EPFO का बड़ा अपडेट! UAN Activation का तरीका बदला, वेबसाइट फिर हुई शुरू; जानिए नए नियम और सुविधाएं

 नई दिल्‍ली
कई बार डेडलाइन बढ़ाने और 8 दिनों तक लगातार बंद रखने के बाद फाइनली कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (EPFO) की वेबसाइट को फिर से बहाल कर दिया गया है, लेकिन अब भी कई सर्विसेज को यूज करने में थोड़ी दिक्‍कत आ सकती है। 

EPFO ने अपने पोर्टल पर जानकारी शेयर करते हुए कहा है कि सर्विस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और मेंबर एक्‍सप्रीएंस को बेहतर बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण डेटाबेस और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है. सदस्‍य और नियोक्‍ता सर्विस सही तरीके से शुरू कर दी गई हैं और उपयोग के लिए उपलब्‍ध हैं। 

EPFO ने आगे कहा कि क्‍लेम और सर्विस रिक्वेस्‍ट को चरणबद्ध और सुनियोजित तरीके से प्रॉसेस किया जाएगा. साथ ही शुरुआती 2 सप्ताह की अवधि के दौरान सटीकता तय करने के लिए अतिरिक्त वेरिफिकेशन और अथेंटिफिकेशन जांच भी की जाएगी। 

EPFO ने स्पष्ट किया है कि अब UAN एक्टिवेशन और नया UAN जनरेट करने की सुविधा पूरी तरह UMANG App पर शिफ्ट कर दी गई है, यानी अगर किसी कर्मचारी को अपना UAN एक्टिवेट करना है या पहली बार UAN बनवाना है, तो उसे अब EPFO पोर्टल की बजाय UMANG ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इस प्रक्रिया में आधार आधारित Face Authentication (FAT) का उपयोग किया जाएगा, जिससे पहचान की पुष्टि अधिक सुरक्षित और आसान होगी।

अगर आपका UAN अभी तक एक्टिव नहीं है, तो सबसे पहले अपने मोबाइल में UMANG App डाउनलोड करें। इसके बाद ऐप खोलकर EPFO Services में जाएं। यहां “UAN Services Through Face Auth” के अंदर “UAN Activation” विकल्प चुनें। फिर स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें। इसके बाद आपका UAN सफलतापूर्वक एक्टिवेट हो जाएगा।

पहले EPFO पोर्टल के जरिए सीधे नया UAN बनाया जा सकता था, लेकिन अब यह सुविधा भी वेबसाइट से हटा दी गई है। अगर किसी कर्मचारी का PF अकाउंट है लेकिन अभी तक UAN नहीं बना है, तो वह UMANG App में “UAN Allotment and Activation” विकल्प चुनकर अपना नया UAN प्राप्त कर सकता है। इसके लिए मोबाइल नंबर सत्यापित करना होगा, आवश्यक सदस्य विवरण भरना होगा और आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करना होगा।

नए EPFO पोर्टल पर UAN Retrieval की प्रक्रिया पहले से कहीं आसान कर दी गई है। अगर आपको अपना UAN याद नहीं है, तो पोर्टल पर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करें और मांगे गए पहचान या पते से जुड़े दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करके आप आसानी से अपना UAN दोबारा प्राप्त कर सकते हैं।

EPFO ने यह भी स्पष्ट किया है किडेथ क्लेम यानी सदस्य की मृत्यु के बाद क्लेम करने की सुविधा अभी भी यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर उपलब्ध रहेगी। नामांकित व्यक्ति (Nominee) या लाभार्थी पेंशन और अन्य दावों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी का आधार से लिंक मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए और बैंक खाते की जानकारी तैयार रखनी होगी। आवेदन के दौरान मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक या कैंसिल चेक और जन्म तिथि का प्रमाण जैसे दस्तावेज PDF फॉर्मेट में अपलोड करने होंगे। हर फाइल का साइज 2 MB से कम होना चाहिए और फाइल के नाम में स्पेस नहीं होना चाहिए।

UMANG (Unified Mobile Application for New-age Governance) भारत सरकार का आधिकारिक मोबाइल ऐप है, जिसके जरिए नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर कई सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। EPFO की अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं भी अब इसी ऐप के माध्यम से उपलब्ध हैं। इससे कर्मचारियों को EPFO कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी और अधिकांश काम घर बैठे मोबाइल से ही पूरे किए जा सकेंगे।

EPFO के नए पोर्टल और UMANG ऐप के जरिए सेवाओं को अधिक डिजिटल, सुरक्षित और आसान बनाने की कोशिश की गई है। अगर आप EPF सदस्य हैं, तो अब UAN से जुड़ी सेवाओं के लिए UMANG ऐप का इस्तेमाल करना ही सबसे आसान और आधिकारिक तरीका होगा।

ईपीएफओ ने दी ये सलाह
सदस्यों और नियोक्ताओं से अनुरोध है कि वे धैर्य रखें, क्योंकि इस अवधि के दौरान क्‍लेम्‍स और कुछ सेवाओं के प्रॉसेस में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है. सदस्यों से यह भी अनुरोध है कि वे व्यस्त समय के दौरान ऑनलाइन सेवाओं का बार-बार उपयोग करने या बार-बार अनुरोध करने से बचें. EPFO अपने सभी सदस्‍यों के धैर्य और सहयोग की सराहना करता है और अपने सभी सदस्‍यों के लिए सेवाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। 

क्‍या-क्‍या चीजें हुईं अपडेट? 
ईपीएफओ ने सिर्फ इतनी जानकारी दी है कि सभी सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर दिया गया है. हालांकि, उसने इस चीज की जानकारी नहीं दी कि क्‍या-क्‍या नई चीजें शुरू हुई हैं या क्‍लेम या अन्‍य प्रॉसेस अब कितना आसान हो जाएगा? सिर्फ इतना बताया गया है कि मेंटेनेस काम और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड किया गया है। 

एक हफ्ते तक बंद थी साइट 
ईपीएफओ की वेबसाइट पिछले 7 दिनों से बंद की गई थी. ईपीएफओ का कहना है कि यह सर्विस इसलिए बंद थी, क्‍योंकि वह जरूरी डेटा और सॉफ्टवेयर को अपग्रेड कर रहा था, ताकि सदस्‍यों को बेहतर सुविधाएं मिल सके।  

गौरतलब है कि शुरुआत में, ईपीएफओ ने कहा था कि मेंटेनेस के लिए 28 जून को समाप्त हो जाएगा और सेवाएं 29 जून को फिर से शुरू हो जाएंगी. बाद में उसने समयसीमा में संशोधन किया और डेडलाइन को 1 जुलाई की रात 11:59 बजे तक बढ़ा दिया, और अंत में घोषणा की कि सेवाएं 3 जुलाई, 2026 को फिर से शुरू हो जाएंगी, लेकिन आज दोपहर बाद ये सेवाएं बहाल की गई हैं। 

अगला प्रधानमंत्री कौन? अमित शाह, योगी आदित्यनाथ या कोई और… सर्वे में सामने आई बड़ी तस्वीर

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साल 2014 से प्रधानमंत्री के तौर पर देश की कमान संभाल रहे हैं। हाल ही में वह इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह हमेशा चर्चा का मुद्दा रहता है कि भारतीय जनता पार्टी में उनके बाद इस पद को कौन संभाल सकता है। हालांकि, भाजपा नेता पीएम मोदी के ही लगातार नेतृत्व की बात करते रहे हैं। हाल ही में उनके उत्तराधिकारी को लेकर एक पोल किया गया था।

लाइव हिन्दुस्तान की तरफ से जून में पोल किया गया था, जिसमें पीएम मोदी के संभावित उम्मीदवार को लेकर जनता की राय पूछी गई थी। आंकड़े बताते हैं कि इस रेस में सबसे आगे उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चल रहे हैं। पोल में शामिल आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने उनके नाम का चुनाव किया है।

क्या रहे नतीजे
पोल के मुताबिक, 58 फीसदी लोगों ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर मुहर लगाई। जबकि, 22 प्रतिशत लोग केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समर्थन में थे। 5 प्रतिशत लोगों ने नितिन गडकरी और 3 फीसदी लोगों ने कृषि मंत्री शिवराज सिंह के नाम का विकल्प चुना। जबकि, 9 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने किसी और नेता के विकल्प का चुनाव किया।

PM मोदी के नाम रिकॉर्ड
मोदी 10 जून को भारत के निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर बने रहने वाले व्यक्ति बन चुके हैं। वह लगातार 4,399 दिन से इस पद पर हैं और उन्होंने पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नेहरू 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री रहे थे।

मोदी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में भी 9000 से भी अधिक दिन तक कार्य कर चुके हैं। उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में नौ जून 2024 को शपथ ली थी।

बने रहेंगे पीएम
बीते साल अप्रैल में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीएम मोदी के रिटायरमेंट की अटकलों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद भी मोदी ही देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। उन्होंने कहा था, ‘यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के बारे में सोचने का सही समय नहीं है, क्योंकि 2029 में मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।’

योगी आदित्यनाथ का क्या था जवाब
बीते साल पीटीआई से बातचीत में भावी पीएम उम्मीदवार को लेकर आदित्यनाथ से सवाल किया गया था। तब उन्होंने कहा था, ‘देखिए, मैं एक राज्य का मुख्यमंत्री हूं। पार्टी ने मुझे उत्तर प्रदेश की जनता के लिए यहां लगाया है और राजनीति मेरा फुल टाइम जॉब नहीं है। फिलहाल, हम यहां काम कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं योगी हूं।’

राजनाथ सिंह ने दिया इस्तीफा तो मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी? अमित शाह के प्रमोशन की भी चर्चा तेज

नई दिल्ली

केंद्र सरकार में कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर सरकार की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है। उत्तर प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में होने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ बड़े फैसले ले सकते हैं। इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इस नई कैबिनेट में अमित शाह गुट के नेताओं को अधिक जगह मिल सकती है।

आधिकारिक तौर पर केंद्र सरकार में नंबर-2 की हैसियत रखने वाले राजनाथ सिंह के कैबिनेट से इस्तीफा देने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा की तरफ से वह अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जा सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी की नई टीम लगभग तैयार है। कल रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बड़ी बैठक की है। अब सबकी नजरें संभावित कैबिनेट विस्तार और विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। यह भी चर्चा है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कुछ केंद्रीय मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति बनाने की क्यों अटकलें?
2027 में मौजूदा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। इसी साल उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। यह राज्य भाजपा के लिए काफी अहम है। इसलिए बीजेपी देश के अगले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर राजनाथ सिंह को आगे कर सकती है। राजनाथ सिंह को बीजेपी के सबसे अनुभवी और सर्वमान्य नेताओं में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और मौजूदा रक्षा मंत्री तक का उनका राजनीतिक सफर उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए एक मजबूत दावेदार के तौर पर पेश करता है।

लखनऊ सीट से कौन लड़ेगा चुनाव?
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि अगर राजनाथ सिंह राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाते हैं, तो उनकी पारंपरिक लखनऊ लोकसभा सीट खाली हो सकती है। उनके बेटे नीरज सिंह के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।

अमित शाह को भी मिलेगा प्रमोशन?
कैबिनेट फेरबदल की संभावना के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर भी चर्चा तेज है। कुछ जानकारों का मानना ​​है कि आगामी फेरबदल में उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है। अमित शाह अभी सरकार, संगठन और प्रशासनिक फैसलों में बहुत अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसलिए उन्हें उप-प्रधानमंत्री बनाया जाए या नहीं, इससे उनपर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। हां, अगर अमित शाह को उप-प्रधानमंत्री बनाया जाता है तो इसे भविष्य के नेतृत्व को लेकर बीजेपी की तरफ से एक अहम राजनीतिक संकेत माना जाएगा।

8th Pay Commission: न्यूनतम ₹69,000 सैलरी की मांग क्यों? HRA और फैमिली फैक्टर का पूरा गणित समझिए

नई दिल्ली

8वें वित्त आयोग के पास कर्मचारी और पेंशनर्स से जुड़े संगठन लगातार सुझाव दे रहे हैं। संगठनों की तरफ से जो प्रमुख मांगें अधिक फिटमेंट फैक्टर के अलावा है वो एचआरए, फैमिली काउंच, डीए और टीटीपीए को बढ़ाना है। इन संगठनों का कहना है कि लेवल 1 और 2 के कर्मचारियों को दिल्ली जैसे शहर में मौजूदा पे स्केल पर अपनी जरूरतों को पूरा करने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। आइए जानते हैं कि क्या मांग की जा रही है?

क्या कहना है फेडरेशन का? (8th Pay Commission demands)
इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार आल इंडिया एनपीएस एप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसीडेंट मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा समय में एंट्री लेवल पर बेसिक पे 18000 रुपये का है। इसमें एचआरए 5400 (दिल्ली जैसे शहरों के लिए) है। और टीटीपीए 2800 रुपये (जिसमें 60 प्रतिशत डीए बढ़ोतरी) मिल रहा है। मनजीत सिंह पटेल का कहना है कि मौजूदा 5400 रुपये एचआरए और 2800 रुपये टीटीपीए दिल्ली जैसे शहर के लिए पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि संगठन लगातार फैमिली यूनिट को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

8th pay commission: फिटमेंट फैक्टर्स भी बढ़ाने पर है जोर
36% HRA की मांग (8th Pay Commission HRA)

पटेल का कहना है कि मौजूदा खर्च को देखते हुए कर्मचारियों का एचआरए कम से कम 36 प्रतिशत कर देना चाहिए। वहीं, फैमिली काउंट 4.4 होना चाहिए। इसके अलावा 8वें वित्त आयोग से लेवल एक कर्मचारी के लिए कम से कम 9000 रुपये टीपीटीए की मांग की गई है। उनका कहना है कि 2.1 फिटमेंट फैक्टर रखने पर सैलरी में कम से कम 65 प्रतिशत का इजाफा होगा।

25 प्रतिशत डीए होने पर बेसिक पे के साथ विलय (8th Pay Commission DA)

AINPSEF ने पे कमीशन से डीए के 25 प्रतिशत होने पर बेसिक पे के साथ मर्जर की डिमांड की है। इसके अलावा इस संगठन ने 8वें पे कमीशन से फैमिली यूनिट को बढ़ाकर 5 करने की डिमांड की है। अगर ऐसा हुआ तो बेसिक कर्मचारियों का कम से कम 69000 रुपये का हो जाएगा। बता दें, लगभग सभी संगठनों की तरफ से 8वें वित्त आयोग से फैमिली काउंट को बढ़ाने की मांग हुई है।

मौजूदा समय में 3 है फैमिली काउंट (8th Pay Commission family Count)

7वें वित्त आयोग ने सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारियों के लिए फैमिली काउंट को तीन रखा था। इसमें कर्मचारी के लिए 1.0, पत्नी के लिए 0.8 और दो बच्चों के लिए 0.6-0.6 यूनिट था। AINPSEF ने फैमिली यूनिट को 4.4 करने की मांग की गई है। इसमें माता-पिता के लिए भी 0.7-0.7 यूनिट जोड़ने की डिमांड की गई है।

फैमिली यूनिट बढ़ने से क्या लाभ

अगर फैमिली यूनिट को 8वें पे कमीशन की तरफ से 4.4 किया गया तब की स्थिति में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 2.05 गुना बढ़ेगी।

कैसे HRA बढ़ने पर बढ़ जाएगी सैलरी?

मौजूदा समय में बेसिक सैलरी 18000 रुपये है।

डीए 58 प्रतिशत जोकि 10800 रुपये होता है।

एचआरए 30 प्रतिशत जोकि 5400 रुपये होता है।

टीपीटीए 1800 + 58% = 1800 + 1800 =2880 रुपये होता है।
AINPSEF ने 2.1 फिटमेंट फैक्टर रहने की स्थिति में 37800 रुपये बेसिक पे की बात कही है।

इसमें 2 प्रतिशत डीए को जोड़ ले तो 756 रुपये महंगाई भत्ता होता है। एचआरए को अगर 36 प्रतिशत जोड़ लिया जाए तो यह 13608 रुपये होगा। बता दें, टीपीटीएए 9000 रुपये + 2% = 9180 रुपये होगा। यानी कर्मचारियों की सैलरी 37800 रुपये से बढ़कर 8वें वित्त आयोग के लागू होने के बाद 61344 रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ओवर आल कुल 65 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा।

Crypto पर RBI की बड़ी चेतावनी, कहा- भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बन सकता है बड़ा खतरा; सरकार से की अहम मांग

नई दिल्ली
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सरकार को आगाह किया है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा हैं. आरबीआई का मानना है कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में डिजिटल करेंसी को कानूनी मान्यता बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए. बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने आरबीआई ने यह बात मजबूती से रखी है। 

देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा
समिति की बैठक में ‘वर्चुअल डिजिटल एसेट और आगे की राह’ विषय पर चर्चा हुई. इस दौरान आरबीआई के अधिकारियों ने साफ किया कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंचा सकता है. केंद्रीय बैंक ने चिंता जताई कि इस डिजिटल पैसे का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने (टेरर फंडिंग) और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसे खतरनाक और गैरकानूनी कामों में आसानी से किया जा सकता है। 

विदेशी कंपनियों पर लगाम कसना मुश्किल
आरबीआई ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह बताया कि क्रिप्टो करेंसी का व्यापार ज्यादातर भारत के बाहर सक्रिय विदेशी कंपनियों (ऑफशोर एंटिटीज) के जरिए होता है. इन बाहरी कंपनियों पर भारतीय रेगुलेटरी संस्थाओं के लिए नजर रखना और उन पर नियंत्रण पाना बेहद मुश्किल है. अपनी बात को मजबूत करने के लिए आरबीआई ने वैश्विक स्तर के उदाहरण भी दिए. केंद्रीय बैंक ने बताया कि चीन और कतर जैसे देशों ने इस तरह की सभी वित्तीय गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि यूरोपीय देशों ने इसे बहुत ही कड़े नियमों के दायरे में रखा हुआ है। 

आईसीएआई (ICAI) ने दिया कानून का समर्थन
इसी संसदीय समिति के सामने देश की सबसे बड़ी चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्था, ‘इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICAI) ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी. आईसीएआई ने कहा कि वह वर्चुअल डिजिटल एसेट के लिए एक मजबूत और स्पष्ट कानून बनाने के पक्ष में है. संस्था ने भरोसा दिया कि वे सरकार और निवेशकों की मदद के लिए एक खास वित्तीय और अकाउंटिंग फ्रेमवर्क तैयार कर सकते हैं। 

पारदर्शिता बढ़ाने पर ज़ोर
आईसीएआई ने सुझाव दिया कि वे विभिन्न प्रकार की डिजिटल एसेट्स के आर्थिक व्यवहार पर गहन रिसर्च कर सकते हैं. इस रिसर्च के आधार पर वे ऐसा गाइडेंस नोट या नियम तैयार करेंगे, जिससे कंपनियों की बैलेंस शीट और वित्तीय रिपोर्ट में क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन को पारदर्शिता से दिखाया जा सके. इससे देश में टैक्स चोरी रुकेगी और डिजिटल संपत्ति का सही लेखा-जोखा मिल सकेगा। 

संसदीय समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने बैठक के बाद पुष्टि की कि रिजर्व बैंक देश में क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी दर्जा देने के पूरी तरह खिलाफ है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति फिलहाल आयकर कानून के तहत डिजिटल एसेट्स के ऑडिट और टैक्स से जुड़े पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। 

कांग्रेस को बड़ा झटका: पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने दिया इस्तीफा

जीतू पटवारी और राहुल गांधी पर लगाए गंभीर आरोप, प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर उठाए सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने करीब 30 साल तक संगठन से जुड़े रहने के बाद अपने पद और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भेजा है। इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जीतू पटवारी और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए।

प्रदेश नेतृत्व पर साधा निशाना

राकेश सिंह यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस में समर्पित कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उनका कहना है कि संगठन में फैसले एकतरफा लिए जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जा रही। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा व्यवस्था में जनहित के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से काम करना संभव नहीं रह गया है।

जीतू पटवारी पर लगाए गंभीर आरोप

यादव ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सके। उन्होंने पटवारी पर जमीनों की दलाली जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक साक्ष्य पेश नहीं किया है।

राहुल गांधी पर भी की टिप्पणी

राकेश सिंह यादव ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश नेतृत्व को लेकर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं कर रहा और इससे संगठन लगातार कमजोर हो रहा है।

मीडिया डिबेट और संगठन की कार्यशैली पर उठाए सवाल

यादव ने कहा कि पार्टी द्वारा कार्यकर्ताओं को मीडिया डिबेट से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे वे जनता के सामने अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे राजनीति जनसेवा के उद्देश्य से करते हैं, न कि व्यक्तिगत लाभ के लिए।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार

राकेश सिंह यादव के इस्तीफे और उनके आरोपों ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल, उनके आरोपों पर प्रदेश कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, सुनवाई में केतन-सिया का भी हुआ जिक्र

इंदौर 

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि सोनम जमानत पर पहले ही रिहा हो चुकी है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर गंभीर सवाल उठते हैं, जिनकी आगे सुनवाई की आवश्यकता है।

मेघालय सरकार का तर्क- सोनम के फरार होने का खतरा,
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सोनम पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं। पहले भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं और यह मामला केवल गिरफ्तारी के दौरान हुई एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती का नहीं है। मेघालय सरकार का तर्क है कि यदि सोनम बाहर रही तो उसके फरार होने का खतरा बना रहेगा।

सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए। उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?

मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
बता दें कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट व्यापारी राजा रघुवंशी की हत्या के मामले में मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को सही ठहराया गया था। सोनम पर मई 2025 में अपने पति राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान हत्या का मुख्य आरोपी होने का आरोप है।

हाईकोर्ट से भी राज्य सरकार की अपील खारिज
वहीं, मेघालय हाईकोर्ट ने 29 जून को शिलांग अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को जमानत दी गई थी। अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया था।

जस्टिस डब्ल्यू. डिएंगडोह की एकल पीठ ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायिक) शिलांग के अप्रैल 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को खारिज कर दिया था। इस आदेश में गिरफ्तारी में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाए जाने के बाद सोनम को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट ने 10 जून को दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

शिलांग कोर्ट ने सोनम को जमानत देते समय कहा था कि जांच अधिकारियों ने गिरफ्तारी के आधार सही तरीके से नहीं बताए, जिससे आरोपी के बचाव के अधिकार पर असर पड़ा।

सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
सोनम रघुवंशी की तरफ से पेश वकील ने कहा कि गिरफ्तारी के समय उन्हें न तो वकील मुहैया कराया गया और न ही गिरफ्तारी के स्पष्ट आधार बताए गए. उनका दावा था कि पुलिस ने सिर्फ एक खाली प्रोफॉर्मा दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि अगर यह मुद्दा इतना अहम था तो इसे पहले क्यों नहीं उठाया गया. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जमानत सिर्फ तकनीकी आधार पर दी गई है, तो क्या कानून पुलिस को दोबारा गिरफ्तारी से रोकता है?

सोनम अगली सुनवाई तक जमानत पर रहेंगी
सोनम के वकील ने यह भी दलील दी कि मामले में अब कोई बरामदगी बाकी नहीं है. उन पर पहले से ही सख्त शर्तें लागू हैं और वह शिलॉन्ग में रह रही हैं, इसलिए सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका नहीं है। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है. अदालत ने यह भी माना कि सोनम लंबे समय से जेल में थीं और कानून का सिद्धांत है कि “जमानत नियम है और जेल अपवाद.” हालांकि कोर्ट ने साफ किया कि मेघालय सरकार की जमानत रद्द करने की मांग पर अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल सोनम की जमानत बरकरार रहेगी। 

JCB ड्राइवर की बहादुरी: भयंकर बाढ़ में फंसे परिवार की बचाई जान

छोटी बच्ची, माँ और पिता को सुरक्षित बाहर निकालकर पेश की मानवता की मिसाल

भयंकर बाढ़ के बीच एक JCB ड्राइवर ने अद्भुत साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक परिवार की जान बचा ली। तेज़ बहाव और चारों ओर फैले पानी के बीच एक घर में एक छोटी बच्ची अपने माता-पिता के साथ फंसी हुई थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था।

ऐसे कठिन समय में JCB ड्राइवर ने अपनी जान की परवाह किए बिना मशीन को बाढ़ के पानी के बीच पहुँचाया और सावधानीपूर्वक परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सबसे पहले छोटी बच्ची को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया गया, जिसके बाद उसकी माँ और पिता को भी सकुशल रेस्क्यू कर लिया गया।

इस साहसिक बचाव अभियान ने साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में हिम्मत, समझदारी और मानवता सबसे बड़ी ताकत होती है। स्थानीय लोगों ने JCB ड्राइवर की बहादुरी की जमकर सराहना की और उसे एक वास्तविक हीरो बताया।

मुख्य  बिंदु

  • भयंकर बाढ़ में एक परिवार घर के अंदर फंस गया था।
  • JCB ड्राइवर ने जोखिम उठाकर रेस्क्यू अभियान चलाया।
  • छोटी बच्ची और उसके माता-पिता को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
  • स्थानीय लोगों ने ड्राइवर की बहादुरी और मानवता की प्रशंसा की।

यह घटना हमें सिखाती है कि आपदा के समय साहस और मानवता से बढ़कर कुछ नहीं होता। JCB ड्राइवर का यह वीरतापूर्ण कार्य लंबे समय तक लोगों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों के 500 मीटर दायरे में नहीं बिकेगा Sting एनर्जी ड्रिंक

 मुंबई
 महाराष्ट्र में स्कूल परिसर के अंदर स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में भी इन ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। मॉनसून सत्र के दौरान, श्रीगोंडा-नगर निर्वाचन क्षेत्र के बीजेपी विधायक विक्रम पचपुते ने यह सवाल उठाया था। इसके बाद, मंत्री नरहरि झिरवल ने पूरे राज्य में स्कूल क्षेत्रों में स्टिंग ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए।

स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स का स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, भले ही वे नियमों का पालन करते हों, लेकिन बच्चे इनकी लत का शिकार हो सकते हैं। बोतल पर ही लिखा होता है कि यह ड्रिंक छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त नहीं है। इसे छोटे बच्चों को नहीं बेचा जाना चाहिए।

विक्रम पचपुते ने विधानसभा में कहा कि स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स शराब से भी ज़्यादा हानिकारक हैं। यह मानते हुए कि स्कूल परिसर में स्टिंग बेची जा रही है, मंत्री नरहरि झिरवल ने सदन को आश्वासन दिया कि स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों के साथ-साथ स्टिंग एनर्जी ड्रिंक्स पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।.

एफएसएसएआई ने गलत ब्रांडिंग और भ्रामक दावों के लिए छह एनर्जी ड्रिंक ब्रांडों- रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, पेप्सिको की एड्रेनालाईन रश एनर्जी ड्रिंक, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की कैम्पा एनर्जी ड्रिंक गोल्ड बूस्ट, स्टिंग एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी और कोका-कोला समर्थित मॉन्स्टर एनर्जी- को नोटिस जारी किया था।

‘एनर्जी ड्रिंक’ की कोई खाद्य श्रेणी
FSSAI का कहना है कि भारत में फिलहाल “एनर्जी ड्रिंक” की कोई आधिकारिक खाद्य श्रेणी तय नहीं है, फिर भी कंपनियां अपने उत्पादों को इसी नाम से बेच रही हैं. इसके अलावा “शरीर और दिमाग को ऊर्जा देता है”, “फोकस बढ़ाता है”, “कमजोरी दूर करता है” और “एनर्जी लेवल बढ़ाता है” जैसे दावों पर भी नियामक ने आपत्ति जताई है. उसके मुताबिक, खाद्य उत्पादों के लिए इस तरह के साइंटिफिक दावे कानून के अनुरूप नहीं हैं। 

एनर्जी ड्रिंक थकान दूर नहीं थोड़ी देर के लिए दबा देती है!
स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय से एनर्जी ड्रिंक को लेकर चिंता जताते रहे हैं. उनका कहना है कि इनमें मौजूद कैफीन और चीनी की अधिक मात्रा शरीर को वास्तविक ऊर्जा नहीं देती, बल्कि कुछ समय के लिए थकान को दबा देती है. अधिक मात्रा में या लगातार इनका सेवन करने से बच्चों और युवाओं में दिल की समस्या, नींद की समस्या, बेचैनी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। 

केतन हत्याकांड में बड़ा खुलासा, सिया-चेतन कथित तौर पर ‘कोड वर्ड’ में करते थे बात; दूसरा मोबाइल जब्त

 पुणे
केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. अब पुलिस ने अदालत से मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. हालांकि कोर्ट ने इसे नामंजूर करते हुए दोनों आरोपियों को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान पता चला है कि दोनों आपस में बातचीत के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे, जिनका मतलब और उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। 

मामले की जानकारी देते हुए जांच अधिकारी मनोज पवार ने बताया कि जांच के दौरान चेतन से घटनाक्रम की आमने-सामने पड़ताल की गई, जबकि सिया से उसके पासपोर्ट और अन्य पहलुओं पर पूछताछ की गई. इसी बीच गुरुवार सुबह सिया का दूसरा मोबाइल फोन भी जब्त किया गया. इससे पहले दोनों आरोपियों के एक-एक मोबाइल फोन पहले ही पुलिस अपने कब्जे में ले चुकी थी। 

पुलिस के अनुसार, डिजिटल जांच में सामने आया है कि सिया और चेतन बातचीत के दौरान कोड वर्ड्स का इस्तेमाल करते थे. अब दूसरे मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के जरिए इन कोड वर्ड्स का मतलब, उनके इस्तेमाल का उद्देश्य और हत्या की साजिश से उनका संबंध पता लगाया जाएगा. इसी वजह से दोनों आरोपियों की पुलिस कस्टडी तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई है। 

सरकारी पक्ष की ओर से पेश वकील ने बताया कि नया मोबाइल मिलने के बाद दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है. उनका कहना था कि जिन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया गया, उनका सही अर्थ केवल सिया और चेतन ही बता सकते हैं. इसलिए जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोनों का आमना-सामना कराना आवश्यक है। 

पुलिस ने सीन किया था री-क्रिएट
इससे पहले गुरुवार सुबह पुलिस सिया गोयल को पुणे के लुल्लानगर स्थित उस स्थान पर भी लेकर गई, जहां उसने और चेतन ने कथित तौर पर लोहागढ़ किले से केतन अग्रवाल को धक्का देने की रिहर्सल की थी. पुलिस का दावा है कि मई महीने में दोनों ने हत्या की योजना को अंजाम देने से पहले वहां अभ्यास किया था. सिया ने मौके पर उस स्थान की पहचान भी की। 

जांच के दौरान पुलिस ने सिया के घर से घटना वाले दिन पहने गए कथित कपड़े भी बरामद किए हैं. इसके अलावा दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने के लिए भी अदालत से अनुमति मांगी गई है. पुलिस का कहना है कि तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण जारी है और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है. पुलिस के अनुसार, प्रेम संबंध में बाधा बनने के कारण केतन अग्रवाल की कथित तौर पर हत्या की गई थी। 

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