भिंड के गोहद सिविल अस्पताल में जलभराव, प्रसूति वार्ड खाली कराना पड़ा

भिंड. गोहद में रुक-रुककर लगातार हो रही बारिश ने कस्बे की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। शनिवार को सिविल अस्पताल परिसर और वार्डों में बारिश का पानी भर जाने से मरीजों, प्रसूताओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालात इतने बिगड़ गए कि पानी प्रसूति वार्ड तक पहुंच गया, जिसके चलते मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए वार्ड खाली कराना पड़ा।

विधायक अस्पताल पहुंचे
सूचना मिलने पर गोहद विधायक केशव देसाई अस्पताल पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बीएमओ से अस्पताल में भरे पानी की निकासी को लेकर सवाल किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बीएमओ ने कहा कि पानी निकालना उनका काम नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। विधायक ने जब पूछा कि तत्काल यह काम कौन करेगा तो बीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं की ओर इशारा किया, लेकिन उन्होंने भी यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया।

विधायक ने सीएमएचओ से की शिकायत
बीएमओ के रवैये से नाराज विधायक ने मौके से ही सीएमएचओ डॉ. जेएस यादव को फोन कर अस्पताल की स्थिति से अवगत कराया। सीएमएचओ ने तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और पानी की निकासी के निर्देश देने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधायक ने भिंड कलेक्टर केएल मीना से भी चर्चा कर अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अवगत कराया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

स्कूल और बैंक परिसर में भी भरा पानी
पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण गोहद में नालों का पानी उफान पर है। जल निकासी व्यवस्था ठप होने से सड़कों के साथ सरकारी भवनों में भी पानी भर गया। सिविल अस्पताल के अलावा सीएम राइज स्कूल और एक बैंक शाखा भी जलभराव से प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में वर्षों से जल निकासी की समस्या बनी हुई है और हर बारिश में यही हालात बनते हैं।

विधायक बोले- व्यवस्था में सुधार जरूरी
विधायक केशव देसाई ने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर जलभराव गंभीर लापरवाही है। मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी –
गोहद सिविल अस्पताल में जलभराव की सूचना मिली है। तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और पानी की निकासी के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
– डॉक्टर जेएस यादव, सीएमएचओ भिंड

ग्वालियर में सहेली के भाई ने किशोरी को किडनैप कर किया दुष्कर्म

ग्वालियर.

शहर के माधौगंज इलाके में रहने वाली किशोरी के साथ उसकी सहेली के भाई ने ही दुष्कर्म किया। वह उसे भाई मानती थी, उसे अगवा कर अपने दोस्त के कमरे पर ले गया। यहां जान से मारने की धमकी देकर गलत काम किया। इस घटना के बाद भी वह उसे धमकाता रहा। परेशान होकर पीड़िता ने स्वजन को घटना बताई। इसके बाद यह लोग थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।

दादी के साथ रहती है किशोरी
माधौगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत डांग वाले बाबा पहाड़ी के पास रहने वाली 14 वर्षीय बालिका के माता-पिता जयपुर में रहते हैं। यहां वह अपनी दादी के साथ रहती है। उसकी सहेली का भाई लोकेंद्र विश्वकर्मा उसके घर आता-जाता था। वह उसे भाई मानती थी। दो जून को जब किशोरी की दादी घर पर नहीं थी, तब लोकेंद्र घर में घुस आया। उसने गलत हरकत की। विरोध करने पर उसकी दादी की हत्या की धमकी दी। 28 जून को उसने किशोरी को फोन किया। घर के पास बुलाया और अपने साथ काल्पी ब्रिज कालोनी में रहने वाले अपने दोस्त के कमरे पर ले गया। यहां उसके साथ फिर गलत काम किया। इसके बाद उसे धमकाया कि अगर किसी से कुछ भी कहा तो जान से मार देगा। किशोरी डरी-सहमी घर पर थी। छात्रा जब घर से गायब दिखी तो उसकी दादी ने फोन किया। बाइक से आरोपी उसे घर के पास छोड़ गया। फिर जब दादी ने बात की तब उसने पूरी घटना बताई। फिर यह लोग थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज कराई।

पुलिस ने ढूंढा तो घर छोड़ गया था आरोपी
जब किशोरी घर से गायब मिली तो दादी ने पुलिस को भी सूचना दी थी। पुलिस ने उसे ढूंढना शुरू किया, इसके बाद उसे आरोपित घर के पास छोड़ गया। छह दिन तक पीड़िता डरी सहमी रही। उस दिन थाने में भी उसने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी। अब उसने दुष्कर्म की बात बताई।

 

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बड़ा बयान, बोले- मध्यप्रदेश का SIR मॉडल सबसे पारदर्शी

इंदौर.

भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार शनिवार को इंदौर पहुंचे। उन्हाेंने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से संवाद कर कहा कि मध्यप्रदेश के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य अत्यंत पारदर्शी, व्यवस्थित और दक्ष तरीके से पूरा कर देश के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है। जिस गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ यह अभियान मध्यप्रदेश में संचालित हुआ है, वैसा उदाहरण अन्य राज्यों में दुर्लभ है।

उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय व्यवस्थाओं में शामिल है, जहां मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक हर चरण में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की भागीदारी सुनिश्चित होती है। इसी भरोसे के कारण भारत वर्ष 2026 में इंटरनेशनल आइडिया की अध्यक्षता कर रहा है।

तला ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि निर्वाचन आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र नाम सूची में शामिल न हो। इसके लिए एसआईआर अभियान के तहत मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं की पहचान कर सूची को अधिक शुद्ध बनाया गया। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं और चुनाव प्रक्रिया के संचालन में करीब 1.80 करोड़ चुनावकर्मी भाग लेते हैं।

उन्होंने निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफार्म ईसीआई नेट एप को बेहतर बताते हुए कहा कि इससे बीएलओ और मतदाताओं के बीच सीधा संपर्क मजबूत हुआ है। एसआईआर अभियान की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित काफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा, संभागायुक्त डा. सुदाम खाड़े, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन तथा कलेक्टर शिवम वर्मा उपस्थित रहे।

इंदौर में 4.47 लाख से अधिक नाम हटे
एसआइआर प्रक्रिया के दौरान इंदाैर की सभी नो विधानसभा क्षेत्रों में 28.67 लाख से अधिक मतदाताओं के फार्म 2625 बीएलओ द्वारा भरे गए। इसमें 24.20 लाख मतदाता की मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से हुई, जबकि प्रक्रिया के बाद 4.47 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे थे। इंदौर में 6.67 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई की गई और दस्तावेजों की जांच की गई।

बीएलओ से मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया संवाद
बीएलओ :- मतदाता सूची की पारदर्शिता के लिए आधार को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त :- आधार न जन्म और न ही नागरिकता का प्रमाण है, इसलिए अनिवार्य नहीं किया गया।
बीएलओ :- स्थानीय चुनाव की मतदाता सूची और एसआइआर के बाद शुद्ध हुई केंद्रीय सूची को क्यो नहीं जोड़ा जा रहा?
आयुक्त :- दोनों चुनाव प्रक्रियाओं का विधान अलग-अलग है, इसलिए सूची को एक नहीं किया जा सकता।

उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर में 35 किलो चांदी का गुप्तदान, गर्भगृह की बढ़ी भव्यता

उज्जैन 
 धर्म नगरी उज्जैन के
विश्व प्रसिद्ध चिंतामण गणेश मंदिर का गर्भगृह अब चांदी की भव्य आभा से जगमगा उठा है। एक गुप्त दानदाता द्वारा करीब 35 किलो चांदी दान किए जाने के बाद गर्भगृह की दीवारों पर आकर्षक चांदी की नक्काशी और वर्क का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस भव्य बदलाव से मंदिर की धार्मिक गरिमा के साथ-साथ उसकी स्थापत्य सुंदरता भी और अधिक निखरकर सामने आई है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, उज्जैन के एक श्रद्धालु ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की इच्छा जताते हुए लगभग 85 लाख रुपये से अधिक मूल्य की चांदी दान की। इस चांदी का उपयोग गर्भगृह की दीवारों पर विशेष डिज़ाइन और कलात्मक नक्काशी तैयार करने में किया गया। मंदिर के प्रशासक अभिषेक शर्मा ने बताया कि इस पूरे कार्य को करीब 15 दिनों में पूरा किया गया। पहले चांदी की नक्काशी तैयार की गई और उसके बाद उसे गर्भगृह की दीवारों पर सावधानीपूर्वक स्थापित किया गया।

प्रशासन का कहना है कि इस कार्य के बाद गर्भगृह की भव्यता, आध्यात्मिक वातावरण और आकर्षण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु अब भगवान गणेश के दिव्य स्वरूपों के साथ चांदी से सुसज्जित गर्भगृह की मनमोहक छटा का भी अनुभव कर सकेंगे।

गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर से लगभग छह किलोमीटर दूर ग्राम जवास्या में स्थित चिंतामण गणेश मंदिर मध्य प्रदेश के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान गणेश के तीन स्वयंभू स्वरूप—चिंतामण, इच्छामन और सिद्धिविनायक—विराजमान हैं। धार्मिक मान्यता है कि चिंतामण स्वरूप भक्तों की चिंताओं का निवारण करते हैं, इच्छामन सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और सिद्धिविनायक सफलता एवं सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। गर्भगृह में चांदी की नई सजावट ने मंदिर की आध्यात्मिक भव्यता में एक नया अध्याय जोड़ दिया है और श्रद्धालुओं के लिए यह आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है।

जबलपुर में महिलाओं को मिलेगी ई-रिक्शा की कमान, UN Women के साथ पहल; 100 महिलाओं को मिलेगा रोजगार

जबलपुर
 नगर निगम और यूएन वूमेन के सांझा प्रयास से “सेफ सिटीज एंड सेफ पब्लिक स्पेसेज फॉर वूमेन” परियोजना की पहली वार्षिक समीक्षा बैठक का आयोजन जबलपुर में किया गया. जिसमें यूएन की महिलाएं शामिल हुईं. महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक में जिला प्रशासन, पुलिस, सेना, रेलवे, नगर निगम, विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। 

यूएन के साथ जबलपुर नगर निगम का करार
जबलपुर नगर निगम ने 1 साल पहले यूनाइटेड नेशंस के वूमेंस सेफ सिटी कार्यक्रम में यूनाइटेड नेशन से करार किया था. इसके तहत जबलपुर को महिलाओं के लिए एक सुरक्षित शहर बनाने की कोशिश करने के लिए कदम उठाने की बात कही गई थी. इस कार्यक्रम को शुरू हुए 1 साल हो गए हैं। 

महिला सुरक्षा में जबलपुर पुलिस ने दिखाई मुस्तैदी
जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह अनु ने बताया कि, ”बीते 1 साल में उन्होंने जबलपुर शहर में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने के पहले की है. हमने शहर की सड़कों को लाइट से रोशन किया है, ताकि रात में महिलाओं को अंधेरे में भी निकलने में डर ना लगे.” उन्होंने बताया कि, ”जबलपुर पुलिस ने भी बड़ी मुस्तैदी से काम किया. जहां पर भी महिलाओं को जरूरत हुई पुलिस नजर आई। 

100 महिलाओं को मिलेंगे ई-रिक्शा
जगत बहादुर सिंह अनु का कहना है कि, ”इसी वजह से जबलपुर में अब कुछ ऐसे काम जो पहले केवल पुरुष करते थे पर महिलाएं भी करती हुई नजर आ रही हैं जबलपुर में कई महिलाएं स्ट्रीट वेंडर हैं, महिलाएं ऑटो रिक्शा चला रही हैं.” महापौर ने घोषणा की की आने वाले साल में वे 100 महिलाओं को ऑटो रिक्शा दिलवाने में मदद करेंगे. इसमें कुछ पैसा सब्सिडी के माध्यम से और कुछ लोन के माध्यम से महिलाओं को दिया जाएगा। 

महिलाओं की सुरक्षा पर यूएन ने मिलाया हाथ
बैठक का उद्देश्य परियोजना के एक वर्ष के कार्यों की समीक्षा करना, उसकी उपलब्धियों और अनुभवों को साझा करना तथा महिलाओं और बालिकाओं के लिए शहर को और अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाने की आगामी योजना तैयार करना था. कार्यक्रम में यूएन वूमेन की कंट्री रिप्रेजेंटेटिव शोको इशिकावा और डिप्टी कंट्री रिप्रेजेंटेटिव कांता सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए मिलकर काम करने पर जोर दिया। 

इस समीक्षा बैठक में आने वाले साल को लेकर भी रोड मेंप बनाया गया है और शहर को महिलाओं के लिए और बेहतर करने के दिशा में और प्रयास किए जाएंगे. समीक्षा बैठक में पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, पश्चिम मध्य रेलवे, धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और भारतीय सेना के प्रतिनिधियों ने भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी और भविष्य में बेहतर समन्वय के साथ काम करने की बात कही. कार्यक्रम के अंत में सभी विभागों और संस्थाओं ने मिलकर जबलपुर को महिलाओं और बालिकाओं के लिए सुरक्षित, समान अवसरों वाला और समावेशी शहर बनाने का संकल्प लिया। 

रातापानी बफर जोन में बड़ा वन घोटाला? 680 पेड़ों की अनुमति, कट गए हजारों; मानसून सत्र में गूंजेगा मामला

भोपाल 
रायसेन जिले की ग्राम पंचायत समनापुर कला में कथित रूप से हजारों हरे-भरे पेड़ों की कटाई का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद का विषय बन गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले का संज्ञान लिया है और कहा है कि इसे आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
680 पेड़ों की अनुमति, हजारों की कटाई का आरोप

ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों के अनुसार पंचायत ने सुनील मालवीय को 680 पेड़ काटने की अनुमति दी थी। वहीं, समीप स्थित भूमि स्वामी अशोक वासवानी को पंचायत द्वारा कोई अनुमति जारी नहीं की गई। इसके बावजूद दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होने के आरोप लगे हैं।

अधिकारियों पर भी उठे सवाल
पंचायत सचिव का कहना है कि अनुमति संबंधित अधिकारियों के निर्देश पर दी गई थी। वहीं, राजस्व विभाग इस पूरे मामले की जिम्मेदारी पंचायत पर डाल रहा है। आरोप है कि कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार और वन विभाग को जानकारी होने के बावजूद बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती रही।

5 हजार से अधिक सागौन के पेड़ काटने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए पुराने फोटो बताते हैं कि क्षेत्र पहले घने जंगल से आच्छादित था। सूत्रों का दावा है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में 5 हजार से अधिक सागौन सहित अन्य इमारती पेड़ों की कटाई की गई। हालांकि वन विभाग का कहना है कि लकड़ी परिवहन के लिए कोई ट्रांजिट परमिट (टीपी) जारी नहीं किया गया।

बिना सत्यापन के अनुमति देने का आरोप
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत समनापुर ने 23 दिसंबर 2023 को खसरा क्रमांक 132/372/2, 132/372/3, 132/372/4 और 132/372/5 (कुल 7.450 हेक्टेयर) में 450 सागौन, 82 साज और 98 सतकुट के पेड़ काटने की अनुमति जारी की थी। आरोप है कि यह अनुमति बिना उचित सत्यापन और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी किए दे दी गई।

खनन और कटाई दोनों पर सवाल
सबसे चौकाने वाली बात तो यह है कि रसूख के दम पर यह अनुमति इतनी आसानी से मिल गई, जिसे प्राप्त करने के लिए साधारण आदमी के पसीने छूट जाते हैं। दूसरी ओर इसी से लगे हुए एक दूसरा खसरा क्रमांक 132/1-3 रकबा 10 एकड़ पर अशोक वासवानी का बोर्ड लगा है, वहाँ भी सागौन, साज, महुआ एवं सतकुट के हजारों पेड़ काटे गए। साथ ही मशीनों से चट्टानें काट कर उत्खनन किया जा रहा है।

मामले में खनिज विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।

 

चोरल के जंगल में हरियाली की नई पहल: अंजन, कल्लू और बीजा जैसी विलुप्तप्राय प्रजातियों का हो रहा पौधारोपण

 इंदौर
 मानसून सक्रिय होते ही जंगलों को हरा-भरा बनाने करने की कवायद तेज हो गई है। इंदौर वनमंडल के जंगलों में पौधे रोपे जा रहे है। सामान्य पौधों के साथ उन दुर्लभ और विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक इन पौधों के संरक्षण से जंगलों की जैव विविधता मजबूत होगी और प्राकृतिक संतुलन भी बेहतर रहेगा।

जून अंतिम सप्ताह से जंगलों में सागौन, नीम, आवला सहित अंजन, कल्लू, बीजा, दहीमन, तिनसा और बेहड़ा जैसी दुर्लभ प्रजातियों के पौधे रोपे जा रहे है। इंदौर वनमंडल की चारों रेंज में करीब 10 से 15 हजार सलाई की कलमें भी रोप रहे है। प्रत्येक रेंज में तीन से चार हजार कलमें लगाई जा रही है।

चोरल क्षेत्र में एक बार फिर सागौन के पौधों रोपने पर जोर दिया जा रहा है। लगभग 30 से 35 प्रतिशत हिस्सा सागौन का होगा। वनमंडलाधिकारी लाल सुधाकर सिंह का कहना है कि जिन विलुप्त प्रजातियों के पौधे नर्सरियों में तैयार हुए है। उन्हें जंगलों में विशेष तौर पर लगाया जा रहा है। इसके अलावा सलाई गोंद को बढ़ावा देने के लिए कलमें लगा रहे है।

करीब तीन लाख लगाएंगे पौधे
इंदौर वनमंडल में इस वर्ष इंदौर, चोरल, महू और मानपुर क्षेत्र के जंगलों में लगभग 2 लाख 81 हजार पौधे लगाने का टारगेट रखा है। जुलाई और अगस्त के बीच बीस पौधारोपण स्थल चुने गए है। यहां सिर्फ पौधे लगाने पर ही नहीं। बल्कि उनकी सुरक्षा और बेहतर विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पानी रोकने के लिए बनाए चेकडैम
पौधों को पर्याप्त पानी मिल सके, इसके लिए जंगलों में छोटे-छोटे तालाब, चेकडैम, कंटूर ट्रेंच और अन्य जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। पहले से बने तालाबों का गहरीकरण भी कराया गया है। ताकि अधिक से अधिक वर्षा जल संग्रहित हो सके। इससे गर्मियों में वन्य जीवों और पौधों के लिए पानी की उपलब्धता बनी रहेगी।

वन विभाग पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की भी लगातार निगरानी कर रहा है। समीक्षा में सामने आया कि करीब 20 से 22 प्रतिशत पौधे विभिन्न कारणों से सूख गए हैं। ऐसे लगभग 84 हजार पौधों की पहचान कर ली गई है। अब उनकी जगह नए पौधे लगाने का काम चल रहा है।

भोपाल गैस त्रासदी की यादों को मिलेगा नया स्वरूप, भुज के ‘स्मृतिवन’ की तर्ज पर बनेगा मेमोरियल

भोपाल 

भोपाल में 1984 में हुए भीषण गैस कांड की याद में अब एक भव्य और विश्वस्तरीय स्मारक बनाने की योजना तैयार की जा रही है. यह स्मारक गुजरात के भुज स्थित प्रसिद्ध ‘स्मृतिवन’ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यूनियन कार्बाइड की केमिकल कचरा-मुक्त भूमि पर यह स्मारक बनाया जाए। 

इस परियोजना के लिए एनवायरमेंटल प्लानिंग एंड कॉर्डिनेशन ऑर्गेनाइजेशन (Environmental Planning and Coordination Organisation) को जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें भुज के भूकंप स्मारक और म्यूजियम का अध्ययन करने तथा उसके आधार पर एक डिटेल्ड एक्शन प्लान तैयार करने को कहा गया है। 

हजारों लोगों की याद में बने स्मारक
मुख्यमंत्री मोहन यादव फरवरी 2026 में कच्छ दौरे के दौरान भुज के स्मृतिवन से काफी प्रभावित हुए थे. 2001 के विनाशकारी भूकंप में जान गंवाने वाले हजारों लोगों की याद में बने इस स्मारक ने उन्हें प्रेरित किया. यह स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम है, जिन्होंने इसे 2011 में चीन के सिचुआन भूकंप स्मारक को देखकर तैयार करने की योजना बनाई थी। 

भुज का ‘स्मृतिवन’ 470 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे देश का सबसे बड़ा स्मारक माना जाता है. यह 2001 के भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की स्मृति में बनाया गया है. यहां 7 थीम आधारित गैलरियां बनाई गई हैं, जहां आधुनिक तकनीक जैसे सिम्युलेटर, थ्री-डी और प्रोजेक्टर के जरिए भूकंप का वास्तविक अनुभव कराया जाता है। 

सीएम ने दिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) को इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने निर्देश दिए कि एप्को की एक विशेष टीम गुजरात के भुज में बने आधुनिक भूकंप स्मारक व संग्रहालय का मौका-मुआयना करे। वहां की व्यवस्थाओं और डिजाइन का विस्तृत निरीक्षण करने के बाद भोपाल में भी वैसा ही भव्य स्मारक तैयार करने के लिए एक विधिवत प्रस्ताव और ठोस एक्शन प्लान तैयार किया जाए।

भुज का ‘स्मृतिवन’ मॉडल क्यों है खास?
भोपाल में जिस भुज मॉडल को आधार बनाकर स्मारक की रूपरेखा तैयार की जा रही है, वह बेहद अनूठा है। 2001 के गुजरात भूकंप पीड़ितों की याद में बना भुज का ‘स्मृतिवन’ अपनी आधुनिक गैलरी, मियावाकी वन और आपदा प्रबंधन के जीवंत अनुभवों (सिम्युलेटर तकनीक) के कारण दुनिया भर में मशहूर है। अब इसी तर्ज पर भोपाल गैस त्रासदी के इतिहास और पीड़ितों की याद को सहेजने के लिए यूनियन कार्बाइड परिसर को नया रूप दिया जाएगा।

कच्‍छ दौरे के समय सीएम हुए थे प्रभावित
दरअसल, फरवरी 2026 में अपने कच्छ दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भुज के ‘स्मृतिवन’ को देखकर बेहद प्रभावित हुए थे। वर्ष 2001 के विनाशकारी भूकंप पीड़ितों की याद में 470 एकड़ में फैला भुज का यह अनूठा स्मारक तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का परिणाम था। पीएम मोदी ने साल 2011 में चीन के सिचुआन प्रांत के भूकंप स्मारक को देखने के बाद इस भव्य स्मृतिवन का खाका तैयार किया था।

क्यों अनूठा व विश्वस्तरीय है भुज का ‘स्मृतिवन’?
देश का सबसे बड़ा स्मारक:
यह स्मारक 2001 के गुजरात भूकंप में जान गंवाने वाले 13,000 से अधिक लोगों की याद में भुज की भुजिया पहाड़ी पर पूरे 470 एकड़ क्षेत्र में बनाया गया है।

भूकंप का वास्तविक अहसास: स्मृतिवन में 7 थीम-आधारित गैलरी बनाई गई हैं। यहाँ विशेष सिम्युलेटर की मदद से आने वाले आगंतुकों को भूकंप का वास्तविक (लाइव) अनुभव कराया जाता है।

कच्छ की संस्कृति और इतिहास: थ्री-डी प्रोजेक्टर व आधुनिक गैजेट्स के जरिए कच्छ की अनूठी संस्कृति, भूकंप का इतिहास और इस भीषण आपदा के बाद हुए अद्भुत पुनर्निर्माण की पूरी कहानी को जीवंत रूप में दिखाया गया है।

पर्यावरण और जल संरक्षण: पूरे परिसर में 50 चेकडैम बनाए गए हैं। इसके साथ ही, दिवंगत आत्माओं की याद में 50,000 से अधिक पौधे लगाकर एक भव्य ‘मियावाकी वन’ विकसित किया गया है।

पुनर्निर्माण की कहानी को दिखाया
इस स्मारक में कच्छ की संस्कृति, इतिहास और भूकंप के बाद हुए पुनर्निर्माण की कहानी को भी दिखाया गया है. इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. यहां 50 चेकडेम बनाए गए हैं और 50,000 से अधिक पौधों के साथ मियावाकी वन विकसित किया गया है। 

इसी मॉडल को आधार बनाकर भोपाल में बनने वाला नया स्मारक गैस कांड का दर्द, इतिहास और सबक को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम करेगा। 

मंत्री विश्वास सारंग ने पर्वतारोही ज्योति रात्रे को दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं

भोपाल

सहकारिता, खेल और युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग से शनिवार को भोपाल में मध्यप्रदेश की पर्वतारोही ज्योति रात्रे ने सौजन्य भेंट की। मंत्री सारंग ने उन्हें हाल ही में मैक्सिको स्थित पिको डी ओरिजाबा की 5,636 मीटर (18,491 फीट) ऊँची चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर देश का गौरव बढ़ाने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं। मंत्री सारंग ने कहा कि ज्योति रात्रे का साहस, दृढ़ संकल्प, अनुशासन, अथक परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी सफलता के नए शिखर छूते हुए देश और मध्यप्रदेश का नाम राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर गौरवान्वित करती रहेंगी।

मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों एवं साहसिक खेलों से जुड़े प्रतिभाशाली युवाओं की उपलब्धियां मध्यप्रदेश को नई पहचान दिला रही हैं। राज्य सरकार खेल और साहसिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मैक्सिको के पिको डी ओरिजाबा शिखर पर तिरंगा फहराने के साथ ही ज्योति रात्रे तीन महाद्वीपों के सबसे ऊँचे ज्वालामुखियों पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज फहराने वाली देश की सबसे वरिष्ठ महिला पर्वतारोही बन गई हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

 

भोपाल के डायल-112 हीरोज बिछड़ी 06 वर्षीय मासूम को सुरक्षित परिजनों से मिलाया

भोपाल

भोपाल जिले के थाना कटारा हिल्स क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं तत्पर कार्रवाई से पिता से बिछड़ गई 06 वर्षीय मासूम बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिलाया गया। समय पर की गई इस मानवीय पहल से बालिका को सुरक्षा एवं परिवार का सान्निध्य पुनः प्राप्त हो सका।

04 जुलाई को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कटारा हिल्स क्षेत्र अंतर्गत स्प्रिंग वैली के पास एक 06 वर्षीय बालिका अकेली मिली है, जो अपने पिता से बिछड़ गई है एवं पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।

डायल-112 स्टाफ आरक्षक  नवीन यादव एवं पायलट  तीर्थ कुमार ने मौके पर पहुँचकर बालिका को सुरक्षित संरक्षण में लिया। पूछताछ करने पर बालिका ने अपने परिजनों की जानकारी एवं घर का पता बताया।

डायल-112 जवानों ने तत्परता एवं संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बालिका द्वारा बताए गए पते के आधार पर उसे डायल 112 वाहन से सुरक्षित उसके घर ले जाकर पहचान एवं आवश्यक सत्यापन उपरांत उसके परिजनों के सुपुर्द किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 06 वर्षीय मोहिनी, निवासी अयोध्या नगर, अपने पिता के साथ कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में आई थी, जहाँ भीड़ के दौरान वह अपने पिता से बिछड़ गई थी।

डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही से एक मासूम बालिका को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुँचाया जा सका। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा एवं सहायता हेतु सदैव सजग, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।

 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu