AMCA पर इंजन संकट! अमेरिकी कंपनी ने बढ़ाए दाम, भारत के ड्रीम फाइटर प्रोजेक्ट पर असर

 नई दिल्ली
 भारत अपना खुद का पांचवीं पीढ़ी का अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान (AMCA) बनाने के सपने पर तेजी से काम कर रहा है। लेकिन इस बीच देश के सामने एक पुरानी और बड़ी चुनौती फिर से खड़ी हो गई है और वह है, लड़ाकू विमान का इंजन बनाना।

इस बात को ऐसे समझिए कि भारत ने फाइटर जेट का ढांचा, रडार और हथियार तो खुद बना लिए हैं, लेकिन विमान का सबसे जरूरी हिस्सा यानी ‘इंजन’ के लिए हम आज भी विदेशों पर निर्भर हैं। ऐसे में अब अमेरिकी कंपनी द्वारा अचानक दाम बढ़ा दिए जाने से भारत के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

अब सवाल अमेरिकी कंपनी की जरूरत क्यों?
लड़ाकू विमान के इंजन की कीमतों में भारी उछाल के बाद यह सवाल दोबारा खड़ा हो गया है कि आखिर भारत को इस प्रोजेक्ट के लिए अमेरिकी बैसाखी की जरूरत क्यों पड़ रही है? अच्छा सवाल यह भी है कि क्या अमेरिकी कंपनी द्वारा बनाए गए इंजन की जरूरत केवल

भारत को है या फिर अन्य देशों को भी?
इस बात का जवाब है कि नहीं, सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि तुर्किए, दक्षिण कोरिया और स्वीडन जैसे देश भी अपने स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए पूरी तरह अमेरिकी तकनीक पर निर्भर हैं। ऐसे में अब सवाल यह है कि भारत अपने लड़ाकू विमान के इंजन की बनावट को लेकर क्या कदम उठाने वाला है?

पहले समझिए क्या है पूरा विवाद
बता दें कि भारत के फाइटर जेट प्रोजेक्ट्स के लिए अमेरिका की मशहूर कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से F414 इंजन खरीदने की बातचीत चल रही थी। लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बातचीत अब खटाई में पड़ती दिख रही है।

इसका कारण है कि DRDO के सूत्रों के मुताबिक, जिस F414 इंजन की कीमत पहले प्रति यूनिट 70 से 80 करोड़ रुपये तय की जा रही थी, अमेरिकी कंपनी GE ने अब उसके दाम करीब तीन गुना बढ़ाकर बताए हैं।

दाम बढ़ने के बाद बजट मुख्य चुनौती
अमेरिकी कंपनी की तरफ से दाम तीन गुणा बढ़ाने के दावों के बाद समझौता अब अधर में पड़ता दिख रहा है। इस बात को ऐसे समझिए कि भारत सरकार ने इस विमान के शुरुआती 5 मॉडल बनाने के लिए 15000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। ऐसे में इंजन महंगा होने से यह पूरा बजट गड़बड़ा सकता है।

अब समझिए भारत के सामने क्या है मजबूरी?
दाम बढ़ाने के बाद अब डिजाइन को लेकर सबसे बड़ी समस्या भारत के सामने खड़ी हो रही है। इस बात को ऐसे समझिए कि भारत की वैमानिकी विकास एजेंसी (ADA) ने AMCA लड़ाकू विमान का पूरा ढांचा इसी अमेरिकी F414 इंजन के हिसाब से डिजाइन किया है। इस मोड़ पर आकर इंजन बदलना बिल्कुल भी आसान नहीं है।

दूसरी ओर प्रोजेक्ट में देरी की संभावना भी चिंता का विषय बन सकता है। कारण है कि भारत को शुरुआती टेस्टिंग के लिए 15 इंजनों की जरूरत है। अगर बातचीत में देरी हुई, तो विमान के आने का समय और आगे खिसक सकता है। हालांकि वैसे उम्मीद है कि यह विमान 2034 या 2035 तक भारतीय वायुसेना में शामिल हो पाएगा।

इसका असर तेजस विमानों पर भी होगा?
तो इस सवाल का जवाब है, हां शायद। रिपोर्ट की माने तो इंजनों के दाम बढ़ाने का असर सिर्फ लड़ाकू विमान AMCA ही नहीं, भारत का नया तेजस Mk2 विमान भी इसी इंजन पर चलने वाला है। वहीं, पुराने तेजस Mk1A के लिए भी अमेरिका से इंजनों की सप्लाई में देरी हो रही है, जिससे वायुसेना को विमान मिलने में लेट हो रहा है।

सिर्फ भारत नहीं, दुनिया के ये बड़े देश भी हैं मजबूर
अच्छा सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि इंजन के मामले में सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई और ताकतवर देश भी अमेरिका के भरोसे हैं। इस बात ऐसे समझिए कि तुर्किए का अपना पांचवीं पीढ़ी का विमान ‘KAAN’ भी शुरुआत में अमेरिकी GE F110 इंजन से ही उड़ेगा, क्योंकि उनका खुद का इंजन बनने में अभी कई साल लगेंगे।

दूसरी ओर दक्षिण कोरिया का नया ‘KF-21’ लड़ाकू विमान भी अमेरिकी F414 इंजन की मदद से ही उड़ रहा है। स्वीडन का मशहूर ‘ग्रिपेन’ (Gripen E) विमान भी अमेरिकी इंजन पर निर्भर है। इसका नुकसान यह है कि स्वीडन अपनी मर्जी से इसे किसी दूसरे देश को बेच नहीं सकता, क्योंकि इसके लिए अमेरिका की मंजूरी (ITAR नियम) जरूरी होती है।

अब सवाल- आखिर लड़ाकू विमान का इंजन बनाना इतना मुश्किल क्यों?
गौरतलब है कि फाइटर जेट का इंजन बनाना दुनिया की सबसे जटिल और कठिन तकनीकों में से एक है। इन इंजनों को बहुत कम वजन और कम ईंधन में आसमान चीरने वाली ताकत पैदा करनी होती है। कारण है कि इंजन के अंदर का तापमान इतना ज्यादा होता है कि आम धातुएं तुरंत पिघल जाएं। इसके लिए खास ‘सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड्स’ और अत्याधुनिक धातुओं की जरूरत होती है।

ऐसे में फिलहाल दुनिया के सिर्फ 5 देश अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के पास ही स्वतंत्र रूप से फाइटर जेट इंजन बनाने की तकनीक है। हालांकि इस बात में भी कोई दोहराई नहीं है कि भारत ने सालों पहले खुद का ‘कावेरी इंजन’ बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह लड़ाकू विमान को उड़ाने लायक ताकत नहीं दे पाया। अब उस इंजन के बदले हुए रूप का इस्तेमाल भारत के ‘घातक’ ड्रोन में किया जाएगा।

सेशेल्स में पीएम मोदी को मिला सर्वोच्च सम्मान: ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’

विक्टोरिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में नेतृत्व के लिए सेशेल्स की ओर से देश का सर्वोच्च सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ प्रदान किया गया है। रविवार को राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने उन्हें ये सम्मान दिया। ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान प्रधानमंत्री मोदी की लंबे समय से जारी उस नीति और दृष्टिकोण को मान्यता देता है, जिसमें सतत विकास, हरित विकास और पर्यावरण-अनुकूल नीतियों पर जोर दिया गया है।

पीएम मोदी के ‘ग्रीन विजन’ को मान्यता
यह उपाधि उन कई वैश्विक मान्यताओं में नवीनतम है, जो प्रधानमंत्री मोदी को जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए मिल चुकी हैं। पिछले महीने मई 2026 में, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने उन्हें कृषि क्षेत्र को मजबूत करने, खाद्य सुरक्षा बढ़ाने और सतत कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए एग्रीकोला मेडल प्रदान किया था।

सेशेल्स द्वारा दिया गया यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक पर्यावरणीय नेतृत्व और “ग्रीन विज़न” को और अधिक मजबूत मान्यता के रूप में देखा जा रहा है। भारत के पीएम तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर शनिवार को सेशेल्स पहुंचे। जहां राष्ट्रपति हर्मिनी ने उनका औपचारिक स्वागत किया।

सेशेल्स के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता
रविवार को स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

नेशनल एसेंबली को संबोधित कर रचेंगे इतिहास
पीएम मोदी भारतीय समुदाय की ओर से आयोजित कार्यक्रम में भी शामिल होंगे और सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करेंगे। जिसके साथ ही वे दुनिया के पहले ऐसे भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे जिन्होंने 20 देशों की संसद या नेशनल असेंबली को संबोधित किया है।

सेशेल्स रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने खुद इसकी जानकारी दी थी। एक्स पर उन्होंने लिखा, “मुझे सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने का सम्मान प्राप्त होगा। यह ऐतिहासिक अवसर उन सशक्त लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं का प्रतीक है, जो हमारे दोनों देशों को एक-दूसरे से जोड़ती हैं

म्यांमार बना दुनिया का सबसे बड़ा अवैध अफीम उत्पादक, NCB रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली
 भारत का पड़ोसी देश म्यांमार अब गैर कानूनी अफीम के उत्पादन के मामले में अफगानिस्तान को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक बन गया है। 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद आर्थिक संकट और गृहयुद्ध जैसी स्थिति के कारण म्यांमार में अफीम का उत्पादन पिछले 10 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। यह जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की शुक्रवार को जारी वार्षिक रिपोर्ट में दी गई।

एनसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार का शान राज्य अवैध अफीम की खेती का सबसे ब़ड़ा केंद्र बन गया है। NCB ने चेतावनी दी है कि ‘म्यांमार से अफीम की तस्करी का नया रास्ता सीधे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से होकर गुजरता है, जिससे भारत की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा होता है। यह रास्ता आतंकवाद को फंडिंग और हथियारों की तस्करी से भी जुड़ा है।

खुली सीमा बनी समस्या
    रिपोर्ट में कहा गया है कि खुली सीमा और ‘फ्री मूवमेंट रिजीम’ (आवाजाही की खुली व्यवस्था) तस्करी को आसान बनाते हैं, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर नशे की लत बढ़ती है, बल्कि विद्रोही समूहों को फंडिंग मिलती है।

अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर सबसे बड़ा तस्करी मार्ग
    NCB के मुताबिक, अफगानिस्तान-पाकिस्तान-ईरान कॉरिडोर अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा अफीम तस्करी मार्ग बना हुआ है, लेकिन भारत को सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय तस्करी मार्गों से रणनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है।
    रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि कोकीन की तस्करी वाले देशों में तस्करी से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी यह दिखाती है कि ड्रग मार्केट में प्रतिस्पर्धा कैसे सुरक्षा का एक बड़ा संकट पैदा कर सकती है। इसमें आगे कहा गया है कि भारत के समुद्री पड़ोस पर करीबी नज़र रखने की जरूरत है।

दुनियाभर में बढ़ रही नशे का लत
NCB ने पाया है कि डार्कनेट मार्केट, सिंथेटिक ड्रग्स और इंटरनेशनल पोस्टल सिस्टम के आपस में जुड़ने से दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। दुनिया भर में ड्रग्स के इस्तेमाल पर रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2023 में दुनिया भर में लगभग 31.6 करोड़ लोगों (15 से 64 वर्ष आयु वर्ग) ने कम से कम एक बार किसी नशीले पदार्थ का सेवन किया। वर्ष 2013 में यह संख्या 24.6 करोड़ थी। यानी पिछले एक दशक में वैश्विक ड्रग्स उपयोग में लगभग 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

सिंथेटिक ड्रग्स सबसे बड़ा खतरा
रिपोर्ट में निटाजेन्स नामक सिंथेटिक ओपिओइड को उभरता हुआ वैश्विक खतरा बताया गया है। यह ड्रग हेरोइन से लगभग 500 गुना अधिक शक्तिशाली है। इसके अलावा एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मौत और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की आशंका बढ़ गई है। एनसीबी ने कहा है कि इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

ड्रग्स से बढ़ रही हिंसा
NCB ने चेतावनी दी है कि ड्रग्स तस्करी केवल नशे तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इससे हिंसा और संगठित अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, इक्वाडोर में कोकीन तस्करी को लेकर गैंगवार के कारण वर्ष 2020 से 2023 के बीच हत्या की दर लगभग छह गुना बढ़ गई।
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही ड्रग्स की सप्लाई
NCB के अनुसार, टेलीग्राम, व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भारत समेत दुनिया भर में ड्रग्स की सप्लाई के लिए अहम माध्यम बनकर उभरे हैं। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई तकनीकी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

 

लोहगढ़ किले मर्डर केस: आरोपियों ने हत्या से पहले Google पर तरीका सर्च करने का खुलासा

मुंबई
महाराष्ट्र के मशहूर लोहगढ़ किले में कारोबारी केतन अग्रवाल की पहाड़ी से धकेलकर हत्या करने के मामले में हर दिन रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुणे ग्रामीण पुलिस की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने इस वारदात को अंजाम देने से पहले बाकायदा गूगल पर हत्या करने के तरीके सर्च किए थे। इतना ही नहीं दोनों ने हत्या की जगह का चुनाव करने और पकड़े जाने पर पुलिस को क्या जवाब देना है, इसकी बाकायदा रिहर्सल भी की थी।

इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की कड़ियों को जोड़ने के लिए पुणे ग्रामीण पुलिस रविवार को दोनों आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच लोहगढ़ किले लेकर पहुंची, जहां पूरे क्राइम सीन को री-क्रिएट किया गया।

पुलिस को गुमराह करने के लिए बनाया था प्लान B
जांच अधिकारियों के मुताबिक, सिया और चेतन ने इस खौफनाक हत्याकांड को किसी मंझे हुए अपराधियों की तरह अंजाम दिया था। वारदात से पहले दोनों अकेले लोहगढ़ किले गए थे ताकि उस सटीक जगह की पहचान कर सकें जहां से केतन को नीचे धकेला जा सके। पकड़े जाने के डर से बचने के लिए उन्होंने भेष बदलने की भी योजना बनाई थी।

चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपियों ने सिर्फ एक ही योजना नहीं बनाई थी, बल्कि अगर मुख्य प्लान फेल हो जाता तो उनके पास ‘प्लान सी’ भी तैयार था। पकड़े जाने की सूरत में पुलिस के सामने क्या कहानी सुनानी है इसकी स्क्रिप्ट उन्होंने पहले ही रट ली थी। सबूत मिटाने के लिए दोनों ने मोबाइल की पूरी चैट हिस्ट्री और रीसायकल बिन को भी साफ कर दिया था, जिसे रिकवर करने के लिए फोन फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।

पहली बार झाड़ियों ने बचाई जान, सांप का बहाना बनाया
पुलिस फाइलों से पता चला है कि 18 जून को केतन की हत्या करने से पहले भी सिया ने उसे मारने की कोशिश की थी। बीती 14 जून को सिया केतन को लेकर इसी किले पर आई थी और उसने केतन को धक्का दे दिया था। लेकिन किस्मत अच्छी थी कि केतन ने पहाड़ी के किनारे उगी एक झाड़ी को पकड़ लिया और उसकी जान बच गई।

उस समय अपनी साजिश पर पर्दा डालने के लिए सिया ने तुरंत नाटक रचा। वह ‘सांप-सांप’ चिल्लाने लगी और केतन को गले लगा लिया, जिससे केतन को लगा कि सिया सचमुच डर गई थी और सांप से बचाने के चक्कर में उसका संतुलन बिगड़ा था।

जन्मदिन के बहाने दोबारा बुलाया
14 जून को नाकाम होने के बाद सिया ने हार नहीं मानी। 18 जून को अपने जन्मदिन का बहाना बनाकर वह केतन को दोबारा ट्रेकिंग के लिए लोहगढ़ किला ले आई। इस बार उसने अपने प्रेमी चेतन चौधरी को भी वहां बुला लिया था। पुलिस के मुताबिक, योजना के तहत जैसे ही सिया पहाड़ी के किनारे एक तय जगह पर बैठी वैसे ही पीछे से छिपकर आ रहे चेतन चौधरी ने केतन को जोरदार धक्का दे दिया। केतन संभल पाता उससे पहले ही वह 300 फीट गहरी खाई में जा गिरा और उसकी मौत हो गई।

17 करोड़ का महल, 2 प्राइवेट प्लेन
केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी में हुई थी और आगामी नवंबर में दोनों की बेहद भव्य शादी होने वाली थी। केतन के परिवार ने राजस्थान के जयपुर में एक आलीशान महल को 17 करोड़ रुपये में बुक किया था। यही नहीं बारात और मेहमानों को ले जाने के लिए दो प्राइवेट विमानों की व्यवस्था भी की जा चुकी थी। लेकिन सिया अपने परिवार के सामने चेतन से प्यार की बात स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। पुलिस हिरासत में उसने बेहद चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि परिवार से बगावत करने और सगाई तोड़ने से ज्यादा आसान केतन को रास्ते से हटाना था।

बिलखते पिता की भावुक अपील
इस बीच शनिवार रात केतन अग्रवाल के गहुंजे स्थित निवास की हाउसिंग सोसाइटी में समाज के लोगों ने एक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल बेहद भावुक हो गए। उन्होंने 18 जून को लोहगढ़ किले में मौजूद रहे पर्यटकों से सामने आने की अपील की। विशाल अग्रवाल ने कहा, “कुछ लोग हमें सोशल मीडिया पर मैसेज भेजकर कह रहे हैं कि वे उस दिन किले पर मौजूद थे और उन्होंने कुछ संदिग्ध देखा था, लेकिन वे पुलिस के पास जाने से कतरा रहे हैं। मैं उन सभी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि कृपया आगे आएं और मेरे बेटे को न्याय दिलाने में पुलिस की मदद करें। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि आपको किसी कानूनी पचड़े या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

फिलहाल पुलिस दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने से पहले हर उस रास्ते और लोकेशन की वीडियोग्राफी कर रही है, जिसका इस्तेमाल इस वीभत्स हत्याकांड में किया गया था।

तिरुपति बालाजी दर्शन: अनंत अंबानी ने मुंडन कर भगवान के चरणों में अर्पित किए बाल

तिरुमाला
दुनिया के सबसे अमीर और प्रतिष्ठित परिवारों में से एक, रिलायंस इंडस्ट्रीज के उत्तराधिकारी अनंत अंबानी ने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर (तिरुपति बालाजी) में दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा का परिचय देते हुए भगवान के चरणों में अपने बाल समर्पित किए (मुंडन संस्कार करवाया)।

सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी की इस सादगी और धार्मिक निष्ठा की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे अध्यात्म की पराकाष्ठा मान रहे हैं, जहाँ दुनिया की तमाम दौलत, शोहरत और नाम पीछे छूट जाते हैं और केवल ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास ही मायने रखता है।

आस्था से बड़ा कोई आभूषण नही
अक्सर कहा जाता है कि भगवान के दरबार में अमीर हो या गरीब, हर कोई एक समान है। अनंत अंबानी के इस कदम ने इस बात को एक बार फिर साबित कर दिया है। भौतिक सुख-सुविधाओं और वैश्विक स्तर पर पहचान होने के बावजूद, उन्होंने सनातन परंपराओं का पालन करते हुए तिरुपति बालाजी के चरणों में अपना शीश नवाया।

एक संदेश जो दिल को छू गया:
“सब कुछ पाकर भी जो भगवान को चुनता है, वही सबसे धनवान है। जहाँ नाम, दौलत और शोहरत पीछे रह जाते हैं… वहाँ सिर्फ़ आस्था साथ चलती है। दुनिया की सबसे बड़ी दौलत भी, भगवान के दरबार में सिर्फ़ श्रद्धा बन जाती है।”

तिरुपति में मुंडन परंपरा का महत्व
सनातन धर्म में तिरुपति बालाजी मंदिर में मुंडन कराने (बालों का दान करने) की सदियों पुरानी परंपरा है। इसे अहंकार के त्याग और भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। अनंत अंबानी का यह रूप दिखाता है कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहना ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत है।

सादगी की मिसाल: अनंत अंबानी ने तिरुपति देवस्थानम में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दर्शन किए।

परंपरा का सम्मान: आधुनिक जीवनशैली के बीच सनातन संस्कृति और मुंडन की परंपरा का निर्वहन किया।

सोशल मीडिया पर चर्चा: नेटिजन्स अनंत अंबानी के इस धार्मिक झुकाव और अहंकार-रहित व्यक्तित्व की सराहना कर रहे हैं।

मन की बात: पीएम मोदी ने हरगिला संरक्षण की सफलता और जनता के सहयोग की मिसाल पेश की

 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने ‘मन की बात’ रेडियो कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के जरिए देश की जनता को संबोधित कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने देश के रक्षा क्षेत्र में बढ़ते आत्मनिर्भरता के कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारा देश अब समुद्र से लेकर आकाश तक सुरक्षित और आत्म निर्भर है। पीएम मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर देश-विदेश में हुए कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा प्रस्तावित योग दिवस के मौके पर दुनिया भर के करोड़ों लोगों ने योग किया था। इसके बाद पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के बीच देशवासियों की दी गई सलाहों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लोगों ने न सिर्फ इन सलाहों को माना, बल्कि उस पर अमल भी किया।

पीएम मोदी ने कहा कि देश के कई परिवारों ने फैसला किया है कि वह शादी विवाह में सोना नहीं खरीदेंगे। अगर जरूरत पड़ी भी तो वह पुराने सोने को गलाकर नए जेवर बना लेंगे। इसके अलावा पीएम ने बताया कि कई लोगों ने अपनी विदेश यात्राएं रद्द कर दी, तो कई लोगों ने साथ मिलकर कार पूलिंग को भी अपनाने का काम किया है। इसके अलावा लोगों ने पेट्रोल और डीजल के उपयोग को भी कम करने का जबरदस्त प्रयास किया है। बता दें, पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट से निपटने के लिए लोगों को सोने को न खरीदकर विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी। इसके अलावा उन्होंने लोगों से सोना न खरीदने और कार पुलिंग करने की सलाह दी थी।

हरगिला की यात्रा, अविश्वास से विश्वास तक की यात्रा
पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में असम के हरगिला पक्षी के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कैसे असम में विलुप्ती की कगार पर आए हरगीला पक्षी को लोग अंधविश्वास की वजह से मार रहे थे। पीएम ने बताया कि हरगिला पक्षी हमारे पर्यावरण को साफ करने में मदद करता है। लेकिन असम में लोग अंधविश्वास की वजह से इसे मिटाने पर तुले हुए थे। आलम यह था कि जिस पेड़ पर हरगिला के घोंसले होते थे, वह उस पेड़ को ही काट देते थे। इसके बाद एक जीव विज्ञानी ने इस पर ध्यान दिया और लोगों को इससे जोड़ा। इसके बाद आज लोग हरगिला को लेकर अपने विचार बदल रहे हैं। हरगिला को बचाने वाली इस टीम को हरगीला आर्मी कहते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, सर्जियो गोर बोले- बस कुछ मुद्दों पर सहमति बाकी

वाशिंगटन 
 भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के करीब पहुंच गए हैं। इसमें बस कुछ ही मुद्दे सुलझाने बाकी हैं और पक्षों इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कानूनी भाषा को अंतिम रूप देने पर ध्यान दे रहे हैं। व्हाइट हाउस में न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास इंटरव्यू में, अमेरिकी राजदूत गोर ने भरोसा जताया कि यह एग्रीमेंट आने वाले हफ्तों या महीनों में पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कई दूसरे बड़े व्यापार समझौतों के मुकाबले बातचीत पहले ही बहुत तेजी से आगे बढ़ चुकी है। द्विपक्षीय व्यापार समझौते की शेष कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा, “समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) की भाषाई रूपरेखा पर अभी काम होना बाकी है। करीब 48 घंटे पहले दिल्ली में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर के साथ मैं उन बैठकों में शामिल था, जहां हमने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। वे मेरे बहुत अच्छे मित्र हैं। यह वार्ता बेहद सार्थक रही। हालांकि, कुछ मुद्दों पर अभी भी सहमति बनना बाकी है। अब बहुत कुछ उस अंतिम मसौदे की भाषा पर निर्भर करेगा, जिस पर दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ हफ्तों या महीनों में इस प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।”
गोर ने कहा कि बातचीत को सही नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका समझौते पर सिर्फ लगभग 18 महीने से चर्चा चल रही थी। उन्होंने कहा, “देखिए, इसे सही नजरिए से देखें तो, हम इस समझौते पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं। 

यूरोपीय संघ समझौता, जो अभी भी पूरी नहीं हुई है, उसे 20 साल हो गए हैं। हर कोई कहता है, ‘इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?’ हम इसे पूरा करने की दिशा में एक शानदार रास्ते पर हैं।”प्रस्तावित समझौते के कंटेंट को लेकर बात करने से इनकार करते हुए, अमेरिकी राजदूत गोर ने कहा कि दोनों सरकारें ऐसे नतीजे की ओर काम कर रही हैं जिससे दोनों पक्षों को फायदा हो।

उन्होंने कहा, “मैं ज्यादा कुछ नहीं बताना चाहता। आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा। यह उन चीजों में से एक है जब आपको कॉमन ग्राउंड मिलता है और हम उन चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हैं, तभी डील होती है।”

अमेरिकी राजदूत ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया मीटिंग के बाद भी भारत आने के लिए उत्सुक हैं।

गोर ने कहा, “मेरे पास अभी पक्की तारीखें नहीं हैं। मैं अभी राष्ट्रपति से मिला हूं। मैं उनके साथ ओवल ऑफिस में कई घंटे रहा। राष्ट्रपति ने जो बातें पूछी, उनमें से एक यह थी, ‘तो मैं कब आ रहा हूं?’ वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बुलाया है। मुझे लगता है कि यह किसी समय होगा।”हालांकि, उन्होंने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव शेड्यूल के कारण टाइमलाइन बताने से मना कर दिया, लेकिन गोर ने कहा कि भारत अभी भी उनकी प्राथमिकता वाली जगह बना हुआ है।

अमेरिकी राजदूत ने कहा, “अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है, जिसमें वे अन्य देश में घूमने पर फोकस करेंगे। लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की लिस्ट में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही जाएंगे।”

गोर ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मजबूत व्यक्तिगत संबंध समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की अटकलों के बावजूद भारत-अमेरिका संबंधों की मजबूत आधारशिला बने हुए हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम बहुत अच्छी जगह पर हैं। उस संबंधों की एक बड़ी वजह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच का रिश्ता है जो हमेशा मजबूत रहा है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं और यह बात सालों पुरानी है और यह बात आगे भी जारी रहेगी।”

भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को लेकर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद मार्केट एक्सेस बढ़ाना, टैरिफ की रुकावटें कम करना और आर्थिक सहयोग को मजबूत करना है। दोनों सरकारों ने बार-बार इस समझौते को अपनी प्राथमिकता बताया है और एक बड़े ट्रेड फ्रेमवर्क पर जाने से पहले एक शुरुआती समझौते को पूरा करने के लिए काम कर रही हैं।

व्यापार, भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के सबसे तेजी से बढ़ते स्तंभ में से एक बनकर उभरा है, जिसमें रक्षा, तकनीक, जरूरी और नई तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध भी शामिल हैं। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत में अपने बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक इंटीग्रेशन को भी गहरा करने की कोशिश की है।

भारतीय तटरक्षक बल में शामिल हुआ ICGS अक्षय, समुद्री सुरक्षा को मिली मजबूती

नई दिल्ली
 भारतीय तटरक्षक बल ने अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए नई पीढ़ी के फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ICGS अक्षय (यार्ड 1273) को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल कर लिया। वास्को (गोवा) में आयोजित समारोह के दौरान इस स्वदेशी पोत को कमीशन किया गया। यह जहाज समुद्री सीमाओं की निगरानी, त्वरित कार्रवाई और तटीय सुरक्षा को नई मजबूती देगा।

ICGS अक्षय का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने किया है। इस पोत में 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके भारतीय तटरक्षक बेड़े में शामिल होने से देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।

‘समुद्र सिर्फ व्यापार नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का भी आधार’
पश्चिमी क्षेत्र के तटरक्षक कमांडर इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा (PTM, TM) ने कहा कि समुद्र केवल आवागमन और व्यापार का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि समुद्री सुरक्षा भारत के राष्ट्रीय उद्देश्यों का अहम हिस्सा है और इसे हर हाल में मजबूत बनाए रखना आवश्यक है।

इंस्पेक्टर जनरल भीष्म शर्मा ने कहा कि किसी भी सुरक्षा बल की तैयारी केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह तैयारी प्लेटफॉर्म, वर्दीधारी जवानों के प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) और सबसे बढ़कर उनकी सोच और क्षमता में दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि हर नया प्लेटफॉर्म तटरक्षक बल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि ICGS अक्षय भारतीय तटरक्षक बल की समुद्र में मौजूदगी को और मजबूत करेगा। इसके जरिए आपात स्थितियों में प्रतिक्रिया की गति बेहतर होगी और तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी। यह पोत भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा।

मुंबई पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: मुहर्रम जुलूस में जहरीले कैप्सूल बांटता आरोपी गिरफ्तार

मुंबई
मुंबई पुलिस ने मुहर्रम जुलूस के दौरान जहरीले कैप्सूल बांटने की बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया. पुलिस ने इस मामले में फैयाज प्रेमजी नाम के एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी बिना अनुमति के ‘दर्द से राहत’ के नाम पर लोगों को कैप्सूल बांट और बेच रहा था. मुंबई पुलिस के मुताबिक जेजे और भायखला इलाके से मोहर्रम का जुलूस गुजर रहा था, जहां आरोपी कथित तौर पर लोगों को कैप्सूल बांट रहा था. पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने फैयाज को कैप्सूल वितरित करते हुए देखा. शक होने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की और उसके पास मौजूद कैप्सूल जब्त कर लिए.

डीसीपी सेंट्रल रीजन जोन-1 जयंत मीणा ने बताया, ‘बीती रात भायखला पुलिस स्टेशन की सीमा में मुहर्रम का जुलूस निकाला जा रहा था. जुलूस के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति लोगों को कैप्सूल बांटता और बेचता हुआ दिखाई दिया. संदेह होने पर मुंबई पुलिस की पेट्रोलिंग टीम ने उससे पूछताछ की और उसके पास से कैप्सूल का स्टॉक बरामद किया.’ पुलिस का दावा है कि जांच के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने खासतौर पर मुहर्रम जुलूस को निशाना बनाया और इसमें शामिल होने वाले लोगों को नुकसान पहुंचाने की मंशा रखता था.

फैयाज ने 50 KG जिंक फॉस्फाइड मंगाया था
डीसीपी जयंत मीणा ने कहा, ‘पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने कुल 30 हजार खाली कैप्सूल और 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने वाला जहरीला केमिकल) मंगवाया था, जो बेहद जहरीला पदार्थ है.’ पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान पुणे निवासी फैयाज प्रेमजी के रूप में हुई है, जो पेंट का कारोबार करता है और बीबीए ग्रेजुएट है. पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कई दिनों तक अपने ठिकाने पर कैप्सूलों में जहर भरने का काम किया. पुलिस का कहना है कि कैप्सूल का सेवन करने वाले सलमान सैयद नाम के व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई थी. उसे पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया.

जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज
भायखला पुलिस ने आरोपी के पास से 14,900 जहरीले कैप्सूल बरामद किए हैं. प्रत्येक कैप्सूल में करीब एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड मिलाया गया था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी साल 2025 में ईरान और इराक गया था. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. इस मामले में उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने बताया कि फैयाज प्रेमजी शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से संबंध रखता है.

आरोपी एक साल में 19 बार ईरान-इराक गया
फैयाज की बहन ईरान में फिजियोथेरेपिस्ट के तौर पर काम करती है, जबकि उसकी मां भी ईरान में रहती हैं. उसकी पत्नी से उसका तलाक हो चुका है. जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच फैयाज कई बार ईरान और इराक की यात्रा कर चुका है. पुलिस के मुताबिक पिछले एक साल में ही वह 19 बार ईरान और इराक गया था. फैयाज प्रेमजी पुणे के विमान नगर इलाके में रहता है, जहां उसका पेंट का कारोबार है. मुंबई आने के दौरान वह डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉरमेट्री में ठहरा था.

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी उन यात्राओं का उद्देश्य क्या था और क्या आरोपी किसी के प्रभाव में था या किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था. हालांकि, फिलहाल किसी आतंकी संगठन से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है. फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश में कोई अन्य व्यक्ति या संगठन शामिल था या नहीं.

8th Pay Commission से पहले कर्मचारियों को मिल सकता है बड़ा तोहफा, सामने आया नया अपडेट

 नई दिल्‍ली

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को आठवें वेतन आयोग के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन उससे पहले ही उन्‍हें सैलरी में बढ़ोतरी का तोहफा मिल सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 8वां वेतन आयोग आने से पहले एक बार फिर कर्मचारियों के महंगाई भत्ता में बढ़ोतरी हो सकता है। 

जुलाई नजदीक आने और महंगाई के उच्च स्तर पर बने रहने के कारण, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द ही अपने महंगाई भत्ते में एक और बढ़ोतरी देखने की उम्मीद बढ़ रही है. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन महंगाई के नए आंकड़ों ने एक नए संशोधन की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। 

क्‍यों बढ़ रही वेतन बढ़ोतरी की उम्‍मीद? 
दरअसल, केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ता संशोधित करती है. आमतौर पर जनवरी और जुलाई से इन बढ़ोतरियों को लागू किया जाता है. यह भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई से निपटने में मदद करने के लिए है। 

अंतिम महंगाई भत्ता (DA) दर की गणना औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो खुदरा कीमतों में होने वाले बदलावों पर नजर रखता है. आवश्यक आंकड़े उपलब्ध होने के बाद, सरकार कैबिनेट की मंजूरी लेने से पहले संशोधित दर की गणना करती है. चूंकि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अभी तक लागू नहीं की गई हैं, इसलिए कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के ढांचे के तहत महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन मिलता रहेगा। 

नया महंगाई का आंकड़ा क्‍या दिखाता है? 
आंकड़ों के अनुसार, मई में कुल खुदरा महंगाई दर 3.93% रही, जो अप्रैल में 3.48% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74% से बढ़कर 4.25% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई 3.16% से बढ़कर 3.53% हो गई. फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी हुई है। 

फूड महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. अखिल भारतीय उपभोक्ता फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) के अनुसार, मई में फूड इन्‍फ्लेशन 4.78% रही, जबकि अप्रैल में यह 4.20% थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह बढ़कर 4.85% हो गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.66% तक पहुंच गई। 

कुल महंगाई दर और फूड प्रोडक्‍ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की लागत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि महंगाई भत्ता (DA) की गणना सामान्य कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स के बजाय CPI-IW पर आधारित है, फिर भी ये आंकड़े बताते हैं कि महंगाई दर का रुझान जारी है, जिससे एक और DA बढ़ोतरी की घोषणा की संभावना को सपोर्ट मिलता है। 

अभी कर्मचारियों को कितना डीए मिल रहा है? 
केंद्र सरकार ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में महंगाई भत्ता (DA) में संशोधन किया था, जिसमें 1 जनवरी, 2026 से प्रभाव से 2 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई थी. इस संशोधन के बाद, केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (DR) बेसिक सैलरी के 58% से बढ़कर 60% हो गई. जुलाई 2026 से लागू होने वाले अगले महंगाई भत्ते (DA) संशोधन की घोषणा अभी बाकी है. हालांकि, नए महंगाई के आंकड़े से यह जानकारी मिलती है कि महंगाई भत्ते में अभी 2 से 3 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।  

अभी 8वें वेतन आयोग का प्रॉसेस कहां तक बढ़ा? 
जहां एक ओर कर्मचारी आगामी वेतन संशोधन पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. पिछले कुछ महीनों में, कर्मचारी यूनियन और अन्‍य समूहों ने कई मांगें रखी हैं. इनमें महंगाई दर के अनुसार न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाना, भत्तों में संशोधन करना, वेतन संरचना में सुधार करना और पेंशन संबंधी लाभों में बदलाव करना शामिल है. हालांकि, सरकार ने अभी तक नए वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया है। 

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