बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा संकट, बैंकों के ₹4.54 लाख करोड़ फंसे; NPA में दुनिया में दूसरे स्थान पर

ढाका 

 हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश की आर्थिक हालत बेहद नाजुक हो गई है. एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश का बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है. देश में बैंकों द्वारा बांटे गए कुल कर्ज का लगभग एक-तिहाई हिस्सा (करीब 32.26%) डूब चुका है, यानी वह नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) बन गया है. एनपीए के मामले में बांग्लादेश अब यूक्रेन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर आ गया है. दक्षिण एशियाई देशों (सार्क) में भी इसकी स्थिति सबसे बदतर है। 

दुनिया में सबसे ज्यादा डूबे कर्ज (37.35%) के साथ यूक्रेन पहले नंबर पर है. यूक्रेन पिछले कई सालों से युद्ध लड़ रहा है. बांग्‍लादेश में शेख हसीना के तख्‍तापलट के बाद से ही अर्थव्‍यवस्‍था पटरी से उतरी हुई है. इस बात का अंदाजा इस बाद से लगाया जा सकता है कि एनपीए के मामले में बांग्‍लादेश की स्थि‍ति अफ्रीकी देश चाड (31.51%) और गिनी (31.15%) से भी बदतर है। 

डूब गए ₹4.54 लाख करोड़
बांग्लादेश बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 के अंत तक देश का डूबा कर्ज बढ़कर 5.89 लाख करोड़ टका (₹4.54 लाख करोड़) हो गया. बड़ी बात यह है कि इसमें से 31,000 करोड़ टका तो सिर्फ पिछले तीन महीनों में डूबा है। 

नेताओं की यारी ने डूबोई लुटिया
बांग्लादेश के अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट कहती है कि इसके पीछे कमजोर नियम और सबसे बढ़कर राजनीतिक रसूख है. बैंकों ने लोन बांटते समय यह नहीं देखा कि सामने वाला पैसा लौटा पाएगा या नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को तरजीह दी गई. नेताओं और रसूखदारों की सिफारिश पर बांटे गए. इन कर्जों ने देश के पूरे बैंकिंग सिस्‍टम को बेड़ा गर्क कर दिया. देश में कुल बकाया ऋण 18.25 लाख करोड़ टका है. हालात यह हैं कि अगर स्पेशल कैटेगरीज के संकटग्रस्त लोन को भी जोड़ लिया जाए, तो बांग्लादेश के बैंकों का 61 प्रतिशत पैसा अधर में लटका है। 

बैंकों की सेहत नापने वाले पैमाने ‘कैपिटल टू रिस्क-वेटेड एसेट्स रेशियो’ (CRAR) के मामले में भी बांग्लादेश पाताल में चला गया है. यह घटकर माइनस 2.64% (-2.64%) हो गया है, जबकि नियम के मुताबिक इसे कम से कम 12.5% होना चाहिए था. इसके उलट, पड़ोसी देशों ने कड़े नियम अपनाकर खुद को बचा रखा है. इस मामले में पाकिस्तान 20.8%, श्रीलंका 19.4% और भारत 17.2% के साथ बेहद मजबूत स्थिति में हैं। 

अब आगे क्या होगा?
एनआरबीसी (NRBC) बैंक के एमडी और सीईओ तौहीदुल आलम खान का कहना है कि बांग्लादेश की स्थिति वाकई बहुत चिंताजनक है. एनआरबीसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमडी तौहीदुल आलम खान ने कहा कि क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है. उनके अनुसार, पड़ोसी देशों ने सख्त वित्तीय अनुशासन अपनाकर अपने बैंकिंग क्षेत्र को सुरक्षित रखा, जबकि बांग्लादेश बार-बार कॉरपोरेट और ऋण संबंधी झटकों को झेलता रहा.
जब बैंकों का इतना बड़ा पैसा डूब जाता है, तो उनके पास अदालती मुकदमों का खर्च बढ़ जाता है और मुनाफा खत्म हो जाता है. सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि बैंकों के पास उन जरूरी सेक्टर्स जैसे फैक्ट्रियां, बिजनेस और आम जनता को नया लोन देने के लिए पैसे ही नहीं बचते, जो देश की अर्थव्यवस्था को चलाते हैं। 

भारी कर्ज में दबा है बांग्‍लादेश
बांग्लादेश का डेट-टू-जीडीपी अनुपात बढ़कर 39 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जो वित्त वर्ष 2017-18 में करीब 34 प्रतिशत था. जाने-माने अर्थशास्त्री मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि पहले बांग्लादेश के बजट में वेतन और पेंशन के बाद शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्र प्रमुख खर्च हुआ करते थे. लेकिन अब उनकी जगह कर्ज भुगतान ने ले ली है.विश्व बैंक की ‘अंतर्राष्ट्रीय ऋण रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, बांग्लादेश का बाहरी कर्ज पिछले पांच वर्षों में 42 प्रतिशत बढ़कर करीब 105 अरब डॉलर हो गया है. यह रकम देश की निर्यात आय के मुकाबले 192 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 

ट्रंप की शर्तों पर बनी अमेरिका-कनाडा ब्रिज डील, दोनों देशों को होगा बड़ा फायदा

वाशिंगटन
अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से विवाद का कारण बना गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज अब आखिरकार 27 जुलाई से खुलने जा रहा है. करीब 4.7 अरब डॉलर की लागत से बने इस पुल को लेकर दोनों देशों के बीच टोल राजस्व के बंटवारे पर समझौता हो गया है. इसके बाद पुल के उद्घाटन का रास्ता साफ हो गया है। 

यह पुल अमेरिका के डेट्रॉयट और कनाडा के विंडसर शहर को जोड़ेगा. पहले इसे जून में शुरू किया जाना था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में वित्तीय शर्तों पर आपत्ति जताते हुए इसके उद्घाटन पर रोक लगाने की चेतावनी दी थी. ट्रंप का कहना था कि अमेरिका के हितों की अनदेखी करते हुए पहले जो समझौता किया गया था, वह स्वीकार्य नहीं है। 

समझौते के तहत अब अमेरिका को इस पुल से होने वाले टोल रेवेन्यू का 50 फीसदी हिस्सा मिलेगा. इसके अलावा अगर भविष्य में टोल दरों में मौजूदा शुल्क से 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी की जाती है तो अमेरिका को उस पर वीटो का अधिकार भी होगा. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्होंने अमेरिका के लिए पहले से कहीं बेहतर समझौता कराया है। 

हालांकि, 2023 में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसने इस लंबित विवाद का समाधान किया और पुल के निर्माण को मंजूरी दी। इस समझौते से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को उम्मीद से बेहतर गति मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी मजबूत होगा।

यह नया पुल डिट्रॉइट-विंडसर सीमा पर स्थित होगा, जो रोज़ाना हजारों ट्रकों और अन्य वाहनों के आवागमन के लिए एक प्रभावी मार्ग प्रदान करेगा। इससे अमेरिकी और कनाडाई दोनों व्यवसायों को लाभ होगा और सीमा पर जाम जैसी समस्याएं कम होंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुल उत्तरी अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश है, जो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को अगले स्तर तक ले जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यापारिक गलियारा भविष्य में भी मजबूत बना रहेगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देगा।

इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन से न सिर्फ स्थानीय लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि यह वैश्विक व्यापार में भी सकारात्मक योगदान देगा। दोनों सरकारें इस पुल के संचालन और देखरेख के लिए नियमित बातचीत और सहयोग करना जारी रखेंगी।

यह पुल न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम करेगा, बल्कि यह अमेरिका- कनाडा के सामरिक और आर्थिक रिश्तों का एक नया अध्याय भी सिद्ध होगा।

अमेरिका-कनाडा में किन मुद्दों पर बनी बात?
कनाडा सरकार ने बताया कि दोनों देशों के बीच टोल प्रबंधन, पारदर्शिता और क्षेत्रीय विकास को लेकर कई सहयोगी कदमों पर सहमति बनी है. इसके तहत पुल के मुनाफे के एक हिस्से से 15 साल का आर्थिक विकास फंड भी बनाया जाएगा, जिससे सीमा क्षेत्र में विकास परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा। 

2018 में शुरू हुआ था ब्रिज का निर्माण
गॉर्डी होवे इंटरनेशनल ब्रिज का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था. इसकी पूरी फंडिंग कनाडा ने की क्योंकि अमेरिका ने निर्माण लागत में हिस्सा नहीं दिया था. मूल योजना के मुताबिक, निर्माण लागत की भरपाई अगले 30 वर्षों में टोल से की जानी थी. हालांकि, अब नई राजस्व साझेदारी का भुगतान व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। 

 

ईरान को ट्रंप की सबसे बड़ी चेतावनी, बोले- ‘1000 मिसाइलें लॉक्ड एंड लोडेड’

न्यूयॉर्क

अमेरिका और ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक बयान दिया है. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अमेरिका की 1000 मिसाइलें “लॉक्ड एंड लोडेड” हैं और सीधे ईरान की ओर निशाना साधे हुए हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने उनकी हत्या की साजिश रची या ऐसी कोई कोशिश की, तो अमेरिकी सेना पूरे एक साल तक ईरान के हर हिस्से पर लगातार हमले करने के लिए तैयार है। 

ट्रंप ने अपने संदेश में लिखा, “अगर ईरानी सरकार दुनिया के किसी भी हिस्से में मेरे खिलाफ हत्या की धमकी को अमल में लाने की कोशिश करती है, तो अमेरिका ईरान के सभी इलाकों को पूरी तरह तबाह कर देगा. आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं और अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार, इच्छुक और सक्षम है। 

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है. जून में दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन हालिया सैन्य गतिविधियों और तीखे बयानों के बाद हालात फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं। 

क्यों भड़के ट्रंप?
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुआ संघर्षविराम समझौता टूटने के बाद से ही तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते सप्ताह ट्रंप ने खुद एक बयान में कहा कि सीजफायर खत्म हो चुका है। ताजा धमकियों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान में 90 से ज्यादा ठिकानों पर मिसाइलें बरसा दीं। इधर ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया तब खत्म भी नहीं हुई थी। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन पर हमले तो किए ही, इस बीच तेहरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार में ट्रंप की मौत के भी खूब पोस्टर लहराए।

खामेनेई के जनाजे में ट्रंप के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा देखा गया। तेहरान में अंतिम यात्रा के दौरान ट्रंप की बनी तस्वीरों पर बंदूक के निशान बनाए गए। इस तरह की धमकियां भी लिखी गईं कि अमेरिका ने हमारे पिता को मारा है, हम उसे छोड़ेंगे नहीं!” इसके अलावा जब खामेनेई के पार्थिव शरीर को मशहद के इमाम रजा दरगाह में दफनाया जा रहा था, तब कुछ महिलाओं के हाथ में किल ट्रंप के पोस्टर भी नजर आए।

कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उप राष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चेहरे बंदूक के निशाने पर दिखाए गए थे। उन पोस्टरों पर लिखा था, “खून बहकर रहेगा।” इस तरह खुलेआम अपनी मौत के आह्वान को देख ट्रंप भड़क गए हैं।

ईरान-अमेरिका तनाव की वजह
ट्रंप के पहले कार्यकाल में 2020 में सुलेमानी की ड्रोन हमले में हत्या के बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं. ईरान इसे बदला मानता है. हाल के वर्षों में भी ईरान समर्थित गुटों ने ट्रंप और अमेरिका के खिलाफ साजिशें रची हैं. ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ तनाव बढ़ने के बीच मजबूत रुख अपनाया है। 

ट्रंप का यह बयान दिखाता है कि वे अपनी सुरक्षा को लेकर कितने सतर्क हैं. उन्होंने कहा कि वे ईरान की लिस्ट पर हैं और सौभाग्य से अब तक बच गए, लेकिन यह हमेशा नहीं चल सकता. अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी ईरान की धमकियों पर नजर रख रही हैं। 

प्रतिक्रियाएं और संभावित असर
यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है. ईरान की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ऐसे बयान क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं. अमेरिका और इजराइल पहले से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर चिंतित हैं। 

सुरक्षा उपाय
ट्रंप की सुरक्षा बढ़ाई गई है. हाल ही में NATO सम्मेलन के बाद वे पुराने और ज्यादा सुरक्षित एयर फोर्स वन से लौटे. अमेरिकी गुप्त सेवा (Secret Service) सुरक्षा पर खास ध्यान दे रही है। 

ट्रंप का यह बयान ईरान को साफ चेतावनी है कि कोई भी गलत कदम महंगा पड़ेगा. यह अमेरिका की “शांति के माध्यम से शक्ति” (Peace through Strength) नीति का हिस्सा लगता है. फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव जारी है, लेकिन पूर्ण युद्ध की स्थिति नहीं है. अमेरिका ईरान की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। 

अगर मुझे कुछ हुआ, तो…
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान ने उन्हें मारने का प्लान बनाया है और ऐसी स्थिति में उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान को तबाह करने की धमकी दे दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर तेहरान उनकी हत्या करने की साजिश में सफल हो जाता है, तो उन्होंने जवाबी हमले के निर्देश पहले से ही लिखकर छोड़ दिए हैं। ट्रंप ने कहा, “मैंने स्पष्ट निर्देश छोड़ दिए हैं, अगर मुझे कुछ भी होता है, तो ईरान पर ऐसी बमबारी की जाए जो उन्होंने इतिहास में कभी न देखी हो।”

ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप!
हाल ही में ट्रंप ने नाटो सम्मेलन के दौरान भी कहा था कि वह ईरान की “हिट लिस्ट” में सबसे ऊपर हैं. उनका दावा था कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ऐसी सूचनाएं मिली हैं कि ईरान उनके खिलाफ साजिश रच सकता है. इसी पृष्ठभूमि में उन्होंने अमेरिकी सेना को पहले से ही कड़े जवाबी सैन्य विकल्प तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। 

इजरायल ने ईरान की खुफिया जानकारी ट्रंप को दी
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब इजरायल की तरफ से भी अमेरिका को ईरान की कथित साजिशों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा किए जाने की खबरें सामने आई हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। 

मोजतबा खामेनेई का बड़ा ऐलान, पिता की मौत का बदला लेने की कसम; ईरान में बढ़ा तनाव

तेहरान

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शनिवार को अपने पिता और फरवरी में इजरायल-अमेरिकी हमलों में मारे गए तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खाई। मोजतबा ने कहा कि कि उनके मारे गए पहले के नेता और पिता का बदला लेना देश की मांग है और यह जरूर होना चाहिए। उन्होंने यह बात उनके टेलीग्राम अकाउंट पर जारी एक लिखित मैसेज में कही। खामेनेई ने यह मैसेज अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के मौके पर दिया। खामेनेई ने मैसेज में कहा, “हम शहीद नेता और इन दोनों युद्धों के सभी शहीदों के खून का बदला अपराधी और बदनाम हत्यारों से लेने का वादा करते हैं।”

इससे पहले, खामेनेई के अंतिम संस्कार में अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की खुली मांग के बाद प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर यह बात तब कही जब सीनियर अमेरिकी अधिकारियों ने मांग की कि ईरान एक पब्लिक बयान दे कि होर्मुज स्ट्रेट खुला है और इस जरूरी कॉरिडोर को पार करने वाले जहाजों पर हमला नहीं किया जाएगा। हालांकि, अभी तक तेहरान ने ऐसा नहीं किया है, बल्कि इस बात पर जोर दिया है कि यह रास्ता उसके कंट्रोल में रहे।

अमेरिका ने फिर शुरू किए ईरान पर हमले
अमेरिका कुछ दिनों से ईरान को निशाना बनाकर फिर से हवाई हमले कर रहा है जिसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया के कई देशों पर हमले किए हैं। ये हमले इस सप्ताह की शुरुआत में होर्मुज में तीन पोतों पर ईरान के हमले के बाद शुरू हुए थे। ट्रंप ने अपनी वेबसाइट ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, ”एक हजार मिसाइलें तैयार हैं और उनका निशाना ईरान है। अगर ईरान सरकार अपनी धमकी पर अमल करती है तो इसके तुरंत बाद हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी।”

‘ईरान के सभी इलाकों को तबाह कर देगा अमेरिका’
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के सभी क्षेत्रों को पूरी तरह तबाह और नष्ट कर देगी- अल्लाह का शुक्र है! ट्रंप ने युद्ध और उसके बाद कायम अस्थिर युद्धविराम के दौरान कई बार अरबी में ईश्वर का नाम लिया है। उन्होंने ईरान की सभ्यता को नष्ट करने की धमकी भी दी है। देशव्यापी अधिकार संगठन ‘काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस’ ने पहले ट्रंप पर इस्लाम का विकृत तरीके से मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की थी।

अयातुल्ला अली खामेनेई को किया सुपुर्द-ए-खाक
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को गुरुवार देर रात को मशहद शहर के ‘इमाम रजा दरगाह’ में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। ईरान की समाचार एजेंसी इरना के अनुसार देर रात श्री खामेनेई के बड़े बेटे हुज्जतुलइस्लाम सैय्यद मुस्तफा हुसैनी खामेनेई की अगुवाई में लाखों लोगों ने जनाजे की नमाज अदा की। इसके साथ ही ईरान और पड़ोसी देश इराक के पांच शहरों में छह दिनों से चल रहा शोक यात्रा संपन्न हो गया। मंगलवार को ईरान के मध्य शहर कोम में अंतिम संस्कार समारोह आयोजित किया गया, जिसके बाद अगले दिन इराक के शहरों नजफ और कर्बला में शोक समारोह हुए।

वियतनाम में बड़ा हादसा, कई भारतीयों को लेकर जा रही नाव डूबी; रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

हनोई
 वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास बड़ा हादसा हो गया है, जहां भारतीय नाविकों से भरी नाव समुद्र में पलट गई है। हनोई में भारतीय दूतावास ने इस दुखद घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि स्थानीय प्रशासन द्वारा हादसे की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। डूबे हुए लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

खोज और बचाव अभियान जारी रहने के बीच भारतीय मिशन ने कंट्रोल रूम बनाए हैं। दूतावास ने कहा कि स्थानीय अधिकारी घटना की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं।

दूतावास ने ‘X’ पर एक पोस्ट में कहा, “एक दुखद घटना में शनिवार को वियतनाम में फु क्वोक द्वीप के पास कई भारतीय पर्यटकों को ले जा रही एक नाव पलट गई है।”

हेल्पलाइन नंबर जारी
आपातकालीन स्थिति में पीड़ितों की मदद और जानकारी के लिए हो ची मिन्ह सिटी में भारतीय महावाणिज्य दूतावास और हनोई स्थित दूतावास में 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित कर हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए हैं।

पहले कंट्रोल रूम से इन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है- +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14 और +84 33 452 0414।

हनोई वाले दूसरे कंट्रोल रूम से इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है- +84 91 308 9165

प्रभावित परिवारों के लिए बनाया गया कंट्रोल रूम
दूतावास ने बताया कि प्रभावित परिवारों को सूचना और सहायता प्रदान करने के लिए, हो ची मिन्ह सिटी में भारतीय वाणिज्य दूतावास में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। किसी भी मदद के लिए इन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

वियतनाम बोट हादसे से जुड़ी 5 अहम बातें
• दोपहर 1 बजे हुआ हादसा
: फू क्वोक स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन अथॉरिटी के मुताबिक, यह हादसा दोपहर करीब 1 बजे हुआ. ओशन पर्ल आइलैंड कंपनी की इस स्पीडबोट को 57 वर्षीय नगुयेन होंग है चला रहे थे जिसमें 32 भारतीय पर्यटकों के अलावा 3 क्रू मेंबर और 1 फ्लाइट अटेंडेंट सहित कुल 36 लोग सवार थे। 

• तकनीकी खराबी के कारण पलटी बोट: यह स्पीडबोट होन मे रुट से एन थोई पोर्ट (फू क्वोक एयरपोर्ट से लगभग 25 किमी दूर) जा रही थी. होन मे रुट नगोई द्वीप से करीब 400 मीटर दूर बोट में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण वह समंदर में पलट गई, जिससे सभी लोग पानी में गिर गए. हादसे में कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है लेकिन सटीक संख्या की पुष्टि होनी अभी बाकी है। 

• घटनास्थल के लिए रवाना हुए भारतीय राजदूत: वियतनाम में नियुक्त भारतीय राजदूत इस बेहद संवेदनशील मामले पर वहां के उच्च अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे खुद भी दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होने वाले हैं। 

• हो ची मिन्ह और हनोई से दो टीमें भेजी गईं: प्रभावित भारतीयों की तुरंत मदद और रेस्क्यू के लिए भारतीय दूतावास की दो विशेष टीमें घटनास्थल के लिए रवाना की जा रही हैं. इनमें से पहली टीम आज शाम तक और दूसरी टीम देर रात तक दुर्घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की कमान संभालेगी। 

• दूतावास ने जारी किए 24×7 इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर: संकट की इस घड़ी में परिवारों को जानकारी और सहायता देने के लिए हो ची मिन्ह सिटी और हनोई में कंट्रोल रूम एक्टिव कर दिए गए हैं. प्रभावित लोग हो ची मिन्ह सिटी के लिए +84 36 281 7930, +84 91 552 3714, +84 33 452 0414 और हनोई के लिए +84 91 308 9165 पर संपर्क कर सकते हैं। 

युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन 
हादसे के फौरन बाद वियतनाम के स्थानीय प्रशासन और तटीय सुरक्षा एजेंसियों ने कमान संभाल ली है. समंदर की तेज धाराओं और मौसम की चुनौतियों के बीच लापता भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए गोताखोरों और आधुनिक नावों की मदद ली जा रही है. रेस्क्यू टीमें पल-पल समंदर की खाक छान रही हैं. हालांकि, अभी तक हादसे में हताहत हुए लोगों की सटीक संख्या और उनकी स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। 

 

ईरान की शर्तों पर ही खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य, संसद अध्यक्ष ग़ालिबाफ के बयान से बढ़ी वैश्विक चिंता

मॉस्को
 ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका की धमकियों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही दोबारा खोला जाएगा।प्रेस टीवी के अनुसार,  ग़ालिबाफ ने कहा, “अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि धौंस जमाने और अपनी प्रतिबद्धताएं तोड़ने की अब कीमत चुकानी पड़ती है। मैं स्पष्ट कर दूं कि यदि आप हमला करेंगे, तो जवाबी हमला झेलेंगे। व्यर्थ संघर्ष मत कीजिए, इससे आप और गहरे संकट में फंसेंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य केवल ईरानी व्यवस्था के तहत खुलेगा, अमेरिकी धमकियों से नहीं।”

 इससे पहले ईरानी मीडिया ने फारस की खाड़ी स्थित अबू मूसा द्वीप तथा ईरान के ईरानशहर, चाबहार, कोनारक, सिरिक, जास्क और बंदर अब्बास शहरों में विस्फोटों की सूचना दी। मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार बंदर अब्बास में वायु रक्षा बलों ने शहर के आसमान में अमेरिकी लक्ष्यों पर गोलीबारी की।
 
अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान पर कई हमले किये थे। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गयी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके बाद कहा कि युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा।

ईरान ने अमेरिका पर दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किये।

अल मायदीन टीवी के अनुसार हवाई हमले की चेतावनी के बीच बहरीन में विस्फोटों की आवाजें सुनी गयीं। बहरीन के गृह मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा, “सायरन बजा दिया गया है। नागरिकों और निवासियों से शांत रहने तथा निकटतम सुरक्षित स्थान पर जाने का आग्रह किया जाता है।”

ईरान ने दी नई जानकारी, बढ़ने वाली है भारत की टेंशन!

ईरान ने धमकी दी है कि वह अमेरिकी हमलों के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर सकता है। ईरान की सरकारी टीवी ने कहा है कि इस जलडमरूमध्य को अमेरिका के साथ हुए समझौते के तहत कड़ी निगरानी में खोला गया था। तब से होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही बढ़ी है। हालांकि, मंगलवार को तीन जहाजों पर ईरान के हमलों के बाद हालात बिगड़ गए। बुधवार सुबह अमेरिका ने होर्मुज से सटे ईरान के कम से कम 80 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें रडार साइट, ईरानी नौसेना के ठिकाने, हथियार भंडार जैसे महत्वपूर्ण मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं। अगर होर्मुज फिर से बंद होता है तो भारत की टेंशन बढ़ सकती है।

होर्मुज को बंद करेगा ईरान?
सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने एक सूत्र के हवाले से बताया, ईरान केवल अपनी व्यवस्थाओं के तहत ही जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा, जैसा कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) में तय किया गया है। सूत्र ने आगे कहा कि अमेरिका के किसी भी हमले के जवाब में ईरान कम से कम दोगुने लक्ष्यों पर हमला करेगा। सूत्र ने बताया, “पिछले 48 घंटों के घटनाक्रम से पता चलता है कि ईरान होर्मुज नदी के प्रबंधन से पीछे नहीं हटेगा।”

ईरान बोला- करारा जवाब देंगे
इस बीच एक अनाम ईरानी अधिकारी ने कहा है कि किसी भी खतरे का करारा जवाब दिया जाएगा। उस ने कहा कि शासन अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के बीच कोई भेद नहीं करता है। उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ दी गई धमकियों का सीधा जवाब देते हुए कहा कि ऐसी धमकियां देने से उन्हें कुछ भी हासिल नहीं होगा। अधिकारी ने आगे कहा कि वह (ट्रंप) निश्चित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य और अंतिम समझौते पर बातचीत दोनों में हार जाएंगे। अब फैसला उनका है।”

ईरानी सेना के 8 जवानों की मौत
ईरान की सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तड़के दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों में ईरानी सेना के आठ जवान मारे गए। इसमें आगे कहा गया है कि मारे गए सैनिक वायुसेना और नौसेना से संबंधित थे और बंदर अब्बास और बुशहर में हुए हमलों के कारण उनकी मृत्यु हुई। इस बीच नाटो शिखर सम्मेलन के बाद बुधवार को तुर्की के अंकारा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह “शायद आज रात ईरान पर हमला करेंगे”। ट्रंप ने कहा, “मैं थोड़ी चेतावनी दे रहा हूं। हम आज रात उन पर कड़ा प्रहार करने वाले हैं।

होर्मुज के बंद होने से भारत को कितना नुकसान

  •     भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी ज्यादा निर्भर है।
  •     यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और रणनीतिक हितों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
  •     भारत अपनी जरूरत का लगभग 40% से अधिक कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते आयात करता है।
  •     सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, ईरान और कतर से आने वाला तेल और गैस का बड़ा हिस्सा होर्मुज से होकर ही गुजरता है।
  •     होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते में किसी भी रुकावट के आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  •     इसका असर भारत में ईंधन की कीमतों, मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटा पर पड़ता है।

चीन के GDP पर सवाल उठाने वाले अर्थशास्त्री की संदिग्ध मौत, मामले ने बढ़ाई अंतरराष्ट्रीय चिंता

बीजिंग 
चीन की अर्थव्यवस्था और कैपिटल मार्केट पर बेबाक राय रखने वाले चीनी अर्थशास्त्री गाओ शानवेन 55 साल की उम्र में मृत पाए गए हैं. चीन की सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की वजह ‘बीमारी’ बताई है. गाओ शानवेन ने कहा था कि 2021 से 2023 के बीच चीन की GDP ग्रोथ को 10 प्रतिशत अंक ज़्यादा बताया गया हो सकता है. गाओ शानवेन चीन के GDP डेटा पर खुलकर प्रश्न उठा रहे थे। 

इस अर्थशास्त्री की मौत पर लोगों ने गहरा दुख जताया है. सोशल मीडिया पर उन्हें ऐसे देश में जहां आजाद आवाज़ों को बर्दाश्त नहीं किया जाता, उन्हें “निडर होकर सच बोलने वाला” माना जाता था। 

सरकारी स्वामित्व वाले ‘शंघाई सिक्योरिटीज न्यूज़’ की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी नियंत्रण वाले इन्वेस्टमेंट ग्रुप ‘SDIC सिक्योरिटीज’ के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गाओ शानवेन का 55 साल की उम्र में “बीमारी के कारण” निधन हो गया। चाइनीज रिपोर्ट में उनकी मौत के समय के बारे में तो नहीं बताया गया लेकिन उन्हें “चीन के कैपिटल मार्केट में सबसे प्रभावशाली मैक्रो-इकोनॉमिस्ट्स में से एक” बताया गया। 

‘चीन की GDP ग्रोथ मात्र 2 फीसदी’
गाओ 2024 के आखिर में तब चर्चा में
आए जब उन्होंने वाशिंगटन में पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स और एक चीनी थिंक-टैंक द्वारा आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले दो-तीन सालों में चीन की असल GDP ग्रोथ औसतन “लगभग 2 प्रतिशत” रही होगी, जो कि सरकारी आंकड़ों (लगभग 5 प्रतिशत) से काफी कम है। 

वे उपभोग, रोजगार, रियल एस्टेट डेटा में गड़बड़ियों का हवाला देते थे. उन्होंने युवा बेरोजगारी, उपभोग में मंदी और नीतिगत प्रतिक्रिया की कमी पर भी चिंता जताई थी। 

 कहा जाता है कि उनके इन बयानों से चीन का केंद्रीय नेतृत्व बेहद नाराज हुआ. सरकार ने उन्हें अनिश्चितकाल के लिए सार्वजनिक रूप से बोलने पर प्रतिबंध लगा दिया. उनके वीडियो, लेख और सोशल मीडिया अकाउंट्स (वीचैट आदि) सेंसर/डिलीट कर दिए गए। 

सिक्योरिटीज एसोसिएशन ऑफ चाइना ने चीफ इकोनॉमिस्ट्स को “सरकार की नीतियों का सकारात्मक प्रचार” करने और “अनुचित टिप्पणियों” से बचने का निर्देश दिया था. नवंबर 2025 में उन्हें नौकरी से हटा दिया गया और उनका हांगकांग इन्वेस्टमेंट एडवाइजर लाइसेंस भी समाप्त हो गया। 

विरोध के लिए चीन में जगह नहीं
बता दें कि बीजिंग GDP के लिए सरकारी लक्ष्य तय करता है और शायद ही कभी उनसे चूकता है.  गाओ शानवेन के इस बयान ने चीन के आर्थिक के डेटा की सटीकता को लेकर अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्रियों के शक को और पुख्ता कर दिया था। 

इसके बाद गाओ लगभग एक साल तक लोगों की नजर से दूर रहे और फिर सितंबर 2025 में पेकिंग यूनिवर्सिटी के एक फोरम में वीडियो के ज़रिए भाषण देने के लिए कुछ समय के लिए सामने आए।  
हालांकि खबर थी कि उनकी जांच चल रही है, लेकिन मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि गाओ ने अपने दोस्तों और साथियों को यह भी बताया था कि उन्हें जनवरी 2025 में पता चला कि उन्हें कैंसर है. 

सच बोलने वाला चला गया
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीनी सोशल मीडिया साइट ‘रेडनोट’ पर एक कमेंटेटर ने कहा, “एक ऐसे अर्थशास्त्री जो सच बोलते थे; पिछले कुछ सालों में, सिर्फ़ ‘आशावादी’ अर्थशास्त्री ही बचे हैं। 

चीन की माइक्रोब्लॉगिंग साइट ‘वीबो’ पर एक और कमेंट में लिखा था, “एक और सच बोलने वाला चला गया, जबकि झूठ बोलने वाले अभी भी बकवास कर रहे हैं. डॉ. गाओ आपकी आत्मा को शांति मिले!”

चीनी अधिकारी अक्सर उन व्हिसलब्लोअर और कमेंटेटर की आवाज़ दबा देते हैं जो सरकारी रुख को चुनौती देने वाली स्वतंत्र राय रखते हैं, चाहे मामला आम आर्थिक विषयों का ही क्यों न हो. चीन के दिग्गज उद्योगपति जैम मा भी एक बार ऐसे ही अपनी सरकार की आलोचना करने के बाद कुछ महीनों के लिए गायब हो गए थे। 

चीन में विरोध को कुचलने का लंबा इतिहास
2023 में जब चीन सख़्त कोविड लॉकडाउन हटाने के बाद मुश्किलों से जूझ रहा था और सालों से चला आ रहा प्रॉपर्टी संकट जारी था, तो सरकार ने एनालिस्ट को आर्थिक विकास पर नकारात्मक टिप्पणी न करने की चेतावनी दी और प्रमुख कमेंटेटरों पर सेंसरशिप लगाई।

चीन के सबसे मशहूर आर्थिक ब्लॉगर्स में से एक वू शियाओबो को उसी साल जून में ‘वीबो’ से ब्लॉक कर दिया गया था, जहां उनके लगभग 50 लाख फ़ॉलोअर्स थे. उन पर नुकसानदेह जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया था। 

2020 में वुहान के डॉक्टर ली वेनलियांग की मौत ने, जिन्होंने कोविड-19 के सामने आने की बात सबसे पहले बताई थी पूरे देश में ऑनलाइन श्रद्धांजलि का माहौल बना दिया था. लोगों ने मोमबत्तियों की तस्वीरें और “कभी न भूलें” जैसे संदेश ऑनलाइन पोस्ट करके उन्हें याद किया। 

गाओ अपनी संक्षिप्त और प्रभावशाली लेखन शैली के लिए भी मशहूर थे. 2024 में उन्होंने कहा था कि चीन में “बुज़ुर्गों में भरपूर जोश है, युवा बेजान हैं और अधेड़ उम्र के लोग ज़िंदगी से थक चुके हैं.” यह इस बात की ओर इशारा था कि कैसे बुज़ुर्गों ने तेज़ी के दौर का फ़ायदा उठाया, जबकि बाद की पीढ़ियां पिछली अति-ज़्यादतियों की कीमत चुका रही थीं। 

 

अमेरिका का ईरान पर सबसे बड़ा हमला! 90 ठिकाने तबाह, IRGC को भारी नुकसान, रेलवे ब्रिज ध्वस्त-चाबहार की बिजली गुल

वॉशिंगटन
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर विध्वंसक हमले की धमकी दी थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि बुधवार की रात ईरान पर अब तक का सबसे विध्वंसक हमला किया जा सकता है. अब अमेरिकी सेना ने इरान पर हमला बोल दिया है. अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदर अब्बास और सीरिक समेत कई इलाकों में हमले किए हैं। 

इन दोनों इलाकों में तेज धमाकों की आवाज सुनी जा रही है. ईरानी समाचार एजेंसी मिजान के मुताबिक बंदर अब्बास के साथ ही सीरिक में भी तेज धमाकों की आवाज सुनी गई है. ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने भी बंदर अब्बास में धमाकों की पुष्टि की है. मेहर की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को ईरान पर अमेरिकी हमले में दो मछुआरों की मौत हो गई है। 

ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक चाबहार, कोनारक के करीब भी तेज धमाकों की आवाज सुनी गई है. ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम भी एक्टिव हो गया है. ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना के मुताबिक ताजा हमलों के बाद चाबहार के कुछ हिस्सों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है. वहीं, ईरान के अक्काला में अमेरिका ने रेलवे ब्रिज उड़ा दिया है। 

ईरान की सरकारी प्रेस टीवी के मुताबिक अबू मूसा द्वीप पर कुल 10 धमाके हुए हैं. चाबहार और कोनारक में भी 10 धमाकों की आवाज सुनी गई है. चाबहार में एक अस्पताल पर दागे गए हथियार का मलबा गिरा है और अमेरिकी हमले से शहीद बेहेश्ती पोर्ट, कलंतरी पोर्ट और समुद्री यातायात नियंत्रण टावर को भी नुकसान पहुंचा है. बंदर अब्बास में आठ और सीरिक में तीन धमाके हुए हैं। 

प्रेस टीवी के मुताबिक बुशेहर में भी दो प्रोजेक्टाइल गिरे हैं और जास्क में भी कई धमाके हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर चाबहार में हमले के बाद उठती आग की लपटों की तस्वीर शेयर किया है. उन्होंने यह तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि ये कल ईरान की ओर से जहाजों पर किए गए हमले का जवाब है. उन्होंने धमकी भरे अंदाज में आगे लिखा कि ऐसी कार्रवाई अगर दोबारा हुई, तो जवाब इससे भी कहीं अधिक गंभीर होगा। 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने हमलों की पुष्टि की है. सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर दी है. अमेरिकी सेना ने कहा है कि ये हमले होर्मुज में आवाजाही की आजादी के लिए खतरा पैदा करने की ईरानी क्षमता को और कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं। 

ट्रंप ने दी थी विध्वंसक हमले की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर विध्वंसक हमले की चेतावनी देते हुए कहा था कि हम उनको जोरदार जवाब देंगे. टर्की में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डोमिर जेलेंस्की से मुलाकात के पहले ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए इस बात के संकेत दे दिए थे कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा. नाटो ने भी अमेरिका के सैन्य एक्शन का समर्थन कर दिया है। 

अमेरिका और ईरान के बीच अब तक क्या-क्या हुआ, जानें बड़ी बातें

अमेरिका-ईरान ने एक-दूसरे पर नए हमले किए हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया है, जबकि ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है. जानें अब तक इस ताजा हमले में क्या-क्या हुआ…

अमेरिका और ईरान के बीच अब तक क्या-क्या हुआ. जानिए बड़ी बातें
– अमेरिका ने लगातार दूसरी रात ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए। 

– CENTCOM के मुताबिक, इन हमलों का मकसद होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की हमले की क्षमता को कमजोर करना है। 

– अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। 
– हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, निगरानी ठिकाने, मिसाइल और ड्रोन साइट, नौसैनिक ठिकाने और सैन्य लॉजिस्टिक्स को निशाना बनाया गया। 

– ईरानी मीडिया के मुताबिक, बंदर अब्बास, बुशेहर, चाबहार, कोनारक, ईरानशहर, सिरिक, जास्क, अबू मूसा द्वीप, क़ेश्म द्वीप और अककला समेत कई शहरों में धमाके हुए। 

– ईरानशहर में एयरपोर्ट की एक सुविधा पर हमला हुआ, जिसमें कम से कम एक फायरफाइटर की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। 
– चाबहार में दो डॉक, समुद्री ट्रैफिक कंट्रोल टावर और एक डिपो को नुकसान पहुंचा. इमाम अली अस्पताल भी हमले की चपेट में आया और कई इलाकों में बिजली गुल हो गई। 
– अककला में आक टेका खान रेलवे ब्रिज पर हमला हुआ। 
– बुशेहर प्रशासन ने कहा कि वहां के परमाणु बिजली संयंत्र को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। 
– जवाबी कार्रवाई में IRGC ने कुवैत के Camp Arifjan और Ali Al Salem एयरबेस, साथ ही बहरीन के Juffair और Sheikh Isa बेस को निशाना बनाने का दावा किया। 
– बहरीन और कुवैत के सरकारी मीडिया के मुताबिक, दोनों देशों में सुरक्षा सायरन बजाए गए। 

ईरान में 90 ठिकानों पर US ने किए हमले
अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान में एक और बड़े सैन्य अभियान के तहत करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, इन हमलों का मकसद ईरान की होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों और आम नागरिकों के जहाजों पर हमला करने की क्षमता को कमजोर करना है। 

CENTCOM ने कहा कि हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी ठिकाने, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज साइट, नौसैनिक क्षमताओं और सैन्य लॉजिस्टिक्स से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. इससे एक दिन पहले भी अमेरिका ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर हमला करने का दावा किया था। 

अमेरिका ने मशहद जाने वाले दो ब्रिज को तबाह किया

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि अमेरिका ने अपने ताजा हमलों में ईरान के पूर्वी हिस्से में मशहद जाने वाले दो अहम पुलों को निशाना बनाकर तबाह कर दिया. IRGC का आरोप है कि यह हमला दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम विदाई समारोह को प्रभावित करने की कोशिश है। 

IRGC ने कहा कि “अमेरिका की यह आक्रामक कार्रवाई बिना जवाब के नहीं छोड़ी जाएगी.” IRGC ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई के पहले चरण में उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संयुक्त मिसाइल और ड्रोन हमला किया। 

 IRGC कुवैत-बहरीन में दागे ड्रोन-मिसाइल
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. IRGC ने इसे अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में “सजा देने वाली जवाबी कार्रवाई का पहला चरण” बताया है। 

IRGC का आरोप है कि अमेरिका ने अपने वादों का उल्लंघन किया और ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों के साथ पूर्वी ईरान के दो पुलों पर हमला किया. इसके बाद नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने मिलकर यह ऑपरेशन शुरू किया। 

IRGC ने दावा किया कि कुवैत के आरिफजान और अली अल सलेम, जबकि बहरीन के जुफैर और शेख ईसा स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. साथ ही चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने आगे और हमले किए तो क्षेत्र में मौजूद दूसरे अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा। 

ट्रंप के संकेत के बाद इजरायल का बड़ा एक्शन? ईरान पर सबसे घातक हमले की तैयारी, मीडिया रिपोर्ट में बड़ा दावा

तेहरान 

ईरान और अमेरिका की जंग दोबारा शुरू हो चुकी है. ट्रंप ने ऐलान कर दिया है कि सीजफायर अब खत्म हो चुका है और उन्हें ईरान के साथ बातचीत का कोई मतलब ही समझ में नहीं आ रहा है ट्रंप ने एक बार फिर से दोहराया है कि वो ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं कर देंगे और उन्होंने रिजीम चेंज की भी हिंट दी है. ट्रंप के इस ऐलान के तुंरत बाद इजरायल एक्टिव हो गया है और इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू जल्द ही ईरान पर अटैक लॉन्च करने वाला है। 

सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के इलाके में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जो हमले किए हैं, वे दस दिन पहले हुए हमलों की तुलना में ‘चार से पांच गुना ज्यादा बड़े और शक्तिशाली’ हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लाखों लोग सड़कों पर हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन अभी कई घंटों तक जारी रह सकता है।

तेहरान का बढ़ा होर्मुज लालच, नेतन्याहू की आंखें लाल

 प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आंखें लाल हो चुकी हैं और इजरायली सेना ने ईरान को नेस्तनाबूद करने के लिए अपने फाइटर जेट्स के इंजन स्टार्ट कर दिए हैं. ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है और अब उसका लालच और बढ़ गया है. इस पूरी लड़ाई की सबसे बड़ी जड़ बना है दुनिया का सबसे सेंसिटिव समुद्री रास्ता- ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’, जहां ईरान एक खतरनाक नया खेल खेलने की जिद पर अड़ गया है। 

होर्मुज में ईरान का नया पैंतरा और बढ़ता लालच
दरअसल, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ एक ऐसा समुद्री रास्ता है जहां से पूरी दुनिया का लगभग 20 से 30 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है. मार्च और अप्रैल के महीने में जब अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर गोलाबारी हो रही थी, तब ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी थी. बाद में जून के महीने में दोनों देशों के बीच ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ साइन हुआ और कुछ शर्तों पर युद्धविराम हुआ था। 

लेकिन ईरान अब इस रास्ते पर अपना पुराना हक नहीं, बल्कि एक ‘नया स्टेटस को’ (New Status Quo) यानी अपना नया कंट्रोल थोपना चाहता है. तेहरान का कहना है कि अब पुराना दौर भूल जाओ. ईरान ने ऐलान कर दिया कि अब जो भी कमर्शियल जहाज इस रास्ते से गुजरेंगे, उन्हें पहले ईरान की ‘परशियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ से भीख की तरह इजाजत मांगनी होगी, ईरान के तय किए रास्तों पर चलना होगा और तेहरान को भारी-भरकम टैक्स या फीस देनी होगी. ईरान इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते को स्वेज नहर की तरह अपनी जागीर बनाना चाहता है, जिससे अमेरिका और इजरायल भड़क गए हैं। 

अमेरिका ने क्यों उठाया यह कदम?
पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर ईरान की तरफ से हुए नए हमलों के जवाब में अमेरिका ने यह जवाबी कार्रवाई की है। इसके साथ ही, अमेरिका ने ईरानी तेल पर दी गई प्रतिबंधों की अस्थायी छूट को भी तुरंत रद्द कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने तेहरान पर दबाव काफी बढ़ा दिया है।

अमेरिकी सेंटकॉम ने “अमेरिकी सेना ने ईरान के हवाई रक्षा तंत्र, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार साइटों, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक छोटी नावों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई का मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर हमला करने की ईरान की क्षमता को खत्म करना है।”

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान ही इस हमले की योजना को मंजूरी दी थी।

कहां-कहां गूंजे धमाके?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के बंदरगाह शहरों और द्वीपों पर भारी बमबारी की गई है।

    केश्म द्वीप: कम से कम 6 बार बड़े धमाकों की आवाज सुनी गई।
    सिरिक: 7 से 9 मिसाइलें गिरने की खबर है।
    बंदर अब्बास: इस प्रमुख बंदरगाह शहर में करीब 10 धमाके सुने गए।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान चेतावनियों को नहीं सुन रहा था, इसलिए अमेरिका ने इस बार “हमलों का वॉल्यूम बढ़ा दिया है।”

अधर में लटकी शांति वार्ता
इस भीषण हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता ज्ञापन (MoU) खत्म हो गया है, लेकिन वे बातचीत जारी रखने की अनुमति देंगे। इसके अलावा वाशिंगटन ने ईरानी तेल की बिक्री को अधिकृत करने वाला लाइसेंस भी रद्द कर दिया है।

दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फिलहाल रुक गई है। माना जा रहा है कि अब यह बातचीत 9 जुलाई को होने वाले अली खामेनेई के दफन के बाद ही आगे बढ़ सकेगी। ज्ञात हो कि खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को हुए अमेरिकी-ईरानी हवाई हमलों में मारे गए थे।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया: “करारा जवाब मिलेगा”
ईरान के सैन्य मुख्यालय ‘खातम-अल-अंबिया’ ने इस अमेरिकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे ‘खुली आक्रामकता’ करार दिया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि वे इसका “करारा जवाब” देंगे और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के प्रबंधन में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सेना ने साफ कहा कि इस रूट से गुजरने वाले जहाजों के लिए केवल ईरान द्वारा तय किया गया रास्ता ही सुरक्षित है।

ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “यह अमेरिका द्वारा किया गया MoU का बड़ा उल्लंघन है। दक्षिणी ईरान पर हमले और तेल प्रतिबंधों को दोबारा थोपकर डराने-धमकाने का दौर अब खत्म हो चुका है। हम झुकने वाले नहीं हैं।”

बीच में दौरा छोड़ वतन लौटे ईरानी राष्ट्रपति
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जो पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार के सिलसिले में इराक के नजफ शहर में थे, वे अपना दौरा बीच में ही छोड़कर तेहरान के लिए रवाना हो गए हैं।

दूसरी तरफ, ईरान के नए सर्वोच्च नेता और खामेनेई के बेटे, आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई अभी तक इन रस्मों में कहीं नजर नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि वे किसी गुप्त स्थान पर छिपे हुए हैं, क्योंकि अपने पिता की मौत वाले हवाई हमले में वे भी घायल हो गए थे।

ट्रंप का गुस्सा: ‘Iran US समझौता अब पूरी तरह खत्म!
ईरान ने सिर्फ नियम ही नहीं बदले, बल्कि उसने पिछले कुछ दिनों में होर्मुज के पास तीन बड़े तेल टैंकर जहाजों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला भी कर दिया. बस फिर क्या था, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. ट्रंप ने तुर्की में चल रहे नाटो समिट के दौरान साफ कह दिया, ‘जहां तक मेरा सवाल है, यह समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. इन लोगों से बात करना सिर्फ टाइम वेस्ट करना है. मुझे ये लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। 

ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान पर लगे उन प्रतिबंधों की छूट को वापस ले लिया, जिसके तहत ईरान अपना तेल बेच पा रहा था. अमेरिका ने साफ कर दिया कि ईरान की बदतमीजी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

आधी रात को दहला ईरान, अमेरिका ने बरसाए बम
ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बिना एक पल गंवाए ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला शुरू कर दिया. अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने मिलकर ईरान के तटीय ठिकानों पर 80 से ज्यादा ठिकानों को बमबारी करके उड़ा दिया. ईरान के बंदर अब्बास, बुशहर, जहां ईरान का परमाणु पावर प्लांट है और केश्म आइलैंड जैसे इलाके लगातार हो रहे धमाकों से दहल उठे। 

अमेरिका ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, राडार साइट्स और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की 60 से ज्यादा लड़ाकू नावों को समंदर में ही दफन कर दिया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये हमला ईरान की उस ताकत को कुचलने के लिए था, जिसके दम पर वो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रोकने की गुस्ताखी कर रहा था। 

ईरान ने दागीं मिसाइलें, कुवैत और बहरीन में हड़कंप
अमेरिकी बमबारी से तिलमिलाए ईरान ने भी तुरंत पलटवार किया. ईरान की IRGC ने आधी रात को बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन दाग दिए. बहरीन और कुवैत के आसमान में आधी रात को सायरन गूंजने लगे और उनके एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गए. कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान की तरफ से आ रही एक दर्जन से ज्यादा मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया लेकिन इस जवाबी हमले ने साबित कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और वो खाड़ी देशों को भी इस महायुद्ध में घसीटने से पीछे नहीं हटेगा। 

नेतन्याहू की आंखें लाल
इस पूरी जंग के बीच जो सबसे खतरनाक खिलाड़ी है, वो है इजरायल. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले दिन से ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने का मौका ढूंढ रहे थे. जैसे ही ट्रंप ने सीजफायर कैंसिल होने का ऐलान किया, इजरायली मीडिया ने एक बेहद चौंकाने वाली खबर लीक कर दी. इजरायली मीडिया के मुताबिक, नेतन्याहू ने अपनी वॉर कैबिनेट के साथ मिलकर ईरान पर एक ‘फाइनल और विनाशकारी अटैक’ का प्लान लीक कर दिया है। 

US हमले का ईरान ने लिया बदला! कुवैत-बहरीन बने निशाना, 85 सैन्य ठिकानों पर हमला; होर्मुज संकट और गहराया

तेहरान 

अमेरिका ने बुधवार को ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए. अमेरिकी सेना ने इन हमलों को शक्तिशाली बताया है. अमेरिका का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई. इस घटना के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया था. इसी के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए. इन सैन्य हमलों से कुछ ही समय पहले अमेरिका ने ईरान को दी गई एक अस्थायी प्रतिबंध छूट भी वापस ले ली. इस छूट के तहत ईरान को जून में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के आधार पर कच्चे तेल का उत्पादन, बिक्री और आपूर्ति करने की अनुमति मिली हुई थी. यह छूट 21 अगस्त तक लागू रहने वाली थी, लेकिन अमेरिका ने इसे समय से पहले ही समाप्त कर दिया। 

अब तक क्या-क्या हुआ?
    होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे तीन जहाजों, जिनमें कतर और सऊदी अरब के तेल टैंकर भी शामिल हैं, पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर शक्तिशाली सैन्य हमले शुरू कर दिए। 

    ईरानी मीडिया के मुताबिक ईरान के सीरिक बंदरगाह शहर, बंदर अब्बास और केश्म द्वीप में कई धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं। 

    अमेरिका ने 17 जून को वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुए अंतरिम शांति समझौते के तहत ईरान को तेल बेचने की दी गई विशेष छूट (वेवर) भी रद्द कर दी है। 

इजरायली लड़ाकू विमानों ने किए लेबनान में हमले
लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के अनुसार, इजरायली लड़ाकू विमानों ने रात के दौरान दक्षिणी लेबनान में तीन चरणों में हवाई हमले किए. रिपोर्ट के मुताबिक, ये हमले बिंत जुबैल जिले के बैत याहून, कुनिन और ब्राचीत कस्बों के बीच के इलाकों को निशाना बनाकर किए गए. फिलहाल इन हमलों में हुए नुकसान या किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। 

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को खतरा, यूएस ने किया अलर्ट
तनाव बढ़ने के बाद अमेरिकी नौसेना की निगरानी में काम करने वाले जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरे का स्तर बढ़ा दिया है. जहाजों को ज्यादा सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं. समुद्री एजेंसियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस इलाके में नौसैनिक गश्त और सुरक्षा जांच और बढ़ सकती है। 

ईरान पहले भी कहता रहा है कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाज उसके तय किए गए रास्ते का ही इस्तेमाल करें. जिन जहाजों पर हमला हुआ, वे ओमान और यूएई के पास वाले वैकल्पिक मार्ग से गुजर रहे थे. इसी वजह से आशंका जताई जा रही है कि यह हमला दूसरे जहाजों को चेतावनी देने के लिए किया गया हो. हालांकि, ईरान ने अब तक इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। 

कतर ने अपने टैंकर पर हुए हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है. वहीं बहरीन ने भी सऊदी अरब और कतर के जहाजों पर हमलों की निंदा करते हुए समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। 

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज को लेकर चल रही बातचीत भी फिलहाल रुकती हुई नजर आ रही है. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से पूरे खाड़ी क्षेत्र में फिर से अनिश्चितता का माहौल बन गया है. हालांकि, अली खामेनेई के जनाजे के बीच दोनों देशों की बातचीत आधिकारिक रूप से रुकी हुई है। 

बहरीन में तीसरी बार बजे एयर रेड सायरन, ईरान अमेरिकी मिलिट्री बेस पर कर रहा हमले
बहरीन में को तीसरी बार एयर रेड सायरन बजाए गए हैं. इसके बाद बहरीन के गृह मंत्रालय ने लोगों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है. इसी बीच, ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB ने दावा किया है कि बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान ने मिसाइल हमलों का एक नया दौर शुरू कर दिया है. IRIB ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा- बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के नए मिसाइल हमले शुरू हो गए हैं. हालांकि, ईरान के इस दावे की अभी तक अमेरिका या बहरीन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

 ईरान के बुशेहर शहर के आसपास सुने गए धमाके
ईरान की मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, बुधवार सुबह दक्षिणी बंदरगाह शहर बुशेहर और उसके आसपास के इलाकों में कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं. हालांकि, एजेंसी ने होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित खार्ग द्वीप पर हमले की खबरों को खारिज कर दिया है. मेहर ने अपने स्थानीय संवाददाता के हवाले से कहा कि खार्ग द्वीप पर किसी तरह का हमला नहीं हुआ है. फिलहाल धमाकों के कारण और किसी संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। 

IRGC ने किया दावा- बहरीन के शेख ईसा एयर बेस को बनाया निशाना
ईरान की सेना ने दावा किया है कि उसने बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया है. ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई दक्षिणी ईरान पर अमेरिका के ताजा हवाई हमलों के जवाब में की गई. ईरानी सेना ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है. सेना ने चेतावनी दी कि अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब ईरान के सैन्य ड्रोन के वैध लक्ष्य होंगे. यह बयान ऐसे समय आया है, जब बहरीन में आज सुबह दूसरी बार एयर रेड सायरन बजाए गए. गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है. इससे पहले ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया था कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सेना के 85 सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों में निशाना बनाया है। 

 बहरीन में फिर बजे एयर रेड सायरन
बहरीन में आज सुबह दूसरी बार एयर रेड सायरन बजाए गए हैं. इसके बाद गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और तुरंत अपने सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है. गृह मंत्रालय ने कहा कि सायरन एहतियात के तौर पर बजाए गए हैं और लोगों को सुरक्षा संबंधी सभी सरकारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. यह आज सुबह दूसरी बार है, जब पूरे देश में एयर रेड सायरन बजाए गए हैं. अधिकारियों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आगे की जानकारी मिलने पर नए अपडेट जारी किए जाएंगे। 

ईरान का दावा- बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अपनी नौसेना और एयरोस्पेस बलों के साथ मिलकर मिसाइल और ड्रोन से बड़ा हमला किया है. ईरान के अनुसार, इस अभियान में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सेना के 85 अहम ठिकानों को निशाना बनाया गया. IRGC का कहना है कि हमले में बहरीन स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े (US Fifth Fleet) के मुख्यालय और कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस को भी निशाना बनाया गया. ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिका की ओर से संघर्ष विराम और इस्लामाबाद समझौते के कथित उल्लंघन के जवाब में की गई है. IRGC के मुताबिक, अमेरिका ने इससे पहले होर्मोज़गान और माहशहर में तटीय ठिकानों और गैर-सैन्य स्थानों पर हवाई हमले किए थे। 

अमेरिका ने फिर किए ईरान पर हमले, ट्रंप के वादे पर उठे सवाल
अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर नए सैन्य हमले किए हैं। ये हमले ऐसे समय हुए हैं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के सात दिन के शोक और अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका कोई हमला नहीं करेगा. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है. वॉशिंगटन के अनुसार, इन जहाजों की सुरक्षा के लिए जवाबी सैन्य कार्रवाई जरूरी थी. इन ताजा हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है। 

 IRGC का दावा- बुशेहर के ऊपर अमेरिकी MQ-9 ड्रोन मार गिराया
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बुशेहर प्रांत के खोरमुज क्षेत्र के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है.  ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, IRGC के प्रवक्ता हुसैन मोहबी ने कहा कि अमेरिकी सेना की ओर से कथित हवाई कार्रवाई के बाद ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ड्रोन को निशाना बनाया और उसे गिरा दिया. हालांकि, इस दावे की अभी तक अमेरिका की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 

अमेरिका ने किया समझौता का बड़ा उल्लंघन: गालिबाफ
ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में अमेरिका पर समझौता ज्ञापन (MoU) के कई बड़े उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.  गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका ने कई ऐसे कदम उठाए हैं, जो दोनों देशों के बीच हुए समझौते के खिलाफ हैं. गालिबाफ का कहना है कि इन कदमों से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है तथा अमेरिका ने समझौते की भावना का सम्मान नहीं किया। 

बहरीन में एयर रेड सायरन बजे, लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ी टेंशन के बीच बहरीन में एयर रेड सायरन बजाए गए
हैं. इसके बाद गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और बिना घबराए अपने सबसे नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए : अमेरिका

अमरीका का हमला हॉर्मुज जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है. अमेरिका ने बताया है कि हमले में जिन लक्ष्यों को निशाना बनाया गया, उनमें वायु रक्षा प्रणालियां, कमांड एवं कंट्रोल (C2) नेटवर्क, तटीय रडार, जहाज-रोधी मिसाइलें और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की 60 से अधिक छोटी नौकाएं शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर किया गया है. हाल ही में मार्शल आइलैंड्स के ध्वज वाला तेल टैंकर M/T Al Rekayyat, सऊदी अरब का M/T Wedyan और लाइबेरिया के ध्वज वाला M/T Cyprus Prosperity निशाना बने थे। 

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की चेतावनी, कहा- मिलेगा करारा जवाब
अमेरिका की ओर से दक्षिणी ईरान में किए गए ताजा सैन्य हमलों के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी सेना ने कहा है कि वह इस कार्रवाई का करारा और निर्णायक जवाब देगी. ईरान के खातम-अल-अनबिया सेंट्रल मुख्यालय ने एक बयान जारी कर अमेरिकी हमलों को खुला आक्रमण बताया. सेना का कहना है कि ये हमले ऐसे समय किए गए, जब ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के पार्थिव शरीर की इराक में अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी. ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है. साथ ही चेतावनी दी कि वह अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। 

 

 

 

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