किसानों को MSP नहीं, महंगाई से जनता परेशान; उद्योगों के लिए राहत पैकेज की मांग, सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप
भोपाल संवाददाता
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने प्रदेश में गेहूं खरीदी व्यवस्था और बढ़ती महंगाई को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। भोपाल में जारी बयान में उन्होंने कहा कि MSP पर खरीदी के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार के राज में किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तय समय पर खरीदी शुरू नहीं होने से किसान अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि किसान कर्ज में डूबा हुआ है और 31 मार्च की समय-सीमा के बाद लगभग 40% किसान डिफॉल्टर होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
उन्होंने शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। वहीं प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार को “वसूली की सरकार” बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को लगातार तारीख पर तारीख दी जा रही है, लेकिन राहत नहीं मिल रही।
पटवारी ने कहा कि खरीदी केंद्रों पर किसान लाइन में खड़े हैं, जबकि सत्ता से जुड़े लोगों के गोदाम पहले ही गेहूं से भर चुके हैं। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय और खुली लूट करार दिया।
महंगाई और उद्योगों पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने बढ़ती महंगाई और उद्योगों पर पड़ रहे दबाव को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2026 से ब्रेड, बिस्किट, जूते-चप्पल और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों में 20% से 25% तक वृद्धि की आशंका है, जिससे आम जनता पर सीधा असर पड़ेगा।
पटवारी के अनुसार, कच्चे माल, बिजली, LPG और परिवहन लागत में भारी वृद्धि के कारण उद्योगों पर संकट गहरा गया है। MSME सेक्टर पर खतरा मंडरा रहा है और इससे रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार से प्रमुख मांगें
पटवारी ने राज्य सरकार से कई मांगें करते हुए कहा कि:
MSP पर पारदर्शी और समयबद्ध खरीदी सुनिश्चित की जाए
बारदाना संकट और वेयरहाउस की निष्पक्ष जांच कराई जाए
किसानों के ऋण भुगतान में तत्काल राहत दी जाए
प्रभावित उद्योगों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए
MSME सेक्टर को बिजली दरों और करों में राहत दी जाए
आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी तंत्र बनाया जाए
अंत में उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह साफ संदेश जाएगा कि उसे न किसानों की चिंता है और न ही आम जनता की। कांग्रेस पार्टी किसानों और आम लोगों के हक के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।

