सीएम डॉ. मोहन ने 10 साल बाद दिया प्रमोशन, गदगद हुए कर्मचारी, ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत

सीएम डॉ. मोहन ने 10 साल बाद दिया प्रमोशन, गदगद हुए कर्मचारी, ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत

– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दशक बाद शुरू की पदोन्नति की प्रक्रिया
– कर्मचारियों ने मंत्रालय में सीएम डॉ. यादव को भेंट किया गुलदस्ता
– वर्षों से इंतजार कर रहे लाखों कर्मचारियों को होगा सीधा लाभ

भोपाल
 मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दस साल से अपेक्षित बड़ी सौगात दी है। उन्होंने एक दशक बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया शुरू होने पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने सीएम डॉ. यादव का स्वागत किया। इस बीच कर्मचारियों ने यह भी मांग कर दी कि जिन विभागों में यह प्रक्रिया शुरू नहीं है, वहां भी जल्द शुरू की जाए। इस पर सीएम डॉ. यादव ने उन्हें आश्वासन दिया कि जो भी अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति का पात्र होगा, उसे वह दी जाएगी। सरकार की इस पहल से लाखों कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा।

गौरतलब है कि, 8 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट बैठक के लिए जैसे ही मंत्रालय पहुंचे, वैसे ही उनके स्वागत में ढोल-नगाड़े बजने लगे। अधिकारी-कर्मचारी उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े। कर्मचारियों ने सीएम डॉ. यादव को गुलदस्ता भेंट किया। इस मौके पर कर्मचारियों ने कहा कि हम पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हैं। 

कर्मचारी कल्याण के लिए सीएम डॉ. यादव प्रतिबद्ध
इस अवसर पर कर्मचारी कल्याण समिति, मंत्रालय कर्मचारी संघ और अजाक्स  के पदाधिकारी मौजूद थे। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कर्मचारी कल्याण के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस अवसर पर भी संघों के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि कोई भी पात्र कर्मचारी अन्याय का शिकार नहीं होगा। उन्होंने पद संभालते ही कर्मचारी कल्याण के लिए पहल करनी शुरू कर दी थीं। उसी का परिणाम है कि आज लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा होने जा रहा है।

MP Weather: मध्यप्रदेश में मानसून मेहरबान, कई जिलों में झमाझम बारिश; गुना-शिवपुरी समेत 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

 भोपाल
 दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के चलते पूरा प्रदेश इस समय वर्षा में भीग रहा है। मंगलवार को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं रिमझिम बौछारें पड़ीं तो कहीं तेज वर्षा हुई। छतरपुर जिले के खजुराहो में सबसे अधिक 43 मिलीमीटर वर्षा रिकार्ड की गई। इसके अलावा धार में 39 मिलीमीटर और राजगढ़ में 30 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।

मंगलवार को बारिश के साथ-साथ तेज हवाओं ने भी अपना असर दिखाया। ग्वालियर और गुना समेत कई जिलों में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। शाम होते-होते छिंदवाड़ा, सिवनी और सीधी समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा हुई। लगातार हो रही इस झमाझम और रिमझिम वर्षा के कारण प्रदेश के तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के तापमान में एक से पांच डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई। अधिकतम तापमान 28.0 डिग्री सेल्सियस से 33.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस से 28.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। पूर्वी मध्य प्रदेश के तापमान में एक से सात डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हुई। इस क्षेत्र में अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस से 32.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21.4 डिग्री सेल्सियस से 25.8 डिग्री सेल्सियस के बीच रिकार्ड हुआ।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले पांच दिनों के दौरान प्रदेश के मौसम में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होने वाला है, यानी बारिश का यह दौर लगातार जारी रहेगा। मौसम विभाग ने बुधवार के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में आरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है।

इन इलाकों के लिए अलर्ट जारी
ऑरेंज अलर्ट : गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, सागर और टीकमगढ़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। यहां भारी वर्षा के साथ 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है।

येलो अलर्ट : विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, झाबुआ, धार, इंदौर, उज्जैन, आगर, मंदसौर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, दमोह, छतरपुर और निवाड़ी में बारिश व वज्रपात की चेतावनी दी गई है।

तेज आंधी व वज्रपात की चेतावनी
भोपाल, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, रतलाम, देवास, शाजापुर, नीमच, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, मैहर और पांढ़ुर्णा में तेज आंधी और गरज चमक के साथ वज्रपात की चेतावनी दी गई है।

मंगलवार को कहां कितनी हुई बारिश
(तड़के चार बजे से शाम छह बजे तक)
शहर — बारिश(मिलीमीटर में)
बैतूल — 0.6
भोपाल — 10.0
धार — 39.0
गुना — 4.0
नर्मदापुरम – 6.0
इंदौर — 8.0
खंडवा — 5.0
खरगोन — 13.0
रायसेन — 8.0
रतलाम — 23.0
उज्जैन — 17.0
सागर — 15.0
छिंदवाड़ा — 8.0
दमोह — 5.0
जबलपुर — 0.6
सागर — 15.0
सतना — 6.0
सीधी — 4.0
टीकमगढ़ — 6.0

 

MP SI भर्ती का फाइनल रिजल्ट जारी! 436 अभ्यर्थियों का चयन, संजय परमार बने प्रदेश टॉपर

भोपाल 

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने उपनिरीक्षक और सूबेदार भर्ती परीक्षा का अंतिम परिणाम घोषित कर दिया। 500 रिक्त पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया में केवल 436 अभ्यर्थियों का चयन हो सका। महिला और अन्य आरक्षित वर्गों में पर्याप्त पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने के कारण 64 पद खाली रह गए। अंतिम मेरिट सूची में ओबीसी वर्ग के संजय परमार ने 595.98 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। शीर्ष-10 सफल अभ्यर्थियों में पांच उम्मीदवार ओबीसी वर्ग से हैं।

5,113 अभ्यर्थी पहुंचे दूसरे चरण तक
कर्मचारी चयन मंडल के अनुसार लिखित परीक्षा के बाद कुल 5,113 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए पात्र घोषित किए गए थे। इनमें से रिक्त पदों के तीन गुना यानी 1,692 अभ्यर्थियों को शारीरिक दक्षता परीक्षा और साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। अंतिम चयन सूची लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के आधार पर तैयार की गई।

64 पद खाली रह गए
भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी सभी 500 पद नहीं भर सके। महिला एवं अन्य आरक्षित वर्गों में पर्याप्त योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने से केवल 436 पदों पर ही चयन हो पाया। मंडल ने नियमों के अनुसार कुछ रिक्त पदों का वर्ग परिवर्तन भी किया, लेकिन इसके बावजूद सभी पद नहीं भरे जा सके।

समान अंक मिलने पर ऐसे तय हुई वरीयता
मंडल के अधिकारियों ने बताया कि समान अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की वरीयता आयु और आरक्षण संबंधी नियमों के आधार पर तय की गई। वहीं पूर्व सैनिकों को शासन के प्रावधानों के अनुसार मुख्य चरण की प्रारंभिक परीक्षा में 5 प्रतिशत अतिरिक्त अंकों का लाभ दिया गया।

ऐसा रहा कटऑफ
सूबेदार : 571.16 अंक
विशेष सशस्त्र बल उपनिरीक्षक : 497.27 अंक
जिला पुलिस बल उपनिरीक्षक : 505.206 अंक

शीर्ष-10 में ओबीसी वर्ग का दबदबा
अंतिम मेरिट सूची में पहले दस स्थानों में पांच अभ्यर्थी ओबीसी वर्ग से हैं। इसके अलावा तीन उम्मीदवार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दो उम्मीदवार अनारक्षित वर्ग से चयनित हुए हैं। 

अब होगी दस्तावेज जांच और चिकित्सकीय परीक्षण
कर्मचारी चयन मंडल ने परिणाम के साथ पदवार, श्रेणीवार और संवर्गवार कटऑफ भी जारी कर दिया है। चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन, चिकित्सकीय परीक्षण और नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पुलिस विभाग द्वारा पूरी की जाएगी। अभ्यर्थी कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से अपना परिणाम देख सकते हैं। मंडल ने स्पष्ट किया है कि यदि परिणाम में किसी प्रकार की तकनीकी त्रुटि सामने आती है, तो आवश्यक संशोधन करने का अधिकार उसके पास सुरक्षित रहेगा। 

उमरिया का जोहिला बांध ओवरफ्लो! 2 गेट खुले, धुआंधार बहाव देखने उमड़ी लोगों की भारी भीड़

उमरिया
 उमरिया में बीते कई दिनों से लगातार बारिश हो रही है, जिसकी वजह से नाले और नद‍ियां लगातार उफान पर होने को आतुर हैं. शहडोल संभाग के अलग-अलग हिस्सों में अच्छी खासी बारिश के चलते संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र स्थित जोहिला बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है. स्थिति को देखते हुए मंगलवार को बांध के दो गेट लगभग दो-दो मीटर तक खोल दिए गए। 

जोहिला बांध के दो गेट खोले
उमरिया में भी झमाझम बारिश का दौर देखने को मिल रहा है. इसका असर अब नदी नालों पर भी दिख रहा है. नदी नाले उफान पर आ रहे हैं, उमरिया के संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र स्थित जोहिला बांध का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, मंगलवार को जोहिला बांध के दो गेट लगभग एक-एक मीटर तक खोलकर पानी छोड़ा गया है। 

सुरक्षा के कड़े इंतेजाम
ताप विद्युत केंद्र के अधिकारी मनोज त्रिपाठी ने कहा, “बढ़ते जल स्तर को देखते हुए दो गेट खोले गए हैं. स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. बांध से पानी छोड़े जाने के बाद अब जिला प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है. निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया गया है. प्रशासन ने आम जनता को नदी नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्र के नजदीक न जाने की सलाह दी है. अनावश्यक रिस्क लेने से भी मना किया है। 

पुलिस बल और बांध कर्मचारियों की तैनात
जोहिला बांध के जो दो गेट खोले गए हैं. यह कदम सुरक्षा सुनिश्चित करने जलस्तर को कंट्रोल करने के मकसद से उठाया गया है. लगातार हो रही बारिश के कारण जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है, गेट खोलने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग बांध का नजारा देखने पहुंचने लगे, इस दौरान कई लोग अपने मोबाइल फोन से वीडियो तस्वीर बनाते भी देखे गए। 

सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बांध परिसर में बैरिकेडिंग की गई है. इसके साथ पुलिस बल और बांध कर्मचारियों को भी तैनात किया गया था, जिससे किसी भी तरह के अप्रिय घटना से बचा जा सके. अधिकारियों ने बताया कि अगर बारिश का दौर जारी रहता है और बांध के जलस्तर में और वृद्धि होती है तो और भी गेट खोले जा सकते हैं। 

उमरिया में अधीक्षक भू अभिलेख ने बताया है कि, बीते 24 घंटे में 51.8 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है. जिले में 1 जून से लेकर के 7 जुलाई तक 215.8 मिली मीटर वर्षा रिकार्ड की गई है। 

मध्य प्रदेश के विदिशा शहर में मानसून की शुरुआती जोरदार बारिश ने स्थानीय प्रशासन और नगर पालिका के दावों की जमीनी हकीकत सामने ला दी है. मंगलवार रात को हुई तेज बारिश के बाद शहर के कई मुख्य मार्ग और चौराहे जलमग्न हो गए. ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी के चलते सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 

पहली ही बारिश में नगर पालिका के दावे फेल
विदिशा शहर के बीचों-बीच स्थित सड़कों पर पानी का भराव इतना ज्यादा है कि, नीचे के गहरे गड्ढे वाहन चालकों को नजर नहीं आ रहे हैं. साफ देखा जा सकता है कि किस तरह पानी से लबालब भरी सड़कों पर गाड़ियां और मोटरसाइकिलें अनियंत्रित होकर कूद रही हैं. कई दोपहिया वाहन चालक इन गड्ढों के कारण संतुलन खो रहे हैं, जिससे हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। 

मेरा कचरा-मेरी जिम्मेदारी के संकल्प से मध्यप्रदेश बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मेरा कचरा-मेरी जिम्मेदारी के संकल्प से मध्यप्रदेश बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर मध्यप्रदेश के जागरूक नागरिकों के अमूल्य और अनुकरणीय सहयोग से राज्य ने स्वच्छता के क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां अर्जित की हैं। पर्यावरण संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में राज्य सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2026 से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026′ को प्रभावी रूप से लागू कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह नवीन नियम केवल नगरीय निकायों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें राज्य के सभी शासकीय विभागों में समान रूप से लागू किया गया है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों से निकलने वाले कचरे को भी समेकित कर वैज्ञानिक पद्धति से प्रबंधित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस दूरगामी नियम का सफल क्रियान्वयन केवल शासकीय प्रयासों से संभव नहीं है, इसके लिए राज्य के प्रत्येक नागरिक, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान को आगे आकर अपनी महती भूमिका निभानी होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भावी पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य को रेखांकित करते हुए प्रदेशवासियों से अपनी दैनिक दिनचर्या में विशेष आदतों को सम्मिलित करने के लिए कहा कि पर्यावरण को अक्षुण्ण रखने के लिए हमें यह दृढ़ संकल्प लेना होगा कि हम किसी भी प्रकार का कचरा न तो खुले में फेंकेंगे और न ही उसे जलाएंगे। अपने घर, गली, मोहल्ले और नगर को कचरा मुक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है कि नागरिक अपने घरों से निकलने वाले अपशिष्ट को चार श्रेणियों— ‘गीला, सूखा, सैनिटरी एवं स्पेशल केयर’ में अनिवार्य रूप से अलग-अलग करके ही अधिकृत कचरा संग्रहण वाहन को सौंपें।

कचरे को संपदा में बदलने और पुनर्चक्रण के सिद्धांतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से गृह-स्तर पर जैविक खाद निर्माण (होम कम्पोस्टिंग) अपनाने की अपील की है। उन्होंने आह्वान किया कि पुराने कपड़े, पुस्तकें और अन्य उपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय स्थानीय ‘रिड्यूस, रियूस, रिसाईकल’ (आरआरआर) केंद्रों में जमा करें। इसके साथ ही, पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली विकसित करने के लिए बाजार जाते समय हमेशा अपना कपड़े का झोला और पानी की व्यक्तिगत बोतल साथ रखने की आदत डालें, जिससे एकल-उपयोग प्लास्टिक और अपशिष्ट की उत्पत्ति को प्राथमिक स्तर पर ही न्यूनतम किया जा सके।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य के समस्त नगरीय निकायों को प्रदेश के प्रत्येक घर, व्यावसायिक दुकान और झुग्गी बस्तियों से नियमित, समयबद्ध और निर्बाध रूप से कचरे का संग्रहण करने के निर्देश दिए। इस जन-सरोकार के कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वच्छता हमारे सामूहिक स्वास्थ्य, पर्यावरण संतुलन और जीवन की समग्र गुणवत्ता का आधार स्तंभ है। हम आज यदि पूर्ण उत्तरदायित्व के साथ कार्य करेंगे, तभी अपनी भावी पीढ़ी को एक स्वच्छ, समृद्ध और सुरक्षित मध्यप्रदेश सौंप पाएंगे। उन्होंने आह्वान किया कि आइए, हम सब मिलकर “मेरा कचरा – मेरी जिम्मेदारी” के मंत्र को आत्मसात करें और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के सफल क्रियान्वयन में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराकर मध्यप्रदेश को देश का सबसे स्वच्छ, सुंदर और संवहनीय (सस्टेनेबल) राज्य बनाएं।

 

चार दशक, अनगिनत बदलाव : ग्रामीण भारत में आईसेक्ट इंडिया की परिवर्तनकारी पहल

भोपाल

 भारत के विकास का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब उसके लाभ गांवों, कस्बों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचें। शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी यही चुनौती लंबे समय तक बनी रही। एक समय ऐसा था, जब कंप्यूटर शिक्षा केवल महानगरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थी। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अधिकांश युवाओं के लिए आधुनिक तकनीकी शिक्षा तक पहुंचना एक कठिन सपना था। ऐसे समय में कुछ लोगों ने केवल परिस्थितियों को स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्हें बदलने का संकल्प लिया।
ऐसे ही दूरदर्शी व्यक्तित्व थे वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार और चिंतक संतोष चौबे। वर्ष 1985 में उन्होंने ऑल इंडिया सोसाइटी फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर टेक्नोलॉजी (आईसेक्ट) की स्थापना इस विश्वास के साथ की कि भारत का भविष्य तभी सशक्त होगा, जब शिक्षा, तकनीक और कौशल का लाभ गांवों और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भरता, सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का आधार थी। यही सोच आगे चलकर आईसेक्ट की कार्यसंस्कृति, विस्तार और विकास यात्रा की मूल प्रेरणा बनी।

इस सोच को व्यवहार में उतारते हुए वर्ष 1986 में भोपाल में पहला प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया गया। यह केवल एक शिक्षण केंद्र नहीं था, बल्कि ग्रामीण भारत में तकनीकी शिक्षा के लोकतांत्रीकरण की दिशा में उठाया गया एक महत्त्वपूर्ण कदम था। संस्था ने स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ही प्रशिक्षक बनाया, जिससे शिक्षा के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, नेतृत्व और आत्मविश्वास के नए अवसर विकसित हुए।

धीरे-धीरे यह प्रयास एक व्यापक सामाजिक पहल में बदलने लगा। आईसेक्ट ने यह सिद्ध किया कि यदि आधुनिक शिक्षा को स्थानीय आवश्यकताओं और समुदाय की भागीदारी से जोड़ा जाए, तो परिवर्तन दूरस्थ क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है।
 
शिक्षा से कौशल, कौशल से आत्मनिर्भरता

वर्ष 1995 आईसेक्ट की विकास यात्रा का महत्त्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ। इसी अवधि में संस्था ने अपने कार्यों का विस्तार करते हुए बहुउद्देशीय प्रशिक्षण केंद्र की अवधारणा विकसित की। इन केंद्रों में शिक्षा के साथ कौशल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और सामुदायिक विकास की गतिविधियों को एक साथ जोड़ा गया। इससे प्रशिक्षण केंद्र केवल शिक्षण संस्थान नहीं रहे, बल्कि स्थानीय विकास के केंद्र के रूप में विकसित होने लगे।

इसी समय अधिकृत केंद्र मॉडल को अपनाकर स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को संस्था के साथ जोड़ा गया। इससे शिक्षा के विस्तार में जनभागीदारी बढ़ी और अनेक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के नए अवसर भी बने। जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा के प्रति समाज का विश्वास बढ़ा और ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक शिक्षा की स्वीकार्यता मजबूत हुई।

संस्था के बढ़ते कार्यक्षेत्र को अधिक व्यवस्थित स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्ष 2003 में आईसेक्ट लिमिटेड की स्थापना की गई। इसके साथ शिक्षा, कौशल विकास और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों का विस्तार और अधिक संगठित रूप में आगे बढ़ा। यही वह दौर था, जब आईसेक्ट ने प्रशिक्षण संस्था की सीमाओं से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास को एक-दूसरे से जोड़ने वाले व्यापक मॉडल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।
 
उच्च शिक्षा, नवाचार और भविष्य की तैयारी

तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार करने के बाद आईसेक्ट ने उच्च शिक्षा को भी अपनी विकास यात्रा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बनाया। उद्देश्य स्पष्ट था कि महानगरों तक सीमित गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को राज्यों और क्षेत्रीय स्तर तक पहुंचाना, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर अवसर अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकें।

इस दिशा में वर्ष 2005 में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। इसके बाद वर्ष 2010 में भोपाल में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, 2016 में झारखंड के हजारीबाग में आईसेक्ट विश्वविद्यालय, 2018 में बिहार के वैशाली तथा मध्य प्रदेश के खंडवा में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई। आगे बढ़ते हुए वर्ष 2023 में भोपाल में स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय की स्थापना ने कौशल आधारित उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान की।

इन विश्वविद्यालयों के माध्यम से शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रखकर कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, उद्योग-शिक्षा समन्वय और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण पर विशेष बल दिया गया। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण का प्रयास किया गया, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ व्यवहारिक दक्षता भी प्रदान कर सके।

इसी अवधि में डिजिटल प्रौद्योगिकी ने देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन में व्यापक परिवर्तन किए। शिक्षा और सेवाओं का स्वरूप भी तेजी से बदला। आईसेक्ट ने इस परिवर्तन के साथ कदम मिलाते हुए डिजिटल माध्यमों, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल विकास के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया। इससे अनेक युवाओं को नई तकनीकों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का अवसर मिला।
 
चार दशक, एक सतत संकल्प

चार दशकों की इस यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पक्ष यह रहा कि आईसेक्ट ने विकास का केंद्र ग्रामीण भारत को बनाया। जहां अनेक शैक्षणिक पहले बड़े शहरों तक सीमित रहीं, वहीं संस्था ने गांवों, छोटे कस्बों और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में शिक्षा और कौशल विकास का आधार तैयार करने का प्रयास किया। स्थानीय युवाओं को अवसर देना, समुदाय की भागीदारी बढ़ाना और शिक्षा को आत्मनिर्भरता से जोड़ना इस यात्रा की प्रमुख विशेषताएं रहीं।

वर्ष 2026 में आईसेक्ट इंडिया के रूप में नई पहचान अपनाना इसी निरंतर विकास का अगला चरण है। यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि उस व्यापक दृष्टि का प्रतीक है, जिसके केंद्र में भविष्य उन्मुख शिक्षा, कौशल, नवाचार, अनुसंधान और डिजिटल सशक्तीकरण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प है।

आज भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में शिक्षा, कौशल और तकनीक की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। चार दशकों की यह यात्रा इस विश्वास को सशक्त करती है कि जब शिक्षा समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जुड़ती है, जब अवसर गांवों तक पहुंचते हैं और जब युवा अपनी प्रतिभा को विकसित करने का अवसर पाते हैं, तब परिवर्तन केवल व्यक्तियों के जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के विकास की आधारशिला बन जाता है।
इसी विश्वास के साथ आईसेक्ट इंडिया की चालीस वर्षों की यात्रा आज एक नए पड़ाव पर खड़ी है – जहां अनुभव की समृद्ध विरासत, वर्तमान की आवश्यकताएं और भविष्य की संभावनाएं एक साथ दिखाई देती हैं। यह यात्रा केवल एक संस्था के विकास की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की भी कहानी है, जो शिक्षा, कौशल और नवाचार के सहारे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य का निर्माण कर रहा है।

110 साल पुराने सबूत पेश किए’! मंत्री प्रतिमा बागरी बोलीं- मेरा जाति प्रमाण पत्र सही, अब जांच समिति के फैसले का इंतजार

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मंगलवार को अपने अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को लेकर लगे आरोपों को खारिज किया। बागरी ने कहा कि उन्होंने राज्य की उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष सभी दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत कर दिए हैं और उनका जाति प्रमाण पत्र वैध है। विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बागरी अनुसूचित जाति श्रेणी से नहीं आती हैं और उन्होंने गलत जानकारी के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था।

क्या लगा था आरोप
उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा बागरी राजपूत समुदाय से हैं और आरोप लगाया कि उन्होंने आरक्षित रैगांव निर्वाचन क्षेत्र से 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा और बाद में एक अमान्य जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करके मंत्री बनीं। अहिरवार ने उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द करने, विधानसभा से अयोग्य घोषित करने और राज्य मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की थी।

सोमवार को जांच समिति के सामने पेश हुईं
प्रतिमा बागरी ने बताया कि वह सोमवार को जाति जांच समिति के सामने पेश हुईं और अपने दावे के समर्थन में सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि समिति के साथ बैठक हुई थी और उन्होंने 110 साल से अधिक पुराने सबूतों सहित सभी दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। दस्तावेजों की जांच के बाद किसी को भी कोई अनियमितता नहीं मिली और उनका जाति प्रमाण पत्र असली है।

मंत्री ने दर्ज कराया था बयान
सोमवार को बागरी ने समिति के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अनुसूचित जाति सूची में बागड़ी समुदाय के शामिल होने से संबंधित दस्तावेज सहित दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए। अहिरवार भी समिति के समक्ष पेश हुए और उनकी जातिगत स्थिति को चुनौती देने वाले दस्तावेज प्रस्तुत किए।

    प्रतिमा बागरी ने कहा- मेरा जाति प्रमाण पत्र सही
    जांज समिति को मेरे जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति नहीं
    मंत्री ने कहा- 110 साल पुराने दस्तावेज समिति को सौंपे
    जांच समिति का फैसला आना अभी बाकी है

जांज समिति का फैसला आना बाकी
कांग्रेस नेता के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री प्रतिमा बागरी ने उन पर राजनीतिक कारणों से झूठे दावे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है और यह साबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि अहिरवार ने झूठे आरोप लगाए हैं और मीडिया के सामने गलत तथ्य पेश किए हैं, और अब सच्चाई सामने आ गई है। जांच समिति दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर रही है और अपनी जांच पूरी करने के बाद इस मामले पर फैसला सुनाएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री शाह की मौजूदगी में ऐतिहासिक समझौता, महाराष्ट्र-गुजरात-राजस्थान-एमपी के बीच सुलझा सरदार सरोवर डैम का मुद्दा

केन्द्रीय गृह मंत्री शाह की मौजूदगी में ऐतिहासिक समझौता, महाराष्ट्र-गुजरात-राजस्थान-एमपी के बीच सुलझा सरदार सरोवर डैम का मुद्दा

– सरदार सरोवर परियोजना का दीर्घकालिक मसला समाप्ति की ओर
– परियोजना की निर्माण की लागत साझाकरण के मुद्दों पर था विवाद
– चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किए हस्ताक्षर

भोपाल/नई दिल्ली
 केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बीच नर्मदा अवार्ड लाभार्थी राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबित भुगतान के निपटारे पर ऐतिहासिक समझौता हो गया है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह और केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में 7 जुलाई को नई दिल्ली में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फड़णवीस, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। बैठक में केन्द्र एवं चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

यह समझौता मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र राज्यों द्वारा सरदार सरोवर परियोजना के निर्माण के लागत साझाकरण के मुद्दों से जुड़े दीर्घकालिक विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, जिसके तहत लंबित देयों के अंतिम निपटान के रूप में किए जाने वाले भुगतानों को एकमुश्त निपटान (वन-टाइम सेटलमेंट) के रूप में हल किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लंबे समय से नर्मदा अवॉर्ड के लंबित भुगतान का विवाद चल रहा था, जिसका आज सौहार्दपूर्ण समाधान निकल गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को मजबूत करने और जल क्षेत्र में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक पहल की गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में अनेक राज्यों में डबल इंजन सरकार बनने का लाभ यह हुआ है कि हम में एक-दूसरे को समझने की क्षमता बढ़ी है, राजनीतिक मुद्दे कम हुए हैं और देश के अनेक विवाद अब तेजी से सुलझाए जा रहे हैं।

सरकारों के रचनात्मक सहयोग की सराहना 
केन्द्रीय गृह मंत्री शाह ने इस महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय परियोजना पर आम सहमति बनाने में मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र की सरकारों द्वारा दिए गए रचनात्मक सहयोग की सराहना की। मंत्री शाह ने कहा कि इस परियोजना से विशेषकर मध्यप्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान को बहुत लाभ हुआ। बांध पूरा होने से इन राज्यों में हर जगह पानी और बिजली पहुंची। उन्होंने कहा कि राजस्थान को हुआ लाभ दिखने में छोटा लग सकता है, पर जिस भूमि तक नर्मदा का पानी पहुंचा है, वहां भूमि का मूल्य और किसान की किस्मत दोनों बदल गई है। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल के नेतृत्व में देश में चल रहे जल विवाद या जल वितरण से जुड़े विवाद एक-एक कर सुलझाए जा रहे हैं। 

राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रख कर सुलझाएं मसले
गृह मंत्री शाह ने कहा कि पिछले दिनों हरियाणा और राजस्थान के बीच का जल विवाद सुलझाया गया। चाहे किशाऊ बांध परियोजना का मुद्दा हो या राजस्थान, हरियाणा के बीच जल विवाद हो या आज का यह समझौता, ये सभी सहकारी संघवाद के स्वर्णिम उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि चाहे गुजरात हो, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा या महाराष्ट्र, पानी देश के लोगों, खासकर किसानों के ही काम आता है। मंत्री शाह ने कहा कि पानी का उपयोग चाहे देश के किसी भी हिस्से में हो उससे लाभान्वित होने वाला एक भारतीय ही होगा। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी विवाद से होने वाले राष्ट्रीय नुकसान को ध्यान में रख कर उसे सुलझाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी राज्य समृद्ध होता है, तो उसका लाभ अपने राज्य को भी मिलता है।

समोसे के लिए रोकी ट्रेन? इंदौर में लोको पायलट का VIDEO वायरल, रेलवे ने शुरू की जांच

इंदौर
बारिश का मौसम हो और गरमा-गरम समोसे की खुशबू आए, तो किसी का भी मन ललचा सकता है. लेकिन अगर यही लालच चलती ट्रेन को बीच रास्ते में रोकने का हो तो मामला सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का बन जाता है. ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश से आया है. यहां इंदौर और महू के बीच चलने वाली डेमू ट्रेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 

वायरल वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि लोको पायलट ने बीच रास्ते में समोसे खरीदने के लिए ट्रेन रोक दी. हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. रेलवे का कहना है कि अगर लोको पायलट की तरफ से बीच रास्ते ट्रेन रोककर अपना पर्सनल कार्य किया गया है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   

समोसे खरीदने की वजह से लेट हो जाती है ट्रेन
वायरल वीडियो राऊ के रंगवासा रोड क्षेत्र का बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इंदौर-महू डेमू ट्रेन यहां नियमित रूप से कुछ मिनट के लिए रुकती है. आरोप है कि लोको पायलट ट्रेन से नीचे उतरकर पास की दुकान से समोसे खरीदता है, जिससे ट्रेन करीब 10 मिनट या उससे ज्यादा लेट हो जाती है. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो क्षेत्र के लोगों ने बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया, जिसके बाद मामला चर्चा का विषय बन गया। 

वहीं इस मामले पर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार ने कहा कि वायरल वीडियो उनके संज्ञान में आया है और इसे वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया है. पूरे मामले की जांच कराई जा रही है. यदि जांच में यह सामने आता है कि लोको पायलट ने बिना किसी अधिकृत कारण, सिग्नल या परिचालन संबंधी आवश्यकता के ट्रेन रोकी और केबिन से उतरकर निजी कार्य किया, तो रेलवे नियमों के अनुसार उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल रेलवे जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। 

भोपाल-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस नए रंग-रूप में दौड़ेगी, 7.30 घंटे में तय करेगी 708 किमी का सफर

ग्वालियर 
रानी कमलापति (भोपाल) से ग्वालियर होते हुए हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही बिल्कुल नए रंग-रूप में नजर आएगी। ट्रेन का बाहरी रंग पारंपरिक नीले-सफेद की जगह अब आकर्षक केसरिया होगा। इसके लिए ट्रेन को झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप भेजा गया है, जहां अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक से पेंटिंग और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े कई तकनीकी बदलाव किए जा रहे है। झांसी मंडल में पहली बार इस स्तर पर वंदे भारत का ऐसा मेकओवर किया जा रहा है।

रोबोटिक तकनीक से तैयार हो रहा नया लुक
झांसी की वैगन रिपेयर वर्कशॉप में वंदे भारत के कोचों की पेंटिंग अत्याधुनिक रोबोट कर रहे हैं। इससे पेंट की गुणवत्ता बेहतर होगी, पूरी ट्रेन को एक समान फिनिश रंग लंबे समय तक टिकेगा और मिलेगी। रेलवे के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक के जरिए तेज और अधिक सटीक तरीके से पूरी की जा रही है।

7.30 घंटे में 708 किमी. का सफर
रानी कमलापति से हजरत निजामुद्दीन के बीच 708 किलोमीटर का सफर वंदे भारत महज 7 घंटे 30 मिनट में पूरा करती है। यही दूरी अन्य एक्सप्रेस ट्रेनों को तय करने में करीब 9 से 10 घंटे लगते हैं। यह ट्रेन भोपाल, झांसी, ग्वालियर और आगरा कैंट स्टेशन पर ठहराव लेते हुए दिल्ली पहुंचती है।

मेक इन इंडिया की पहचान
वंदे भारत एक्सप्रेस पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित ट्रेन है। आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, बेहतर रफ्तार और यात्री सुविधाओं के कारण यह भारतीय रेलवे की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल है। रेलवे का मानना है कि नए स्वरूप और बेहतर सुविधाओं से यात्रियों का सफर और अधिक आरामदायक होगा।

क्या-क्या बदलेगा

-वॉश बेसिन की गहराई बढ़ाई गई है।
-टॉयलेट में अब अधिक रोशनी वाली एलईडी लाइटिंग।
-चार्जिंग पॉइंट तक आसान पहुंच।
-सीटों में अधिक कुशनिंग, लंबी यात्रा में आराम बढ़ेगा एग्जीक्यूटिव चेयर कार में बड़ा फुटरेस्ट।
अंदर भी बदलेगा…

केवल बाहरी रंग ही नहीं, ट्रेन के इंटीरियर में भी कई बदलाव किए जा रहे हैं ताकि यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा मिल सके।

अधिकारी बोले….. अब पहले से बेहतर अनुभव
रानी कमलापति-हजरत निजामुद्दीन वंदे भारत को केसरिया रंग में तैयार किया जा रहा है। झांसी कारखाने में रोबोटिक पेंटिंग के साथ यात्रियों की सुविधा से जुड़े कई तकनीकी सुधार भी किए जा रहे हैं, ताकि यात्रा का अनुभव पहले से बेहतर हो। – मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी रेल मंडल

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