OPS पर सरकार का बड़ा फैसला, इन सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा पुरानी पेंशन स्कीम चुनने का विकल्प

नई दिल्ली

पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) का इंतजार कर रहे कई कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। ओपीएस की बहाली की मांग लंबे समय कर्मचारी कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार अब तक इस पर राजी नहीं हुई है। अब सरकार के फैसले के बाद कुछ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम चुनने का मौका मिल रहा है। इसकी शुरुआत वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने कर दी है। माना जा रहा है कि अब दूसरे केंद्रीय स्वायत्त संस्थान (Central Autonomous Bodies) भी इसी रास्ते पर चल सकते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अब दूसरे केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन का फायदा मिल सकता है?

ये कर्मचारी चुन सकेंगे पुरानी पेंशन स्कीम
पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर अब वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने भी मुहर लगा दी है। इसके बाद ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलने का रास्ता खुल गया है, जिन्हें अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) के तहत नौकरी मिली थी। अनुकंपा नियुक्ति वह नौकरी होती है, जो किसी सरकारी कर्मचारी की सर्विस के दौरान मृत्यु हो जाने या कुछ मामलों में स्थायी रूप से अक्षम होने पर उसके आश्रित परिवार के सदस्य को आर्थिक सहायता के मकसद से दी जाती है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए है, जिन्होंने 1 जनवरी 2004 से पहले अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनकी नौकरी 1 जनवरी 2004 के बाद लगी। क्योंकि उस समय तक नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) लागू हो चुका था, इसलिए उन्हें NPS के तहत शामिल कर दिया गया था।

अब केंद्र सरकार ने ऐसे पात्र कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम चुनने का विकल्प देने का फैसला किया है। CSIR ने 7 जुलाई 2026 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (Office Memorandum) के जरिए इस फैसले को अपने सभी लैब, संस्थानों और इकाइयों में लागू करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, इस फैसले की शुरुआत 22 जून 2026 को कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के एक पत्र से हुई थी। इसमें साफ कहा गया था कि जिन परिवार के सदस्य ने 12 दिसंबर 2003 या उससे पहले अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, उन्हें संबंधित मंत्रालय या विभाग पुरानी पेंशन स्कीम का विकल्प दे सकता है।

इससे पहले मार्च 2023 में केंद्र सरकार ने उन कर्मचारियों को एक बार के लिए ओपीएस चुनने का मौका दिया था, जिनकी भर्ती की प्रक्रिया 1 जनवरी 2004 से पहले शुरू हो गई थी, लेकिन नियुक्ति बाद में हुई। हालांकि, उस समय अनुकंपा नियुक्ति वाले कर्मचारियों को यह सुविधा नहीं मिली थी।

अब CSIR के इस कदम को दूसरे केंद्रीय स्वायत्त संस्थानों (CABs) के लिए भी मिसाल माना जा रहा है। हालांकि, यह फैसला अपने आप सभी संस्थानों पर लागू नहीं होगा। हर स्वायत्त संस्थान को अलग से केंद्र सरकार के इस आदेश को अपनाना होगा। इसके बाद ही वहां काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को OPS का विकल्प मिल सकेगा।

मोदी-अल्बानीज की बड़ी न्यूक्लियर डील! बदल सकता है दुनिया का परमाणु गेम प्लान

 नई दिल्ली

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के बीच हुई हालिया मुलाकात ने दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दी है. इंडोनेशिया से ऑस्ट्रेलिया पहुंचे मोदी की यह यात्रा व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने के मकसद से थी. दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर दस्तखत किए, जिनमें सबसे चर्चित सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौता है। 

यह डील सिर्फ दो देशों के बीच नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर न्यूक्लियर गेम प्लान को बदलने वाली साबित हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक देश है. अब भारत को वहां से व्यावसायिक रूप से यूरेनियम मिल सकेगा, जो भारत के न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स को नई गति देगा. मोदी ने कहा कि यह समझौता क्लीन एनर्जी के लक्ष्यों को नई दिशा देगा। 

सिविल न्यूक्लियर डील: क्लीन एनर्जी का नया अध्याय
सिविल न्यूक्लियर समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा. भारत लंबे समय से अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूक्लियर पावर पर जोर दे रहा है. कोयला और दूसरे पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के लिए न्यूक्लियर एनर्जी एक साफ और स्थिर विकल्प है। 

यह डील NSG (Nuclear Suppliers Group) की सदस्यता न होने के बावजूद भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है. ऑस्ट्रेलिया पहले से भारत के साथ न्यूक्लियर सहयोग पर चर्चा कर रहा था, लेकिन अब इसे व्यावसायिक स्तर पर लागू किया जाएगा. इससे भारत के न्यूक्लियर प्लांट्स को ईंधन मिलेगा, बिजली उत्पादन बढ़ेगा और कार्बन उत्सर्जन कम होगा। 

विश्लेषकों का कहना है कि यह समझौता वैश्विक न्यूक्लियर सप्लाई चेन को बदल सकता है. चीन और रूस जैसे देशों पर निर्भरता कम होगी. भारत अब ऑस्ट्रेलिया जैसे विश्वसनीय लोकतांत्रिक साझेदार से सामग्री हासिल कर सकेगा. इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक संतुलन भी प्रभावित होगा। 

रक्षा और समुद्री सुरक्षा में नया सहयोग
मोदी-अल्बनीज बैठक में सिर्फ न्यूक्लियर ही नहीं, रक्षा और सुरक्षा पर भी बड़ा जोर रहा. दोनों देशों ने इंडिया-ऑस्ट्रेलिया जॉइंट डिक्लेरेशन ऑन डिफेंस एंड सिक्योरिटी जारी किया. इसमें डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर बनाने का फैसला हुआ, जिससे दोनों देशों के स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रीज जुड़ सकें। 

समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में मैरिटाइम सिक्योरिटी कोलैबोरेशन रोडमैप लाया गया. इंडो-पैसिफिक में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन, शिपबिल्डिंग, शिप रिपेयर और रखरखाव पर सहयोग बढ़ेगा. दोनों देश क्वाड (भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, जापान) के जरिए भी मिलकर काम करेंगे। 

यह सहयोग खासकर चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच महत्वपूर्ण है. इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने का संकल्प दोनों देशों ने दोहराया। 

क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप
दोनों नेताओं ने क्रिटिकल मिनरल्स पर भी साझेदारी शुरू की. आधुनिक टेक्नोलॉजी, बैटरी, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस के लिए ये खनिज जरूरी हैं. भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर विकसित करेंगे. इसके साथ ही साइबर, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन पर ऑस्ट्रेलिया-इंडिया पार्टनरशिप (PACTS) लॉन्च हुई. इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और दोनों देशों की रणनीतिक सुरक्षा बढ़ेगी। 

आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर एकजुटता
मोदी ने कहा कि आतंकवाद पूरे मानवता के लिए खतरा है. दोनों देश मिलकर आतंकवाद से लड़ेंगे. ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन, फाइनेंसिंग ऑफ टेररिज्म और क्राउडेड स्पेसेज पर सहयोग बढ़ेगा. दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे संघर्षों को डायलॉग और डिप्लोमेसी से सुलझाने पर जोर दिया गया. इंडो-पैसिफिक में शांति, स्थिरता और रूल्स-बेस्ड ऑर्डर बनाए रखने का संकल्प दोनों देशों ने लिया। 

आर्थिक सहयोग: व्यापार और निवेश को बढ़ावा
दोनों देश कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट (CECA) पर तेजी से काम करेंगे. बाइलेटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी भी बनाने का फैसला हुआ है. इससे व्यापार बढ़ेगा और निवेश आएगा। 

वैश्विक न्यूक्लियर बैलेंस पर असर
यह डील वैश्विक न्यूक्लियर गेम प्लान को बदल सकती है. भारत जैसे बड़े देश को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम मिलने से रूस और अन्य स्रोतों पर निर्भरता कम होगी. क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन तेज होगी. रणनीतिक रूप से यह क्वाड को मजबूत करेगा. इंडो-पैसिफिक में चीन की चुनौती का मुकाबला करने के लिए भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी अहम होगी. क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी में सहयोग सप्लाई चेन को रिसिलिएंट बनाएगा। 

चुनौतियां भी हैं: NSG मुद्दा, घरेलू राजनीति और भू-राजनीतिक तनाव. लेकिन कुल मिलाकर यह डील दोनों देशों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। 

मोदी-अल्बनीज बैठक ने भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई दिशा दी है. न्यूक्लियर, डिफेंस, क्रिटिकल मिनरल्स और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देश मजबूत होंगे. यह डील सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर संतुलन बनाने वाली है। 

मेलबर्न में PM मोदी का बड़ा बयान, बोले- ‘धमाके आतंकी अड्डे पर हुए, गूंज पूरी दुनिया में’; किया ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र

नई दिल्ली/मेलबर्न

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों तीन दिवसीय ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने गुरुवार को मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित किया. इस मेगा शो में 30 हजार भारतीयों के बीच ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज भी मौजूद रहे. पूरा स्टेडियम ‘मोदी-मोदी’ के नारों से गूंज उठा

मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज ने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया. उन्होंने पीएम मोदी को ऑस्ट्रेलिया का सच्चा दोस्त बताया. अल्बनीज ने कहा- ‘ये दो बड़े लोकतांत्रिक देशों की दोस्ती का जश्न है। 

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान जोरजार स्वागत के लिए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा, ‘अपने मित्र पीएम अल्बानीज का आभारी हूं. मेलबर्न ने मेरा शानदार स्वागत किया. मुझे मेलबर्न वालों से मिलने का इंतजार था. मेलबर्न ने मैदान मार लिया है. ये शो हाउसफुल है। 

ऑस्ट्रेलियाई पीएम की तारीफ में बोले PM मोदी
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ‘अहमदाबाद जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है और मेलबर्न जहां आईकॉनिक स्टेडियम है, हम दोनों जगह साथ रहे हैं. हम सभी ने देखा है, प्रधानमंत्री अल्बानीज जब बोलते हैं तब भारतीयों के दिल और दिमाग में छा जाते हैं. सिडनी में भी आपने धूम मचाई थी और यहां भी आप छा गए। 

‘भारतीयों के कारण भारत-ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते मजबूत’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों को सराहते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते ऊंचाई पर है. उन्होंने बताया कि भारतीयों की वजह से ही भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते इतने मजबूत हैं. पिछले 12 सालों में तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया पहुंचे पीएम मोदी के मुताबिक, भारतीयों ने मिलकर मेलबर्न को वाइब्रेंट बना दिया है। 

उन्होंने कहा कि ये मेलबर्न शहर एक दिन में ही चार सीजन के दर्शन करा देता है, लेकिन भारतीय समुदाय ने अपने कल्चरल कलर से इसे और वाइब्रेंट बना दिया है. यहां मेलबर्न में और आस पास काफी ऐसे स्थान हैं, मार्केट हैं जो भारतीयता के रंग से भरे हैं. कोई इसे लिटिल इंडिया कहता है, कोई मिनी इंडिया कहता है… नाम कोई भी हो लेकिन रंग भारतीयता से भरे हुए हैं। 

PM मोदी कहते हैं, ‘हम भारतीयों को प्यार फैलाना पसंद है. आपके घरों में ऑस्ट्रेलियन दूध हो सकता है, लेकिन उससे बनी चाय इंडियन होती है. दाल ऑस्ट्रेलिया की हो, लेकिन उसमें तड़का देसी मसालों का ही लगता है. भारत में आज कल भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड चल रहा है, इसको हमारी Gen Z ड्राइव कर रही है और यहां ऑस्ट्रेलिया में मैंने सुना है कि आपका वीकेंड आस्था और आध्यात्म से भरा रहता है. कहीं किसी के घर भगवान सत्यनारायण की कथा, कहीं गुरुद्वारे में अरदास, कहीं बच्चों द्वारा भांगडा या भरतनाट्यम की प्रस्तुति, कहीं कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा होता है। 

उन्होंने कहा कि अब तो इंडियन फिल्म फेस्टिवल भी यहां आ गया है, कुछ दिन बाद ही यहां मेलबर्न में इंडियन फिल्म फेस्टिवल शुरू होने वाला है, मैं इसके सफल आयोजन की अभी से शुभकामनाएं देता हूं। 

‘भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने की राह पर’
PM मोदी ने आगे कहा कि ऑस्ट्रेलिया के विकास में भारतीयों का बड़ा हाथ है. भारतीय जहां होते हैं, प्रेम का रंग घोलते हैं. मुझे ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों पर गर्व है. यहां के लोगों की नजर लगातार भारत पर रहती है और 21वीं सदी का भारत विकसित होने के लक्ष्य पर है. भारत अपना स्पेस स्टेशन बनाने की राह पर है और वो स्पेस में अपना गगनयान भेजने की तैयारी कर रहा है। 

इस दौरान पीएम मोदी ने भीड़ के साथ मिलकर ‘Grow More Achieve More’ के नारे लगाए. उन्होंने कहा, ‘आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G मार्केट है. भारत के 99 फीसदी जिले 5G से लैस है. भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है. उन्होंने कहा, ‘हम 140 करोड़ एस्पिरेशन से भरे राष्ट्र हैं. हम बेसब्र हैं, हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी हैं, लेकिन हम जल्द से जल्द दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी बनना चाहते हैं। क्योंकि यही हमारी प्रेरणा है- Grow more, Achieve more…’

मेलबर्न में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र
भारतीय प्रधानमंत्री ने इस दौरान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, ‘ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देख ही लिया होगा, धमाके पड़ोसियों पर हो रहे थे और गुंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी. टेरर कैंप पर इस करारे प्रहार से आपको गर्व हुआ कि नहीं हुआ? साथियों भारत इतने पर ही रुकना नहीं चाहता. भारत कह रहा है ग्रो More … इसलिए आज जीप से लेकर शीप तक मैन्युफैक्चरिंग का भारत में एक नया इको सिस्टम डेवलप किया जा रहा है। 

‘भारत जब मदद भेजता है, तो पासपोर्ट नहीं देखता…’ 
पीएम मोदी ने भारत की दरियादिली का जिक्र करते हुए बताया कि अभी पिछले महीने ही वेनेजुएला में भूकंप की इतनी बड़ी त्रासदी आई, इतना बड़ा विनाश हुआ, सैकड़ो लोगों की जान गई. हमने दूरी कितनी है ये नहीं देखा, भारत ने वेनेजुएला की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझा. भारत ने रिलीफ और रेस्क्यू के लिए ऑपरेशन चलाया और जितनी तेजी से हो सकता था मदद भेजी. भारत जब मदद करता है, तो पासपोर्ट नहीं देखता, पासपोर्ट का रंग नहीं देखता. इसलिए, दुनिया भी भारत पर इतना विश्वास करती है। 

TRAI के नए नियम से बदलेगा कॉलिंग सिस्टम! क्या अब स्पैम कॉल ब्लॉक नहीं कर पाएगा Truecaller? कंपनी ने जताई चिंता

 नई दिल्ली

अगर आप स्पैम कॉल से बचने के लिए Truecaller का इस्तेमाल करते हैं, तो आने वाले दिनों में इस ऐप के काम करने के तरीके में बदलाव हो सकता है. इसकी वजह है कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) और ट्रूकॉलर के बीच नया विवाद शुरू हो गया है। एक तरफ TRAI चाहता है कि कॉलर आईडी ऐप्स कुछ खास नंबरों को स्पैम के तौर पर टैग या ब्लॉक न करें. वहीं ट्रूकॉलर का कहना है कि ऐसा करने से साइबर ठगी और स्पैम कॉल बढ़े हैं और यूजर्स का भरोसा कम हुआ है।

यह विवाद सिर्फ ट्रूकॉलर तक ही नहीं है, बल्कि TRAI ने सरकार से ऐसी पावर भी मांगी हैं, जिनकी मदद से वह Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई कर सके। फिलहाल ये ऐप्स टेलीकॉम लाइसेंस के तहत नहीं आते, इसलिए TRAI सीधे इन पर कार्रवाई नहीं कर सकता. इसके लिए उसने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) से आईटी एक्ट के तहत अधिकार मांगे हैं। 

140 और 1600 सीरीज नंबर क्या हैं?
TRAI ने देश में कमर्शियल कॉल्स को ऑर्गनाइज करने के लिए अलग-अलग नंबर सीरीज तय की है. 140 सीरीज का इस्तेमाल प्रमोशनल और टेलीमार्केटिंग कॉल्स के लिए किया जाता है, जबकि 1600 सीरीज बैंक, बीमा कंपनियों और दूसरी संस्थाओं की सर्विस या ट्रांजैक्शन से जुड़ी कॉल्स के लिए है. इसका मकसद यह है कि लोगों को आसानी से पता चल सके कि उन्हें किस तरह की कॉल आ रही है। 

TRAI की आपत्ति क्या है?
TRAI का कहना है कि कॉलर आईडी ऐप्स इन ऑफिशियल नंबरों को स्पैम बताकर या ब्लॉक करके सरकार की नई व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं. अगर लोग 140 और 1600 सीरीज की कॉल उठाना बंद कर देंगे तो बैंक अलर्ट, पेमेंट अपडेट और दूसरी जरूरी जानकारी भी उन तक नहीं पहुंच पाएगी. इसी वजह से TRAI चाहता है कि ऐसे ऐप्स इन नंबरों को स्पैम के रूप में टैग न करें। 

Truecaller ने क्या जवाब दिया?
ट्रूकॉलर ने TRAI के आरोपों का खुलकर विरोध किया है. कंपनी का कहना है कि उसने पहले ही सरकार के नियमों का पालन करते हुए 140 और 1600 सीरीज नंबरों पर ट्रेडिशनल स्पैम चेतावनी (Spam Warning) दिखाना बंद कर दिया है. लेकिन इसका नतीजा उल्टा निकला है. कंपनी के मुताबिक, इन नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल्स बढ़ गई हैं और लोग अब इन नंबरों पर भरोसा नहीं कर रहे। 

ट्रूकॉलर के सीईओ ऋषित झुनझुनवाला के मुताबिक, हर दिन करीब 4 लाख 140 सीरीज और 1.2 लाख से ज्यादा 1600 सीरीज की कॉल्स यूजर्स खुद ब्लॉक कर रहे हैं। 

कंपनी का कहना है कि वह इन नंबरों पर स्पैम नहीं लिख सकती, इसलिए उसने ‘फ्रिक्वेंटली ब्लॉक्ड’ नाम का नया लेबल शुरू किया है, जिससे यूजर्स को पता चल सके कि उस नंबर को बड़ी संख्या में लोग ब्लॉक कर चुके हैं। 

आगे क्या हो सकता है?
अगर MeitY, TRAI की मांग मान लेता है, तो फ्यूचर में कॉलर आईडी और स्पैम डिटेक्शन ऐप्स के लिए नए नियम बन सकते हैं.  इससे ट्रूकॉलर और दूसरे ऐप्स को यह तय करने में अधिक सख्ती का सामना करना पड़ सकता है कि किस नंबर को स्पैम दिखाया जाए और किसे नहीं। 

दूसरी ओर ट्रूकॉलर का कहना है कि यूजर्स को संदिग्ध कॉल्स की जानकारी देना उनकी सेफ्टी के लिए जरूरी है और किसी भी डिसिजन में असली डेटा को आधार बनाया जाना चाहिए। 

 

ऑस्ट्रेलियाई पेंशन फंड का भारत पर बड़ा भरोसा, NIIF में ₹2,800 करोड़ से ज्यादा का अतिरिक्त निवेश; PM मोदी ने किया स्वागत

मेलबर्न 

ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े पेंशन फंड ‘ऑस्ट्रेलियाई सुपर’ (AustralianSuper) ने भारत के नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) में 500 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹2,800 करोड़ से अधिक) के अतिरिक्त निवेश की घोषणा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बड़े निवेश का स्वागत करते हुए इसे भारत की आर्थिक विकास नीति और सुधारों पर वैश्विक भरोसे का प्रतीक बताया है। 

वैश्विक मंच पर घोषणा
यह रणनीतिक घोषणा मेलबर्न में आयोजित ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेता शिखर सम्मेलन’ के इतर की गई. इस अवसर पर ऑस्ट्रेलियाई सुपर के मुख्य कार्यकारी (CEO) पॉल श्रोडर भी मौजूद थे. प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “यह निवेश भारत की विकास और सुधार यात्रा पर वैश्विक विश्वास की एक और स्पष्ट झलक है. यह दर्शाता है कि हमारी गतिशील अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को विकास के कितने बड़े अवसर दे रही है। 

भारत में बढ़ेगा निवेश का दायरा
इस ताजा वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ ही भारतीय बाजार में ऑस्ट्रेलियाई सुपर की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 3.3 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग ₹18,500 करोड़) हो गई है. वर्तमान में यह फंड भारत के बुनियादी ढांचे, शेयर बाजार (इक्विटी) और निजी बाजारों में लगभग 2.8 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का निवेश पहले ही संभाल रहा है। 

नीतियों की निरंतरता और मजबूत प्रदर्शन मुख्य वजह
फंड के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला भारत में उनके पुराने निवेश के शानदार ट्रैक रिकॉर्ड को देखकर लिया गया है. इससे पहले साल 2019 में कंपनी ने NIIF में 240 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का शुरुआती निवेश किया था, जिसे फंड ने अपने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो में से एक बताया है। 

ऑस्ट्रेलियाई सुपर के मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) शॉन मैनुअल ने कहा, “भारत में मजबूत आर्थिक विकास, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और सरकार द्वारा विदेशी पूंजी लगाने की प्रक्रियाओं को सुगम बनाना निवेश की मुख्य वजहें हैं. हमारा मानना है कि जब दीर्घकालिक पूंजी को दूरदर्शी सरकारी नीतियों और मजबूत संस्थानों का साथ मिलता है, तो परिणाम हमेशा सकारात्मक आते हैं। 

NIIF का महत्व
भारत सरकार द्वारा साल 2015 में स्थापित NIIF एक ऐसा मंच है जो देश के बुनियादी ढांचे (सड़क, ऊर्जा, परिवहन आदि) के विकास के लिए दुनिया के बड़े संस्थागत निवेशकों से दीर्घकालिक पूंजी जुटाता है. इस नए निवेश से भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। 

अल्बनीज ने PM मोदी के साथ ली सेल्फी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इंडोनेशिया की तीन दिवसीय यात्रा पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे. जहां उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज उनका विक्टोरिया के गवर्नमेंट हाउस में स्वागत किया और फिर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। 

ये औपचारिक स्वागत समारोह दोनों नेताओं के बीच उच्च स्तरीय कार्यक्रमों के बाद आयोजित किया गया था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और आर्थिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में उनकी संयुक्त भागीदारी शामिल थी, जहां उन्होंने दोनों देशों के प्रमुख व्यापारिक अधिकारियों, निवेशकों और उद्योग प्रतिनिधियों को संबोधित किया था. जहां पीएम ने दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपति और व्यापारियों को संबोधित कर भारत के एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर टारगेट को साझा किया. इसके अलावा पीएम ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन से भी मुलाकात की। 

तीसरे भारत-ऑस्ट्रेलिया एनुअल शिखर सम्मेलन पर संयुक्त बयान जारी कर  प्रधानमंत्री मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने आतंकवाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले हिंसक चरमपंथ की सभी तरह से और हर रूप में कड़ी निंदा की. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सभी देशों को आतंकवाद के खतरे से व्यापक और लगातार तरीके से निपटना चाहिए। 

साथ ही उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों (जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा सूचीबद्ध लोग और उनके सहयोगी, प्रॉक्सी, प्रायोजक और फंडिंग करने वाले शामिल हैं) के खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया. दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद से निपटने की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए सहयोग बढ़ाने की जरूरत को माना. उन्होंने हमारे क्षेत्र में आतंकवादी खतरों के बारे में जानकारी साझा करने और सहयोग बढ़ाने के मौकों को तलाशने का संकल्प लिया. इसमें कट्टरपंथ (ऑनलाइन कट्टरपंथ समेत), आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले हिंसक चरमपंथ, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए नई और उभरती टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल, आतंकवाद के लिए फंडिंग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे व समुद्री क्षेत्र के लिए खतरों का मुकाबला करना शामिल है. उन्होंने आतंकवादी हमलों की निंदा दोहराई, जिसमें पहलगाम और बॉन्डी बीच पर हुए भयानक हमले भी शामिल हैं। 

-दोनों नेताओं ने खुले और नियमों पर आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से ‘समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ (UNCLOS) के अनुरूप अधिकारों और स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें नेविगेशन (समुद्री आवाजाही) और ओवरफ्लाइट (हवाई उड़ान) की स्वतंत्रता शामिल है. साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए. उन्होंने यथास्थिति को बदलने और क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को कमजोर करने वाली किसी भी अस्थिर करने वाली या एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। 

-PM मोदी के साथ संयुक्त प्रेस बयान देते हुए ऑस्ट्रेलिया के PM एंथनी अल्बानीज ने कहा, ‘आज हम 2015 के ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम निर्यात करने की व्यवस्था पर हस्ताक्षर की पुष्टि कर सकते हैं। 

वहीं, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद ऑस्ट्रलियाई पीएम ने बातचीत की और उनके साथ सेल्फी भी क्लिक की. उन्होंने एक्स पर पीएम मोदी के साथ सेल्फी साझा कर लिखा, ‘हम साथ मिलकर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ा रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया और भारत के व्यवसायों को समर्थन दे रहे हैं. हमारे लोगों के बीच के आपसी संबंधों ने हमारे कई व्यावसायिक सफलताओं की कहानियों को संभव बनाया है. और हम भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के आर्थिक संबंधों को बढ़ाने के लिए व्यापारिक नेताओं और विश्वविद्यालयों के साथ काम करना जारी रखेंगे। 

उन्होंने आगे लिखा कि हमारा उद्देश्य अपने देश में रोजगार के अवसर तैयार  करना और भविष्य में व्यापार और निवेश के अवसरों का भरपूर लाभ उठाना है। 

CEO फोरम में पीएम के संबोधन के बाद पॉपुलस के ग्लोबल डायरेक्टर और को-फ़ाउंडर, सीनियर प्रिंसिपल पॉल हेनरी ने कहा, “आज का दिन बहुत सफल रहा और PM अल्बानीज के साथ इस कार्यक्रम में शामिल होकर PM मोदी ने अपनी ज़बरदस्त प्रतिबद्धता दिखाई है. ये ऑस्ट्रेलिया-भारत संबंधों के लिए एक बहुत अच्छा संकेत है. 2036 में संभावित ओलंपिक और 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए अहमदाबाद को PM मोदी का समर्थन बहुत उत्साहजनक है, जो दिखाता है कि भारत में इस समय कैसी दूरदर्शी सोच है और हम आगे चलकर जबरदस्त विकास देख सकते हैं. हम पिछले 15 सालों से दिल्ली में एक ऑफ़िस के साथ भारत में काम कर रहे हैं और आगे चलकर क्रिकेट के साथ-साथ मनोरंजन के क्षेत्र में भी विकास देखना बहुत रोमांचक है। 

क्लीन एनर्जी और न्यूक्लियर पार्टनरशिप पर ऑस्ट्रेलिया CEO फ़ोरम में PM नरेंद्र मोदी के भाषण पर ऑस्ट्रेलिया इंडिया बिजनेस काउंसिल के ‘मेक इन इंडिया’ फोकस ग्रुप के चेयर विश्वनाथन कहते हैं, ‘दोनों प्रधानमंत्रियों का भाषण शानदार था, जिसमें ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के लिए जरूरी बातों पर जोर दिया गया. खासकर भारत के प्रधानमंत्री ने बहुत साफ तौर पर बताया कि भविष्य की दिशाएं क्या हैं. उन्होंने क्लीन एनर्जी की बात की और न्यूक्लियर प्रोग्राम के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी के बारे में भी बात की, जिनमें भारत और ऑस्ट्रेलिया मिलकर काम कर सकते हैं. मैं इस बात से बहुत प्रभावित हुआ कि कैसे भारत का हर राज्य कई सेक्टर में इस सहयोग के जरिए ऑस्ट्रेलिया की आर्थिक तरक्की में योगदान दे पाएगा…’

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया-भारत CEO फोरम (जिसकी स्थापना मूल रूप से 2012 में हुई थी और जिसे मोदी और अल्बानीज ने 2023 में फिर से शुरू किया था) से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश सहयोग को और मजबूत करने तथा दोनों देशों के बीच प्रमुख आर्थिक पहलों के कार्यान्वयन में सहायता करने की उम्मीद है। 

 

PM मोदी का बड़ा बयान- वैश्विक संकट के दौर में भारत-ऑस्ट्रेलिया की साझेदारी निभाएगी निर्णायक भूमिका

 मेलबर्न

इंडोनेशिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पहुंचे, जहां उन्होंने गुरुवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भाग लिया, जहां उन्होंने दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक दिग्गजों को संबोधित करते हुए भारत के महत्वाकांक्षी ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर लक्ष्यों को साझा किया. पीएम मोदी ने इस वैश्विक मंच से ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार, उन्नत तकनीक और 4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा के पेंशन फंड्स को भारत की विकास यात्रा से सीधे जुड़ने का खुला निमंत्रण दिया। 

पीएम ने कहा कि दुनिया अभी अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है. ऐसे वक्त में, भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार के तौर पर आगे बढ़ना स्वाभाविक और जरूरी है. पिछले कुछ सालों में हमने दोनों देशों की खूबियों का इस्तेमाल करते हुए अपनी भविष्य की साझेदारी के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार किया है. 2022 में रिकॉर्ड समय में हुए ECTA (इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड ट्रेड एग्रीमेंट) समझौते ने हमारे आर्थिक रिश्तों को और मजबूत किया है. इसके लागू होने के बाद से भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाला निर्यात दोगुना हो गया है और दोनों देशों के व्यवसायों को नए बाजार तक पहुंचने का फायदा मिला है। 

उन्होंने कहा कि यहां क्लीन एनर्जी से जुड़ी कई कंपनियां मौजूद हैं. हम भारत में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर मॉड्यूल और विंड टर्बाइन के लिए मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बना रहे हैं. भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट जीरो एमिशन तक पहुंचने का टारगेट रखा है. ऑस्ट्रेलिया की टेक्नोलॉजी, कैपिटल और रिसोर्स इस बदलाव को तेज कर सकते हैं… हमने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता का लक्ष्य रखा है। 

प्राइवेट कंपनियों के लिए खुला न्यूक्लियर सेक्टर
पीएम मोदी ने मंच से बताया कि कुछ महीनों पहले भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक कानून के जरिए न्यूक्लियर सेक्टर को देश की प्राइवेट कंपनियों के लिए पूरी तरह खोल दिया है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के पास मौजूद विशाल यूरेनियम भंडार भारत की इस न्यूक्लियर यात्रा से सीधे जुड़कर दोनों देशों के लिए इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक ऐतिहासिक अवसर पैदा करते हैं. ऑस्ट्रेलिया के यूरेनियम के विशाल भंडार भारत की न्यूक्लियर यात्रा से सीधे तौर पर मेल खाते हैं। 

इंफ्रास्ट्रक्चर में दिखेगी स्पीड और स्केल
देश के अंदर बुनियादी ढांचे के विकास पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में पोर्ट, एयरपोर्ट, रोड, रेलवे और अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में ऑस्ट्रेलिया के लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए अनेक संभावनाएं हैं. आज भारत में नेशनल हाईवेज लगभग 34 किलोमीटर प्रतिदिन की रिकॉर्ड गति से बढ़ रहे हैं. इसके साथ ही भारतीय रेल नेटवर्क में हर दिन 18 किलोमीटर से ज्यादा नए रेलवे ट्रैक्स लगाए जा रहे हैं जो स्केल, स्पीड और स्टेबिलिटी तीनों का एक बेहतरीन संगम है। 

क्रूड स्टील उत्पादन में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर
स्टील सेक्टर के क्षेत्र में दोनों देश पहले से ही एक मजबूत सहयोगी रहे हैं. भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड स्टील प्रोड्यूसर बन चुका है. पीएम मोदी के अनुसार, दोनों देश मिलकर अब लो कार्बन एल्यूमीनियम, ग्रीन आयरन और क्लीन मैन्युफैक्चरिंग पर काम कर सकते हैं। 

इसके अलावा एआई मिशन, क्वांटम मिशन और सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के अंतर्गत भारत सरकार ने दस बिलियन डॉलर से ज्यादा का वित्तीय सपोर्ट दिया है, जिससे मिलकर ग्लोबल सॉल्यूशन तैयार किए जा सकें। 

भारत में निवेश सुरक्षित अमानत
प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलियाई वित्तीय संस्थानों को आकर्षित करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया के पेंशन फंड्स वर्तमान में 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की भारी एसेट्स (संपत्ति) मैनेज करते हैं. उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत में आम जनता के पेंशन की बचत को एक अत्यंत पवित्र अमानत माना जाता है. इस वजह से निवेशक पूरी तरह निश्चिंत होकर डेटा सेंटर, एआई, क्वांटम, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर वैश्विक स्तर के समाधान तैयार करने के लिए आगे आ सकते हैं। 

H-1B Visa Fraud Case: Cognizant जांच के घेरे में, भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली
अमेरिका में नौकरी कर डॉलर में कमाने का सपना देखने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है. अमेरिकी सरकार ने H-1B और PERM (ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का शुरुआती चरण) वर्क वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और नियमों के दुरुपयोग की जांच तेज कर दी है. इस जांच के दौरान जिन बड़ी कंपनियों का नाम सार्वजनिक रूप से सामने आया है, उनमें आईटी दिग्गज Cognizant भी शामिल है। 

यह कार्रवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई वाली टास्क फोर्स टू एल‍िमिनेट फ्रॉड के तहत की जा रही है. अमेरिकी श्रम विभाग ( के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने बताया कि जांच एजेंसियों को कई व्हिसलब्लोअर्स से जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि Cognizant जैसी कुछ बड़ी कंपनियों से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है और कई समन (Subpoenas) जारी किए जा चुके हैं। 

अमेरिकी सरकार क्या जांच कर रही है?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जांच का फोकस उन मामलों पर है, जहां H-1B और PERM वीजा प्रक्रिया का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया. इसमें फर्जी आवेदन, वेज-किकबैक (कर्मचारियों से वेतन का हिस्सा वापस लेने के आरोप), विदेशी कर्मचारियों के कथित शोषण और अमेरिकी श्रमिकों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। 

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल कॉग्नीजेंट के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही किसी अदालत ने कंपनी को किसी भी मामले में दोषी ठहराया है. जांच अभी शुरुआती चरण में है। 

भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यह मामला क्यों अहम है?
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन से जुड़े हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय नागरिक थे. यानी अमेरिका के टेक सेक्टर में भारतीय इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। 

वीजा ट्रेंड्स से जुड़े सार्वजनिक डेटाबेस बताते हैं कि Cognizant H-1B वीजा स्पॉन्सर करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रही है. इसलिए कंपनी से जुड़ी किसी भी बड़ी जांच पर भारतीय आईटी सेक्टर की नजर स्वाभाविक रूप से रहती है। 

कॉग्नीजेंट पहले भी रही है चर्चा में
पिछले कुछ वर्षों में Cognizant वैश्विक स्तर पर लागत घटाने, रीस्ट्रक्चरिंग और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर भी चर्चा में रही है. ऐसे में यदि H-1B और PERM मामलों में नियामकीय जांच और सख्त होती है तो कंपनी समेत अन्य आईटी कंपनियों को भी वीजा प्रक्रियाओं में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। 

भारत के IT सेक्टर और नौकरियों पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि H-1B वीजा पर निगरानी और कड़ी होती है तो इसके कई संभावित प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। 

1. ऑनसाइट अवसर सीमित हो सकते हैं
कंपनियां नए H-1B वीजा स्पॉन्सर करने में पहले से अधिक सतर्क रुख अपना सकती हैं. इससे अमेरिका में काम करने के अवसर कुछ हद तक प्रभावित हो सकते हैं। 

2. भारत में ऑफशोर हायरिंग बढ़ सकती है
यदि अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति जटिल होती है, तो कंपनियां भारत जैसे देशों से रिमोट या ऑफशोर मॉडल पर अधिक काम कराने की रणनीति अपना सकती हैं। 

3. हाई-स्किल और हाई-सैलरी प्रोफाइल को मिल सकता है फायदा
अमेरिकी श्रम विभाग वेतन और भर्ती प्रक्रिया पर विशेष नजर रख रहा है. ऐसे में अधिक कौशल और बेहतर वेतन वाले पदों पर H-1B स्पॉन्सरशिप की संभावना अपेक्षाकृत मजबूत रह सकती है। 

फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है. आने वाले महीनों में अमेरिकी एजेंसियों की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इसका कॉग्नीजेंट, अन्य आईटी कंपनियों और भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है। 

Train ‘Suhagrat Coach’ Viral Video: 1AC कोच सजाने पर बढ़ा बवाल, रेलवे ने TC को किया सस्पेंड

 नई दिल्ली

भारतीय रेलवे की एक ट्रेन के 1AC कोच के एक केबिल को सजाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. सोशल मीडिया पर सुहागरात के कमरे की तरह सजे केबिन का वीडियो वायरल होने के बाद अब रेलवे प्रशासन ने संबंधित TC (टिकट चेकर) को सस्पेंड कर दिया है। 

दरअसल ये मामला 6 जुलाई 2026 का है जब ट्रेन संख्या 11002 नंदीग्राम एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक कपल ने अपने सफर को खास बनाने के लिए ऑनलाइन एक निजी डेकोरेटर को काम पर रखा था. इस डेकोरेटर ने ट्रेन के भीतर जाकर उनके पूरे केबिन को सुहागरात के कमरे की तरह सजाया। 

वीडियो के सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आ गया है. रेलवे ने इस मामले को सुरक्षा के लिहाज से एक गंभीर चूक माना है. इस लापरवाही के आरोप में संबंधित स्टाफ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करते हुए पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। 

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, यात्रियों को अपने केबिन को सजाने पर रेलवे को कोई आपत्ति नहीं है. अगर कोई यात्री पूरा केबिन बुक करता है और उसे खुद सजाता है, तो रेलवे का इससे कोई लेना-देना नहीं होता. ये पूरी तरह से यात्रियों का अपना हक है कि वो किस तरह से सफर करना चाहते हैं. ये किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं माना जाता है। 

अनाधिकृत प्रवेश को माना बड़ी चूक
लेकिन इस मामले में असल विवाद बाहरी डेकोरेटर के ट्रेन के भीतर आने को लेकर खड़ा हुआ है. रेलवे प्रशासन का कहना है कि उस निजी डेकोरेटर का ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच के भीतर जाना पूरी तरह से अनाधिकृत था. बिना इजाजत के किसी बाहरी व्यक्ति का वीआईपी कोच में प्रवेश करना सुरक्षा के नियमों के खिलाफ है। 

रेलवे ने कहा है कि जांच की रिपोर्ट आने के बाद जो भी सच सामने आएगा, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

ATM हैक करने का नया तरीका? वायरल VIDEO से मची सनसनी, जानिए क्या है पूरा सच

 नई दिल्ली

कुछ दिन पहले BAT-BMS ऐप को लेकर ई-रिक्शा बंद होने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुए थे. अब उसी तरह का एक नया वीडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है. इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक शख्स मोबाइल ऐप की मदद से ATM मशीन को बंद और फिर चालू कर देता है। 

वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब ATM भी मोबाइल ऐप से हैक किए जा सकते हैं? क्या किसी आम इंसान के लिए फोन से ATM को कंट्रोल करना मुमकिन है? आइए जानते हैं इस वायरल दावे की सच्चाई। 

वीडियो में क्या दिख रहा है?

वायरल वीडियो में एक शख्स अपने मोबाइल फोन में एक ऐप खोलता है. ऐप में मौजूद बटन दबाते ही सामने खड़ी ATM मशीन बंद होती हुई दिखाई देती है. कुछ सेकंड बाद वह फिर दूसरा बटन दबाता है और ATM दोबारा चालू हो जाती है। 

वीडियो में दिखने वाले ऐप का इंटरफेस काफी हद तक BAT-BMS ऐप जैसा नजर आता है, जो हाल ही में ई-रिक्शा विवाद के कारण चर्चा में आया था। 

क्या सच में मोबाइल से ATM कंट्रोल किया जा सकता है?
फिलहाल इसका कोई सबूत नहीं है, अब तक किसी बैंक, ATM नेटवर्क ऑपरेटर या सरकारी एजेंसी ने यह पुष्टि नहीं की है कि किसी नॉर्मल मोबाइल ऐप से ATM मशीन को बंद या चालू किया जा सकता है. इसलिए वायरल वीडियो में किया गया दावा साबित नहीं हुआ है। 

साइबर सिक्योरिटी से जुड़े जानकारों का कहना है कि ATM मशीनें नॉर्मल Bluetooth या ओपन वायरलेस नेटवर्क पर काम नहीं करतीं. ये बैंक के सुरक्षित नेटवर्क, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और कई लेवल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी होती हैं. ऐसे में किसी आम मोबाइल ऐप से इन्हें कंट्रोल करना बेहद मुश्किल माना जाता है। 

वीडियो में ऐसा कैसे दिख रहा है?
इसका जवाब अभी साफ नहीं है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वीडियो पहले से प्लान किया गया हो सकता है. यह भी संभावना जताई गई है कि ATM नॉर्मल तरीके से रीस्टार्ट हो रहा हो और उसी समय मोबाइल ऐप का इस्तेमाल दिखाकर ऐसा माहौल बनाया गया हो कि मशीन ऐप से कंट्रोल हो रही है. कुछ जगहों पर AI या वीडियो एडिटिंग की भी आशंका जताई गई है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। 

BAT-BMS ऐप से क्या है कनेक्शन?
हाल ही में BAT-BMS ऐप चर्चा में आया था. इस ऐप का इस्तेमाल कुछ ई-रिक्शा की बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से कनेक्ट होकर उन्हें दूर से बंद करने के लिए किए जाने के आरोप लगे थे. इसके बाद सरकार ने मामले की जांच शुरू की और BAT-BMS समेत कुछ ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश भी दिए। 

यही वजह है कि अब ATM वाले वायरल वीडियो को भी लोग उसी विवाद से जोड़कर देख रहे हैं. कुछ लोगों को ये सच भी लग रहा है, क्योंकि वीडियो इस तरह से तैयार किया गया है कि ये किसी को भी सही लगे। 

किराए की THAR पर लगेगा बैन? हादसों के बाद सरकार की बड़ी तैयारी, जानिए पूरा प्लान

पणजी 

गोवा का नाम सुनते ही दिमाग में बीच, छुट्टियां और किराये पर दौड़ती महिंद्रा थार की तस्वीर बनती है. लेकिन यही THAR सरकार की नज़र में आ गई है, जिसकी रफ्तार पर राज्य सरकार ब्रेक लगाने की तैयारी में है. वजह हैं लगातार सामने आ रहे सड़क हादसे. गोवा सरकार ने नई रेंटल महिंद्रा थार और थार रॉक्स के लाइसेंस पर रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है. अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो यह सिर्फ एक गाड़ी पर फैसला नहीं होगा, बल्कि पूरे रेंटल कार कारोबार और टूरिज़्म से जुड़े समीकरण भी बदल सकते हैं। 

ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या हादसों की वजह सिर्फ गाड़ी है, या फिर उसे चलाने का तरीका? यही बहस अब गोवा से निकलकर पूरे देश में शुरू हो सकती है. आइये जानें क्या है पूरा मामला- 

गोवा के परिवहन मंत्री मौविन गोडिन्हो (Mauvin Godinho) ने हाल ही में राज्य परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस दौरान सड़क सुरक्षा से जुड़े कई नए प्रस्तावों पर चर्चा हुई. मंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि ज्यादा जोखिम वाली रेंटल महिंद्रा थार गाड़ियों को लेकर नए नियम बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. दरअसल सरकार महिंद्रा थार को (हाई-रिस्क रेंट-कार) मान रही है और और इस मीटिंग में थार गाड़ियों को रेगुलेट करने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई. इसे अब स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। 

सरकार ने साफ किया है कि बड़े सड़क हादसों में शामिल रेंटल कार चालकों के साथ-साथ गाड़ी मालिकों और ऑपरेटरों पर भी कार्रवाई होगी. इसके अलावा प्राइवेट गाड़ियों का अवैध तरीके से कमर्शियल और रेंटल इस्तेमाल करने वालों पर भी शिकंजा कसा जाएगा. रेंटल गाड़ियों की पार्किंग को लेकर भी अलग नियम बनाए जा सकते हैं। 

अभी नहीं लगी है रोक
यहां यह ध्यान देना जरूरी है कि, फिलहाल महिंद्रा थार पर कोई प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है. यह सिर्फ एक प्रस्ताव है, जिस पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी की अगली बैठक में वोटिंग होगी. मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा. महिंद्रा थार और थार रॉक्स देश के कई टूरिस्टम प्लेसेज पर सबसे ज्यादा किराये पर ली जाने वाली SUVs में शामिल हैं। 

शानदार ऑफ-रोडिंग कैपेसिटी, दमदार इंजन और बोल्ड रोड प्रेजेंस इस एसयूवी को टूरिस्ट के बीच लोकप्रियम बनाती हैं. इसके अलावा टफ टेरेन (खराब रास्तों) पर चलने की क्षमता के कारण पर्यटक इन्हें काफी पसंद करते हैं. हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि गोवा सरकार ने किन आंकड़ों के आधार पर इन्हें दूसरी गाड़ियों की तुलना में ज्यादा जोखिम वाला माना है। 

पहले भी आ चुके हैं ऐसे प्रस्ताव
यह पहली बार नहीं है जब गोवा सरकार ने रेंटल गाड़ियों को लेकर बड़ा कदम उठाने की कोशिश की है. साल 2023 में भी प्रस्ताव आया था कि 2024 से राज्य में सभी कार और बाइक रेंटल ऑपरेटर सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन ही किराये पर दें. हालांकि यह योजना लागू नहीं हो सकी. वहीं उबर और ओला जैसी टैक्सी एग्रीगेटर सेवाओं को राज्य में शुरू करने की कोशिशें भी अब तक सफल नहीं हुई हैं। 

बैठक में रोड सेफ्टी को बेहतर करने के लिए AI बेस्ड ट्रैफिक कैमरे, स्पीड गवर्नर और वाहन ट्रैकिंग सिस्टम लगाने पर भी चर्चा हुई. मंत्री के मुताबिक, राज्य के 26 स्थानों पर लगाए गए AI ट्रैफिक कैमरों ने एक ही दिन में 56,500 से ज्यादा ट्रैफिक वॉयलेशन के केस पकड़े हैं. फिलहाल लोगों को चेतावनी दी जा रही है. 15 जुलाई के बाद मौके पर ही चालान काटे जाएंगे. सितंबर तक कैमरों की संख्या 52 औ    र दिसंबर तक 90 स्थानों तक बढ़ाने की योजना है। 

क्या THAR है दोषी?
हालांकि, अभी रेंटेड थार के रोक पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है. लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि, क्या सड़क पर होने वाले हादसों के लिए गाड़ी जिम्मेदार है? इससे पहले भी थार को लेकर इस तरह की कई बातें सामने आ चुकी हैं. कुछ दिनों पहले हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस) ओपी सिंह ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि, “अब थार गाड़ी है, इसे छोड़ने का क्या मतलब है… सारे बदमाश इसी से चलते हैं. मतलब जिस तरह की गाड़ी का च्वॉइस है… वो आपका माइंडसेट शो करता है। 

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