बवाल रोजगार और भर्ती व्यवस्था को लेकर युवाओं में गुस्सा, प्रयागराज में परीक्षा केंद्र पर हंगामा

प्रयागराज के झूंसी में SSC GD परीक्षा केंद्र पर बवाल, गड़बड़ी के आरोप में छात्रों ने की तोड़फोड़

Prayagraj के झूंसी स्थित Sunita Singh Mahila Mahavidyalaya में SSC GD परीक्षा के दौरान छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अव्यवस्था का आरोप लगाते हुए केंद्र परिसर में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों और अव्यवस्थित प्रबंधन की वजह से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

इस घटना के बाद भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, युवाओं में बढ़ती नाराज़गी और रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल media पर भी मामले को लेकर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

मध्यप्रदेश बना वक्फ सम्पत्तियों को ऑनलाइन करने वाला देश का पहला राज्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले — वक्फ सम्पत्तियों को माफियाओं से मुक्त कर उनकी आय छात्रों की स्कॉलरशिप, शिक्षा और समाज के विकास में की जाएगी

मध्यप्रदेश ने वक्फ सम्पत्तियों के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार वक्फ सम्पत्तियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन कर पारदर्शिता सुनिश्चित कर रही है, जिससे अवैध कब्जों और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि वक्फ सम्पत्तियों पर कब्जा जमाने वाले माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार इन सम्पत्तियों को सुरक्षित कर उनकी वास्तविक आय को समाजहित में उपयोग करने की योजना पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि वक्फ सम्पत्तियों से प्राप्त आय को छात्रों की स्कॉलरशिप, शिक्षा और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें और वे शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ सकें।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य वक्फ सम्पत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना, समाज के हितों की रक्षा करना और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण बनेगी, बल्कि शिक्षा और सामाजिक विकास को भी नई दिशा देगी।

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड शिक्षा के क्षेत्र में कर रहा उल्लेखनीय कार्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शिक्षा एवं सामाजिक विकास में बोर्ड की भूमिका की सराहना करते हुए अध्यक्ष श्री सनवर पटेल को दी बधाई और शुभकामनाएं

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav ने प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता, प्रगति और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। उन्होंने बोर्ड द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह पहल समाज के विकास और युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने बोर्ड के अध्यक्ष Sanwar Patel को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी इसी तरह जनहित और शिक्षा उन्नयन से जुड़े कार्य निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में सकारात्मक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है और इस दिशा में किए गए प्रयास निश्चित रूप से प्रेरणादायक हैं।

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की ऐतिहासिक पहल: 850 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरण

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा — वक्फ बोर्ड ने आय में वृद्धि के साथ शिक्षा को प्रोत्साहन देते हुए विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छात्रवृत्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 850 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति वितरित की गई।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादवने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड ने न केवल अपनी आय में वृद्धि की है, बल्कि समाज के जरूरतमंद एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने का सराहनीय कार्य भी किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज के विकास का सबसे मजबूत माध्यम है और ऐसी योजनाएं विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और अभिभावकों में उत्साह देखने को मिला। छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने इसे अपने शैक्षणिक सफर में महत्वपूर्ण सहयोग बताया। वक्फ बोर्ड का यह प्रयास आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रदेश सरकार लगातार शिक्षा, कौशल विकास और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य कर रही है। वक्फ बोर्ड की यह पहल भी इसी दिशा में समाज के उत्थान और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य निर्माण में अहम भूमिका निभाएगी।

  “भारतीय भाषाओं को मिलेगा नया बल, सीबीएसई के फैसले का अभाविप ने किया समर्थन”

“राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप त्रि-भाषा नीति लागू करना ऐतिहासिक कदम: अभाविप”

 

“सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति का अभाविप ने किया स्वागत”

“सीबीएसई द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्णय को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बताया राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा-2023 के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्णय का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने स्वागत किया है।

“त्रि-भाषा नीति से मजबूत होगी भारतीयता और राष्ट्रीय एकता: अभाविप”

अभाविप ने कहा कि यह निर्णय भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और विद्यार्थियों को बहुभाषी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित होगा। परिषद के अनुसार, इस नीति के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जोड़ने में मदद मिलेगी तथा राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता को भी मजबूती मिलेगी।

अभाविप ने इस बात पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की कि नीति में तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाओं का भारतीय मूल का होना अनिवार्य किया गया है। परिषद का मानना है कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों में मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं के प्रति आत्मीयता और गौरव की भावना विकसित करेगी।

“44 भाषाओं के विकल्प के साथ शिक्षा में बड़ा बदलाव”

अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, “त्रि-भाषा नीति भारतीय शिक्षा के स्वदेशीकरण और विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।” उन्होंने यह भी मांग की कि बोर्ड परीक्षाएं भी तीनों भाषाओं में आयोजित की जाएं, ताकि यह नीति और अधिक प्रभावी बन सके।

मध्य भारत प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विद्यार्थियों के समग्र विकास और भारतीयता को सशक्त करने वाली नीति है। सीबीएसई का यह निर्णय विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं और संस्कृति से जोड़ने का सशक्त प्रयास है।”

 

“सीबीएसई द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप त्रि-भाषा नीति लागू करने के निर्णय का अभाविप ने स्वागत किया। परिषद ने इसे भारतीय भाषाओं, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया।”

 

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