रेल यात्रियों को बड़ी राहत! अब खंडवा में भी रुकेगी यह एक्सप्रेस, नेपाल से महाराष्ट्र तक सफर होगा आसान

खंडवा
 रेलवे बोर्ड ने ट्रेन संख्या 17631/17632 नांदेड़–टनकपुर–नांदेड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस के नियमित संचालन को मंजूरी दे दी है। 12 जुलाई से शुरू होने वाली इस नई रेल सेवा से खंडवा सहित निमाड़ क्षेत्र के यात्रियों को सुविधा होगी। ट्रेन के खंडवा जंक्शन पर ठहराव से यात्रियों को उत्तराखंड के टनकपुर और नेपाल सीमा तक सीधी रेल सुविधा मिलेगी। वहीं सिख समाज के श्रद्धालुओं के लिए पवित्र तख्त सचखंड श्री हुजूर साहिब, नांदेड़ तक यात्रा भी पहले से अधिक आसान हो जाएगी।

मध्य रेल समिति सदस्य मनोज सोनी ने बताया कि खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने इस रेल सेवा को क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।

क्या रहेगी नई ट्रेन की समय-सारणी

    समय-सारणी के अनुसार ट्रेन संख्या 17631 प्रत्येक रविवार रात 11:40 बजे नांदेड़ से रवाना होकर सोमवार सुबह 9:30 बजे खंडवा पहुंचेगी और आगे टनकपुर जाएगी।

    वापसी में ट्रेन संख्या 17632 प्रत्येक मंगलवार टनकपुर से चलकर बुधवार सुबह 6:45 बजे खंडवा पहुंचेगी और फिर नांदेड़ के लिए रवाना होगी। इसका नियमित संचालन 14 जुलाई से होगा।

इन प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा ठहराव, 6 जुलाई को उद्घाटन स्पेशल ट्रेन
ट्रेन का ठहराव नांदेड़, पूर्णा, बसमत, HINGOLI, वाशिम, अकोला, मलकापुर, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, झांसी, ग्वालियर, आगरा, मथुरा और बरेली सहित प्रमुख स्टेशनों पर रहेगा। इस नई सेवा से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर भारत के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा। उद्घाटन स्पेशल ट्रेन को छह जुलाई को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव टनकपुर से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

 

खनिज संपदा और निवेश से प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत मिशन को नई गति दे रहा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि खनिज संपदा की प्रचुरता और निवेश अनुकूल नीतियों से मध्यप्रदेश देश की औद्योगिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत मिशन को भी बल मिलेगा। बैतूल से आलीराजपुर तक फैली खनिज बेल्ट में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार मिलने से प्रदेश देश के उभरते ‘क्रिटिकल मिनरल हब’ के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। इस बेल्ट में हाई फिक्स्ड कार्बन और उत्कृष्ट फ्लेकी गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट पाया गया है। इसे इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह खोज मध्यप्रदेश को भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनाने के साथ देश को हरित ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट, औद्योगिक विकास का नया आधार

प्रदेश ग्रेफाइट संसाधनों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश के बैतूल, आलीराजपुर और सीधी जिलों में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के विशाल भंडार चिन्हित किए गए हैं। इन क्षेत्रों से प्राप्त ग्रेफाइट में उच्च स्थिर कार्बन की मात्रा होने के कारण यह इलेक्ट्रोड निर्माण, बैटरी उद्योग तथा अन्य उच्च तकनीकी औद्योगिक उपयोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अकेले बैतूल जिले में लगभग 11 मिलियन मीट्रिक टन ग्रेफाइट संसाधनों का अनुमान लगाया है। बैतूल जिले के चिखलार, गौठाना और गोलीघाट क्षेत्र प्रमुख ग्रेफाइट ब्लॉकों के रूप में उभरकर सामने आए हैं।

कोल इंडिया के प्रवेश से व्यावसायिक खनन को मिलेगी गति

प्रदेश में ग्रेफाइट खनन के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन तब आया जब सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने गैर-कोयला खनन क्षेत्र में प्रवेश करते हुए आलीराजपुर जिले के खट्टाली छोटी ग्रेफाइट ब्लॉक का अधिग्रहण किया। इससे प्रदेश में बड़े स्तर पर व्यावसायिक ग्रेफाइट खनन का मार्ग प्रशस्त हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार बैतूल क्षेत्र के ग्रेफाइट शिस्ट में वेनेडियम जैसे महत्वपूर्ण क्रिटिकल मिनरल मिलने की भी संभावना है। इससे यह क्षेत्र देश के सबसे महत्वपूर्ण बहु-खनिज क्षेत्रों में शामिल हो जाएगा।

ईवी क्रांति का बनेगा सशक्त आधार

ग्रेफाइट लिथियम-आयन बैटरियों के एनोड निर्माण का प्रमुख कच्चा माल है। विश्वभर में इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की बढ़ती मांग के कारण इसकी आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में मिल रहा उच्च गुणवत्ता वाला ग्रेफाइट ईवी उद्योग को गति देगा, ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को सशक्त बनायेगा और पवन एवं सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बैटरी निर्माण में सहायक बनेगा। इसके साथ ही रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी घरेलू स्तर पर कच्चा माल उपलब्ध कराएगा। इसके परिणाम स्वरूप ग्रेफाइट के आयात पर देश की निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।

आयात निर्भरता होगी कम

वर्तमान में भारत अपनी ग्रेफाइट आवश्यकताओं का अधिकांश आयात करता है। मध्यप्रदेश में बड़े स्तर पर खनन प्रारंभ होने से आयात पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा विदेशी मुद्रा की बचत होगी। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

बैतूल, आलीराजपुर तथा आस-पास के आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में ग्रेफाइट आधारित उद्योगों, प्रसंस्करण इकाइयों तथा रिफाइनरी परियोजनाओं की स्थापना से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।

कम लागत वाले खनन और उद्योगों की अपार संभावनाएं

प्रदेश में उपलब्ध उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के कारण कम लागत पर खनन संभव होगा। इसके साथ ही राज्य में कम लागत वाले इलेक्ट्रोड निर्माण उद्योग विकसित किए जा सकेंगे। इससे प्रदेश राष्ट्रीय बैटरी एवं इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (ईकोसिस्टम) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

खनिज संपदा से समृद्ध मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश देश के सबसे समृद्ध खनिज राज्यों में शामिल है। प्रदेश देश के 26 प्रतिशत मैंगनीज अयस्क भंडार के साथ सबसे बड़ा उत्पादक राज्य, 73 प्रतिशत तांबा अयस्क भंडार के साथ अग्रणी राज्य, चूना पत्थर उत्पादन में देश का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक, कोयला उत्पादन में देश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक और देश का एकमात्र हीरा उत्पादक राज्य है। हीरा, तांबा, कोयला, मैंगनीज, चूना पत्थर, स्वर्ण अयस्क, डोलोमाइट, ग्रेफाइट तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर रही है।

कटनी बन रहा है माइनिंग एवं औद्योगिक हब

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कटनी जिला भी तेजी से देश के प्रमुख माइनिंग हब के रूप में विकसित हो रहा है। यहां स्वर्ण अयस्क, डोलोमाइट, तांबा, लेड, जिंक और चांदी जैसे बहुमूल्य खनिजों के विशाल भंडार सामने आए हैं। स्वर्ण अयस्क क्षेत्र के विकास के लिए खनन लीज प्रदान की जा चुकी है और बड़वारा क्षेत्र में डोलोमाइट ब्लॉकों का विकास भी जारी है। ‘माइनिंग कॉन्क्लेव 2.0’ में प्रदेश को ₹56,414 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिससे खनिज आधारित उद्योगों का तेजी से विस्तार होने की संभावना बलवती हुई है।

रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज से बढ़ी संभावनाएं

प्रदेश में रेयर अर्थ मिनरल्स की खोज भी तेज हो गई है। खनिज संसाधन विभाग और भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के सहयोग से कटनी एवं जबलपुर सहित विभिन्न जिलों के खनिज नमूनों का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है। इस पहल से रणनीतिक महत्व के नए खनिज भंडारों की पहचान, वैज्ञानिक डेटा संग्रहण तथा भविष्य की खनिज अन्वेषण योजनाओं को नई दिशा मिलेगी।

सिंगरौली में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज

प्रदेश के सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (आरईई) की महत्वपूर्ण उपलब्धता भी सामने आई है। इन तत्वों का उपयोग रक्षा उपकरणों, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, उच्च क्षमता वाले मैग्नेट, मेडिकल उपकरण तथा अंतरिक्ष तकनीक में किया जाता है। यह खोज भारत की चीन सहित दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।

डिजिटल माइनिंग की दिशा में अग्रणी मध्यप्रदेश

प्रदेश सरकार खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों को तेजी से लागू कर रही है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के टेक्समिन फाउंडेशन, भू-विज्ञान एवं खनिज निदेशालय तथा मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम के बीच हुए समझौते के तहत जीआईएस आधारित डिजिटल मिनरल डेटाबेस विकसित किया जा रहा है, एआई आधारित माइनिंग मैनेजमेंट सिस्टम लागू किए जा रहे हैं, ब्लॉकचेन आधारित मॉनिटरिंग से पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है, आधुनिक तकनीक आधारित कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं और पर्यावरण-अनुकूल एवं सस्टेनेबल माइनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण

उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट, स्वर्ण, रेयर अर्थ मिनरल्स, तांबा, मैंगनीज, कोयला, डोलोमाइट तथा अन्य बहुमूल्य खनिजों की उपलब्धता, आधुनिक तकनीक आधारित खनन व्यवस्था, वैज्ञानिक अन्वेषण, बड़े निवेश और औद्योगिक नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण मध्यप्रदेश देश के सबसे महत्वपूर्ण खनिज एवं औद्योगिक राज्यों में तेजी से उभर रहा है।

बैतूल से अलीराजपुर तक फैली ग्रेफाइट बेल्ट की खोज केवल एक खनिज उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, हरित अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग, रणनीतिक खनिज आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हो रही है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र न केवल मध्यप्रदेश, बल्कि पूरे देश के क्रिटिकल मिनरल, एडवांस्ड मटेरियल एवं हरित औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

 

एथेनॉल की बढ़ती मांग से चीनी के दाम में ऐतिहासिक उछाल, ₹4,700 प्रति क्विंटल पहुंचा भाव

ग्वालियर

त्योहारी सीजन की दस्तक से पहले ही आम आदमी की रसोई का स्वाद कड़वा होने लगा है। शकर के दाम में ऐतिहासिक तेजी हुई है। थोक में शकर 4,650 से 4,700 रुपए प्रति क्विंटल तो फुटकर बाजार में कीमत 48 से 49 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। शकर खांडसारी एसोसिएशन ग्वालियर के मनीष बांदिल की मानें तो जुलाई की शुरुआत के साथ ही भाव अप्रत्याशित उछले हैं। राष्ट्रीय व्यापारिक कल्याण बोर्ड के सदस्य रमेश खंडेलवाल ने बताया, गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि व एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का बढ़ता जोर इसका कारण है। इससे मिलों का फोकस शकर उत्पादन से हटकर एथेनॉल पर हो गया।

इन तीन कारणों से महंगी हुई मिठास 
एथेनॉल उत्पादन पर बढ़ता जोर: सरकार पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है। इसमें बड़े पैमाने पर गन्ने का उपयोग हो रहा है। चीनी (Sugar Price Ethanol Production) मिलों में कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई।

गन्ने के समर्थन मूल्य में वृद्धि: अधिकांश राज्यों में गन्ने का समर्थन मूल्य बढऩे से उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर शकर की कीमतों पर दिख रहा है।

12 साल में सबसे कम जून की बारिश: इस वर्ष जून में 12 साल की तुलना में सबसे कम वर्षा हुई। देश में सामान्य से 38त्न कम वर्षा व जुलाई में भी कमजोर मानसून की आशंका से शकर उत्पादन 80 लाख टन तक कम हो सकता है।

कैसे बनाया जाता है एथेनॉल? भारत में किससे तैयार हो रहा?
एथेनॉल बनाने वाली सामग्री को फीड स्टॉक (Sugar Price Hit Record 2026) कहा जाता है। कई तरह के एथेनॉल उत्पादन संयंत्र अलग-अलग फीडस्टॉक का उपयोग करते हैं। इसके लिए मक्का, गेहूं या अन्य प्रकार के कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। इन सभी से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया एक ही जैसी होती है। जबकि भारत में गन्ने का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे गन्ना उत्पादक राज्यों में शुरू होती है। पकने के बाद गन्नों की कटाई की जाती है। इसके बाक प्रसंस्करण के लिए चीनी मिलों और डिस्टिलरी में ले जाया जाता है।

जानें गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया से पेट्रोल पंप तक का सफर

    चीनी मिल में गन्नों को पेराई मशीनों में डाला जाता है। यह गन्ने का रस निचोड़ लेती हैं। यह रस चीनी और एथेनॉल के उत्पादन के लिए आधार सामग्री तैयार होती है।

    गन्ने के रस को संशोधित कर चीनी बनाई जाती है। इसी प्रक्रिया के दौरान गुड़, नामक एक गाढ़ा गहरे रंग का सिरप उप उत्पाद के रूप में मिलता है। गुड़ परम्परागत रूप से भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में से माना जाता है।

    मॉडर्न एथेनॉल संयंत्र गुड़ और गन्ने के रस दोनों से एथेनॉल का उत्पादन किया जा सकता है। इन कच्चे माल को आसवन संयंत्रो तक पहुंचाया जाता है जहां इनले जैव ईंधन एथेनॉल शुरू किया जाता है।

    कच्चे माल के मिश्रण में सबसे पहले खमीर उठाया जाता है। फिर सूक्ष्मजीव शर्करा का सेवन करते हैं और प्राकृतिक किण्वन प्रक्रिया द्वारा उन्हें अल्कोहल में बदला जाता है। उत्पादन की विधियों (Sugar Price break record 2026) के आधार पर यह चरण चंद घंटों से लेकर कुछ दिन तक का हो सकता है।

    किण्वित द्रव में अल्कोहल, पानी और अन्य यौगिक होते हैं। अब आसवन विधि से अल्कोहल को अलग कर लिया जाता है और फिर सांद्रित किया जाता है। इस विधि से उच्च शुद्धता वाला एथेनॉल तैयार होता है।

    संयंत्र से निकाले जाने से पूर्व एथेनल की गुणवत्ती की कड़ी जांच होती है। इसके बाद उत्पादक शुद्धता स्तर, रासायनिक संरचना और ईंधन के मानकों के अनुपालन की जांच कर सुनिश्चित करते हैं कि उत्पाद सरकारी विनिर्देशों के पूरा करता है या नहीं। 

    मंजूरी के बाद एथेनॉल को टैंकरों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों के डिपो तक पहुंचाया जाता है। ये सुविधाएं ईंधन के उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले मिश्रण प्रक्रिया संभालती हैं।

    अंतिम चरण में अनुमोदित मिश्रण अनुपात के मुताबिक एथनॉल (Sugar Price Hike making fuel) को पेट्रोल में मिलाया जाता है। फिर इस मिश्रित ईंधन को देशभर के पेट्रोल पंपों पर वितरित कर दिया जाता है।

 

कम पानी एवं कम अवधि वाली फसलों का बढ़ाएं रकबा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक खेती में बड़ा स्कोप है। यह बड़े मुनाफे का काम है। किसानों को चाहिए कि वे परम्परागत खेती के स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनायें। मुख्यमंत्री ने इस साल अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए प्रदेश के किसानों से अपील की है कि वे अपने कृषि कार्यों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक योजना बनाएं तथा कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को विशेष प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा एवं कृषि उत्पादन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर रही है। कृषि, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों के माध्यम से जिलेवार सतत समीक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जल संरक्षण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग का विशेष महत्व है। किसान भाई-बहन खेतों में उपलब्ध नमी का संरक्षण करें, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दें और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों का अधिकाधिक उपयोग करें। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग द्वारा जारी तकनीकी सलाह का पालन करते हुए परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों से विशेष रूप सेअन्न (मोटा अनाज) जैसे कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार, बाजरा सहित अन्य कम पानी में सफलतापूर्वक पैदा होने वाली फसलों का रकबा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये फसलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप होने के साथ कम लागत, अधिक पोषण एवं किसानों की आय वृद्धि के बेहतर विकल्प की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार भीअन्न के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन को निरंतर प्रोत्साहित कर रही है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाकर ही उत्पादन और आय को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का अन्नदाता अपने अनुभव, परिश्रम और आधुनिक तकनीकों के समन्वय से हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन, कृषि आदान उपलब्ध कराने तथा परिस्थितियों के अनुरूप हर संभव सहयोग सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं। सरकार का प्रयास है कि किसी भी किसान को कठिनाई का सामना न करना पड़े। कृषि उत्पादन प्रभावित न हो और किसानों के हित भी हर तरह से सुरक्षित रहें। मुख्यमंत्री ने कहा है कि कृषि और अन्नदाता प्रदेश के साथ देश के अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारा कर्तव्य है। इसी आशय से प्रदेश में वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है।

किसानों को कर रहे जागरूक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों को मानसून और बारिश की अपडेट्स के लिए सोशल मीडिया आधारित मैसेजिंग सिस्टम पर विशेष जोर दिया है। बारिश कम होने की स्थिति में बीज उपचार, बुवाई की तकनीक, कम पानी में उपज देने वाली फसलों जैसे- बाजरा, ज्वार, उड़द, मूंग, अरहर, कोदो-कुटकी की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ऐसी फसलें कम पानी और कम अवधि में बेहतर उत्पादन के लिए अच्छा विकल्प हैं। इसके अलावा किसानों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर भी मौसम के पूर्वानुमान से जुड़ी सलाह दी जा रही है।

 

मध्य प्रदेश के शरबती गेहूं ने तोड़ा 7 साल का रिकॉर्ड, ₹6,500 प्रति क्विंटल पार; आटा हो सकता है महंगा

भोपाल 
इस साल थाली की रोटी न सिर्फ स्वाद में ‘शाही’ होगी, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ने वाली है। अपनी मिठास और चमक के लिए मशहूर ‘शरबती’ गेहूं ने इस बार बाजार में ऐसा जलवा बिखेरा है कि दाम पिछले 7 साल के उच्चतम स्तर पर जा पहुंचे हैं। बारिश व ओलावृष्टि के कारण फसल क्या बिगड़ी, शरबती के तेवर (MP Sharbati Wheat Price) ही बदल गए। शहर में प्रीमियम 5500 से लेकर 6200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक चुका। कारोबारियों की मानें तो दीपावली का त्योहार आते-आते यह आंकड़ा 6500 रुपए के पार निकल जाएगा।

आवक की चमक और मौसम की मार
वर्तमान में मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर की मंडियां सीहोर, आष्टा, गंजबासौदा और अशोकनगर के शरबती गेहूं से गुलजार तो हैं, लेकिन इस बार आवक में वो दम नहीं है। अप्रेल-जून के सीजन में अमूमन होने वाली 1.50 लाख क्विंटल की आवक इस बार सिमटती दिख रही है। वजह साफ है-बेमौसम बारिश से गेहूं दागी हो गया, जिससे बढिय़ा क्वालिटी के गेहूं की किल्लत हो गई है।

शरबती के शौकीनों पर पड़ेगा सीधा असर
विशेष स्वाद और मुलायम रोटियों के लिए पसंद किए जाने वाले शरबती गेहूं के उपभोक्ताओं को इस बार अतिरिक्त खर्च के लिए तैयार रहना होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित आपूर्ति, बेहतर गुणवत्ता (MP Sharbati Wheat Quality) की कमी और त्योहारी मांग बढऩे से आने वाले महीनों में कीमतों में और तेजी आ सकती है।

ब्रांडेड आटा भी हुआ ‘लाल’
थोक बाजार में शरबती गेहूं की बढ़ती कीमतों का असर अब खुदरा बाजार तक पहुंच गया है। ब्रांडेड कंपनियों के पांच किलो आटे के पैकेट 210 से 240 रुपए तक बिक रहे हैं। इससे घरेलू रसोई का मासिक बजट (MP Sharbati Wheat price impact on kitchen budget) और अधिक प्रभावित हो रहा है। हालांकि, सामान्य मिल क्वालिटी के लोकमन गेहूं के दाम अपेक्षाकृत स्थिर बने हुए हैं। दीनारपुर अनाज मंडी में लोकमन का भाव 2,450 से 2,550 रुपए प्रति क्विंटल के बीच है और प्रतिदिन लगभग 500 क्विंटल की आवक दर्ज की जा रही है।

सात वर्षों में ऐसे बढ़ा शरबती का रुतबा 

वर्ष – दाम

2020 – 3,500- 3,800

2021 – 3,600-4,000

2022 – 4,200-4,600

2023 – 4,400-4,800

2024 – 4,800-5,200

2025 – 5,400-5,800

2026 – 5,500-6,200

नोट : दाम प्रति क्विंटल में

आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे पर भीषण जाम, भैरूघाट में अजनार ब्रिज की मरम्मत से घंटों फंसे वाहन

धार 
 अगर आप राष्ट्रीय राजमार्ग आगरा-मुंबई हाईवे पर सफर कर रहे हैं और धामनौद इलाके से गुजरने की सोच रहे हैं तो जरा रुकिए. मानपुर के भेरूघाट के अजनार नदी पुल पर वाहनों का रेला लगा हुआ है. एक्सपेंशन जॉइंट की मरम्मत के दौरान एक वाहन के चढ़ जाने से एक हिस्सा दोबारा टूट गया. अब 4 जुलाई तक पुल की एक लेन बंद रहेगी. भीषण जाम से वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। 

मरम्मत के ठीक बाद हैवी वाहन ने काम बिगाड़ा
NHAI ने प्री-मानसून चेकिंग में भेरू मंदिर की ओर वाले एक्सपेंशन जॉइंट में दरार पकड़ी थी. 4 दिन पहले माइक्रो कंक्रीट से रिपेयर कर बैरिकेडिंग की गई, लेकिन रात में एक भारी वाहन बैरिकेड तोड़कर उस पर चढ़ गया. इससे 1 जुलाई को मजबूरन दोबारा मरम्मत शुरू करनी पड़ी. NHAI इंजीनियरों का कहना है कि माइक्रो कंक्रीट को पूरी ताकत पाने में 3 से 6 दिन लगते हैं. समय से पहले हैवी ट्रैफिक चला तो पुल का स्लैब क्रैक हो सकता है. इसलिए रिस्क न लेते हुए एक लेन बंद है और वन-वे ट्रैफिक चल रहा है। 

बड़ी संख्या में पुलिस व्यवस्था बनाने में जुटी
मानपुर, धामनोद, किशनगंज पुलिस के साथ NHAI, क्रेन, एंबुलेंस, रेस्क्यू टीम 24 घंटे मौके पर तैनात है. NHAI ने साफ किया है कि ये यात्रियों की सुरक्षा का मामला है. जल्दबाजी में बड़ा हादसा हो सकता है. 4 जुलाई तक धैर्य रखें. प्रशासन ने रूट डायवर्जन भी किया हैं, जिससे इंदौर की ओर से आने वाले वाहन मानपुर से बगड़ी होते हुए निकल रहे हैं. कई वाहन इंदौर से जाम घाट होते हुए महेश्वर की ओर से निकाले जा रहे हैं. प्रशासन ने सभी से धैर्य और सहयोग की अपील की है। 

इंदौर जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाएं
धामनोद एसडीओपी मोनिका सिंह ने बताया “पुल की मरम्मत का काम NHAI द्वारा किया गया है. लगभग 1 किलोमीटर के पैच का ट्रैफिक डायवर्ट करते हुए दूसरी साइड से निकाल रहे हैं. धामनोद से इंदौर जाने के लिए पलाश होते हुए आप डाइवर्जन पॉइंट ले सकते हैं. आप धार फाटक होते हुए, बगड़ी होते हुए भी इंदौर जा सकते हैं। 

“महेश्वर होते हुए भी इंदौर जा सकते हैं. ट्रैफिक स्लो गति से चल रहा है, थोड़ा सा लेट चल रहा है. आप लेट होंगे, लेकिन किसी प्रकार की वहां पर फंसने जैसी स्थिति नहीं है. हमने बहुत सारे पॉइंट्स पर पुलिस बल, ट्रैफिक बल लगाया है. मानपुर पुलिस द्वारा भी बल लगाया गया है ताकि किसी भी यात्री को किसी प्रकार की परेशानी ना हो। 

मोहन सरकार ने UCC कमेटी का कार्यकाल 26 जुलाई तक बढ़ाया, विधानसभा सत्र 24 जुलाई को होगा समाप्त

भोपाल

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) कानून अब विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश होना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
सरकार ने UCC का मसौदा तैयार कर रही उच्च स्तरीय समिति का कार्यकाल 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है, जबकि विधानसभा का मानसून सत्र 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा। ऐसे में इस सत्र में विधेयक पेश होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने 30 जून को जारी अधिसूचना में समिति के सदस्य सचिव के अनुरोध और ड्राफ्ट तैयार करने की प्रगति को देखते हुए कार्यकाल बढ़ाने का निर्णय लिया। समिति के गठन से जुड़े अन्य सभी प्रावधान यथावत रहेंगे।

गुजरात मॉडल पर तैयार हो रहा ड्राफ्ट
सूत्रों के अनुसार, अब तक तैयार ड्राफ्ट का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा गुजरात UCC के प्रावधानों पर आधारित है। इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत, भरण-पोषण, बच्चों की अभिरक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे पारिवारिक मामलों के लिए सभी समुदायों पर समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है।

CM के बयान से बने हुए हैं कयास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले कह चुके हैं कि जुलाई में होने वाले मानसून सत्र के दौरान UCC कानून का रूप ले सकता है। 2 जुलाई को मुख्यमंत्री के समक्ष UCC ड्राफ्ट का प्रेजेंटेशन भी हो चुका है। ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि समिति का कार्यकाल बढ़ने के बावजूद सरकार ड्राफ्ट को अंतिम रूप देकर विधेयक लाने का प्रयास कर सकती है।

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल आयोजन

राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल आयोजन

1 करोड़ 6 लाख से अधिक बच्चों को पिलाई गई पोलियो वैक्सीन की खुराक

भोपाल

प्रदेश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का सफल संचालन 28 से 30 जून तक किया गया। अभियान के अंतर्गत 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुल 1 करोड़ 6 लाख 51 हजार 737 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई। अभियान के सफल संचालन में प्रदेश के समस्त जिलों द्वारा उत्कृष्ट समन्वय, प्रभावी सूक्ष्म योजना, सुदृढ़ मॉनिटरिंग एवं व्यापक जनजागरूकता गतिविधियों के माध्यम से उल्लेखनीय योगदान दिया गया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक पात्र बच्चे तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बूथ स्तर से लेकर घर-घर भ्रमण तक व्यापक व्यवस्थाएं की गईं।

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की सफलता पोलियो उन्मूलन के प्रति प्रदेश की दृढ़ प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य कर्मियों के समर्पण तथा जनसहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रदेश सरकार भविष्य में भी बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए सतत रूप से प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

अभियान के शुभारंभ अवसर पर जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न पोलियो बूथों का उद्घाटन किया गया। स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा समुदाय की सक्रिय सहभागिता से अभियान के क्रियान्वयन में बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों सहित सभी पात्र बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए किसी भी बच्चे को पोलियो खुराक से वंचित न रहने देने के उद्देश्य से विशेष प्रयास किए गए। अभियान के दौरान छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें भी पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई गई।

 

एक्टिंग से IPS तक का सफर! सिमाला प्रसाद बनीं निमाड़ रेंज की नई DIG, पिता रहे सांसद और मां हैं साहित्यकार

खरगोन
 मध्य प्रदेश कैडर के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। एक ओर चर्चित आईपीएस अधिकारी सुश्री सिमाला प्रसाद को उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG), निमाड़ रेंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी और फिलहाल निमाड़ रेंज के डीआईजी सिद्धार्थ बहुगुणा को कुछ दिन पूर्व केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) में उप महानिरीक्षक (DIG) नियुक्त किया गया है।

सिमाला प्रसाद अपनी सादगी, प्रशासनिक दक्षता और अभिनय प्रतिभा के कारण लंबे समय से सुर्खियों में रही हैं।

कौन हैं IPS सिमाला प्रसाद?
भोपाल के एक शिक्षित परिवार में जन्मीं सिमाला प्रसाद के पिता भगीरथ प्रसाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पूर्व सांसद रहे हैं, जबकि उनकी माता मेहरून्निसा परवेज हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका हैं। साहित्य और शिक्षा से मिले संस्कारों के बीच पली-बढ़ीं सिमाला ने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में स्थान बनाया। वे मध्य प्रदेश कैडर की 2011 बैच की अधिकारी हैं।

कई पदों पर कर चुकीं काम
अपने पुलिस करियर में उन्होंने बैतूल जिले की पुलिस अधीक्षक, रेल पुलिस जबलपुर की एसपी और 23वीं बटालियन, विशेष सशस्त्र बल (SAF), भोपाल में कमांडेंट सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। मई 2026 में उन्हें पदोन्नति के बाद DIG महिला सुरक्षा बनाया गया। इस पद पर वे महिला एवं बाल सुरक्षा, साइबर अपराधों की रोकथाम, जनजागरूकता अभियान और राज्य स्तरीय सुरक्षा कार्यक्रमों की निगरानी की । उनकी कार्यशैली अनुशासित, संवेदनशील और जनसंपर्क आधारित मानी जाती है। आज जारी आदेश के मुताबिक अपने निमाड़ रेंज की डीआईजी होंगी।

फिल्मों में भी काम कर चुकीं सिमाला
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ सिमाला प्रसाद ने फिल्म जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने ‘अलीफ’ (2017), ‘नक्काश’ (2019) और वर्ष 2026 में ‘द नर्मदा स्टोरी’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। अभिनय के बावजूद उन्होंने हमेशा पुलिस सेवा को अपनी पहली प्राथमिकता बताया है। साहित्य, योग और सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता भी उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाती है।

दिल्ली पहुंचे IPS सिद्धार्थ बहुगुणा
वहीं, मध्य प्रदेश कैडर के 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ बहुगुणा को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर CBI में DIG नियुक्त किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार उनकी नियुक्ति पांच वर्ष की अवधि के लिए या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सिद्धार्थ बहुगुणा मध्य प्रदेश पुलिस के तेज-तर्रार और संवेदनशील अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने निमाड़ रेंज के खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी जिलों में पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) के रूप में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

CBI में बड़े मामलों की जांच करेंगे
अपराध नियंत्रण, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने, संगठित अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई तथा जनसुनवाई के माध्यम से लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं रही हैं। सख्त प्रशासनिक रवैये के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाने वाले अधिकारी के रूप में उन्होंने आम जनता और पुलिस महकमे में अपनी अलग पहचान बनाई। CBI में DIG के रूप में अब सिद्धार्थ बहुगुणा देश के चर्चित आपराधिक, भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की जांच एवं निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगे।

 

Railway Alert: बरेली यार्ड में मेंटेनेंस के चलते इंदौर-मुंबई रूट की 4 ट्रेनें जुलाई-अगस्त में रहेंगी रद्द

ग्वालियर
 उत्तर रेलवे के बरेली यार्ड स्थित वाशिंग लाइन संख्या 36 एवं 37 पर अनुरक्षण कार्य के चलते कुछ ट्रेनों का निरस्तीकरण किया गया है। यह कार्य पांच जुलाई से तीन अगस्त तक किया जाएगा। रेल इंफ्रास्ट्रक्चर एवं परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रारंभिक स्टेशन से ट्रेनें निम्नलिखित तिथियों में निरस्त रहेंगी।

ये ट्रेन रहेंगी निरस्त

    14320 बरेली–इंदौर एक्सप्रेस आठ, 15, 22 व 29 जुलाई को निरस्त रहेगी।
    14319 इंदौर–बरेली एक्सप्रेस नौ, 16, 23 व 30 जुलाई को निरस्त रहेगी।
    14314 बरेली–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस 11, 18, 25 जुलाई व एक अगस्त को निरस्त रहेगी।
    14313 लोकमान्य तिलक टर्मिनस–बरेली एक्सप्रेस 13, 20, 27 जुलाई व तीन अगस्त को निरस्त रहेगी।
    ललितपुर स्टेशन पर यार्ड रिमाडलिंग कार्य के दृष्टिगत पूर्व में जिन तिथियों पर ट्रेन संख्या 14313 एवं 14319 के मार्ग परिवर्तन की सूचना जारी की गई थी, अब ये ट्रेनों को अब निरस्त माना जाएगा।

 

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