Census 2027: जनगणना के 33 सवालों का जवाब देना कितना जरूरी? गलत जानकारी देने पर क्या है नियम

नई दिल्ली
जनगणना 2027 की प्रक्रिया पूरे जोर-शोर से जारी है। सबसे पहले मकानों की गणना की जा रही है। इसके लिए लोगों से 33 सवाल पूछे जा रहे हैं। मकानों की गणना के दौरान भी घर-परिवार और रहन-सहन के बारे में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर लोगों के मन में कई तरह की आशंकाएं भी रहती हैं। एक तो यह कि क्या सभी सवालों का जवाब देना जरूरी है? दूसरा यह कि अगर किसी सवाल का गलत जवाब दिया गया तो क्या ऐक्शन हो सकता है?

क्या है जनगणना की रूपरेखा
जनगणना 2027 की रूपरेखा दो प्रमुख चरणों में बंटी है। सबसे पहले हाउसिंग सेंसस हो रहा है। इसके लिए जनगणना अधिकारी एक-एक घर तक पहुंच रहे हैं और उनकी स्थिति, सुविधाएं और घर में रहने वाले लोगों से जुड़ी बुनियादी जानकारियां इकट्ठी कर रहे हैं। इन जानकारियों के लिए परिवार के मुखिया से 33 सवाल किए जाते हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। रजिस्ट्रार जनरल का कहना है कि इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य जमीनी हकीकत का को ठीक से समझना और मुख्य जनगणना के कार्य को आसान करना है। इसके बाद 1 फरवरी से जनगणना का दूसरा चरण शुरू होगा।

क्यों पूछे जा रहे हैं 33 सवाल
जनगणना के पहले चरण में यह पता लगाने का प्रयास है कि लोगों के जीवन का स्तर क्या है। इसी वजह से जो 33 सवाल किए जा रहे हैं उनमें सुविधाओं की जानकारी को मुख्य रखा गया है। इसमें घर में कितने लोग रहते हैं, फर्श कैसी है, दीवार की छत किस सामग्री से बनी है, पीने की पानी की क्या सुविधा है, घर का मुखिया कौन है। ऐसे सवाल शामिल किए गए हैं।

इन सवालों में पानी, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल जैसे सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके अलावा कार,बाइक, साइकल और वाहनों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। जिससे लोगों के जीवन स्तर के सही आंकड़े जुटाए जा सकें।

जवाब ना देने पर क्या होगा
सवाल है कि अगर कोई जनगणना में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं देता है तो क्या होगा। देश के नागरिक होने के नाते कोई भी सवालों का जवाब देने से इनकार नहीं कर सकता। वहीं जनगणना अधिकारी की भी जिम्मेदारी होती है को वह इन जानकारियों को पोर्टल पर ही अपडेट करे और कहीं प्रचारित ना करे। अगर कोई जानकारी गलत देता है तो सेंसस ऐक्ट 1948 के मुताबिक उस पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि इससे नागरिकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार के लिए आपके सवाल इसलिए भी जरूरी हैं ताकि जिन सुविधाओँ तक आपकी पहुंच नहीं हैं, उन्हें भविष्य में सुलभ बनाया जा सके। सरकार का कहना है कि नागरिकों के हित में ही ये सवाल किए जा रहे हैं।

क्या हैं जनगणना के 33 सवाल?

1. भवन संख्या

2. जनगणना घर संख्या

3- फर्श में उपयोग की गई सामग्री

4. घऱ की दीवार में उपयोग की गई सामग्री

6. घर के छत में उपयोग की गई प्रमुख सामग्री

7. घर का उपयोग

7. घर की स्थिति (नया या पुराना)

8. घर में रहने वाले लोगों की संख्या

9. परिवार में आम तौर पर उपलब्ध रहने वालों की संख्या

10. परिवार के मुखिया का नाम

11- परिवार के मुखिया का लिंग

12. परिवार के मुखिया की जाति

13. घर किराये का या खुद का

14. आवासीय कमरों की संख्या

15. परिवार में रहने वाले विवाहितों की संख्या

16. पीने के पानी का स्रोत

17. प्रकाश की व्यवस्था

18. शौचालय की उपलब्धता

19. शौचालय का प्रकार

20. जल निकासी की व्यवस्था

21. स्नान की सुविधा

22. रसोईघर में एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन

23. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन

24. रेडियो या ट्रांजिस्टर

25. टेलीविजन

26. इंटरनेट

27. लैपटॉप या कंप्यूटर

28. मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज

29. कार जीप की उपलब्धता

30. मोबाइल नंबर

रेलवे का 40 साल पुराना रिजर्वेशन सिस्टम बदलेगा, अगस्त से यात्रियों को मिलेंगी नई सुविधाएं

नई दिल्ली

भारतीय रेलवे अगस्त महीने से अपने करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलने जा रहा है. 1986 से इस्तेमाल हो रहे पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) की जगह अब नया और आधुनिक सिस्टम लाया जाएगा. रेलवे का दावा है कि इससे टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा तेज, आसान और भरोसेमंद हो जाएगी. साथ ही यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी। 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में रेल भवन में इस प्रोजेक्ट का रिव्यू किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि नए सिस्टम में बदलाव के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो. रेलवे अगस्त से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों को नए रिजर्वेशन सिस्टम पर शिफ्ट करना शुरू करेगा। 

1986 में शुरू हुआ था मौजूदा सिस्टम
भारतीय रेलवे का मौजूदा पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था. पिछले चार दशकों में इसमें कुछ छोटे-मोटे बदलाव जरूर हुए, लेकिन इसकी मूल संरचना लगभग वैसी ही बनी रही. इस दौरान यात्रियों की संख्या और ऑनलाइन टिकट बुकिंग में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में रेलवे को एक ज्यादा सक्षम और आधुनिक सिस्टम की जरूरत महसूस हो रही थी। 

रेलवे ने साल 2002 में इंटरनेट के जरिए टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की थी. आज हालात यह हैं कि लगभग 88 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं. ऐसे में नए सिस्टम को इसी बढ़ती डिजिटल मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 

ज्यादा क्षमता वाला होगा नया सिस्टम
रेलवे के मुताबिक नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम आधुनिक तकनीक पर आधारित है और मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं ज्यादा क्षमता के साथ काम करेगा. इससे टिकट बुकिंग के दौरान सर्वर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और यात्रियों को वेबसाइट या ऐप पर बेहतर अनुभव मिलेगा। 

त्योहारों या तत्काल टिकट बुकिंग के समय अक्सर वेबसाइट धीमी पड़ने या तकनीकी दिक्कतों की शिकायतें आती हैं. रेलवे का कहना है कि नया सिस्टम ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम करेगा। 

RailOne ऐप की लोकप्रियता बढ़ी
रेलवे का यह बदलाव उसकी डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. जुलाई 2025 में लॉन्च किए गए रेलवन ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है। 

इस ऐप के जरिए यात्री टिकट बुक और कैंसिल कर सकते हैं, ट्रेन की लाइव लोकेशन देख सकते हैं, प्लेटफॉर्म और कोच की जानकारी हासिल कर सकते हैं, शिकायत दर्ज करा सकते हैं और कई दूसरी रेलवे सेवाओं का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। 

रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, इस ऐप के जरिए हर दिन करीब 9.29 लाख टिकट बुक किए जा रहे हैं. इनमें लगभग 7.2 लाख अनारक्षित और 2.09 लाख आरक्षित टिकट शामिल हैं। 

AI बताएगा टिकट कन्फर्म होने की संभावना
नए सिस्टम की सबसे खास सुविधाओं में से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित वेटिंग टिकट प्रेडिक्शन फीचर है. यह सुविधा यात्रियों को बताती है कि उनकी वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। 

रेलवे के अनुसार, इस फीचर की सटीकता पहले करीब 53 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 94 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इससे यात्रियों को यात्रा की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कम होगी। 

करोड़ों यात्रियों को मिलेगा फायदा
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में अगस्त से शुरू होने वाला यह बदलाव रेलवे के डिजिटल इतिहास की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। 

करीब 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को बदलकर रेलवे अब पूरी तरह आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है. उम्मीद है कि नया सिस्टम टिकट बुकिंग को ज्यादा तेज, स्मार्ट और भरोसेमंद बनाएगा, जिसका फायदा देशभर के करोड़ों रेल यात्रियों को मिलेगा। 

8th Pay Commission पर बड़ी चर्चा: क्या केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगा 14 लाख रुपये तक का एरियर?

नई दिल्ली

8th Pay Commission: 8वें पे कमीशन ने एक बार फिर से लोगों को सुझाव देने की डेडलाइन को आगे बढ़ा दिया है। अब 15 जून तक सभी स्टेकहोल्डर्स अपना सुझाव 8वें वित्त आयोग को दे सकते है। पहले यह डेडलाइन 5 मार्च 2026 थी। उसके बाद डेडलाइन को बढ़ाकर 30 अप्रैल किया गया। फिर इसे आगे बढ़ाते हुए 31 मई कर दिया गया था। इस प्रक्रिया में लगातार आगे बढ़ा जा रहे डेडलाइन की वजह से लग रहा है कि पे कमीशन अपनी रिपोर्ट जमा करने में अभी समय लेगा। ऐसे में कर्मचारियों के बीच देरी वजह से एरियर को लेकर भी खूब चर्चाएं हो रही हैं।

14 लाख रुपये तक मिलेगा एरियर?
रिपोर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को 5 लाख रुपये से 14 लाख रुपये तक एरियर मिल सकता है। बता दें, पे कमीशन का गठन हर 10 साल पर होता है। 7वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो गया था। ऐसे में 8वां वित्त आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है। लेकिन पे कमीशन की रिपोर्ट तैयार ना होने की वजह से अभी भी कर्मचारियों को 7वें पे कमीशन के हिसाब से ही सैलरी मिल रही है। एक बार आयोग की रिपोर्ट लागू हो जाए उसके बाद कर्मचारियों को 8वें पे कमीशन के हिसाब से सैलरी मिलेगी। क्योंकि पे कमीशन 1 जनवरी से प्रभावी है। इसलिए एक बड़ा अमाउंट एरियर के तौर पर कर्मचारियों को मिलेगा।

कैसे तय होगा एरियर का भुगतान
सबकुछ फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगा। 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है उसी के आधार पर आगे का फैसला होगा। 7वें वित्त आयोग के दौरान 2.57 फिटमेंट फैक्टर रखा गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार 8वें पे कमीशन के दौरान 3.68 फिटमेंट फैक्टर रह सकता है।

अगर यह फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो बेसिक पे 18000 रुपये से बढ़कर 66240 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा। मंथली सैलरी में सरकारी कर्मचारियों के 48240 रुपये की बढ़ोतरी होगी। अगर 10 महीने का एरियर देखें तो यह 482400 रुपये के स्तर पर पहुंचता है।

कैबिनेट सचिव के पोस्ट के अधिकारी का बेसिक पे इस समय 7वें पे कमीशन के अनुसार 482400 रुपये है। अगर 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तब की स्थिति में बेसिक पे बढ़कर 920000 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। मंथली सैलरी 670000 रुपये बढ़ जाएगी। ऐसे में महज 2 महीने का ही एरियर 1340,000 रुपये हो जाता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 2.28 से 2.86 फिटमेंट फैक्टर रखा जा सकता है।

मॉनसून की धमाकेदार एंट्री! 12 राज्यों में झमाझम बारिश, यूपी-बिहार को भी जल्द मिलेगी राहत

नई दिल्ली

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब तक 12 राज्यों तक पहुंच चुका है। केरल से प्रवेश करने के बाद कर्नाटक, तमिलनाडू, आंध्र प्रदेश के अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में भी मॉनसून का असर देखने को मिल रहा है। उत्तर भारत में इन दिनों हीटवेव का असर देखा जा रहा है। हलाांकि मौसम विभाग ने एक राहत की खबर सुनाई है। 11 जून से पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी पश्चिमी विक्षोभ ऐक्टिव हो सकता है। ऐसे में दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत में भी बारिश का अनुमान है।

राजस्थान में गिरे ओले
राजस्थान के श्रीगंगानगर में धूलभरी आंधी के बाद बारिश शुरू हुई और फिर ओलावृष्टि होने लगी। मौसम विभाग के मुताबिक 8 जून को भी कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश के इंदौर में भी तेज आंधी के साथ हल्की बारिश हुई है।

करवट लेने वाला है मौसम
दिल्ली एनसीआर में फिलहाल 9 और 10 जून को हीटवेव जारी रहने का अनुमान है। 10 जून से मौसम करवट ले सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दो दिनों में ही दिल्ली एनसीआर का तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है।

इन राज्यों में मूसलाधार बारिश
मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून की वजह से कर्नाटक और केरल में बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वोत्तर में भी झमाझम बारिश हो रही है। मॉनसून त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड, मिजोरम तक पहुंच चुका है। यहां कई जगहों पर भारी बारिश और भूस्खलन की चेतावनी दी गई है। 5 जुलाई तक मॉनसून पूरे देश को कवर कर लेगा।

अगले दो दिन कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिन पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में बारिश जारी रहेगी। वहीं ओडिशा, बिहास, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी आंधी के साथ बारिश हो सकती है। राजस्थान के पूर्वी हिस्से में 40 से 50 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 10 जून को केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और अंडमान निकोबार में भी तूफान के साथ बारिश का अनुमान है।

यूपी में कब होगी बारिश
उत्तर प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हीटवेव का असर देखा जा रहा है। यहां 9 और 10 जून को भी लू जारी रहेगी। वहीं 10 जून के बाद बारिश की संभावना है। पूर्वी यूपी में आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 8 और 9 जून को हल्की बारिश हो सकती है। 11 जून को पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के बाद उत्तराखंड में बारिश की गितिविधियां तेज होंगी।

बिहार का मौसम
बिहार में भी 10 जून के बाद ही बारिश का अनुमान लागाय गया है। 11 जून को भी कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। गर्मी की लिहाज से फिलहाल दो दिन भारी बताए गए हैं। झारखंडा में 8 जून को भी 40 से 60 किमी की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। साथ ही हल्की बारिश हो सकती है।

Re-NEET 2026 के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच! एयरफोर्स 18 ठिकानों से उठाएगी पेपर, परिंदा भी नहीं मार सकेगा पर

 नई दिल्ली

देश में नीट (NEET) परीक्षा को लेकर मचे देशव्यापी बवाल और पेपर लीक के कड़े अनुभवों से सबक लेते हुए केंद्र सरकार इस बार सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम कर रही है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी. आगामी नीट री-एग्जा को पूरी तरह ‘लीक-प्रूफ’ और सुरक्षित बनाने के लिए अब देश की सबसे भरोसेमंद ताकत यानी भारतीय वायुसेना (IAF) को मैदान में उतार दिया गया है। 

‘इंडिया टुडे’ को टॉप सोर्सेज (शीर्ष सूत्रों) से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, नीट री-टेस्ट के दौरान प्रश्नपत्रों को लीक होने से बचाने और उनकी सुरक्षित डिलीवरी के लिए भारतीय वायुसेना लॉजिस्टिक सपोर्ट (लॉजिस्टिक्स सहायता) प्रदान करेगी। 

आसमान से होगी प्रश्नपत्रों की सुरक्षित लैंडिंग: 18 जगहों से उठेंगे पैकेट्स

सूत्रों के मुताबिक, इस बार प्रश्नपत्रों के ट्रांसपोर्टेशन की जिम्मेदारी किसी प्राइवेट कूरियर या सामान्य सरकारी डाक के भरोसे नहीं छोड़ी जा रही है. सुरक्षा का घेरा इतना कड़ा है कि नीट री-टेस्ट के प्रश्नपत्रों (Question Papers) को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का जिम्मा खुद भारतीय वायुसेना के जिम्मे होगा.सूत्रों ने बताया है कि वायुसेना देश के 18 चुनिंदा और महत्वपूर्ण स्थानों से प्रश्नपत्रों के पैकेट्स को अपनी कस्टडी में लेगी और उन्हें तय समय पर सुरक्षित केंद्रों तक पहुंचाएगी। 

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सुरक्षा व्यवस्था केवल पेपर सेटिंग तक सीमित नहीं है। प्रश्नपत्रों के परिवहन और सुरक्षित भंडारण के लिए भी बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। सरकार भारतीय वायुसेना (Air Force) की मदद से प्रश्नपत्रों को विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि किसी भी स्तर पर लीक या छेड़छाड़ की आशंका को खत्म किया जा सके। इसके अलावा पारंपरिक बैंक स्ट्रॉन्ग रूम के बजाय अधिक सुरक्षित स्थानों की भी पहचान की जा रही है।

NTA ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। हाल के दिनों में टेलीग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर री-एग्जाम का कथित पेपर बिकने के दावों के बाद एजेंसी सतर्क हो गई है। NTA ने ऐसे दावों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताते हुए चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

21 जून को होने वाली यह पुनर्परीक्षा देश और विदेश के कुल 551 भारतीय शहरों तथा 14 विदेशी शहरों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा पहले की तरह पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। NTA ने उम्मीदवारों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप भी जारी कर दी है, जबकि एडमिट कार्ड अलग से जारी किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षा केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि NTA और पूरे परीक्षा तंत्र की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है। इसलिए इस बार “जीरो-ट्रस्ट सिक्योरिटी मॉडल” पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें किसी एक व्यक्ति को पूरी प्रक्रिया की जानकारी न हो और हर स्तर पर निगरानी बनी रहे।

‘हर चुनौती से निपटने के लिए हैं तैयार’
सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा सूत्रों का कहना है कि नीट परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी स्तर का जोखिम नहीं लेना चाहती. वायुसेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा को बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न कराने के लिए जिस भी तरह के सहयोग या सपोर्ट की आवश्यकता होगी, उसके लिए सेना पूरी तरह मुस्तैद और तैयार है। 

इस कदम का सीधा मकसद सॉल्वर गैंग और लीक माफियाओं के उस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है, जो प्रिंटिंग प्रेस से लेकर परीक्षा केंद्र के बीच के रास्ते में पेपर लीक की वारदातों को अंजाम देते थे। 

शुभेंदु सरकार का बड़ा ऐलान, बंगाल में CBI को मिली जांच की खुली छूट

 कोलकाता

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सीबीआई को जांच करने की पूरी छूट देने का बड़ा फैसला किया है. होम एंड हिल अफेयर्स विभाग की तरफ से 8 जून 2026 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) एक्ट, 1946 के तहत सीबीआई को राज्य में केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) के कर्मियों और उनसे जुड़े मामलों की जांच करने की अनुमति दी गई है। 

इस नोटिफिकेशन का सीधा मतलब यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने CBI को राज्य में कुछ मामलों की जांच करने के लिए फिर से सामान्य सहमति (General Consent) दे दी है, लेकिन यह छूट पूरी तरह बिना शर्त नहीं है। 

यह अधिकार दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत दिया गया है. नोटिफिकेशन 8 जून 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो रहा है। 
किन मामलों में जांच कर सकेगी CBI?

    केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामले.
    केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के कर्मचारियों से जुड़े मामले.
    अगर किसी शख्स पर केंद्रीय कर्मचारियों या केंद्रीय उपक्रमों के कर्मचारियों के साथ मिलकर अपराध करने का आरोप हो, तो उनके खिलाफ भी जांच की जा सकेगी.

किन मामलों में CBI सीधे जांच नहीं कर सकेगी?

पश्चिम बंगाल सरकार के नियंत्रण वाले राज्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच नहीं कर सकती है.
ऐसे मामलों में सीबीआई को पहले राज्य सरकार से लिखित अनुमति लेनी होगी.

यह कहना कि ‘बंगाल ने CBI को सभी मामलों की जांच की पूरी छूट दे दी’ पूरी तरह सही नहीं होगा. नोटिफिकेशन पढ़ने पर साफ है कि छूट मुख्य रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय उपक्रमों और उनसे जुड़े मामलों के लिए दी गई है. राज्य सरकार के अधिकारियों पर CBI अभी भी बिना अनुमति सीधे जांच नहीं कर सकती। 

भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की सीबीआई को दी खुली छूट
 मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पिछली सरकार ने 4 वर्षों से सीबीआई की कार्रवाई को रोक रखा था. कानून के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने या अभियोजन शुरू करने के लिए राज्य सरकार की अनुमति जरूरी होती है। 

ममता बनर्जी पर भ्रष्ट नौकरशाहों को संरक्षण देने का आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की सरकार ने जान-बूझकर इन फाइलों को अटकाये रखा, ताकि उनके खास अधिकारियों को बचाया जा सके. मुख्यमंत्री ने बताया कि फिलहाल 3 प्रमुख विभागों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ जांच की सीबीआई को आवश्यक मंजूरी दे दी गयी है. इसकी प्रतियां केंद्रीय एजेंसी को भेज दी गयी हैं। 

रडार पर शिक्षक भर्ती और नगर निकाय भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड

    शिक्षक भर्ती घोटाला (WBSSC) स्कूलों में अवैध नियुक्तियों से जुड़ा मामला है. इस केस में कई बड़े अधिकारियों के खिलाफ अब सीबीआई सीधे आरोपपत्र दाखिल कर सकेगी। 
    नगर निकाय भर्ती घोटाला वो केस है, जिसमें बंगाल के विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई नौकरियों की बंदरबांट हुई थी. अब इसकी जांच तेजी से आगे बढ़ेगी। 

कानून का हथियार बनाकर भ्रष्टाचारियों को दिया गया था सुरक्षा कवच
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने कानून को ढाल बनाकर भ्रष्टाचारियों को कवच प्रदान किया था. उन्होंने कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है. जो फाइलें सचिवालय की आलमारियों में बंद थीं, उन्हें अब खोल दिया गया है, ताकि जनता का पैसा लूटने वालों को सजा मिल सके। 

TMC के मुख्यालय पर संकट! किराये की इमारत खाली कराने को लेकर थाने पहुंचा मालिक

कोलकत्ता 

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। खबर है कि तृणमूल कांग्रेस का मुख्यायल जिस भवन में है, उसके मालिक ने पार्टी से जगह खाली करने के लिए कहा है। इस संबंध में पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। खास बात है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब टीएमसी में बगावत जारी है और विधायक पहले ही दो गुट तैयार कर चुके हैं।

टीएमसी के मौजूद मुख्यालय का पता A/P-1/A कैनाल साउथ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां के संपत्ति मालिक मोंटू साहा है और वह चाहते हैं कि टीएमसी उनकी संपत्ति को खाली कर दे। उनका कहना है कि टीएमसी के साथ कराया गया समझौता साल 2025 में ही खत्म हो गया है और वह पार्टी से लंबे समय से जगह खाली करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन उसपर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

पुलिस में शिकायत
जगह खाली नहीं करने को लेकर जारी विवाद के बाद साहा अपने बेटे अमित के साथ रविवार को प्रॉपर्टी पर पहुंचे थे। वह टीएमसी नेताओं से बात करने पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई भी पदाधिकारी मौजूद नहीं था। ऐसे में उन्होंने पुलिस का रुख किया है। खबर है कि पिता पुत्र कुछ घंटों तक इंतजार करने के बाद पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हुए थे।

क्या है प्लान
उन्होंने संकेत दिए हैं कि पार्टी को प्रॉपर्टी से बाहर निकालने के लिए कानूनी मदद ली जा सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, अमित का कहना है, ‘पिछले साल के आखिर में जब कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, तो हमने उनसे कई बार संपर्क किया और कहा कि हमें हमारी बिल्डिंग वापस चाहिए। इस बिल्डिंग में मरम्मत का काम होना है और हमें अपने बिजनेस के लिए भी इसकी जरूरत है।’

अमित ने कहा, ‘उन्होंने हमसे कहा था कि वे जुलाई तक बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन हमें यह अभी वापस चाहिए। पिछले कुछ समय से पार्टी का कोई भी व्यक्ति इस बारे में बात करने के लिए उपलब्ध नहीं है। हमारे पास पुलिस के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा था।’

रिपोर्ट के अनुसार, टीएएमसी के एक नेता का कहना है कि साहा ने संपत्ति किराये पर देकर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि इसके बदले में कई कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए हैं।

TMC हेडक्वार्टर्स
खास बात है कि टीएमसी के असली मुख्यालय पर भी विवाद जारी है। तृणमूल भवन नाम से पहचाने वाली इस बिल्डिंग पर बागी विधायक जावेद खान ने अपना दावा पेश कर दिया है। उनका कहना है कि तृणमूल भवन जिस जमीन पर बना हुआ है, वह उनके परिवार की है। उन्होंने कहा था, ‘मेरे पास यह साबित करने के लिए पूरे सबूत हैं कि तोपसिया रोड प्लॉट मेरे परिवार का है।’

दरअसल, यहां रिनोवेशन का काम शुरू होने के बाद टीएमसी 2022 में साहा की प्रॉपर्टी में शिफ्ट हुई थी। साहा परिवार का कहना है कि यह जगह टीएमसी को साल 2022 में किराये पर दी गई थी। इससे पहले साहा यहां अरब रेसीडेंसी नाम का होटल चलाते थे।

एक फोन कॉल ने खोला राज! नेपाल बॉर्डर के पास छिपे जहांगीर खान तक ऐसे पहुंची STF

कोलकाता

तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक जहांगीर खान पर कानून का शिकंजा कस गया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जहांगीर को गिरफ्तार कर लिया है. जहांगीर को नेपाल की सीमा के समीप से पकड़ा गया है. जहांगीर फलता चुनाव में नाम वापसी का ऐलान करने के बाद से ही अंडरग्राउंड चल रहा था। 

जहांगीर खान की गिरफ्तारी को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक वह नेपाल की सीमा से सटे इलाके में किराये का मकान लेकर अपने परिवार के साथ रह रहा था. एसटीएफ को आधा दर्जन से अधिक मामलों में जहांगीर की तलाश थी. एसटीएफ ने जहांगीर की गिरफ्तारी के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। 

पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने जहांगीर खान के करीबी सहयोगियों के फोन भी ट्रेस करना शुरू कर दिया. जहांगीर ने इसी बीच अपने एक करीबी सहयोगी से संपर्क किया और यही फोन कॉल एसटीएफ के लिए उस तक पहुंचने का रास्ता तैयार कर गई. एसटीएफ ने मोबाइल नेटवर्क के जरिये लोकेशन का पता लगा लिया. एसटीएफ ने तसल्ली से पहले जहांगीर खान का ठिकाना चिह्नित किया। 

एसटीएफ जब जहांगीर खान के ठिकाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो गई, 7 और 8 जून की रात छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. जहांगीर के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली समेत कई गंभीर धाराओं में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. जहांगीर खान हालिया बंगाल चुनाव में फलता विधानसभा सीट से टीएमसी का उम्मीदवार था. जहांगीर खान ने सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 

आईपीएस अजयपाल शर्मा के साथ हुआ था विवाद
फाल्टा में चुनाव के दौरान टीएमसी नेता जहांगीर खान पर ईवीएम में छेड़खानी के आरोप लगे थे। इसके अलावा चुनाव ऑब्जर्वर बनाए गए आईपीएस अजयपाल शर्मा की सख्ती के बाद उनके बयानों ने सुर्खियां बटोरी थीं। जहांगीर खान ने कहा था कि अगर अजयपाल शर्मा सिंघम है तो वह पुष्पा हैं। चुनाव में गड़बड़ी की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने फाल्टा का चुनाव रद्द कर दिया था। 26 मई को फाल्टा में दोबारा मतदान हुआ। तब जहांगीर खान ने वोटिंग से दो दिन पहले खुद को चुनाव से अलग कर लिया। फाल्टा में बीजेपी की जीत हुई और जहांगीर खान चौथे स्थान पर रहे। जहांगीर खान को टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। फाल्टा में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर भी काफी हंगामा हुआ और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठे।

जहांगीर खान के खिलाफ दर्ज थे ये केस

  •     जहांगीर खान के खिलाफ जबरन वसूली, धमकी देने, राजनीतिक हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से जुड़े सात से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
  •     जहांगी इन सभी मामलों में लगातार फरार चल रहा था।
  •     पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही थी।
  •     स्थानीय स्तर पर प्रभाव और दबदबे के कारण जहांगीर खान को लोग ‘फाल्टा का पुष्पा’ भी कहकर बुलाते थे।

खुद को बताया था पुष्पा
बता दें कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी को पहली बार पश्चिम बंगाल में सफलता मिली। सत्ता संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने फाल्टा में चुनाव प्रचार भी किया। प्रचार के दौरान उन्होंने जहांगीर खान को चुनौती देते हुए कहा था कि जनता अब ‘पुष्पा’ को हराएगी। बता दें कि चुनाव के दौरान जहांगीर खान ने आईपीएस अजयपाल शर्मा को ललकारते हुए कहा था कि अगर वह सिंघम हैं तो हम भी पुष्पा हैं। चुनाव प्रचार के आखिरी दिन बुधवार को भी शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवार के साथ रोड शो किया। फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को मतदान होगा और 24 मई को वोटों की गिनती होगी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहांगीर खान को फलता चुनाव तक के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी थी. जहांगीर ने फिर हाईकोर्ट का रुख कर इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस बार उसे झटका दे दिया. जहांगीर खान ने फलता चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद से ही वह अंडरग्राउंड चल रहा था। 

नतीजों के बाद हुए गायब पश्चिम बंगाल में 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही राजनीतिक समीकरण बदल गए थे। इसके बाद 21 मई तक जहांगीर खान पूरी तरह से परिदृश्य से ‘गायब’ हो चुके थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने चुनाव से ठीक दो दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था। नाम वापस लेने के बाद से ही वे लगातार पुलिस की टीम को चकमा देकर भाग रहे थे। आखिरकार उनकी यह फरारी आज सुबह नेपाल सीमा के पास हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप चुनावी प्रक्रिया के दौरान एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई अवैध गतिविधियों के आरोप थे। उन पर सरकारी बीएलओ को डरा-धमकाकर अपने पक्ष में प्रभावित करने का बेहद गंभीर आरोप लगा था। इसके अलावा उन्होंने वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए मृतकों के नाम भी सूची में शामिल करवाए थे। इन सभी जालसाजियों के सबूत सामने आने के बाद से ही पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इन हरकतों ने चुनाव की पूरी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

अजय पाल शर्मा की तैनाती इलाके में जहांगीर खान द्वारा लोगों को धमकाने और डराने के आरोपों पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं इन घटनाओं के खिलाफ बहुत मजबूती से अपनी आवाज उठाई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय पाल शर्मा को नियुक्त किया। उन्हें विशेष पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी सौंपकर डुंडी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में भेजा गया था। इस नियुक्ति का उद्देश्य इलाके में पूरी तरह से कानून व्यवस्था बहाल करना था।

मशीनों पर टेप और दोबारा चुनाव फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दिन बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली और अराजकता देखने को मिली थी। वोटिंग के दौरान ही कई ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप चिपकाए जाने की चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई थीं। इस पूरी धांधली के पीछे मुख्य रूप से जहांगीर खान का ही हाथ होने का आरोप लगाया गया था। मतदान प्रक्रिया की पवित्रता नष्ट होने के कारण चुनाव आयोग ने वहां कड़ा रुख अपनाया था। इसके बाद आयोग ने फालता में दोबारा नए सिरे से चुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी थी।

नेताओं पर कसता कानूनी शिकंजा जहांगीर खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। लेकिन राज्य प्रशासन ने अदालत में आवेदन देकर उनकी इस सुरक्षा को वापस लेने की मांग की थी। इस कानूनी दबाव के बाद जहांगीर ने नेपाल के रास्ते किसी अन्य देश भागने की फिराक में थे। बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद से ही कई दागी टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारियां हो रही हैं। पुलिस इन सभी नेताओं पर लगे पुराने आरोपों की जांच कर रही है और कई नेता इस्तीफा दे रहे हैं।

LPG सिलेंडर 942 रुपये पहुंचा, फिर भी भारत में सबसे सस्ता! जानिए पाकिस्तान, श्रीलंका समेत पड़ोसी देशों के दाम

नई दिल्ली
भारत में घरेलू इस्तेमाल वाला एलपीजी सिलेंडर और महंगा हो गया है. इसकी कीमत में सीधे 29 रुपये का इजाफा किया गया है, जो रसोई के बजट को बढ़ाने वाला है. तीन महीने में एलपीजी की कीमत पर महंगाई का ये दूसरा बम फूटा है और अब 14 किलोग्राम वाला गैस सिलेंडर 913 रुपये की जगह 942 रुपये का हो गया है। 

गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी के बाद सरकार का बयान भी आ गया है. एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में नई बढ़ोतरी को जायज ठहराते हुए पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की ओर से इस बढ़ोतरी के पीछे का कारण बताया गया है और दावा किया गया है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद भी भारत में कुकिंग गैस की कीमत पड़ोसी देशों ही नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम विकसित देशों की तुलना में भी सबसे कम है। 

7 मार्च के बाद 7 जून को महंगाई का बम
देश में एलपीजी प्राइस हाइक का बम तीन महीने में दूसरी बार फूटा है. मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते गहराए तेल-गैस संकट के बीच बीते 7 मार्च को 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इसके बाद 7 जून को एक बार फिर गैस की कीमतों पर महंगाई का बम फोड़ा गया और एलपीजी गैस सिलेंडर 29 रुपये महंगा होकर 942 रुपये का हो गया, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 642 रुपये का है। 

सिलेंडर महंगा होने पर सरकार ने क्या कहा? 
अब बताते हैं कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार की ओर से जारी किए गए बयान पर गौर करें, तो इसमें कहा गया है कि न सिर्फ भारत में सिलेंडर किसी भी पड़ोसी देश के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों के मुकाबले काफी सस्ता है। 

सरकार की ओर से कहा गया कि बीते कई सालों से लगभग सभी भारतीय ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों से बहुत कम कीमत पर मिल रही है, और भारतीय परिवार अभी भी पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के परिवारों की तुलना में कम कीमत चुका रहे हैं। 

इन देशों में भारत से ज्यादा है कीमत
सरकार की ओर से कुछ देशों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों के आंकड़े भी शेयर किए गए हैं, जिनसे साफ की भारत में तीन महीने में दो बढ़ोतरी के बाद भी एलपीजी सिलेंडर सस्ता मिल रहा है। 

देश                                 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत (रुपये में)
भारत                               (उज्ज्वला सब्सिडी वाला)      642 रुपये
भारत (बिना सब्सिडी)       942 रुपये
पाकिस्तान                       1046 रुपये
नेपाल                               1207 रुपये
बांग्लादेश                           करीब 1225 रुपये
श्रीलंका                            1241 रुपये
अमेरिका                        करीब 1755 रुपये
ऑस्ट्रेलिया                    करीब 1765 रुपये
कनाडा                        करीब 2411 रुपये

हर सिलेंडर पर 700 रुपये का घाटा
सरकार के बयान पर गौर करें, तो एक सिलेंडर की सप्लाई की लागत 1,600 रुपये से ज्यादा हो चुकी है, जिससे हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है. फरवरी और जून 2026 के बीच LPG के लिए सऊदी CP (कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) बेंचमार्क में लगभग 46% की बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि होर्मुज में रुकावट से खाड़ी देशों से सप्लाई कम हुई और इससे 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की सप्लाई कॉस्ट काफी बढ़ गई. ये बड़ा कारण है कि  और इसके चलते आम ग्राहकों के लिए रिटेल कीमत बदलकर 942 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया है। 

केंद्र ने स्पष्ट किया कि घरेलू एलपीजी पर होने वाली ‘अंडर-रिकवरी’ सब्सिडी से अलग है. यह अंतरराष्ट्रीय लागत और उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत के बीच का अंतर होता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी का बोझ पिछले वर्ष लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि उससे एक वर्ष पहले यह 41,338 करोड़ रुपये था। 

नेपाल बॉर्डर से TMC नेता जहांगीर खान गिरफ्तार, STF की बड़ी कार्रवाई से मचा सियासी हड़कंप

कोलकत्ता 
फालता से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को राज्य पुलिस की STF ने गिरफ्तार किया है। उन्हें आज सुबह नेपाल बॉर्डर इलाके से गिरफ्तार किया गया है। काफी दिनों से फरार रहने के बाद गिरफ्तार किया गया है।

जहांगीर खान पर लगे थे कई आरोप
बंगाल के चुनावी नतीजे आने के बाद से जहांगीर फरार था। उसकी तलाश जारी थी। आखिरकार आज एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। चुनाव से पहले एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई आरोप लगे थे। उन पर बीएलओ को प्रभावित करने और मृतकों के नाम सूची में जोड़ने का आरोप था।

जहांगीर खान की गिरफ्तारी किस जगह से और कब की गई, इस संबंध में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहांगीर खान की गिरफ्तारी के संबंध में अधिक जानकारी साझा कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक जहांगीर खान फलता विधानसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव के बाद से लापता चल रहा था। 

पश्चिम बंगाल पुलिस और एसटीएफ को कई मामलों में जहांगीर खान की तलाश थी. जहांगीर खान के खिलाफ सात मामले दर्ज हैं. एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकड़ने के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया. जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन जब ट्रैक किया गया, एसटीएफ जहांगीर खान तक पहुंच गई। 

लोगों को धमकाने का भी आरोप
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं उनके खिलाफ आवाज उठाई थी। इसके बाद चुनाव से पहले इलाके में धमकाने के आरोप भी लगे। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुठभेड़ विशेषज्ञ अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के रूप में डुंडी पुलिस स्टेशन भेजा था।

बता दें कि दक्षिण 24 परगना की फलता सीट से जहांगीर खान टीएमसी के उम्मीदवार थे। चुनाव के वक्त उनपर हिंसा और लोगों को धमकाने का आरोप लगा था। चुनाव में गड़बड़ियों की शिकायत के बाद इस सीट पर दोबारा चुनाव हुआ और बीजेपी ने जबरदस्त जीत हासिल की। वहीं जहांगीर खान पहले ही हथियार डाल चुके थे। चुनाव में भी वह चौथे नंबर पर खिसक गए। उनपर फलता थाने में धमकी देने, जबरन वसूली, हिंसा, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने समेत सात केस दर्ज हुए थे। वह चुनाव के बाद से ही फरार थे। वहीं एसटीएफ उनकी तलाश में जुटी थी।

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu