सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, 2 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम, चांदी भी टूटी

मुंबई 
इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार को सोने की कीमतों में 1.1% की गिरावट दर्ज की गई और स्पॉट गोल्ड 4,406.81 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। यह दो महीने का सबसे निचला स्तर है। स्पॉट सिल्वर भी 1.7% टूटकर 73.34 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इसकी वजह अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए नए हमले हैं, जिससे क्रूड ऑयल के दाम बढ़ गए हैं। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर अनिश्चितता और गहरा गई है।

अमेरिकी हमलों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान में एक सैन्य ठिकाने पर नए हमले किए हैं, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बताया गया था। यह घटना तब हुई जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी रिपोर्ट को खारिज कर दिया, जिसमें दावा किया गया था कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात बहाल करने के लिए समझौता हो गया है।

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की एक वजह डॉलर भी है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है, जिससे डॉलर में मूल्यवान सोना अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए महंगा हो गया है। अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो प्लैटिनम: 0.5% गिरकर 1,909.15 डॉलर और पैलेडियम 0.7% कमजोर होकर 1,381.64 डॉलर पर आ गया।

फेड अधिकारियों के बयान से बढ़ी बेचैनी
फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक ने कहा कि केंद्रीय बैंक को फिलहाल कम अवधि के ब्याज दरों में बदलाव नहीं करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ, ईरान संघर्ष और एआई से जुड़े निवेश से दबाव बढ़ रहा है, और जरूरत पड़ने पर दरों में बढ़ोतरी संभव है। वहीं, फेड के फिलिप जेफर्सन ने कहा कि महंगाई के जोखिमों को देखते हुए मौजूदा मौद्रिक नीति उपयुक्त है। बाजार अब आज देर शाम जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा का इंतजार कर रहा है, जो Fed की आगे की नीति दिशा का संकेत देगा।

गोल्ड की रेंज और अहम सपोर्ट
कमोडिटी एक्सपर्ट और एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, कॉमेक्स गोल्ड फिलहाल 4,500–4,540 डॉलर के दायरे में सिमट रहा है। उन्होंने बताया गोल्ड के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 4,560–4,600 डॉलर है। इसके ऊपर सस्टेन होने पर तेजी आ सकती है और कीमतें 4,660–4,700 डॉलर तक जा सकती हैं। दूसरी ओर गोल्ड पर तत्काल सपोर्ट 4,500–4,460 डॉलर प्रति औंस है और इस स्तर के नीचे जाने पर गिरावट बढ़कर 4,400–4,350 डॉलर तक आ सकती है। 

Gift Nifty में भारी गिरावट से बढ़ी टेंशन, क्या कल शेयर बाजार में मचेगी बड़ी हलचल?

नई दिल्ली 
भारत का शेयर बाजार शुक्रवार 29 मई को भारी दबाव के साथ खुल सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) फ्यूचर्स करीब 2% टूटकर 23,580 के स्तर पर पहुंच गया, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय बाजार में गैप-डाउन ओपनिंग देखने को मिल सकती है। गुरुवार को बकरीद के कारण घरेलू शेयर बाजार बंद था, लेकिन वैश्विक बाजारों में आई तेज हलचल का असर अब शुक्रवार को भारतीय बाजार पर दिखाई देने की संभावना है।

दरअसल, हालात तब और बिगड़ गए, जब अमेरिका ने ईरान के एक सैन्य ठिकाने पर ताजा हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी एयरबेस पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री रास्तों के आसपास तनाव काफी बढ़ गया है। कुवैत में भी ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3% से ज्यादा उछलकर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 91 डॉलर के ऊपर चला गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल महंगाई बढ़ा सकता है और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स 1.4% गिरा, दक्षिण कोरिया का KOSPI 1% टूटा और जापान का निक्केई भी लाल निशान में बंद हुआ। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ना लगभग तय माना जा रहा है।

हालांकि, भारतीय बाजार ने बुधवार को अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया था। सेंसेक्स 142 अंक गिरकर 75,868 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी मामूली 7 अंक टूटकर 23,907 पर बंद हुआ। दिलचस्प बात यह रही कि India VIX यानी बाजार का डर सूचकांक 6% गिरा, जिससे यह संकेत मिला कि अभी घबराहट पूरी तरह हावी नहीं हुई है। लेकिन अब ताजा भू-राजनीतिक घटनाओं के बाद बाजार का मूड बदल सकता है।

तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल निफ्टी के लिए 23,835–23,922 का स्तर बेहद अहम रहेगा। अगर बाजार इस दायरे के नीचे फिसलता है, तो कमजोरी और बढ़ सकती है। वहीं, अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर टिकता है, तो आने वाले दिनों में 24,200–24,300 तक की तेजी भी संभव है।

अब निवेशकों की नजर पूरी तरह मिडिल-ईस्ट (Middle East) के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेंगी। अगर अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे सकता है।

PF का 100% पैसा अब UPI से निकाल सकेंगे? जानिए EPFO 3.0 के नए नियम

नई दिल्ली 
देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO जल्द ही एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। EPFO 3.0 के तहत PF निकालने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाली है। अब तक PF का पैसा निकालने के लिए लंबी प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और कई दिनों का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सदस्य सीधे UPI के जरिए अपने बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इससे न केवल पेपरवर्क कम होगा, बल्कि PF निकालने में लगने वाला समय भी काफी घट जाएगा। आइए इसके बारे में जरा विस्तार से समझते हैं।

सरकार और EPFO का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाना है, ताकि कर्मचारियों को अपने ही पैसे के लिए बार-बार ऑफिस के चक्कर न लगाने पड़ें। खास बात यह है कि इस सुविधा की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है और इसे जल्द शुरू किया जा सकता है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट घोषित नहीं की गई है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर EPFO सदस्य अपने खाते से कितना पैसा निकाल पाएंगे? नई व्यवस्था के अनुसार सदस्य अपने कुल EPF बैलेंस का लगभग 50% से 75% तक हिस्सा निकाल सकेंगे। हालांकि, पूरा पैसा निकालने की अनुमति हर स्थिति में नहीं होगी। EPFO के नियमों के मुताबिक कम से कम 25% राशि खाते में बनी रहना जरूरी होगा, ताकि भविष्य के लिए एक सुरक्षा फंड बचा रहे, यानी अगर किसी सदस्य के खाते में 4 लाख रुपये हैं, तो वह अधिकतम करीब 3 लाख रुपये तक निकाल सकता है, जबकि कम से कम 1 लाख रुपये खाते में रहने होंगे।

इसके अलावा EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा भी बढ़ा दी है। पहले जहां केवल 1 लाख रुपये तक का क्लेम जल्दी सेटल होता था, अब यह सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है। इसका मतलब यह है कि मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने और बनाने जैसी जरूरतों के लिए सदस्य अब ज्यादा रकम कम समय में निकाल पाएंगे। कई मामलों में पैसा सिर्फ 3 दिनों के भीतर खाते में पहुंच सकता है।

केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में बताया कि UPI आधारित PF निकासी सिस्टम का परीक्षण पूरा हो चुका है। नई सुविधा के तहत सदस्य अपने खाते में उपलब्ध निकासी योग्य राशि को देख पाएंगे और UPI PIN की मदद से तुरंत ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर होगा, जिसके बाद सदस्य चाहे तो ऑनलाइन पेमेंट करें या ATM से कैश निकाल लें।

EPFO 3.0 का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कर्मचारियों को छोटे-छोटे खर्चों या आपातकालीन जरूरतों के लिए लंबे इंतजार का सामना नहीं करना पड़ेगा। वर्तमान में PF क्लेम प्रोसेस में कई बार हफ्तों का समय लग जाता है, लेकिन नई व्यवस्था इसे डिजिटल बैंकिंग जितना आसान बना सकती है।

देश में EPFO के 7 करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और यह बदलाव करोड़ों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आ सकता है। खासकर युवाओं और डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। आने वाले समय में PF निकालना उतना ही आसान हो सकता है, जितना आज UPI से किसी को पैसे भेजना है।

Parle नाम पर बड़ा खेल! PM मोदी के ‘मेलोडी’ ट्विस्ट से इस छोटे शेयर ने कराया तगड़ा मुनाफा

 नई दिल्ली
शेयर बाजार में कब कौन सा शेयर गदर मचाने लगे भविष्यवाणी करना मुश्किल है. एक छोटी सी खबर भी किसी स्टॉक को रॉकेट बनाने के लिए काफी होती है. कुछ ऐसा ही हुआ एक 5 रुपये वाले छुटकू शेयर के साथ, जिसमें बीते कुछ दिनों से लगातार अपर सर्किट लग रहा है. हम बात कर रहे हैं पारले इंडस्ट्रीज के शेयर की, जो सिर्फ 5 दिन में ही 33% तक उछल गया है और निवेशकों ने मोटी रकम छाप डाली है। 

कंपनी का नाम भले ही Parle है, लेकिन इसका पारले-जी से कोई नाता नहीं है. बल्कि ये रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी है. लेकिन पारले नाम ने पीएम नरेंद्र मोदी के मेलोडी ट्विस्ट के बाद इस धराशायी शेयर में अचानक जान फूंक दी और इसने निवेशकों की बल्ले-बल्ले हो गई। 

PM ने ऐसा क्या किया, जो शेयर बना रॉकेट
यहां सबसे पहले बता दें कि बीते दिनों इटली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी (PM Narendra Modi) ने वहां की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को पारले कंपनी की टॉफी मेलोडी (Parle Melody) का पैकेट गिफ्ट किया था. बस पीएम मोदी का ये मेलोडी ट्विस्ट इस पारले इंडस्ट्रीज कंपनी के शेयर में जान फूंकने वाला साबित हुआ। 

सोशल मीडिया पर Italy PM द्वारा शेयर किया गया वीडियो तेजी से वायरल (Viral Video) हो गया और ‘मेलोडी’ ट्रेंड चल पड़ा. इसके बाद निवेशकों में पारले नाम के इस शेयर को खरीदने की होड़ मच गई और शेयर रॉकेट की रफ्तार से लगातार भागते हुए अपर सर्किट हिट (Parle Industries Share Upper Circuit) कर रहा है. जबकि दूसरी ओर मेलोडी टॉफी को बनाने वाली पारले प्रोडक्ट शेयर बाजार में लिस्ट ही नहीं है। 

सालभर से सोया था शेयर, अब तूफानी तेजी
पीएम मोदी (PM Modi) ने मेलोनी को मेलोडी गिफ्ट क्या की, इस सालभार से सोए पड़े शेयर ने तूफानी रफ्तार पकड़ ली. Parle Share की परफॉर्मेंस पर नजर डालें, तो ये Parle Stock बीते एक साल से लगातार टूटता जा रहा था और 70 फीसदी के आसपास फिसल गया था. लेकिन, मेलोडी ट्रेंड की शुरुआत होते ही, इस शेयर में जान आ गई और बीते पांच दिन से ये गदर मचा रहा है। 

बीते 19 मई को Parle Industries Share की कीमत महज 5 रुपये थी, लेकिन 20 मई को इटली की पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी के मेलोडी गिफ्ट पर थैंक्यू बोलने हुए एक वीडियो पोस्ट किया और इस स्टॉक में अपर सर्किट लग गया, जिसका सिलसिला अब तक जारी है. दनादन अपर सर्किट के साथ पांच कारोबारी दिनों में ये 33 फीसदी चढ़ गया है और इसका दाम 6.67 रुपये हो गया है. शेयर में तेजी के चलते इस कंपनी का मार्केट कैपिटल भी बढ़कर 32.58 करोड़ रुपये हो गया। 

जब Melody लॉन्च, तभी बनी ये कंपनी
पारले इंडस्ट्रीज के काम पर नजर डालें, तो इस कंपनी की स्थापना भी उसी 80 के दशक में हुई थी, जबकि पारले प्रोडक्ट ने मेलोडी टॉफी को लॉन्च किया था. Parle Industries इंफ्रा और रियल एस्टेट डेवलपमेंट सेक्टर की कंपनी है. जबकि Parle Products एक अलग प्राइवेट FMCG कंपनी है, जो Parle-G, Melody, Monaco, Hide & Seek जैसे ब्रांड बनाती है। 

₹45 करोड़ पेमेंट केस में फंसा HDFC Bank! जांच की खबर आते ही शेयर में बड़ी गिरावट

मुंबई

भारत के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC (HDFC Bank) को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आने के बाद शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है। बुधवार को बैंक के शेयर करीब 2% तक टूट गए और इंट्राडे कारोबार में ₹761 के स्तर तक पहुंच गए। गिरावट की वजह एक कथित आंतरिक जांच बताई जा रही है, जिसमें ₹45 करोड़ के भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल उठे हैं। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन को लेकर चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हालांकि, HDFC बैंक ने पेमेंट संबंधित गड़बड़ी की आशंकाओं और मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आइए जरा विस्तार से इस मामले की गहराई को समझते हैं।

 रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Maharashtra State Road Development Corporation) यानी MSRDC से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक ने इस सरकारी एजेंसी को तय ब्याज दर से ज्यादा रिटर्न देने के लिए कथित तौर पर एक अलग व्यवस्था बनाई। कहा जा रहा है कि अतिरिक्त ब्याज सीधे खाते में देने के बजाय इसे मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया और रोड सेफ्टी कैंपेन के नाम पर कुछ वेंडर्स के जरिए भुगतान किया गया।

बताया जा रहा है कि बैंक के मार्केटिंग विभाग की FY25 की इंटरनल ऑडिट के दौरान इस लेनदेन पर सवाल उठे। ऑडिट रिपोर्ट में विभाग की कार्यप्रणाली को असंतोषजनक बताया गया, जिसके बाद बैंक की ऑडिट कमेटी ने आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू करने का फैसला लिया।

इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि कथित फैसलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक के CEO शशिधर जगदीशन (Sashidhar Jagdishan) उन चर्चाओं में शामिल थे, जिनमें MSRDC को अतिरिक्त रिटर्न देने के विकल्पों पर विचार हुआ था। हालांकि, अभी तक बैंक की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक गलती स्वीकार नहीं की गई है।

जानकारी के अनुसार साल 2021 में HDFC बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट को आकर्षित करने की कोशिश की थी। उस समय बैंक सेविंग अकाउंट पर लगभग 3.5% ब्याज दे रहा था, जबकि दूसरी वित्तीय संस्थाएं 6% या उससे ज्यादा रिटर्न ऑफर कर रही थीं। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि MSRDC ने लगभग 6.01% रिटर्न की मांग रखी थी, जिसके बाद बैंक के अंदर विशेष व्यवस्था तैयार की गई।

बताया जा रहा है कि बैंक ने कुछ समय के लिए 4.5% तक का स्पेशल इंटरेस्ट रेट भी मंजूर किया था, लेकिन अपेक्षित डिपॉजिट नहीं आने के बाद यह व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद कथित तौर पर अतिरिक्त ब्याज को मार्केटिंग स्पेंड के जरिए एडजस्ट करने की योजना बनाई गई।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कई दस्तावेज लीगल और कंप्लायंस टीम से बिना मंजूरी के तैयार किए गए थे। साथ ही RBI के नियमों के संभावित उल्लंघन की बात भी कही गई है। नियमों के मुताबिक बैंक किसी खास ग्राहक को अलग से तय ब्याज दर नहीं दे सकते। वहीं, बैंक की एंटी-ब्राइबरी और एंटी-करप्शन पॉलिसी के उल्लंघन की आशंका भी जताई गई है। फिलहाल, इस मामले बैंक ने खारिज कर दिया है।

मामले पर बैंक का आधिकारिक बयान
HDFC बैंक ने बुधवार को ₹45 करोड़ पेमेंट मामले को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैंक ने कहा कि उसके पास मजबूत आंतरिक निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जो सभी प्रक्रियाओं को तय नियमों के तहत संचालित करते हैं। बैंक के प्रवक्ता ने कहा, “हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर लगाए गए किसी भी गलत काम या जिम्मेदारी से जुड़े आरोपों को सख्ती से खारिज करते हैं। सभी मामलों को स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार संभाला जाता है और किसी भी आंतरिक समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है।”

बैंक की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद आई, जिसमें दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ने ₹45 करोड़ के भुगतान की औपचारिक आंतरिक सतर्कता जांच (Internal Vigilance Investigation) शुरू की है।

शेयर परफॉर्मेंस
हालिया इंटरनल जांच से जुड़ी खबरों के बाद निवेशकों में थोड़ी चिंता बढ़ी है, जिसका असर शेयर पर साफ दिखाई दिया। HDFC बैंक के शेयर में आज 27 मई 2026 दबाव देखने को मिला और NSE पर यह स्टॉक 2.22% की गिरावट के साथ ₹761.60 पर बंद हुआ।

इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर में भरोसा सबसे बड़ा आधार माना जाता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिर भी इस पूरे मामले ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और बैंकिंग पारदर्शिता पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।

ईरान युद्ध का Air India पर बड़ा असर, एयरलाइन को अचानक लेना पड़ा बड़ा फैसला

 नई दिल्ली

अमेरिका-ईरान युद्ध (US Vs Iran War) के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद (Hormuz Strait Closure) होने से गहराए तेल संकट का बुरा असर तमाम देशों में पड़ा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है और देश में पेट्रोल-डीजल से लेकर एलपीजी तक की किल्लत देखने को मिली. हालांकि, मोदी सरकार ने तत्काल उठाए गए बड़े कदमों के जरिए इस संकट को कम करने का प्रयास किया।  

ईरान युद्ध और ईंधन की ऊंची कीमत का असर भारतीय एविएशन सेक्टर की दिग्गज कंपनी एअर इंडिया (Air India) पर भी पड़ा है और उसे बड़ा फैसला लेना पड़ा है. इसके तहत एयरलाइंस अपनी घरेलू उड़ानों की संख्या में 22 फीसदी कटौती करेगी।

जून-जुलाई में पड़ेगा असर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध की वजह से तेल के दाम में आए उछाल ने जेट फ्यूल महंगा किया है और इसने एयरलाइन कंपनियों का गणित बिगाड़ा है. इसकी वजह से एयरलाइन की वित्तीय स्थिति पर लगातार नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिसे देखते हुए एअर इंडिया ने अचानक जून और जुलाई के दौरान अपनी घरेलू उड़ानों में 22% की कटौती करने का फैसला किया है।

Air India ने ये फैसला ऐसे समय में लिया है, जबकि वेस्ट एशिया टेंशन के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रुकावट जारी है और एविएशन सेक्टर को लागत में भारी बढ़ोतरी से जूझना पड़ रहा है. जून-जुलाई के लिए कंपनी ने फैसला ले लिया है, जबकि अगस्त के लिए अभी बाकी है।

ईंधन की आसमान छूती कीमतें और वित्तीय दबाव
एयर इंडिया के अधिकारियों के अनुसार, ईरान संघर्ष से पहले विमान ईंधन की कीमत लगभग ₹80,000 प्रति किलोलीटर थी, जो अब बढ़कर ₹1 लाख प्रति किलोलीटर से अधिक हो चुकी है. वर्तमान में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को ₹26,800 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 गुना अधिक है. ऐसे में इन रूटों पर उड़ानों का संचालन जारी रखना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गया था।

उड़ानों के फेरों में युक्तिसंगत कमी
एयर इंडिया वर्तमान में प्रति सप्ताह कुल 4,400 उड़ानों का संचालन करता है, जिसमें लगभग 3,600 घरेलू और 800 अंतरराष्ट्रीय सेवाएं शामिल हैं. 22 प्रतिशत की इस अस्थायी कटौती से प्रति सप्ताह लगभग 720 घरेलू उड़ानें प्रभावित होंगी. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रूट को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा है, बल्कि चुनिंदा घरेलू मार्गों पर केवल उड़ानों के फेरे कम किए जा रहे हैं।

कनेक्टिंग फ्लाइट्स की मांग में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में की गई कटौती का सीधा असर घरेलू उड़ानों पर भी पड़ा है. विदेश से आने वाले यात्रियों की संख्या घटने के कारण दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े विमानन केंद्रों के लिए कनेक्टिंग घरेलू उड़ानों की मांग में भारी कमी आई है. मांग का यह असंतुलन भी उड़ानों को युक्तिसंगत बनाने का एक मुख्य कारण बना है।

प्रभावित यात्रियों के लिए राहत के उपाय
विमानन कंपनी ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति सामान्य होते ही उड़ानों को पूर्ववत कर दिया जाएगा. इस दौरान प्रभावित होने वाले यात्रियों को निम्नलिखित सुविधाएं दी जाएंगी:

    वैकल्पिक उड़ान: यात्रियों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के दूसरी उपलब्ध उड़ानों में सीट दी जाएगी.
    तारीख में मुफ्त बदलाव: यात्रा की तिथि बदलने पर कोई पेनल्टी या चेंज फीस नहीं ली जाएगी.
    पूर्ण रिफंड: विकल्प पसंद न आने पर यात्री अपनी टिकट का पूरा पैसा वापस ले सकते हैं.

एअर इंडिया ने दिया ये बयान
एअर इंडिया की ओर से पुष्टि करते हुए एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा है कि जेट फ्यूल प्राइस में उछाल के परिचालन पर दबाव जारी है, इसे देखते हुए उड़ानों में कटौती का कदम उठाना पड़ रहा है, लेकिन स्थितियों के स्थिर होते ही उड़ानों की संख्या बहाल की जा सकती है. इससे घरेलू उड़ानों में करीब 10% तक कटौती हो सकती है।

न सिर्फ एअर इंडिया, बल्कि रिपोर्ट्स की मानें, तो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo भी जून और अगस्त के बीच घरेलू उड़ानों में 7% तक कटौती कर सकती है. हालांकि, इंडिगो ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।  

ऊंचे रह सकते हैं टिकट के दाम
Iran War के चलते बीते कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर जेट फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और ये एयरलाइंस के सबसे बड़े खर्चों में से एक है, जो आमतौर पर परिचालन लागत का लगभग एक चौथाई होता है।

इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर खर्च में इजाफा हुआ है और वैश्विक स्तर पर एयरलाइनों को टिकटों की कीमतें बढ़ाने, घाटे वाले रूट्स को बंद करने और उड़ानों की संख्या कम करने के लिए मजबूर हो पड़ा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर Jet Fuel की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू हवाई किराया भी ऊंचा रह सकता है. इसके पीछे वजह ये है कि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से सीधे एयरलाइंस भी प्रभावित होती हैं।

मौसमी मंदी और भविष्य की रणनीति
स्कूल की छुट्टियां खत्म होने के बाद आमतौर पर हवाई यात्रा में कमी आती है। इसे मौसमी मंदी कहा जाता है। इस अवधि में यात्रियों की संख्या घट जाती है, जिससे एयरलाइंस को नुकसान होता है। क्षमता में कटौती करके एयरलाइंस अपनी लागत कम करना चाहती हैं। यह कदम उन्हें वित्तीय दबाव से निपटने में मदद करेगा। एअर इंडिया और इंडिगो दोनों ही इस अवधि में अपनी सेवाओं को अनुकूलित कर रही हैं।

Gold-Silver Price Crash: अचानक धड़ाम हुए चांदी के दाम, सोना भी हुआ सस्ता… जानिए आज का नया रेट

नई दिल्ली
सोना-चांदी की कीमत (Gold-Silver Price Fall) में तीसरे कारोबारी दिन एक बार फिर बड़ी गिरावट आई है. मंगलवार को रेड जोन में बंद होने के बाद बुधवार को MCX पर वायदा कारोबार की ओपनिंग के कुछ देर बाद अचानक चांदी के दाम में बड़ी गिरावट आ गई और एक झटके में 4000 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हो गई. तो वहीं दूसरी ओर सोने का भाव भी फिसला है और 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड रेट 600 रुपये से ज्यादा घट गया।

सप्ताह के तीन दिनों में ही अब तक चांदी 5600 रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती हुई है और इस कीमती धातु का भाव 2,71,846 रुपये से गिरकर 2,66,200 रुपये पर आ गया है. वहीं सोना इस ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई लेवल से 46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया है।

MCX पर सोना-चांदी में गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार को 3 जुलाई वाली चांदी की वायदा कीमत खुलते ही उछली और 2,72,628 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई, लेकिन फिर अचानक इस कीमती धातु के दाम में बड़ी गिरावट शुरू हो गई और देखते ही देखते ये अपने पिछले बंद 2,70,628 रुपये से कम होकर झटके में 2,66,200 रुपये पर आ गया. यानी 1 Kg Silver Price 4428 रुपये कम हो गया।

चांदी की कीमत में इस सप्ताह सिर्फ 3 कारोबारी दिनों में ही अब तक 5646 रुपये प्रति किलो की गिरावट आ चुकी है. वहीं जनवरी के अपने हाई लेवल 4,57,328 रुपये प्रति किलोग्राम की तुलना में अब चांदी 1,91,128 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है।

अब दूसरी कीमती धातु सोना की बात करें, तो एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान ये पीली धातु भी फिसली है. अपने पिछले बंद 1,57,616 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम होकर बुधवार को मार्केट ओपन होने के कुछ देर बाद गिरते हुए 1,56,953 रुपये पर आ गया. वहीं 5 जून की एक्सपायरी वाले वायदा सोना (10 Gram 24 Karat Gold Rate) अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से अब 46,031 रुपये कम हो चुका है।    

दिल्ली में क्या है Gold-Silver का हाल?
एमसीएक्स के बाद अब घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमत में आए बदलाव पर बात करें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट गोल्ड का रेट पिछले बंद 1,57,611 रुपये से गिरकर 1,57,040 रुपये पर आ गया. वहीं चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और ये मंगलवार के बंद 2,66,213 रुपये प्रति किलो से 4503 रुपये सस्ती होकर 2,61,710 रुपये प्रति किलो पर खुली।

सोने-चांदी में गिरावट की वजह
सोने-चांदी के दाम में गिरावट के पीछे के कारणों को देखें, तो एक बड़ी वजह जियो-पॉलिटिकल तनाव है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बात नहीं बन पा रही है, ट्रंप की धमकियों का सिलसिला, होर्मुज पर चिंता और बढ़ा रहा है. इस बीच टेंशन में इजाफे से डॉलर में तेजी आ रही है और इससे सोना-चांदी पर दबाव बढ़ा है. निवेशकों के मुनाफावसूली करने की वजह से गोल्‍ड-सिल्‍वर के दाम में गिरावट दिखी है।

Ferrari की पहली इलेक्ट्रिक कार Luce से उठा पर्दा, शानदार डिजाइन ने जीता दिल

मुंबई 
प्रीमियम स्पोर्ट्स कार निर्माता कंपनी Ferrari ने अपनी पहली फुली इलेक्ट्रिक प्रोडक्शन कार Ferrari Luce को आधिकारिक तौर पर पेश कर दिया है. इस कार को कंपनी ने रोम में प्रदर्शित किया, जो कंपनी के इतिहास में सबसे बड़े बदलावों में से एक है, क्योंकि कंपनी अब EV स्पेस में एंट्री कर रही है और इसके साथ पेट्रोल और हाइब्रिड मॉडल भी ऑफर कर रही है। 

खास बात यह है कि Ferrari Luce न सिर्फ़ कंपनी की पहली EV है, बल्कि कंपनी की पहली इलेक्ट्रिक चार-दरवाज़ों वाली कार और पांच सीटों वाली पहली प्रोडक्शन कार है. इसे पूरी तरह से नए प्लेटफॉर्म पर बनाया गया है, जो इस कार को मौजूदा कम्बशन-इंजन आर्किटेक्चर को अपनाने के बजाय खास तौर पर इलेक्ट्रिक पावरट्रेन के हिसाब से डिज़ाइन किया गया है। 

कंपनी का कहना है कि इसके फुली इलेक्ट्रिक सेटअप ने इंजीनियरों को अपनी पारंपरिक स्पोर्ट्स कारों की तुलना में ज़्यादा केबिन स्पेस, बेहतर प्रैक्टिकैलिटी और अलग ड्राइविंग लेआउट वाली कार बनाने में मदद की। 

नई Ferrari Luce की बैटरी और पावर आउटपुट
इस कार को पावर इसके चारों व्हील्स पर लगाई गईं चार इलेक्ट्रिक मोटर से मिलती है. ये चारों मोटर कुल मिलाकर 1,050 hp का पावर आउटपुट देती हैं, जबकि Ferrari का दावा है कि लॉन्च कंट्रोल मोड में व्हील टॉर्क 11,500 Nm तक पहुंच जाता है. परफॉर्मेंस के आंकड़े काफी हद तक Ferrari के ही हैं. यह कार 0-100 km/h की स्पीड 2.5 सेकंड में पकड़ सकती है, 0-200 km/h 6.8 सेकंड में, और इसकी टॉप स्पीड 310 km/h से ज़्यादा है। 

चार-मोटर सेटअप से Ferrari हर पहिये पर टॉर्क को अलग से कंट्रोल कर सकती है. कंपनी के मुताबिक, इससे स्टेबिलिटी, कॉर्नरिंग प्रिसिजन और ट्रैक्शन बेहतर होता है, खासकर तेज़ एक्सेलरेशन और हाई-स्पीड ड्राइविंग के दौरान. Ferrari Luce में रियर-व्हील स्टीयरिंग और Ferrari F80 हाइपरकार से लिया गया एक्टिव सस्पेंशन सेटअप भी मिलता है। 

इस इलेक्ट्रिक कार में 122 kWh का बैटरी पैक इस्तेमाल किया गया है, जिसे पूरी तरह से मारानेलो में डिज़ाइन, टेस्ट और असेंबल किया गया है. कंपनी का कहना है कि बैटरी 350 kW तक की चार्जिंग स्पीड को सपोर्ट करती है और लगभग 20 मिनट में 70 kWh चार्ज रिकवर कर सकती है. कंपनी का दावा है कि इसकी ड्राइविंग रेंज 530 km से ज़्यादा है। 

कंपनी का कहना है कि डेवलपमेंट के दौरान थर्मल मैनेजमेंट पर खास ध्यान दिया गया था. Ferrari Luce में एक कॉम्प्लेक्स कूलिंग सिस्टम है, जिसे बैटरी टेम्परेचर को मैनेज करने, चार्जिंग परफॉर्मेंस बनाए रखने और बार-बार हाई-स्पीड ड्राइविंग के दौरान लगातार पावर डिलीवरी पक्का करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. कंपनी का दावा है कि इस सिस्टम को ट्रैक के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। 

कंपनी ने Ferrari Luce के लिए एक नया साउंड सिस्टम भी बनाया है. इंजन की आर्टिफिशियल आवाज़ इस्तेमाल करने के बजाय, Ferrari इलेक्ट्रिक मोटर और ड्राइवट्रेन से पैदा होने वाले नैचुरल वाइब्रेशन और फ्रीक्वेंसी को बढ़ाती है. कंपनी के मुताबिक, ड्राइव मोड और थ्रॉटल इनपुट के हिसाब से आवाज़ बदलती है, जिससे ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय ज़्यादा फीडबैक मिलता है। 

नई Ferrari Luce का डिजाइन
कार के डिज़ाइन की बात करें तो Ferrari Luce कंपनी के मौजूदा मॉडल्स से बहुत अलग दिखती है. यह प्रोजेक्ट LoveForm के साथ मिलकर बनाया गया था, जो एप्पल के पूर्व डिज़ाइन चीफ़ सर जॉनी आइव और डिज़ाइनर मार्क न्यूसन के क्रिएटिव ग्रुप का हिस्सा है. कार में स्मूद ग्लास-हैवी प्रोफ़ाइल, फ्लोटिंग एयरोडायनामिक एलिमेंट्स, और किसी भी प्रोडक्शन Ferrari रोड कार में लगाया गया, अब तक का सबसे बड़ा व्हील सेटअप है, जिसमें 23-इंच के फ्रंट और 24-इंच के रियर व्हील्स हैं। 

Ferrari का कहना है कि नई Ferrari Luce को बनाने में एयरोडायनामिक्स का बड़ा रोल रहा है. कार में एक्टिव एयरोडायनामिक ग्रिल, मूवेबल एयरो सरफेस और एक एक्टिव राइड-हाइट सिस्टम है, जो ज़्यादा स्पीड पर कार के अगले हिस्से को नीचे करके एफिशिएंसी और एयरफ्लो को बेहतर बनाता है। 

नई Ferrari Luce का इंटीरियर
कार के केबिन की बात करें तो, इसमें फिजिकल स्विच को सैमसंग डिस्प्ले के साथ डेवलप किए गए OLED डिस्प्ले के साथ जोड़ा गया है. कंपनी का कहना है कि उसने खास फंक्शन के लिए फिजिकल कंट्रोल को जानबूझकर बनाए रखा है, ताकि गाड़ी चलाते समय कार का इस्तेमाल आसान हो सके. Ferrari में पैनोरमिक ग्लास रूफ, पावर्ड सीट्स, 21-स्पीकर ऑडियो सिस्टम और किसी भी मौजूदा फेरारी की तुलना में बड़ा लगेज एरिया भी है। 

₹4.99 लाख की इस कार ने Baleno, Swift और i20 को छोड़ा पीछे, 33Km माइलेज के दम पर बनी नंबर-1

मुंबई 

भारतीय मार्केट में हैचबैक कारों का जलवा हमेशा की तरह बरकरार है। अगर बीते महीने यानी अप्रैल, 2026 में हुई इस सेगमेंट की बिक्री की बात करें तो मारुति सुजुकी वैगनआर (Maruti Suzuki WagonR) ने एक बार फिर नंबर-1 की पोजीशन हासिल कर ली है। मारुति वैगनआर को बीते महीने कुल 18,648 नए ग्राहक मिले। इस दौरान सालाना आधार पर वैगनआर की बिक्री में 39.03 पर्सेंट की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है। जबकि ठीक एक साल पहले यानी अप्रैल, 2025 में यह आंकड़ा 13,413 यूनिट्स था। आइए जानते हैं देश की 10 सबसे ज्यादा बिकने वाली हैचबैक कारों की बिक्री के बारे में विस्तार से।

दूसरे नंबर पर रही बलेनो
बिक्री की इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर मारुति सुजुकी बलेनो रही। मारुति बलेनो ने इस दौरान 38.89 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 18,306 यूनिट कारों की बिक्री की है। जबकि तीसरे नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में मारुति सुजुकी स्विफ्ट रही। मारुति स्विफ्ट ने इस दौरान सालाना आधार पर 22.18 पर्सेंट की बढ़ोतरी के साथ कुल 17,829 यूनिट कारों की बिक्री की।

चौथे नंबर पर रही मारुति ऑल्टो
दूसरी ओर बिक्री की इस लिस्ट में चौथे नंबर पर मारुति सुजुकी ऑल्टो रही है। मारुति ऑल्टो ने इस दौरान 93.65 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 10,856 यूनिट कारों की बिक्री की। जबकि पांचवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में हुंडई i20 रही। हुंडई i20 ने इस दौरान 59.55 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 5,624 यूनिट कारों की बिक्री की है।

टाटा टियागो को लगा झटका
बिक्री की इस लिस्ट में छठे नंबर पर टाटा टियागो रही। टाटा टियागो ने इस दौरान 33.70 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ 5,488 यूनिट कारों की बिक्री की। जबकि सातवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में मारुति एस-प्रेसो रही। मारुति एस-प्रेसो ने इस दौरान 617.63 पर्सेंट की रिकॉर्ड तोड़ सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 5,210 यूनिट कारों की बिक्री की है।

आखिरी पोजिशन पर रही अल्ट्रोज
बिक्री की इस लिस्ट में आठवें नंबर पर हुंडई i10 नियोस रही। हुंडई i10 नियोस ने 0.29 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 4,149 यूनिट कारों की बिक्री की। वहीं, नौवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टोयोटा ग्लैंजा रही। ग्लैंजा ने इस दौरान 18.68 पर्सेंट की सालाना गिरावट के साथ कुल 3,360 यूनिट कारों की बिक्री की है। इसके अलावा, दसवें नंबर पर बिक्री की इस लिस्ट में टाटा अल्ट्रोज रही। अल्ट्रोज ने इस दौरान 19.06 पर्सेंट की सालाना बढ़ोतरी के साथ कुल 2,586 यूनिट कारों की बिक्री दर्ज की है।

इतनी है कार की कीमत
मारुति सुजुकी वैगनआर में 1.0-लीटर K-सीरीज इंजन और दूसरा 1.2-लीटर इंजन दिया गया है। यह कार 5-स्पीड मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ उपलब्ध है। माइलेज के लिए मशहूर यह कार पेट्रोल में लगभग 23.56 से 25.19 किमी/लीटर और CNG वैरिएंट में 33.47 किमी/किग्रा तक का जबरदस्त औसत देती है। भारतीय मार्केट में इसकी एक्स-शोरूम कीमत लगभग 4.99 लाख से शुरू होकर 7.45 लाख रुपये तक जाती है।

नोएडा फेज-2 में मजदूरों का बड़ा प्रदर्शन: वेतन, बोनस और 8 घंटे की शिफ्ट की मांग

करीब 1,000 से अधिक फैक्ट्री कर्मचारियों ने बढ़ती महंगाई और कम वेतन के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति भी देखने को मिली।

नोएडा फेज-2 में हजारों फैक्ट्री कर्मचारियों ने वेतन, बोनस और कथित श्रमिक शोषण के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल श्रमिकों का कहना है कि मौजूदा समय में ₹11,000 से ₹13,000 की सैलरी में परिवार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने ₹20,000 न्यूनतम वेतन और 8 घंटे की निर्धारित शिफ्ट लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि यह सिर्फ मांग नहीं बल्कि श्रमिकों का अधिकार है, जो उन्हें संविधान और श्रम कानूनों के तहत मिलना चाहिए।

मजदूरों का आरोप है कि लगातार बढ़ती महंगाई, लंबे कार्य घंटे और कम वेतन के कारण उनका जीवन संकट में है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। इसी बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बन गई, जिसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने की बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। वहीं प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर मजदूरों के वेतन, कार्य परिस्थितियों और श्रमिक अधिकारों को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी है।

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