चीनी ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने रचा इतिहास, 6 दिन में बनाए 17 हजार से ज्यादा टैबलेट

चीनी रोबोटिक्स कंपनी एजीबॉट ने इतिहास रच दिया है। दरअसल इस कंपनी के ह्यूमनॉइड रोबोट्स को एक फैक्ट्री में टैबलेट बनाने और उनकी जांच करने वाली लाइव प्रोडक्शन लाइन पर काम करते हुए लाइव दिखाया गया। खास बात रही कि ऐसा पूरे 6 दिन लाइव स्ट्रीम के जरिए पूरी दुनिया के सामने चला। इस दौरान 8 रोबोट्स ने बिना रुके ठीक वैसे ही काम किया जैसे कि इंसान किसी फैक्ट्री में करते। हालांकि, फर्क यह रहा कि ये रोबोट्स इंसानों की उल्ट बिना थके लगातार काम करते रहे।

99.99% की सक्सेस रेट से किया काम
6 दिन तक लाइव स्ट्रीमिंग नानचांग में लॉन्गचीयर टेक्नोलॉजी की फैक्ट्री से हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन रोबोट्स ने फैक्ट्री में बिना रुके 64 घंटे से ज्यादा समय तक लगातार काम किया।

इन रोबोट्स ने 6 दिनों की लाइव स्ट्रीमिंग में कुल 17,625 टैबलेट तैयार किए। इससे भी ज्यादा मजेदार बात रही कि रोबोट्स का सक्सेस रेट यानी कि काम को सही तरह से करने की दर 99.99% रही। कहने का मतलब है कि रोबोट्स से ना के बराबर गलतियां हुईं।

रोबोट्स ने किए क्या-क्या काम?

  • फैक्ट्री में जिन रोबोट्स को काम पर लगाया गया था वे एजीबॉट के G2 ह्यूमनॉइड मॉडल थे।
  • इन रोबोट्स ने 6 दिनों तक इंसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। काम की बात करें, तो इन रोबोट्स ने बलेट की जांच करने यानी कि इन्स्पेक्शन, खराब पीस को अलग करने यानी कि डिफेक्ट सॉर्टिंग और सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने यानी कि मटेरियल ट्रांसपोर्ट का काम किया।
  • इस तरह से 6 दिनों में इन रोबोट्स ने कुल 64,828 काम पूरे किए।

लैब नहीं असल दुनिया में किया कमाल

  • इन रोबोट्स के प्रदर्शन की तारीफ इसलिए की गई क्योंकि 6 दिनों तक रोबोट्स ने किसी लैब में नहीं बल्कि असल दुनिया में काम किया।
  • इसके साथ ही ये रोबोट्स समय-समय पर जरूरत के अनुसार खुद ढालते रहे।
  • रिपोर्ट्स के अनुसार(REF.), कंपनी का कहना है कि वे दुनिया को यह दिखाना चाहती थी कि असल इंडस्ट्रियल माहौल में रोबोट्स के शरीर में मौजूद AI से काम लेने कि लिए किस दर्जे की तैयारी और ट्रांसपेरेंसी चाहिए होती है।
  • फैक्ट्रियों में काम संभालने को तैयार रोबोट्स
  • इस कंपनी ने लाइव स्ट्रीमिंग में रोबोट्स के सफल प्रदर्शन के बाद एलान किया है कि उनका 15,000 वां रोबोट बनकर तैयार है और उसे पार्टनर कपनी लॉन्गचीयर को सौंप दिया है।
  • खास बात है कि जहां पहले 1 से 5 हजार रोबोट्स बनाने में एक साल लगता था वहीं अब 5 से 10 हजार रोबोट तीन महीने में बनाए जा सकते हैं।
  • यह इवेंट Figure AI कंपनी के उस लाइव-स्ट्रीम के कुछ महीनों बाद हुआ है, जिसमें उनके फिगर 03 रोबोट्स ने बिना किसी खराबी के करीब 2.5 लाख पैकेजों को प्रोसेस किए थे।

 

मलेशिया एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन चैंपियनशिप के लिए मध्यप्रदेश की गौरांशी शर्मा का भारतीय टीम में चयन

मलेशिया एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन चैंपियनशिप के लिए मध्यप्रदेश की गौरांशी शर्मा का भारतीय टीम में चयन

गौरांशी शर्मा अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन मंच पर करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

ग्वालियर बैडमिंटन अकादमी की खिलाड़ी गौरांशी शर्मा दिखाएंगी अपनी प्रतिभा का दमखम

मलेशिया में प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारतीय दल का होंगी हिस्सा

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य बैडमिंटन अकादमी की प्रतिभावान खिलाड़ी गौरांशी शर्मा का चयन Malaysia Asia Pacific Deaf Badminton Championship के लिए भारतीय टीम में हुआ है। इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गौरांशी शर्मा भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगी। उनका चयन प्रदेश की खेल प्रतिभाओं एवं समावेशी खेल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश की सशक्त उपस्थिति

गौरांशी शर्मा का भारतीय टीम में चयन मध्यप्रदेश में खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण व्यवस्था तथा खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व प्रदेश के लिए गर्व का विषय है और यह दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए भी नई प्रेरणा लेकर आया है।

निरंतर परिश्रम और उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रतिफल

गौरांशी शर्मा ने अपने अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के बल पर भारतीय टीम में स्थान अर्जित किया है। कठिन प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा सिद्ध की, जिसके आधार पर उन्हें इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि

गौरांशी शर्मा की यह उपलब्धि प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों, विशेष रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सफलता दर्शाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, नियमित अभ्यास और उचित मार्गदर्शन के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है।

खेल मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने दी शुभकामनाएँ

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने गौरांशी शर्मा को भारतीय टीम में चयनित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गौरांशी शर्मा मलेशिया में आयोजित एशिया पैसिफिक डेफ बैडमिंटन चैंपियनशिप में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करेंगी।

 

MP Weather Update: 35 जिलों में झमाझम बारिश, भोपाल-राजगढ़ वैकल्पिक मार्ग बंद; खजुराहो-मंडला में 4.2 इंच पानी

भोपाल

आज कई जिलों में बारिश हो रही है। बड़वानी जिले के सेंधवा में हादसा हो गया। यहां सांदीपनि स्कूल में छत का प्लास्टर गिर गया, जिससे नौवीं की दो छात्राएं घायल हो गईं, वहीं इंदौर के पास एक सड़क धंस गई।

मध्य प्रदेश में जुलाई की शुरुआत के साथ ही मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 24 घंटे में प्रदेश के 35 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई। खजुराहो और मंडला में सबसे ज्यादा 4.2-4.2 इंच बारिश दर्ज की गई। लगातार छह दिनों से हो रही बारिश। 

इन जिलों में हुई अच्छी बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक, सतना, रतलाम, सीधी, उमरिया, पन्ना, पचमढ़ी, रीवा, श्योपुर, नौगांव, भोपाल, नरसिंहपुर, दमोह, टीकमगढ़, बैतूल, नर्मदापुरम, इंदौर, सिवनी, सागर, शिवपुरी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, रायसेन, धार, जबलपुर, गुना, उज्जैन, खंडवा, खरगोन, दतिया, मैहर, शाजापुर, सीहोर, छतरपुर, बुरहानपुर, बड़वानी और पांढुर्णा में भी बारिश का दौर रहा।

बारिश से जनजीवन भी प्रभावित
बड़वानी जिले के सेंधवा स्थित सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूल में कक्षा 9 की छत का प्लास्टर गिरने से दो छात्राएं घायल हो गईं। दोनों के सिर में मामूली चोट आई और उनका सिविल अस्पताल में इलाज कराया गया।

वहीं, इंदौर के पास खुड़ैल रोड स्थित जेतकारण गांव में सड़क धंसने से स्कूली बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया। उफनते नाले को पार कराने के लिए ग्रामीणों ने मानव शृंखला बनाई और बच्चों को सुरक्षित दूसरी ओर पहुंचाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है।

 बैरसिया-नरसिंहगढ़ के बीच पार्वती नदी पर  …..

भोपाल और राजगढ़ जिले को जोड़ने वाले पार्वती नदी के अस्थायी वैकल्पिक मार्ग से गुजरने पर रोक लगा दी गई है। सोमवार देर रात बैरसिया एसडीएम आशुतोष शर्मा ने यह आदेश जारी किए। नदी में जल स्तर बढ़ने की वजह से यह फैसला लिया गया।

एसडीएम शर्मा के आदेश में लिखा है कि बारिश के कारण पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे बैरसिया-नरसिंहगढ़ मार्ग पर नदी के मध्य निर्मित अस्थायी वैकल्पिक मार्ग जलमग्न हो गया है। तेज बहाव के कारण आवागमन अत्यंत जोखिमपूर्ण है। इसलिए आवागमन पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं।

एसडीएम ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्र में आवश्यकतानुसार बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड एवं सुरक्षा संकेतक स्थापित किए जाएं। ताकि कोई भी व्यक्ति जोखिम उठाकर मार्ग का उपयोग न कर सके।

तहसीलदार, पुलिस को जिम्मा आदेश के पालन के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, जनपद पंचायत, पीडब्ल्यूडी और पुलिस विभाग के अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और आवश्यकता अनुसार सुरक्षा बल तैनात कर नागरिकों को सुरक्षित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कराने के निर्देश दिए गए हैं।

उल्लंघन करने पर यह कार्रवाई आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जो आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा अन्य प्रचलित विधिक प्रावधानों के अंतर्गत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

वैकल्पिक रास्ते में पानी, इसलिए वाहन फंस रहे साल 1976 में रुनाहा से नरसिंहगढ़ तक सड़क MPRDC यानी मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने बनाई थी। वहीं, ब्रिज पीडब्ल्यूडी ने बनाया था। 17 जनवरी 2025 को ब्रिज एक जगह से धंस गया था। एहतियातन बैरसिया एसडीएम शर्मा ने ब्रिज से आने-जाने पर रोक लगा दी थी। कुछ दिन बाद स्टॉपडैम से पानी खाली कर डायवर्सन रूट तैयार किया गया था।

बारिश से पहले तक इसी रूट से बस, ट्रक समेत चार पहिया और टू-व्हीलर गुजर रहे थे, लेकिन पानी बढ़ गया है। बावजूद कई वाहन चालक खतरा लेते हुए इसके ऊपर से गुजर रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में एक बस तिरछी हो गई थी। इसे जैसे-तैसे निकाला तो एक दिन पहले ही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क से स्टॉपडैम के पानी में गिर गई। ट्रैक्टर में चार लोग सवार थे, जो बच गए।

नेशनल हाईवे से जोड़ता है ब्रिज बैरसिया-नरसिंहगढ़ रोड पर बना यह ब्रिज मेघरा नवीन गांव में है। यह भोपाल जिले का गांव है जबकि दूसरी तरफ राजगढ़ जिले का बरायठा गांव है। भोपाल, राजगढ़ के अलावा गुना, विदिशा, शिवपुरी, अशोकनगर, आगर-मालवा, शाजापुर, इंदौर, उज्जैन आने-जाने के लिए भी ब्रिज का उपयोग किया जाता है।

जब ब्रिज ठीक था, तब एक दिन में डेढ़ से 2 लाख तक लोग गुजरते थे। वर्तमान में 8 से 10 हजार लोग गुजर रहे हैं। यह ब्रिज आगरा-बंबई राष्ट्रीय राजमार्ग को भी जोड़ता है।

49 साल में सिर्फ 2 बार हुई थी मरम्मत करीब 49 साल पुराने ब्रिज की आखिरी बार मरम्मत साल 2019-20 में की गई थी। इसके पहले भी एक बार मरम्मत की गई थी। मेंटेनेंस नहीं होने की वजह से ब्रिज जर्जर हालत में पहुंच गया था।

भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट
मंगलवार को बड़वानी, धार, बुरहानपुर, रतलाम, टीकमगढ़ और पन्ना समेत कई जिलों में बारिश जारी है। मौसम विभाग ने गुना, अशोक नगर, विदिशा, सागर और छतरपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा कई अन्य जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी दी गई है।

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

 

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए उच्च शिक्षा विभाग का तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रारंभ

विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिए उच्च शिक्षा विभाग का तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रारंभ

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप उच्च शिक्षण संस्थानों में संवेदनशील और सहयोगात्मक वातावरण निर्माण पर जोर

भोपाल 

उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण के संबंध में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के फैकल्टी सदस्यों और कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 से 8 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना, विद्यार्थियों की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना तथा आत्महत्या की रोकथाम के लिए सहयोगात्मक एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण विकसित करना है। स्वस्थ मन, सशक्त शिक्षण और सुरक्षित भविष्य”के उद्देश्य के साथ यह पहल उच्च शिक्षण संस्थानों में सकारात्मक एवं संवेदनशील वातावरण निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिवस विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्महत्या रोकथाम, मनोवैज्ञानिक सहयोग, जीवन कौशल एवं संस्थागत जिम्मेदारियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। प्रथम तकनीकी सत्र में एम्स भोपाल के सहायक प्राध्यापक एवं मनोचिकित्सक डॉ. तन्मय जोशी ने “सुसाइड प्रिवेंशन : इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क फॉर हायर एजुकेशन”विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आत्महत्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं संस्थागत उत्तरदायित्व से जुड़ा विषय है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में तनाव, अवसाद, सामाजिक अलगाव, व्यवहार परिवर्तन एवं अन्य चेतावनी संकेतों की समय रहते पहचान करने तथा सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

द्वितीय तकनीकी सत्र में शासकीय एम.एल.बी. कन्या महाविद्यालय भोपाल की प्राध्यापक डॉ. अनीता पुरी सिंह ने विद्यार्थियों में मानसिक संवेदनशीलता के संकेतों एवं “साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड”विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल अध्यापन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों की भावनात्मक स्थिति को समझना और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उचित सहयोग एवं परामर्श से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।

तृतीय तकनीकी सत्र में डॉ. अमित सोनी ने “मेंटल हेल्थ एंड राइट्स बेस्ड प्रिंसिपल्स एवं स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (एसओपी)”विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संकट, अत्यधिक तनाव, रैगिंग, यौन उत्पीड़न जैसी परिस्थितियों में संस्थानों द्वारा संवेदनशील, त्वरित एवं गोपनीय प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

चतुर्थ तकनीकी सत्र में बी.एस.एस.एस. महाविद्यालय भोपाल के मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. विनय मिश्रा ने विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक कल्याण, जीवन कौशल एवं सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण पर विचार रखे। उन्होंने आत्म-जागरूकता, तनाव प्रबंधन, संवाद क्षमता, सहानुभूति एवं निर्णय क्षमता जैसे जीवन कौशल को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक बताया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों के फैकल्टी सदस्यों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। आगामी दो दिनों में निजी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के शिक्षकों तथा कर्मचारियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

 

शासकीय छात्रावासों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन 20 जुलाई तक

शासकीय छात्रावासों में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन 20 जुलाई तक

स्‍थान रिक्‍त होने पर अंतिम चरण में 20 जुलाई तक कर सकेंगे आवेदन

भोपाल

राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र, स्‍कूल शिक्षा विभाग ने संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस बालक/बालिका शासकीय छात्रावासों में रिक्‍त स्‍थानों पर प्रवेश के लिए अंतिम चरण में 20 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इस वर्ष से प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की गई है। इसके लिए विभाग ने एजुकेशन पोर्टल 3.0 के माध्‍यम से विशेष होस्‍टल प्रबंधन प्रणाली विकसित की है।

संचालक राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र हरजिंदर सिंह ने बताया कि, प्रदेश में संचालित छात्रावासों में विशेष रूप से वंचित वर्गों की बालिका/बालक को उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए पारदर्शी ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली प्रारंभ की गई है। यह ई-हॉस्टल प्रबंधन प्रणाली एक समेकित (Integrated) डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों में प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन, अभिलेख संधारण तथा प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन एवं पारदर्शिता के साथ संचालित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह प्रणाली विशेष रूप से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) टाइप-I एवं III एवं नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास (एनएससीबी) बालक/बालिका छात्रावासों के पारदर्शी प्रबंधन एवं उनमें प्रवेश की सुविधा के लिए विकसित की गई है।

आवेदन की अंतिम तिथि एवं प्रक्रिया

राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार छात्रावासों में कक्षा 6वीं एवं अन्‍य कक्षाओं की रिक्‍त सीटों पर प्रवेश के लिए विद्यार्थी अंतिम चरण में 20 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। हॉस्टल में भर्ती के लिए अभिभावक/पालक/विद्यार्थी द्वारा ऑनलाइन आवेदन नजदीकी एमपी ऑनलाइन कियोस्क केंद्र से स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट https://educationportal3.in के माध्यम से भरा जा सकता है। यदि अभिभावक/पालक/विद्यार्थी को फॉर्म भरने में कोई समस्या आती है तो आवेदन वार्डन के सहयोग से भी भरा जा सकेगा।

छात्रावासों में प्रवेश प्रात्रता

छात्रावासों में लक्ष्‍य अनुसार 50/100/150/ 175/200/220/275 स्‍थान उपलब्‍ध हैं। कक्षा 6 से 8 की बालिका को (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाईप-I) में तथा नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालिका छात्रावास प्रवेश दिया जाता है। वहीं कक्षा 6 से 12 की बालिका को (कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (टाईप- III) में प्रवेश की पात्रता है। कस्‍तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्रावास की मार्गदर्शिका के अनुसार 75 प्रतिशत सीटें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग की बालिकाओं के लिए एवं 25 प्रतिशत स्‍थान गरीबी रेखा के नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले परिवारों की बालिकाओं के लिए नियत हैं। इनमें अस्थि बाधित, अनाथ व बेसहारा किसी भी वर्ग की बालिकाओं को चयन में प्राथमिकता दी जाती है।

इसके अतिरिक्‍त प्रदेश में संचालित 66 नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालक छात्रावासों में कक्षा 3 से कक्षा 8 तक में पात्र बालकों को प्रवेश दिया जाता है। ये बालक छात्रावास, शाला अप्रवेशी एवं शाला त्‍यागी बालकों के लिए उनकी आयु के अनुरूप कक्षा में दर्ज करवाकर विशेष प्रशिक्षण के माध्‍यम से कक्षा अनुसार दक्षताएं विकसित कर शिक्षा की मुख्‍य धारा से जोड़े जाने के लिए संचालित हैं। इनमें विशेष रूप से ऐसे बच्‍चे जो रेल्‍वे स्‍टेशन एवं बस स्‍टैण्‍ड के प्‍लेट फार्म पर रहने वाले, पन्‍नी बीनने वाले, पलायन करने वाले परिवारों के बच्‍चे अथवा घर से भटके हुए विमुक्‍त (Denotified Tribal) एवं प्रिमिटिव ट्राइबल परिवार के बच्‍चे, वन ग्राम पटटा धारी परिवारों के बच्‍चों को आवासीय सुविधाएं प्रदान कर शिक्षा की मुख्‍य धारा से जोडकर प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण कराई जाती है।

प्रदेश में संचालित छात्रावासों की संख्‍या

प्रदेश में राज्‍य शिक्षा केन्‍द्र अंतर्गत 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, 324 नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालिका एवं 66 नेताजी सुभाष चन्‍द्र बोस बालक छात्रावास संचालित है। सभी छात्रावासों में ऐसे बालिका/बालक जो शाला से बाहर हैं अथवा जो प्रारंभिक शिक्षा से वंचित हैं एवं पारिवारिक कारणों से परिवार में रहते हुए प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते हैं उन्हें छात्रावास में रखकर प्रारंभिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं।

 

ईमानदारी और सत्यनिष्ठा एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है- डीजीपी मकवाणा

ईमानदारी और सत्यनिष्ठा एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है- डीजीपी मकवाणा

नवचयनित राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को डीजीपी का मार्गदर्शन
मध्‍यप्रदेश संवर्ग के 8 प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों ने की सौजन्‍य भेंट

भोपाल 

मध्‍यप्रदेश संवर्ग 2025 बैच के 08 परिवीक्षाधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज पुलिस मुख्‍यालय में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा से सौजन्‍य भेंट की। डीजीपी मकवाणा ने सभी अधिकारियों से परिचय प्राप्‍त कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्‍होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरी तन्‍मयता से प्राप्‍त करें ताकि शासन की जनकल्‍याणकारी योजनाओं का उत्‍कृष्‍ट निष्‍पादन कर सकें। उन्होंने कहा कि वे अपने अधीनस्थ अमले से भी सीखने में संकोच न करें।

पुलिस महानिदेशक ने नवचयनित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि जनता की सेवा का दायित्व है। उन्होंने अधिकारियों से ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नए आपराधिक कानून, साइबर सुरक्षा, साइबर फ्रॉड, नारकोटिक्स एवं नशा मुक्ति जैसे विषय प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। बदलती चुनौतियों को देखते हुए अधिकारियों को निरंतर सीखते रहने और तकनीक का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता है।

डीजीपी ने अपने सेवाकाल के अनेक अनुभव साझा किए। उन्होंने मंदसौर की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संवाद और सही नेतृत्व से बड़ी से बड़ी भीड़ को भी शांतिपूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने मुरैना में पदस्थापना के दौरान सड़क सुरक्षा अभियान और निष्पक्ष जांच के अनुभव भी साझा किए।

उन्होंने बताया कि डायल-100 से 112 आपातकालीन सेवा में परिवर्तन आसान नहीं था। लगभग छह से सात महीने के अथक प्रयासों, टीमवर्क और समर्पण से इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए धैर्य और सतत प्रयास आवश्यक हैं। नक्सल चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ने वर्ष 2025 में नक्सल समस्या से मुक्ति प्राप्त की। यह सुरक्षा बलों, प्रशासन और जनता के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

डीजीपी ने अधिकारियों को सलाह दी कि किसी भी सूचना पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले उसका सत्यापन करें और उसके बाद ही निर्णय लें। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णय हमेशा तथ्यों और निष्पक्षता पर आधारित होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि ईमानदारी (Honesty) और सत्यनिष्ठा (Integrity) एक युवा अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी है। अधिकारियों को भ्रष्टाचार, भौतिकवादी सोच और व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी भी पद का अहंकार अपने ऊपर हावी न होने दें और प्रत्येक नागरिक की समस्या को स्वयं की समस्या समझकर उसका समाधान करने का प्रयास करें।

डीजीपी ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि सीखने का सर्वोत्तम अवसर होती है। इस दौरान किसी भी विषय पर प्रश्न पूछने में संकोच नहीं करना चाहिए, चाहे वह जूनियर से पूछना हो या सीनियर से। निरंतर सीखने की भावना ही एक सफल अधिकारी की पहचान है।

साहबगिरी’ नहीं, जनसेवा का भाव रखें

डीजीपी ने नवचयनित अधिकारियों से कहा कि चयन के बाद कभी भी ‘साहबगिरी’ को अपने सिर पर न चढ़ने दें। उन्होंने अधिकारियों को सकारात्मक सोच अपनाने, विनम्र बने रहने और अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश ऐसा कैडर है जहां वरिष्ठ अधिकारी सहज उपलब्ध रहते हैं और सीखने का अनुकूल वातावरण मिलता है। उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को इस प्रतिष्ठित सेवा में चयन पर बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

इसी दौरान पुलिस महानिदेशक ने वर्तमान में प्रदेशभर में संचालित “सेफ क्लिक 2.0” साइबर जागरूकता अभियान तथा आगामी 15 जुलाई से प्रारंभ होने वाले “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम और नशा मुक्त समाज के निर्माण में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अधिकारियों को इन अभियानों को जनभागीदारी के माध्यम से प्रभावी बनाते हुए अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाना चाहिए, ताकि समाज को साइबर अपराधों और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से सुरक्षित रखा जा सके।

 इस अवसर पर आर.सी.व्‍ही.पी. नरोन्‍हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की कोर्स एसोसिएट डायरेक्‍टर सुप्रिया शर्मा, पीएसओटू डीजीपी विनीत कपूर, एसओटू डीजीपी मलय जैन, प्रशिक्षु आईएएस खोत पुष्पराज नानासाहेब, सुआयुषी बंसल, माधव अग्रवाल, श्लोक वाइकर, सुआशी शर्मा, शैलेंद्र चौधरी, सुशिल्पा चौहान, सुसौम्या मिश्रा उपस्थित रहीं।

 

मैहर-रीवा हाईवे पर भीषण हादसा, ट्रक में घुसी कार; पूर्व MLA के परिवार के 5 लोगों की मौत

 मैहर
 मैहर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर  देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। नादन थाना क्षेत्र के ग्राम रीघरा के पास रात करीब एक बजे हुए इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।

तेज रफ्तार से चल रही एक्सयूवी कार सामने चल रहे ट्रक में जा घुसी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें सवार लोग कार के अंदर ही फंस गए। बताया जा रहा है कि ये सभी लोग किसी रिश्तेदार के यहां से जन्मदिन मनाकर वापस मैहर लौट रहे थे।

घायल को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया
घायल को प्राथमिक उपचार के बाद जबलपुर रेफर किया गया है। मृतकों की पहचान अंकुर पटेल, मृदुन पटेल, विशेष पटेल, हरिशंकर पटेल तथा एक अन्य परिजन के रूप में हुई है।

संजीव कुमार पटेल की हालत चिंताजनक बताई जा रही है
सभी मृतक पूर्व विधायक स्वर्गीय लालजी पटेल के परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं। हादसे में संजीव कुमार पटेल गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल भी अस्पताल पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया।

 

उन्नत खेती व पशुपालन से बढ़ायेंगे किसानों की आमदनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उन्नत खेती व पशुपालन से बढ़ायेंगे किसानों की आमदनी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

दुग्ध उत्पादन में प्रदेश को बनायेंगे देश का अव्वल राज्य
प्रदेश में प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में उन्नत कृषि कार्यशाला में किसानों से किया संवाद
अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का किया भूमिपूजन

ग्वालियर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आमदनी केवल एक फसल से नहीं बल्कि बहु फसलों एवं उन्नत पशुपालन से बढ़ेगी। इस बात को ध्यान में रखकर सरकार द्वारा उन्नत व प्राकृतिक खेती के साथ-साथ पशुपालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन में देश में तीसरे स्थान पर है। हम अगले पाँच वर्षों में मध्यप्रदेश को दुग्ध उत्पादन में नम्बर वन राज्य बनायेंगे। इसी कड़ी में सरकार नेशनल डेयरी विकास योजना के तहत ग्वालियर दुग्ध संघ सहित साँची दुग्ध उत्पादन संघ को भरपूर मदद दे रही है। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को ग्वालियर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्नत कृषि पर हुई संभागीय कार्यशाला में मौजूद किसानों से संवाद कर रहे थे। उन्होंने कार्यशाला में किसानों से सीधा संवाद करते हुए जैविक व प्राकृतिक खेती पर अनुभव सुने।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ग्वालियर में मूर्तरूप लेने जा रही अत्याधुनिक हाईटेक नर्सरी एवं फ्लोरीकल्चर गार्डन का भी रिमोट से भूमिपूजन किया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत लगभग 13 करोड़ रुपए की लागत से ग्वालियर के खुरैरी एवं ग्राम जहांगीरपुर में इस हाईटेक नर्सरी के प्रथम चरण का कार्य होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं कृषि से जुड़े अन्य विभागों की योजनाओं के तहत विभिन्न किसानों को हितलाभ भी वितरित किए।

कार्यक्रम में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्क्रण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया, सांसद भारत सिंह कुशवाह, विधायक मोहन सिंह राठौर व श्रीमती सरला रावत, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती दुर्गेश कुँवर सिंह जाटव, अपेक्स बैंक के प्रशासक महेन्द्र सिंह यादव, पूर्व सांसद विवेक नारायण शेजवलकर, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के अध्यक्ष केशव सिंह बघेल, साडा अध्यक्ष अशोक शर्मा, मेला प्राधिकरण के अध्यक्ष अशोक जादौन, नगर निगम सभापति मनोज तोमर, जयप्रकाश राजौरिया, किसान मोर्चा के पदाधिकारी गिर्राज व्यास व अमरदीप सिंह औलख सहित जनप्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल रहे।

सिंचाई रकबा होगा 100 लाख हैक्टेयर तक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में वर्ष 2023 के बाद सिंचाई रकबे में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है। वर्ष 2003 में प्रदेश का सिंचाई रकबा मात्र साढ़े 7 लाख हैक्टेयर था जो अब बढ़कर लगभग 50 लाख हैक्टेयर हो गया है। इसे हम 100 लाख हैक्टैयर तक ले जायेंगे। चंबल-पार्वती-काली सिंध एवं केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाओ के माध्यम से यह संभव हुआ। उन्होंने इन परियोजनाओं की मंजूरी के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

किसान अब चिंता मुक्त होकर जमा कर सकते हैं कृषि ऋण

किसानों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब प्रदेश के कृषकों को 31 मार्च तक ऋण जमा करने की चिंता नहीं रही है। सरकार ने अब उन्हें ऋण जमा करने के लिये पूरे एक साल का मौका दिया है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण वर्ष में सरकार द्वारा सभी प्रकार के कृषि उत्पादों व पशुपालन को बढ़ावा देने के साथ किसानों की सहूलियतों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।

खिड़क प्रणाली के स्थान पर गौ-शालाओं की स्थापना

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गौ माता कभी आवारा नहीं हो सकती। इसी भाव के साथ प्रदेश सरकार द्वारा गौ संरक्षण एवं स्वदेशी गाय पालन को विशेष बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार ने इसी कड़ी में नगरीय क्षेत्रों में निराश्रित गायों को बंद करने के लिये कार्यरत खिड़क प्रणाली को समाप्त कर दिया है और बड़े पैमाने पर गौशालायें स्थापित की जा रही हैं। साथ ही देशी गायों में नस्ल सुधार के प्रयास भी प्रमुखता से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की लाल टिपारा गौशाला की तरह प्रदेश के महानगर इंदौर, उज्जैन, जबलपुर व भोपाल में बड़ी गौशालाओं की स्थापना की जा रही है।

जैविक व प्राकृतिक खेती पर किसानों ने किए अनुभव साझा

उन्नत कृषि पर आयोजित हुई संभागीय कार्यशाला में कृषकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन सभी कृषकों को अपने पास बुलाया और उत्साहवर्धन किया। ग्वालियर जिले के ग्राम बिलौआ निवासी उन्नत कृषक प्राण सिंह माथुर ने अपने अनुभव सुनाते हुए कहा कि वे अपने छोटे से कृषि फार्म में सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने पाँच नए किस्म के पौधों की खोज की है, जिसे वैज्ञानिक स्तर पर मान्यता मिल चुकी है। उनके द्वारा ईजाद किए गए अमरूद की “बिलौआ-22” व “बिलौआ-रेड” किस्म पेटेंट हो चुकी हैं। प्राण सिंह अब तक 50 हजार से अधिक कृषकों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं। इसी तरह ग्राम देवरा निवासी बृजेन्द्र रावत ने बताया कि उन्होंने रासायनिक खेती छोड़कर पूरी तरह प्राकृतिक खेती को अपना लिया है। उन्नत प्राकृतिक खेती के लिये उनकी धर्मपत्नी को राष्ट्रीय स्तर पर पाँच अवार्ड मिल चुके हैं।

भगवानपुरा मुरार निवासी कृषक देवराज कुशवाह का कहना था कि वे अब प्राकृतिक पद्धति से गेहूँ व सरसों जैसी खाद्यान्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। इसके अलावा वे भिंडी, गेहूँ, मिर्च व आलू जैसी फसलें भी पैदा करते हैं।

मुख्यमंत्री ने समन्वित कृषि प्रणाली एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाइयों का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली इकाई एवं बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई का लोकार्पण भी किया। किसानों के लिए आधुनिक, टिकाऊ एवं लाभकारी खेती का व्यावहारिक मॉडल कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित किया है।

इस “समन्वित कृषि प्रणाली इकाई” में फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन तथा जैविक खाद निर्माण जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया गया है। इस मॉडल में एक गतिविधि का अपशिष्ट दूसरी गतिविधि के लिए रॉ मटेरियल बनता है, जिससे लागत घटती है। साथ ही संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसानों को आय के अनेक स्रोत प्राप्त होते हैं।

इसी तरह “बहु-स्तरीय कृषि पद्धति इकाई” में एक ही खेत में विभिन्न ऊँचाई वाली फसलों का वैज्ञानिक संयोजन विकसित किया गया है। इससे भूमि, जल, पोषक तत्वों और सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है। किसान एक ही खेत से पूरे वर्ष विविध फसलों का उत्पादन लेकर अधिक आय अर्जित कर सकते हैं।

कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि विश्वविद्यालय ने इन दोनों इकाइयों को जीवंत प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन मॉडल के रूप में विकसित किया है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर किसान अपने खेतों में इन तकनीकों को अपना सकेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वितरित किये हेलमेट

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क सुरक्षा के उपहार स्वरूप जिले के लगभग 50 लोगों को हेलमेट वितरित किए। साथ ही सभी से आग्रह किया कि हेलमेट पहनकर वाहन चलाएं और दूसरों को भी इसके लिये प्रेरित करें। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा के लिये अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा हेलमेट वितरित किए गए।

मुख्यमंत्री ने डाले दाने और बतखों ने चाव से खाए

कृषि विश्वविद्यालय परिसर में समन्वित कृषि प्रणाली के तहत मॉडल स्वरूप बनाए गए बहुउद्देश्यीय तालाब में जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दाने डालकर तालाब के दूसरे छोर पर तैर रहीं बतखों को पुकारा तो बतखें उनके नजदीक आ गईं और बड़े चाव के साथ दानों को खाया। उल्लेखनीय है कि इस तालाब को कृषि विश्वविद्यालय परिसर के भवनों से जुड़ीं वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं से भरा जाता है। तालाब के ऊपर एक बड़ा मुर्गी पालन बॉक्स बनाया गया है। मुर्गियों के चूज़ों की बीट इस तालाब में गिरती है जिसे मछलियां व बतखें खाती हैं। इस प्रकार एक संरचना से सफलतापूर्वक मुर्गी, मछली व बतख पालन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत रोपा आम का पौधा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि विश्वविद्यालय परिसर में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत आम का पौधा रोपा। उन्होंने इस अवसर पर वृहद स्तर पर पौधे रोपने और उनकी सुरक्षा करने का आह्वान किया। मंत्रिगण ऐदल सिंह कंषाना व प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह व विधायक मोहन सिंह राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी पौधे रोपे।

कार्यक्रम में संभाग भर से आए प्रगतिशील किसान, जनप्रतिनिधिगण एवं संभाग आयुक्त मनोज खत्री, पुलिस महानिरीक्षक अरविंद कुमार सक्सेना, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे। 

इंदौर में 5 ब्लैक स्पॉट खत्म, लेकिन 5 नए बने हादसों के हॉटस्पॉट; रालामंडल चौराहा सबसे खतरनाक

इंदौर
 इंदौर शहर में सड़क सुरक्षा की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। एक ओर यातायात पुलिस और संबंधित एजेंसियों ने पांच ब्लैक स्पॉट को सूची से हटाने में सफलता हासिल की, तो दूसरी ओर उतने ही नए ब्लैक स्पॉट सामने आ गए। सबसे गंभीर बात यह है कि शहर के 16 ब्लैक स्पाट में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और बायपास कॉरिडोर पर हैं।

इससे बायपास इंदौर का सबसे खतरनाक दुर्घटना कारिडोर बनकर उभरा है। रालामंडल चौराहा पूरे शहर का सबसे संवेदनशील ब्लैक स्पाट है, जहां वर्ष 2023 से 15 जून 2026 तक 13 दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत हुई।

यातायात पुलिस के वर्ष-2025 के ब्लैक स्पाट के आंकड़ों (2023, 2024, 2025 तथा 15 जून 2026 तक) के अनुसार, शहर में वर्तमान में 16 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। इनमें 11 पुराने स्थान अब भी सूची में बने हुए हैं, जबकि पांच नए स्थानों को पहली बार ब्लैक स्पाट घोषित किया गया है। दूसरी ओर, पांच पुराने ब्लैक स्पाट को इंजीनियरिंग सुधार के बाद सूची से हटा दिया गया है।

यहां सबसे ज्यादा खतरा
आंकड़ों के अनुसार, दुर्घटनाओं का सबसे अधिक दबाव अब बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग पर है। ओमेक्स सिटी, बिचौली मर्दाना ब्रिज, रालामंडल चौराहा, कैलोद करताल फाटा, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज सहित अधिकांश ब्लैक स्पाट एनएचएआई के हिस्से में आते हैं।

तेज रफ्तार, भारी वाहनों की आवाजाही और जंक्शन की डिजाइन इस कॉरिडोर को अधिक जोखिमपूर्ण बना रही है। कैलोद करताल फाटा, लवकुश चौराहा और ओमेक्स सिटी भी लगातार हादसों की सूची में बने हुए हैं।

कुछ को सुधारा तो नए उभरे
रिजलाय फाटा, बेस्ट प्राइज, आईटी पार्क चौराहा और प्रभु तोल कांटा सहित पांच स्थानों को ब्लैक स्पाट की सूची से हटा दिया गया है। इन स्थानों पर इंजीनियरिंग सुधार और यातायात प्रबंधन का सकारात्मक असर दिखा है। वहीं एमआर-10 टोल, कनाड़िया ब्रिज, यूनो बिजनेस पार्क, फीनिक्स माल और नावदापंथ ब्रिज जैसे पांच नए स्थान ब्लैक स्पाट के रूप में सामने आए हैं। यानी जहां एक स्थान सुरक्षित हुआ, वहीं दूसरे स्थान पर खतरा बढ़ गया।

सिर्फ छह माह में 2.48 लाख चालान
यातायात पुलिस ने चालानी कार्रवाई में भी तेजी दिखाई है। एक जनवरी 2026 से 25 जून तक 2.48 लाख से अधिक चालान बनाए जा चुके हैं। सबसे अधिक कार्रवाई बिना हेलमेट, गलत पार्किंग और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर हुई है। इसके बावजूद ब्लैक स्पाट की संख्या में स्थायी कमी नहीं आई है। यह संकेत है कि केवल चालानी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सड़क की डिजाइन, संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और यातायात इंजीनियरिंग में भी व्यापक सुधार की जरूरत है।

    122 दुर्घटनाएं (2023 से 15 जून 2026 तक)
    123 मौतें दर्ज
    2,48,620 चालान ( एक जनवरी से 25 जून 2026 तक)

आगे यह करना होगा

ब्लैक स्पाट की सूची बताती है कि इंदौर में सड़क सुरक्षा का फोकस अब केवल शहर के चौराहों तक सीमित नहीं रह गया है। सबसे बड़ा जोखिम बायपास और राष्ट्रीय राजमार्ग के हिस्सों पर है। यदि इन कारिडोर पर इंजीनियरिंग सुधार, गति नियंत्रण और निगरानी को प्राथमिकता नहीं दी गई तो एक ब्लैक स्पाट हटने के साथ दूसरा बनने का सिलसिला जारी रहेगा।

    राऊ, रालामंडल और अर्जुन बड़ौद में फ्लाइओवर शुरू होने से वहां के ब्लैक स्पाट समाप्त हो गए हैं। अर्जुन बड़ौद में पुल बनने से पहले यातायात का दबाव अधिक था। लाजिस्टिक क्षेत्र होने के कारण ट्रक और ट्राले गलत दिशा से आते थे तथा सड़क पर खड़े रहते थे। इससे दुर्घटनाएं अधिक होती थीं, जो अब समाप्त हो गई हैं। एमआर-10 बायपास पर 65 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन और करीब ढाई किलोमीटर लंबे फ्लाइओवर का निर्माण अगले दो माह में पूरा हो जाएगा। नेमावर रोड पर राघवगढ़ के पास भी दो माह में काम पूरा होने की संभावना है। इससे आवागमन और अधिक सुरक्षित होगा। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट मैनेजर, एनएचएआई

 

ICMR Report: कोरोना के बाद बदली लोगों की लाइफस्टाइल, नींद की गोलियों की बिक्री में बड़ा उछाल

जबलपुर 

 भागदौड़ और तनावभरी जीवनशैली के बीच पर्याप्त नींद न लेना लोगों की सेहत के लिए गम्भीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन छह घंटे से भी कम नींद ले रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कम नींद न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि कार्यक्षमता और अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक असर डालती है।

एमपी के जबलपुर शहर में भी अनिद्रा की स्थिति गम्भीर होती जा रही है। ड्रग इंस्पेक्टर डॉ. डीके जैन के अनुसार कोरोना काल के बाद से नींद से सम्बंधित विभिन्न दवाइयों की मांग और बिक्री में भारी उछाल आया है। स्थानीय थोक दवा व्यापारियों के मुताबिक शहर में हर माह सवा करोड़ से दो करोड़ रुपए की नींद सम्बंधी दवाएं बिक रही हैं।

शरीर की जैविक जरूरत
मनोचिकित्सक डॉ. ओपी रायचंदानी के अनुसार नींद शरीर का एक बायोलॉजिकल फंक्शन है, जो सभी अंगों को री-स्टोर करती है। इसे आलस्य समझना गलत है। उनके अनुसार शहर में दस में से छह लोग कम नींद के कारण किसी न किसी स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित हैं।

सेहत पर असर
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, एक वयस्क के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है। रिसर्च के अनुसार खराब स्लीप -क्वालिटी के कारण देश को सालाना लगभग 29 हजार करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जब कोई कर्मचारी अधूरी नींद के साथ काम करता है, तो उसकी कार्यक्षमता (प्रोडक्टिविटी) घट जाती है और गलतियों की आशंका बढ़ जाती है।

अनिद्रा के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार बदलती जीवनशैली और डिजिटल आदतें अनिद्रा की प्रमुख वजह बन रही हैं। इनमें प्रमुख हैं-

डिजिटल स्क्रीन की लत: सोने से पहले लम्बे समय तक मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल स्क्रीन का उपयोग।

बिंज वाचिंग : लोग सोशल मीडिया और देर रात तक फिल्में या वेब सीरीज देखने के आदी हैं।

सामाजिक और आर्थिक कारक: शहरी शोर-शराबा, भीषण गर्मी और महिलाओं पर दोहरी जिम्मेदारियों का मानसिक दबाव।

नींद लाने के लिए करें ये काम
-समय पर नींद लाने के लिए रात का खाना सोने से 3-4 घंटे पहले खा लें।
-भारी, मसालेदार या तला हुआ खाना सोने में दिक्कत पैदा कर सकता
-रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में शहद या खसखस मिलाकर पीने से मस्तिष्क शांत होता है और अच्छी नींद आती है।
-शाम 4 बजे के बाद चाय, कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स जैसे कैफीन वाले पदार्थों का सेवन न करें।
-सोने वाले कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
-बिस्तर पर केवल सोने के उद्देश्य से जाएं। वहां बैठकर टीवी देखने या ऑफिस का काम करने से बचें।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu