रदेश सरकार ने परियोजना से होने वाली क्षति के लिए 281.46 करोड़ रुपये की भरपाई का दावा किया था। इस दावे में 112.51 करोड़ रुपये वन भूमि, 157.61 करोड़ रुपये शासकीय भूमि तथा 11.34 करोड़ रुपये जलमग्न वन क्षेत्र के प्रतिकर के रूप में शामिल थे।

इसके बाद बांध की ऊंचाई क्रमशः 110 मीटर, 121.92 मीटर और अंततः वर्ष 2017 में 138.68 मीटर तक बढ़ा दी गई। बांध की ऊंचाई बढ़ने के साथ मध्यप्रदेश का डूब क्षेत्र भी लगातार विस्तारित होता गया। इसके परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में वन भूमि, शासकीय भूमि, कृषि क्षेत्र तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन जलमग्न हुए, जिससे राज्य को होने वाली वास्तविक क्षति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई।

आंदोलन के अनुसार वर्ष 2019 तक नियोजन के अनुरूप 192 गांव और एक नगर प्रभावित घोषित हो चुके थे। वहीं वर्ष 2023 में पुनरीक्षित बैकवॉटर स्तर के आधार पर हजारों परिवारों को पुनर्वास के लिए अपात्र घोषित किए जाने से नई समस्याएँ उत्पन्न हुईं और अनेक परिवारों की आजीविका तथा पुनर्वास की स्थिति प्रभावित हुई।

पुनर्मूल्यांकन के बाद 7,669 करोड़ रुपये का दावा

बढ़े हुए डूब क्षेत्र तथा वर्तमान परिसंपत्ति मूल्य को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 के आधार पर जलमग्न भूमि एवं अन्य प्रभावित परिसंपत्तियों का पुनर्मूल्यांकन कराया। इस पुनर्मूल्यांकन के आधार पर राज्य सरकार ने अपने भरपाई दावे को बढ़ाकर 7,669 करोड़ रुपये निर्धारित किया।

यह संशोधित दावा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा तैयार कर 10 फरवरी 2022 को विधिवत गुजरात सरकार को भेजा गया। आंदोलन का कहना है कि यह दावा बढ़े हुए डूब क्षेत्र तथा वास्तविक क्षति के आधार पर तैयार किया गया था और इसका उद्देश्य राज्य को हुए नुकसान की न्यायसंगत भरपाई सुनिश्चित करना था।

गुजरात ने संशोधित दावा स्वीकार करने से किया इनकार

नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनुसार लगभग दो वर्ष बाद 21 मार्च 2024 को गुजरात सरकार ने स्पष्ट किया कि वह केवल 281.46 करोड़ रुपये के मूल दावे पर ही विचार करेगी तथा 7,669 करोड़ रुपये के संशोधित दावे को स्वीकार नहीं करेगी।

आंदोलन का कहना है कि यह रुख मध्यप्रदेश शासन द्वारा आंकी गई वास्तविक क्षति की उपेक्षा करने वाला है तथा परियोजना से प्रभावित राज्य के वैधानिक अधिकारों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। मध्यप्रदेश शासन ने भी इस रुख को स्वीकार नहीं किया और विवाद नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठकों में लगातार उठता रहा।

कानूनी प्रावधानों के अनुरूप भरपाई और पुनर्वास आवश्यक

आंदोलन ने कहा कि नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के वर्ष 1979 से लागू प्रावधानों के अनुसार परियोजना से प्रभावित राज्यों के बीच वन भूमि, शासकीय भूमि तथा पुनर्वास से जुड़े दायित्वों का निर्वहन किया जाना अनिवार्य है। इसी प्रकार वर्ष 2000 से सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों में भी प्रभावित राज्यों तथा विस्थापित परिवारों के अधिकारों को संरक्षित करने पर बल दिया गया है।

इन प्रावधानों के अनुसार मध्यप्रदेश को उसके डूब क्षेत्र की वास्तविक क्षति के अनुरूप भरपाई मिलना तथा विस्थापन से प्रभावित प्रत्येक परिवार का न्यायपूर्ण पुनर्वास सुनिश्चित किया जाना आवश्यक था। आंदोलन का कहना है कि आज भी मध्यप्रदेश के हजारों विस्थापित परिवार पूर्ण पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अनेक परिवारों को भूमि, आजीविका तथा पुनर्वास से जुड़े वैधानिक अधिकार अभी तक पूरी तरह प्राप्त नहीं हुए हैं।

इसी कारण मध्यप्रदेश सरकार ने शेष पुनर्वास कार्यों को पूरा करने के लिए गुजरात सरकार से 2,900 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग भी की थी।

विवाद सुलझाने के लिए कई दौर की बैठकें

इस विवाद के समाधान के लिए मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अनेक बैठकें आयोजित की गईं। विवाद के निराकरण हेतु एक मध्यस्थता समिति का भी गठन किया गया, जिसमें सेवानिवृत्त अधिकारियों को शामिल किया गया। समिति ने गुजरात के प्रतिनिधियों के साथ मध्यप्रदेश के डूब क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण भी किया।

इसी दौरान विभिन्न स्तरों पर समझौते को लेकर अलग-अलग जानकारियाँ सामने आती रहीं। प्रारंभिक खबरों में कहा गया कि मध्यप्रदेश और गुजरात के मुख्य सचिवों के बीच हुई बैठक में गुजरात द्वारा मध्यप्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपये देने पर सहमति बनी है। बाद में प्रत्यक्ष वित्तीय लेन-देन नहीं हुआ।

इसके बाद 6 जून 2026 को पुनः समाचार सामने आए कि गुजरात द्वारा मध्यप्रदेश को 7,388 करोड़ रुपये देने का निर्णय लिया गया है तथा 30 जून 2026 तक इसे अंतिम रूप दिए जाने की बात भी कही गई।

‘वन टाइम सेटलमेंट‘ पर उठे गंभीर सवाल

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री तथा केंद्रीय जल संसाधन मंत्री की उपस्थिति में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की बैठक में सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लंबित विवादों के समाधान के लिए “वन टाइम सेटलमेंट” किया गया। इसे संघीय व्यवस्था के अंतर्गत राज्यों के बीच समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है, लेकिन आंदोलन का कहना है कि इस समझौते की वास्तविक शर्तें अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

आंदोलन के अनुसार उपलब्ध खबरों के आधार पर यह जानकारी सामने आई है कि इस समझौते के तहत मध्यप्रदेश को गुजरात को 550 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस तथ्य ने अनेक गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अब तक मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र दोनों ही राज्य परियोजना से हुई क्षति, डूब क्षेत्र की भरपाई तथा पुनर्वास के लिए गुजरात से वित्तीय सहायता की मांग करते रहे हैं।

परियोजना लागत निर्धारण पर भी स्पष्टता आवश्यक

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि यदि यह निर्णय सरदार सरोवर परियोजना की संशोधित लागत और राज्यों की हिस्सेदारी के आधार पर लिया गया है, तो परियोजना की वास्तविक लागत और उसके निर्धारण की प्रक्रिया को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

आंदोलन के अनुसार वर्ष 1983 में परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 4,200 करोड़ रुपये थी। योजना आयोग द्वारा 1988 में इसे लगभग 6,400 करोड़ रुपये के स्तर पर स्वीकृति दी गई। बाद के वर्षों में यही लागत बढ़ते-बढ़ते गुजरात सरकार के अनुसार 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक तथा गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व जल संसाधन मंत्री सुरेश मेहता के अनुसार लगभग 90 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई।

आंदोलन का कहना है कि लागत में इतनी बड़ी वृद्धि के कारणों पर आज तक स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। मूल परियोजना नियोजन की कमियों का उल्लेख गुजरात में हुई विभिन्न समीक्षाओं, विश्व बैंक द्वारा नियुक्त अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र समीक्षा आयोग की रिपोर्ट तथा सर्वोच्च न्यायालय के 18 अक्टूबर 2000 के निर्णय में दिए गए अल्पमत निर्णय में भी किया गया था।

क्या स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की लागत भी परियोजना में जोड़ी गई?

आंदोलन ने यह भी प्रश्न उठाया है कि गुजरात विधानसभा में विभिन्न वर्षों के बजट संबंधी चर्चाओं के दौरान स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तथा उसके आसपास विकसित पर्यटन परियोजनाओं की लागत को भी कई बार सरदार सरोवर परियोजना की लागत के साथ जोड़े जाने की चर्चा सामने आई।

कभी 1,055 करोड़ रुपये तो कभी वर्ष 2015 में लगभग 915 करोड़ रुपये की राशि परियोजना लागत के संदर्भ में सामने आई। आंदोलन ने पूछा है कि क्या इन व्ययों को वास्तव में बांध परियोजना की लागत का हिस्सा माना गया है? यदि ऐसा है तो इसकी वैधता क्या है और क्या मध्यप्रदेश शासन ने इस विषय पर आवश्यक स्पष्टता प्राप्त की है?

हजारों विस्थापित परिवार आज भी पुनर्वास की प्रतीक्षा में

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि सबसे गंभीर प्रश्न आज भी हजारों विस्थापित परिवारों के अधूरे पुनर्वास का है। मध्यप्रदेश में अभी भी बड़ी संख्या में परिवारों को वैकल्पिक कृषि भूमि, पुनर्वास भूखंड, भूखंडों का पंजीयन, शेष भूखंडों का आवंटन तथा वर्ष 2017 से स्वीकृत आवास निर्माण सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी है।

इसी प्रकार अनेक पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं का विकास भी अधूरा है। इन शेष कार्यों के लिए ही मध्यप्रदेश सरकार ने गुजरात से 2,900 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता की मांग की थी। आंदोलन का प्रश्न है कि यदि यह राशि उपलब्ध नहीं होती, तो अधूरे पुनर्वास कार्यों को किस प्रकार पूरा किया जाएगा?

आंदोलन ने यह भी स्मरण कराया कि वर्ष 2003 में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित प्रकरण के दौरान तत्कालीन अटॉर्नी जनरल ने भी स्पष्ट किया था कि भूमि अर्जन और पुनर्वास पर होने वाला पूरा व्यय गुजरात सरकार द्वारा प्रभावित राज्यों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। यह व्यवस्था नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के निर्णय पर आधारित थी और इसे किसी भी स्तर पर नकारा नहीं जा सकता।

महाराष्ट्र के दावे भी अब तक लंबित

आंदोलन के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने भी डूबग्रस्त 6,488 हेक्टेयर वन भूमि के बदले लगभग 1,313 करोड़ रुपये तथा शेष पुनर्वास कार्यों के लिए 300 करोड़ रुपये से अधिक की मांग गुजरात सरकार के समक्ष रखी है।

इसके अतिरिक्त सरदार सरोवर परियोजना से नियोजित विद्युत उत्पादन का पूरा लाभ नहीं मिलने के कारण मध्यप्रदेश ने लगभग 900 करोड़ रुपये तथा महाराष्ट्र ने लगभग 450 करोड़ रुपये की भरपाई की मांग भी समय-समय पर उठाई है। हालांकि जनवरी 2026 की बैठक में बिजली उत्पादन से जुड़े इन दावों को नई विद्युत योजना के संदर्भ में स्वीकार नहीं किए जाने का उल्लेख किया गया।

जल नियोजन और आदिवासी अधिकारों पर भी चिंता

नर्मदा बचाओ आंदोलन ने कहा कि महाराष्ट्र में नर्मदा जल के उपयोग तथा नई जल योजनाओं को लेकर भी अनेक गंभीर प्रश्न बने हुए हैं। आंदोलन के अनुसार घाटी के आदिवासी गांवों के जल अधिकार सुनिश्चित किए बिना नर्मदा के जल को आठ परियोजनाओं के माध्यम से तापी घाटी की ओर ले जाने की योजना का संबंधित ग्रामसभाओं ने वर्ष 2018 से लगातार विरोध किया है।

इसके बावजूद यदि ऐसी योजनाओं को पुनः आगे बढ़ाया जाता है, तो यह स्थानीय समुदायों के अधिकारों की अनदेखी होगी। महाराष्ट्र में भी अनेक पात्र आदिवासी परिवारों का पुनर्वास पर्याप्त वित्तीय सहायता के अभाव में वर्षों से लंबित है।

राज्य के अधिकारों से समझौता न करने की मांग

नर्मदा बचाओ आंदोलन का कहना है कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के वैध वित्तीय दावों तथा पुनर्वास संबंधी अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता प्रभावित राज्यों और लाखों विस्थापित नागरिकों के हितों के प्रतिकूल नहीं होना चाहिए।

आंदोलन का मानना है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि हाल में हुआ समझौता किसी भी रूप में मध्यप्रदेश अथवा महाराष्ट्र के वैधानिक अधिकारों को प्रभावित न करे।

सरकार उपलब्ध सभी वैधानिक उपाय अपनाए

आंदोलन ने मध्यप्रदेश सरकार से मांग की है कि वह 7,669 करोड़ रुपये के वैध भरपाई दावे, वन एवं शासकीय भूमि के उचित प्रतिकर तथा हजारों वंचित विस्थापित परिवारों के पूर्ण और न्यायसंगत पुनर्वास के लिए अपने पक्ष को दृढ़ता से रखे।

साथ ही, यदि आवश्यक हो तो राज्य सरकार उपलब्ध सभी वैधानिक एवं संवैधानिक उपायों का उपयोग करते हुए राज्य और विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

दतिया बवाल पर नरोत्तम मिश्रा ने तोड़ी चुप्पी, पत्थरबाजी और 15 KM जाम पर दिया बड़ा बयान

दतिया 

मध्य प्रदेश के दतिया ज़िले में शनिवार को हिंसा भड़क गई. बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को 30 जुलाई को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट न मिलने पर उनके समर्थकों ने पुलिस से झड़प की और नेशनल हाईवे जाम कर दिया. वहीं अब इस पूरे मामले पर नरोत्तम मिश्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। 

हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी है।

प्रशासन के आदेश के अनुसार, अब बिना अनुमति किसी भी सभा, जुलूस, धरना-प्रदर्शन और सार्वजनिक आयोजन पर रोक रहेगी। साथ ही पांच या उससे अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने पर भी प्रतिबंध रहेगा। यह आदेश उपचुनाव के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

नरोत्तम ने समर्थकों से कहा कि मैंने कल भी विस्तार से कहा था, आज भी कह रहा हूं. ये पार्टी का निर्णय है. मैं अपील कर रहा हूं, ऐसा कुछ न करिए. पार्टी के फोरम पर अपनी बात कही जाती है, ऐसे आक्रोश नहीं किया जाता है. वहीं अधिकारियों ने बताया कि NH-44 पर 3000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने लगभग 12 घंटे तक जाम लगाए रखा, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. बाद में सुरक्षा बलों ने हाईवे को खाली कराया और कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया। 

हाईवे पर 15 किलोमीटर तक लग गया था जाम
सत्ताधारी BJP ने शुक्रवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाने की घोषणा की, जिससे मिश्रा के समर्थक नाराज़ हो गए. दतिया के कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने पत्रकारों को बताया कि नाराज़ कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे पर लगभग 11-12 घंटे तक जाम लगाए रखा. सड़क खाली करने के कहने के बावजूद उन्होंने पुलिस पर पथराव किया, जिससे पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. दतिया के SP, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों को चोटें आईं, लेकिन साथ ही यह भी साफ़ किया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज नहीं किया. वानखेड़े ने कहा कि नाराज़ भीड़ ने पुलिस और अन्य गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन बाद में सड़क खाली करा ली गई और स्थिति अब नियंत्रण में है। 

एसपी ने क्या कहा?
दतिया SP मयूर खंडेलवाल ने बताया कि 3000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने दतिया शहर में शांति भंग की, बाज़ार बंद कराने की कोशिश की और 12 घंटे तक सड़क जाम कर दी. उन्होंने कहा कि पत्थरबाज़ी में छह से ज़्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए. हमने उन्हें शांत करने की कोशिश की और बताया कि शहर में आदर्श आचार संहिता लागू है. लेकिन जब वे पीछे नहीं हटे और पत्थरबाज़ी करने लगे, तो हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। 

SP ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार भी किया गया और चेतावनी दी गई कि अगर वे हिंसा करते हैं तो उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी. सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को हुई राजनीतिक घटनाक्रम के बाद ज़िला इकाई के अध्यक्ष और स्थानीय पार्षदों समेत पार्टी के कुछ पदाधिकारियों ने विरोध में पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. आशुतोष तिवारी का नामांकन पूर्व मंत्री मिश्रा के लिए एक झटका था, जिन्हें पार्टी सूत्रों के अनुसार टिकट मिलने की उम्मीद थी और उन्होंने नामांकन फ़ॉर्म भी ख़रीद लिया था। 

दतिया के सेवढ़ा शहर के रहने वाले तिवारी राज्य BJP संगठन में सक्रिय रहे हैं. राज्य BJP ऑफ़िस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उत्साहित तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाक़ात की और उनका आभार जताया. तिवारी ने कहा, “मिश्रा बहुत वरिष्ठ नेता और मेरे अभिभावक हैं, और उन्होंने कहा है कि वे पार्टी और मेरे लिए प्रचार करेंगे। 

इस वजह से दतिया में हो रहा है उपचुनाव
मिश्रा के समर्थकों में से एक ने बताया कि कुछ लोगों ने अपनी शर्ट उतार दी और सड़क पर लेट गए, जबकि अन्य ने धरना दिया. एक अन्य समर्थक ने कहा कि जब तक “नरोत्तम दादा” को टिकट नहीं मिल जाता, वे पीछे नहीं हटेंगे और ज़रूरत पड़ने पर भगवा पार्टी छोड़ भी देंगे. आपको बता दें कि कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनावों में दतिया से तत्कालीन गृह मंत्री मिश्रा को 7,500 से ज़्यादा वोटों से हराया था। 

हालांकि, दिल्ली की एक अदालत ने इस साल अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन साल की सज़ा सुनाई. जिसके कारण उन्हें विधायक के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया गया और उपचुनाव की ज़रूरत पड़ी. बाद में उन्हें ज़मानत मिल गई. चुनाव आयोग ने हाल ही में देश की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया, जिनमें दतिया भी शामिल है. बाकी दो सीटें बिहार और गुजरात में हैं. शेड्यूल के अनुसार, वोट 30 जुलाई को डाले जाएंगे और नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे। 

 

एबीडीएम विकसित भारत @ 2047 के लिए मजबूत और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र का आधार बनेगा : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

एबीडीएम विकसित भारत @ 2047 के लिए मजबूत और नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र का आधार बनेगा : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा

मध्यप्रदेश में एबीडीएम के कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे पूर्ण : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) मिशन संचालन समूह के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली में मिशन संचालन समूह की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि एबीडीएम के अंतर्गत मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना तैयार हुई है और अब देशभर में इसके व्यापक उपयोग, अंतरसंचालनीयता तथा नागरिकों की सहज पहुंच पर विशेष ध्यान देना होगा।

केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, उपचार की निरंतरता तथा नागरिकों को उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक सुरक्षित और सहमति-आधारित पहुंच उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सभी हितधारकों से सुरक्षित, समावेशी एवं नागरिक-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।

बैठक में एबीडीएम की प्रगति, राज्यों में क्रियान्वयन तंत्र, स्वास्थ्य संस्थानों एवं स्वास्थ्य पेशेवरों के पंजीयन, सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों से एकीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर चर्चा हुई। देश में अब तक 93.95 करोड़ से अधिक एबीएचए नंबर बनाए गए हैं, 105 करोड़ स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंक किए गए हैं, 5.33 लाख स्वास्थ्य सुविधाएं तथा 9.85 लाख स्वास्थ्य पेशेवर राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। लगभग 24 करोड़ स्कैन एंड रजिस्टर टोकन भी जारी किए जा चुके हैं।

बैठक में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा; मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल; आयुष, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल; वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद; नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास; भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद; ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग; केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव; आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा; राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल तथा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण, नीति आयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आयुष मंत्रालय एवं अन्य सदस्य संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मध्यप्रदेश में एबीडीएम की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में लगभग 5.86 करोड़ आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री तथा लगभग 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं। प्रदेश के 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सक्रिय है, जिसके माध्यम से 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित शेष कार्यों को मध्यप्रदेश प्राथमिकता से पूर्ण करेगा।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहर का भ्रमण दो पहिया वाहन और पैदल चल कर किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहर का भ्रमण दो पहिया वाहन और पैदल चल कर किया

सिंहस्थ : 2028 के लिये चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर प्रगति का लिया जायजा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जलेबी बनाई एवं लिया शाम की चाय का आनंद

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार की शाम उज्जैन पहुंचकर दो पहिया वाहन से एवं पैदल चलकर शहर का भ्रमण कर सिंहस्थ 2028 महापर्व के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वीआईपी गेस्ट हाउस देवास रोड़ से माधवनगर, टावर चौक होते हुए फ्रीगंज पहुंचे। फ्रीगंज ब्रिज के समानांतर बन रहे नए ब्रिज निर्माण कार्य का अवलोकन किया और सेतु विभाग के अधिकारियों से कार्य की अद्यतन प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कोयला फाटक से कंठाल चौराहे तक चल रहे मार्ग चौडीकरण कार्य का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों से उनकी कुशलक्षेम पूछकर निर्माणाधीन कार्यों के संबंध में चर्चा की। उन्होंने निजातपुरा पहुंचकर वहां चल रहे निर्माण कार्यों का जायजा लिया।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कोयला फाटक से निजातपुरा तक पैदल भ्रमण किया और इस दौरान क्षेत्रीय रहवासियों से मिले और उनका अभिवादन स्वीकार किया। रहवासियों ने भी अपने सरल और सहज स्वभाव के मुख्यमंत्री डॉ. यादव को अपने बीच पाकर आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया और अनौपचारिक विषयों पर बातचीत की। कंठाल चौराहे की प्रसिद्ध मिष्ठान्न भंडार की दुकान पर पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुकान संचालक की कुशलक्षेम पुछी। दुकान संचालक उस समय जलेबी बना रहे थे, उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव से जलेबी बनाने का आग्रह किया। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सहजता से उनका आग्रह स्वीकार करते हुए जलेबी बनाई और शाम की चाय का आनंद भी लिया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों में से कुछ पूर्ण होने वाले है और कुछ पूर्ण भी हो चुके है। आमजन में विकास कार्यों के प्रति संतोष है। कई कार्यों की काफी समय से आवश्यकता थी, वे प्रगतिरत है। आने वाले समय में निर्माण कार्यों की गति को और तेज किया जाएगा। भगवान महाकालेश्वर की सावन भादौ मास में निकलने वाली सवारी के प्रबंधन पर भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से चर्चा की गई।

भ्रमण में विधायक अनिल जैन कालूहेडा, संजय अग्रवाल, रवि सौलंकी, कलेक्टर रौशन कुमारसिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

मालवा की समृद्धि का नया द्वार बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मालवा की समृद्धि का नया द्वार बनेगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

5,017 करोड़ से बनेगा 98.73 किमी लंबा ग्रीनफील्ड कॉरीडोर
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की रफ्तार और बढ़ी
फोरलेन कॉरीडोर एक हाइवे नहीं, क्षेत्र के समग्र विकास और अर्थव्यवस्था का बनेगा नया स्पीड ट्रैक
दिसम्बर 2027 तक बनकर तैयार होगा उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर
वर्तमान जावरा-उज्जैन मार्ग का किया जाएगा चौड़ीकरण
रतलाम से फोरलेन से जुड़ेगा खाचरौद-नागदा
खाचरौद में बनेगी मटर मंडी, खुलेगी फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी
अटलावदा-निनावटखेड़ा चंबल नदी पर बनाया जाएगा बांध
नागदा में खुलेगा नया आईटीआई
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट का किया भूमि पूजन
केंद्रीय विद्यालय नागदा सहित जन सेवा प्रहरी अभियान का किया शुभारंभ

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मालवा अपनी बोली की मिठास और उद्यमशीलता के लिए जाना जाता है। यह कर्मयोगियों और उद्यमियों की भूमि है। हम मालवा के विकास के लिए हर जरूरी प्रबंध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड कॉरीडोर प्रोजेक्ट क्षेत्रीय विकास, समृद्धि और विश्वास का नया मार्ग है। इससे उज्जैन, जावरा और आसपास के क्षेत्रों के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित और सुगम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह कॉरीडोर केवल उज्जैन और रतलाम के लिए विकास का हाइवे नहीं, यह पूरे मालवा क्षेत्र के समग्र विकास और अर्थव्यवस्था का नया स्पीड ट्रैक बनेगा। इस कॉरीडोर से यात्री परिवहन सुगम होगा, यात्रा समय में कमी एवं भाड़ा लागत न्यूनतम हो जाने से लॉजिस्टिक्स को भी उल्लेखनीय गति मिलेगी, जिसका लाभ उद्योग, व्यापार, कृषि और पर्यटन सभी क्षेत्रों को प्राप्त होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को नागदा में उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर परियोजना के भूमि पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागदा में अस्थायी भवन में केंद्रीय विद्यालय के संचालन और सड़क सुरक्षा के जन-भागीदारी मॉडल के रूप में ‘जन सेवा प्रहरी अभियान’ का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन जिले में संचालित शासकीय योजनाओं के चयनित पात्र हितग्राहियों को हितलाभ भी वितरित किए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 की तैयारियों में यह कॉरीडोर एक महत्वपूर्ण परियोजना है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक यात्रा के लिये बेहतर अधोसंरचना प्रबंधन करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह कॉरीडोर सिंहस्थ : 2028 से पहले (दिसम्बर 2027 तक) बनकर तैयार हो जाएगा।

प्रमुख घोषणाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर उज्जैन-जावरा के मध्य वर्तमान सड़क मार्ग के चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि नागदा और खाचरौद अब फोरलेन रोड से रतलाम शहर से कनेक्ट किया जाएगा। उन्होंने खाचरौद में नवीन मटर मंडी के लिए अतिरिक्त शासकीय भूमि देने और यहां एक फूड प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा विधानसभा क्षेत्र में अटलावदा-निनावटखेड़ा चंबल नदी पर नया बांध बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने नागदा में नया आईटीआई केन्द्र खोलने की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक और विश्वस्तरीय अधोसंरचनात्मक के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी। उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट न केवल सिंहस्थ-2028 की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करेगी, बल्कि भविष्य में मालवा अंचल के विकास और प्रदेश की प्रगति का एक महत्वपूर्ण आधार भी सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि यह कॉरीडोर क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिखेगा। करीब 100 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से यातायात की सुगमता के साथ औद्योगिकीकरण को भी नई रफ्तार मिलेगी। उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर पहले एक्सेस कंट्रोल्ड था, जिसे नॉन एक्सेस कंट्रोल किया गया है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के आयोजन के लिए यह मार्ग सोने पर सुहागा जैसा होगा। विश्व स्तरीय सिंहस्थ मेले के दौरान राजस्थान, गुजरात और देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रोजेक्ट अत्यंत सुगम और सुविधाजनक साबित होगा। उज्जैन क्षेत्र बदल रहा है। अब यहां साढ़े 8 करोड़ श्रद्धालु एक वर्ष में आ रहे हैं। राज्य सरकार ने 2 मेट्रोपोलिटन एरिया – इंदौर-उज्जैन-रतलाम और भोपाल-सीहोर-नर्मदापुरम घोषित कर इसमें डेवलपमेंट के काम भी शुरू कर दिए हैं। इसके बाद जबलपुर और ग्वालियर मेट्रोपोलिटन रीजन बनाने का काम प्रारंभ किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सबसे अधिक रोजगार देने वाला राज्य भी बना है। मालवांचल के पीथमपुर और विक्रम उद्योगपुरी में विश्व के बड़े कारोबारी अपने उद्योग स्थापित करने के लिए आ रहे हैं। विकास की रफ्तार में अब चंबल अंचल भी पीछे नहीं है। मध्यप्रदेश की धरती पर देशभर में सबसे अधिक सीमेंट प्लांट स्थापित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा निर्धारित की गई GYAN (गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी) सहित हर वर्ग के कल्याण और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। राज्य सरकार ने GYAN में 2 और श्रेणियां शामिल की हैं- औद्योगिकीकरण और अधोसंरचनात्मक विकास। इसके सुखद परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस 2025) में 30 लाख करोड़ का अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ, जिसमें से अब तक 10 लाख करोड़ निवेश जमीन पर उतर चुका है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। किसान फसल लगाएं, सरकार समुचित दाम दिलवाएगी। मालवांचल में मटर की प्रोसेसिंग यूनिट और उज्जैन में पेप्सिको के फूड इंडस्ट्री पार्क का भूमि पूजन किया गया है। प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों को मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों के समान भाव बहुत जल्द उज्जैन में पेप्सिको के जरिए मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने कोई नया कर (टैक्स) नहीं बढ़ाते हुए भी 4.38 लाख करोड़ रुपए का बजट पारित किया है। हमने लाड़ली बहनों के लिए प्रतिमाह 1500 रुपए का प्रावधान किया है। रक्षाबंधन से पहले जल्द ही बहनों को जुलाई माह की राशि भी मिलेगी। राज्य सरकार ने अब तक लाड़ली बहनों को 60 हजार करोड़ रूपए से अधिक की आर्थिक सहायता दी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नागदा में डेढ़ साल पहले की गई इस सड़क निर्माण घोषणा को पूरा करते हुए आज इसका भूमि पूजन किया है। यह परियोजना दिसंबर 2027 तक पूरी होगी और इसका भव्य लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर-पीथमपुर ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरीडोर से भी क्षेत्र की दिशा बदल जाएगी। इस कॉरिडोर से किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को लाभ मिलेगा। मालवा को नई-नई सड़क परियोजनाओं की सौगात मिल रही है। सिंहस्थ में 30 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इसी के दृष्टिगत आवागमन की बेहतर सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उज्जैन में शिप्रा के 30 किलोमीटर लंबे स्नान घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इंदौर से उज्जैन तक मेट्रो ट्रेन भी जल्द ही आएगी। नई रेलवे लाइनों से नागदा दो रूट से दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग से जुड़ेगा। उन्होंने कहा कि उज्जैन संभाग देश का मध्य बिंदु है, बहुत जल्द यहां एक नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सौगात भी मिलेगी।

कर्नाटक के राज्यपाल डॉ. थावरचंद गहलोत ने कहा कि उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर आगामी सिंहस्थ 2028 से पहले बनकर पूर्ण होगी। आज उज्जैन जिला प्रशासन के द्वारा जनसेवा प्रहरी की शुरुआत की गई है। यह एक सराहनीय पहल है। नागदा में खुले इस नए केंद्रीय विद्यालय में 30 जुलाई से कक्षाएं भी प्रारंभ हो जाएंगी। इसमें केंद्रीय कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य लोग भी अपने बच्चों को प्रवेश दिला सकते हैं।

उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि उज्जैन-जावरा के बीच नई सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही थी। यह ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा संपर्क मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागदा को नए पीएमविद्यालय की भी सौगात दी है।

नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डेढ़ वर्ष में अपनी घोषणा को पूरा करते हुए उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर प्रोजेक्ट की नींव रखी है। यह परियोजना क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से नागदा-खाचरौद को मिलाकर नया जिला बनाने की मांग की।

उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड फोरलेन कॉरीडोर प्रोजेक्ट का भूमि पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रीन फील्ड फोरलेन मार्ग से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधा और तेज संपर्क मिलेगा। साथ ही यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक, व्यापारिक और कृषि विकास को नई गति प्रदान करेगी। लगभग 5,017 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले 98.73 किलोमीटर लंबा यह कॉरीडोर मध्यप्रदेश की सड़क अधोसंरचना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। साथ ही प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का नया आधार भी बनेगा। इससे उज्जैन जिले के 50 गांव और रतलाम जिले के 12 गांव लाभान्वित होंगे। इस कॉरीडोर से उज्जैन, घट्टिया, नागदा-खाचरौद, आलोट और जावरा के विकास को गति मिलेगी। साथ ही क्षेत्र के करीब 35 लाख नागरिकों को इसका लाभ मिलेगा। इस कॉरीडोर में 7 फ्लाई ओवर, 3 रेल ओवरब्रिज, 8 बड़े पुल, 22 मध्यम पुल, 36 अंडरपास, 2 ओवरपास तथा 430 पुलियाओं का निर्माण किया जाएगा।

नागदा में अस्थायी भवन में केन्द्रीय विद्यालय का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सतत् प्रयासों के बाद नागदा में केंद्रीय विद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण की मंजूरी मिल गई है। अभी यह विद्यालय एक प्रायवेट कॉलेज के अस्थायी भवन में शुरू हो रहा है। अभी यहां पहली से पांचवीं कक्षा संचालित होंगी। राज्य सरकार ने इस विद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए 2.01 हैक्टेयर भूमि प्रदान की। इसमें प्राथमिक स्तर पर कुल 200 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत यहां एक-चौथाई यानी 50 सीटें आरक्षित रहेंगी। केंद्रीय विद्यालय में विद्यार्थियों की प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है।

जन सेवा प्रहरी अभियान का शुभारंभ

इस अभियान का उद्देश्य दुर्घटना होने के बाद के पहले 60 मिनट (गोल्डन ऑवर) में तत्काल प्राथमिक उपचार देकर घायल व्यक्ति की जान बचाना है। इसके लिए दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स पर मौजूद स्थानीय दुकानदारों, ढ़ाबा व पेट्रोल पंप कर्मियों को प्रहरी बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य, पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा इन प्रहरियों को फर्स्ट एड किट, सीपीआर देने और कानूनी अधिकारों का भी निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सड़क सुरक्षा में जनभागीदारी बढ़ाते हुए अब तक क्षेत्र के 1,549 स्वयं सेवकों ने अपना पंजीयन कराया है। इनमें से 155 को जन सेवा प्रहरी होने का प्रमाण-पत्र भी वितरित कर दिए गए हैं। विगत 28 मई 2026 को उज्जैन जिले के खरसौद खुर्द में जन सेवा प्रहरियों द्वारा तीन घायलों को त्वरित उपचार व अस्पताल पहुंचाकर उनकी जीवनरक्षा की।

कार्यक्रम में कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, राज्य सभा सांसद महंत बाल योगी उमेशनाथ, विधायक घट्टिया सतीश मालवीय, विधायक बड़नगर जितेन्द्र पण्ड्या, विधायक जावरा डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय, एमपी हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमेन ओम जैन, महापौर उज्जैन मुकेश टटवाल, जिलाध्यक्ष राजेश धाकड़, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक भरत यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

 

EPFO Launches ‘VISHWAS 2026’ Scheme: Major Relief for Employers in PF Damage Cases

Vivek Jha, Bhopal: In a significant move aimed at reducing litigation and encouraging voluntary compliance, the Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) has launched “VISHWAS 2026”, a special dispute resolution scheme designed to facilitate the amicable settlement of damages levied under Section 14B of the Employees’ Provident Funds and Miscellaneous Provisions Act, 1952, and the corresponding provisions under the Code on Social Security, 2020.

The scheme, notified by the Government of India on 29 June 2026, provides a one-time opportunity for eligible establishments to settle long-pending EPF damage cases at substantially reduced rates. The initiative is expected to benefit thousands of employers across the country while significantly reducing pending litigation before various judicial forums.

A Major Reform to Resolve Long-Pending EPF Disputes

For many years, disputes relating to damages imposed for delayed remittance of provident fund contributions have remained pending before tribunals, courts and other judicial authorities. These cases have resulted in prolonged litigation, increased compliance costs and administrative burden for both employers and EPFO.

Through VISHWAS 2026, EPFO aims to provide employers with a transparent, time-bound and business-friendly mechanism for resolving such disputes while ensuring that employees’ statutory social security interests remain protected.

The scheme will remain operational for six months from the date of notification.

Who Can Avail the Scheme?

The scheme covers four major categories of cases involving damages under Section 14B:

1. Ongoing Litigation Cases

Cases where damage orders have already been issued and are currently pending before any judicial or quasi-judicial authority.

2. Finalized Damage Orders

Cases where damage orders have been passed but the amount has not been fully recovered or has been only partially paid.

3. Pre-Adjudication Cases (Notice Issued)

Cases in which a notice has been issued but the final order is yet to be passed.

4. Pre-Adjudication Cases (Notice Yet to be Issued)

Cases where proceedings are yet to begin and notices have not been issued.

By covering almost every stage of litigation and adjudication, the scheme is expected to resolve a large number of pending disputes across industries.

Reduced Damages Under VISHWAS 2026

One of the biggest attractions of the scheme is the significant reduction in the rate of damages for defaults occurring before 14 June 2024.

The revised rates are:

  • Default up to 2 months: 0.25% per month
  • Default from 2 months to less than 4 months: 0.50% per month
  • Default exceeding 4 months: 1.00% per month

These rates are considerably lower than the damages normally leviable under the EPF provisions, offering substantial financial relief to eligible establishments.

Interest Payment is Mandatory

Shri Gautam, Additional Central Provident Fund Commissioner (Madhya Pradesh & Chhattisgarh), EPFO, stated that payment of the entire statutory interest for the default period is a mandatory precondition for availing the benefits of the VISHWAS 2026 scheme. He emphasized that establishments failing to deposit the applicable interest would not qualify for the scheme. He also informed that employers must furnish a formal undertaking declaring that, upon settlement under VISHWAS 2026, they shall not pursue any further appeal or legal proceedings in respect of the same dispute, ensuring finality and speedy resolution of pending cases.

Completely Digital Application Process

To ensure transparency and ease of compliance, the entire application process has been made online.

Employers will be required to:

  • Submit applications through the EPFO Employer Portal.
  • Authenticate applications using Digital Signature Certificate (DSC) or e-Sign.
  • Update PAN, email ID and mobile number if not already available.
  • Upload relevant documents and proof of payment.
  • Provide details including:
    • Period of default
    • Reference order number
    • Order date
    • Damages imposed
    • Amount already paid
    • Proof of interest payment
  • Furnish mandatory declarations and consent.

Once submitted, applications will be processed electronically by the Regional Office before final approval. Upon payment of the revised amount, digitally signed settlement certificates will be issued online.

How Partial Payments Will Be Treated

The scheme clearly defines the treatment of establishments that have already deposited part of the damages.

  • If the amount already paid is higher than the revised damages under VISHWAS 2026, no refund will be granted.
  • If the amount already paid is lower, the employer will only be required to pay the differential amount.

Similarly, pre-deposits made while filing appeals will also be adjusted according to the revised calculations under the scheme.

Cases Excluded from the Scheme

Certain categories have been specifically kept outside the scope of VISHWAS 2026:

  • Establishments where damages have already been fully recovered.
  • Cases involving fraud, embezzlement or deliberate falsification of records.
  • Cases where statutory interest has not been fully deposited.

Such establishments will continue to be governed by the normal legal provisions.

Dedicated Help Desks Across India

To ensure smooth implementation, EPFO has instructed all Regional, Zonal and District Offices to establish:

  • Dedicated VISHWAS Cells
  • Employer Help Desks
  • Nodal Officers
  • Public awareness campaigns
  • Industry outreach programmes

Employers eligible under the scheme will also be contacted individually through letters, emails and SMS wherever applicable.

Benefits for Employers

Industry experts believe the scheme offers several advantages:

  • Significant reduction in damages.
  • Faster settlement of pending litigation.
  • Lower legal expenses.
  • Better compliance environment.
  • Improved ease of doing business.
  • Opportunity to regularize old EPF disputes.
  • Reduced uncertainty for businesses.

For many MSMEs and industrial establishments, the scheme could substantially reduce their financial burden arising out of legacy EPF disputes.

Benefits for EPFO

The scheme is equally beneficial for EPFO as it is expected to:

  • Reduce long-pending litigation.
  • Improve recovery of dues.
  • Increase voluntary compliance.
  • Reduce administrative burden.
  • Strengthen employer confidence in the compliance framework.
  • Promote quicker disposal of pending cases.

Experts Advise Employers Not to Miss the Opportunity

Labour law professionals and compliance experts have advised employers to immediately review all pending Section 14B cases and determine their eligibility under VISHWAS 2026.

Since the scheme is available only for a limited period of six months, timely application can help businesses secure substantial financial relief and close long-pending disputes through a simplified process.


VISHWAS 2026 – At a Glance

Particular Details
Scheme Name VISHWAS 2026
Launched By Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO)
Effective From 29 June 2026
Validity Six Months
Objective Amicable settlement of EPF damage disputes
Applicable Cases Litigation, finalized orders, notice issued, notice yet to be issued
Mandatory Condition Full payment of statutory interest before application
Application Mode Online through Employer Portal
Settlement Certificate Issued digitally after approval and payment

Who Should Consider Applying?

The scheme is particularly relevant for:

  • Manufacturing industries
  • MSMEs
  • Commercial establishments
  • Educational institutions
  • Hospitals
  • Service sector companies
  • Infrastructure firms
  • Chartered Accountants
  • Labour law consultants
  • HR and compliance professionals
  • Corporate legal teams

A Significant Step Towards Compliance-Friendly Governance

The launch of VISHWAS 2026 marks one of the most significant compliance reforms undertaken by EPFO in recent years. By combining reduced damages, digital processing, structured timelines and employer-friendly procedures, the scheme seeks to resolve legacy disputes while strengthening India’s social security ecosystem.

For employers carrying unresolved EPF damage cases, VISHWAS 2026 presents a valuable opportunity to settle disputes, reduce liabilities and move forward with greater regulatory certainty.

VISHWAS 2026 – Frequently Asked Questions (FAQs)

A Complete Guide for Employers, Industries, HR Professionals, Chartered Accountants and Labour Law Consultants

The Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) has launched VISHWAS 2026, a one-time dispute resolution scheme to facilitate the amicable settlement of cases relating to damages under Section 14B of the EPF & MP Act, 1952, or Section 128 of the Code on Social Security, 2020.

To help employers and stakeholders better understand the scheme, here are the most important questions and answers in a simple and comprehensive format.


GENERAL FAQs

Q1. What is VISHWAS 2026?

Answer:

VISHWAS 2026 is a one-time settlement scheme introduced by EPFO to enable eligible establishments to settle cases relating to damages imposed under Section 14B of the EPF Act or Section 128 of the Code on Social Security.

The scheme provides a transparent, time-bound mechanism for settlement by allowing employers to pay damages at substantially reduced graded rates.


Q2. How long will the scheme remain open?

Answer:

The scheme will remain operational for six months from the date of notification.

If required, the Government may extend the scheme for an additional period, not exceeding another six months.


Q3. Which cases are covered under VISHWAS 2026?

The scheme covers four categories of cases:

1. Cases Under Litigation

Where an order under Section 14B or Section 128 has already been issued and the matter is pending before any court, tribunal or judicial authority.

2. Orders Issued but Recovery Pending

Cases where damages have been assessed but the amount has not yet been fully recovered.

3. Notice Issued but Final Order Pending

Cases where a notice has been issued but the final damages order has not yet been passed.

4. Notice Yet to be Issued

Cases where proceedings are proposed but the notice has not yet been issued.


Q4. Which cases are excluded from the scheme?

The following cases are not eligible:

  • Establishments where damages have already been fully recovered.
  • Cases involving fraud, misappropriation or deliberate falsification of records.
  • Cases where the entire interest amount has not been paid.

FAQs FOR EMPLOYERS

Q5. What are the revised rates of damages under VISHWAS 2026?

Period of Default Revised Damages Rate
Less than 2 months 0.25% per month
2 months to less than 4 months 0.50% per month
4 months and above 1.00% per month

These reduced rates will be applied while recalculating damages.


Q6. How can an employer apply?

Applications can be submitted online through the EPFO Employer Portal.

Employers need to:

  • Log in to the Employer Portal.
  • Select “VISHWAS 2026”.
  • Complete the online application.
  • Upload the required documents.
  • Submit the prescribed declaration.

Q7. What documents are required?

Depending on the category of the case, employers may be required to upload:

  • Damage Order or Notice
  • Court case details (if litigation is pending)
  • Challan/payment details
  • Prescribed undertaking/declaration

Q8. How will the recalculated damages be communicated?

After verification, EPFO will communicate the revised amount through the Employer Portal.

The employer can log in and download the revised calculation.


Q9. What is the payment timeline?

The employer must:

  • Accept the recalculated amount, and
  • Pay it within 15 days from the date of communication.

If payment cannot be made within 15 days, the employer may request an additional 15-day extension.


Q10. What happens if payment is not made on time?

If payment is not made within the prescribed period:

  • The application will be treated as forfeited.
  • The employer will lose the benefit of VISHWAS 2026.
  • Original legal proceedings will continue.

Q11. What is a VISHWAS 2026 Certificate?

After full payment, EPFO will issue a Digitally Signed VISHWAS 2026 Certificate.

The certificate serves as:

  • Final proof of settlement.
  • Documentary evidence for withdrawal of pending cases before Courts or CGIT.

Q12. Will Principal Contribution or Interest be waived?

No.

The scheme does not waive:

  • EPF Contribution (Principal)
  • Interest

The concession is only on Damages.


FAQs FOR EPFO FIELD OFFICES

Q13. Which offices will process applications?

Applications will be processed by the designated PD Cell/Compliance Section of the concerned Regional or District Office through the centralized VISHWAS Module.


Q14. How will damages be recalculated?

Damages will be recalculated using EPFO’s System-Based Calculation Tool.

Where required, CSV-based worksheets may be used, but the final calculation will always be generated through the system.


Q15. Can manual recalculation be done?

Normally, No.

Manual intervention is permitted only in exceptional cases where the finally assessed damages differ from the original notice.

Even then, proper justification and audit trail are mandatory, and the final amount will still be generated by the system.


Q16. How are pre-deposits treated under VISHWAS 2026?

If an employer has already deposited the statutory pre-deposit with EPFO while filing an appeal:

If the deposited amount is lower

The employer only needs to pay the differential amount.

If the deposited amount is higher

The excess amount may be adjusted against future damage orders relating to subsequent periods.


Q17. Are deposits made with authorities other than EPFO valid?

No.

Only deposits made with EPFO will be considered valid under the scheme.


Q18. What happens after the VISHWAS Certificate is issued?

After issuance of the certificate:

  • Pending appeals shall stand abated.
  • The certificate may be produced before Courts/CGIT for withdrawal of litigation.

Q19. What if the employer does not accept the revised amount?

If the employer:

  • refuses to accept the recalculated amount, or
  • fails to pay within the prescribed period,

the application will fail and the original legal proceedings will continue.


Q20. How will implementation be monitored?

EPFO will monitor the scheme through dedicated MIS Dashboards showing:

  • Applications received
  • Applications approved
  • Applications rejected
  • Amount recalculated
  • Amount recovered
  • Regional performance
  • Zonal performance

Q21. Is VISHWAS 2026 an open-ended scheme?

No.

The scheme is available only for a limited period.

Field offices have been instructed to dispose of all applications within the scheme period.


Q22. Are employees’ interests protected?

Yes. Absolutely.

The scheme does not dilute employees’ statutory rights.

Employees’ interests remain fully protected because:

  • PF contributions remain payable.
  • Interest remains payable.
  • Social Security benefits remain unaffected.
  • Only the damages component is recalculated under the scheme.

VISHWAS 2026 – At a Glance

Particular Details
Scheme VISHWAS 2026
Implementing Authority Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO)
Objective Settlement of EPF damage disputes
Applicable To Eligible employers and establishments
Validity Six months from notification
Application Mode Online through Employer Portal
Relief Available Reduced damages only
Principal Contribution No waiver
Interest No waiver
Settlement Certificate Digitally Signed VISHWAS 2026 Certificate

Expert Advice

Employers having pending Section 14B proceedings, notices, appeals or damage orders should immediately assess their eligibility under VISHWAS 2026 in consultation with their Chartered Accountant, Labour Law Consultant or Legal Advisor.

Since the scheme is available only for a limited period, timely action can significantly reduce financial liability, resolve legacy disputes and ensure smoother statutory compliance with EPFO.

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