इंदौर-उज्जैन के बीच खेती मुकाबला…! खेत में किसान कम, नेता ज्यादा

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इंदौर-उज्जैन के बीच खेती मुकाबला…! खेत में किसान कम, नेता ज्यादा

मध्यप्रदेश की राजनीति अब मंचों से निकलकर सीधे खेतों तक पहुंच गई है। अब चुनावी रणनीति सिर्फ सभाओं में नहीं, बल्कि खेतों में भी नजर आने लगी है। किसान अपनी फसल की चिंता में है, जबकि नेता अपनी राजनीतिक फसल को सींचने में जुटे दिखाई दे रहे हैं।

बैतूल जिले के कुकरू गांव में मुख्यमंत्री मोहन यादव एक किसान के खेत पहुंचे। यहां उन्होंने मक्का की बोनी की और किसानों के साथ खेती से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। समर्थकों ने इसे मुख्यमंत्री के किसान परिवार से जुड़े होने और खेती-किसानी की समझ का उदाहरण बताया।

लेकिन राजनीति में जवाब भी जल्दी आता है।

मुख्यमंत्री की खेती वाली तस्वीरों के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी खेत में नजर आए। उन्होंने भी किसानों के बीच पहुंचकर खेती से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लिया। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की तस्वीरों और वीडियो की तुलना शुरू हो गई।

अब सियासी गलियारों में चर्चा है कि प्रदेश में खेती से ज्यादा खेती की तस्वीरें और वीडियो सुर्खियां बटोर रहे हैं। किसान बारिश, खाद और फसल की चिंता कर रहा है, जबकि नेताओं के खेत दौरे राजनीतिक संदेश देने का माध्यम बनते जा रहे हैं।

लोग सोशल मीडिया पर मजाक में कह रहे हैं कि कहीं आने वाले दिनों में खेत भी सियासी अखाड़ा न बन जाए, जहां एक ओर मुख्यमंत्री हल चलाते दिखें और दूसरी ओर विपक्ष के नेता फावड़ा संभालते नजर आएं, जबकि जनता पूरे मुकाबले की दर्शक बनी रहे।

हालांकि खेतों में नेताओं की मौजूदगी किसानों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश जरूर देती है, लेकिन असली सवाल वही है—क्या इन प्रतीकात्मक तस्वीरों से आगे बढ़कर किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान भी सामने आएगा, या फिर यह मुकाबला केवल कैमरों और सोशल मीडिया तक ही सीमित रहेगा?

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