साइबर सिक्योर 2026 अभियान के तहत एमपी ट्रांसको में हुआ साइबर जागरूकता कार्यक्रम

भोपाल 

मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) के शक्ति भवन मुख्यालय में “साइबर सिक्योर 2026” अभियान के अंतर्गत साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश साइबर पुलिस के विशेषज्ञों ने पावर सेक्टर में बढ़ते साइबर खतरों, साइबर अपराधों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी।

उप पुलिस अधीक्षक राज्य साइबर पुलिस श्रीमती उमाकांती आर्मो के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने एम पी ट्रांसको के कार्मिकों को सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, मोबाइल एप्स के सुरक्षित उपयोग, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड तथा साइबर ठगी के नए तरीकों से बचाव के बारे में प्रशिक्षित किया। साथ ही संदिग्ध कॉल, फर्जी लिंक, ई-मेल और डिजिटल लेनदेन के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर भी प्रकाश डाला गया।

पावर सेक्टर में साइबर खतरों से किया सचेत

साइबर विशेषज्ञ श्री मोहित पांडे ने पावर सेक्टर पर बढ़ते साइबर खतरों की चर्चा करते हुए साइबर सुरक्षा को ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। साइबर फ्रॉड की स्थिति में त्वरित रिपोर्टिंग और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी। वहीं साइबर विशेषज्ञ श्री राज शर्मा ने एआई युग में साइबर सुरक्षा की चुनौतियों, फर्जी ई-मेल से बचाव, प्रमाणित वेबसाइटों के उपयोग और संचार साथी ऐप की उपयोगिता पर जानकारी साझा की। इस अवसर पर लगभग 150 कार्मिकों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीथमपुर में लियूगोंग इंडिया के मेन्युफेक्चरिंग यूनिट का 8 जुलाई को करेंगे भूमि-पूजन

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 8 जुलाई को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लियुगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नए विनिर्माण संयंत्र का भूमि-पूजन करेंगे। चीन की अग्रणी बहुराष्ट्रीय निर्माण उपकरण निर्माता कंपनी गुआंग्शी लियुगोंग मशीनरी कंपनी लिमिटेड की भारतीय इकाई द्वारा किया जा रहा यह विस्तार मध्यप्रदेश को निर्माण उपकरण विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

पीथमपुर में स्थापित होने वाला नया संयंत्र लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 272 करोड़ रूपये का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र में प्रारंभिक चरण में प्रतिवर्ष 6,500 निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से एक्सकेवेटर का निर्माण किया जाएगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम होगी तथा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

लियुगोंग विश्व की अग्रणी निर्माण उपकरण निर्माता कंपनियों में शामिल है तथा व्हील लोडर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी पहचान रखती है। कंपनी व्हील लोडर, एक्सकेवेटर, मोटर ग्रेडर, माइनिंग डंप ट्रक, बुलडोजर, स्किड-स्टियर लोडर, फोर्कलिफ्ट, कोल्ड प्लेनर तथा अन्य आधुनिक निर्माण एवं खनन उपकरणों का निर्माण करती है।

कंपनी वर्ष 2008 से पीथमपुर में अपनी विनिर्माण इकाई का संचालन कर रही है। 44 एकड़ से अधिक क्षेत्र में स्थापित इस संयंत्र में प्रतिवर्ष 3 हजार व्हील लोडर एवं मोटर ग्रेडर के निर्माण की क्षमता है। वर्ष 2009 में इसी इकाई से पहला मेड इन इंडिया व्हील लोडर तैयार किया गया था। पीथमपुर स्थित इकाई में अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित हैं, जहां 500 से अधिक भारतीय युवा पेशेवर कार्यरत हैं। यह इकाई मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

देशभर में सड़क निर्माण, खनन, जलविद्युत एवं पाइपलाइन परियोजनाओं सहित विभिन्न आधारभूत संरचना कार्यों में कंपनी के 4 हजार से अधिक निर्माण उपकरण उपयोग में लाए जा रहे हैं। पीथमपुर में प्रस्तावित नया संयंत्र इस बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, उत्कृष्ट औद्योगिक अधोसंरचना, सरल प्रक्रियाओं तथा निवेशक हितैषी नीतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक निवेश केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लियुगोंग इंडिया का यह विस्तार राज्य में बढ़ते वैश्विक निवेशकों के विश्वास की एक और बड़ी मिसाल बनेगा।

 

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों से टी.टी. नगर स्टेडियम में मिले मंत्री सारंग

एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले खिलाड़ियों से टी.टी. नगर स्टेडियम में मिले मंत्री सारंग

खिलाड़ियों का किया उत्साहवर्धन कहा – मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर रचेंगे नया इतिहास
सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध

भोपाल

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने मंगलवार को टी.टी. नगर स्टेडियम में आगामी एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई करने वाले प्रदेश के खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से आत्मीय संवाद कर उनकी तैयारियों, प्रशिक्षण, फिटनेस और आगामी प्रतियोगिताओं को लेकर विस्तार से चर्चा की तथा उन्हें शुभकामनाएं देते हुए पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ देश का प्रतिनिधित्व करने का आह्वान किया।

मंत्री सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय आयोजन के लिए मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों का बड़ी संख्या में चयन होना पूरे प्रदेश के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। यह उपलब्धि खिलाड़ियों के अथक परिश्रम, प्रशिक्षकों के समर्पण तथा प्रदेश सरकार द्वारा खेलों के विकास के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और यहां के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रहे हैं।

मंत्री सारंग ने कहा कि प्रदेश सरकार खेलों के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। खिलाड़ियों को आधुनिक खेल अधोसंरचना, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, वैज्ञानिक कोचिंग, खेल विज्ञान, पोषण, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। सरकार की प्राथमिकता है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को हर स्तर पर आवश्यक सहयोग और अवसर प्राप्त हों।

मंत्री सारंग ने कहा कि एशियन गेम्स केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश के लिए गौरव अर्जित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्हें पूरा विश्वास है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत के लिए अधिक से अधिक पदक जीतेंगे और प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।

उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ अपनी तैयारियां जारी रखें। पूरे प्रदेश की शुभकामनाएं और विश्वास उनके साथ हैं। उन्होंने प्रशिक्षकों और खेल विभाग के अधिकारियों की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्पण का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि आगामी एशियन गेम्स के लिए मध्यप्रदेश के 22 खिलाड़ियों ने विभिन्न खेल विधाओं में क्वालिफाई किया है। इनमें एथलेटिक्स, शूटिंग, रायफल, कैनो स्लालम, कैनोइंग, कायाक, शॉटगन, क्लाउड जुडो, घुड़सवारी सहित विभिन्न खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से प्रदेश को उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने की बड़ी उम्मीदें हैं।

इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव संजीव सिंह, संचालक अंशुमन यादव, उपसचिव अजय श्रीवास्तव, खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षक, खेल अकादमियों के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। मंत्री सारंग ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनके साथ खड़ा है और उन्हें विश्वास है कि वे अपने प्रदर्शन से देश और प्रदेश को गौरवान्वित करेंगे।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीथमपुर में लियूगोंग इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का 8 जुलाई को करेंगे शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव पीथमपुर में लियूगोंग इंडिया के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का 8 जुलाई को करेंगे शुभारंभ

परियोजना 20 एकड़ क्षेत्र में होगी विकसित
2.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर का होगा निवेश

पीथमपुर 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 8 जुलाई को धार जिले के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में लियुगोंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नए विनिर्माण संयंत्र का भूमि-पूजन करेंगे। चीन की अग्रणी बहुराष्ट्रीय निर्माण उपकरण निर्माता कंपनी गुआंग्शी लियुगोंग मशीनरी कंपनी लिमिटेड की भारतीय इकाई द्वारा किया जा रहा यह विस्तार मध्यप्रदेश को निर्माण उपकरण विनिर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

पीथमपुर में स्थापित होने वाला नया संयंत्र लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में लगभग 2.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जा रहा है। संयंत्र में प्रारंभिक चरण में प्रतिवर्ष 6,500 निर्माण उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें मुख्य रूप से एक्सकेवेटर का निर्माण किया जाएगा। इससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलने के साथ आयात पर निर्भरता कम होगी तथा क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

लियुगोंग विश्व की अग्रणी निर्माण उपकरण निर्माता कंपनियों में शामिल है तथा व्हील लोडर निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी पहचान रखती है। कंपनी व्हील लोडर, एक्सकेवेटर, मोटर ग्रेडर, माइनिंग डंप ट्रक, बुलडोजर, स्किड-स्टियर लोडर, फोर्कलिफ्ट, कोल्ड प्लेनर तथा अन्य आधुनिक निर्माण एवं खनन उपकरणों का निर्माण करती है।

कंपनी वर्ष 2008 से पीथमपुर में अपनी विनिर्माण इकाई का संचालन कर रही है। 44 एकड़ से अधिक क्षेत्र में स्थापित इस संयंत्र में प्रतिवर्ष 3 हजार व्हील लोडर एवं मोटर ग्रेडर के निर्माण की क्षमता है। वर्ष 2009 में इसी इकाई से पहला मेड इन इंडिया व्हील लोडर तैयार किया गया था। पीथमपुर स्थित इकाई में अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित हैं, जहां 500 से अधिक भारतीय युवा पेशेवर कार्यरत हैं। यह इकाई मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत अभियान के उद्देश्यों को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

देशभर में सड़क निर्माण, खनन, जलविद्युत एवं पाइपलाइन परियोजनाओं सहित विभिन्न आधारभूत संरचना कार्यों में कंपनी के 4 हजार से अधिक निर्माण उपकरण उपयोग में लाए जा रहे हैं। पीथमपुर में प्रस्तावित नया संयंत्र इस बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, उत्कृष्ट औद्योगिक अधोसंरचना, सरल प्रक्रियाओं तथा निवेशक हितैषी नीतियों के माध्यम से मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी औद्योगिक निवेश केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। लियुगोंग इंडिया का यह विस्तार राज्य में बढ़ते वैश्विक निवेशकों के विश्वास की एक और बड़ी मिसाल बनेगा।

 

MP में 10 साल बाद प्रमोशन प्रक्रिया को मिली रफ्तार, 190 तहसीलदार बने डिप्टी कलेक्टर; देखें पूरी सूची

भोपाल
 मध्य प्रदेश सरकार ने करीब एक दशक से लंबित तहसीलदारों की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया को पूरा करते हुए 190 तहसीलदार, अधीक्षक भू-अभिलेख (एसएलआर) और प्रभारी डिप्टी कलेक्टरों को राज्य प्रशासनिक सेवा में डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नत कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने 7 जुलाई को इस संबंध में आदेश जारी किए।

इस फैसले के साथ वर्षों से रुकी पदोन्नतियों का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, फिलहाल पदोन्नत अधिकारियों की पदस्थापना में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही कार्य करते रहेंगे।

राजस्व विभाग से जीएडी के अधीन आए अधिकारी

सरकार के आदेश के अनुसार, कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सभी पदोन्नत अधिकारियों को राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही वे अब राजस्व विभाग के बजाय सामान्य प्रशासन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में माने जाएंगे।

आदेश में उन अधिकारियों को भी पदोन्नति का लाभ दिया गया है, जिन्होंने पहले प्रभारी डिप्टी कलेक्टर अथवा अधीक्षक भू-अभिलेख के रूप में कार्य करने की स्वीकृति दी थी, लेकिन कार्यवाहक उच्च पद का प्रभार ग्रहण नहीं किया था।

5400 ग्रेड पे पर होंगे पदोन्नत
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आदेश के साथ ही एक बड़ा ढांचागत बदलाव भी हुआ है. अब तक ये अधिकारी राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत थे लेकिन इस नियमित पदोन्नति के बाद इन सभी 190 अधिकारियों को सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) का अधिकारी माना जाएगा. जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से राज्य प्रशासनिक सेवा के कनिष्ठ श्रेणी वेतनमान (पे-मैट्रिक्स लेवल-12, 15600-39100 + 5400 ग्रेड पे) में पदोन्नत किया गया है। 

प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
सरकार के इस निर्णय से लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। साथ ही जिला प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने से प्रशासनिक कार्यों में भी गति आएगी।

अब नायब तहसीलदारों की पदोन्नति की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक अब राजस्व विभाग नायब तहसीलदारों की पदोन्नति प्रक्रिया भी जल्द पूरी कर सकता है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वर्तमान में प्रभारी तहसीलदार के रूप में कार्यरत करीब 200 नायब तहसीलदारों को नियमित तहसीलदार पद पर पदोन्नत करने के आदेश अगले एक-दो दिनों में जारी हो सकते हैं।

स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

स्वास्थ्य संस्थाओं में गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

दवाओं की मांग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण एवं मरीज तक वास्तविक उपलब्धता को प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के दिए निर्देश
मेडिकल सप्लाई चेन कार्ययोजना की समीक्षा की

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में प्रदेश की मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की कार्ययोजना की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी स्वास्थ्य संस्थाओं में आवश्यकता के अनुरूप गुणवत्तायुक्त दवाओं की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। दवाओं की मांग, भंडारण, गुणवत्ता परीक्षण, वितरण एवं मरीज तक वास्तविक उपलब्धता की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि दवाओं की समय पर टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए तथा गुणवत्ता परीक्षण उपरांत ही दवाओं का वितरण किया जाए। सभी स्तरों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और डिमांड-सप्लाई गैप की स्थिति निर्मित न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को दवाओं का वितरण सहजता से हो तथा दवा उपलब्धता के संबंध में किसी भी स्तर पर अनावश्यक कठिनाई न आए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि तकनीक आधारित मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था से दवाओं की उपलब्धता और वितरण की सतत निगरानी संभव होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय की गुणवत्ता सुदृढ़ और अधिक प्रभावी होगी।

आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने मेडिकल सप्लाई चेन व्यवस्था की प्रस्तावित कार्ययोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों पर 10 वेयरहाउस स्थापित किए जाएंगे। इन वेयरहाउसों में दवाओं के सुरक्षित एवं व्यवस्थित भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। हाई-एंड टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस का उपयोग कर दवाओं की रियल टाइम ट्रैकिंग तथा स्टॉक की स्थिति की सतत निगरानी की जाएगी। इससे मेडिकल सप्लाई चेन में एंड-टू-एंड इंटीग्रेशन सुनिश्चित होगा। दवाओं की उपलब्धता, स्टॉक की स्थिति, मांग एवं वितरण की जानकारी वास्तविक समय में प्राप्त हो सकेगी।

आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस ने बताया कि यह व्यवस्था क्षेत्रवार, केंद्रवार एवं स्वास्थ्य संस्था स्तर पर दवाओं की मांग का आकलन करने में भी सहायक होगी। इसके आधार पर आवश्यकता अनुरूप बेहतर योजना बनाते हुए दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे अंतिम उपयोगकर्ता अर्थात मरीज तक गुणवत्तायुक्त दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दवाओं की खरीदी की जाएगी। आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दवाएं वेयरहाउस तक पहुंचाई जाएंगी। वेयरहाउस में दवाओं का उचित भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा और दवाओं की समय पर गुणवत्ता जांच कराई जाएगी। एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण उपरांत ही दवाओं को वितरण के लिए भेजा जाएगा।

गुणवत्ता परीक्षण के बाद दवाओं का वितरण मेडिकल कॉलेजों, जिला चिकित्सालयों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालयों के औषधि भंडार, सिविल अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। आगामी चरण में इस व्यवस्था का एकीकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक किया जाएगा। साथ ही मरीज को दवा के वास्तविक वितरण की जानकारी भी रियल टाइम में दर्ज करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। बैठक में मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इंदौर के चर्चित ‘कोबरा कांड’ में बड़ा फैसला, पत्नी की हत्या करने वाले बैंककर्मी को उम्रकैद

इंदौर

इंदौर के बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा दी है। साल 2019 में बैंक अधिकारी अमितेष ने अपनी पत्नी शिवानी की हत्या के लिए एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित साजिश रची थी। वह इंदौर से लगभग 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर जिले से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का एक खतरनाक कोबरा 30 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। आरोपी ने इस सांप को 11 दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा।

इसके बाद जब उसे सही मौका मिला, तो उसने तकिए से अपनी पत्नी का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या को प्राकृतिक रूप देने के लिए उसने कोबरा को मार डाला और उसके दांतों को अपनी मृत पत्नी के हाथ में जबरन गड़ा दिए, ताकि पुलिस और डॉक्टर्स इसे सर्पदंश से हुई सामान्य मौत समझें। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ डॉक्टरों के बयानों ने अदालत के सामने सच्चाई लाकर रख दी।

करीब साढ़े छह साल तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमितेष को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा संरक्षित वन्यजीव कोबरा की हत्या करने के मामले में तीन साल के कारावास व 25 हजार रुपए के जुर्माने और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में दो साल की सजा भी सुनाई गई है।

सर्पदंश की झूठी कहानी रची
यह पूरी घटना इंदौर के संचार नगर में 1 दिसंबर 2019 को घटित हुई थी। 35 वर्षीय शिवानी पटेरिया को उसका पति अमितेष और उनका एक किरायेदार निखिल गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों को ससुराल पक्ष द्वारा यह जानकारी दी गई कि शिवानी की मौत सांप के काटने की वजह से हुई है लेकिन शिवानी के मायके पक्ष के लोगों ने घटना की सूचना मिलते ही इसे पूरी तरह संदेहास्पद बताया। जब कनाडिया थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर जांच के लिए पहुंचे, तो उन्हें घर के अंदर एक मरा हुआ कोबरा सांप पड़ा मिला। उस दौरान शिवानी के चाचा प्रभात दीक्षित ने पुलिस के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि उनकी भतीजी की सोची-समझी रणनीति के तहत हत्या की गई है।

बिस्तर पर ही मरा हुआ था सांप
शिवानी अपने घर के पलंग पर मृत अवस्था में पाई गई थी और उसी बिस्तर पर वह सांप भी मरा हुआ मिला था। चाचा का कहना था कि कुछ समय पहले अमितेष ने शिवानी से तलाक लेने का प्रयास किया था, क्योंकि वह दिल्ली की किसी अन्य युवती के लगातार संपर्क में था और हर हाल में शिवानी को अपने जीवन से हटाना चाहता था। मायके पक्ष का यह भी आरोप था कि पति ने पहले भी हत्या का प्रयास किया था, जिसमें एक बार गला दबाने और घटना से दो दिन पहले जहर देने की कोशिश शामिल थी। घटना की सुबह भी यह अफवाह फैलाई गई कि पार्लर में सांप ने काटा है, लेकिन जब बात कराने को कहा गया तो मना कर दिया गया और शाम को मौत की सूचना दी गई। उस वक्त घर में ससुर ओमप्रकाश और ननद ऋचा भी मौजूद थे।

बहन भी साजिश में शामिल थी
शिवानी के पिता आनंद दीक्षित ने पुलिस को दिए अपने बयानों में स्पष्ट कहा था कि उनके दामाद ने अपनी बहन के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित योजना के तहत घटना वाले दिन आरोपी की बहन दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर मॉल चली गई थी ताकि घर खाली रहे। शाम को जब बच्चे वापस लौटे तब तक शिवानी को अस्पताल ले जाया जा चुका था।

दिल्ली में दूसरी महिला के साथ रहता था 
अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पिता को बताया कि शिवानी की मृत्यु लगभग 10 से 12 घंटे पहले ही हो चुकी थी। पिता ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि बेटी का शरीर जहर के कारण काला पड़ने के बजाय पूरी तरह पीला था, जिससे साफ था कि मौत सांप के काटने से नहीं हुई थी। पिता ने बताया कि 9 साल पहले उन्होंने बड़े अरमानों से बेटी की शादी की थी, लेकिन शादी के बाद से ही दामाद दिल्ली में किसी दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रह रहा था।

इस बात की जानकारी मिलने पर जब वे दिल्ली गए तो दामाद उस महिला के साथ ही मिला, जिसके बाद वे उसे समझा-बुझाकर वापस इंदौर लेकर आए थे। इसके बावजूद वह लगातार दहेज के नाम पर शिवानी को प्रताड़ित करता रहा और मायके पक्ष की ओर से समय-समय पर करीब 25 लाख रुपए दिए जा चुके थे। पिता ने शुरुआत में ही मांग की थी कि जिस सांप के डसने का दावा किया जा रहा है, उसका किसी वेटरनरी डॉक्टर से पोस्टमॉर्टम कराया जाए ताकि सच सामने आ सके।

पुलिस तफ्तीश के बाद अदालत ने सजा सुनाई
इन बयानों और घटनास्थल के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस का शक गहराता चला गया। कनाड़िया पुलिस ने अमितेष पटेरिया को हिरासत में लेकर दो दिनों तक कड़ी पूछताछ की। शुरुआती दौर में वह पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि शिवानी से उसका आए दिन विवाद होता था, जिससे तंग आकर उसने तकिए से उसका मुंह दबाकर उसे मार डाला।

इससे पहले वह योजना के मुताबिक अलवर से कोबरा लाया था, जिसे मारकर उसने पत्नी के शव के पास रख दिया ताकि यह एक हादसा लगे। पुलिस ने जांच पूरी कर अमितेष, उसके पिता ओमप्रकाश पटेरिया और बहन ऋचा चतुर्वेदी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। 24 जून 2026 को अदालत ने अपने फैसले में माना कि अमितेष ने ही तकिए से मुंह दबाकर हत्या की और इसे प्राकृतिक रूप देने के लिए सांप के काटने का नाटक रचा था।

पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच से खुला राज
इस पूरे आपराधिक मामले में सबसे निर्णायक मोड़ पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट से आया। डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने साफ कर दिया कि शिवानी के शरीर में सांप के जहर का कोई अंश नहीं था, बल्कि उसकी मृत्यु तकिए या किसी भारी वस्तु से मुंह और नाक दबाए जाने के कारण दम घुटने से हुई थी। शव पर पाए गए अंदरूनी और बाहरी चोटों के निशान, बिस्तर की बिखरी हुई स्थिति और घटनास्थल से संकलित किए गए भौतिक साक्ष्यों ने हत्या की पुष्टि की।

फोरेंसिक विशेषज्ञों को बिस्तर की चादर, तकिए के कवर और मृत कोबरा से कई महत्वपूर्ण सबूत मिले। घटनास्थल पर चादर का बहुत ज्यादा अस्त-व्यस्त होना और तकिए के कवर पर लार के धब्बे मिलना इस बात का गवाह थे कि मौत से पहले संघर्ष हुआ था, जिसने पुलिस की तफ्तीश को सही दिशा दी।

कॉल रिकॉर्डिंग और डिजिटल साक्ष्य बने आधार
अदालती कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपी अमितेष और उसकी बहन के बीच हुई मोबाइल फोन की बातचीत की रिकॉर्डिंग को एक मुख्य सबूत के तौर पर पेश किया। इस ऑडियो रिकॉर्डिंग में घटना को अंजाम देने और उसके बाद साक्ष्यों को छुपाने की पूरी साजिश के पुख्ता संकेत मिले थे। अदालत ने कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड, वॉइस सैंपल्स की मैचिंग रिपोर्ट, फोरेंसिक रिपोर्ट और चश्मदीद गवाहों के बयानों को बेहद अहम कड़ी माना। आस-पड़ोस के लोगों ने भी गवाही दी कि घटना के वक्त घर में केवल शिवानी और उसका पति अमितेष ही मौजूद थे, जिसके बाद पति ने अचानक शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया और कोबरा के डसने की झूठी कहानी सुनाई।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अतिरिक्त सजा
इस हत्याकांड का एक और गंभीर कानूनी पहलू यह था कि इसमें एक संरक्षित वन्यजीव यानी कोबरा सांप का क्रूरता से इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह पूरी तरह साबित हुआ कि अमितेष ने अपनी पत्नी की हत्या को छुपाने के लिए कोबरा को तड़पाकर मारा और उसके दांतों का इस्तेमाल किया।

इसी वजह से कनाड़िया पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 को भी मामले में जोड़ा था। अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि एक मूक और संरक्षित वन्यजीव की तस्करी करना, उसे मारना और एक जघन्य अपराध में उसका इस्तेमाल करना बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध है। 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सांप के काटने का कोई जैविक साक्ष्य नहीं मिला  
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के वेटरनरी विशेषज्ञ डॉ. उत्तम यादव ने अदालत में अपनी रिपोर्ट और बयान में स्पष्ट किया था कि वह सांप अत्यधिक विषैली कोबरा प्रजाति का ही था, जिसके पास जहर ग्रंथि और दांत मौजूद थे, जिसका काटना किसी भी इंसान को पंगु बना सकता है या उसकी जान ले सकता है।

हालांकि, शिवानी के शरीर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सांप के काटने का कोई जैविक साक्ष्य नहीं मिला और यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हुआ कि मौत सिर्फ और सिर्फ गला दबाने से हुई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, एक जीवित व्यक्ति को सांप के काटने और एक मृत शरीर पर सांप के दांत गड़ाने के वैज्ञानिक साक्ष्यों में जमीन-आसमान का अंतर होता है, जिसे फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स आसानी से पकड़ लेते हैं। भले ही शिवानी की मौत सांप से नहीं हुई, लेकिन आरोपी द्वारा कोबरा की हत्या करने का जुर्म साबित होने पर कोर्ट ने उसे इस कानून के तहत तीन साल की सश्रम सजा भुगतने का आदेश दिया। 

 

MP सरकार ने फिर लिया ₹3,600 करोड़ का कर्ज, राज्य पर कुल देनदारी ₹5.61 लाख करोड़ के पार

भोपाल

मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह राशि दो अलग-अलग किश्तों में 18 वर्ष और 30 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.6114 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है।

वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि बॉन्ड जारी कर और सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की नीलामी के माध्यम से जुटाई जाएगी। ऋण की राशि का उपयोग राज्य में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और विभिन्न सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। इस उधारी के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई है।

18 और 30 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया ऋण
अधिसूचना के मुताबिक, पहली किश्त 1,600 करोड़ रुपए की है, जिसे 18 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया है। इस पर ब्याज का भुगतान निर्धारित अवधि तक प्रत्येक वर्ष किया जाएगा।

दूसरी किश्त 2,000 करोड़ रुपए की है, जिसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2056 तक रहेगी। दोनों ऋणों पर राज्य सरकार 7.90 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का भुगतान करेगी। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि ऋण राशि का भुगतान बुधवार को होगा।

ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए हुई नीलामी
राजपत्र के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित की गई, जिसमें पात्र और संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। गैर-प्रतिस्पर्धी निवेशकों के लिए भी निर्धारित सीमा तक निवेश की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

31 मार्च तक प्रदेश पर था 4.88 लाख करोड़ का कर्ज
सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का ऋण था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपए के मार्केट लोन का है। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय लघु बचत निधि और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी कुल देनदारियों में शामिल हैं।

विकास कार्यों पर खर्च होगा ऋण
राज्य सरकार का कहना है कि इस ऋण का उपयोग सिंचाई, कृषि, ऊर्जा, सड़क, संचार, पेयजल, सहकारी संस्थाओं के विकास और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। सरकार ने यह भी दावा किया है कि राज्य की परिसंपत्तियों का मूल्य उसकी कुल देनदारियों से अधिक है, जिससे वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है।

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित

5वीं में 80% और 8वीं में 74 % से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण
सत्र 2025-26 में पांचवीं में कुल 98.89 और आठवीं में 98.19 % हुआ परीक्षा फल

भोपाल

मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग ने मंगलवार को कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। विद्यार्थी व अभिभावक राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल पर परिणाम देख सकते हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पुन: परीक्षा में कक्षा 5वीं में 80.42 एवं कक्षा 8वीं में 74.16 % परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं, मुख्य वार्षिक परीक्षा और पुन: परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या को मिलाकर इस सत्र में कक्षा 5वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.89 एवं कक्षा 8वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.19 प्रतिशत रहा है।

राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह ने बताया कि विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण उक्त परिणामों को राज्य शिक्षा केन्द्र के https://www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नम्बर डालकर देख सकते हैं। साथ ही शिक्षक, संस्था प्रमुख भी अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम इसी पोर्टल पर देख सकते हैं।

गौरतलब है कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा 16 से 23 जून के बीच कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 71, 548 तथा कक्षा 8वीं के 76, 274 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। इन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश में कुल 322 केन्द्र बनाए गए थे। 17, 000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई थी।

वहीं कक्षा पांचवीं में शासकीय स्कूलों के कुल 46, 665 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 36, 217 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा में 581 में से 352 विद्यार्थी पास हुए हैं, तो वहीं अशासकीय स्कूलों के 24, 302 विद्यार्थियों में से 20, 971 विद्यार्थी परीक्षा में पास हुए हैं। इसी प्रकार कक्षा 8वीं में शासकीय स्कूलों के कुल 56,738 विद्यार्थियों में से 40, 315 उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा के 423 में से 268 और अशासकीय विद्यालयों के 19, 113 में से 15,978 विद्यार्थी पास हुए हैं।

 

दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ तस्करी मामले में आरोपियों को 2 वर्ष का सश्रम कारावास

दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ तस्करी मामले में आरोपियों को 2 वर्ष का सश्रम कारावास

10 वर्ष पुराने प्रकरण में अदालत ने सुनाया फैसला, प्रत्येक पर ₹5 हजार का जुर्माना

भोपाल 

भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ की तस्करी से जुड़े लगभग 10 वर्ष पुराने मामले में 2 आरोपियों को 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय अपराध क्रमांक 59/2016 (दिनांक 22 अगस्त 2016) में 29 जून 2026 को सुनाया गया।

स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश तथा क्राइम ब्रांच भोपाल को प्राप्त सूचना के आधार पर 22 अगस्त 2016 को राहुल नगर झुग्गी बस्ती स्थित मंदिर के पास मुख्य मार्ग से 2 संदिग्धों को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में उनकी पहचान भोपाल निवासी अमन वामने और वरुण विश्वकर्मा के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उनके पास मौजूद कपड़े के थैले से एक जीवित दुर्लभ वन्यजीव सेंडबोआ बरामद किया गया। क्राइम ब्रांच ने वन्यजीव को विधिवत जब्त कर दोनों आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

सुनवाई के दौरान क्राइम ब्रांच के साथ स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, मध्यप्रदेश के तीन शासकीय अधिकारियों ने अभियोजन पक्ष के साक्षी के रूप में न्यायालय में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। विशेष लोक अभियोजकों की प्रभावी पैरवी के परिणामस्वरूप न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

 

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