हिमाचल के सेब पर बड़ा संकट! 40% उत्पादन घटने की आशंका, ₹5000 करोड़ का कारोबार खतरे में

 नई दिल्ली
एक कहावत है कि ‘रोज एक सेब खाएं और डॉक्टर को दूर भगाएं’, लेकिन अब लग रहा है कि डॉक्टर को भगाने के लिए सेब ही नहीं बचेंगे. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से ये डराने वाले अनुमान जाहिर किए जा रहे हैं. सेब के उत्पादन के लिए सबसे बड़ा खलनायक बन रहा है मौसम का मिजाज, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश में इस साल सेब उत्पादन में 40 फीसदी की बड़ी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। 

Apple इकोनॉमी खतरे में है
बिजनेस टुडे पर छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश की 5,000 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था (Apple Economy) इस समय अभूतपूर्व जलवायु संकट का सामना कर रही है. मौसम की अनियमितता के चलते इस साल सेब उत्पादन में लगभग 40% की गिरावट आने की आशंका है और ये सेब की फसल पर निर्भर जिससे इस फसल पर निर्भर करीब  25 लाख किसान परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। 

अधिकारियों को सता रही चिंता
हिमाचल प्रदेश राज्य के बागवानी अधिकारियों ने अनुमान जाहिक करते हुए कहा कि राज्य में सेब का उत्पादन 2025 में 6.99 लाख मीट्रिक टन से घटकर 2026 में लगभग 4.36 लाख मीट्रिक टन (लगभग 2.15 करोड़ बक्से) रह जाएगा, यानी 2.63 लाख मीट्रिक टन की गिरावट आएगी. इसके साथ ही इसी अनुपात में सेब अर्थव्यवस्था में भी गिरावट देखने को मिल सकती है। 

सेब उत्पादन में इस बड़ी गिरावट को लेकर अधिकारियों ने कारण बताते हुए कहा कि सर्दियों में अपर्याप्त हिमपात, बेमौसम  बारिश, लगातार ओलावृष्टि और तापमान में अनियमित उतार-चढ़ाव से ये हालात पैदा हुए हैं. बागवानों की मानें, तो मौसम ने उत्पादन लागत बढ़ाने और पैदावार घटाने की चुनौतियां पैदा कर दी हैं. दूसरी ओर कीटनाशक दवाओं और मशीनरी समेत अन्य एग्रीकल्चर उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी ने उनका बोझ बढ़ा दिया है। 

किसानों ने सरकार से लगाई गुहार
राज्य के भारी भरकम 5000 करोड़ रुपये के करीब के सेब कारोबार पर संकट बढ़ता देख, किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाई है. उन्होंने फसल बीमा योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया है, ताकि नुकसान की भरपाई में मदद मिल सके। 

मौसम का बदलता मिजाज न सिर्फ राज्य की इकोनॉमी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी मुसीबत माना जा रहा है, इसका प्रभाव सिर्फ सेब तक ही सीमित नहीं है. तमाम एक्सपर्ट शेयर बाजार पर भी मौसम के प्रभाव का अनुमान जता रहे हैं। 

मौसम बनता जा रहा खलनायक?
बीते कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों ने महंगाई का जोखिम बढ़ाया था, लेकिन अब अमेरिका-ईरान में बात बनते ही तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिली है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट में तेल सस्ता होने के बाद अब एक्सपर्ट भी मानते नजर आए थे कि मौसम इकोनॉमी के लिए खलनायक बनता जा रहा है। 

इंफोमेरिक्स रेटिंग्स के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा था कि आज देश में महंगाई का सबसे बड़ा जोखिम तेल नहीं, बल्कि मानसून है. कमजोर मानसून अब भारत के लिए कच्चे तेल की तुलना में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा कर रहा है, क्योंकि देश में महंगाई की कैलकुलेशन में Fuel Price से कहीं ज्यादा खाद्य पदार्थों का रोल रहता है और भारत की करीब आधी एग्रीकल्चर लैंड बारिश पर निर्भर है, इसमें अनियमितता से अनाज, दालों, सब्जियों, फलों और तिलहन के प्रोडक्शन में कमी आ सकती है, जिससे महंगाई दर में तेज इजाफा हो सकता है और घरेलू बजट गड़बड़ा सकता है। 

E20 पेट्रोल पर बड़ा खुलासा! 53% कार मालिकों ने बताया फेल, 66% ने कहा- माइलेज हुआ कम

 नई दिल्ली

कहते हैं बदलाव की कीमत चुकानी पड़ती है. लेकिन जब कीमत हर बार आम आदमी की जेब से ही निकले, तो सवाल उठना तय है. सरकार E20 पेट्रोल के फायदे गिना रही है, उधर पुराने पेट्रोल वाहन चलाने वाले लोग घटते माइलेज और बढ़ते रिपेयर बिल का हिसाब लगा रहे हैं. अब एक बड़े सर्वे ने इस बहस को और हवा दे दी है. सर्वे में 53 प्रतिशत लोगों ने E20 लागू करने के तरीके पर नाराजगी जताई, 66 प्रतिशत ने माइलेज गिरने की शिकायत की और 45 प्रतिशत ने कहा कि गाड़ी का मेंटेनेंस पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। 

लोकल सर्किल्स (LocalCircles) के सर्वे में देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों ने हिस्सा लिया. सर्वे के अनुसार 53 प्रतिशत लोगों ने सड़क परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय की E20 पेट्रोल लागू करने की प्रक्रिया को या तो “बेहद खराब” या “असरहीन” बताया. इनमें 42 प्रतिशत लोगों ने इसे “बेहद खराब” करार दिया, जबकि सिर्फ 13 प्रतिशत लोगों ने इस पहल को थोड़ी अच्छी रेटिंग दी। 

10% घटा माइलेज
सर्वे में सबसे बड़ी चिंता 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों को लेकर सामने आई. ऐसे वाहन मालिकों में 66 प्रतिशत लोगों का कहना है कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज 10 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गया है. वहीं 45 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उनकी गाड़ियों के कंपोनेंट में समस्या बढ़ी है और मरम्मत पर पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। 

इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि, लोग इथेनॉल ब्लेंडिंग का पूरी तरह विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चाहिए. 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के करीब 31 प्रतिशत मालिकों ने कहा कि अगर E0 या E10 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए तो वे E20 से महंगा होने पर भी उसे खरीदना पसंद करेंगे. इससे साफ है कि पुराने वाहन मालिक कम इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल के लिए रेडी हैं, भले ही इसके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़े। 

सरकार E20 के फायदे गिना रही है
दूसरी ओर केंद्र सरकार लगातार इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का बचाव कर रही है. सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा, एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी. बीते दिनों सरकार ने दिग्गज वाहन निर्माताओं के अधिकारियों का एक पूरा पैनल बठाया था. जिसमें सभी कंपनियों ने एक सुर में इथेनॉल के फायदे गिनाए थे। 

सर्वे में कहा गया है कि भारत की सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में ऐसी पेट्रोल गाड़ियां चल रही हैं जिन्हें कम इथेनॉल वाले फ्यूल को ध्यान में रखकर बनाया गया था. अप्रैल 2023 से पहले बनी ज्यादातर गाड़ियां E10 पेट्रोल के लिए डिजाइन की गई थीं, जबकि अप्रैल 2025 के बाद बनने वाले नए मॉडल पूरी तरह E20 कम्पलायंट माने जाते हैं. ऐसे में पुराने वाहन मालिकों को माइलेज और मेंटेनेंस से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

अपग्रेड करना भी आसान नहीं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पुरानी गाड़ियों को E20 कम्पलायंट बनाना हो, तो फ्यूल सिस्टम के ऐसे कई पार्ट बदलने पड़ सकते हैं जो ज्यादा इथेनॉल को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते. इससे वाहन मालिकों का खर्च और बढ़ सकता है. हाल ही में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बलानी ने आजतक से ख़ास बातचीत में बताया कि, एक ख़ास तरह की फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट की टेस्टिंग की गई है. जिसके नतीजे काफी हद तक पुरानी बीएस4 और बीएस6 कारों के लिए सकारात्मक रहे हैं। 

दीपक बलानी ने ये भी बताया कि, इस कन्वर्जन किट की टेस्टिंग रिपोर्ट सरकार को भेज दी गई है. हालांकि इसे इंपोर्ट कर के लाया गया था तो इसकी कीमत 50,000 रुपये है. लेकिन अगर इसे स्थानीय स्तर पर डेवलप किया जाता है तो इसकी कीमत तकरीबन 20,000 रुपये तक हो सकती है. ISMA ने इस किट को मारुति डिजायर कार में टेस्ट किया था। 

कैसे किया गया सर्वे
लोकलसर्किल्स का यह सर्वे देश के 316 जिलों के 22,567 पेट्रोल वाहन मालिकों के बीच किया गया. इसमें 69 प्रतिशत पुरुष और 31 प्रतिशत महिलाओं ने हिस्सा लिया. करीब 46 प्रतिशत लोग टियर-1 जिलों से, 32 प्रतिशत टियर-2 जिलों से और बाकी 22 प्रतिशत टियर-3, टियर-4, टियर-5 और ग्रामीण इलाकों से थे. लोकल सर्किल्स के अनुसार सर्वे में शामिल सभी लोग उसके प्लेटफॉर्म के रजिस्टर्ड और सर्टिफाइड यूजर थे। 

महिला टी20 विश्व कप 2026: ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार जीता खिताब

लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने 7 विकेट से दर्ज की शानदार जीत, बेथ मूनी बनीं प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट, एलिसे पेरी ने जीता नौवां ICC खिताब।

महिला टी20 विश्व कप 2026 में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए रिकॉर्ड सातवीं बार ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। लॉर्ड्स में खेले गए फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया।

पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 17.1 ओवर में 3 विकेट खोकर 153 रन बनाते हुए 17 गेंद शेष रहते आसान जीत दर्ज कर ली।

जीत की सबसे बड़ी हीरो रहीं बेथ मूनी, जिन्होंने 49 गेंदों में 64 रनों की शानदार मैच विजेता पारी खेली। वहीं फोएबे लिचफील्ड ने 48 रन बनाकर उनका बेहतरीन साथ निभाया। बेथ मूनी को फाइनल में दमदार प्रदर्शन और पूरे टूर्नामेंट में 238 रन बनाने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।

इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया की स्टार ऑलराउंडर एलिसे पेरी ने अपने करियर का नौवां ICC खिताब जीतकर एक और ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

10 संस्करणों में सातवीं बार महिला टी20 विश्व कप जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि महिला क्रिकेट में उसकी बादशाहत अब भी कायम है।

जान जोखिम में डालकर रपटे से गुजर रही बस, तेज बहाव के बीच कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

नरसिंहगढ़ के पास पार्वती नदी का पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद रपटे से हो रही आवाजाही, प्रशासन की व्यवस्था पर उठे सवाल, यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता।

नरसिंहगढ़ क्षेत्र में पार्वती नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। पुल बंद होने के कारण बसों सहित अन्य वाहन रपटे से होकर गुजरने को मजबूर हैं।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक बस तेज बहाव के बीच रपटे को पार करती दिखाई दे रही है। पानी के बीच से बस का गुजरना यात्रियों की जान को खतरे में डाल सकता है। यदि जलस्तर अचानक बढ़ता है या चालक से थोड़ी भी चूक होती है, तो बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से रोजाना हजारों लोगों को जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है, जिससे खतरा और अधिक बढ़ गया है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इस पर लोगों की नजर बनी हुई है। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराया जाए और रपटे से खतरनाक आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए, ताकि किसी भी संभावित हादसे को टाला जा सके।

तुलसी नगर में 46 लाख की लागत से बने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्यान एवं खेल मैदान का लोकार्पण

विधायक भगवानदास सबनानी और महापौर मालती राय ने किया उद्घाटन, कहा— उद्यान बनेगा स्वास्थ्य, खेल और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र

भोपाल | 6 जुलाई। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 31 स्थित तुलसी नगर में 46 लाख रुपये की लागत से निर्मित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्यान एवं खेल मैदान का लोकार्पण विधायक भगवानदास सबनानी एवं महापौर मालती राय द्वारा किया गया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर क्षेत्रवासियों को यह महत्वपूर्ण सौगात समर्पित की गई।

इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि यह उद्यान एवं खेल मैदान क्षेत्र के नागरिकों, युवाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य, खेल और सामाजिक सहभागिता का उत्कृष्ट केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचार और जनसेवा के आदर्श हम सभी को सदैव राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

महापौर मालती राय ने भी क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए उद्यान के संरक्षण एवं बेहतर उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे सार्वजनिक स्थान शहर के विकास के साथ-साथ स्वस्थ और सक्रिय समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में जोन अध्यक्ष एवं पार्षद ब्रजुला सचान, मंडल अध्यक्ष सोनू पालीवाल, प्रमोद पोलघंटलवार, आशा पारोचे, कविता अनुरागी, अर्चना उपाध्याय, विशाल सबकाले, तृप्ति भारद्वाज, विमला विश्वकर्मा, सुनीता सोनी, गुंजन मिश्रा, कामाक्षी विश्वकर्मा, जितेन्द्र मालवीय, सीताराम चौरसिया, वीणा सिन्धु सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए बड़ी सौगात, श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु चलेंगी 300 विशेष ट्रेनें

भुवनेश्वर
 रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ओडिशा के पुरी में 16 जुलाई से शुरू होने वाले भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के लिए 300 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की है।
ओडिशा के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे श्री वैष्णव ने भगवान जगन्नाथ की आगामी रथ यात्रा को लेकर रेलवे की ओर से की गयीं तैयारियों का जायज़ा लिया और अधिकारियों को श्रद्धालुओं की यात्रा को सुखद और आरामदायक बनाने को लेकर निर्देश दिया।

गौरतलब है कि भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को 16 जुलाई से शुरू होगी और 24 जुलाई को सम्पन्न होगी।

इस दौरान उन्होंने पुरी-कोरापुट एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ट्रेन के परिचालन से ओडिशा के आंतरिक हिस्से में रेल सम्पर्क मजबूत होगा। इसके साथ ही उन्होंने ओडिशा और गुजरात के बीच चलने वाली ब्रह्मपुर-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस (रोज़ाना चलने वाली) को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रेल मंत्री ने बताया कि इस साल रथ यात्रा के लिए 300 से ज़्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने की योजना है। ये ट्रेनें नियमित रूप से चलने वाली 800 से ज़्यादा ट्रेनों के अलावा होंगी। उन्होंने कहा, ” केरल में इस साल ओणम के मौके पर हम 100 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाएंगे।

उन्होंने कहा, “इस साल 30 जून को खत्म हुए गर्मी के मौसम के दौरान रिकॉर्ड 15,000 विशेष ट्रेनें चलाई गयीं। जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए 300 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। केरल में ओणम के लिए 100 से ज़्यादा विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। रेलवे, केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोशिश है कि हमारे नागरिकों को सस्ती और सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिलें।”
श्री वैष्णव ने आज नांदेड़-मुंबई और टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा, “आज उत्तराखंड के टनकपुर से हजूर साहिब, नांदेड़ के लिए एक नई ट्रेन सेवा शुरू की गई है। तराई क्षेत्र में रहने वाले हमारे सिख भाई-बहनों की लगातार मांग थी। आज वाशिम और हिंगोली होते हुए नांदेड़ को मुंबई से जोड़ने वाली एक ट्रेन सेवा भी शुरू की गयी है, जिससे विदर्भ और मराठवाड़ा के कई ज़िलों का मुंबई से सम्पर्क बेहतर होगा। पीलीभीत, आगरा और टनकपुर को जोड़ने वाली कुछ ट्रेन सेवाएँ भी शुरू की गयी हैं।”

LPG पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला! रसोई गैस सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाया ऐतिहासिक कदम

नई दिल्ली

भारत सरकार अब रसोई गैस (LPG) की सप्लाई को और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की सरकारी तेल कंपनियां अब अमेरिका (US) से एलपीजी की खरीद को मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना करने की तैयारी में हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गल्फ देशों (मध्य पूर्व) पर निर्भरता कम करना और भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश में गैस की कमी न होने देना है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

फिलहाल, भारत हर साल अमेरिका से करीब 22 लाख टन (2.2 मिलियन टन) एलपीजी खरीदता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अब इस मात्रा को लगभग दोगुना करने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही भारत अल्जीरिया जैसे अन्य देशों से भी एलपीजी आयात बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है, ताकि गैस सप्लाई के लिए किसी एक क्षेत्र पर अधिक निर्भर न रहना पड़े।

दरअसल, इस साल पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़े तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम के दौरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कई एलपीजी जहाज प्रभावित हुए थे। उस समय भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता रसोई गैस की उपलब्धता थी। ऐसे मुश्किल समय में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा वैकल्पिक एलपीजी सप्लायर बनकर सामने आया और उसने लगातार गैस की आपूर्ति जारी रखी।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कच्चे तेल (Crude Oil) की उपलब्धता को लेकर उतनी चिंता नहीं थी, लेकिन एलपीजी की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा काफी बड़ा था। दुनिया में गल्फ देशों के अलावा बहुत कम देश बड़े पैमाने पर एलपीजी का उत्पादन करते हैं। ऐसे में अमेरिका से अतिरिक्त सप्लाई मिलने से भारत को काफी राहत मिली।

अब सरकार सिर्फ आयात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 30 दिनों का स्ट्रेटजिक LPG रिजर्व (Strategic Reserve) तैयार करने की योजना पर काम करने को कहा है। इसका मतलब है कि यदि भविष्य में किसी कारण से आयात कुछ समय के लिए रुक भी जाए, तब भी देश में कम से कम 30 दिनों तक रसोई गैस की सप्लाई बिना किसी परेशानी के जारी रखी जा सके। यह नया स्ट्रेटजिक रिजर्व पहले से मौजूद 45 दिनों के सामान्य स्टॉक के अतिरिक्त होगा, जिसे तेल कंपनियां घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की मांग पूरी करने के लिए हमेशा बनाए रखती हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में भारत के कुल एलपीजी आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 8% से भी कम थी। लेकिन, नवंबर 2025 में हुए एक साल के समझौते के बाद तस्वीर तेजी से बदल गई। जनवरी 2026 में यह हिस्सा बढ़कर 12% हुआ, फरवरी में 13% पहुंचा और पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद मार्च में यह 37% तक पहुंच गया। अप्रैल में अमेरिका की हिस्सेदारी 40% मई में 55% और जून में रिकॉर्ड 65% तक पहुंच गई।

इसका मतलब है कि अब भारत की एलपीजी जरूरतों को पूरा करने में अमेरिका की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। इसके अलावा भारत ने अर्जेंटीना, नाइजीरिया और मलेशिया जैसे देशों से भी गैस खरीदकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत किया है।

एक्सपर्ट का मानना है कि सप्लाई के सोर्स में विविधता लाने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। अगर भविष्य में फिर से किसी क्षेत्र में युद्ध, राजनीतिक तनाव या समुद्री मार्ग बाधित होता है, तो देश को रसोई गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ने से भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध भी और मजबूत हो सकते हैं।

सरकार का यह कदम सिर्फ गैस खरीद बढ़ाने का फैसला नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक तैयारी और आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।

 

WB की 3 राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, 24 जुलाई को होगी वोटिंग; EC ने जारी किया शेड्यूल

कोलकाता

पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की तीन खाली सीटों के लिए उपचुनाव का ऐलान कर दिया गया है. ये सीटें सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। 

इन तीनों सीटों पर 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक मतदान होगा. ये उपचुनाव राज्यसभा की तीन आकस्मिक सीटों को भरने के लिए कराए जाएंगे। 

कब हुआ था इस्तीफा?
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले सुखेंदु शेखर रॉय ने सबसे पहले 8 जून को राज्यसभा की सदस्यता और टीएमसी, दोनों से इस्तीफा दिया था. अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी में कथित भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए. उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी में समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जबकि विवादों में रहे लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है। 

इसके दो दिन बाद, 10 जून को सुष्मिता देव ने भी टीएमसी छोड़ने का ऐलान कर दिया. इस्तीफा देने के तुरंत बाद उन्होंने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गईं कि वह बीजेपी का दामन थाम सकती हैं और पार्टी उन्हें असम से राज्यसभा भेज सकती है। 

भाजपा की झोली में जा सकती है तीनों सीट
तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों ने कुछ दिनों पहले ही अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. चुनाव आयोग ने बताया है कि 24 जुलाई को इन तीनों सीटों के लिए चुनाव होंगे और उसी दिन नतीजे भी आ जाएंगे. इस बात की पूरी उम्मीद है कि जिन तीन सांसदों ने इस्तीफा दिया उन्हीं को अब भारतीय जनता पार्टी अपना उम्मीदवार बना सकती है और अपने विधायकों की संख्या के आधार पर उसके तीनों उम्मीदवार आसानी से जीत भी सकते हैं। 

तीनों पूर्व सांसदों को उम्मीदवार बनाने की चर्चा
इस्तीफा देने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के नाम शामिल हैं. अभी तक ये तीनों नेता बीजेपी में शामिल तो नहीं हुए हैं, लेकिन इस्तीफा देने के तुरंत बाद से ही ये नेता बीजेपी नेताओं से मिलते नजर आए हैं. ये लोग खुलकर बीजेपी की तारीफ भी करने लगे हैं. इनमें से सुखेंदु शेखर रे और प्रकाश चिक बड़ाईक वाली सीटों का कार्यकाल मार्च 2029 और सुष्मिता देव वाली सीट का कार्यकाल अप्रैल 2030 तक है. इन तीनों ने जून के महीने में अपनी सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही टीएमसी का साथ भी छोड़ दिया था। 

अकेले दम पर 117 के आंकड़े तक पहुंचेगी बीजेपी 
सुष्मिता और प्रकाश दोनों ही बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. संभावना है कि दोनों को ही बीजेपी अपना कैंडिडेट बनाए. तीन जीतों के बाद बीजेपी की राज्यसभा में संख्या बढ़कर 117 हो जाएगी। 

मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है सरकार. पश्चिम बंगाल में तीनों सीटों पर जीत के बाद राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत के नजदीक पहुंच जाएगी एनडीए. वहीं, बीजेपी के इतिहास में राज्यसभा में यह सर्वाधिक संख्या होगी. बीजेपी अपने बूते ही राज्य सभा में सामान्य बहुमत के नजदीक पहुंच जाएगी. गौरतलब है कि पिछले चालीस साल में किसी भी दल को राज्यसभा में अपने बूते बहुमत नहीं मिला है. पूर्व पीएम राजीव गांधी के कार्यकाल में कांग्रेस को इससे पहले थी राज्य सभा में सबसे अधिक सीटें थीं। 

चुनाव आयोग 7 जुलाई को राज्यसभा उपचुनाव का नोटिफिकेशन जारी करेगा. नामांकन करने की अंतिम तारीख 14 जुलाई होगी. नामांकन पत्रों की जांच 15 जुलाई को होगी. 17 जुलाई तक नामांकन वापस लिया जा सकेगा. 24 जुलाई को वोटिंग होगी. सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी. 25 जुलाई को ही शाम 5 बजे काउंटिंग होगी. 27 जुलाई तक चुनाव की पूरी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 

PM मोदी इंडोनेशिया पहुंचे, फाइटर जेट्स की एस्कॉर्ट के साथ हुआ भव्य स्वागत

जकार्ता
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे हैं। इस दौरान पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने पीएम मोदी के एयरक्राफ्ट को एस्कॉर्ट किया। इसके बाद एयरपोर्ट पहुंचने पर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो ने प्रोटोकॉल तोड़ पीएम मोदी का स्वागत किया।

इंडोनेशिया में पीएम मोदी का कार्यक्रम जानें
प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में 6 से लेकर 8 जुलाई तक रहेंगे। इस दौरान वह दोनों देशों के बूीच कई क्षेत्रों में साझेदारी को गहरा करने पर जोर देंगे। इसके अलावा, भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी के इंडोनेशिया यात्रा के कई उद्देश्य हैं। रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना: पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। यह प्रधानमंत्री का चौथा दौरा होगा और मई 2018 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर पहुंचने के बाद पहली द्विपक्षीय यात्रा होगी।

भारत-इंडोनेशिया रक्षा संबंध होंगे मजबूत
भारत के रक्षा और सुरक्षा सहयोग में उच्च स्तरीय दौरा, नियमित द्विपक्षीय और बहुपक्षीय एक्सरसाइज और रक्षा उद्योग में गहरे सहयोग (ब्रह्मोस की बिक्री सहित) के जरिए तेजी आई है और इसका दायरा भी बढ़ा है। समुद्री पड़ोसी होने के नाते, दोनों देशों ने 2018 में हिंद-प्रशांत में भारत-इंडोनेशिया समुद्री सहयोग के साझा दृष्टिकोण को अपनाया। आईएफसी-आईओआर में एक इंडोनेशियन लाइजन ऑफिसर की तैनाती से हमारी मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस को और बढ़ावा मिलेगा। भारत एनडीए और डीएसएससी में इंडोनेशियन कैडेट्स और ऑफिसर्स के लिए स्लॉट भी तय करेगा, जिससे रक्षा के क्षेत्र में कैपेसिटी बिल्डिंग बढ़ेगी।

व्यापार और निवेश पर भी बनेगी बात
इस यात्रा का उद्देश्य व्यापार और निवेश के जरिए विकास को बढ़ावा देना है। विकसित भारत 2047 और एमास (गोल्डन) इंडोनेशिया 2045 के डेवलपमेंट विजन के बीच मजबूत तालमेल है। इंडोनेशिया, आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है, जिसका 2025-26 में द्विपक्षीय व्यापार 24.78 बिलियन अमेरिकी डॉलर होगा। इंडोनेशिया में अलग-अलग क्षेत्रों में 130 से ज्यादा भारतीय कंपनियों ने निवेश किया है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का उठाया लुत्फ
हवाई अड्डे पर औपचारिक स्वागत और गॉर्ड ऑफ ऑनर के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां आयोजित एक विशेष पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी अवलोकन किया. इस कार्यक्रम के जरिए इंडोनेशिया की समृद्ध संस्कृति और भारत के साथ उसके सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों की झलक पेश की गई। 

PM मोदी ने ट्वीट कर क्या कहा?
पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ”जकार्ता पहुंच गया हूं। राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के स्नेहपूर्ण व्यवहार से मैं बहुत प्रभावित हुआ। उन्होंने एयरपोर्ट पर पर व्यक्तिगत रूप से मेरा स्वागत किया। 2018 में, हमने दोनों देशों के संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचाया, जिससे हमारे लोगों को बहुत लाभ हुआ है। इस यात्रा के दौरान, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और मैं विभिन्न क्षेत्रों में इस साझेदारी को और गति देने के उद्देश्य से चर्चा करेंगे।’

आगे उन्होंने लिखा है, ”राष्ट्रपति प्राबोवो और मैं योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। यह यात्रा हमारे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और भी मजबूत करेगी। इंडोनेशिया में रहने के दौरान, मैं भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करने के अवसर का भी बेसब्री से इंतजार कर रहा हू।’

सबसे बड़े हिंदू मंदिर जाएंगे पीएम मोदी
पीएम मोदी इंडोनेशिया में 6 से लेकर 8 जुलाई तक रहेंगे। इस दौरान वह इंडोनेशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर प्रम्बानन जाएंगे। 9वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इसके अलावा वह भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। पीएम मोदी के इंडोनेशिया यात्रा के कई उद्देश्य हैं। पीएम मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। 

85% मुस्लिम फिर भी नोट पर छपी भगवान गणेश की तस्वीर
वहीं, आपको बता दें कि इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है, लेकिन वहां की सांस्कृतिक विरासत पर हिंदू-बौद्ध सभ्यता की गहरी छाप आज भी दिखाई देती है। इंडोनेशिया में रामलीला का मंचन होता है और इस देश की मुद्रा पर भगवान गणेश की तस्वीर भी छप चुकी है।

6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा पर रहेंगे पीएम मोदी
राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया की यात्रा रहेंगे. पीएम मोदी ने कहा, ‘‘2018 में मेरी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया था.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों के इस स्तर पर पहुंचने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है और यह जनवरी 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति प्राबोवो की भारत यात्रा के बाद हो रही है। 

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड की यात्रा पर हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर हैं. 11 जुलाई तक तीन देशों की अपनी यात्रा पर रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने कहा था- ‘‘पूर्वी और दक्षिणी हिंद महासागर में इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया और उसके बाद न्यूजीलैंड की मेरी यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति, ‘महासागर’ दृष्टिकोण और साथ ही स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति हमारे नजरिए को और मजबूत करेगी। 

Amarnath Yatra 2026: तेजी से पिघल रहा बाबा बर्फानी का शिवलिंग, अब सिर्फ 1 फीट शेष; श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर

श्रीनगर 

अमरनाथ यात्रा का आज चौथा दिन है। तीर्थ यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ रही है। वहीं, इसके बीच एक चिंता बढ़ाने वाली खबर भी है। कहा जा रहा है कि पवित्र शिवलिंग का आकार पिघलकर 1 फीट रह गया है। खास बात है कि जून के अंत में ऊंचाई करीब 7 फीट देखी गई थी। खास बात है कि यह यात्रा 57 दिनों तक चलती है।

तेजी से पिघल रहे बाबा बर्फानी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ में शिवलिंग अब पिघलकर करीब 1 फीट बचे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 23 मई को ऊंचाई 7 फीट थी, जो 29 जून को 5 फीट पर आ गई थी। अब ताजा तस्वीर में देखा जा रहा है कि शिवलिंग की ऊंचाई घटकर 1 फीट के आसपास रह गई है। खास बात है कि शिवलिंग का निर्माण प्राकृतिक रूप से हर साल होता है, जिसे जियोलॉजी में स्टैलेगमाइट कहा जाता है।

कैसे होता है शिवलिंग का निर्माण
दरअसल, गुफा के ऊपर चूना पत्थर और जिप्सम दरारों से बर्फ और ग्लेशियर के पिघलने से पानी बहता है। पानी जैसे ही गुफा की जमीन तक पहुंचता है, तो बेहद कम तापमान में यह जमना शुरू कर देता है। ऊपर की ओर जमने के क्रम के बाद एक शिवलिंग का आकार तैयार हो जाता है।

श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी
अमरनाथ यात्रा के तीसरे दिन रविवार को लगभग 24 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकतिक रूप से निर्मित हिम शिवलिंग के दर्शन किए। इसके साथ ही बीते तीन दिन में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 60 हजार के आसपास पहुंच गई है। तीन जुलाई से शुरू अमरनाथ यात्रा 28 अगस्त तक जारी रहेगी।

जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से 1,211 महिलाओं सहित 5,794 तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था सोमवार तड़के अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि पांचवें जत्थे में 21 बच्चे, 599 साधु और 76 साध्वियां शामिल हैं। वे तड़के तीन बजकर 10 मिनट से तीन बजकर 45 मिनट के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अलग-अलग काफिलों में आधार शिविर से रवाना हुए।

इनमें से 139 वाहनों में सवार 3,490 तीर्थयात्री अनंतनाग जिले के पहलगाम में नुनवान आधार शिविर की ओर जा रहे हैं। जबकि 128 वाहनों में 2,304 तीर्थयात्री गांदरबल जिले के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुए हैं।

कठिन यात्रा और हजारों किमी की ऊंचाई
तीर्थयात्री अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के छोटे लेकिन खड़ी चढ़ाई वाले 14 किलोमीटर के बालटाल मार्ग से एक साथ यात्रा कर रहे हैं। यह गुफा मंदिर दक्षिण हिमालय में 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

यात्रा के लिए वैध परमिट है जरूरी
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को अमरनाथ यात्रा पर जाने के इच्छुक सभी तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे अपनी तय तारीख के लिए वैध पंजीकरण परमिट मिलने के बाद ही यात्रा करें। उन्होंने कहा कि सिर्फ पंजीकृत यात्रियों को ही तय तारीख पर पवित्र गुफा मंदिर तक जाने की अनुमति दी जाएगी। यह अपील जम्मू-कश्मीर में बिना सही पंजीकरण के बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों के पहुंचने की वजह से की गई है।

कड़ी सुरक्षा के बीच हो रही है यात्रा
सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों वाला सुरक्षा घेरा, दोनों रास्तों पर नो-फ्लाई जोन, वॉचटावर, कड़ी निगरानी और तीर्थयात्रियों के काफिले की रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस ने सभी रजिस्टर्ड सर्विस प्रोवाइडर्स को क्यूआर कोड वाले पहचान पत्र जारी किए हैं, ताकि उनके पहचान पत्रों की तुरंत जांच हो सके और उग्रवादियों को सपोर्ट स्टाफ बनकर घुसने से रोका जा सके।

इसके अलावा तीर्थयात्रियों, गाड़ियों और सर्विस देने वालों के लिए आरएफआईडी टैग जारी किए गए हैं ताकि उनकी रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सके। साथ ही, सीसीटवी कैमरों का एक बड़ा नेटवर्क दोनों तीर्थ मार्गों पर आवाजाही पर नजर रख रहा है।

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