महिला आरक्षण और परिसीमन बिल की तैयारी, NDA सरकार के सामने दो-तिहाई बहुमत की बड़ी चुनौती

नई दिल्ली
केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण को 2029 से ही लागू करने के लिए एक नया संविधान संशोधन विधेयक और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) लाने की तैयारी में है। हालांकि, इन ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की होगी। संसद के पिछले बजट सत्र में संख्या बल की कमी के कारण 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था, जिसके बाद साधारण बहुमत से पास होने वाले परिसीमन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया था। इस बार सरकार नए सिरे से रणनीति बना रही है।

दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है NDA?
संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन अनिवार्य है। मौजूदा स्थिति में पाला बदलने वाले सांसदों को जोड़ने के बाद भी एनडीए बहुमत के आंकड़े से पीछे है। लोकसभा में एनडीए की वर्तमान ताकत 319 सांसदों की हो चुकी हैं। इनमें टीएमसी 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद भी शामिल हैं। अब भाजपा को संसद में 41 सीटों की आवश्यक्ता है। आपको बता दें कि 543 सीटों वाले लोकसभा में दो तिहाई बहुत में के लिए 360 सांसदों की जरूरत होती है।

राज्यसभा का क्या है समीकरण
राज्यसभा में NDA की वर्तमान ताकत 152 सांसदों की है। दो-तिहाई बहुमत के लिए 161 सांसदों की जरूरत है। भाजपा को यहां भी 9 सांसदों के समर्थन की आवश्यक्ता है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार को या तो विपक्षी दलों का सीधा समर्थन चाहिए होगा या फिर मतदान के समय वॉकआउट के जरिए दो-तिहाई के लिए जरूरी कुल संख्या को कम करना होगा।

तमिलनाडु का बदलता समीकरण
विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का समर्थन हासिल करने के लिए नए विधेयक में उनकी चिंताओं को दूर करना सबसे अहम होगा। 22 लोकसभा सांसदों वाली द्रमुक (DMK) का रुख हमेशा से सीटों के आवंटन पर मौजूदा स्थिति बनाए रखने का रहा है। डीएमके का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों की सीटें कम नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद सी. जोसेफ विजय की पार्टी TVK के सत्ता में आने से राज्य के राजनीतिक समीकरण बदले हैं, जिससे भाजपा के प्रति डीएमके के कड़े रुख में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। हालांकि डीएमके सांसद तिरुची शिवा का कहना है कि आधिकारिक प्रस्ताव सामने आने से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

क्या हैं संवैधानिक अड़चनें?
इस पूरे विवाद और नए विधेयक के केंद्र में अनुच्छेद 81 के दो मुख्य कड़े नियम हैं। अंतर-राज्यीय सीटों का आवंटन यानी कि अनुच्छेद 81(2)(a)। यह नियम कहता है कि राज्यों को लोकसभा सीटें उनकी आबादी के अनुपात में मिलनी चाहिए। आपको बता दें कि देश में राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को बनाए रखने के लिए 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों के आवंटन को पिछले 50 वर्षों से फ्रीज किया गया है। पहला फ्रीज 1976 में और दूसरा 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान लगाया गया था। इसकी मियाद 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े आने पर समाप्त हो जाएगी।

2011 की जनगणना का पेंच
यदि सरकार 2011 की जनगणना को आधार बनाकर नया परिसीमन लाती है तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटें दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी, क्योंकि उत्तर भारत की आबादी तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार अन्य दलों का समर्थन हासिल करने के लिए अनुच्छेद 81 में संशोधन करके इस फ्रीज की समयसीमा को कुछ और दशकों के लिए आगे बढ़ा सकती है, जिससे राज्यों की मौजूदा सीटों का अनुपात सुरक्षित रहे।

राज्य के भीतर का परिसीमन
यह नियम राज्य के भीतर ही अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को तय करता है ताकि राज्य के भीतर सभी क्षेत्रों में जनसंख्या का अनुपात बराबर रहे। वर्तमान में इसके लिए 2001 की जनगणना को आधार माना गया है। सरकार नए विधेयक में इसे बदलकर 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित करने का प्रस्ताव दे सकती है, जिस पर विपक्षी दलों में व्यापक सहमति बनने की संभावना अधिक है।

सिंधु जल समझौता स्थगित होने के बाद बढ़ी पाकिस्तान की मुश्किलें, भारत ने दोहराया सख्त रुख

नई दिल्ली
भारत और पाकिस्तान के बीच जल को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। एक साल पहले भारत की ओर से सिंधु जल समझौता स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान में हालात खराब हैं और मौजूदा अल नीनो संकट से उसकी मुसीबतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से कई बार बयानबाजी भी की जा रही हैं, लेकिन भारत ने दो टूक कहा है कि जब तक आतंकवाद जारी रहेगा पाकिस्तान को जल आपूर्ति बंद रहेगी।

वहीं, इस साल पूरी दुनिया गंभीर अल-नीनो से जूझ रही है। इस कारण न केवल तापमान वृद्धि से तमाम देशों को जूझना पड़ रहा है, बल्कि अतिवृष्टि और अल्पवृष्टि का संकट भी बढ़ रहा है। ऐसे में सिंधु जल समझौते के स्थगित होने से पाकिस्तान को न तो भारत से जल मिल रहा है और न ही कोई सूचना। सिंधु बेसिन की नदियों में ज्यादा जल बढ़ने पर उनको छोड़ा जा रहा है और कम होने पर रोका जा रहा है। पाकिस्तान के अपने जल प्रबंधन की नाकामी भी उसकी दिक्कतें बढ़ा रही है, क्योंकि उसके पास जल भंडारण क्षमता बेहद सीमित है।

किदवई डॉक्ट्रिन की चर्चा
पाकिस्तान में जल संकट इतना है कि उसके नेता अब युद्ध और परमाणु हमले की बात कह रहे हैं। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर में मात खा चुके पाकिस्तान को भी पता है कि उसने यदि एक भी गलती की तो भारत का पलटवार उसके लिए बेहद भारी पड़ेगा। ऐसे में पाकिस्तान में किदवई डॉक्ट्रिन की काफी चर्चा है जो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों के बारे में कुछ स्थितियों का उल्लेख करती है।

पलटवार नहीं झेल पाएगा पाकिस्तान
पाकिस्तान में इस तरह की कई स्थितियां बन रही हैं, पर वह यह भी जानता है कि भारत को उसके उन ठिकानों का पता है, जहां वह सटीक पलटवार कर उसकी रीढ़ तोड़ सकता है। इसलिए बयान देना अलग बात है, आगे बढ़ना अलग। दूसरी ओर, भारत ने सिंधु बेसिन में काफी तैयारियां की हैं। वह न केवल जल भंडारण बढ़ा रहा, बल्कि अपने क्षेत्रों में अधिकतम उपयोग भी कर रहा है।

चेनाब व्यास नहर टनल से चेनाब का जल लाएंगे
भारत ने चेनाब पर दुलहस्ती बांध जल विद्युत परियोजना में 70 मीटर ऊंचे व 186 मीटर लंबे बांध में गाद हटाकर और टनल के जरिए ज्यादा भंडारण क्षमता हासिल कर ली है। शाहपुर कंडी बांध परियोजना पूरी होने पर रावी का अतिरिक्त जल पाक नहीं जा सकेगा, वह जम्मू-कश्मीर के कठुआ व सांबा जिलों में मोड दिया जाएगा। चेनाब व्यास नहर टनल से चेनाब का जल व्यास में लाया जाएगा।

शोपियां में दूसरे दिन भी एनकाउंटर जारी, लश्कर के A++ कमांडर समेत दो आतंकी घेरे में

नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रविवार को भी एनकाउंटर जारी है। सुरक्षा बलों ने शनिवार से ही लश्कर-ए-तैयबा के दो खूंखार आतंकवादियों को घेर रखा है। ये दोनों आतंकी स्थानीय हैं। अभी भी मीमंदर इलाके के एक घने बाग के भीतर घिरे हुए हैं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है ताकि वे भाग न सकें। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार को कुछ अपुष्ट खबरों में दावा किया गया था कि दोनों आतंकी मारे गए हैं, लेकिन रविवार को अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आतंकियों को पकड़ने या उन्हें मार गिराने के लिए ऑपरेशन अभी भी जारी है।

सुरक्षा बलों की तकनीकी निगरानी के दौरान शुक्रवार को इन दोनों आतंकियों की गतिविधि मीमंदर इलाके में देखी गई थी। शनिवार को जब सेना की एक टीम तलाशी लेते हुए आगे बढ़ी, तो आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मुठभेड़ में बदल गई।

एक A++ श्रेणी का कमांडर
खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार फंसे दोनों आतंकियों की पहचान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासियों के रूप में हुई है।

जाकिर गनी: यह लश्कर-ए-तैयबा का एक खूंखार ऑपरेटिव है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने A++ श्रेणी के आतंकवादियों की सूची में रखा है। जाकिर साल 2024 से घाटी में सक्रिय है और कई आतंकी मामलों में वॉन्टेड है। अक्टूबर 2025 में कुलगाम की एक एनआईए (NIA) अदालत ने उसके खिलाफ उद्घोषणा नोटिस भी जारी किया था।

लतीफ भट: लतीफ पिछले साल ही इस आतंकी संगठन में शामिल हुआ था और जाकिर के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था।

विक्टर फोर्स ने संभाला मोर्चा
गर्मियों के इस मौसम में बागों के घने पत्तों और पेड़ों के कारण सुरक्षा बलों को ब्लाइंड स्पॉट्स का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने मोर्चा संभाला है। इलाके में रोशनी की व्यवस्था की गई है। रात के समय आतंकियों के भागने की कोशिशों को रोकने के लिए पूरे बाग को हाई-बीम लाइटों से रोशन किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शनिवार शाम तक सेना ने आस-पास के चार गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया है, जबकि मुख्य घेराबंदी को और मजबूत कर दिया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑपरेशन?
शोपियां जिला ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल श्रृंखला से जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर रहा है। ऐसे में जाकिर गनी और लतीफ भट जैसे स्थानीय कमांडरों को बेअसर करना लश्कर के लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय युवाओं की नई भर्ती को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल, अंतिम रिपोर्ट मिलने तक दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है और सुरक्षा बल बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

मोदी कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज: क्या इन दिग्गज नेताओं को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी? BJP की नई टीम भी तैयार

नई दिल्ली
 मोदी कैबिनेट में बड़े बदलाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी अपनी नई टीम का खाका तैयार कर चुके हैं. दो जुलाई को गृह मंत्री अमित शाह, नितिन नवीन और बीएल संतोष के बीच एक बहुत अहम बैठक हुई. तीन घंटे तक चली इस सीक्रेट मीटिंग में सरकार और संगठन के नए चेहरों पर मुहर लगी है. यह रिशफल सिर्फ एक सामान्य बदलाव भर नहीं है. इसके पीछे बहुत बड़ी इलेक्शन रणनीति काम कर रही है. कई दिग्गज मंत्रियों की कुर्सी बदल सकती है. संगठन के कई पुराने नेताओं को सरकार में शामिल किया जा सकता है. यह सारी कवायद आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर हो रही है. खासकर उन राज्यों पर फोकस है जहां पार्टी को अपना दम दिखाना है. एनडीए के सहयोगियों को भी कैबिनेट में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है. आइए जानते हैं कि इस बड़े बदलाव में किन नेताओं के आएंगे ‘बहुत अच्छे दिन। 

क्या होगा नितिन नवीन की नई टीम का स्ट्रक्चर और रणनीति?
नितिन नवीन महज 45 साल की उम्र में बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. उनकी नई टीम में कई युवा और फ्रेश चेहरे शामिल होने जा रहे हैं. संगठन के इस नए स्ट्रक्चर में अनुभव और नई पीढ़ी का एक शानदार बैलेंस देखने को मिलेगा. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, महासचिव और केंद्रीय मीडिया टीम में नियुक्तियों पर अंतिम चर्चा हो रही है. इस नई टीम को क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है. उन राज्यों को सबसे ज्यादा तरजीह मिल रही है जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. पार्टी का पूरा फोकस जमीनी स्तर पर मजबूती लाने पर है। 

कैबिनेट फेरबदल में किन दिग्गज मंत्रियों का बदल सकता है विभाग?

  •     कैबिनेट रिशफल को लेकर सत्ता के गलियारों में हलचल बहुत तेज है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कई केंद्रीय मंत्रियों को अब संगठन में भेजा जा सकता है. वहीं संगठन के कई दिग्गज नेताओं को सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। 
  •     मौजूदा कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल का नाम फाइनेंस मिनिस्टर के तौर पर सबसे आगे चल रहा है. गोयल एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और उनका बैकग्राउंड देश की इकॉनमी को बहुत अच्छे से समझता है। 
  •     वहीं मौजूदा फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को एजुकेशन मिनिस्ट्री की कमान मिल सकती है. यह एजुकेशन सेक्टर भी सरकार के लिए बहुत अहम है और यहां बड़े रिफॉर्म्स की जरूरत है। 

क्या अनुराग ठाकुर की कैबिनेट में होगी एक शानदार वापसी?
अनुराग सिंह ठाकुर के नाम पर भी दिल्ली में बहुत चर्चा हो रही है. उन्हें फिर से कैबिनेट रैंक के साथ एक बड़ा पोर्टफोलियो दिया जा सकता है. अनुराग का यूथ कनेक्शन उनके फेवर में काम कर रहा है. इसके अलावा पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास का नाम भी रेस में है. सरकार इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए बड़े टेक्नोक्रेट्स पर पूरा भरोसा जता सकती है। 

पंजाब से तरुण चुघ को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है. उन्हें कैबिनेट में बड़ी जगह मिल सकती है जिससे पंजाब में पार्टी मजबूत हो. जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनकी जगह भी नए चेहरों को मौका मिलेगा. इसमें हरदीप पुरी और बीएल वर्मा जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कुछ पुराने मंत्रियों को गवर्नर बनाकर अलग राज्यों में भेजा जा सकता है। 

एनडीए सहयोगियों और नए चेहरों को मिलेगा कैबिनेट में बड़ा इनाम!

  • मोदी कैबिनेट में एनडीए सहयोगियों को खुश रखने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है. हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए राघव चड्ढा का नाम भी चर्चा में है. उन्हें पंजाब के कोटे से कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. इससे पंजाब में बीजेपी का ग्राफ ऊपर जाएगा। 
  • शिवसेना गुट की ताकत भी लगातार बढ़ रही है. इसके चलते श्रीकांत शिंदे या एकनाथ शिंदे के किसी करीबी नेता को मंत्री पद मिलना लगभग तय है। 
  • जेडीयू चीफ नीतीश कुमार भी केंद्र में अपनी पार्टी के लिए बड़ा रोल चाहते हैं. उनकी डिमांड को देखते हुए जेडीयू का वजन कैबिनेट में बढ़ सकता है। 
  • इसके साथ ही संजय दीना पाटिल को हेल्थ सेक्टर में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है. पाटिल को मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर हेल्थ बनाया जा सकता है.

बीजेपी संसदीय बोर्ड में होने जा रहा है अहम बदलाव

    बीजेपी का संसदीय बोर्ड पार्टी की सबसे बड़ी डिसीजन मेकिंग बॉडी है. इसमें 11 सदस्य होते हैं और अब इसका भी पूरा पुनर्गठन हो रहा है. कई बड़े नेताओं को इस कोर बोर्ड में एंट्री मिल सकती है. राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े का नाम इसमें सबसे आगे है. उनका ऑर्गेनाइजेशनल स्किल बहुत शानदार है और वे महाराष्ट्र के अहम नेता हैं। 

    पश्चिम बंगाल और ओडिशा में जीत के रणनीतिकार सुनील बंसल को भी प्रमोट किया जा सकता है. उन्हें नेशनल इलेक्शन प्लानिंग की कमान मिल सकती है. इसके अलावा महाराष्ट्र के नेता देवेंद्र फडणवीस का नाम भी इस लिस्ट में है. उन्हें पश्चिमी भारत के प्रतिनिधित्व के लिए बोर्ड में लाया जा सकता है। 

शिवराज सिंह चौहान बनेंगे हिंदी हार्टलैंड के सबसे बड़े डिसीजन मेकर!

    संसदीय बोर्ड में मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता शिवराज सिंह चौहान के नाम पर भी मुहर लग सकती है. आरएसएस के साथ चर्चा के बाद उनकी दावेदारी बहुत मजबूत हुई है. उन्हें हिंदी पट्टी के राज्यों में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। 

    जेपी संगठन में आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक सिस्टम की तर्ज पर बदलाव होने जा रहा है. टॉप नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभारी बनाया जा सकता है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘यह नया बदलाव पूरी तरह से मिशन 2029 को ध्यान में रखकर किया जा रहा है’ .
    राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को उत्तर और पश्चिम भारत की कमान मिल सकती है. सर्बानंद सोनोवाल को नॉर्थईस्ट और के लक्ष्मण को दक्षिण भारत की जिम्मेदारी दी जा सकती है। 

नेता का नाम संभावित जिम्मेदारी मुख्य कारण
नितिन नबीन बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष युवा और फ्रेश चेहरों के साथ संगठन का नया स्ट्रक्चर बनाना.
पीयूष गोयल फाइनेंस मिनिस्टर (संभावित) चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते इकॉनमी की गहरी समझ.
निर्मला सीतारमण एजुकेशन मिनिस्टर (संभावित) एजुकेशन सेक्टर में बड़े बदलाव और रिफॉर्म्स लागू करना.
अनुराग ठाकुर कैबिनेट में शानदार वापसी यूथ कनेक्शन और बड़े पोर्टफोलियो के साथ मजबूत दावेदारी.
शक्तिकांत दास कैबिनेट में नई एंट्री इकॉनमी को रफ्तार देने के लिए टेक्नोक्रेट चेहरे पर दांव.
राघव चड्ढा कैबिनेट मंत्री (पंजाब कोटा) पंजाब में बीजेपी का ग्राफ बढ़ाना और पार्टी को मजबूती देना.
विनोद तावड़े संसदीय बोर्ड में शामिल होने की अटकलें ऑर्गेनाइजेशनल स्किल और महाराष्ट्र-केंद्र के बीच ब्रिज.
सुनील बंसल संसदीय बोर्ड में प्रमोशन की चर्चा नेशनल इलेक्शन प्लानिंग का जिम्मा और नई रणनीति बनाना.
शिवराज सिंह चौहान संसदीय बोर्ड में संभावित एंट्री हिंदी पट्टी के राज्यों में फैसले लेने की बड़ी कमान.
राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी उत्तर-पश्चिम भारत के रीजनल इंचार्ज आरएसएस की तर्ज पर बड़े क्षेत्रों की सीधी निगरानी.
सर्बानंद सोनोवाल नॉर्थईस्ट के रीजनल इंचार्ज पूर्वोत्तर और आदिवासी बेल्ट में पार्टी को संस्थागत मजबूती देना.
के लक्ष्मण दक्षिण भारत के रीजनल इंचार्ज आगामी चुनावों से पहले दक्षिण के जातीय समीकरण साधना.
नीरज सिंह और पूजा पाल यूपी बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष यूपी चुनाव 2027 के लिए जमीनी स्तर पर सोशल आउटरीच बढ़ाना.

यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी ने तैयार किया है कौन सा नया मास्टरप्लान?

कैबिनेट रिशफल और संगठन में बदलाव का सीधा असर विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए पार्टी ने अभी से अपनी तैयारी शुरू कर दी है. यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी के नेतृत्व में संगठन में बड़ा फेरबदल हुआ है. पार्टी ने अपने छह क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल दिया है. 64 सदस्यों की एक नई एग्जीक्यूटिव बॉडी भी बनाई गई है. कोर वोट बैंक को मजबूत करने के लिए गैर-यादव ओबीसी समाज के 25 नेताओं को पदाधिकारी बनाया गया है। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह और पूजा पाल को भी बड़ा पद मिला है। 

बीजेपी का पूरा फोकस अब सोशल और रीजनल इंजीनियरिंग पर है. 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी राज्य चुनावों के लिए इसे एक कोर वॉर रूम की तरह तैयार किया जा रहा है. संसदीय बोर्ड में ओबीसी और महिला चेहरे के तौर पर सुधा यादव अपनी जगह बरकरार रख सकती हैं. अल्पसंख्यक कोटे से इकबाल सिंह लालपुरा और अनुसूचित जाति कोटे से सत्यनारायण जटिया भी अपनी सीट बचा सकते हैं. मोदी सरकार का नया मंत्रिमंडल एक मजबूत इलेक्शन मशीनरी की तरह काम करेगा. पार्टी उन राज्यों पर ज्यादा ताकत लगा रही है जहां उसे अपना पुराना रुतबा वापस पाना है। 

EPFO Big News: 31 लाख PF खातों में लावारिस पड़े ₹9,000 करोड़, जानें आपका पैसा तो नहीं फंसा?

 नई दिल्ली

केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 (EPF Scheme 2026) की अधिसूचना जारी कर दी है और इसके साथ ही ईपीएफओ सदस्यों (EOFO Menbers) के लिए एक नए युग की शुरुआत की है. इस बीच इंडिया टुडे को मिली एक सूचना के अधिकार (RTI) से बपड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल, इससे पता चला है कि देश में ईपीएफओ के तहत 30.91 लाख निष्क्रिय खाते हैं और इनमें 9,330 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम लावारिस पड़ी है. ये इतनी बड़ी रकम है कि इससे तीन IIT बन जाएंगे। 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, ईपीएफ के निष्क्रिय खातों में जमा बिना दावे वाली जमा रकम को लेकर यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब नई ईपीएफ योजना, 2026 लागू हो रही है, जबकि आधार से जुड़े और हाई वैल्यू वाले अकाउंट्स के बारे में अभी तक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। 

29 जून से प्रभावी नई EPF स्कीम
गौरतलब है कि नोटिफाई किए जाने के बाद नई EPF Scheme 2026 बीते 29 जून से प्रभावी है, जिसने ईपीएफ योजना, 1952 का स्थान लिया है. नई योजना का उद्देश्य भविष्य निधि नियमों (EPF Rules) को सरल बनाना और संगठन से जड़ी करीब 8 करोड़ सक्रिय ईपीएफओ सदस्यों के लिए सिस्टम को अधिक डिजिटल बनाना है। 

RTI में क्या खुलासा हुआ? 
आरटीआई में बताए गए आंकड़ों पर नजर डालें, तो इसमें ईपीएफओ ने बताया है कि बीते 31 मार्च 2026 तक 30,91,862 निष्क्रिय ईपीएफ खाते थे, जिनमें लगभग 9,330 करोड़ रुपये की लावारिस राशि जमा थी. बीते फाइनेंशियल ईयर की तुलना में इस आंकड़े में मामूली सुधार ही देखने को मिला है। 

इससे पहले 31 मार्च 2025 को निष्क्रिय पीएफ खातों की संख्या 31.83 लाख थी और ये संख्या 31 मार्च 2026 तक लगभग 92,000 की कमी के साथ घटकर एक साल में 30.91 लाख हो गई है. इसके अलावा इन खातों में जमा बिना दावे वाली लावारिस रकम में 851 करोड़ रुपये की कमी आई है, जो 10,181 करोड़ रुपये से कम होकर 9,330 करोड़ रुपये रह गई। 

EPF निष्क्रिय खातों में पड़े 9,330 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा 2016 में शुरू की गई उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना पर हुए खर्च करीब 10,169 करोड़ रुपये के बराबर हैं. इसके अलावा बिना दावे वाला ये पैसा केंद्र सरकार द्वारा आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के लिए 2026-27 में आवंटित राशि के भी लगभग बराबर है। 

तीन IIT खड़े हो जाएंगे इतनी रकम में 
रिपोर्ट में साल 2014 के सरकारी अनुमानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि उस समय देश में एक आईआईटी की स्थापना की लागत करीब 1,750 करोड़ रुपये थी. वहीं महंगाई को ध्यान में रखकर देखें, तो साल 2026 में ये लागत करीब 2,934 करोड़ रुपये हो जाती है. इस हिसाब से देखें, तो निष्क्रिय पीएफ खातों में जमा बिना दावे वाली रकम में भारत में 3 आईआईटी खड़े हो सकते हैं. इसके बाद भी करीब 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बच जाएंगे। 

RTI में मांगी गई थी ये डिटेल 
EPFO के तहत निष्क्रिय खातों की बढ़ती संख्या को लेकर इंडिया टुडे ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों के लिए ऐसे खातों और इनमें जमा रकम की सालाना डिटेल मांगी थी. ईपीएफओ की ओर से कहा गया कि वह सिर्फ 2025-2026 की जानकारी ही शेयर कर सकता है. इसके पीछे का कारण बताते हुए संगठन ने कहा कि निष्क्रिय लेखा प्रकोष्ठ (IAC) की स्थापना 2025-26 के दौरान की गई थी और इसके द्वारा पिछले वर्षों की जानकारी नहीं रखी जाती है। 

RTI आवेदन में आधार से जुड़े निष्क्रिय खातों का विवरण और इनमें जमा राशि के अलावा ऑटो-सेटलमेंट की जानकारी भी मांगी गई थी. लेकिन ईपीएफओ ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ई) का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया है. वहीं हाई वैल्यू (5 लाख रुपये से अधिक राशि) वाले निष्क्रिय खातों का भी कोई डेटा मुहैया नहीं कराया गया है। 

ओडिशा में समुद्र का बढ़ता कहर: गंजाम का तट कटाव की चपेट में, 17 गांवों पर मंडराया संकट

भुवनेश्वर
ओडिशा के गंजाम जिले में समुद्री कटाव ने विकराल रूप धारण कर लिया है। समुद्र के लगातार आगे बढ़ने से गंजाम ब्लॉक के पोड़मपेटा गांव समेत दो ग्राम पंचायतों के 17 गांवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। शुक्रवार को एक पक्का मकान समुद्र में समा जाने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक समुद्र गांव से करीब एक किलोमीटर दूर था, लेकिन लगातार कटाव के कारण अब वह गांव की सीमा तक पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि पोड़मपेटा का बड़ा हिस्सा समुद्र में विलीन हो चुका है। कभी करीब 500 घरों वाला यह गांव अब कुछ गिने-चुने मकानों तक सिमट गया है।

रोज निगल रहा जमीन
स्थानीय लोगों का कहना है कि समुद्र प्रतिदिन कुछ न कुछ जमीन अपने आगोश में ले रहा है। कटाव वाले क्षेत्र से अधिकांश परिवार पलायन कर चुके हैं, लेकिन शेष भूमि भी तेजी से खत्म होती जा रही है। इससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है।

17 गांवों पर संकट
स्थानीय सर्वेक्षण के मुताबिक पालिबंधा ग्राम पंचायत के नौ और रामगड़ा ग्राम पंचायत के आठ गांव समुद्री कटाव की जद में हैं। इन गांवों के हजारों लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से तट सुरक्षा दीवार, बोल्डर पैकिंग और अन्य स्थायी उपाय करने की मांग की है।

आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। प्रभावित गांवों के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन शुरू करेंगे और आगामी चुनावों का बहिष्कार भी कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
छत्रपुर विधायक कृष्ण चंद्र नायक ने मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रभावित गांवों को बचाने के लिए तत्काल विशेष पैकेज, तकनीकी सहायता और स्थायी तटीय सुरक्षा परियोजनाएं शुरू करने का आग्रह किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में कई गांवों का नामोनिशान मिट सकता है। समुद्र का बढ़ता कहर अब गंजाम तट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

सरकार ने फिर Telegram को भेजा नोटिस, पायरेसी पर मांगा जवाब; 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

 नई दिल्ली

भारत सरकार ने एक बार फिर से टेलीग्राम को नोटिस भेजा है, जिसमें सरकार ने बड़े लेवल होने वाली पायरेसी को लेकर जवाब में मांगा है. इस प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से फिल्म, वेब सीरीज की पायरेसी हो रही है. यह जानकारी एएनआई ने दी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि वह पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी (OTT) कंटेंट के प्रसार को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए. सरकार ने टेलीग्राम से 15 दिनों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। 

सरकार का कहना है कि यह कदम भारत की क्रिएटर इकोनॉमी, फिल्म उद्योग, ब्रॉडकास्टर्स, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, फिल्म प्रोड्यूसर्स डिस्ट्रिब्यूटर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं। 

यूजरनेम फीचर क्या है?
यूज़रनेम फीचर का इस्तेमाल करके यूज़र फोन नंबर शेयर किए बिना एक यूनीक यूज़रनेम के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं. दरअसल, कुछ दिन पहले व्हाट्सएप ने भारत में यूज़रनेम फीचर को रोलआउट करना शुरू किया, जिसके कुछ घंटों के बाद ही सरकार ने व्हाट्सएप को नोटिस भेज दिया. सरकार ने आशंका जताई है कि इस फीचर के जरिए ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट स्कैम और इंपर्सोनेशन के मामलों में तेजी आ सकती है। 

व्हाट्सऐप को तब तक के लिए यह फीचर रोकने का निर्देश भी दिया गया था, जब तक सरकार के साथ सलाह-मशविरा पूरी तरह संतोषजनक ढंग से न हो जाए. व्हाट्सएप को रोकने के बाद सरकार ने इसी मामले की वजह से टेलीग्राम और सिंग्नल ऐप को भी नोटिस भेज दिया है. इन दोनों ऐप्स में भी यूज़रनेम फीचर का इस्तेमाल काफी पहले से ही किया जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय ने दोनों कंपनियों को जवाब देने के लिए महज तीन दिन का समय दिया है। 

सरकारी सोर्सेज़ के मुताबिक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम-सिग्नल के मामले एक जैसे तो हैं, लेकिन बिल्कुल एक जैसे नहीं है. टेलीग्राम में यह फीचर पहले से लागू है, जबकि व्हाट्सऐप ने अभी सिर्फ इसका एलान किया है. दोनों के यूजर बेस में भी बड़ा फर्क है, भारत व्हाट्सऐप का सबसे बड़ा बाजार है और यहां इसके पांच सौ मिलियन से ज्यादा यूजर्स हैं, जो टेलीग्राम की पहुंच से कहीं ज्यादा है. व्हाट्सऐप ने अपने बयान में कहा था कि इस फीचर में स्कैम और इंपर्सोनेशन रोकने के पहले से ही कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं. इसके बाद व्हाट्सएप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक विस्तृत FAQ भी जारी किया था। 

टेलीग्राम पर सरकार की नज़र
बीते कुछ महीनों मसे टेलीग्राम पर सरकार की कड़ी नज़रें बनी हुई है. नीट परीक्षा के लीक पेपर और फर्जी कंटेंट फैलाने के आरोप में सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर एक हफ्ते का बैन भी लगाया था. हालांकि, नीट परीक्षा खत्म होने के बाद टेलीग्राम को भारत में फिर से चालू कर दिया गया था। 

इस बीच Zoho समर्थित देसी मैसेजिंग ऐप अराट्टई (Arattai) ने भी नियामकीय बदलावों का पालन करते हुए अपने यूजरनेम-बेस्ड अकाउंट फीचर को बंद करने का फैसला लिया है, जिससे जानकारी कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेंबू ने खुद सोशल मीडिया पर दी। 

डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम लगातार बढ़े
बुधवार को केंद्र सरकार ने WhatsApp के ‘यूज़रनेम’ फ़ीचर को लेकर Meta को एक नोटिस भेजा है. सरकार को चिंता है कि इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और किसी और का रूप धरकर (इम्पर्सोनेशन) किए जाने वाले हमलों में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है. सरकार ने WhatsApp को यह भी निर्देश दिया था कि जब तक इस मुद्दे पर सरकार की संतुष्टि के अनुसार बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इस फ़ीचर को रोक दिया जाए. सूत्रों के अनुसार, सरकार ने अब दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की भी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। 

व्हॉट्सएप से पूछा गया कार्रवाई क्यों ना की जाए
PTI के सूत्रों अनुसार IT मंत्रालय ने Telegram और Signal को भी पत्र लिखा है (जिनमें पहले से ही यूज़रनेम फ़ीचर मौजूद है) और पूछा है कि वे धोखाधड़ी और इम्पर्सोनेशन से जुड़ी चिंताओं को कैसे दूर कर रहे हैं. WhatsApp को भेजे नोटिस में सरकार ने चिंता जताई थी कि प्रस्तावित यूज़रनेम फ़ीचर से ऑनलाइन धोखाधड़ी, फ़िशिंग, ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और इम्पर्सोनेशन हमलों के मामलों में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि इससे गलत इरादे वाले लोग पीड़ितों से संपर्क कर सकते हैं और उन्हें मैसेज भेज सकते हैं. साथ ही Meta से यह बताने को कहा गया था कि WhatsApp के नए फ़ीचर, जिससे साइबर अपराध बढ़ सकते हैं, के लिए IT एक्ट और नियमों के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। 

व्हॉट्सएप ने जारी किया था बयान
केंद्र ने Meta को यह भी याद दिलाया कि एक अहम सोशल मीडिया मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) होने के नाते, WhatsApp IT एक्ट और नियमों के तहत ‘ड्यू डिलिजेंस’ (उचित सावधानी) की शर्तों का पालन करने के लिए बाध्य है. बुधवार को एक बयान में WhatsApp ने इस फीचर का बचाव करते हुए कहा कि इसमें स्कैम और इम्पर्सोनेशन को रोकने और यूज़र्स की सुरक्षा के लिए पहले से ही सुरक्षा उपाय मौजूद हैं. भारत WhatsApp का सबसे बड़ा बाज़ार है और 50 करोड़ से ज़्यादा यूज़र्स के साथ, Telegram की तुलना में यहां इसका यूज़र बेस काफ़ी बड़ा है। 

सरकार ने लगाया था प्रतिबंधन
पिछले महीने, धोखाधड़ी, इम्पर्सोनेशन और संवेदनशील कंटेंट के प्रसार से जुड़ी चिंताओं के कारण भारत में Telegram नियामक जांच के दायरे में आ गया था. भारत सरकार ने Telegram और उससे जुड़ी वेब सेवाओं पर 22 जून तक प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने कहा था कि प्लेटफ़ॉर्म लीक हुए और फ़र्ज़ी नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) परीक्षा के पेपर, भ्रामक कंटेंट और देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अन्य धोखाधड़ी वाली गतिविधियों के प्रसार को रोकने में नाकाम रहा. हालांकि, एक हफ़्ते के सरकारी प्रतिबंध की अवधि खत्म होने के बाद यह इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म भारत में फिर से चालू हो गया। 

 

सिया-केतन केस पर सियासत तेज, BJP सांसद ने उठाई पुरुष आयोग बनाने की पुरानी मांग

नई दिल्ली

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड ने समाज में एक नई बहस छेड़ दी है। मंगेतर सिया गोयल की बेवफाई और हत्या की खौफनाक साजिश सामने आने के बाद अब पुरुषों के अधिकारों और उनकी कानूनी सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। इसी कड़ी में भाजपा राज्यसभा सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल ने इस घटना को बेहद विचलित करने वाला बताते हुए देश में ‘राष्ट्रीय पुरुष आयोग’ बनाने की पुरजोर मांग उठाई है। इस मामले में 26 साल के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन को गिरफ्तार किया गया है।

सांसद ने शेयर किया अपना पुराना प्राइवेट बिल
सांसद मित्तल ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया। यह वीडियो दिसंबर 2025 की राज्यसभा कार्यवाही का है, जब उन्होंने पुरुष आयोग बनाने के लिए संसद में एक ‘प्राइवेट मेंबर बिल’ पेश किया था।

मित्तल ने एक्स पर लिखा, “पुणे का केतन अग्रवाल मामला बहुत परेशान करने वाला है। केतन और उनके परिवार को निष्पक्ष, पूरी और बिना किसी भेदभाव के जांच मिलनी चाहिए, और सबसे बढ़कर, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। मैंने संसद में ‘नेशनल कमीशन फॉर मेन बिल’ पेश किया था। हर पीड़ित को न्याय, मदद और कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। केतन का मामला यह याद दिलाता है कि पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं। उन्हें संस्थागत मदद, कानूनी सुरक्षा और एक ऐसा मंच मिलना चाहिए जहां उनकी बात सुनी जा सके। लिंग के आधार पर भेदभाव किए बिना, न्याय सभी के लिए समान होना चाहिए।”

बता दें कि अशोक कुमार मित्तल पंजाब से सांसद चुने गए थे। जब उन्होंने यह बिल पेश किया था, तब वे आम आदमी पार्टी (AAP) का हिस्सा थे। हालांकि, इसी साल अप्रैल में राघव चड्ढा के नेतृत्व वाले 7 AAP सांसदों के गुट के हिस्से के रूप में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का दावा किया था।

क्या है प्राइवेट मेंबर बिल का इतिहास?
संसद में किसी भी प्राइवेट मेंबर बिल के पास होने की संभावना बहुत कम होती है और यह मुश्किल से ही कभी वोटिंग के चरण तक पहुंच पाता है। इतिहास पर नजर डालें तो आजादी के बाद से अब तक सिर्फ 14 प्राइवेट बिल ही कानून का रूप ले पाए हैं। वहीं, साल 1970 के बाद से कोई भी ऐसा बिल संसद के दोनों सदनों से पास नहीं हो सका है।

केतन अग्रवाल हत्याकांड में अब तक क्या-क्या हुआ?

पुणे के इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में कोर्ट और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी अहम बातें इस प्रकार हैं।

26 वर्षीय पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के आरोप में उनकी 20 वर्षीय मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी (22) को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

3 जुलाई को पुणे की एक अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को 16 जुलाई तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया है।

लोनावला ग्रामीण पुलिस ने आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। पुलिस दोनों आरोपियों का पॉलीग्राफ (लाई-डिटेक्टर) टेस्ट कराना चाहती थी, लेकिन दोनों आरोपियों के आधिकारिक रूप से इनकार करने के बाद कोर्ट ने इस अर्जी को भी नामंजूर कर दिया है।

20 जुलाई से शुरू होगा संसद का मानसून सत्र, 13 अगस्त तक चलेंगी कार्यवाही; केंद्रीय मंत्री ने दी जानकारी

नई दिल्ली
 संसद का आगामी मानसून सत्र 2026 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। भारत सरकार की सिफारिश पर माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने दोनों सदनों की बैठक बुलाने की अपनी आधिकारिक स्वीकृति दे दी है।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस बात की पुष्टि की है कि सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति जी ने मानसून सत्र के आयोजन को मंजूरी दी है।

संसद का यह आगामी सत्र 20 जुलाई 2026 को शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस अवधि के दौरान दोनों सदनों में राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न अहम मुद्दों पर सार्थक बहस, चर्चा की जाएगी और महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

इस मानसून सत्र की शुरुआत बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा की जीत के बाद हो रही है। इस सत्र में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई बगावत का असर भी देखने को मिलेगा। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों की अलग समूह के तौर पर मान्यता की मांग पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के फैसले का इंतजार है।

राज्यसभा में नए चुने गए और दोबारा चुने गए सदस्यों के शपथ लेने के बाद संख्या बल सत्ताधारी गठबंधन राजग के पक्ष में और मजबूत हो गया।पिछला सत्र सरकार के लिए निराशाजनक रहा था क्योंकि लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था, जिसका मकसद 2029 में विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना था।

सरकार अब विधेयक का नया मसौदा तैयार कर रही है, जिसके तहत सभी राज्यों में लोकसभा सीटों को एकसमान रूप से 50 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। दरअसल, आबादी के आधार पर सीटों में बढ़ोतरी दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक दलों के लिए चिंता का बड़ा विषय रहा है।

‘ऐसी शादी, जो होने वाली नहीं है…’ सिया गोयल के Snapchat मैसेज से केतन हत्याकांड में नया ट्विस्ट

 पुणे

केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच कर रही पुलिस के हाथ एक बेहद चौंकाने वाला सुराग लगा है, जिसने इस पूरी मर्डर मिस्ट्री में एक नया ट्विस्ट ला दिया है. पुलिस की जांच टीम अब आरोपी सिया गोयल के एक कथित स्नैपचैट चैट को खंगाल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि हत्या की इस पूरी वारदात को एक गहरी साजिश के तहत अंजाम दिया गया था। 

ताजा जानकारी के मुताबिक, यह कथित बातचीत 25 मई की है. इस चैट में आरोपी सिया गोयल कथित तौर पर अपनी दोस्त से फ्लाइट टिकट बुक करने के बहाने उसका आधार कार्ड मांगती है। सिया ने हिंदी में लिखा, “आधार कार्ड फ्रंट और बैक भेज दे फॉर वेडिंग टिकिट्स, जो होने नहीं वाली पर फिर भी भेज दे। 

जांच अधिकारी अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या यह पूरी बातचीत और हवाई टिकटों की बुकिंग केवल एक दिखावा थी। ऐसा संदेह है कि इस कथित चैट और टिकट अरेंजमेंट्स के जरिए सिया यह दिखाना चाहती थी कि केतन अग्रवाल के साथ उसकी शादी की तैयारियां बिल्कुल सामान्य रूप से चल रही हैं, ताकि केतन की हत्या के बाद किसी को उस पर शक न हो. यह पूरी कवायद मर्डर प्लॉट को छिपाने और जांच भटकाने की एक बड़ी कोशिश हो सकती है। 

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि किसी भी डिजिटल चैट की कानूनी वैधता उसकी तकनीकी और फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही तय होगी. इसलिए फिलहाल इस चैट को अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता। 

केतन के परिवार का आरोप
केतन के पिता, विशाल देवीचंद अग्रवाल की तरफ़ से दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि चेतन और सिया, दोनों ने मिलकर उनके बेटे को एक चट्टान से नीचे धकेल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई. केतन 18 जून की सुबह घर से निकला, पुणे-मुंबई हाईवे पर किवाले ब्रिज से सिया को साथ लिया और फिर लोहागढ़ फोर्ट की ओर गया। 

उसी दिन दोपहर से पहले सिया गोयल ने अपने चेतन की मां को फ़ोन करके बताया कि वह गलती से लोहागढ़ किले की एक खाई में गिर गया है. स्थानीय लोगों और पुलिस ने उसे खाई में पाया और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. FIR के अनुसार, 21 जून को केतन अग्रवाल के पिता और रिश्तेदार उस जगह पर गए जहां वह गिरा था और उन्हें लगा कि उस जगह पर गलती से फिसलने की संभावना बहुत कम थी. परिवार ने आरोप लगाया कि सिया गोयल का फ़ोन लगातार व्यस्त रहता था और वह अक्सर अपने प्रेमी चेतन का ज़िक्र करती थी, जिससे उन्हें शक हुआ कि दोनों के बीच रोमांटिक रिश्ता था। 

🏠 Home 🔥 Trending 🎥 Video 📰 E-Paper Menu