प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के लिए योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पशुपालक तक पहुँचाएं : प्रमुख सचिव उमराव

भोपाल 

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, किसानों, पशुपालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी प्रत्येक पशुपालक तक आसानी से पहुंचे, इस उद्देश्य से बुधवार को पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव  उमाकांत उमराव ने संचालनालय पशुपालन एवं डेयरी सभागार में किसानों के प्रतिनिधि मंडल के साथ बैठक की। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उनके सुझाव भी प्राप्त किए। बैठक में  महेश चंद्र चौधरी सहित जिलों के किसान भी उपस्थित रहे।

बैठक में प्रमुख सचिव  उमराव ने किसान संघ के पदाधिकारियों को प्रदेश में पशुपालन को बढ़ावा देने, प्रदेश को दूध की राजधानी बनाने और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पशुओं के नस्ल सुधार, पशु पोषण, टीकाकरण एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी देने के लिए प्रदेश में दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के दो चरण पूरे हो गए है। तीसरा चरण 13 जुलाई से शुरू होगा। इसके अंतर्गत विभाग के अधिकारी कर्मचारी पशुपालकों के घर जाएंगे और उन्हें नस्ल सुधार, पशु पोषण, टीकाकरण एवं सेक्स सॉर्टेड सीमेन के बारे में जानकारी देंगे। तीसरे चरण में 3 से 4 पशु (गौवंश एवं भैंसवंश) रखने वाले पशुपालकों के यहां प्रशिक्षित विभागीय अमले द्वारा घर जाकर भेंट की जाएगी।

तीसरे चरण में प्रदेश के 5 लाख 72 हजार पशुपालकों के घर जाकर भेंट करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रमुख सचिव  उमराव ने 13 जुलाई से शुरू होने वाले इस अभियान में मंत्री, सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से सहभागिता करने का आग्रह किया। इसके साथ ही प्रमुख सचिव  उमराव ने प्रदेश में चलाई जा रही क्षीरधारा योजना सहित अन्य योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

प्रमुख सचिव  उमराव ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनाते हुए ‘मिल्क कैपिटल’ के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए आवश्यक है कि विभाग की योजनाओं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों का लाभ अधिक से अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि ‘दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

इस अवसर पर संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. पी.एस. पटेल, सांची बोर्ड के एमडी  डॉ. संजय गोवाणी, कुक्कुट विकास निगम के एमडी  सत्यनिधि शुक्ला, नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय जबलपुर के कुल सचिव  एसएस तोमर, गौ-संवर्धन बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. अनुपम अग्रवाल उपस्थित रहे।

 

सरदार सरोवर परियोजना पर हुए ऐतिहासिक समझौते से सहकारी संघवाद होगा सुदृढ़ : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई बैठक में गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े लगभग तीन दशक से जारी पुनर्वास एवं पुनर्बसाहट व्यय विवाद का सर्वसम्मति से समाधान हुआ है। इस निर्णय से मध्यप्रदेश पर पड़ने वाले वित्तीय भार में उल्लेखनीय कमी आएगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह निर्णय राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, संवाद और सहमति से जटिल विषयों के समाधान का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में दिए गए अभिमत के अनुसार पुनर्वास व्यय में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत निर्धारित की गई थी। इसके अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान गुजरात को करना पड़ता। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं राजस्थान के बीच हुई बैठक में सर्वसम्मति से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत निर्धारित की गई। इसके परिणामस्वरूप अब मध्यप्रदेश को केवल 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
  
चारों राज्यों की हिस्सेदारी हुई निर्धारित
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बैठक में गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत की गई है। वहीं, महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 1.17 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इससे गुजरात को सहभागी राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नर्मदा एवं सरदार सरोवर परियोजना से प्रदेश को उत्पादित कुल विद्युत का 57 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि अब तक मध्यप्रदेश को लगभग 3,900 करोड़ यूनिट विद्युत औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध हुई है। इसके अतिरिक्त लगभग 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई सुविधा मिल रही है। साथ ही जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर, धार सहित अनेक शहरों और पीथमपुर, देवास एवं विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को नर्मदा जल की आपूर्ति भी इसी परियोजना से की जा रही है।

गुजरात में मूसलाधार बारिश का कहर, सूरत का पोद्दार मॉल फर्स्ट फ्लोर तक पानी में डूबा

लगातार भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, कई इलाकों में जलभराव; मॉल के फर्स्ट फ्लोर तक पानी पहुंचने से लोगों में दहशत।

गुजरात में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई शहरों में सड़कें जलमग्न हो गई हैं और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसी बीच सूरत के पोद्दार मॉल से सामने आई तस्वीरों ने सभी को चौंका दिया है। बताया जा रहा है कि मूसलाधार बारिश के कारण मॉल के फर्स्ट फ्लोर तक पानी भर गया, जिससे दुकानों और प्रतिष्ठानों को नुकसान होने की आशंका है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मॉल के अंदर बड़ी मात्रा में पानी भरा हुआ दिखाई दे रहा है।

भारी बारिश के चलते शहर के कई हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

फिलहाल, इस घटना में किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासन जलनिकासी और राहत कार्यों में जुटा हुआ है।

 

तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

हेल्थ प्रोफेशनल और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन का कार्य समय से पूर्ण कर डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को करें मजबूत
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की प्रगति की समीक्षा की

भोपाल

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अंतर्गत संचालित प्रगतिरत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रदेश के अंतिम छोर तक रहने वाले प्रत्येक नागरिक तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक के प्रभावी उपयोग से नागरिकों को बेहतर, त्वरित, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा आभा आईडी, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री और हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत किया जाए। बैठक में सीईओ आयुष्मान अरविंद कुमार शाह सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का उद्देश्य देश में एकीकृत एवं परस्पर जुड़ा हुआ डिजिटल स्वास्थ्य इको सिस्टम विकसित करना है। इसके माध्यम से नागरिकों को विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान आभा आईडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रूप से प्राप्त एवं साझा कर सकें। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि शासकीय एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सकों, नर्सों, आयुष चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का पंजीयन तेजी से कराया जाए। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में डिजिटल सेवाओं के उपयोग को बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से मरीज, चिकित्सक, प्रयोगशाला, फार्मेसी, अस्पताल और बीमा सेवाओं के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का सुरक्षित एवं निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा। इससे उपचार की निरंतरता, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।

सीईओ आयुष्मान शाह ने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग 5.86 करोड़ एबीएचए आईडी बनाई जा चुकी हैं। साथ ही लगभग 20 हजार स्वास्थ्य संस्थान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं तथा लगभग 18 हजार स्वास्थ्य पेशेवर हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं।

हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री से स्वास्थ्य पेशेवरों की डिजिटल पहचान

सीईओ आयुष्मान शाह ने बताया कि हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री के अंतर्गत चिकित्सक, नर्स, दंत चिकित्सक, आयुष चिकित्सक तथा अन्य लाइसेंसधारी स्वास्थ्य पेशेवरों का सत्यापित डिजिटल डाटाबेस तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवर को विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान की जाती है। इससे डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित प्रमाणीकरण, टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार तथा विश्वसनीय डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।

हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री से स्वास्थ्य संस्थानों का एकीकरण

हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री के अंतर्गत शासकीय एवं निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, प्रयोगशालाओं, फार्मेसियों, इमेजिंग सेंटर और वेलनेस सेंटर का पंजीयन किया जा रहा है। प्रत्येक संस्थान को विशिष्ट हेल्थ फैसिलिटी आईडी प्रदान की जाती है। इससे संस्थानों की जानकारी का मानकीकरण होगा तथा उन्हें एबीएचए, स्कैन एंड शेयर एवं नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज जैसी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सकेगा।

स्कैन एंड शेयर से आसान एवं पेपरलेस ओपीडी पंजीयन

समीक्षा में स्कैन एंड शेयर पहल की प्रगति की भी जानकारी दी गई। प्रदेश में वर्तमान में 533 स्वास्थ्य संस्थानों में स्कैन एंड शेयर सुविधा सक्रिय है। इसके माध्यम से अब तक 1 करोड़ 7 लाख 70 हजार 164 से अधिक ओपीडी पंजीयन टोकन जारी किए जा चुके हैं। स्कैन एंड शेयर सुविधा के अंतर्गत मरीज अस्पताल पहुंचकर एबीएचए एप अथवा अन्य एबीडीएम सक्षम एप के माध्यम से अस्पताल का क्यूआर कोड स्कैन करता है। मरीज की सहमति से उसकी मूलभूत जानकारी अस्पताल के डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रूप से साझा होती है और उसे डिजिटल ओपीडी टोकन प्राप्त हो जाता है। इससे मरीजों को लंबी पंजीयन कतारों से राहत मिलती है तथा कागजरहित और त्वरित पंजीयन की सुविधा उपलब्ध होती है।

 

भोपाल में रिश्तों की मिसाल! बेटे के निधन के बाद सास-ससुर ने विधवा बहू का कराया पुनर्विवाह, पिता बनकर किया कन्यादान

 भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से रिश्तों को नई परिभाषा देने वाली एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। बेटे के असमय निधन के बाद एक परिवार ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा देते हुए उसका पुनर्विवाह कराया। इतना ही नहीं, ससुर ने स्वयं पिता की भूमिका निभाते हुए कन्यादान किया और पूरे सम्मान के साथ उसे नए जीवन की ओर विदा किया। इस भावुक पल ने विवाह समारोह में मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं।

बहू का भविष्य संवारने का लिया संकल्प
यह मार्मिक घटना  रात संत हिरदाराम नगर के समीप ग्राम भौंरी स्थित एक विवाह समारोह में देखने को मिली। सभी वैवाहिक रस्में पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुईं। सबसे भावुक क्षण तब आया, जब किसान दिनेश बैरागी ने अपनी बहू प्रियंका का कन्यादान कर उसे बेटी की तरह आशीर्वाद देते हुए नए जीवन की शुभकामनाएं दीं।

परिवार के अनुसार, वर्ष 2018 में दिनेश बैरागी के पुत्र कपिल का विवाह कुलूखेड़ी गांव निवासी प्रियंका से हुआ था। उस समय प्रियंका की पढ़ाई चल रही थी, इसलिए उसकी विदाई नहीं हुई। वर्ष 2023 में वह ससुराल आई और अपने व्यवहार से पूरे परिवार का दिल जीत लिया।

कैंसर से बेटे की मौत के बाद लिया बड़ा फैसला
इसी बीच कपिल को कैंसर होने का पता चला। लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन वर्ष 2024 में उनका निधन हो गया। बेटे को खोने के गहरे दुख के बावजूद परिवार ने प्रियंका का भविष्य संवारने का निर्णय लिया। सोमवार को प्रियंका का विवाह विदिशा जिले के ग्राम अरारी खेजड़ा निवासी गोबिंद बैरागी के साथ संपन्न कराया गया। विवाह की सभी तैयारियों से लेकर हर रस्म तक का दायित्व दिनेश बैरागी और उनके परिवार ने निभाया।

‘बहू नहीं, बेटी का कन्यादान किया’
विवाह के बाद दिनेश बैरागी ने कहा कि उन्होंने हमेशा प्रियंका को बहू नहीं, बेटी माना और उसका कन्यादान करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनका मानना है कि जीवन कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ना चाहिए और परिवार का दायित्व है कि वह अपने सदस्यों का साथ निभाए।

वहीं, प्रियंका के पिता रामबाबू बैरागी भी इस अवसर पर भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि बेटी के ससुराल वाले ही उसके पुनर्विवाह की पूरी जिम्मेदारी उठाकर समाज के सामने इतनी बड़ी मिसाल पेश करेंगे।

 

तीस वर्षों से लंबित सरदार सरोवर परियोजना का सर्वसम्मति से समाधान होना बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

तीस वर्षों से लंबित सरदार सरोवर परियोजना का सर्वसम्मति से समाधान होना बड़ी उपलब्धि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश को अब डेढ़ हजार करोड़ रूपए के स्थान पर केवल 217 करोड़ रूपए ही देना होंगे
मध्यप्रदेश बना वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला पहला राज्य
ज्ञान भारतम् योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम
34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण और 12 लाख से अधिक का हुआ सत्यापन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से विगत 30 वर्षों से सरदार सरोवर परियोजना को लेकर लंबित जटिल मुद्दे का सर्वसम्मति से समाधान हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल का आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह विषय मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच लंबित था। भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा फरवरी 2026 में अभिमत दिया कि पुनर्वास की लागत भागीदार राज्यों के मध्य विभाजित होनी चाहिए। अभिमत के अनुसार मध्यप्रदेश को लगभग डेढ़ हजार करोड़ रुपए का भुगतान करने की स्थिति बन रही थी। नई दिल्ली में हुई बैठक में तय किया गया कि 50% के स्थान पर 75% का खर्चा गुजरात द्वारा ही दिया जाए, और इस प्रकार मध्यप्रदेश को अब केवल रूपये 217 करोड़ की राशि देना होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में दी।

टीकमगढ़ से मिला 10 फीट लंबा जम्बूद्वीप का नक्शा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में में नये अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड का गठन कर लिया गया है। वक्फ बोर्ड का पुर्नगठन करने वाला मध्यप्रदेश, देश का पहला राज्य बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए चलाए जा रही ज्ञान भारतम् योजना में मध्यप्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर आया है। अब तक 34 लाख 45 हजार से अधिक पांडुलिपि पन्नों का पंजीकरण और 12 लाख से अधिक का सत्यापन किया जा चुका है। टीकमगढ़ से 10 फीट लंबा ‘जम्बू द्वीप का नक्शा, पन्ना से ‘रसिक प्रिया’, बुरहानपुर से 220 वर्ष पुराना हस्तलिखित ‘श्रीमद्भागवत’ और दतिया से ऐतिहासिक ताम्रपत्र जैसी अमूल्य धरोहरें प्राप्त हुई हैं।

जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में मध्यप्रदेश ने नया इतिहास रचा है। प्रदेश में गत तीन वर्षों में 15 हजार 819 करोड़ रूपये लागत के 5 लाख 20 हजार 400 से अधिक कार्य हुए हैं। वर्ष 2024 में 1 हजार 367 करोड़ रूपये लागत से 60 हजार 428 कार्य कराए गए। वर्ष 2025 में 4 हजार करोड़ रूपये लागत के 1 लाख से अधिक कार्य सम्पन्न हुए। वर्ष 2026 में 10 हजार 452 करोड़ रूपये लागत के 3 लाख 60 हजार, कार्य प्रदेश में सम्पन्न हुए। वर्ष 2026 में जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रथम 5 जिले बड़वानी, खण्डवा, नीमच, उज्जैन और खरगोन रहे।

प्रदेश को खेलों में मिली बड़ी सफलता

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश को खेलों में बड़ी सफलता मिली है। जापान में आयोजित अंडर-18 पुरुष और महिला हॉकी एशिया कप-2026 टूर्नामेंट में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण और 4 कांस्य पदक जीते। भारतीय बालक एवं बालिका हॉकी टीम में प्रदेश के कुल 10 खिलाड़ी शामिल रहे। ये खिलाड़ी भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम, सिवनी और बड़वानी जिले के साधारण परिवारों से हैं। राज्य सरकार ने हॉकी स्वर्ण पदक विजेता टीम के खिलाड़ियों को 3 लाख रूपए प्रति खिलाड़ी और कांस्य पदक विजेता टीम के खिलाड़ियों को एक लाख रूपए प्रति खिलाड़ी प्रोत्साहत राशि प्रदान की है।

चंबल क्षेत्र में 10 हजार और सतगढ़ी में 15 हजार लोगों को मिलेंगे रोज़गार के नए अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब मध्यप्रदेश की धरती पर रक्षा उपकरण, मिसाइल और हथियार भी बनेंगे। शिवपुरी जिले के पाली में 103 हेक्टेयर भूमि पर लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस यूनिट का शिलान्यास हुआ है। यहाँ हथियारों में प्रयुक्त होने वाले सिंगल बेस, डबल बेस और ट्रिपल बेस प्रोपेलेन्ट का निर्माण होगा। चंबल क्षेत्र के 10 हजार से भी अधिक लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलेंगे। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि भोपाल के कोलार रोड क्षेत्र में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्मार्ट इंडस्ट्रियल पार्क, सतगढ़ी का गत दिवस भूमि-पूजन किया गया। यह पुनीत कार्य भारत के प्रथम उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर सम्पन्न हुआ। सतगढ़ी पार्क 150 करोड़ रुपए की लागत से 70 हैक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगा। इससे 15 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। सतगढ़ी में 25 एकड़ में 10 हजार क्षमता का कन्वेंशन एवं एग्जिबिशन सेंटर भी बनेगा। यह परियोजना ‘वर्क-लिव-ग्रो’ मॉडल पर आधारित है। इसमें गारमेंट, टॉयज, आईटी, एआई, लॉजिस्टिक्स आदि से जुड़े उद्योगों को स्थापित किया जाएगा।

 

‘वर्दी पुलिस की, दिल अपराधियों के साथ’— हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, DGP को सर्कुलर जारी करने का आदेश

ग्वालियर
मध्य प्रदेश में अपराधियों को कानूनी लूपहोल (कमियों) का फायदा पहुंचाकर कोर्ट से छुड़ाने वाले और अपनी ड्यूटी में घोर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अफसरों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ा और कड़ा प्रहार किया है।

हाई कोर्ट की डबल बेंच ने तल्ख लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा है कि “कुछ पुलिस अधिकारी वर्दी तो कानून की पहनते हैं, लेकिन उनका दिल अपराधियों के साथ धड़कता है।”

न्यायालय ने साफ कर दिया है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी किसी आरोपी को गिरफ्तार करते समय उसकी गिरफ्तारी का लिखित आधार नहीं सौंपता है, तो यह माना जाएगा कि उसने आरोपी को कोर्ट से रिहा कराने के उद्देश्य से ‘जानबूझकर’ ऐसा किया है।

कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक महीने के भीतर सभी थाना प्रभारियों और जांच अधिकारियों के लिए ‘सख्त चेतावनी सर्कुलर’ जारी करने का अल्टीमेटम दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखा रहे मैदानी अफसर
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस मुख्यालय (PHQ) भोपाल की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर नाराजगी जताई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देशों (मिहिर राजेश शाह मामला) के पालन में पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा इसी साल 13 फरवरी 2026 को एक सर्कुलर जारी किया जा चुका है।

इस सर्कुलर के बावजूद जमीनी स्तर पर थानों में पदस्थ जांच अधिकारी नियमों को सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं और आरोपियों को बिना लिखित कारण बताए गिरफ्तार कर रहे हैं, जिससे शातिर अपराधी तकनीकी आधार पर कोर्ट से बच निकलते हैं।

कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति समाज के लिए बेहद खतरनाक है। पुलिस विभाग का काम अपराधियों पर मुकदमा चलाना और निर्दोषों की रक्षा करना है, न कि अपराधियों को कानूनी चोर रास्तों से बचाना।

गांजा तस्करी के आरोपी भाई को बचाने लगाई थी याचिका
जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने यह तल्ख आदेश धर्मेंद्र लोधी द्वारा दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।

याचिकाकर्ता धर्मेंद्र ने दतिया जिले के बसई थाने में दर्ज एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के एक मामले में अपने भाई की गिरफ्तारी को इस आधार पर चुनौती दी थी कि पुलिस ने उसे गिरफ्तारी के कारण लिखित में नहीं दिए थे, इसलिए उसकी गिरफ्तारी अवैध है।

हालांकि, जब कोर्ट ने रिकॉर्ड खंगाला तो पाया कि पुलिस ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का लिखित नोटिस दिया था और उसके पास से 86.850 किलोग्राम गांजा जब्त हुआ था। कोर्ट ने इसे कानूनी रूप से पर्याप्त मानते हुए तस्कर भाई को राहत देने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी, लेकिन पुलिस की इस आम ढर्रे वाली कार्यप्रणाली पर गहरा रोष जताया।

हाईकोर्ट के आदेश की मुख्य बातें

· नियम: किसी भी आरोपी को कस्टडी में लेते समय उसे उसकी गिरफ्तारी के पुख्ता कारण लिखित में देना अनिवार्य है।

· लापरवाही का मतलब: लिखित आधार न देना अब सिर्फ ‘लापरवाही’ नहीं, बल्कि अपराधी को फायदा पहुंचाने की ‘जानबूझकर की गई साजिश’ माना जाएगा।

· निशाना: वर्दी की आड़ में अपराधियों से साठगांठ करने वाले पुलिसकर्मियों को विभाग से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

हाईकोर्ट से CMHO डॉ. माधव प्रसाद हसानी को बड़ी राहत! 62 नहीं, 65 साल की उम्र में होंगे रिटायर

इंदौर 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी को बड़ी राहत देते हुए उनके 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया है।

न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि डॉ. हसानी 65 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने के पात्र हैं। डॉ. हसानी ने याचिका दायर कर 30 जनवरी 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 31 जुलाई 2026 को 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त करने के निर्देश दिए गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उन्होंने वर्ष 1999 में संविदा ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी के रूप में सेवा प्रारंभ की थी और वर्ष 2005 में उनकी सेवाएं नियमित हुई थीं। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक क्लीनिकल सेवाएं दीं और बाद में मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तथा CMHO जैसे प्रशासनिक पदों पर कार्य किया।

 याचिका में तर्क दिया गया कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है तथा पूर्व में डॉ. कांतिलाल साहू सहित कई मामलों में हाईकोर्ट इसी प्रकार का निर्णय दे चुका है। वहीं राज्य सरकार ने दलील दी कि 65 वर्ष तक सेवा का लाभ पाने के लिए नियमों में निर्धारित शर्तों का पालन आवश्यक है और याचिकाकर्ता उन शर्तों को पूरा नहीं करते। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि डॉ. हसानी वर्ष 1999 से लगातार चिकित्सा सेवाएं देते रहे हैं तथा उनके मामले के तथ्य पूर्व में दिए गए न्यायिक निर्णयों से मेल खाते हैं।

 अदालत ने यह भी कहा कि मेडिकल अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखना था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 30 जनवरी 2026 का सेवानिवृत्ति आदेश विधिसम्मत नहीं है और इसे निरस्त किया जाता है। साथ ही डॉ. माधव प्रसाद हसानी को 65 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति प्रदान की जाती है। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

 

भोपाल नवाब की बेगम की 30.55 एकड़ जमीन बेचने का मामला गरमाया, शत्रु संपत्ति विवाद में EOW को नई शिकायत

भोपाल
तत्कालीन भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्ला खां की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम ने पाकिस्तान में रहते हुए 1994 में भोपाल के बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि बेच दी थी।समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) को साक्ष्यों सहित शिकायत देकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शत्रु संपत्ति अधिनियम लागू होने के बावजूद पाकिस्तान निवासी होने का तथ्य छिपाकर करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि का सौदा किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व हानि भी हो सकती है।

सहकारी आवासीय संस्था को बेची जमीन
शिकायत में दावा किया है कि 31 मई 1994 को आफताब जहां बेगम ने बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि एक सहकारी गृहनिर्माण संस्था को मात्र 30.55 लाख रुपये में बेच दी। सौदे के समय केवल 1.55 लाख रुपये चेक से लिए गए, जबकि शेष 29 लाख रुपये चार किस्तों में लेने का अनुबंध किया गया था।वर्ष 1959 के राजस्व अभिलेखों के अनुसार आफताब जहां बेगम के नाम बेहटा में लगभग 655 एकड़ और बोरबन क्षेत्र में करीब 102 एकड़ भूमि दर्ज थी।

चार किश्तों में लेने का अनुबंध किया गया था
अमिताभ अग्निहोत्री ने दावा किया है कि 31 मई 1994 को आफताब जहां बेगम ने बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ भूमि एक सहकारी गृहनिर्माण संस्था को 30.55 लाख रुपये में बेच दी। शिकायत के अनुसार सौदे के समय केवल 1.55 लाख रुपये चेक से लिए गए, जबकि शेष 29 लाख रुपये चार किश्तों में लेने का अनुबंध किया गया था।

स्वीकृतियों की वैधता की जांच की जानी चाहिए
वर्ष 1959 के राजस्व अभिलेखों के अनुसार आफताब जहां बेगम के नाम बेहटा में लगभग 655 एकड़ और बोरबन क्षेत्र में करीब 102 एकड़ भूमि दर्ज थी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान निवासी होने के कारण यह संपत्ति शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आ सकती थी। इसलिए इसकी खरीद-बिक्री, नामांतरण, भवन अनुमति और अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियों की वैधता की जांच की जानी चाहिए।

शिकायत में यह भी मांग की गई है कि बिक्री के समय आफताब जहां बेगम भारत में मौजूद थीं या नहीं, उनके पासपोर्ट और यात्रा अभिलेखों का सत्यापन किया जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि भूमि सौदे में काले धन का इस्तेमाल या स्टाम्प ड्यूटी की चोरी तो नहीं हुई।

शिकायत की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कस्टोडियन विभाग, प्रमुख सचिव राजस्व, कलेक्टर और एडीएम भोपाल को भी भेजी गई है।

शिकायत में उठाए गए प्रमुख सवाल
    क्या पाकिस्तान निवासी होने के बावजूद भूमि की बिक्री वैध थी?
    क्या संबंधित जमीन शत्रु संपत्ति घोषित की जानी चाहिए थी?
    क्या नामांतरण और भवन अनुमति नियमों के अनुरूप जारी हुई?
    क्या सरकार को स्टाम्प ड्यूटी का नुकसान हुआ?
    क्या भूमि सौदे में ब्लैक मनी का इस्तेमाल हुआ?

क्या है शत्रु संपत्ति कानून?
भारत में शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत उन व्यक्तियों की संपत्तियां, जिन्होंने शत्रु देश की नागरिकता ग्रहण कर ली, केंद्र सरकार के कस्टोडियन के नियंत्रण में लाई जा सकती हैं। हालांकि किसी विशेष संपत्ति पर यह कानून लागू होता है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और न्यायालय उपलब्ध अभिलेखों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर करते हैं।

शिकायत में यह आरोप
उनका आरोप है कि पाकिस्तान निवासी होने के कारण यह संपत्ति शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आ सकती थी, इसलिए इसकी खरीद-बिक्री, नामांतरण, भवन अनुमति और अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियों की वैधता की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि बिक्री के समय आफताब जहां बेगम भारत में मौजूद थीं या नहीं, उनके पासपोर्ट और यात्रा अभिलेखों का सत्यापन किया जाए।

यह भी देखा जाए कि भूमि सौदे में काले धन का इस्तेमाल या स्टांप ड्यूटी की चोरी तो नहीं हुई। शिकायत की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कस्टोडियन विभाग, प्रमुख सचिव राजस्व, कलेक्टर और एडीएम भोपाल को भी भेजी गई है।

यह है शत्रु संपत्ति कानून
भारत में शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के तहत उन व्यक्तियों की संपत्तियां, जिन्होंने शत्रु देश की नागरिकता ग्रहण कर ली, केंद्र सरकार के कस्टोडियन के नियंत्रण में लाई जा सकती है। हालांकि, किसी विशेष संपत्ति पर यह कानून लागू होता है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी और न्यायालयों द्वारा उपलब्ध अभिलेखों एवं कानूनी प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।

 

शाजापुर की नई SP प्रियंका शुक्ला का बड़ा फैसला! पद संभालते ही महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर किया अहम ऐलान

शाजापुर
 जिले की कानून-व्यवस्था में एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है। तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी प्रियंका शुक्ला ने मंगलवार को शाजापुर जिले के नए पुलिस अधीक्षक के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया है। निवर्तमान एसपी यशपाल सिंह राजपूत ने उन्हें जिले की कमान सौंपते हुए यहां की भौगोलिक स्थिति, पेंडिंग मामलों और सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यभार संभालते ही नई एसपी ने जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों के साथ परिचय बैठक की और साफ कर दिया कि अपराधियों के साथ किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाएगी।

तीसरी आंख और साइबर सुरक्षा पर फोकस
मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान एसपी प्रियंका शुक्ला ने जिले को सुरक्षित रखने का अपना मास्टर प्लान साझा किया। उन्होंने बताया कि शाजापुर में पारंपरिक पुलिसिंग के साथ-साथ मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। जिले में अपराधों पर अंकुश लगाने और अपराधियों को बेनकाब करने के लिए अधिक से अधिक संवेदनशील और प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, बदलते दौर में बढ़ते साइबर फ्रॉड से जनता को बचाने के लिए साइबर अवेयरनेस और टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन को मजबूत करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

महिला सुरक्षा और पारदर्शी पुलिसिंग का वादा
ग्राउंड बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाली एसपी शुक्ला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला एवं बाल सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस और आम जनता के बीच की दूरी को कम किया जाएगा ताकि कोई भी पीड़ित बिना झिझक अपनी शिकायत दर्ज करा सके। जिले में जवाबदेह, पारदर्शी और संवेदनशील पुलिसिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जहां हर फरियादी की सुनवाई निष्पक्ष और त्वरित होगी। इसके साथ ही, जिले में पैर पसार रहे किसी भी तरह के अवैध धंधों, माफियाओं और जुआ-सट्टा जैसी गतिविधियों के खिलाफ जल्द ही एक बड़ा जमीनी अभियान शुरू किया जाएगा।

 

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