चारधाम यात्रा पर बारिश का कहर, नदियां उफान पर; बदरीनाथ नेशनल हाईवे बंद, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

रुद्रप्रयाग

उत्तराखंड में मॉनसून की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। राज्य के सभी हिस्सों में बारिश हो रही है। खासकर पहाड़ी जिलों में तेज बारिश का सिलसिला जारी है। चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश हो रही है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यहां अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। उधर, बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने और सड़क धसने के कारण बंद हो गया है।

गुरुवार को रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) नंदन सिंह राजवार ने बताया कि ऊपरी हिमालयी इलाकों में बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ रहा है और इलाके में जलस्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है। राजवार ने कहा कि अभी जलस्तर समुद्र तल से 622 मीटर ऊपर है, जबकि चेतावनी का स्तर 626 मीटर और खतरे का स्तर 627 मीटर है।

वाट्सएप पर भेजे जाएंगे अलर्ट
उन्होंने कहा कि जैसे ही जलस्तर चेतावनी के निशान तक पहुंचेगा, WhatsApp ग्रुप के ज़रिए अलर्ट जारी किए जाएंगे, गाड़ियों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएँगी और निवासियों को आगाह करने के लिए ज़मीनी टीमें तैनात की जाएँगी। रुद्रप्रयाग में बुधवार से लगातार बारिश हो रही है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहती है, तो दोनों नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है और खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। बदलती स्थिति को देखते हुए, जिला आपदा नियंत्रण कक्ष नदियों के जलस्तर पर कड़ी नज़र रख रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले निवासियों और तीर्थयात्रियों से सतर्क रहने और ज़रूरत न होने पर नदी के किनारे या अन्य जोखिम वाले इलाकों में न जाने की अपील की है।

मौसम विभाग ने 4 जुलाई तक जारी किया है अलर्ट
देहरादून में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रुद्रप्रयाग जिले में 4 जुलाई तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और ज़िला प्रशासन ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। रुद्रप्रयाग के अलावा आज देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ है। वहीं, हरिद्वार, उत्तरकाशी और चमोली के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है।

बदरीनाथ नेशनल हाईवे बंद
भारी बारिश के कारण बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने से बंद हो गया है। यहां पर संबंधित विभागों ने सड़क खोलने का काम सुचारु कर दिया है, लेकिन अभी भी रुक रुक कर बारिश जारी है। बता दें कि बुधवार देररात्रि लगभग 2 के बाद पगनो गांव की ओर से भारी बरसाती नाला आने के कारण मलबा व बोल्डर आने से बदरीनाथ नेशनल हाईवे में 50 मीटर से अधिक सड़क में मालबा फैला हुआ है। सड़क पर काफी बोलडर भी आ रखे हैं। जिस कारण से अभी तक सड़क सुचारू नहीं हो पाई है। सड़क खोलने का काम जारी है।

मोहन भागवत बोले- पाकिस्तान से भारत आए लोग शरणार्थी नहीं, देश के लिए संघर्ष करने वाले योद्धा थे

नागपुर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना। 

भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन ‘सिंधु एजुकेशन सोसाइटी’ के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें। 

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे।

‘उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति’
मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं।

जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो।

उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय। 

भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना। 

RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं। 

वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

MP Congress: पीसी शर्मा का कैलाश विजयवर्गीय पर तंज, बोले- ‘अगर सरकार में सुनवाई नहीं हो रही तो इस्तीफा दे दें’

MP Congress: पीसी शर्मा का कैलाश विजयवर्गीय पर तंज, बोले- ‘अगर सरकार में सुनवाई नहीं हो रही तो इस्तीफा दे दें’

भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाज़ी का दौर लगातार जारी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा और अपनी ही पार्टी से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ कोर्ट के निर्देशों, कांग्रेस में कथित ‘स्लीपर सेल’ विवाद और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को लेकर तीखे बयान दिए।

जीतू पटवारी के कोर्ट मामले पर क्या बोले?

जीतू पटवारी के खिलाफ कोर्ट के निर्देशों को लेकर पूछे गए सवाल पर पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष पूरे मध्य प्रदेश में लगातार दौरे करते रहते हैं। संभव है कि इसी वजह से वे किसी पेशी में उपस्थित नहीं हो पाए हों। उन्होंने कहा कि अगली तारीख पर वे अदालत में पेश हो जाएंगे और इसमें कोई बड़ी बात नहीं है।

बाप-बेटे का मामला, बाकी लोग बीच में न पड़ें’

दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह से जुड़े विवाद और पार्टी में चल रही बयानबाज़ी पर पीसी शर्मा ने इसे “बाप-बेटे का मामला” बताया। उन्होंने कहा कि पिता-पुत्र के बीच की बात को दूसरे लोगों को मुद्दा नहीं बनाना चाहिए और वे आपस में इस मामले को सुलझा लेंगे।

स्लीपर सेल पर साधा निशाना

कांग्रेस में ‘स्लीपर सेल’ को लेकर चल रही बहस पर पीसी शर्मा ने कहा कि जो लोग ऐसे आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले अपना गिरेबान झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि असली स्लीपर सेल वे लोग हैं जो कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं और बाद में पार्टी में पद हासिल कर लेते हैं।

कैलाश विजयवर्गीय पर कसा तंज

प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र को लेकर भी सवाल पूछा। इस पर पीसी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा, “अगर कैलाश विजयवर्गीय जी के साथ न्याय नहीं हो रहा है और सरकार में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।”

सियासी बयानबाज़ी तेज

पीसी शर्मा के इन बयानों से साफ है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस के अंदरूनी विवाद और भाजपा पर हमले दोनों एक साथ जारी हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।

Amarnath Yatra 2026: ‘बम बम भोले’ के जयघोष के बीच पहला जत्था रवाना, एलजी मनोज सिन्हा ने दिखाई हरी झंडी

 जम्मू
 जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा।

अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’

पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। 

जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह
यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है। 

कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला
यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया। 

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी
इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं। 

हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़
प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं। 

उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की।

जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की।

अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है।

इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।

भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और कहा कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड द्वारा किए गए व्यापक प्रबंध श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित एवं सुविधाजनक बनाएंगे।

WhatsApp के नए Username फीचर पर सरकार की नजर, फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच

 नई दिल्ली

WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम फीचर लॉन्च किया है. इस फीचर की मदद से अब लोग अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी किसी दूसरे यूजर से बात कर सकेंगे। 

कंपनी का कहना है कि इससे यूजर्स की प्राइवेसी पहले से ज्यादा मजबूत होगी. लेकिन भारत सरकार इस फीचर को लेकर सतर्क हो गई है. सरकार को आशंका है कि अगर इसका गलत इस्तेमाल हुआ तो ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी पहचान वाले मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है। 

WhatsApp का यूजरनेम फीचर स्कैमर्स के लिए फायदेमंद तो नहीं?

सरकारी सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार वॉट्सऐप नए यूजरनेम फीचर के गोपनीयता और सुरक्षा पहलुओं की जांच करने की तैयारी में है. सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं यह फीचर साइबर अपराधियों के लिए नई सुविधा तो नहीं बन जाएगा। 

अगर जांच में कोई गंभीर खामी या सुरक्षा से जुड़ी समस्या सामने आती है, तो वॉट्सऐप की पेरेंट कंपनी मेटा को नोटिस भी भेजा जा सकता है। वॉट्सऐप का यह फीचर टेलीग्राम की तरह काम करता है. पहले किसी नए शख्स से वॉट्सऐप पर बात करने के लिए मोबाइल नंबर जरूरी होता था. अब यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी बातचीत शुरू कर सकता है। 

इसका फायदा यह होगा कि आपका मोबाइल नंबर सामने वाले व्यक्ति को नहीं दिखेगा. कंपनी का कहना है कि इससे प्राइवेसी बेहतर होगी और अनजान लोगों के साथ नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

किसी के नाम से यूजरनेम बना कर लोगों के साथ हो सकती है ठगी
हालांकि सरकार की चिंता दूसरी भी है. अधिकारियों का मानना है कि अगर कोई शख्स किसी दूसरे के नाम जैसा यूजरनेम बना ले या अपनी असली पहचान छिपाकर लोगों से संपर्क करे, तो ऑनलाइन ठगी के नए तरीके सामने आ सकते हैं। 

टेलीग्राम पर पहले भी फर्जी यूजरनेम और नकली प्रोफाइल के जरिए लोगों को धोखा देने के कई मामले सामने आ चुके हैं. इसी वजह से सरकार वॉट्सऐप के नए फीचर को लेकर एक्स्ट्रा सावधानी बरत रही है। 

सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने भी इस फीचर को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि प्राइवेसी बढ़ाना अच्छी बात है, लेकिन अगर पहचान छिपाना आसान हो गया तो स्कैमर्स इसका फायदा उठा सकते हैं. खासकर ऐसे यूजरनेम जो किसी कंपनी, सेलिब्रिटी या दूसरे व्यक्ति से मिलते-जुलते हों, वे लोगों को आसानी से भ्रमित कर सकते हैं। 

वॉट्सऐप अपनी ओर से कुछ सुरक्षा उपाय भी दिए हैं. कंपनी का कहना है कि हर यूजरनेम यूनिक होगा और कुछ हाई-प्रोफाइल नाम पहले से सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि उनकी नकल न की जा सके। 

इसके अलावा वॉट्सऐप किसी तरह की पब्लिक यूजरनेम डायरेक्टरी भी नहीं बना रहा है. यानी किसी व्यक्ति का यूजरनेम तभी इस्तेमाल किया जा सकेगा, जब वह आपको पहले से पता हो। 

भारत में गहराता जल संकट! 18% आबादी के लिए सिर्फ 4% पानी, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

 नई दिल्ली

भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है। 

तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी। 

PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है। 

आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, “भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है। 

सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम 
भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है। 

रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं। 

PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है। 

इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

EV Charging Alert: भारत के 45% घर इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के लिए अनफिट, लापरवाही से लग सकती है आग

 नई दिल्ली

देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिए जाने के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. भारत के लगभग 45% घरों को सुरक्षित रूप से EV चार्ज करने के लिए अपने इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की सख्त जरूरत है। 

यह जानकारी ‘द नेट-ज़ीरो ट्रांज़िशन स्टार्ट्स एट होम: इनेबलिंग EV-रेडी रेजिडेंसेस इन इंडिया’ नाम की एक नई रिपोर्ट से मिली है. यह रिपोर्ट भारत के टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों के अनुभवों पर आधारित है, इसके लिए स्वतंत्र घरों, अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स, झुग्गी-बस्तियों और किराए के मकानों में लगे 80,000 से अधिक घरेलू EV चार्जर्स के डेटा का अध्ययन किया गया है। 

ये रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब सरकारें EV को अपनाने के लिए कड़े कदम उठा रही हैं, जैसे दिल्ली सरकार ने जनवरी 2027 से नए पेट्रोल-सीएनजी तिपहिया वाहनों और अप्रैल 2028 से पेट्रोल दोपहिया वाहनों के पंजीकरण पर रोक लगाने का फैसला किया है। 

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल 55 प्रतिशत संभावित EV खरीदारों के पास ही घरेलू चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है, जबकि आवासीय चार्जिंग ही इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का सबसे प्राथमिक माध्यम है. रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में EV से जुड़ी बिजली की खपत साल 2024 में कुल राष्ट्रीय मांग के महज 0.2 प्रतिशत से बढ़कर साल 2035 तक लगभग 6 प्रतिशत हो जाएगी। 
 
पिछले एक दशक में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है, लेकिन घरों में चार्जिंग की सुविधा अभी भी बेहद असमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षित और भरोसेमंद चार्जिंग के लिए हर घर को एक न्यूनतम मानक पूरा करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोग सामान्य पावर सॉकेट, अस्थायी एक्सटेंशन केबल और साझा बिजली कनेक्शन जैसे असुरक्षित तरीकों पर निर्भर हैं। 

असुरक्षित चार्जिंग से जुड़े बड़े खतरे
शोधकर्ताओं ने कड़ी चेतावनी दी है कि घरेलू स्तर पर किए जाने वाले इस तरह के अनौपचारिक या जुगाड़ू चार्जिंग इंतजामों से आग लगने का भारी खतरा रहता है, साथ ही इलेक्ट्रिकल फॉल्ट और महंगे उपकरणों को नुकसान पहुंच सकता है. जब इन सामान्य सर्किट्स पर अत्यधिक लोड पड़ता है, तो इससे वोल्टेज में भारी उतार-चढ़ाव, तारों का जरूरत से ज्यादा गर्म होना , ट्रांसफार्मर का खराब होना और स्थानीय इलाकों में बिजली गुल होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसके अलावा, असुरक्षित तरीके से की जाने वाली चार्जिंग से न सिर्फ वाहन के चार्ज होने की निरंतरता प्रभावित होती है, बल्कि गाड़ी की बैटरी भी समय से पहले तेजी से खराब हो सकती है। 

85% भारतीयों को AI पर भरोसा, भविष्य को लेकर भी बेहद आशावादी: रिपोर्ट

नई दिल्ली 
 भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें।

अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे।

उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे।

अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

सिंधु जल विवाद पर भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान को एक बूंद पानी नहीं देने की दोहराई बात

नई दिल्ली

सिंधु जल संधि को लेकर भारत ने एक बार फिर अपना रुख साफ कर दिया है. केंद्र सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि 23 अप्रैल 2025 से सिंधु जल संधि को स्थगित (Abeyance) रखा गया है और यह फैसला तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय और स्थायी रूप से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना पूरी तरह बंद नहीं कर देता. ऐसे में पाकिस्तान की ओर से लगातार उठाई जा रही आपत्तियों और पत्राचार का भारत की नीति पर फिलहाल कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है। 

इसी बीच पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह ने दावा किया है कि उन्होंने पिछले साल अप्रैल से अब तक भारत के अपने समकक्ष को चिनाब नदी के जल प्रवाह में उतार-चढ़ाव को लेकर चार पत्र लिखे हैं, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला. उनका कहना है कि सबसे हालिया पत्र उन्होंने सोमवार रात भेजा, जिसमें चिनाब के जलस्तर में महत्वपूर्ण बदलाव पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। 

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद में आयोजित एक सेमिनार में शाह ने कहा कि चिनाब नदी के प्रवाह में हो रहा उतार-चढ़ाव केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि रणनीतिक जोखिम है. उनके मुताबिक नदी के जल प्रवाह से जुड़ा डेटा साझा न होने से पाकिस्तान के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि बदलाव प्राकृतिक कारणों से हुआ है या फिर ऊपरी हिस्से में किसी मानवीय गतिविधि के कारण। 

हालांकि भारत की घोषित नीति बिल्कुल स्पष्ट है. 23 अप्रैल 2025 को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह फैसला लिया था कि 1960 की सिंधु जल संधि को तब तक स्थगित रखा जाएगा, जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से बंद नहीं करता. भारत का कहना है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय सहयोग एक साथ नहीं चल सकते। 

क्या है सिंधु जल संधि
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का जल भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया. संधि के तहत दोनों देशों के बीच जल प्रवाह से जुड़ा डेटा साझा करने, निरीक्षण करने और विवादों के समाधान के लिए स्थायी तंत्र भी बनाया गया था. लेकिन संधि स्थगित होने के बाद दोनों देशों के बीच यह संस्थागत संवाद लगभग ठप पड़ गया है। 

पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त का कहना है कि पिछले एक वर्ष में उनके देश ने संधि के तहत डेटा साझा करना जारी रखा, बैठकों का प्रस्ताव भेजा, निरीक्षण और परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी मांगी, लेकिन भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. उन्होंने दावा किया कि मई 2022 के बाद दोनों देशों के आयुक्तों की कोई बैठक नहीं हुई और अगस्त 2023 के बाद कई महत्वपूर्ण संधि संबंधी पत्रों का भी जवाब नहीं आया। 

शाह ने यह भी कहा कि किसी भी निचले प्रवाह वाले देश (डाउनस्ट्रीम स्टेट) के लिए जल प्रवाह का नियमित डेटा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिचालन आवश्यकता है. उनके अनुसार यदि जानकारी नहीं मिलेगी तो यह तय करना मुश्किल होगा कि नदी के प्रवाह में बदलाव प्राकृतिक है या फिर ऊपरी हिस्से में किसी परियोजना के संचालन का परिणाम। 

पाकिस्तान जता रहा चिंता
हाल के महीनों में चिनाब नदी के जल प्रवाह में बदलाव को लेकर पाकिस्तान कई बार चिंता जता चुका है. वहीं भारत के कुछ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सरकार पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के अधिकतम उपयोग की दिशा में काम कर रही है. भारत लंबे समय से यह भी कहता रहा है कि संधि के तहत उसे पश्चिमी नदियों पर मिलने वाले अधिकारों का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है और अब वह अपने वैध अधिकारों के अनुरूप परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर देगा। 

पाकिस्तान लगातार मांग कर रहा है कि भारत एकतरफा तरीके से नदी के प्रवाह में बदलाव न करे और संधि के तहत अपनी जिम्मेदारियां निभाए. साथ ही उसने सिंधु जल आयोग की बैठक दोबारा बुलाने, डेटा साझा करने और संयुक्त निरीक्षण शुरू करने की भी अपील की है। 

भारत का रुख
हालांकि मौजूदा हालात में भारत का रुख बदलता नहीं दिख रहा. नई दिल्ली ने साफ कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर निर्णायक और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर पहले जैसी व्यवस्था बहाल नहीं होगी. यानी जल सहयोग का भविष्य अब केवल तकनीकी या कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के रवैये से जुड़ गया है। 

PM मोदी और शहबाज शरीफ को लिखी 100 हस्तियों की चिट्ठी पर BJP का हमला, जानें किन नेताओं के नाम शामिल

 नई दिल्ली

भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से शांति और कूटनीतिक संबंध बहाल करने की मांग को लेकर एक नया सियासी बवाल खड़ा हो गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और आरजेडी सांसद मनोज झा समेत 100 से अधिक भारतीय और पाकिस्तानी नेताओं व सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ को एक खुला पत्र लिखा है।

हालांकि, इस चिट्ठी के सामने आते ही सत्तारूढ़ बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इन नेताओं को ‘आतंकी समर्थक’ करार दिया है। इस अपील का समन्वय नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस’ के प्रमुख ओ.पी. शाह ने किया है। चिट्ठी में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से दक्षिण एशिया में शांति, बातचीत और सहयोग की बहाली के लिए सार्थक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

चिट्ठी में की गई हैं ये मुख्य मांगें

  • पत्र में दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाने की वकालत की गई है।
  •     पूर्ण कूटनीतिक संबंधों को फिर से बहाल करना और नई दिल्ली व इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की दोबारा नियुक्ति करना।
  •     सामान्य वीजा सेवाओं को फिर से शुरू करना और जम्मू-कश्मीर समेत सभी लंबित मुद्दों पर व्यापक द्विपक्षीय बातचीत शुरू करना।
  •     2004-2007 के कश्मीर फ्रेमवर्क पर पुनर्विचार करते हुए दोनों देशों की सुरक्षा चिंताओं को दूर करते हुए सैन्य वापसी।
  •     साथ ही व्यापार और यात्रा के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर को फिर से खोलना।
  •     श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा, लाहौर-दिल्ली बस सेवा, समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस को फिर से शुरू करना।
  •     कारगिल-स्कर्दू मार्ग पर यात्रा की अनुमति देना।
  •     कमर्शियल उड़ानों के लिए दोनों देशों का हवाई क्षेत्र फिर से खोलना और मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस देना।
  •     करतारपुर साहिब कॉरिडोर और नीलम घाटी (पाकिस्तान) स्थित शारदा पीठ को फिर से खोलना। मीडिया और पत्रकारों पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना।

किन प्रमुख चेहरों ने किए हस्ताक्षर?
भारत से फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, पूर्व रॉ चीफ ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, प्रो. सैफुद्दीन सोज और प्रो. अपूर्वानंद आदि ने इस पर साइन किए हैं।

पाकिस्तान से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी, शिक्षाविद परवेज हुदभॉय, पूर्व सीनेटर फरहतुल्लाह बाबर, बीना सरवर, सलीमा हाशमी और ए.एच. नय्यर आदि ने साइन किए हैं।

‘ पहले आतंकियों का समर्थन बंद करे पाकिस्तान’
प्रेम शुक्ला ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों के ‘पाकिस्तान से संवाद’ वाले बयान पर साफ कहा, ‘पाकिस्तान आतंकवादियों का समर्थन करना बंद कर दे तो बातचीत शुरू हो जाएगी.’ हाल ही में RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि भारत को ‘पाकिस्तान के साथ संवाद के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिएं.’ हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद के प्रति कड़े रुख में कोई नरमी नहीं बरतनी चाहिए। 

भारत-पाक के 117 प्रमुख लोगों ने लिखा ओपन लेटर
भारत-पाक के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग को लेकर भारत और पाकिस्तान के 117 प्रमुख लोगों ने संयुक्त शांति प्रस्ताव के तहत पत्र पर साइन किया है. इसमें भारत की ओर से फारूक अब्दुल्ला, मीरवाइज उमर फारूक, महबूबा मुफ्ती, मनोज झा और हुमायूं कबीर समेत 61 हस्ताक्षरकर्ता शामिल हैं. डिजिटल फॉर्मेट पर नेताओं ने हस्ताक्षर किया है। 

सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस की ओर से पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखे गए ओपन लेटर में भारत-पाक के बीच बातचीत, पूर्ण राजनयिक संबंध बहाल करने और लोगों के आपसी संपर्क फिर शुरू करने की मांग की है. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक आवाजाही को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है। 

ये रहे 61 भारतीय जिन्होंने लेटर पर साइन किए हैं- 

क्रमांक साइन करने वाले भारतीयों के नाम
1. डॉ. फारूक अब्दुल्ला
2. मीरवाइज उमर फारूक
3. महबूबा मुफ्ती
4. मणिशंकर अय्यर
5. प्रो. मनोज झा
6. ए.एस. दुलत
7. जवाहर सरकार
8. मोहम्मद यूसुफ तारिगामी
9. आगा सैयद हसन मोसावी
10. शाहिद सिद्दीकी
11. रीता मनचंदा
12. संदीप पांडे
13. प्रो. सैफुद्दीन सोज़
14. आगा सैयद मुंतज़िर मेहदी
15. इमरान अहमद हसन
16. डॉ. जॉन दयाल
17. ललिता रामदास
18. हुमायूं कबीर
19. जयंत घोषाल
20. प्रो. अपूर्वानंद
21. मुजफ्फर शाह
22. दया सिंह
23. एम.एम. अंसारी
24. डॉ. फुआद अली हलीम
25. जफर मिन्हास
26. बिलाल गनी लोन
27. अरविंद सहारन
28. आई.डी. खजूरिया
29. बी.एल. सराफ
30. फादर सुनील रोसारियो
31. सैयद इरफान शेर
32. डॉ. मुस्लिम जान
33. गोपा मुखर्जी
34. डॉ. रमेश रैना
35. कुमार प्रशांत
36. एन.डी. पंचोली
37. प्रह्लाद गोयनका
38. सुभाष कालरा
39. रीता चक्रवर्ती
40. रूबी अरुण
41. के.एस. सुब्रमण्यम
42. सज्जाद अजहर
43. बलकार सिंह
44. सैयद सलीम गिलानी
45. बिमल शर्मा
46. मालती सुब्रमण्यम
47. अनिल हेब्बार
48. अमिताव दत्ता
49. डॉ. सुनीलम
50. सलीम इंजीनियर
51. सुजादा बशीर
52. बिन्नी यादव
53. रुमान मेक्की
54. तौसीफ अहमद खान
55. संतोष खजूरिया
56. एडवोकेट यासमीन
57. राकेश यादव
58. कुणाल बनर्जी
59. रोहिणी सिंह
60. सुनील वट्टल
61. ओ.पी. शाह

मीरवाइज ने किया बचाव- जब अमेरिका-ईरान बात कर सकते हैं, तो हम क्यों नहीं?

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने इस अपील का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि अगर संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं, तो भारत और पाकिस्तान को भी संवाद करना चाहिए। उनका तर्क है कि युद्ध से विवाद हल नहीं होते, केवल बातचीत ही कश्मीर समेत अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों का समाधान कर सकती है।

 बीजेपी का करारा प्रहार- ‘शहीदों का अपमान कर रहे हैं ये नेता’

इस कदम के बाद बीजेपी ने हस्ताक्षरकर्ताओं पर करारा हमला बोला है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इन नेताओं को ‘आतंक का समर्थक’ बताते हुए इनकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। पूनावाला ने कहा कि यह अपील ऐसे समय में आई है जब ‘पहलगाम आतंकी हमले’ के बाद भारत आतंकवाद के खिलाफ बेहद सख्त नीति अपना रहा है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने साफ कर दिया है कि वह आतंकियों और उन्हें पनाह देने वालों के बीच कोई फर्क नहीं करेगा। पूनावाला ने सिंधु जल समझौते को स्थगित रखने के भारत के फैसले को याद दिलाते हुए कहा कि ‘नया भारत’ आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सेना और आतंक के पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय, ये नेता बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, “ये वही लोग हैं जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाए थे। इनका यह नया कदम देश के शहीदों और सशस्त्र बलों का सीधा अपमान है।”

 

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