Viral Video: क्या संकट के समय दुश्मनी भी भूल जाते हैं जीव? वायरल वीडियो ने दिया मानवता का बड़ा संदेश

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोग भावुक हैं। यदि वीडियो वास्तविक है, तो यह बताता है कि कठिन समय में जीवन की रक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में दो ऐसे जीव, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है, जीवन बचाने के लिए साथ दिखाई देते हैं। हालांकि, चैटजीपीटी इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता और इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि होना अभी बाकी है।

यदि यह दृश्य वास्तविक है, तो यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में शत्रुता नहीं, बल्कि जीवन और करुणा ही सबसे बड़ी ताकत होती है।

यदि यह वीडियो वास्तविक है, तो यह केवल एक दुर्लभ घटना नहीं, बल्कि जीवन का एक गहरा संदेश भी देता है। प्रकृति बार-बार यह सिखाती है कि जब अस्तित्व पर संकट आता है, तब शत्रुता का महत्व कम हो जाता है और जीवन की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है।

जब जीवन सबसे बड़ा सत्य बन जाता है: संकट में दुश्मनी नहीं, इंसानियत जीतती है

यही संदेश मानव समाज पर भी लागू होता है। कठिन परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं या किसी बड़े संकट के दौरान अक्सर लोग अपने मतभेद भुलाकर एक-दूसरे की मदद के लिए आगे आते हैं। ऐसे समय में सहयोग, संवेदनशीलता और मानवता ही सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।

सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों बार देखा और साझा किया जा चुका है। कई यूजर्स इसे इंसानियत और सह-अस्तित्व का प्रतीक बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसकी सत्यता पर सवाल भी उठा रहे हैं। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो पर विश्वास करने से पहले उसके स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करना जरूरी है।

यदि वीडियो का दावा सही साबित होता है, तो यह हमें एक महत्वपूर्ण सीख देता है—जीवन किसी भी दुश्मनी, मतभेद या संघर्ष से कहीं अधिक मूल्यवान है। संकट के समय सहयोग और करुणा ही वह शक्ति है, जो हर सीमा और हर शत्रुता से ऊपर उठ जाती है।

धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बने लोगों को आरक्षण देने की मांग, तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

चेन्नई

अभिनेता से नेता बने विजय थलपति धर्मांतरण कराकर मुस्लिम बने लोगों को भी आरक्षण दिला के पक्ष में हैं। यही वजह है कि तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया था कि धर्मांतरण के बाद इस्लाम अपनाने वाला कोई भी व्यक्ति पिछड़ा वर्ग मुस्लिम के दर्जे का दावा नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी साल 2024 के एक आदेश को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।

तमिलनाडु की सरकार के सचिव की ओर से दायर इस अपील में मूल याचिकाकर्ता समीर अहमद एन, जिला कलेक्टर, राजस्व मंडल अधिकारी और तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया है। इन प्रतिवादियों ने शीर्ष अदालत में पहले ही कैविएट दाखिल कर रखी है।

क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद साल 2022 में थूथुकुडी जिले के एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था। हिंदू माता-पिता के घर जन्मे इस व्यक्ति ने इस्लाम धर्म अपना लिया था और अपना नाम बदलकर समीर अहमद एन रख लिया था। साल 2015 में जारी एक प्रमाण पत्र में पुष्टि की गई थी कि याचिकाकर्ता ने इस्लाम स्वीकार कर लिया है।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने कयातुर के तहसीलदार के समक्ष आवेदन देकर मुस्लिम लेब्बाई समुदाय का प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की। उनका दावा है कि वह इसी उप-जाति की प्रथाओं का पालन करते हैं। हालांकि, तहसीलदार ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। बाद में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

क्या था सरकार का 2024 का आदेश?
इस मामले के लंबित रहने के दौरान ही तमिलनाडु सरकार ने साल 2024 में एक सरकारी आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया कि यदि पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, विमुक्‍त जनजातियों या अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाता है तो उसे आरक्षण का लाभ देने के लिए पिछड़ा वर्ग (मुस्लिम) यानी BC (Muslim) के रूप में माना जाना चाहिए।

मद्रास हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस तर्क और आदेश को खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया कि जब कोई हिंदू व्यक्ति इस्लाम में परिवर्तित होता है तो वह अपनी पिछली हिंदू जाति या उप-जाति के लाभों को आगे नहीं ले जा सकता है। इस्लाम में किसी व्यक्ति की स्थिति इस बात से तय नहीं होती कि धर्मांतरण से पहले वह किस जाति का हिस्सा था। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “ईसाई मिशनरियों और इस्लामी प्रचारकों का हमेशा से यह रुख रहा है कि उनके धर्म हिंदू धर्म के विपरीत सामाजिक समानता प्रदान करते हैं।”

हाईकोर्ट ने आगे कहा, “धर्मांतरण कराने के लिए ऐसा स्टैंड लेने के बाद अब यह दावा करना पूरी तरह से कपटपूर्ण है कि इस्लाम में भी जातिगत पदानुक्रम मौजूद है। हमारी नजर में कुछ संप्रदायों को पिछड़ा और शेष को अगड़ा के रूप में वर्गीकृत करना कुरान के आदेशों के विपरीत है। इस्लाम एक समतावादी समाज की स्थापना करना चाहता है, जहां ईश्वर की नजर में हर कोई समान है और वहां कोई सामाजिक पदानुक्रम नहीं है।”

हाईकोर्ट के इसी फैसले के बाद अब तमिलनाडु सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत का रुख किया है, जहां इस बात पर अंतिम फैसला होना है कि क्या धर्मांतरित मुस्लिमों को पिछड़ी जाति के तहत आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए या नहीं।

TMC फंड से लग्जरी जेट खरीदने का आरोप, ममता पर ED की जांच में बड़ा खुलासा!

कलकत्ता

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फंडिंग से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने पार्टी के तीन बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए गए हैं. ED का दावा है कि जांच के दौरान ऐसे वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं, जिनसे यह संदेह पैदा हुआ है कि पार्टी के पैसों से एक लग्जरी बिजनेस जेट और एक वीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदा गया, लेकिन बाद में उन्हीं विमानों को किराए पर लेकर इस्तेमाल किया गया। 

यह पहली बार है जब ED किसी राजनीतिक दल की फंडिंग की स्वतंत्र रूप से मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है. इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के अकाउंट की जांच दिल्ली आबकारी नीति मामले के तहत की गई थी। 

कोलकाता की एविएशन कंपनी पर छापे से खुला मामला

यह पूरा मामला कोलकाता स्थित एविएशन मैनेजमेंट और लीजिंग कंपनी Carewell Aviation India Pvt Ltd पर ED की छापेमारी के बाद सामने आया. एजेंसी के मुताबिक, यह कंपनी सितंबर 2021 में बनाई गई थी. इसी साल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी। 

ED के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच TMC के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन को ट्रांसफर किए गए. जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने इनमें से 82.96 करोड़ रुपये एक अन्य नई कंपनी को भेज दिए। 

112 करोड़ रुपये में खरीदे गए जेट और हेलिकॉप्टर
ED का आरोप है कि TMC से मिले पैसों का इस्तेमाल कर केयरवेल एविएशन ने करीब 112 करोड़ रुपये की लागत से एक Embraer Legacy 600 बिजनेस जेट और एक Agusta 109 SP हेलिकॉप्टर खरीदा। 

Embraer Legacy 600 ब्राजील की कंपनी Embraer द्वारा निर्मित एक मिड-साइज लग्जरी बिजनेस जेट है, जिसमें फ्लैट बेड में बदलने वाली सीटें और वीआईपी सुविधाएं उपलब्ध हैं. वहीं Agusta 109 SP इटली की कंपनी Leonardo (पूर्व में AgustaWestland) का हाई-स्पीड ट्विन इंजन वीआईपी हेलिकॉप्टर है। 

केमैन आइलैंड्स से भी आया पैसा
ED की जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए केमैन आइलैंड्स स्थित एक कंपनी से लगभग 16 करोड़ रुपये (करीब 17 लाख अमेरिकी डॉलर) का असुरक्षित कर्ज (Unsecured Loan) लिया गया था। 

केमैन आइलैंड्स दुनिया भर में ऑफशोर कंपनियों के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है. एजेंसी अब इस विदेशी फंडिंग के सोर्स और उद्देश्य की भी जांच कर रही है। 

सबसे बड़ा सवाल- अपने पैसों से खरीदा विमान, फिर उसी का किराया क्यों?
ED की जांच का सबसे अहम पहलू यही है कि जिन विमानों को कथित तौर पर TMC के फंड से खरीदा गया, बाद में वही विमान पार्टी को किराए पर दिए गए. एजेंसी का कहना है कि विमान खरीदने के बाद केयरवेल एविएशन ने उन्हें TMC को चार्टर सेवा के रूप में उपलब्ध कराया और विमान इस्तेमाल करने के नाम पर पार्टी से लगातार भुगतान लिया गया। 

सरल शब्दों में समझें तो यह ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति अपने ही पैसे से कार खरीदे, लेकिन बाद में उसी कार का इस्तेमाल करने के लिए हर बार किराया भी देता रहे. ED को शक है कि यह पूरा सिस्टम असली लेनदेन को छिपाने और पार्टी के फंड को दूसरी जगह ट्रांसफर करने (Siphoning of Funds) के उद्देश्य से बनाई गया हो सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी जांच जारी है और एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। 

VVIP चार्टर सेवा देती थी कंपनी
बांग्ला दैनिक आनंदबाजार पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, केयरवेल एविएशन पश्चिम बंगाल के कई वीवीआईपी नेताओं को चार्टर विमान उपलब्ध कराती थी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी इस कंपनी की चार्टर सेवाओं का इस्तेमाल करते थे. ED का कहना है कि यही वजह है कि विमान खरीद और उसके बाद हुए भुगतान की पूरी श्रृंखला की जांच की जा रही है। 

कैसे दर्ज हुई FIR
यह जांच बिधाननगर पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR के आधार पर शुरू हुई. शिकायत तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक बिश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी. बिश्वनाथ दास मई महीने में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे. इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर वित्तीय जांच शुरू की। 

TMC ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई
तृणमूल कांग्रेस ने ED की कार्रवाई को पूरी तरह राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है. पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि उसके सभी वित्तीय लेनदेन पूरी पारदर्शिता के साथ किए गए हैं. पार्टी का कहना है कि सभी चंदों और दान की जानकारी समय-समय पर चुनाव आयोग और आयकर विभाग को दी गई है. इसके अलावा इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी सभी जानकारियां भी पहले ही भारतीय स्टेट बैंक के जरिये सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। 

TMC ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। 

एक सवाल, जिसने उलझा दी जांच
फिलहाल ED की जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर विमान और हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए धन पार्टी की ओर से दिया गया था, तो फिर उन्हीं विमानों के इस्तेमाल के लिए पार्टी को दोबारा किराया क्यों देना पड़ा? एजेंसी इसी वित्तीय मॉडल और पैसों के सोर्स की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. वहीं तृणमूल कांग्रेस सभी आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बता रही है। 

TCS धर्म परिवर्तन मामले में निदा खान को जमानत, कोर्ट ने ‘श्रीकृष्ण’ के उदाहरण के साथ सुनाया अहम फैसला

 नासिक

महाराष्ट्र के नासिक में सामने आए टीसीएस (TCS) धर्म परिवर्तन मामले में गर्भवती आरोपी निदा खान को इसी सप्ताह जमानत मिल गई है. निदा खान पांच महीने की गर्भवती हैं. जमानत देते समय कोर्ट ने कहा कि जेल में बच्चे का जन्म होना किसी भी महिला और बच्चे के लिए बहुत मुश्किल स्थिति होती है. अदालत ने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के जन्म की परिस्थितियों से की। 

अदालत ने कहा, ‘भगवान कृष्ण की तरह जेल में बच्चे को जन्म देने का ट्रॉमा और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक किसी के लिए भी सहने योग्य नहीं है.’ स्पेशल जज के.जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि निदा खान पांच महीने की गर्भवती हैं. ऐसे में जेल में बच्चे का जन्म होने से मां और बच्चे दोनों को परेशानी हो सकती है. इसलिए नए बच्चे की भलाई को देखते हुए अदालत ने अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्हें जमानत देने का फैसला किया। 

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. साथ ही अदालत ने अपने आदेश में यह भी लिखा कि जांच में सामने आया है कि निदा खान ने दूसरे आरोपियों की मदद से शिकायत करने वाली महिला का ब्रेनवॉश करने और उसके विचारों व धर्म को बदलने की कोशिश की। 

कोर्ट के अनुसार, निदा खान के खिलाफ सिर्फ एक मामले में चार्जशीट दाखिल हुई है. यह मामला देवलाली कैंप थाने में दर्ज है. वहीं इस केस के सात अन्य आरोपियों के खिलाफ 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच कुल नौ एफआईआर दर्ज की गई हैं. निदा खान पर आरोप है कि उन्होंने अपनी एक सहकर्मियों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाकर उन्हें बुर्का और धार्मिक किताबें दीं. साथ ही उसके मोबाइल फोन में धार्मिक ऐप भी इंस्टॉल किए। 

कैसे खुला TCS मामला? 
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई. एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने नासिक पुलिस में शिकायत दी कि एक कंपनी में काम करने वाली हिंदू महिला रमजान के रोजे रख रही है. इसके बाद पुलिस ने गुप्त जांच शुरू की. जांच के दौरान महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर कंपनी में भेजा गया. उन्होंने अंदर की गतिविधियों पर नजर रखी और सबूत जुटाए. जांच में पुलिस के मुताबिक कुछ टीम लीडर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर कर्मचारियों पर धर्म बदलने का दबाव बना रहे थे. इसके बाद सात पुरुषों और एक महिला को गिरफ्तार किया गया. इनपुट के मुताबिक, निदा खान को भी इस मामले में आरोपी बताया गया है। 

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से PM मोदी का बड़ा ऐलान, चेन्नई में होगा बिग बैश लीग का ओपनिंग मैच

मेलबर्न 
अपनी ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दुनिया के सबसे ऐतिहासिक क्रिकेट मैदानों में से एक, मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) पहुंचे. इस खास दौरे पर उनके साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ऑस्ट्रेलियाई पुरुष क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे। 

इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच खेल सहयोग को बढ़ाने के लिए एक बेहद ऐतिहासिक फैसला लिया गया. इस साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया की मशहूर टी-20 लीग ‘बिग बैश लीग’ (BBL) का शुरुआती मैच चेन्नई में आयोजित किया जाएगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब कोई विदेशी क्रिकेट लीग भारत की धरती पर अपना मैच खेलेगी। 

यह आयोजन दिसंबर में पूरे भारत में आयोजित होने वाले सप्ताह भर के ‘जी-डे नमस्ते’  उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति, व्यवसाय और खेल से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की झलक देखने को मिलेगी।  

अन्य खेलों में भी सहयोग मजबूत करेंगे
इस दौरान संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) की ऐतिहासिकता और दोनों देशों के क्रिकेट प्रेम का जिक्र करते हुए कहा, “MCG में आकर किसी भी भारतीय के मन में दो भावनाएं एक साथ आती हैं. एक भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच का रोमांच, और दूसरा यह एहसास कि दोनों देशों में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक साझा जुनून है.” पीएम ने हल्के-फुल्के अंदाज में आगे कहा, “लेकिन आज यहां कोई ‘लास्ट ओवर फिनिश’ का प्रेशर नहीं है. आज यहां केवल खेल की खुशी है, हमारी मित्रता की गर्मजोशी है और फ्यूचर चैंपियंस की एनर्जी है। 

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ मिलकर ‘इंडिया-ऑस्ट्रेलिया स्पोर्ट कोलैबोरेशन रोडमैप’ लॉन्च किया. उन्होंने कहा कि इसके तहत हम क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में भी सहयोग मज़बूत करेंगे. इस पर खुशी जताते हुए पीएम ने कहा, “स्पोर्ट्स भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंधों की एक मजबूत कड़ी है. ऑन-फील्ड के साथ-साथ हम आउट-फील्ड पार्टनरशिप भी मजबूत करेंगे. अब हम स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी मिलकर आगे बढ़ेंगे. इस रोडमैप के तहत क्रिकेट के साथ-साथ अन्य खेलों में भी सहयोग मजबूत किया जाएगा। 

इससे पहले मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पहुंचने पर पीएम मोदी का बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया गया. इस दौरान उन्होंने मैदान पर मौजूद युवा क्रिकेटरों से मुलाकात की. पीएम मोदी ने खेल को लेकर उनका उत्साह बढ़ाया और मुस्कुराते हुए युवा खिलाड़ियों की जर्सी पर अपने ऑटोग्राफ भी दिए। 

इस दौरे की एक और खास तस्वीर तब सामने आई जब पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया के अंतरराष्ट्रीय मस्कट ‘रूबी द रू’ से मिले. पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज और स्टीव वॉ की मौजूदगी में इस मस्कट के साथ काफी देर तक मजेदार अंदाज में बातचीत की। 

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्रिकेट के गहरे जुड़ाव को देखते हुए दोनों प्रधानमंत्रियों की इस मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है, जो दोनों देशों के बीच केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और खेल के स्तर पर भी मजबूत होते रिश्तों की गवाही दे रही है। 

होर्मुज स्ट्रेट फिर संकट में! US हमलों के बाद तेल-गैस सप्लाई पर खतरा, धीमा पड़ा समुद्री ट्रैफिक

 नई दिल्ली

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर भी साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिकी सेना द्वारा लगातार दूसरे दिन ईरान के कई ठिकानों पर हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है. भारत समेत लगभग आधी दुनिया को तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस इलाके में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। 

होर्मुज से गुजरने वाला समुद्री ट्रैफिक अब लगभग रुक गया है. फिलहाल ज्यादातर जहाज सिर्फ उस उत्तरी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे ईरान ने मंजूरी दी है. वहीं ओमान और अमेरिका के समर्थन वाले दक्षिणी कॉरिडोर में जहाजों की आवाजाही बेहद कम हो गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के घंटों में सिर्फ एक अमेरिकी मंजूरी वाले सुपरटैंकर और एक ईरानी कंटेनर जहाज को स्ट्रेट पार करते देखा गया। 

डेटा फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका-ईरान के अंतरिम समझौते के बाद पिछले तीन सप्ताह में प्रतिदिन औसतन 34 कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजर रहे थे. 24 जून को यह संख्या 59 तक पहुंच गई थी. लेकिन ताजा सैन्य टकराव के बाद यह आंकड़ा तेजी से गिर गया है. युद्ध के दौरान अधिकांश दिनों में 20 से भी कम जहाज इस रास्ते से गुजर पाए। 

होर्मुज पर कंट्रोल के लिए कोई भी नुकसान उठाने को तैयार ईरान!
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, सैन्य और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ एलेक्स अलफिराज शीर्स का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए अमेरिका के साथ बड़े संघर्ष का जोखिम उठाने को भी तैयार है. उनके मुताबिक, ईरान इस जलमार्ग को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत मानता है और भविष्य की किसी भी बातचीत में इसे दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है। 

वहीं अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों पर भी दबाव है कि वे यह सुनिश्चित करें कि होर्मुज पूरी तरह ईरान के नियंत्रण वाला समुद्री क्षेत्र न बन जाए. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अंतरिम समझौता पूरी तरह खत्म तो नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा हालात में वह बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। 

अमेरिका ने ईरान में किए कई बड़े स्ट्राइक, रेलवे पुल भी ध्वस्त
इस बीच ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने दो रेलवे पुलों समेत कई ठिकानों पर हमला किया और इसे होर्मुज में जहाजों पर हमलों के जवाब के रूप में पेश करना “झूठा बहाना” है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। 

अमेरिका के हमले के बाद कतर, कुवैत और बहरीन पर हमला
उधर ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का भी दावा किया है. वहीं होर्मुज के आसपास स्थित बुशेहर, चाबहार, बंदर अब्बास, सीरिक, जास्क और अबू मूसा द्वीप समेत कई इलाकों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं. अगर दोनों देशों के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो दुनिया की सबसे अहम तेल सप्लाई रूट पर लंबा असर पड़ सकता है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों, गैस सप्लाई, शिपिंग लागत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। 

महाराष्ट्र में UCC की तैयारी तेज, मसौदा तैयार करने के लिए सरकार ने बनाई 7 सदस्यीय समिति

मुंबई 
 महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला किया है। 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए बताया कि समिति के सदस्यों के नाम भी तय कर दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समिति समान नागरिक संहिता से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का विस्तार से अध्ययन करेगी। इसके अलावा विभिन्न हितधारकों के सुझावों और आवश्यक पहलुओं पर विचार करने के बाद अपनी सिफारिशों के साथ रिपोर्ट तैयार करेगी। समिति को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए छह महीने का समय दिया गया है। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट मिलने के बाद उसके आधार पर समान नागरिक संहिता का अंतिम मसौदा तैयार किया जाएगा।

देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी नागपुर शीतकालीन विधानसभा सत्र में समान नागरिक संहिता से संबंधित विधेयक पेश करना है। सरकार की कोशिश रहेगी कि यह विधेयक विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाए और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर इसे पारित कराया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है, ताकि यूसीसी को लागू करने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े कानूनों में सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करना है। महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को राज्य में यूसीसी लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब समिति की रिपोर्ट और आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।

SC का अवैध कब्जों पर सख्त रुख, अधिकारियों की मिलीभगत पर जताई नाराजगी, पूछा- अब तक क्या कार्रवाई हुई?

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली- लखनऊ में हुए हालिया अग्निकांड की घटनाओं को लेकर कड़ा रख अपनाते हुए नगर निकायों को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में अवैध कब्जों को लेकर भी नाराजगी जताई और पूछा कि अवैध कब्जों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? अदालत ने नगर निकायों को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर जमीन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट अवमानना की कार्रवाई करेगा। 

नगर निकाय के अधिकारियों को लगाई फटकार
कोर्ट ने अवैध कब्जों के मामलों में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत पर भी कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने घटना के बाद अधिकारियों द्वारा इज्जत बचाने के लिए की जाने वाली कार्रवाइयों की भी आलोचना की। कोर्ट ने कहा कि घटनाओं के बाद सिर्फ बिल्डरों को ही गिरफ्तार किया जा रहा है, जबकि घटना वाले क्षेत्र के प्रभारी अधिकारियों को छोड़ दिया जा रहा है।  कोर्ट ने रिपोर्ट तलब करते हुए मामले की सुनवाई अगली तारीख तक स्थगित कर दी। 

दिल्ली के मालवीय नगर में बीती 3 जून को एक होटल में भीषण आग लग गई थी, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं लखनऊ में बीती 22 जून को एक व्यवसायिक परिसर में लगी आग में झुलसकर 15 लोगों की मौत हो गई थी।अदालत ने दिल्ली नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे नगर निकाय के आचरण से चिंतित हैं। 

अवैध कब्जों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने नगर निकायों को दिया अल्टीमेटम
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने अवैध कब्जों से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान  मालवीय नगर की घटना, लखनऊ में लगी आग और साकेत में इमारत गिरने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमें उम्मीद थी कि अधिकारी कुछ कार्रवाई करेंगे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अदालत ने ये भी पूछा कि मालवीय नगर की घटना के बाद दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई?

विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत और सरोजनी नगर जैसे इलाकों का सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया है और इस संबंध में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का आदेश दिया है। इस विशेषज्ञ समिति में आईआईटी दिल्ली के सिविल विभाग के दो वरिष्ठ प्रोफेसर, आईआईटी के दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी के अधिकारी और कोर्ट द्वारा नियुक्त अधिकारी भी शामिल रहेंगे। विशेषज्ञ समिति अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। 

अदालत ने पूछा- 20 मई के आदेश के बाद क्या कार्रवाई की?
अदालत ने बीती 20 मई को सुरक्षा अधिकारियों को सुरक्षा मानदंड पर निर्देश जारी करने का आदेश दिया था। साथ ही अदालत ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर भी संज्ञान लिया, जिनमें बताया गया कि गुरुग्राम की 93 प्रतिशत इमारतें अग्नि सुरक्षा ऑडिट में फेल रही हैं। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अधिकारियों को 20 मई को निर्देश दिए गए थे कि क्या करना है। लेकिन आदेश के बावजूद एनसीआर में अग्निकांड हुए। अदालत ने पूछा कि उनके आदेश के बाद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की?

अदालत ने कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। अदालत ने माना कि एमसीडी अधिकारियों की मिलीभगत से अंधाधुंध अवैध निर्माण हुए हैं। 

 

रेलवे कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! DA 50% पार होते ही बढ़ी हॉस्टल सब्सिडी, हर महीने मिलेंगे ₹8,437

नई दिल्ली

रेलवे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा को सुगम बनाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए रेल मंत्रालय ने अपनी महत्वपूर्ण योजनाओं में बड़ा बदलाव किया है। मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही ‘चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस’ (CEA) और ‘हॉस्टल सब्सिडी’ योजना के तहत मिलने वाले वित्तीय लाभ को बढ़ा दिया गया है। व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए रेल प्रशासन ने नई दरों को प्रभावी कर दिया है, जिससे दूर-दराज के आवासीय विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।

DA 50 फीसदी होने का मिला सीधा लाभ
इस कल्याणकारी योजना का मुख्य लक्ष्य उन रेलकर्मियों के वित्तीय बोझ को कम करना है, जिनके बच्चे अपने माता-पिता से दूर हॉस्टल या आवासीय संस्थानों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। वर्तमान में देश में महंगाई भत्ता (DA) बढ़कर 50 प्रतिशत के पार पहुंच चुका है।

रेलवे के नियमों के मुताबिक, जैसे ही महंगाई भत्ता इस तय सीमा को पार करता है, वैसे ही अन्य भत्तों की दरों में भी स्वतः ही संशोधन हो जाता है। इसी नियम के तहत अब हॉस्टल सब्सिडी की दरों को बढ़ाकर ₹8,437.50 प्रति माह प्रति बच्चा तय कर दिया गया है।

वास्तविक खर्च से इतर निर्धारित दर पर ही मिलेगा भुगतान
इस वित्तीय सहायता की सबसे अहम खूबी यह है कि रेल कर्मचारी को यह राशि सीधे तौर पर विभाग द्वारा तय की गई फिक्स दर के अनुसार ही मिलती है। हॉस्टल का वास्तविक खर्च चाहे इस निर्धारित रकम से कम हो या फिर ज्यादा, कर्मचारी को ₹8,437.50 प्रति महीने के हिसाब से ही भुगतान किया जाएगा। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ केवल नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे (सेवारत) रेलवे कर्मचारियों को ही मिलेगा। साथ ही, एक कर्मचारी अधिकतम अपने दो बच्चों की शिक्षा के लिए ही इस सब्सिडी का दावा करने का पात्र होगा।

नर्सरी से लेकर तकनीकी डिप्लोमा तक की पढ़ाई शामिल
शैक्षणिक दायरे की बात करें तो यह योजना नर्सरी (यानी पहली कक्षा से पहले की तीन शुरुआती क्लासेस) से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के लिए पूरी तरह वैध है। इसके अलावा, तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई छात्र 10वीं पास करने के बाद किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से आईटीआई (ITI), पॉलिटेक्निक या किसी भी इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेता है, तो ऐसे तकनीकी पाठ्यक्रमों के शुरुआती दो वर्षों के लिए भी कर्मचारी हॉस्टल सब्सिडी क्लेम कर सकते हैं।

एक साथ दो भत्तों पर रोक, वर्ष में एक बार होगा क्लेम
रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार, कोई भी कर्मचारी एक ही बच्चे के लिए चिल्ड्रंस एजुकेशन अलाउंस और हॉस्टल सब्सिडी दोनों का लाभ एक साथ नहीं उठा सकता है। हॉस्टल में रहने वाले बच्चे के लिए केवल हॉस्टल सब्सिडी ही देय होगी। इस राशि का दावा सामान्य रूप से शैक्षणिक वर्ष की समाप्ति पर साल में केवल एक बार किया जाता है। दिव्यांग बच्चों के मामले में रेलवे बोर्ड ने विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके लिए शिक्षा भत्ते की दरें सामान्य बच्चों से काफी अधिक रखी हैं।

आवेदन के लिए देने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
इस योजना का लाभ लेने के लिए रेलकर्मियों को अपने संबंधित विभाग में आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। इनमें निर्धारित प्रारूप में भरा हुआ आवेदन पत्र, स्कूल या कॉलेज द्वारा जारी प्रामाणिक सर्टिफिकेट और हॉस्टल वार्डन या मैनेजमेंट द्वारा हस्ताक्षरित वैध सर्टिफिकेट शामिल है, जो छात्र के हॉस्टल में रहने की पुष्टि करता हो। इसके साथ ही कर्मचारी को एक स्व-घोषणा पत्र (Self-Declaration) भी देना होगा, जिसमें बच्चों की सही संख्या और हॉस्टल में रहने की समयावधि की स्पष्ट जानकारी देनी होगी।

₹39,000 करोड़ का डिफेंस प्रोग्राम! एयर डिफेंस सिस्टम भी होगा बेअसर, जानें क्यों माना जा रहा है गेमचेंजर

बेंगलुरु 

भारत ने फ्रांस के साथ हाल में 114 राफेल फाइटर जेट खरीद को लेकर करार किया है. यह डील 3.25 लाख करोड़ रुपये की है. इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में पहले से ही 36 राफेल फाइटर जेट मौजूद हैं. 114 नए जेट आने से यह संख्‍या 150 तक पहुंच जाएगी. इसका मतलब यह है कि भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल जेट के 8 से भी ज्‍यादा स्‍क्‍वाड्रन होंगे. इसके साथ ही स्‍वदेशी तकनीक से तेजस फाइटर जेट भी डेवलप किए जा रहे हैं. इन सबके बीच रक्षा वैज्ञानिक ऐसा ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने में जुटे हैं, जो रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को भी बाइपास करने में सक्षम होंगे. इस स्‍टील्‍थ ड्रोन के ऑपरेशन में आने से हवाई युद्ध का स्‍वरूप बदल सकता है. घातक स्‍टील्‍थ ड्रोन प्रोजेक्‍ट पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 

भारत भविष्य के हवाई युद्ध की तैयारियों को नई गति देने के लिए अपने महत्वाकांक्षी स्टील्थ मानव रहित लड़ाकू विमान (UCAV) कार्यक्रम ‘घातक’ को नए स्वरूप में आगे बढ़ा रहा है. अब इस परियोजना को रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (RPSA) पहल के तहत विकसित किया जा रहा है. करीब 39 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला यह कार्यक्रम केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि इसे पूर्ण सैन्य अधिग्रहण कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसके सफल होने पर भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता और भविष्य के युद्ध लड़ने की रणनीति में बड़ा बदलाव आएगा। 

SWIFT बना आधार
इस परियोजना की नींव SWIFT (Stealth Wing Flying Testbed) जेट के जरिए रखी गई थी. SWIFT ने फ्लाइंग-विंग स्टील्थ डिजाइन, ऑटोनोमस फ्लाइट कंट्रोल सिस्‍टम और आंतरिक हथियार कक्ष (Internal Weapons Bay) जैसी कई अहम तकनीकों का सफल परीक्षण किया. इन तकनीकों का उद्देश्य विमान की रडार पर पहचान को बेहद कम करना और दुश्मन के अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्र में गहराई तक प्रवेश करने की क्षमता विकसित करना है. हालांकि, RPSA केवल इन तकनीकों तक सीमित नहीं है. इसका मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने पर उत्पादन और भारतीय वायुसेना के मौजूदा तथा भविष्य के लड़ाकू विमानों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करना है. यही कारण है कि इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है। 

राफेल-तेजस से ज्‍यादा खतरनाक?
इस परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर (DCPP) मॉडल को अपनाना है. इसके तहत निजी रक्षा कंपनियों को भी परियोजना के विकास और निर्माण में बड़ी भूमिका दी जाएगी. इससे उन्नत कंपोजिट सामग्री, आधुनिक एवियोनिक्स, AI और सेंसर तकनीक जैसे क्षेत्रों में निजी उद्योग की विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा. यह कदम रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी साझेदारी को मजबूत करने के साथ-साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई मजबूती देगा. राफेल और तेजस जैसे फाइटर जेट स्‍टील्‍थ नहीं हैं, जब‍कि घातक प्रोगाम के तहत डेवलप किए जाने वाले ड्रोन नेक्‍स्‍ट जेनरेशन के होंगे, जिन्‍हें रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम से इंटरसेप्‍ट करना कतई आसान नहीं होगा। 

फोर्स मल्‍टीप्‍लायर
सैन्य दृष्टि से देखा जाए तो ‘घातक’ को अकेले लड़ने वाले प्लेटफॉर्म के बजाय फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में तैयार किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल उन मिशनों में किया जाएगा, जहां पायलट वाले विमानों के लिए खतरा अधिक होता है. इनमें दुश्मन की वायु रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करना (SEAD), रणनीतिक ठिकानों पर सटीक हमले करना और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Electronic Warfare) जैसे मिशन शामिल हैं. इसकी ऑटोनोमस कैपेबिलिटी इसे न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ मिशन पूरा करने में सक्षम बनाएंगी, जिससे पायलटों की सुरक्षा भी बढ़ेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, ‘घातक’ की सबसे बड़ी ताकत इसका मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग (MUM-T) सिद्धांत होगा. इस व्यवस्था में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और भविष्य के AMCA जैसे लड़ाकू विमान कमांड प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाएंगे, जबकि उनके साथ उड़ने वाले कई UCAV सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक डिकॉय या हमला करने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेंगे. इससे एक ही मिशन में कई टार्गेट्स पर एक साथ एक्‍शन संभव होगा और दुश्मन के लिए वास्तविक खतरे की पहचान करना काफी मुश्किल हो जाएगा। 

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