Gold-Silver Price Crash: 13 दिनों में चांदी ₹27,000 टूटी, आज फिर गिरावट; जानें सोने का ताजा भाव

 नई दिल्ली

सोना-चांदी फिर सस्ता (Gold-Silver Cheaper) हुआ है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मंगलवार को दोनों कीमती धातुओं के दाम में खुलते ही तेज गिरावट देखने को मिली. चांदी का भाव तो अचानक 4400 रुपये प्रति किलो से ज्यादा कम हो गया. सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद अचानक आए तेज उछाल के बाद से अब तक 1 Kg Silver Price 27,000 रुपये से ज्यादा गिर चुका है. वहीं ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई से चांदी अब 1.85 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती मिल रही है. सोना भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए टूटा है। 

13 दिन में 27000 रुपये टूटी चांदी 
सरकार ने कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया था, तो बीते 13 मई को अचानक चांदी का भाव एमसीएक्स पर (MCS Silver Price) 3 लाख रुपये के पार निकल गया था. लेकिन इसके बाद ये एक-दो दिन को छोड़ दें, तो बिखरी ही है. तब से अब तक 13 दिनों में इसका भाव 3,00,238 रुपये से टूटकर ताजा गिरावट के साथ 2,72,265 रुपये पर आ गया है और इस हिसाब से देखें तो Silver 27,973 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। 

गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन सोमवार को दिनभर के कारोबार के बाद 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली वायदा चांदी 2,76,716 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और मंगलवार को खुलते ही ये 4,451 रुपये सस्ती हो गई. वहीं इसके हाई लेवल से तुलना करें, तो जनवरी में रिकॉर्ड तेजी के साथ चांदी 4,57,328 रुपये प्रति किलो के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंची थी और यहां से अब 1,85,063 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। 

Gold हाई से अब इतना सस्ता 
न सिर्फ चांदी का भाव टूटा है, बल्कि वायादा सोना भी मंगलवार को फिसला है. एमसीएक्स पर कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही 5 जून की एक्सपायरी वाला 24 Karat Gold अपने पिछले बंद 1,59,081 रुपये की तुलना में गिरकर 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर आ गया. इस गिरावट के साथ 10 ग्राम सोने का भाव अब अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से 44,884 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो चुका है। 

चांदी की तरह सोना भी इंपोर्ट ड्यूटी हाईक के बाद तेज रफ्तार से भागता हुआ नजर आया था. 13 मई को ये 1,62,186 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गया था, लेकिन अब इसकी कीमत यहां से 4,086 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर चुकी है। 

मई में अब तक कैसा रहा हाल? 
वायदा कारोबार में मई महीने में सोना-चांदी की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव पर नजर डालें, तो ये महंगे हुए हैं. जहां बीते महीने के आखिरी दिन यानी 30 अप्रैल को 1 किलो चांदी की कीमत 2,44,456 रुपये प्रति किलो थी और ताजा भाव से तुलना करें, तो ये करीब 27 हजार रुपये से ज्यादा बढ़ चुकी है. वहीं सोना इस दौरान 1,51,111 रुपये प्रति 10 ग्राम से 7 हजार रुपये से अधिक महंगा हुआ है। 

5 जून को आएगी Maruti की Flex-Fuel कार? नितिन गडकरी ने किया बड़ा खुलासा

मुंबई 

केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री नितिन गडकरी ने जानकारी दी है कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki 5 जून, 2026 को वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर भारत में एक फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल को लॉन्च कर सकती है. सड़क परिवहन और हाईवे मंत्री ने महाराष्ट्र के नागपुर में एक इवेंट के दौरान इसकी घोषणा की, जिसमें गडकरी ने कहा कि यह गाड़ी E100 फ्यूल ग्रेड पर चल सकेगी। 

इस इवेंट में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि, “ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां जल्द ही बड़े पैमाने पर आने वाली हैं. इस साल पर्यावरण दिवस के मौके पर, दिल्ली में एक प्रोग्राम है, जहां Maruti Suzuki 100 प्रतिशत इथेनॉल से चलने वाली गाड़ियां लॉन्च करेगी। 

बता दें कि Maruti Suzuki की पेरेंट कंपनी Suzuki जापान ने पिछले साल Japan Mobility Show 2025 में Maruti Fronx सबकॉम्पैक्ट SUV का फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन प्रदर्शित किया था. इसके साथ ही, कम्प्रेस्ड बायोगैस से चलने वाली Maruti Victoris समेत कई दूसरी दो-पहिया और चार-पहिया गाड़ियां भी दिखाई गई थीं। 

Suzuki ने उस समय Maruti Fronx फ्लैक्स-फ्यूल के बारे में गाड़ी के साइज़ के अलावा कुछ ही जानकारी दी थी. इंडिया-स्पेक मॉडल के मुकाबले, जापान में बिकने वाली Maruti Fronx में बड़ा नैचुरली एस्पिरेटेड 1.5-लीटर K-सीरीज़ पेट्रोल इंजन इस्तेमाल किया जाता है, जिसके साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प मिलता है। 

भारतीय बाजार में, यह सबकॉम्पैक्ट SUV या तो 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल या 1.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन ऑप्शन के साथ आ सकती है, जिसके साथ मैनुअल और ऑटोमैटिक दोनों (1.2 पेट्रोल पर AMT) मिलते हैं. उस समय Suzuki ने Fronx फ्लेक्स फ्यूल के लिए इथेनॉल ब्लेंड रेटिंग के बारे में कभी नहीं बताया, हालांकि इसके साथ दिखाया गया दूसरा मॉडल, Suzuki Gixxer 250 का फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट, E85 तक सपोर्ट करने वाला था। 

समाज का मूल आधार है सहकारिता : मंत्री विश्वास कैलाश सारंग

हस्तशिल्प से आजीविका संवर्धन संगोष्ठी में कढ़ाई एवं जूट शिल्प टूलकिट वितरित, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और Coopcraft पोर्टल का शुभारंभ

भोपाल। सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि समाज का मूल आधार सहकारिता है और सहयोग, समन्वय व सहभागिता के बिना किसी भी कार्य में सफलता संभव नहीं है। वे मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ में आयोजित “हस्तशिल्प से आजीविका संवर्धन” विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

मंत्री श्री सारंग ने कहा कि राज्य सहकारी संघ द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और टूलकिट के माध्यम से हस्तशिल्प कार्यों को गति मिलेगी, जिससे परिवारों की आय में वृद्धि होगी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित सीएचसीडीएस योजना के अंतर्गत निर्मित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) का लोकार्पण भी किया गया। प्रारंभिक चरण में यह सुविधा केंद्र इंदौर, भोपाल और नौगांव में स्थापित किए गए हैं।

मंत्री श्री सारंग ने कार्यक्रम में प्रतीक स्वरूप छह महिला प्रतिभागियों — किरण राजपूत, नीलम यादव, आशा मेहरा, कविता रजक, सोनी यादव और महिमा यादव — को कढ़ाई एवं जूट शिल्प टूलकिट वितरित किए।

इस अवसर पर “सहकारिता के नवयुग का शंखनाद” पुस्तिका का विमोचन भी किया गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के दौरान मध्यप्रदेश में हुए कार्यों और गतिविधियों का संकलन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही “Coopcraft” वाणिज्यिक पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया।

कार्यक्रम को सहकारिता आयुक्त मनोज पुष्प ने भी संबोधित किया। शुरुआत में राज्य सहकारी संघ के प्रबंध संचालक ऋतुराज रंजन ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में हस्तशिल्प के उप संचालक वैभव यशवंत मोहारे और अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता सहित अनेक अधिकारी एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

आम आदमी को बड़ा झटका! पेट्रोल-डीजल फिर 2 रुपए महंगा, कई शहरों में कीमतें आसमान पर

नई दिल्ली
 सोमवार को ईंधन की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई, जिससे पेट्रोल की कीमत में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 2.71 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई, जो दो सप्ताह से भी कम समय में चौथी बढ़ोतरी है।

इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

प्रमुख शहरों में अब क्या है पेट्रोल की कीमत?
अगर बात करें भारत के प्रमुख शहरों में तेल की कीमतों की तो दिल्ली में 102.12 रुपये, कोलकाता में 113.51, मुंबई में 111.21, नोएडा में 101.9 रुपये, बेंगलुरु में 110.6 रुपये, भूवनेश्वर में 108.8 रुपये, चंडीगढ़ में 101.5 रुपये, जयपुर में 113.4 रुपये, लखनऊ में 101.9 रुपये, पटना में 113.5 रुपये प्रति लीटर है।

प्रमुख शहरों में अब क्या है डीजल की कीमत?
अगर बात करें भारत के प्रमुख शहरों में डीजल के कीमत की तो नई दिल्ली में 95.2 रुपये, कोलकाता में 99.8 रुपये, मुंबई में 97.8 रुपये, चेन्नई में 99.6 रुपये, गुड़गांव में 95.4 रुपये, नोएडा में 95.4 रुपये, बेंगलुरु में 98.5 रुपये, भुवनेश्वर में 100.6 रुपये, चंडीगढ़ में 89.5 रुपये, हैदराबाद में 103.8 रुपये, जयपुर में 98.4 रुपये, लखनऊ में 95.4 रुपये, पटना में 99.5 रुपेय प्रति लीटर है।

इस महीने यह चौथी बढ़ोतरी
ईंधन की कीमतों में इस महीने में यह चौथी बढ़ोतरी है। 25 मई को पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया। इससे पहले 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे महंगा किया गया था। जबकि, 19 मई को पेट्रोल और डीजल के दामों में एवरेज 90 पैसे की बढ़ोतरी की गई थी। 15 मई को भी कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का भारी इजाफा किया गया था।

अधिकतर राज्यों में पेट्रोल 100 के पार
उत्तर प्रदेश में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत ₹102.76 और पश्चिम बंगाल में ₹114.20 पर पहुंच गई है। आंध्र प्रदेश में पेट्रोल ₹117.35 वहीं, असम में ₹106.21, मध्य प्रदेश में ₹115.77,बिहार में ₹114.79, राजस्थान में ₹113.93 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। महाराष्ट्र में एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹113.05, दिल्ली में ₹102.11, छत्तीसगढ़ में ₹109.59, गुजरात में ₹102.92, हरियाणा में ₹103.57, हिमाचल प्रदेश में ₹101.64 और जम्मू और कश्मीर में ₹108.47 प्रति लीटर हो गई है।

झारखंड में 1 लीटर पेट्रोल का दाम आज से ₹107.02, केरल में ₹114.31, मणिपुर में ₹114.76, मिजोरम में ₹104.74,ओडिशा में ₹110.30, पंजाब में ₹105.90, सिक्किम में ₹109.88 हो गया है। वहीं, तेलंगाना में ₹116.78, त्रिपुरा में ₹104.89, उत्तराखंड में ₹100.96 एक लीटर पेट्रोल का दाम अब इस रेट पर है।

इन राज्यों में डीजल भी 100 के पार
mypetrolprice के मुताबिक आंध्र प्रदेश में डीजल की कीमत ₹10
5.92 पर पहुंच गई है। बिहार में भी कई शहरों में डीजल के दाम 100 रुपये लीटर के पार पहुंच गए हैं। अररिया में, औरंगाबाद, बांका, भागलपुर में डीजल 100 के पार है। छत्तीसगढ़ में डीजल के रेट 100 के पार पहुंच गया है। गुजरात के राजकोट में डीजल 100.01 रुपये लीटर है। झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के कुछ शहरों में डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई है।

क्यों बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दाम
ईरान युद्ध के चलते तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। सरकार के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण घाटे में चल रही थीं। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था।

चुनाव से पहले सरकार की कोशिशें
कीमतें स्थिर रखने के लिए सरकार ने पहले ही पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में ₹10-10 प्रति लीटर की कटौती कर दी थी। पेट्रोल पर यह ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से पहले एक लीटर पेट्रोल पर कुल ₹21.90 एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती थी, जो घटकर ₹11.90 रह गई। इसी तरह, डीजल पर कुल केंद्रीय उत्पाद शुल्क ₹17.8 से घटकर ₹7.8 पर आ गया। इसी निर्णय की वजह से पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे।

पिछले शनिवार को बढ़ी थी कीमतें
पेट्रोल-डीजल की कीमतें पिछले शनिवार को बढ़ी थी, जब पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे और डीजल की कीमत में 91 पैसे की वृद्धि की गई थी। शनिवार को ही दिल्ली में सीएनजी की कीमत में भी 1 रुपया प्रति किलोग्राम की वृद्धि के साथ 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।

क्यों दोबारा बढ़ी ईंधन की कीमतें?
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान ईरान ने होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया। जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो रही है। होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है।

पिछले कई हफ्तों से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल को पुरानी कीमतों पर ही बेच रही थी। लेकिन पिछले दो हफ्तों से तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है।

अनुमानों के अनुसार, तीनों तेल और गैस कंपनियां – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) – प्रतिदिन सामूहिक रूप से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा उठा रही थीं। इसलिए, सरकार को कीमतें बढ़ानी पड़ीं।

शेयर बाजार में तूफानी शुरुआत! सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी ने भी भरी रफ्तार

मुंबई 

भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के पहले दिन सोमवार को खुलने के साथ ही बमबम नजर आ रहा है और दोनों इंडेक्स तूफानी तेजी के साथ ओपनिंग करने के बाद रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए दिख रहे हैं. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स खुलते ही जहां 800 अंकों से ज्यादा की धुआंधार तेजी लेकर 76000 के स्तर को पार कर गया. तो वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी सेंसेक्स के कदम से कदम मिलाकर करीब 250 अंकों की जोरदार बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। 

खास बात ये है कि तेल कंपनियों ने देश में लगातार चौथी बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी (Petrol-Diesel Price Hike) का झटका दिया है, इसके बाद भी विदेशी कारणों की वजह से बाजार रफ्तार पकड़े हुए नजर आ रहा है।  

सेंसेक्स-निफ्टी ने मचाया गदर
शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने से पहले ही प्री-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी के संकेत मिल गए थे. वहीं जब ट्रेडिंग शुरू हुई, तो BSE Sensex खुलते ही 76,000 का स्तर पार कर गया. ये इंडेक्स अपने पिछले शुक्रवार के बंद 75,415 की तुलना में जोरदार रफ्तार पकड़ते हुए 76,135 पर ओपन हुआ और महज पांच मिनट के कारोबार में ही 874 अंक उछलकर 76,289 पर जा पहुंचा। 

बात NSE Nifty की करें, तो इसकी चाल भी सेंसेक्स के जैसी ही नजर आई. 50 शेयरों वाला ये इंडेक्स अपने पिछले बंद 23,719 के मुकाबले चढ़कर 23,940 के लेवल पर खुला और फिर सेंसेक्स की तरह रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 23,984 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। 

शेयर बाजार में तेजी के तीन कारण
बात करें, सोमवार को शेयर मार्केट रैली के पीछे के बड़े कारणों के बारे में, तो एक नहीं बल्कि तीन-तीज वजह हैं. इनका सीधा कनेक्शन डोनाल्ड ट्रंप से भी है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध खत्म किए जाने और दुनिया की तेल जरूरत को पूरा करने में अहम होर्मुज स्ट्रेट को फिर से जल्द खोले जाने के सिग्नल दिए हैं। 

बाजार का सेंटीमेंट बदलने में दूसरा कारण भी इससे जुड़ा हुआ है, क्योंकि ट्रंप के ईरान-अमेरिका के बीच सुलह के संकेतों का सबसे बड़ा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा, जो इस ग्लोबल टेंशन के बीच दुनिया को डरा रही थीं और महंगाई बढ़ाने में अहम रोल निभा रही थीं. सोमवार को Brent Crude Price 100 डॉलर के नीचे आ गया, जिससे महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी। 

तीसरा कारण भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर आया अपडेट है. दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि India-US Trade Deal को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है. यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा. बता दें रूबियो चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। 

ये 10 शेयर बने मार्केट ‘हीरो’
शेयर बाजार में तूफानी तेजी के बीच सबसे ज्यादा भागने वाले स्टॉक्स की बात करें, तो बीएसई लार्जकैप कैटेगरी में शामिल M&M Share (2.90%), HDFC Bank Share (2.30%), IndiGo Share (2.10%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे. वहीं दूसरी ओर मिडकैप में शामिल Hindustan Petroleum Share (4.20%), Ashok Leyland Share (3.60%), AU Bank Share (2.30%) की तेजी में नजर आए। 

इसके अलावा स्मॉलकैप कंपनियों में NH Share (6%), Cohance Share (4.20%), IIFL Share (3%) और Inox Wind Share (2.50%) की उछाल के साथ कारोबार कर रहे थे। 

ग्रीन फ्यूल पर बड़ा फैसला: सरकार ने CNG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर की जांच का दायरा बढ़ाया

नई दिल्ली

भारत में क्लीन एनर्जी और ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब पेट्रोल और डीजल के साथ-साथ CNG, LNG और हाइड्रोजन फ्यूल डिस्पेंसर की भी सख्ती से जांच और सत्यापन किया जाएगा। 24 मई 2026 को उपभोक्ता मामले विभाग (Department of Consumer Affairs) ने लीगल मेट्रोलॉजी रूल्स (Legal Metrology Rules) में बड़ा बदलाव करते हुए GATC (Government Approved Test Centres) के दायरे को बढ़ा दिया है। इसका मतलब यह है कि अब देशभर में इस्तेमाल होने वाले नए जमाने के ईंधन डिस्पेंसर भी सरकारी मानकों के तहत चेक किए जाएंगे, ताकि ग्राहकों को सही मात्रा में फ्यूल मिल सके और किसी तरह की गड़बड़ी न हो।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब भारत तेजी से क्लीन फ्यूल की ओर बढ़ रहा है। पिछले कुछ सालों में CNG और LNG वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि हाइड्रोजन फ्यूल टेक्नोलॉजी को भी भविष्य का बड़ा विकल्प माना जा रहा है। सरकार पहले ही इलेक्ट्रिक और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में बड़े निवेश कर रही है। ऐसे में फ्यूल डिस्पेंसिंग सिस्टम की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया था।

नई व्यवस्था के तहत अब GATC सिर्फ वजन और माप वाले उपकरणों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पेट्रोल, डीजल, CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर की भी जांच करेंगे। पहले यह व्यवस्था केवल 18 तरह के उपकरणों पर लागू थी, लेकिन अब इसमें पांच नए फ्यूल डिस्पेंसर जोड़ दिए गए हैं। इससे कुल संख्या बढ़कर 23 हो गई है।

सरकार का कहना है कि इस कदम का सबसे बड़ा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि पेट्रोल पंप या गैस स्टेशन पर कम मात्रा में फ्यूल दिया जाता है। अब नई जांच व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ग्राहक जितने पैसे दे रहा है, उसे उतना ही ईंधन मिले। इससे ट्रांजैक्शन में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।

इसके अलावा सरकार ने वेरिफिकेशन फीस भी तय कर दी है। पेट्रोल और डीजल डिस्पेंसर के लिए प्रति नोजल ₹5,000 शुल्क रखा गया है, जबकि CNG, LPG, LNG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए ₹10,000 प्रति नोजल फीस निर्धारित की गई है। इससे प्राइवेट लैब और इंडस्ट्री को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, ताकि तकनीकी विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल हो सके।

राज्य सरकारों को भी नई शक्तियां दी गई हैं। अब वे अपने राज्यों की जरूरत के हिसाब से अतिरिक्त उपकरणों और माप प्रणाली को GATC के तहत शामिल कर सकेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर जांच और निगरानी की प्रक्रिया और मजबूत होगी। वहीं प्रशासनिक कामकाज को तेज करने के लिए ज्वॉइंट सेक्रेटरी (Joint Secretary) रैंक और उससे ऊपर के अधिकारियों को मंजूरी देने का अधिकार भी दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सालों में भारत का फ्यूल मार्केट तेजी से बदलने वाला है। पेट्रोल और डीजल के साथ CNG, LNG और हाइड्रोजन जैसे विकल्पों की मांग बढ़ेगी। ऐसे में सरकार का यह कदम सिर्फ उपभोक्ता सुरक्षा ही नहीं, बल्कि देश के ग्रीन एनर्जी मिशन को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ेगा और क्लीन फ्यूल अपनाने की रफ्तार भी तेज हो सकती है।

अमेरिका की नई ग्रीन कार्ड नीति से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं, 12 लाख लोगों पर असर

नई दिल्ली

आज के समय में ज्यादातर लोग भारत छोड़ विदेश का रुख कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर लोग अमेरिका जा रहे हैं या जाना चाहते हैं। लेकिन अब अमेरिका की ट्रंप सरकार (Trump Government) ने ग्रीन कार्ड को लेकर नई नीति की घोषणा की है। पहले लोग अमेरिका में अस्थाई वीजा पर रहते हुए ही ग्रीन कार्ड मिलने तक वहीं रुक सकते थे, लेकिन अब ऐसा करना नहीं होगा।

ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा अमेरिका
अब तक लोग अमेरिका में रहते हुए ही “एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस” प्रक्रिया के तहत ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे लेकिन अब से ये मुमकिन नहीं होगा। यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS ) ने जानकारी दी कि जो लोग अपने स्टेटस में बदलाव चाहते हैं, उन्हें पहले अपने गृह देश वापिस लौटना होगा फिर अमेरिकी दूतावास या कॉन्सुलर प्रोसेसिंग के जरिए ही आवेदन करना होगा। ये प्रक्रिया पहले से अधिक जटिल हो गई है।

12 लाख भारतीयों की बढ़ी मुश्किलें
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में इमिग्रेशन एडवोकेट अजय भुटोरिया ने PTI को बताया कि नई ग्रीन कार्ड नीति भारतीयों के लिए झटका है। उन्होंने कहा, कि “कानून का पालन करने वाले 12 लाख से अधिक भारतीय-अमेरिकी अब मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के नए नियम के तहत ग्रीन कार्ड आवेदकों को अमेरिका छोड़कर इमिग्रेंट वीजा पर दोबारा एंट्री करना जरूरी हो गया है।”

उन्होंने कहा, “पिछले दो सालों में पढ़ाई के लिए अमेरिका आने वाले छात्रों की संख्या में 35 से 40 फीसदी की कमी देखी गई है। पिछले दिसंबर से जो लोग वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत गए वे अभी भी अटके हुए हैं। उन्हें जो डेट मिली है वो अगस्त, अक्टूबर तक की मिली है।”

क्या होता है ग्रीन कार्ड?
ग्रीन कार्ड को आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी कार्ड (Permanent Resident Card) कहा जाता है। जो किसी विदेशी नागरिक को अमेरिका में स्थायी रूप से रहने का अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में कहीं भी रह सकता है। ये कार्ड लोगों को ज्यादातर कंपनियों में नौकरी करने, पढ़ाई करने और नियमों के तहत अमेरिका से बाहर आने-जाने का अधिकार देता है। इस कार्ड के मिलने के बाद वह व्यक्ति अमेरिकी नागरिकता के लिए भी अप्लाई कर सकता है।

 

होर्मुज संकट के 76 दिन बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, फिर भी दुनिया में सबसे सस्ता ईंधन? जानें 4 साल का पूरा गणित

नई दिल्ली

देश में मई 2026 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार संशोधन किया गया- 15 मई, 19 मई और 23 मई को. सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन तीनों चरणों के बाद कुल मिलाकर पेट्रोल 4 रुपये 74 पैसे और डीजल 4 रुपये 82 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ. CNG की कीमत भी 1 रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई. यह लगभग चार वर्षों में पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है। 

कंज्यूमर्स ने नहीं सरकार ने खुद उठाया बोझ
28 फरवरी 2026 को होर्मुज संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय
बाजार में कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत में 76 दिनों तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए. इस दौरान तेल कंपनियां रोजाना करीब 1000 करोड़ रुपये का घाटा खुद वहन करती रहीं. 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर SAED यानी एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की. डीजल पर केंद्रीय ड्यूटी शून्य हो गई. इस फैसले से सरकार को इस वित्त वर्ष में लगभग 30,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. यानी यह बोझ सीधे उपभोक्ता पर नहीं डाला गया, बल्कि सरकार ने खुद उठाया। 

साथ ही सरकार ने डीजल पर 21 रुपये 50 पैसे और ATF पर 29 रुपये 50 पैसे प्रति लीटर एक्सपोर्ट लेवी लगाई, ताकि देश में तैयार तेल विदेश न जाए और घरेलू बाजार में आपूर्ति बनी रहे। 

19 मई को सरकार ने माना कि दो चरणों की बढ़ोतरी के बाद भी तेल कंपनियों का दैनिक घाटा 1000 करोड़ से घटकर 750 करोड़ रुपये रह गया था. 23 मई की तीसरी बढ़ोतरी के बाद भी बड़ा हिस्सा तेल कंपनियां खुद वहन कर रही हैं। 

अब वैश्विक तुलना देखिए.
होर्मुज संकट के बाद म्यांमार में पेट्रोल लगभग 90%, मलेशिया में 56%, पाकिस्तान में 55%, अमेरिका में 44%, फिलीपींस में 40%, श्रीलंका में 38%, फ्रांस में 21% और ब्रिटेन में 19% तक महंगा हुआ. भारत में यह बढ़ोतरी केवल लगभग 5% रही। 

सऊदी अरब ने दाम नहीं बढ़ाए क्योंकि वह स्वयं बड़ा तेल उत्पादक देश है और सीधे सब्सिडी देता है. उसे छोड़ दिया जाए तो भारत दुनिया में सबसे कम बढ़ोतरी करने वाले देशों में रहा. यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक संकट के दौरान भारत ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की हो। 

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान, जब पूरी दुनिया में ईंधन महंगा हो रहा था, तब भारत ने नवंबर 2021 और मई 2022 में पेट्रोल 8 रुपये और डीजल 6 रुपये प्रति लीटर सस्ता किया था. G20 देशों में भारत अकेला देश था जिसने उस दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं। 

अब सवाल आता है कि अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग क्यों हैं?
केंद्र की एक्साइज ड्यूटी पूरे देश में समान रहती है, लेकिन हर राज्य अपनी तरफ से अलग VAT लगाता है. यही वजह है कि पंप पर कीमतें अलग दिखती हैं. 23 मई 2026 के बाद आंध्र प्रदेश में पेट्रोल लगभग 117.80 रुपये, तेलंगाना में 115.70 रुपये और केरल में 112.30 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया, जबकि गुजरात, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में यह करीब 99.50 रुपये के आसपास रहा. आंध्र प्रदेश में VAT लगभग 31% है, जिसके साथ अतिरिक्त रोड डेवलपमेंट सेस भी लगाया जाता है. इससे प्रभावी कर दर करीब 35% तक पहुंच जाती है। 

सरकारी पक्ष का दावा है कि जिन दलों ने केंद्र से एक्साइज कम करने की मांग की, उनके शासन वाले कई राज्यों में VAT सबसे अधिक बना रहा. 27 मार्च की एक्साइज कटौती के बाद BJP शासित राज्यों ने पूरी राहत उपभोक्ताओं तक पहुंचाई, जबकि कांग्रेस और INDIA ब्लॉक शासित राज्यों ने VAT में समान कटौती नहीं की. इसलिए इन राज्यों में अंतिम कीमतें अपेक्षाकृत अधिक बनी रहीं। 

अब 2014 के ’71 रुपये वाले पेट्रोल’ की चर्चा.
कांग्रेस अक्सर कहती है कि 2014 में पेट्रोल 71 रुपये था और अब लगभग 98 रुपये है. लेकिन सरकारी पक्ष के अनुसार उस समय कीमतें कम रखने के लिए 2005 से 2010 के बीच लगभग 1.34 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे। 

यह सीधे सरकारी उधार थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और करदाताओं को करना पड़ा। 

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
FY 2021-22 में 10,000 करोड़ रुपये,
FY 2023-24 में 31,150 करोड़ रुपये,
FY 2024-25 में 52,860 करोड़ रुपये,

और FY 2025-26 में 36,913 करोड़ रुपये ऑयल बॉन्ड भुगतान में खर्च किए गए. इसके ऊपर ब्याज अलग है. सरकारी तर्क यह है कि 2014 का सस्ता पेट्रोल वास्तव में उधारी पर आधारित था, जिसकी कीमत बाद की पीढ़ियां चुका रही हैं। 

चार साल का पूरा हिसाब
2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल चार बार सस्ता हुआ और एक बार बढ़ा. केंद्र सरकार ने इस पूरे दौर में एक्साइज कटौती के जरिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का राजस्व छोड़ा तेल कंपनियों ने रूस-यूक्रेन दौर में 24,500 करोड़ और LPG संरक्षण में 40,000 करोड़ का घाटा उठाया. कोई बॉन्ड नहीं, कोई उधारी नहीं, कोई अगली पीढ़ी पर बोझ नहीं। 

 

वेस्‍ट एशिया संकट का असर! पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, शनिवार को बढ़े नए दाम; चेक करें अपने शहर का रेट

नई दिल्ली

 पेट्रोल और डीजल का रेट आज शनिवार, 23 मई 2026 को फिर से बढ़ गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 10 दिन के अंदर तीसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम को बढ़ाया है। आज शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में 0.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 0.91 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। आइए जानते हैं कि देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल का क्या रेट चल रहा है?

पेट्रोल की कीमत (Petrol price today)

दिल्ली – 99.51 रुपये

नोए़़डा – 99.51 रुपये

भोपाल – 96.85 रुपये

चंडीगढ़- 98.95 रुपये

गुवाहाटी – 103.01 रुपये

जयपुर – 109.87 रुपये

पटना – 110.37 रुपये

लखनऊ – 99.28 रुपये

पोर्टब्लेयर – 92.16 रुपये

रांची – 102.60 रुपये

कोलकाता – 110.64 रुपये

चेन्नई – 105.31 रुपये
डीजल की कीमत (Diesel price today)

दिल्ली – 92.49 रुपये

नोएडा – 92.84 रुपये

भोपाल – 111.71 रुपये

चंडीगढ़ – 86.49 रुपये

गुवाहाटी – 94.39 रुपये

जयपुर – 95.05 रुपये

पटना – 96.53 रुपये

लखनऊ – 92.64 रुपये

पोर्टब्लेयर – 82.22 रुपये

रांची – 97.66 रुपये

कोलकाता – 97.02 रुपये

चेन्नई – 96.98 रुपये

10 दिन में करीब 5 रुपये महंगा हुआ पेट्रोल और डीजल

इस महीने सबसे पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले हफ्ते शुक्रवार को 3-3 रुपये का इजाफा किया गया था। उसके बाद एक बार फिर से तेल की कीमतों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 90 पैसे की बढ़ोतरी की थी। आज हुए इजाफे को अगर मिला लें तो 10 दिन में पेट्रोल और डीजल का रेट करीब 5 रुपये प्रति लीटह महंगा हो गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी 

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का रेट बढ़कर 104.24 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, यूएस वेस्ट टेक्सस इंटरमीडियट (WTI) का रेट 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 97.46 डॉलर प्रति बैरल आज बिक रहा है। बता दें, युद्ध से पहले इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल था। क्रूड ऑयल के बढ़े हुए रेट की वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर हुई हैं।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल और डीजल के दाम?
तेल कंपनियों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं।

पिछले कुछ दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी वजह से तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है। लगातार तीसरी बार कीमतें बढ़ने से परिवहन खर्च और जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

आम लोगों और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
पेट्रोल और डीजल महंगे होने का सबसे बड़ा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। निजी वाहन चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा। वहीं, डीजल महंगा होने से ट्रक, बस और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ सकता है। इसका असर सब्जियों, फल, दूध और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। माना जा रहा है कि अगर आने वाले दिनों में भी कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं, तो महंगाई और बढ़ सकती है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने मध्यम वर्ग और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।
  

आगे अभी और बढ़ेगा पेट्रोल और डीजल का दाम?

आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा या गिरावट इंटरनेशनल मार्केट की स्थिति पर निर्भर करेगा। मौजूदा परिस्थितियों को देखकर लगता है कि पेट्रोल और डीजल का रेट अभी आगे और बढ़ सकता है। यानी कीमतों में इजाफे के लिए तैयार रहिए। कुछ रिपोर्ट्स में तेल कंपनियों को 9 से 12 रुपये प्रति लीटर के नुकसान की बात कही गई है।

जून से महंगी होंगी Maruti Suzuki की कारें, कीमतों में 30 हजार तक बढ़ोतरी

नई दिल्ली
 भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी Maruti Suzuki India ने गुरुवार को अपनी कारों की कीमतों में जून 2026 से 30,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की घोषणा की है. स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में, घरेलू कार बनाने वाली कंपनी ने कहा कि Maruti ने अपने पोर्टफोलियो में अपने सभी मॉडलों की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। 

कंपनी ने अपनी रेगुलेटरी फाइलिंग में कहा कि, “इनपुट कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए, कंपनी ने जून 2026 से अपने पोर्टफोलियो में मॉडल्स की कीमतें 30,000 रुपये तक बढ़ाने का फैसला किया है। 

एक ऑफिशियल बयान में, कंपनी ने इस फैसले के लिए रॉ मटेरियल और ऑपरेशनल कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया, जिसका ऑटोमोटिव इंडस्ट्री पर असर पड़ रहा है। 

कार बनाने वाली कंपनी ने आगे कहा कि, “पिछले कुछ महीनों से, कंपनी कॉस्ट कम करने के तरीकों से कॉस्ट पर पड़ने वाले असर को जितना हो सके कम करने की लगातार कोशिश कर रही है। 

Maruti Suzuki India ने कहा कि उसने कॉस्ट का कुछ बोझ उठाने के लिए पिछले कुछ महीनों में कॉस्ट कम करने के कई कदम उठाए हैं, लेकिन कॉस्ट के खराब माहौल की वजह से कुछ हद तक असर पड़ना ज़रूरी हो गया है। 

कंपनी ने आगे कहा कि उसने कस्टमर्स पर असर को जितना हो सके कम करने की कोशिश की है. अपनी फाइलिंग में उसने आगे कहा कि, “हालांकि, महंगाई का दबाव अब ऊंचे लेवल पर है और खर्च का खराब माहौल बना हुआ है, इसलिए कंपनी को बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा मार्केट पर डालना होगा, साथ ही यह भी पक्का करना होगा कि कस्टमर्स पर असर जितना हो सके कम से कम हो। 

इसमें आगे कहा गया कि, “बदलाव की सही मात्रा हर मॉडल में अलग-अलग होगी.” यह नई घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब भारत में कई ऑटोमोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने कमोडिटी की ज़्यादा कीमतों, लॉजिस्टिक्स खर्च और सप्लाई चेन में महंगाई के दबाव को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी की है। 

इससे पहले, Mahindra & Mahindra ने 6 अप्रैल से अपने SUV और कमर्शियल व्हीकल पोर्टफोलियो की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की थी. कंपनी ने कहा कि बढ़ती इनपुट और ऑपरेशनल लागत का हवाला देते हुए, कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होगी, जिसमें सभी मॉडलों में औसतन लगभग 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। 

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