जॉर्जिया के हाईवे पर बारिश के बीच जेटलाइनर हादसा: चौंका देने वाला मंजर

जॉर्जिया के हाईवे पर बारिश के बीच जेटलाइनर हादसा: चौंका देने वाला मंजर

  सोमवार दोपहर जॉर्जिया में भारी बारिश के दौरान एक बड़ा विमान हादसा सामने आया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक कमर्शियल जेटलाइनर लैंडिंग के बाद रनवे से आगे निकल गया और फिसलते हुए कई लेन वाले व्यस्त हाईवे तक पहुंच गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, तेज बारिश और गीली सतह के कारण विमान को नियंत्रित करना बेहद मुश्किल हो गया। विमान के हाईवे की ओर बढ़ते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के दौरान विमान के पीछे धुएं और मलबे की लकीर दिखाई दी, जिससे घटनास्थल का दृश्य बेहद भयावह बन गया।

फिलहाल संबंधित एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों की ओर से विमान में सवार यात्रियों और चालक दल की स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

यदि आप इस क्षेत्र में हैं, तो स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और प्रभावित मार्गों से दूर रहें। किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी अपडेट पर ध्यान दें।

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ई-रिक्शा विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन, Google Play Store से हटाया गया BAT-BMS App

नई दिल्ली

सरकार के निर्देश पर ई-रिक्शा को बंद करने वाले ऐप BAT BMS App को Google Play Store और Apple App Store से हटा दिया गया है. इस कार्रवाई के तहत दो ऐप्स डिलीट किए गए हैं. आरोप है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से (रिमोट के जरिए) बंद करने के लिए किया जा रहा था.  सुरक्षा और संभावित गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. मामले की जांच और निगरानी आगे भी जारी रहेगी। 

हाल ही में सोशल मीडिया पर BAT BMS App से जुड़े कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए हैं. इनमें दावा किया गया कि इस ऐप के जरिए कुछ लोग ई-रिक्शा को दूर से ही बंद कर रहे थे, जिससे कई चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. ई-रिक्शा अचानक बंद होने की घटनाओं और चालकों की बढ़ती शिकायतों के बाद इस मामले ने गंभीर रूप ले लिया, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी। 

क्या है BAT BMS App?
कई सस्ते ई-रिक्शा में लिथियम-आयन बैटरी लगी होती है. इन बैटरियों के अंदर बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है, जो बैटरी की स्थिति पर नजर रखता है. यह बताता है कि बैटरी में कितना चार्ज बचा है, वह ज्यादा गर्म तो नहीं हो रही और कहीं कोई तकनीकी खराबी तो नहीं है.  कुछ सस्ती, खासकर चीन में बनी बैटरियों में इस BMS के साथ ब्लूटूथ की सुविधा भी दी जाती है। 

अगर इस ब्लूटूथ पर पासवर्ड या सुरक्षा लॉक नहीं लगाया गया हो, तो आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से उससे कनेक्ट हो सकता है. ठीक वैसे ही जैसे बिना पासवर्ड वाले वाई-फाई या खुले ब्लूटूथ से कोई भी जुड़ सकता है. BAT-BMS ऐप इसी ब्लूटूथ कनेक्शन का इस्तेमाल करके बैटरी के सिस्टम तक पहुंच सकता है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से बड़ा रिस्क माना जा रहा है। 

क्या है ब्लूटूथ कनेक्शन की रेंज?
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में सुरक्षा लॉक नहीं होता, उनमें ब्लूटूथ की रेंज आमतौर पर 10 से 15 मीटर तक होती है. इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति सड़क किनारे, पास खड़े वाहन या बाइक से भी ब्लूटूथ के जरिए बैटरी सिस्टम से जोड़ने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में ई-रिक्शा अचानक बंद हो सकता है और चालक को ये भी समझ ही नहीं आता कि रिक्शा में क्या दिक्कत आई है। 

हालांकि, अच्छी और ब्रांडेड कंपनियों की बैटरियों में मजबूत सुरक्षा और एन्क्रिप्शन सिस्टम होता है, इसलिए उन पर इस तरह का रिस्क नहीं माना जाता है. यह रिस्क ज्यादातर से कम कीमत वाली और बाद में लगाई गई (आफ्टरमार्केट) बैटरियों में देखी जा रही है, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में ई-रिक्शा में किया जाता है। 

केतन अग्रवाल मर्डर केस: पुलिस घेरे में सिया गोयल का कथित ‘मिडिल फिंगर’ इशारा, VIDEO वायरल

पुणे 
पुणे में अपने ही मंगेतर की बेरहमी से हत्या की साजिश रचने वाली सिया गोयल को अपने किए का जरा भी अफसोस नहीं है। यह बातें लोग सिया गोयल के हाल ही में सामने आए वीडियो को देख कर कह रहे हैं। सिया गोयल ने पुलिस की कस्टडी में ही कैमरे की तरफ एक भद्दा और अश्लील इशारा किया है। वीडियो में सिया गोयल पुलिस घेरे के बीच ही ‘मिडिल फिंगर’ दिखाती नजर आ रही है। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और लोग उसकी इस हरकत को देख दंग रह गए हैं।

गौरतलब है कि बीते 18 जून को सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी संग मिलकर पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन विशाल अग्रवाल को 400 फीट गहरी खाई में धक्का देकर मार डाला। सिया और केतन की इसी साल फरवरी में सगाई हुई थी और दोनों की शादी नवंबर में तय हुई थी। लेकिन इससे पहले ही सिया गोयल ने साजिश रची। सिया ने जांच के दौरान अपना जुर्म कबूल लिया है और कहा है कि वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी और इसीलिए उसे रास्ते से हटाने के लिए चेतन संग मिलकर मार डाला। फिलहाल दोनों पुलिस कस्टडी में हैं। इस दौरान ही सिया ने कैमरे की तरफ यह अश्लील इशारा किया।

वीडियो में क्या?
जानकारी के मुताबिक जब पुणे पुलिस सिया को उसके मार्केट यार्ड स्थित घर से जांच के बाद बाहर ला रही थी, तब उसने वहां तैनात कैमरों को देखकर मिडिल फिंगर दिखाई। 12 सेकेंड की इस वीडियो में सिया काले रंग की टी-शर्ट में दिखाई देती है। वहीं उसका चेहरा स्कार्फ से ढका हुआ था। पुलिस उसे घर की सीढ़ियों से नीचे लेकर आ रही होती है। जैसे ही सिया घर से बाहर निकलती है और कैमरों को देखती है, वह अश्लील इशारा करती है।

वीडियो को देख लोग हैरान रह गए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सिया गोयल की उम्र के साथ साथ हरकतें भी बच्चों वाली है। वहीं कुछ लोग उसकी हिम्मत को देखकर दंग रह गए हैं। एक यूजर ने लिखा, “इसकी हिम्मत को देखो। बिल्कुल पछतावा नहीं है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “सिया को सच में कुछ मानसिक परेशानी है। चाहे वो चेतन हो या केतन, उन्हें एक दिन मुसीबत में पड़ना ही था। हैरानी इस बात की है कि केतन के परिवार को ये पहले क्यों नहीं दिखा।”

जांच जारी
इस बीच पुलिस की जांच जारी है। पुलिस ने गुरुवार को लोहगढ़ किले के पहाड़ी इलाके के आसपास की जांच की है और सभी जगहों को मार्क भी किया है। जांच के तहत सिया गोयल को भी दोबारा किले पर ले जाया गया। सबूत के तौर पर पुलिस ने सिया के उन कपड़ों को भी जब्त कर लिया है जो उसने घटना के दिन पहने थे। इस बीच आगे की जांच के लिए पुलिस ने लोनावला में सिया गोयल के घर भी गई। जानकारी के मुताबिक हत्या की कड़ियों को जोड़ने वाले सबूत तलाशने के लिए उसके कमरे की तलाशी ली गई।

सिया गोयल का होगा लाई डिटेक्टर टेस्ट
इस बीच इस बात का खुलासा अब तक नहीं हो पाया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी में से केतन को धक्का किसने दिया। खबर है कि इसका पता लगाने के लिए अब पुलिस दोनों का झूठ पकड़ने वाला परीक्षण यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की भी तैयारी कर रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस को उनके बयानों में गड़बड़ी का आभास हुआ है और इस कारण ही दोनों की साइंटिफिक टेस्टिंग कराने का फैसला लिया गया है।

‘ऐसा मत करो’ की सलाह देने का दावा
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया है कि युवक ने दोनों को  योजना पर आगे नहीं बढ़ने की सलाह दी थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसे योजना की कितनी जानकारी थी और घटना के बाद उसकी आरोपियों से क्या बातचीत हुई. सूत्रों का यह भी कहना है कि केतन की मौत के बाद चेतन सबसे पहले इसी युवक से मिला था. वहीं सिया ने भी उससे संपर्क किया था. पुलिस इन दावों की पुष्टि के लिए कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल चैट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर रही है। 

रिहर्सल वाले स्थान पर पहुंची पुलिस
पुणे ग्रामीण पुलिस गुरुवार सुबह सिया गोयल को उस स्थान पर लेकर गई, जहां पुलिस के अनुसार उसने और चेतन ने कथित तौर पर पहले से अभ्यास किया था कि लोहागढ़ किले पर किसी व्यक्ति को चट्टान से कैसे धक्का दिया जा सकता है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह स्थान पुणे के लुल्लानगर इलाके में एक क्लब के पास स्थित है. जांच के दौरान सिया ने उस जगह की पहचान की, जहां कथित तौर पर यह रिहर्सल हुई थी. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह कथित रिहर्सल मई महीने में किस तारीख को हुई थी और उस समय वहां कौन-कौन मौजूद था। 

पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया 
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस ने वडगांव मावल अदालत में सिया गोयल और चेतन चौधरी का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की अनुमति मांगी है. पुलिस का कहना है कि अदालत की प्रक्रिया पूरी होने और आरोपियों की सहमति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी. पॉलीग्राफ टेस्ट के जरिए जांच एजेंसियां पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच सामंजस्य की जांच करना चाहती हैं। 

पुलिस ने सिया के पुणे स्थित घर की तलाशी के दौरान वे कपड़े भी बरामद किए हैं, जिन्हें पुलिस के अनुसार उसने 18 जून को पहना था. इन कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि उपलब्ध अन्य सबूतों से उनका मिलान किया जा सके. जांच अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में बड़ी मात्रा में तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए हैं. इनमें मोबाइल फोन का डेटा, लोकेशन, कॉल डिटेल, चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल हैं. इन सभी की फोरेंसिक जांच की जा रही है ताकि घटनाक्रम की सटीक टाइमलाइन तैयार की जा सके। 

Himachal Rain: मॉनसून का कहर, 9 लोगों की मौत, 49 सड़कें बंद; बारिश-भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित

 शिमला

हिमाचल प्रदेश में मॉनसून जहां राहत लेकर आया है तो वहीं भारी बारिश और भूस्खलन से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित है. कई सड़कें बंद हो गई हैं. प्रदेश में अब तक मॉनसून से जुड़े अलग-अलग हादसों में 9 लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीच मौसम विभाग (IMD) ने कई जिलों के लिए बारिश का अलर्ट भी जारी किया है। 

हिमाचल प्रदेश में 30 जून को मॉनसून ने दस्तक थी. हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण की ओर से जारी एक रिपोर्ट में 30 जून से 2 जून तक कुल 11 लोगों की मौत की जानकारी दी गई है. जिनमें मॉनसून संबंधित घटनाओं में 9 लोगों की जान गई है, जबकि 2 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई है। 

मॉनसून में हिमाचल के किन जिलों में हुई मौतें?
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चंबा में 1, कुल्लू में 1, कांगड़ा में 3, जिला मंडी में 1 और शिमला में 2 लोगों की जान गई है. वहीं, सड़क दुर्घटनाओं में जिला कांगड़ा और लाहौल स्पीति में 1-1 व्यक्ति की जान गई है. इसके साथ ही 30 जून से अब तक मॉनसून में 12 लोग घायल हुए हैं. हिमाचल प्रदेश में मॉनसून की शुरुआत से अब तक 69.65 लाख का नुकसान हुआ है। 

हिमाचल में 46 सड़कें बंद, ऑरेंज अलर्ट जारी
हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भारी बारिश के कारण राज्य भर में 46 सड़कें वाहनों के लिए बंद हो गई हैं. मौसम विभाग ने लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है। 

शिमला मौसम केंद्र ने 5 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. हालांकि, 3 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, सबसे ज्यादा कुल्लू जिले में 18 सड़कें बंद हैं. मंडी में 15, सिरमौर में 9, लाहौल-स्पीति और ऊना में 2-2 सड़कें बंद हैं। 

इसके अलावा बारिश से बिजली और पानी की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है. पूरे राज्य में 181 बिजली ट्रांसफार्मर बंद हो गए हैं और 6 पानी की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। 

सबसे ज्यादा बारिश कहां हुई?
पोंटा साहिब में सबसे ज्यादा 100.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. इसके बाद कसौली में 86 मिमी, धर्मपुर में 83.4 मिमी, जट्टों बैराज में 77 मिमी, धौलाकुआं में 69 मिमी, पचहड़ में 60 मिमी, रामपुर में 53 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी, पालमपुर में 37.8 मिमी और धर्मशाला में 34.1 मिमी बारिश हुई है। 

हैदराबाद होटल में युवती की संदिग्ध मौत, फारूक के साथ गई थी; पुलिस मामले की जांच में जुटी

 हैदराबाद

हैदराबाद के लंगर हौज थाना क्षेत्र स्थित एक होटल में 26 साल की युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार, युवती एक परिचित युवक के साथ होटल में ठहरी थी. कुछ घंटों बाद उसकी मौत हो गई, जिसे लेकर अब हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं से जांच की जा रही है। 

मृतका की पहचान अलवाल निवासी 26 साल की रेनुका के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, रेनुका की पहचान गोलकोंडा निवासी 34 साल के फारूक से थी. दोनों रात लंगर हौज इलाके में स्थित होटल ग्रैंड लॉज पहुंचे और एक कमरा लिया. इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। 

फारूक ने पुलिस को बताया कि वह कुछ देर के लिए होटल से बाहर गया था. लौटने पर उसने कमरे के अंदर रेनुका को फंदे से लटका हुआ देखा. उसने तत्काल होटल प्रबंधन और पुलिस को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का निरीक्षण किया।

हालांकि, रेनुका के परिजनों ने फारूक के इस दावे पर सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या का मामला है. परिजनों ने फारूक की भूमिका पर गंभीर संदेह जताते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए। 

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. साथ ही होटल के कमरे से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है. फारूक को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है ताकि घटनाक्रम की कड़ियां स्पष्ट हो सकें। 

जांच अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवती की मौत आत्महत्या थी या उसके साथ कोई आपराधिक घटना हुई. पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

 

नाबालिग को बाइक देना पड़ा भारी: कोर्ट ने अभिभावक पर ₹30 हजार का जुर्माना लगाया

भोपाल में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

भोपाल में नाबालिग को वाहन चलाने की अनुमति देना एक अभिभावक को महंगा पड़ गया। गौतम नगर थाना पुलिस ने 17 वर्षीय नाबालिग को बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक चलाते हुए पकड़ा। इसके बाद मामला मोटरयान अधिनियम के तहत न्यायालय में पेश किया गया।

अभिभावक ने कोर्ट में स्वीकार किया अपराध

सुनवाई के दौरान वाहन स्वामी एवं अभिभावक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद न्यायालय ने मोटरयान अधिनियम की धारा 5/180 और 199ए के तहत अभिभावक पर ₹30 हजार का अर्थदंड लगाया।

जुर्माने के साथ मिली न्यायालय उठने तक की सजा

कोर्ट ने जुर्माने के अलावा अभिभावक को न्यायालय उठने तक की सजा भी सुनाई। वहीं, निर्धारित जुर्माना जमा होने के बाद जब्त की गई बाइक को छोड़ने के आदेश दिए गए।

भोपाल पुलिस का सख्त संदेश

इस कार्रवाई के जरिए भोपाल पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों के हाथ में वाहन सौंपने वालों के खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर भी लगातार सख्ती बरती जा रही है।

पुलिस की अपील

भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, नाबालिगों को वाहन चलाने के लिए न दें और स्वयं के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा का भी ध्यान रखें।

EPFO के बड़े नियम लागू, ₹1800 PF कंट्रीब्यूशन से जुड़े बदलाव; 8 करोड़ सदस्यों पर पड़ेगा असर

 नई दिल्ली
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी (EPFO) ने अपने लगभग आठ करोड़ एक्टिव सदस्यों से संबंधित नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. इनमें एक सबसे अहम ये है कि 12% पीएफ अंशदान सिर्फ 15,000 रुपये प्रति माह की वेतन सीमा तक ही अनिवार्य है. इससे अधिक अंशदान अब स्वैच्छिक माना जाएगा. इससे कर्मचारियों को यह तय करने के लिए अधिक आजादी मिलेगी कि वे अपनी सैलरी का कितना हिस्सा अपने पीएफ खाते में जमा करना चाहते हैं। 

EPFO Rule 2026 में संगठन ने अनिवार्य पीएफ कंट्रीब्यूशन के रूप में 1,800 रुपये की लिमिट को बरकरार रखा है. इसलिए अब 1 लाख रुपये प्रति माह का मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी को भी, ईपीएफ के तहत भविष्य निधि में सिर्फ 1,800 रुपये का योगदान देना होगा, जबकि ऐसे कर्मचारी जो रिटायरमेंट के लिए अधिक बचत (Saving) करना चाहते हैं, वे इस अनिवार्य राशि से अधिक योगदान कर सकते हैं, लेकिन इसको स्वैच्छिक माना जाएगा. ये अनिवार्य और अतिरिक्त पीएफ कंट्रीब्यूशन के बीच स्पष्ट अंतर दर्शाएगी। 

कम या खत्म कर सकेंगे एक्स्ट्रा कंट्रीब्यूशन
बीते कारोबारी दिन नोटिफाई EPF Scheme 2026 के प्रावधानों पर नजर डालें, तो एक कर्मचारी वैधानिक वेतन सीमा से अधिक वेतन पर स्वैच्छिक आधार पर एक्स्ट्रा पीएफ कंट्रीब्यूशन का ऑप्शन चुन सकता है. वहीं एंप्लॉयर चाहे तो स्वैच्छिक अंशदान के बराबर राशि दे सकते हैं, लेकिन ऐसा करना उनके लिए अनिवार्य बिल्कुल भी नहीं है. कर्मचारी और नियोक्ता किसी भी समय एक्स्ट्रा कंट्रीब्यूशन को कम या बंद कर सकते हैं। 

पीएफ निकासी कैटेगरी में कटौती
पीएफ में जमा पैसों की निकासी के लिए पहले से तय 13 कैटेगरी को अब तीन तक सीमित कर दिया गया है. नई ईपीएफ योजना में केंद्रीय न्यासी बोर्ड यानी CBT द्वारा अक्टूबर में अनुमोदित निकासी सुधारों को भी लागू किया गया है. इन बदलावों का उद्देश्य निकासी प्रक्रिया को और सरल बनाना और सालाना निकासी की संख्या को बढ़ाना है। 

    Essential Needs: बीमारी, शिक्षा और विवाह
    Housing Needs: खरीद, निर्माण और आवास संबंधित अन्य खर्च
    Special Circumstances: पहले की तमाम कैटेगरी में शामिल अन्य आपात स्थितियां

खाते में रखनी होगी 25% राशि 
EPFO सदस्यों को कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के अंशदान सहित अपनी पात्र राशि का 100% तक निकालने की अनुमति होगी. हालांकि, उन्हें खातों में कुल योगदान का कम से कम 25% हिस्सा रखना होगा. इसका उद्देश्य रिटायरमेंट फंड का एक हिस्सा सुरक्षित रखना है. बता दें कि ईपीएफओ की सदस्यता से संबंधित नियमों में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है। 

नियोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा? 
हर नियोक्ता को EPF Scheme 2026 के लागू होने के 15 दिनों के भीतर Form-V में कंसोलिडेटेड रिटर्न डिटेल पेश करनी होगी. रिटर्न में सभी कर्मचारियों का डेटा शामिल होना चाहिए, इनमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, UAN नंबर, ग्रॉस वेजेस और ईपीएफ वेजेस शामिल होंगे। 

क्या चंद्रशेखर बनवाने वाले थे अयोध्या में राम मंदिर? जानिए क्यों राजीव गांधी सरकार गिराने की चर्चा होती है

 अयोध्या 

 उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की हलचल है. केंद्र की राजनीति में इंडिया गठबंधन के नाम पर विपक्षी पार्टियां भारी मन से ही सही, लेकिन एकजुट होने का प्रयास कर रही हैं. ऐसे समय में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की नीतियां और उनकी कही बातें एक बार फिर से मौजूं नजर आने लगी हैं. साल 2026 चंद्रशेखर की 100वीं जयंती है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने इस अवसर पर कोई बड़ा आयोजन करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। 

मौजूदा समय में देश की राजनीति में दो घटनाक्रम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है. पहला मामला क्षेत्रीय पार्टियों का टूटना और दूसरा राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला. दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों मुद्दों में चंद्रशेखर की भूमिका रही है. 17 अप्रैल, 1927 को उत्तर प्रदेश के बलिया में जन्में चंद्रशेखर देश के वो इकलौते नेता हैं जिन्होंने जीवन में कभी भी कोई पद नहीं संभाला, सीधे देश के प्रधानमंत्री बने। 

जब इंदिरा गांधी से चंद्रशेखर ने कहा वो कांग्रेस को तोड़ेंगे
पहले बात करते हैं छोटी पार्टियों के टूटने की घटना पर. हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) में टूट हुई है. याद करा दूं चंद्रशेखर ने भी विश्वनाथ प्रताप सिंह की पार्टी जनता दल के 63 सांसदों को तोड़कर नई पार्टी बनाई थी और कांग्रेस की मदद से प्रधानमंत्री बने थे. उस समय राजीव गांधी की अगुवाई में चल रही कांग्रेस ने ही चंद्रशेखर को प्रधानमंत्री के पद पर बिठाया और बाद में गिरा भी दिया। 

राज्य सभा में डिप्टी स्पीकर और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने चंद्रशेखर के जीवन पर किताब लिखी है उसमें, जिक्र है कि 1965 में चंद्रशेखर कांग्रेस में शामिल हुए थे. उनकी भेंट इंदिरा गांधी से हुई. उस समय लाल बहादुर शास्त्री के नेतृत्व में चल रही सरकार में इंदिरा गांधी सूचना और प्रसारण मंत्री थीं. राजीव गांधी ने चंद्रशेख से पूछा कि वह कांग्रेस में क्यों आए हैं. इस पर, उन्होंने जवाब दिया कि वह कांग्रेस को समाजवादी टर्न देना चाहते हैं. इसपर इंदिरा ने पूछा कि अगर वह सफल नहीं हुए तो क्या करेंगे. तभी चंद्रशेखर ने तपाक से जवाब दिया था- ‘उस मामले में, मैं कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश करूंगा.’ चंद्रशेखर का जवाब सुनकर हैरान होकर इंदिरा गांधी ने पूछा, ‘क्यों?’. इस पर युवा चंद्रशेखर ने कहा, ‘कांग्रेस एक बरगद का पेड़ बन गया है, जिसके नीचे कुछ भी नया नहीं उग सकता। 

साल 1969 में जब इंदिरा गांधी ने पुराने कांग्रेसियों से पार्टी को अलग कर नई कांग्रेस बनाने की कोशिश की तो चंद्रशेखर ने सबसे ज्यादा उनकी मदद की थी. आगे चलकर इंदिरा भारतीय राजनीति में दुर्गा कहलाईं और चंद्रशेखर ‘यंग तुर्क’ कहलाए। 

राम मंदिर का मुद्दा सुलझाने के कगार पर थे चंद्रशेखर, राजीव गांधी ने रोक दिया!

दूसरा राम मंदिर में दान की चोरी का मुद्दा गरमाया हुआ है. वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी बताती हैं कि चंद्रशेखर के साथ उनकी बातचीत उन्होंने उनसे पूछा था कि अगर वे 6 दिसंबर 1992 को प्रधानमंत्री होते जब कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिराई थी, तो वे क्या करते. इसपर पूर्व पीएम ने कहा कि वे ऐसा कभी नहीं होने देते. लेकिन जब उनसे कहा गया कि अगर कारसेवकों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया होता, तो उस दिन हजारों लोग मारे जाते, तो उन्होंने वही बात दोहराई जो उन्होंने कही थी. वरिष्ठ पत्रकार बताती हैं कि चंद्रशेखर के साथ काम करने वाले अधिकारियों जैसे कैबिनेट सेक्रेटरी नरेश चंद्रा और श्याम सरन, जो बाद में विदेश सचिव बने का भी यही कहना था कि वे इस मुद्दें पर सख्त रुख ही अपनाते। 

वो कहती हैं कि कई लोगों का मानना ​​है कि कांग्रेस ने चंद्रशेखर की सरकार इसलिए गिरा दी क्योंकि वे बातचीत के जरिए अयोध्या विवाद को सुलझाने के करीब पहुंच गए थे. चंद्रशेखर विवादित जगह पर मंदिर बनाने के इर्द-गिर्द समझौता कराने में सफल होने वाले थे, लेकिन इस भरोसे के साथ कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) भविष्य में काशी और मथुरा जैसे मुद्दे नहीं उठाएगी. 36 साल बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में दान के रुपये की चोरी के मुद्दे को उठाया तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मथुरा में कृष्णजन्मभूमि का मुद्दा उठा दिया है। 

वरिष्ठ पत्रकार लिखती हैं कि चंद्रशेखर ने यह महसूस करते हुए कि उनकी अल्पमत सरकार के पास ज्यादा समय नहीं होगा, उन्होंने नवंबर 1990 में प्रधानमंत्री बनने के पहले दिन ही वीएचपी और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी दोनों से संपर्क किया था. उस समय, राजीव गांधी को उनके सलाहकारों ने बताया था कि अगर चंद्रशेखर सफल होते हैं, तो वे न केवल देश भर में लोकप्रिय हो जाएंगे, बल्कि कांग्रेस में भी अपनी जगह बना लेंगे, जहां उनकी अच्छी छवि थी, क्योंकि वे कभी इसका हिस्सा थे. इसके तुरंत बाद, हरियाणा के दो सब-इंस्पेक्टर 10 जनपथ के आसपास जासूसी करते हुए पाए गए, और कांग्रेस ने यह काम रोक दिया। 

भारत में 14 प्रधानमंत्री हुए हैं. लगभग उतने ही लोग सत्ता के शिखर के करीब पहुंचे, लेकिन टॉप पर नहीं पहुंच पाए. चंद्रशेखर जैसी एक और कैटेगरी थी, जो सबसे ऊंचे पद पर तो पहुंचे लेकिन, ज्यादा समय तक टिक नहीं पाए, उनका कार्यकाल 223 दिन चला। 

मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, चुनाव-बागी और सहयोगी समेत 4 फैक्टर तय करेंगे एंट्री-एग्जिट

 नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार बहुत जल्द होने जा रहा है. पीएम मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में पहली बार कैबिनेट विस्तार के साथ कई मंत्रियों के विभाग में फेरबदल कर सकते हैं, जिसकी स्क्रिप्ट लिख जा रही है. केंद्रीय सचिवों संग प्रधानमंत्री की बैठक को मंत्रिमंडल विस्तार के साथ छोड़कर देखा जा रहा है। 

पीएम मोदी की केंद्रीय सचिवों के साथ हुई बैठक में उनके विभागों का रिपोर्ट कार्ड लिए हैं ताकि पता चल सके कि किसने कितने कदम उठाए? केंद्रीय सचिवों को आगे के रोडमैप के लिए प्रधानमंत्री तैयार कर रहे हैं, जिन्हें अमलीजामा पहनाने के नई कैबिनेट बनने जा रही हैं। मोदी कैबिनेट विस्तार की फेहरबदल होने का कारण है यह कि 9 मंत्री पद पहले खाली हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी यूपी और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं. जार्ज कुरियन मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं और रवनीत सिंह बिट्टू बहुत जल्द ही कुर्सी छोड़ सकते हैं. इसके अलावा कई दलों के बागी सांसद का सियासी मिजाज बदलता है, जिसके चलते कैबिनेट विस्तार के कयास लगाए जा रहे? 

मोदी कैबिनेट का कब होगा विस्तार
मानसून सत्र से पहले पांच जुलाई या फिर पीएम मोदी के 3 देशों की यात्रा से 11 जुलाई को लौटने के बाद कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है.केंद्रीय सचिवों की बैठक करते प्रधानमंत्री ने क्या यह भी तय कर लिया है कि जो जिम्मेदारी वो मंत्रिमंडल में फेरबदल करके देने वाले हैं, उससे पहले सचिवों की टीम का खाका तैयार हो जाए। 

मोदी सरकार का मंत्रिमंडल अभी देखें तो प्रधानमंत्री 30 कैबिनेट मंत्री 5 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) 36 राज्यमंत्री हैं. इस तरह कुल 72  मंत्री हैं, लेकिन लोकसभा सांसदों के लिहाज से केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. इस तरह से 9 मंत्री पद अभी खाली हैं और जॉर्ज कुरियन इस्तीफा दे चुके हैं. इस लिहाज से दस मंत्री पद तो साफ साफ खाली हैं।  

केंद्रीय मंत्रिमंडल के दो सदस्य पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष बन गए हैं, जिनकी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती हैं. इसके अलावा दो मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जार्ज कुरियन का राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होना है. इनमें कुरियन ने इस्तीफा दे दिया और जल्द ही रवनीत सिंह बिट्टू मंत्री पद छोड़ सकते हैं. इसके अलावा कुछ मंत्री की छुट्टी उनकी खराब परफॉर्मेंस की वजह से हो सकती है। 

कैबिनेट विस्तार में क्या बागी फैक्टर का रोल? 
मोदी कैबिनेट विस्तार में में पुराने दोस्तों का कोटा बढ़ेंगे या नए समर्थक सांसदों को मिलेगी एंट्री? आम आदमी पार्टी से लेकर टीएमसी से और शिवसेना (यूबीटी) के जिन बागी सांसदों ने मोदी सरकार का समर्थन कर चुके हैं, उनमें से किसे-किसे मंत्री पद मिलेगा? 

ममता बनर्जी की पार्टी के बीस बागी लोकसभा सांसद स्पीकर से मिलकर बताते हैं कि वो एनसीपीआई नाम की पार्टी में शामिल हो चुके हैं और देश के विकास में योगदान के लिए नरेंद्र मोदी सरकार को समर्थन करते हैं. इसके अलावा आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्यों का बीजेपी में शामिल होना और शिवसेना (यूबीटी) के 6 लोकसभा सदस्यों का एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में शामिल होकर सत्तापक्ष की संख्याबल में इजाफा किया है। 

सहयोगी दलों को सियासी अहमियत मिलेगी
बागी सांसदों के समर्थन में आने से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की संख्याबल बढ़ गई.  टीएमसी के 20 बागी सांसद के साथ आने से एनडीए के समर्थन करने वाली सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी बन चुकी है. टीएमसी के बागी सांसद अब नीतीश, नायडू की पार्टी से भी ज्यादा हैं, जिसमें से मोदी सरकार किसे मंत्री बनाएगी. इसके अलावा राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के साथ टूटकर आए नेताओं में से किसी को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है। 

उद्धव ठाकरे की पार्टी छोड़कर शिंदे वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं, जिनकी पार्टी की संसद में राजनीतिक ताकत बढ़ने पर मुहर खुद गृह मंत्री अमित शाह तक लगा चुके हैं. ऐसे में मोदी मंत्रिमंडल में क्या शिंदे के खाते में नए मंत्री पद वाली ताकत बढ़ेगी? शिवसेना शिंदे के सांसदों की संख्या अब 13 हो चुकी है, जो जेडीयू से ज्यादा सांसद हो चुके हैं. जेडीयू को अभी दो सीट एक कैबिनेट, एक राज्य मंत्री की मिली है. इसी तरह टीडीपी से दो मंत्री हैं,जिसके चलते शिंदे की पार्टी का कोटा क्या बढ़ेगा। 

चुनावी राज्यों का फैक्टर का रखा जाएगा ख्याल?
मोदी मंत्रिमंडल में विस्तार-फेरबदल का दूसरा कारण अगले वर्ष सात राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं. यूपी, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब, मणिपुर, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव है. पंजाब और हिमाचल को छोड़कर सभी राज्य में बीजेपी की सरकार है. ऐसे में चुनावी राज्यों के सियासी समीकरण को साधे रखने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में इन राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल-विस्तार की चर्चा इसलिए भी हो रही है कि मंत्रियों के लगभग दो साल के कामकाज की समीक्षा संभावित थी. इस समीक्षा के तहत मंत्री पदोन्नत या पदावनत हो सकते हैं. यूपी से अभी 10 मंत्री हैं तो हिमाचल और उत्तराखंड से एक-एक मंत्री हैं. इसके अलावा पंजाब कोटे से रवनीत सिंह बिट्टू मंत्री हैं, जिनकी जगह पर किसी नए चेहरो को लाया जा सकता है।  

सामाजिक समीकरण के फैक्टर का ख्याल
सियासत में कोई भी पार्टी हो या सरकार, उसे सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को साधना होता है. माना जा रहा है कि मोदी सरकार भी कैबिनेट विस्तार में अपने मंत्रियों का चयन करते समय सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के फैक्टर का खास ख्याल रखेगी. हालांकि, ऐसा करते समय योग्यता को प्रथम वरीयता दी जा सकती है,क्योंकि कोई सरकार अपने मंत्रियों के कामकाज के आधार पर ही जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में समर्थ हो सकती है। 

सियासत और सरकार में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो केवल सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों में संतुलन बैठाने का काम करते हैं, जिसे मोदी सरकार के लिए अपने मंत्री कसौटी पर खरे साबित करने की है. दलित और ओबीसी की सियासत जिस तरह से विपक्ष उठा रहा, उसके लिहाज से कैबिनेट का गठन किया जा सकता है। 

AMCA प्रोजेक्ट से भारत की बड़ी उड़ान, 100 कंपनियां बनेंगी भागीदार; F-35 जैसी क्षमता की तैयारी?

बेंगलुरु 

भारत का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) सिर्फ एक नया लड़ाकू विमान नहीं है. इसे भारत के रक्षा उद्योग के लिए उस बुनियादी बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जो आने वाले एक-दो दशकों में देश को पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट बनाने में आत्मनिर्भर बना सकता है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है तो भविष्य में भारत अपेक्षाकृत कम लागत पर अमेरिका के F-35 जैसी श्रेणी के आधुनिक लड़ाकू विमान विकसित और निर्मित करने की भी क्षमता हासिल कर सकता है। 

हालांकि, यह लक्ष्य रातोंरात हासिल नहीं होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि AMCA का असली परिणाम अगले कुछ वर्षों में नहीं, बल्कि अगले 10 से 20 वर्षों में दिखाई देगा. लेकिन जिस औद्योगिक ढांचे की नींव आज रखी जा रही है, वही भारत के भविष्य के सैन्य विमानन उद्योग की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। 

सिर्फ फाइटर जेट नहीं, पूरा इकोसिस्टम तैयार हो रहा
अब तक भारत के अधिकांश लड़ाकू विमान कार्यक्रमों में सरकारी कंपनियों की भूमिका सबसे प्रमुख रही है. लेकिन AMCA इस मॉडल को बदल रहा है. रक्षा मंत्रालय ने पहली बार निजी क्षेत्र के कंसोर्टियम को फ्रंटलाइन फाइटर जेट के प्रोटोटाइप निर्माण के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया है. यानी सरकार अब सिर्फ विमान नहीं बनाना चाहती, बल्कि उसके पीछे ऐसा औद्योगिक नेटवर्क खड़ा करना चाहती है जिसमें 100 से अधिक भारतीय कंपनियां अलग-अलग तकनीकों पर काम करें. यही मॉडल अमेरिका और यूरोप के रक्षा उद्योगों की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। 

क्यों महत्वपूर्ण हैं 100 कंपनियां?
किसी 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान का निर्माण केवल एयरफ्रेम बनाने तक सीमित नहीं होता. इसमें हजारों अलग-अलग पुर्जे, सॉफ्टवेयर, सेंसर, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, इंजन, कंपोजिट मटेरियल और मिशन कंप्यूटर शामिल होते हैं. AMCA परियोजना में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ टियर-1, टियर-2 और टियर-3 सप्लायरों का विशाल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। 

एयरफ्रेम और कंपोजिट स्ट्रक्चर के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, एलएंडटी, डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज, काइनेको एयरोस्पेस और टाटा एडवांस्ड मैटेरियल्स जैसी कंपनियां अहम भूमिका निभा सकती हैं. रडार, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के क्षेत्र में एलआरडीई, एस्ट्रा माइक्रोवेव, डेटा पैटर्न्स और अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज जैसी संस्थाएं योगदान देंगी. वहीं इंजन सपोर्ट इकोसिस्टम विकसित करने में गोदरेज एयरोस्पेस, एमटीएआर टेक्नोलॉजीज और वालचंदनगर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। 

F-35 जैसी क्षमता का रास्ता

दुनिया में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाना बेहद जटिल और महंगा काम माना जाता है. अमेरिका का F-35 कार्यक्रम इसकी सबसे बड़ी मिसाल है. इस परियोजना में हजारों कंपनियां और दशकों का अनुसंधान शामिल रहा है. भारत फिलहाल उसी स्तर पर नहीं है, लेकिन AMCA के जरिए वह उसी दिशा में बुनियादी क्षमता विकसित कर रहा है। 

स्टील्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन बे, सेंसर फ्यूजन, एडवांस्ड मिशन कंप्यूटर, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और एआई आधारित प्रणालियां- ये सभी तकनीकें AMCA का हिस्सा होंगी. एक बार भारतीय उद्योग इन तकनीकों में दक्ष हो गया तो भविष्य के और अधिक उन्नत विमानों का विकास अपेक्षाकृत कम लागत और कम विदेशी निर्भरता के साथ किया जा सकेगा. यही वजह है कि कई रक्षा विशेषज्ञ AMCA को केवल एक विमान नहीं, बल्कि भारत का फ्यूचर एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म मान रहे हैं। 

इंजन अभी विदेशी, लेकिन लक्ष्य आत्मनिर्भरता
AMCA के शुरुआती प्रोटोटाइप में अमेरिका के GE-F414 इंजन लगाए जाएंगे. इस संबंध में सह-उत्पादन और तकनीकी सहयोग पर बातचीत भी आगे बढ़ चुकी है. हालांकि, भारत का अंतिम लक्ष्य केवल विदेशी इंजन पर निर्भर रहना नहीं है. समानांतर रूप से स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित करने और इंजन निर्माण की घरेलू क्षमता बढ़ाने पर भी काम जारी है. यानी शुरुआत विदेशी तकनीक से होगी, लेकिन मंजिल पूरी तरह स्वदेशी क्षमता हासिल करना है। 

परिणाम आने में क्यों लगेगा समय?
रक्षा परियोजनाओं में सबसे बड़ी चुनौती तकनीक का विकास और परीक्षण होता है. सरकार की योजना के अनुसार निजी भागीदार के चयन के बाद पांच उड़ान योग्य प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे. लक्ष्य है कि पहला प्रोटोटाइप 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक तैयार हो और पहली उड़ान 2028 में हो. इसके बाद व्यापक परीक्षण, हथियारों का एकीकरण, स्टील्थ सत्यापन और विभिन्न परिस्थितियों में उड़ान परीक्षण होंगे. यही वजह है कि वास्तविक परिचालन क्षमता हासिल करने में कई वर्ष लग सकते हैं. लेकिन, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों में सबसे बड़ी उपलब्धि अंतिम विमान नहीं, बल्कि उसके निर्माण के दौरान विकसित होने वाला औद्योगिक और तकनीकी आधार होता है। 

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की सबसे बड़ी परीक्षा
AMCA देश की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ रणनीति की सबसे कठिन परीक्षा भी होगी. यदि यह कार्यक्रम सफल रहता है तो भारत केवल अपनी वायुसेना की जरूरतें पूरी नहीं करेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है. इससे देश में उच्च तकनीक विनिर्माण, अनुसंधान, रोजगार और निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे.आज जिन 100 से अधिक कंपनियों को इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है, वही आने वाले वर्षों में भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता की रीढ़ बन सकती हैं. इसलिए AMCA को केवल एक विमान परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि उस नींव के रूप में देखा जाना चाहिए। 

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