दिल्ली की MP-MLA कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
राउस एवेन्यू कोर्ट ने 25 वर्ष पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में दतिया विधायक राजेंद्र भारती और बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को दोषी ठहराया है। सजा पर सुनवाई अगली तारीख को होगी।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 1998 में सावित्री श्याम ने जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक दतिया में 10 लाख रुपए की एफडी कराई।
एफडी की अवधि 3 वर्ष और ब्याज दर 13.5% तय थी।
उस समय बैंक के अध्यक्ष खुद राजेंद्र भारती थे।
आरोप कैसे बने घोटाले में?
आरोप है कि राजेंद्र भारती ने अपनी पद की शक्ति का दुरुपयोग किया।
बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में हेरफेर की गई।
एफडी अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 10 और 15 साल कर दिया गया।
इससे 1999 से 2011 तक हर साल 1.35 लाख रुपये का अनुचित लाभ लिया गया।
किसे हुआ फायदा और किसे नुकसान?
फायदा: सावित्री श्याम और संबंधित संस्था
नुकसान: जिला सहकारी ग्रामीण विकास बैंक दतिया
मामला कैसे सामने आया?
बैंक ऑडिट के दौरान गड़बड़ी पकड़ी गई
सहकारी विभाग के आदेश पर 2015 में केस दर्ज हुआ
मामला विशेष अदालत में चला
कौन-कौन सी धाराएं लगीं?
IPC 420 (धोखाधड़ी)
IPC 467, 468, 471 (कूटरचना/फर्जी दस्तावेज)
IPC 409 (आपराधिक विश्वासघात – प्रजापति पर)
IPC 120B (आपराधिक षड्यंत्र)
सुप्रीम कोर्ट की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में आरोपी बनाए जाने की पुष्टि की थी (क्रिमिनल अपील 2764/2024)
राजनीतिक असर: दतिया में उपचुनाव के संकेत
यदि सजा 2 साल से अधिक होती है, तो राजेंद्र भारती की विधायकी खत्म हो सकती है
दतिया में उपचुनाव की स्थिति बन सकती है
👀 आगे क्या होगा?
सजा का ऐलान जल्द
अधिकतम 7 साल तक की सजा संभव
राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना
राजनीतिक नजरें किस पर?
पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की भूमिका पर भी सबकी नजरें
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक बैंक घोटाला नहीं बल्कि सत्ता, पद और निजी हितों के टकराव का उदाहरण है। कोर्ट का फैसला मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

