डीजल की जगह ₹20 प्रति लीटर वाला नया ईंधन? नितिन गडकरी ने बस-ट्रक के लिए बताया बड़ा प्लान

नई दिल्ली

भारत में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार लगातार वैकल्पिक ईंधनों (Alternative Fuels) को बढ़ावा दे रही है. अब ऐसा फ्यूल सामने आया है, जो डीजल से कई गुना सस्ता है और प्रदूषण भी कम फैलाता है. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, मेथेनॉल (Methanol) भविष्य में ट्रक, बस, ट्रैक्टर, जहाज और भारी मशीनों के लिए बड़ा विकल्प बन सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसकी कीमत करीब 20-22 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल की कीमत कई राज्यों में 100 रुपये प्रति लीटर से अधिक है। 

 नितिन गडकरी ने बताया कि असम पेट्रो-केमिकल्स रोजाना करीब 700 टन मेथेनॉल का उत्पादन कर रही है. अगर आने वाले समय में इस फ्यूल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू होता है, तो ट्रांसपोर्ट सेक्टर का फ्यूल खर्च काफी कम हो सकता है. खासकर ट्रक और बस ऑपरेटर्स को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। 

पहले ही सफल हो चुका ट्रायल
मेथेनॉल को लेकर सिर्फ दावे ही नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि इसका सफल परीक्षण भी हो चुका है. कर्नाटक में 15% मेथनॉल-डीजल ब्लेंड के साथ बसों को करीब तीन महीने तक चलाया गया. इस दौरान इंजन में कोई तकनीकी समस्या नहीं आई और वाहन की परफॉर्मेंस भी संतोषजनक रही. इसके बाद देश की पॉपुलर कंपनी Ashok Leyland ने 100% मेथेनॉल पर चलने वाले डेडिकेटेड इंजन भी तैयार कर लिए हैं। 

सिर्फ ट्रक-बस ही नहीं, इन वाहनों में भी होगा इस्तेमाल
मेथेनॉल का उपयोग सिर्फ कमर्शियल ट्रकों और बसों तक सीमित नहीं रहेगा. सरकार का मानना है कि भविष्य में इसका इस्तेमाल इन क्षेत्रों में भी किया जा सकता है,जिससे डीजल की खपत कम होगी और ऑपरेटिंग कॉस्ट में भी बड़ी कमी आएगी। 

देखिए लिस्ट-

    कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट
    ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी
    हार्वेस्टर
    नदी और समुद्री जहाज
    औद्योगिक मशीनें

इथेनॉल और आइसोब्यूटेनॉल भी बनेंगे डीजल का विकल्प
गडकरी ने बताया कि मेथेनॉल के अलावा इथेनॉल से बनने वाला आइसो-ब्यूटानॉल भी डीजल का मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है. किर्लोस्कर ग्रुप 100% आइसो-ब्यूटानॉल और इथेनॉल पर चलने वाले जनरेटर सेट डेवलप कर चुका है. भविष्य में इनका इस्तेमाल कृषि उपकरणों, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और कंस्ट्रक्शन मशीनरी में किया जा सकेगा। 

किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को कैसे होगा फायदा?
मेथेनॉल का उत्पादन देश में ही किया जा सकता है. सरकार पूर्वोत्तर राज्यों में बांस रिफाइनरी के जरिए इसका उत्पादन बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. इससे तीन बड़े फायदे होंगे। 

    किसानों को बांस और अन्य कच्चे माल से अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा.
    स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। 
    भारत का फॉसिल फ्यूल इम्पोर्ट बिल भी कम हो सकता है। 

पर्यावरण के लिए भी बेहतर
मेथेनॉल, इथेनॉल और आइसो-ब्यूटानॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन डीजल की तुलना में कम प्रदूषण पैदा करते हैं. यही वजह है कि सरकार इन्हें सड़क परिवहन के साथ-साथ जल परिवहन में भी बढ़ावा देना चाहती है. अगर इनका बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू होता है, तो इससे भारत को क्लीनर एनर्जी, कम ईंधन खर्च और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कई बड़े फायदे मिल सकते हैं। 

नौकरी बदलते ही अपने आप ट्रांसफर होगा PF, EPFO ने किया बड़ा ऐलान

 नई दिल्‍ली

कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन की ओर से पीएफ ट्रांसफर पर बड़ा अपडेट जारी किया गया है. EPFO ने कहा कि आधार से जुड़े UAN से लिंक PF के बाकी अमाउंट, कर्मचारी के किसी नए संगठन में ज्‍वॉइन करते ही ऑटोमैटिक तरीके से ट्रांसफर हो जाएंगे. ट्रांसफर रिक्‍वेस्‍ट करने की आवश्‍यकता नहीं होगी। 

यह बदलाव EPFO के सदस्य डेटाबेस को उसके नए सेंट्रलाइज आईटी इनेबल सर्विसेज (CITES) प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर करने के बाद हुआ है, जिसका उद्देश्य सदस्य सेवाओं को तेज और अधिक सुव्यवस्थित बनाना है. ऑटोमैटिक ट्रांसफर सर्विस से उन कर्मचारियों को लाभ होने की उम्‍मीद है, जो अपने करियर के दौरान नौकरी बदलते हैं और कई ईपीएफ अकाउंट बैन करते हैं. अबतक सदस्‍यों को नए नियोक्‍ता को अपना UAN पेश करने और नए PF अकाउंट को मौजूदा यूएए से लिंक के बाद भी एक अलग ट्रांसफर रिक्‍वेस्‍ट करना पड़ता था। 

नौकरी बदलने के बाद क्या चेंज आएगा? 
पहले पुरानी कंपनी से पीएफ अमाउंट ट्रांसफर करने में कई स्‍टेप फॉलो करने पड़ते थे, जो एक लंबा प्रॉसेस था. सदस्यों को ईपीएफओ पोर्टल या ऑफलाइन के माध्यम से ट्रांसफर रिक्‍वेस्‍ट करना होता था. साथ ही बाकी अमाउंट और सर्विस हिस्‍ट्री को मर्ज करने से पहले नियोक्‍ता और EPF सिस्‍टम के माध्‍यम से रिक्‍वेस्‍ट प्रॉसेस भी आवश्‍यक थी। 

ईपीएफओ का कहना है कि नए सिस्‍टम के तहत नौकरी बदलने पर आधार से जुड़े UAN बेस्‍ड अकउंट खुद ही ट्रांसफर हो जाएंगे. इसका मतलब है कि कर्मचारियों को अपने पीएफ बैलेंस को नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए अलग से ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रांसफर आवेदन दाखिल करने की आवश्यकता नहीं होगी। 

एक ही होगा अकाउंट 
इस बदलाव के बाद कर्मचारी का UAN तो एक ही रहेगा ही, साथ ही एक ही अकाउंट में पूरे अमाउंट आ जाएंगे. ईपीएफओ का उद्देश्य एक ही यूएएन से सभी पीएफ खातों को ऑटोमैटिक तरीके से जोड़कर खाता प्रबंधन को सरल बनाना और कागजी कार्रवाई को कम करना है। 

सभी पीएफ खातों को एक साथ रखना क्यों जरूरी?
जो कर्मचारी बार-बार नौकरी बदलते हैं, उनके अक्सर कई पेंशन खाते हो जाते हैं. इन खातों को मर्ज करने से सेवा रिकॉर्ड की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलती है और रिटायरमेंट सेविंग एक ही स्थान पर रखी जाती है. इससे पीएफ अमाउंट को ट्रैक करने में आसानी होती है. साथ ही फाइनल सेटलमेंट भी इस प्रॉसेस से आसा हो जाता है. सदस्य अपने यूएएन क्रेडेंशियल से लॉग इन करके और ओटीपी अथेंटिफिकेशन के बाद सर्विस हिस्‍ट्री सेक्‍शन में जाकर ईपीएफओ यूनिफाइड मेबर पोर्टल के माध्‍यम से अपना रोजगार हिस्‍ट्री देख सकते हैं। 

कब हुआ ये बदलाव? 
गौरतलब है कि ईपीएफओ के यूनिफाइड प्‍लेटफॉर्म पर अपडेट के बाद कई बदलाओं में से एक ऑटोमैटिक पीएफ ट्रांसफर की भी सुविधा है. ईपीएफओ ने क्‍लेम को जल्‍द प्रॉसेस, यूनिफाइड पेमेंट सिस्‍टम और सदस्‍यों को उनके अकाउंट के बेसिक ऑसि तक सीमित रहने के बजाय किसी भी EPFO ऑफिस से सर्विस का लाभ उठाने की सुविधा जैसे उपाय भी शुरू किए हैं। 

 

IRCTC की नई वेबसाइट जल्द होगी लॉन्च, टिकट बुकिंग में होंगे 4 बड़े बदलाव

नई दिल्ली

ट्रेन से सफर करने वालों के लिए एक बड़ी गुड न्यूज है. IRCTC की वेबसाइट से ट्रेन टिकट बुक करने पर बड़ा फायदा होगा. भारतीय रेलवे जल्द ही IRCTC की नई वेबसाइट का Beta वर्जन लॉन्च करने जा रहा है. नई वेबसाइट का मकसद टिकट बुकिंग को पहले से ज्यादा आसान, तेज और बेहतर बनाना है, ताकि यात्रियों को बार-बार आने वाली टक्निकल दिक्कतों का सामना न करना पड़े। 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि नई वेबसाइट लगभग तैयार है और इसे जल्द यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा. इसे भारतीय रेलवे के नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) के साथ जोड़ा जा रहा है. नया सिस्टम लागू होने के बाद टिकट बुकिंग का अनुभव पहले से काफी बेहतर होने की उम्मीद है. इसमें 4 बड़े बदलाव होंगे। 

नई वेबसाइट में क्या होगा खास?
नई IRCTC वेबसाइट में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं. ऐसे में क्या-क्या बदलाव होंगे ये बताते हैं-

    कैप्चा की टेंशन दूर – टिकट बुकिंग के दौरान बार-बार आने वाले Captcha और Pop-up की समस्या काफी हद तक खत्म कर दी जाएगी। 

    सीट से जुड़ी सर्विस– सभी क्लास में सीटों की मौजूदगी एक ही स्क्रीन पर दिखाई देगी. इससे अलग-अलग क्लास चुनकर बार-बार सीट चेक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

    जल्दी कंप्लीट होगा प्रोसेस- टिकट बुकिंग का प्रोसेस में भी पहले की तुलना में कम स्टेप्स होंगे, जिससे टिकट जल्दी बुक हो सकेगा। 

    पहले से सेव रहेगी जानकारी– जो यात्री अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं, उनके लिए यात्रियों की जानकारी सेव रखने की सर्विस भी मिलेगी. इससे हर बार नाम, उम्र और अन्य जानकारी दोबारा भरने की जरूरत नहीं होगी और टिकट बुकिंग पहले से ज्यादा आसान हो जाएगी। 

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम भी होगा अपग्रेड
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे पिछले करीब 40 सालों से इस्तेमाल हो रहे Passenger Reservation System (PRS) को भी पूरी तरह अपग्रेड कर रहा है. खास बात यह है कि यह पूरा काम टिकट बुकिंग सेवा को बंद किए बिना किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि नया रिजर्वेशन सिस्टम तैयार होने के बाद इसे नई IRCTC वेबसाइट के साथ जोड़ा जाएगा. इससे वेबसाइट की स्पीड बढ़ेगी और ज्यादा यात्री एक साथ टिकट बुक कर सकेंगे। 

RailOne ऐप और तत्काल टिकट बुकिंग पर फोकस
रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे का RailOne ऐप तेजी से यूज हो रहा है. अब तक इस ऐप को 4 करोड़ से ज्यादा लोग डाउनलोड कर चुके हैं. यह रेलवे का सबसे बड़ा टिकट बुकिंग ऐप बन चुका है, जहां टिकट बुकिंग के साथ रेलवे की कई अन्य सेवाएं भी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। 

इसके अलावा, रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग में बॉट्स और फर्जी बुकिंग पर रोक लगाने के लिए भी लगातार काम कर रहा है. रेलवे का कहना है कि इस दिशा में कुछ सुधार देखने को मिला है, लेकिन सिस्टम को और मजबूत बनाने की प्रक्रिया जारी है. नई वेबसाइट और नए रिजर्वेशन सिस्टम के आने के बाद यात्रियों को तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक टिकट बुकिंग का अनुभव मिलने की उम्मीद है। 

छात्रों के सुझाव के बाद बदली वेबसाइट
बता दें कि जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) के छात्रों ने हाल ही में नई IRCTC वेबसाइट का डेमो देखा और उस पर अपनी राय दी. रेल मंत्री के मुताबिक, छात्रों के सुझावों को ध्यान में रखते हुए वेबसाइट में कई जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। 

कुछ हफ्ते पहले भी MNIT के छात्रों ने मौजूदा IRCTC वेबसाइट की कमियों की ओर रेलवे का ध्यान दिलाया था. इसके बाद रेलवे ने वेबसाइट को नए डिजाइन और बेहतर फीचर्स के साथ तैयार करने का फैसला किया. अब इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

होम लोन पर 4% ब्याज सब्सिडी! मोदी सरकार की नई स्कीम से EMI होगी कम, जानें किसे मिलेगा लाभ

नई दिल्ली
 देश के मिडिस क्लास के लिए घर खरीदना अब पहले से ज्यादा आसान हो सकता है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना ( PMAY) 2.O के तहत होम लोन (Home Loan) पर 4% ब्याज सब्सिडी देने की तैयारी है, जिससे लाखों परिवारों का अपना घर लेने का सपना पूरा होने के करीब पहुंच सकता है।

क्या खास है इस योजना में?
सरकार की इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को होम लोन के पहले ₹8 लाख तक के हिस्से पर 4% की ब्याज सब्सिडी (Home Loan Subsidy) दी जाएगी। यह सब्सिडी अधिकतम 12 साल की अवधि के लिए लागू होगी और कुल मिलाकर करीब ₹1.80 लाख तक का फायदा मिल सकता है।

क्या है सरकार का मकसद?
इस स्कीम का मकसद खास तौर पर लोअर और मिडिल इनकम ग्रुप ( LIG और MIG) के लोगों को राहत देना है, जो बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतों और महंगे लोन के कारण घर खरीदने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं। सरकार इस योजना के जरिए शहरी इलाकों में किफायती आवास को बढ़ावा देना चाहती है और आने वाले वर्षों में करोड़ों घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

कौन है इस योजना का पात्र?
योजना के तहत वे परिवार पात्र होंगे जिनकी सालाना आय एक तय सीमा के भीतर है और जिनके नाम पर पहले से पक्का मकान नहीं है। साथ ही, घर की कीमत और लोन की सीमा भी निर्धारित की गई है जैसे ₹25 लाख तक का लोन और ₹35 लाख तक की प्रॉपर्टी वैल्यू वाले घरों पर यह लाभ मिल सकता है।

कैसे मिलेगी सब्सिडी?
सब्सिडी साधे लाभार्थी के लोन अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है, जिससे मूलधन कम हो जाता है और EMI का बोझ घटता है। यही वजह है कि यह योजना पहली बार घर खरीदने वालों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

सरकार के इस कदम से रियल एस्टेट सेक्टर को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा, क्योंकि डिमांड बढ़ने से कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में तेजी आ सकती है। वहीं आम लोगों के लिए यह मौका सही समय पर घर खरीदने का हो सकता है, जब सरकार खुद EMI कम कराने में मदद कर रही है।

कुल मिलाकर, देखा जाए तो अगर आप भी घर खरीदने की सोच रहे हैं तो यह स्कीम आपके लिए बड़ा मौका बन सकती है कम EMI, ज्यादा बचत और अपने घर का सपना पूरा करने की।

भारत में बनेगा आयरन डोम इंटरसेप्टर? राफेल की बड़ी योजना, इजरायल-भारत रक्षा साझेदारी को मिलेगी नई ताकत

बेंगलुरु 

 रक्षा जगत में इन दिनों भारत की धूम मची हुई है. ब्रह्मोस मिसाइल को खरीदने के लिए कई देश कतार में लगे हुए हैं. वहीं, एक और बड़ी खबर सामने आ रही है. इजरायल भारत में आयरन डोम मिसाइल इंटरसेप्‍टर के लिए प्रोडक्‍शन लाइन लगाने पर विचार कर रहा है. इजरायली रक्षा कंपनी राफेल इस बाबत भारतीय कंपनियों के साथ बतचीत कर रही है. बता दें कि आयरन डोम की गिनती दुनिया के बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्‍टम में होती है. अब उसी आयरन डोम के लिए मिसाइल इंटरसेप्‍टर भारत में बनाने की बात चल रही है. यह मेक इन इंडिया के बढ़ते साख को भी दिखाता है। 

‘द यरुशलम पोस्‍ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की अग्रणी रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) भारत में अपने अत्याधुनिक आयरन डोम (Iron Dome) एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइलों के उत्पादन की संभावना तलाश रही है. रिपोर्ट की मानें तो कंपनी इस संबंध में भारतीय डिफेंस कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है. यदि यह बातचीत सफल रहती है तो आयरन डोम इंटरसेप्टर के उत्पादन के लिए भारत इजरायल और अमेरिका के बाद तीसरा प्रमुख मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेंटर बन सकता है. फिलहाल राफेल उत्तरी इजरायल स्थित अपने प्‍लांट में आयरन डोम मिसाइल इंटरसेप्टर का निर्माण करती है. पिछले वर्ष अमेरिका में रेथियॉन (Raytheon) के साथ साझेदारी में भी एक प्रोडक्‍शन लाइन शुरू की गई थी, जो अमेरिकी मरीन कॉर्प्स की नई एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इंटरसेप्टर उपलब्ध करा रही है. आवश्यकता पड़ने पर यह प्‍लांट इजरायल को भी सपोर्ट कर सकता है. मिसाइल हमलों के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए एयर डिफेंस सिस्‍टम की जरूरत पहले से ज्‍यादा महसूस की जाने लगी है। 

मिशन सुदर्शन चक्र को नई धार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रोडक्‍शन लाइन स्थापित करने के पीछे कई रणनीतिक और व्यावसायिक कारण हैं. इससे राफेल को उत्पादन लागत कम करने, वैश्विक बाजार के लिए अतिरिक्त मैन्‍यूफैक्‍चरिंग कैपेबिलिटी डेवलप करने और सप्‍लाई चेन को मजबूत करने में मदद मिलेगी. साथ ही भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुरूप स्थानीय उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. भारत पहले ही इजरायल के साथ संयुक्त रूप से विकसित बराक-8 (Barak-8) लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्‍टम को अपनी वायुसेना, नौसेना और थलसेना में शामिल कर चुका है. हालांकि, कम दूरी की वायु रक्षा आवश्यकताओं के लिए भारत ने स्वदेशी प्रणालियों के विकास पर भी जोर दिया है. ऐसे में आयरन डोम इंटरसेप्टर का भारत में निर्माण दोनों देशों के रक्षा सहयोग को एक नया आयाम दे सकता है. इससे भारत के नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट मिशन सुदर्शन चक्र को भी नई धार मिलने की पूरी संभावना है। 

इजरायली रक्षा कंपनियां भारत में पहले से मौजूद
बता दें कि इजरायली रक्षा कंपनियां पहले से ही भारत में मौजूद हैं. एल्बिट सिस्टम्स (Elbit Systems) अपने हर्मीस-900 और हर्मीस-450 ड्रोन से जुड़े उपकरणों का निर्माण भारत में करती है और यहां बने कुछ पुर्जों की आपूर्ति इजरायल को भी की जाती है. हाल के महीनों में ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद इजरायल में आयरन डोम का व्यापक उपयोग हुआ है. इस दौरान इस प्रणाली का इस्तेमाल ऐसे खतरों के खिलाफ भी किया गया, जिनके लिए इसे मूल रूप से डिजाइन नहीं किया गया था. वैश्विक स्तर पर वायु रक्षा प्रणालियों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत में उत्पादन शुरू होने से राफेल को नए निर्यात बाजारों तक पहुंच बनाने और राजनीतिक चुनौतियों के बीच आपूर्ति बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। 

कोरोना ने फिर बढ़ाई चिंता! आंध्र प्रदेश में 46 वर्षीय व्यक्ति की मौत, दोनों फेफड़े पूरी तरह हुए खराब

कडप्पा 
भारत में एक बार फिर से कोरोना वायरस की वापसी हो गई है. आंध्र प्रदेश के कडप्पा में कोरोना वायरस से 46 साल के एक व्यक्ति की मौत हो गई है. यह जानकारी जिला मेडिकल और हेल्थ ऑफिसर रवि बाबू ने  दी। 

उन्होंने बताया कि मरीज को दवाओं से भी आराम नहीं मिला और चार दिन के इलाज के बाद उसकी जान चली गई. मृतक शराब का आदी था और उसे तेज सांस लेने में दिक्कत और खांसी की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

रवि बाबू ने पीटीआई को बताया कि कडप्पा के मासापेटा इलाके का यह व्यक्ति कोरोना वायरस से जूझ रहा था. उन्होंने कहा कि मरीज शराब पीने का आदी था और उसे सांस लेने में गंभीर तकलीफ के साथ खांसी भी हो रही थी. जब अस्पताल में उसका एक्स-रे किया गया तो पता चला कि उसके दोनों फेफड़े पूरी तरह खराब हो चुके थे. इस वजह से उसे निमोनिया भी हो गया था।

डॉक्टरों ने शुरुआत में मरीज को तेज डोज वाली एंटीबायोटिक दवाएं दीं, लेकिन चार दिन तक इलाज चलने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं आया. इसके बाद डॉक्टरों को शक हुआ कि यह कोरोना वायरस संक्रमण भी हो सकता है. मरीज की छाती का सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हो गई। 

रवि बाबू ने बताया कि मरीज की मौत के बाद इलाके में जरूरी कदम उठाए गए हैं. इसमें जगह की सफाई और सैनिटाइजेशन कराया गया है. साथ ही मृतक के संपर्क में आए लोगों की भी पहचान की जा रही है. इसमें उसके करीबी संपर्क और उनके संपर्क में आए दूसरे लोग, दोनों शामिल हैं ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। 

दोनों फेफड़े हो चुके थे खराब
मृतक कडप्पा के मसापेटा इलाके का रहने वाला था और लंबे समय से शराब का आदी था। अस्पताल में भर्ती होने के समय उसे सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उसका एक्स-रे कराया। इसमें पता चला कि उसके दोनों फेफड़े पूरी तरह से खराब हो चुके थे। संक्रमण के कारण उसे निमोनिया भी हो गया था। इससे उसकी स्थिति और अधिक गंभीर बन गई।

कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई
डॉ. रवि बाबू ने बताया कि मरीज का लगातार चार दिनों तक हाई-डोज एंटीबायोटिक दवाओं से इलाज किया गया। लेकिन उसके स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। लक्षणों के बने रहने और हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों को कोविड-19 संक्रमण की आशंका हुई। इसके बाद मरीज का छाती का सीटी स्कैन कराया गया। इसमें कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई।

स्वास्थ्य विभाग ने उठाए एहतियाती कदम
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोविड-19 की पुष्टि होने के बाद तत्काल एहतियाती कदम उठाए गए। प्रभावित क्षेत्र में सैनिटाइजेशन कराया गया और मरीज के संपर्क में आए लोगों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों ने उसके प्राथमिक और द्वितीयक संपर्कों का पता लगाकर आवश्यक निगरानी और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था भी की।

 

दतिया में बीजेपी में बगावत: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, आशुतोष तिवारी उम्मीदवार घोषित, सड़क पर उतरे समर्थक

हजारों कार्यकर्ताओं ने हाईवे जाम किया, बाजार रहे बंद; जिलाध्यक्ष समेत पदाधिकारियों और पार्षदों के इस्तीफे का दावा, समर्थकों ने लगाए सरकार विरोधी नारे।

मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। टिकट घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को अपना अभिभावक बताते हुए उनके मार्गदर्शन में चुनाव लड़ने की बात कही

वहीं, डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद दतिया में विरोध तेज हो गया। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता जिला कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। विरोध के चलते शहर के कई बाजार भी बंद रहे।

इस बीच यह भी दावा किया जा रहा है कि भाजपा के जिलाध्यक्ष रघुवीर सरण सहित कई पदाधिकारियों और सभी भाजपा पार्षदों ने अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। साथ ही, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ नारेबाजी किए जाने की भी खबर सामने आई है।हालांकि, इस्तीफों, विरोध-प्रदर्शन और अन्य दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पार्टी नेतृत्व की ओर से होना अभी बाकी है। दतिया उपचुनाव में टिकट बदलने के फैसले के बाद भाजपा के भीतर असंतोष खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को झटका, बैंक फ्रॉड मामले में अपील खारिज

दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक की 3 साल की सजा बरकरार, सजा के बाद चली गई थी विधायकी

दिल्ली हाईकोर्ट ने दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की बैंक फ्रॉड मामले में दायर अपील खारिज कर दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के साथ ही निचली अदालत द्वारा सुनाई गई तीन साल की सजा बरकरार रहेगी।

राजेंद्र भारती को बैंक फ्रॉड मामले में दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत दो साल या उससे अधिक की सजा होने के कारण उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई थी।

अब दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद उनकी सजा पर राहत नहीं मिली है। इस फैसले को पूर्व विधायक के लिए बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है। मामले में आगे की कानूनी राहत के लिए उनके पास सुप्रीम कोर्ट का विकल्प उपलब्ध है।

शेख हसीना का बड़ा ऐलान, दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की कही बात; बोलीं- ‘मुझे मार देंगे’

नई दिल्ली

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी. मौत की सजा सुनाए जाने के बावजूद हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा है, लेकिन वह अपने देश लौटने का फैसला नहीं बदलेंगी। रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोनिक इंटरव्यू में 78 वर्षीय हसीना ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटेंगे और न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे. शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में तख्तापलट और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं, जिसके बाद भारत ने उन्हें शरण दी। 

इसके बाद नवंबर 2025 में, बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए दमन और मौतों के मामले में शेख हसीना को उनकी गैरमौजूदगी में ही मौत की सजा सुना दी थी. हालांकि, हसीना इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती रही हैं। 

वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मुझे मार भी सकते हैं. लेकिन फिर भी मैं लौटूंगी.’ बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने देश लौटने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह दिसंबर-2026 के आसपास बांग्लादेश वापस जाएंगी और अदालत में सरेंडर करेंगी. यह पहली बार है जब उन्होंने एक टाइमलाइन बताई है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को दिए करीब एक घंटे के टेलीफोन इंटरव्यू में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा पता है, लेकिन यह भी पता है कि अब अपने देश लौटने का समय आ गया है. उन्होंने कहा, ‘वे मेरे लौटते ही मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, वे मुझे मार भी सकते हैं. लेकिन मुझे जाना ही होगा। 

अपने देश की मिट्टी में मरने की ख्वाहिश
बांग्लादेश की एक ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को फांसी की सजा दे रखी है. शेख हसीना ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनकी मौत होती है तो वह अपने देश की मिट्टी पर हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर जबरदस्त दमन हो रहा है. अगर मौत आती है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी धरती पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था। 

शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा
शेख हसीना को 2024 में सरकार विरोधी छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भागना पड़ा था. वह तब भारत आ गई थीं. बाद में बांग्लादेश के युद्ध अपराध कोर्ट ने छात्र आंदोलन पर कथित कार्रवाई के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई. यह सजा तब सुनाई गई जब वह कोर्ट में मौजूद भी नहीं थीं. हसीना इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही हैं. इतना ही नहीं तख्तापलट के बाद उनके पिता से जुड़े स्मारक तोड़ गए. साथ ही उनकी पार्टी को पूरी तरह बैन कर दिया गया। 

‘मेरा फैसला जनता करे’
शेख हसीना ने कहा कि उन्हें जेल से डर नहीं लगता, क्योंकि वह पहले भी जेल जा चुकी है. उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार से गलतियां हुई हैं तो उसका फैसला अदालत या विरोधी नहीं, बल्कि जनता को करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘कोई भी सरकार जब लंबे समय तक काम करती है तो पूरी तरह गलतियों से मुक्त नहीं होती. लेकिन किसी सरकार ने अच्छा काम किया या बुरा, इसका फैसला जनता को करना चाहिए। 

CM योगी का दावा: ‘बस्ती में कब्रिस्तान के नाम पर हो रहे कब्जे को कार्यकर्ताओं ने हटवाया’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस्ती की एक पुरानी घटना का किया जिक्र, कहा— सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष की शिकायत पर कराई गई थी कार्रवाई।

बस्ती: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बस्ती की एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए दावा किया कि कब्रिस्तान के नाम पर हो रहे कथित अवैध कब्जे को उनकी पहल पर हटवाया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय समाजवादी पार्टी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष उनके पास आए थे। उनके घर के पास कब्रिस्तान के नाम पर जबरदस्ती कब्जा किया जा रहा था। उन्होंने कहा, “वे मेरे पास आए और कहने लगे कि लखनऊ में बैठे लोगों को केवल कब्रिस्तान दिखाई देता है, हम जैसे लोग नहीं दिखाई देते।”

योगी आदित्यनाथ ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने तत्काल कार्यकर्ताओं को मौके पर भेजा और कब्रिस्तान के नाम पर हो रहे कथित कब्जे को हटवाया।

मुख्यमंत्री ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा आम नागरिकों के हितों की रक्षा करना और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना रही है।

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